UGC NET Sociology Syllabus

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए UGC NET Sociology आज भी सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित यह परीक्षा न केवल विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि मेधावी उम्मीदवारों को Junior Research Fellowship (JRF) के रूप में शोध अनुदान प्राप्त करने का अवसर भी प्रदान करती है।

UGC-NET का आधार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा निर्धारित शैक्षणिक मानक और ढांचा (Framework) है, जिसके अंतर्गत समाजशास्त्र विषय में उम्मीदवारों की सैद्धांतिक गहराई, वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक दृष्टि का कठोर परीक्षण किया जाता है। समाजशास्त्र में UGC-NET इसलिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह उम्मीदवारों की शोध क्षमता, शिक्षण दक्षता, तथा समाज के जटिल संरचनात्मक एवं परिवर्तनशील आयामों की समझ को परखने के लिए बनाया गया है।

यह परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए निर्णायक साबित होती है जो उच्च शिक्षा, रिसर्च, सामाजिक विश्लेषण और अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।

पेपर 1 सिलेबस (सामान्य पत्र)

पेपर 1 सामान्य शिक्षण एवं शोध योग्यता का मूल्यांकन करता है। इसमें प्रमुखतः निम्नलिखित विषय शामिल हैं:

शिक्षण क्षमता (Teaching Aptitude): शिक्षण की अवधारणा, उद्देश्य, शिक्षण के स्तर और विधियाँ, शिक्षार्थी की विशेषताएँ, शिक्षण संबंधी कारक आदि।

शोध क्षमता (Research Aptitude): शोध की परिभाषा, प्रकार, गुण, शोध की विधियाँ (प्रयोगात्मक, ऐतिहासिक, मात्रात्मक-गुणात्मक आदि), शोध के चरण, शोध लेखन (थीसिस/लेख प्रारूप एवं संदर्भ प्रणाली), शोध नैतिकता आदि।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT): इंटरनेट, इंट्रानेट, ईमेल, ऑडियो-वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, शिक्षा में डिजिटल पहलें, ICT का शासन में प्रयोग आदि।

पर्यावरण और विकास (Environment & Development): सतत विकास लक्ष्य, मानवीय गतिविधियों का पर्यावरण पर प्रभाव, प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि, जैविक कचरा आदि), प्राकृतिक संसाधन (सौर, पवन, जल, भू-उष्ण, जैविक, परमाणु, वन) तथा पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection Act, जलवायु परिवर्तन की अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ)।

इसी प्रकार पर्यावरण यूनिट में विकास लक्ष्यों, प्रदूषण और आपदाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। उपर्युक्त विषयों के माध्यम से पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार होती है।

पेपर 2: समाजशास्त्र सिलेबस, इसमें प्रमुखतः निम्नलिखित विषय शामिल हैं:

शास्त्रीय सोच के विचारक (Classical Sociological Thinkers): एमाइल डुर्काइम (Emile Durkheim), कार्ल मार्क्स (Karl Marx), मैक्स वेबर (Max Weber) जैसे प्रमुख शास्त्रीय समाजशास्त्रियों के सिद्धांत।

भारतीय समाजशास्त्र विचारक: महात्मा गांधी, भीमराव अंबेडकर, राधाकमल मुखर्जी, जी.एस. घुर्ये, एम.एन. श्रीनिवास, इरावती करवे आदि भारतीय समाजशास्त्र के प्रमुख विचारक।

शोध कार्यप्रणाली और विधियाँ (Research Methodologies and Methods): सामाजिक वास्तविकता की अवधारणा (विज्ञान दर्शन, वैज्ञानिक विधि, वस्तुनिष्ठता और नैतिकता), अनुसंधान डिज़ाइन तैयार करना (शोध-पत्रों/आंकड़ों का अध्ययन, तथ्य/सिद्धांत/अनुमान), मात्रात्मक एवं गुणात्मक विधियाँ (नृवंशविज्ञान, सर्वेक्षण, ऐतिहासिक, तुलनात्मक विधि) और तकनीकें (सैम्पलिंग, प्रश्नावली, सांख्यिकी, साक्षात्कार, केस-स्टडी)।

भारतीय समाज: सामाजिक विभाजन, संस्थाएँ, परिवार एवं धर्म (Indian Society – Stratification, Institutions, Family, Religion): प्रमुख सामाजिक संस्थाएँ जैसे विवाह, परिवार, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था, धर्म, शिक्षा, कानून आदि; सामाजिक विभाजन (जाति, वर्ग, लिंग, नस्ल-जातीयता आदि)। परिवार और धर्म सहित सामाजिक संरचनाएँ इस इकाई में शामिल हैं।

