सामाजिक क्रान्ति के सिद्धांत की आलोचना और Marxist दृष्टिकोण – Karl Marx का विश्लेषण

सामाजिक क्रान्ति

सामाजिक क्रान्ति के सिद्धांत की आलोचना और समालोचना (Critique and Evaluation of the Theory of Social Revolution) 1. प्रारम्भिक अस्थिरताएँ (Initial Ambiguities) Karl Marx और Friedrich Engels ने अपने प्रारंभिक कार्य The German Ideology (1846) में समाज की उत्पादन पद्धतियों (Modes of Production) और सामाजिक संरचना (Social Structure) का अध्ययन किया। उस समय क्रान्ति की … Read more

क्रान्ति की प्रक्रिया, सर्वहारा का अधिनायकवाद और साम्यवाद – Marx का दृष्टिकोण

The Process of Revolution, Dictatorship of the Proletariat, and Communism – Marx’s Perspective

क्रान्ति की प्रक्रिया, सर्वहारा का अधिनायकवाद और साम्यवाद – Marx का दृष्टिकोण 1. परिचय Karl Marx केवल एक दार्शनिक नहीं थे, बल्कि एक सक्रिय क्रान्तिकारी विचारक और समाजशास्त्र के गहन विश्लेषक भी थे। उनका मानना था कि समाज का विकास केवल राजनीतिक सत्ता में बदलाव या व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं होता, बल्कि इसका आधार आर्थिक … Read more

कार्ल मार्क्स क्रान्ति सिद्धांत: क्रान्ति की विशेषताएँ, अधिसंरचना और सर्वहारा का अधिनायकवाद

Characteristics of Revolution, Superstructure, and the Dictatorship of the Proletariat

क्रान्ति की विशेषताएँ, अधिसंरचना और सर्वहारा का अधिनायकवाद (Characteristics of Revolution, Superstructure, and the Dictatorship of the Proletariat) 1. परिचय Karl Marx का क्रान्ति-सिद्धांत (Theory of Revolution) पूँजीवादी समाज के भीतर मौजूद आर्थिक विरोधाभासों (economic contradictions) पर आधारित है। Marx का मानना था कि समाज का हर ऐतिहासिक चरण एक निश्चित आर्थिक आधार (economic base) … Read more