ग्रामीण एवं शहरी परिवर्तन (Rural and Urban Transformations): ग्रामीण/कृषक समाज के आयाम जैसे जाति-जनजाति, कृषि संरचना, भूमि-संपत्ति सम्बन्ध, कृषक आंदोलन; शहरीकरण, शहरों का विस्तार, मध्यमवर्ग एवं आवासीय स्वरूप, शहरी आंदोलन एवं हिंसा।

राज्य, राजनीति और विकास (State, Politics and Development): भारत में राजनीतिक प्रक्रियाएँ (राष्ट्र-राज्य, राज्य प्रशासन, सुशासन, जननीति, राजनीतिक संस्कृति, आधार लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, अंतर्राष्ट्रीय विकास संगठन); सामाजिक आंदोलन एवं विरोध (जाति/लिंग/क्षेत्र आधारित आंदोलन, नागरिक समाज, एनजीओ, आरक्षण राजनीति आदि)।

अर्थव्यवस्था और समाज (Economy and Society): आर्थिक अवधारणाएँ (पूँजी, श्रम, बाज़ार, आदान-प्रदान, उत्पादन के रूप, संपत्ति सम्बन्ध); विकास सिद्धांत (कल्याणकारी बनाम नव-उदारवादी मॉडल, गरीबी व बहिष्कार, आर्थिक विकास के मॉडल)।

पर्यावरण और समाज (Environment and Society): सामाजिक-परिसंस्कृतिक पारिस्थितिकी, कृषि एवं जैवविविधता में तकनीकी परिवर्तन, आदिवासी ज्ञान, लिंग एवं पर्यावरण, वन नीतियाँ और आदिवासी बहिष्कार, पारिस्थितिकी गिरावट, विस्थापन, जल और सामाजिक बहिष्कार, आपदाएँ, पर्यावरणीय प्रदूषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन व अंतर्राष्ट्रीय नीतियाँ, पर्यावरण आंदोलन इत्यादि।

उपरोक्त इकाइयों के प्रमुख शीर्षक एवं उप-विषय पाठ्यक्रम में निर्दिष्ट हैं, जिनका सटीक विवरण NTA के आधिकारिक पाठ्यक्रम दस्तावेज़ में उपलब्ध है।

विषयगत अंक वितरण

पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों पर आधारित विश्लेषण से ज्ञात होता है कि कुछ इकाइयों को अधिक अंकों का भार मिला है। उदाहरण के लिए, सामाजशास्त्रीय सिद्धांत की इकाई से लगभग 12-14 प्रश्न पूछे जाते रहे हैं, जबकि शोध कार्यप्रणाली एवं मूल अवधारणाएँ से करीब 10-12 प्रश्न आते रहे हैं। इसी प्रकार राज्य-राजनीति और पर्यावरण इकाइयों में भी लगभग 10-12 प्रश्न पूछे जाते रहे हैं। दूसरी ओर, परिवार एवं कुनबे तथा विज्ञान व प्रौद्योगिकी की इकाइयों में अपेक्षाकृत कम प्रश्न (6-8) देखने को मिले हैं। इन आंकड़ों के आधार पर तैयारी करते समय अपेक्षाकृत उच्च अंकवाली इकाइयों (जैसे सामाजिक सिद्धांत, शोध विधियाँ, राजनीतिक विकास, पर्यावरण) पर अधिक ध्यान देना उपयोगी रहेगा।

तैयारी रणनीति

विषयवस्तु विभाजन: पूरे सिलेबस को इकाइयों में बांटकर पढ़ें। शुरुआत सामाजशास्त्रीय सिद्धांत, शोध कार्यप्रणाली और मूल अवधारणाएँ जैसी मूल इकाइयों से करें, फिर धीरे-धीरे शेष इकाइयाँ कवर करें।

नोट्स एवं रिवीजन: अध्ययन के दौरान संक्षिप्त नोट्स बनाएं और समय-समय पर रिवीजन करें। महत्वपूर्ण सिद्धांत, परिभाषाएँ, और आँकड़ों को बार-बार दोहराएँ।

प्रश्न समाधान एवं अभ्यास: पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें और नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें। इससे परीक्षा पैटर्न और समय प्रबंधन में कुशलता बढ़ेगी।

कमजोर विषयों पर अधिक ध्यान: अभ्यास के आधार पर यदि किसी विषय में कमजोरी दिखे, तो उसे प्राथमिकता से समझें। साथी अभ्यर्थियों के साथ ग्रुप स्टडी या ट्यूटर की मदद भी लाभदायक हो सकती है।

समय प्रबंधन: परीक्षा के समय में दोनों पेपरों पर समय का संतुलित विभाजन जरूरी है। पेपर 1 में आसान सेक्शन को शीघ्र हल करें, पेपर 2 में गहरे विश्लेषणात्मक प्रश्नों के लिए समय रखें।

पूरा सिलेबस PDF डाउनलोड करें

पेपर 2: समाजशास्त्र सिलेबस Hindi [डाउनलोड]
paper 2: Sociology syllabus English [download]

University Grants Commission [https://www.ugc.gov.in/]

प्रश्न 1: UGC NET समाजशास्त्र परीक्षा क्या है?

उत्तर: UGC NET (University Grants Commission – National Eligibility Test) एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जिसे NTA द्वारा आयोजित किया जाता है। यह परीक्षा सहायक प्राध्यापक और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए पात्रता निर्धारित करती है। समाजशास्त्र विषय में क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवार भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर नियुक्ति के योग्य हो जाते हैं और JRF हेतु योग्यता मिलने पर शोध के लिए वित्तीय अनुदान भी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 2: UGC NET समाजशास्त्र में पेपर 1 और पेपर 2 कैसा होता है?

उत्तर: UGC NET दो पेपरों का पेपर है। पेपर 1 सामान्य शिक्षण एवं शोध एप्टीट्यूड पर आधारित है और सभी विषयों में समान होता है (इसमें तार्किकता, शिक्षण क्षमता, शोध क्षमता, ICT, पर्यावरण आदि आते हैं)। पेपर 2 उम्मीदवार द्वारा चुने गए विषय (यहां समाजशास्त्र) का विशिष्ट पेपर है, जिसमें समाजशास्त्र के सिद्धांत, शोध पद्धतियाँ, सामाजिक संस्थाएँ, परिवर्तन, पर्यावरण आदि विषयों के प्रश्न होते हैं।

प्रश्न 3: UGC NET समाजशास्त्र परीक्षा के लिए पात्रता क्या है?

उत्तर: पात्रता हेतु उम्मीदवार को संबंधित विषय (समाजशास्त्र) में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री चाहिए, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 55% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 50%) होने चाहिए। इसके अतिरिक्त उम्मीदवार की आयु सीमा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नहीं है, लेकिन JRF के लिए सामान्य वर्ग की आयु 30 वर्ष तक हो सकती है (आरक्षित वर्गों को आयु में राहत प्राप्त है)।

प्रश्न 4: UGC NET समाजशास्त्र की तैयारी कैसे करें?

उत्तर: संपूर्ण सिलेबस समझने के लिए आधिकारिक पाठ्यक्रम और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अवलोकन करें। प्रमुख कंसेप्ट और विचारकों पर गहरी पकड़ बनाएं। नियमित नोट बनाएं एवं पुनरावृति करें। प्रतिदिन मॉक टेस्ट और पुराने पेपर हल करके परीक्षा पैटर्न से परिचित हों। कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दें। समय प्रबंधन के लिए अभ्यास सेट का उपयोग करें और पढ़ाई के लिए एक सुनियोजित योजना बनाएं।

प्रश्न 5: UGC NET समाजशास्त्र परीक्षा वर्ष में कितनी बार आयोजित होती है?

उत्तर: सामान्यतः UGC NET परीक्षा वर्ष में दो बार (जून और दिसंबर में) आयोजित की जाती है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) UGC NET का संचालन UGC की ओर से ऑनलाइन माध्यम से दो सत्रों में करती है।

प्रश्न 6: पेपर 1 के मुख्य विषय क्या हैं?

उत्तर: पेपर 1 (सामान्य पत्र) में मुख्य रूप से शिक्षण क्षमता, शोध क्षमता, तर्कशक्ति, संचार क्षमता, संख्यात्मक एवं गणितीय योग्यता, सूचना-प्रौद्योगिकी (ICT), पर्यावरण एवं विकास जैसे विषय शामिल हैं।

प्रश्न 7: UGC NET समाजशास्त्र में सफल होने पर क्या लाभ मिलता है?

उत्तर: UGC NET समाजशास्त्र क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार को भारतीय विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए पात्र माना जाता है। साथ ही यदि उम्मीदवार ने JRF हेतु भी क्वालीफाई किया है तो उसे शोध कार्य के लिए यूजीसी द्वारा मासिक छात्रवृत्ति (फेलोशिप) मिलती है, जिससे पीएचडी करने में सहायता मिलती है।


[Sociological Thinkers – Click Here]
[UGC NET/JRF Sociology MCQs – Click Here]
[Current Topics IAS/PCS Click Here]

Leave a Comment