समाजशास्त्र: अगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवादी समाज विज्ञान MCQs

1. ऑगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को एक प्रत्यक्षवादी समाज विज्ञान के रूप में क्यों स्थापित किया?

A. क्योंकि उनका मानना था कि समाज केवल धार्मिक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।
B. क्योंकि वे सामाजिक प्रघटनाओं को प्राकृतिक नियमों के अनुरूप समझना चाहते थे।
C. क्योंकि वे समाज को दार्शनिक व्याख्या के आधार पर समझाना चाहते थे।
D. क्योंकि वे आध्यात्मिक तत्वों की खोज में थे।

उत्तर: B. क्योंकि वे सामाजिक प्रघटनाओं को प्राकृतिक नियमों के अनुरूप समझना चाहते थे।

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte) आधुनिक समाजशास्त्र के संस्थापक माने जाते हैं। उन्होंने समाज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया और इसे प्रत्यक्षवादी (Positive / Scientific) समाजशास्त्र के रूप में स्थापित किया।

मुख्य तर्क:

  1. समाज में प्राकृतिक नियमों का अस्तित्व
    • कॉम्ट का मानना था कि समाज भी प्रकृति की तरह नियत, सार्वभौमिक और अपरिवर्तनीय नियमों के अंतर्गत कार्य करता है।
    • जैसे प्रकृति में:
      • गुरुत्वाकर्षण (Gravity)
      • गति के नियम (Laws of Motion)
      • जैविक नियम
    • उसी तरह समाज में भी सामाजिक नियम (Social Laws) सक्रिय हैं।
  2. वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग
    • समाज का अध्ययन भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान जैसी कठोर वैज्ञानिक विधियों से होना चाहिए।
    • इसके लिए अवलोकन (Observation), वर्गीकरण (Classification) और तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis) का प्रयोग आवश्यक है।
  3. धार्मिक और दार्शनिक व्याख्याओं का अस्वीकार
    • कॉम्ट ने धार्मिक, metaphysical और speculative व्याख्याओं को समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए अपर्याप्त माना।
  4. सामाजिक नियतिवाद (Social Determinism)
    • समाजशास्त्र का अध्ययन यह मानकर किया जाता है कि सामाजिक जीवन नियत (Determined) है, यानी नियम और कारणों की प्रणाली द्वारा संचालित है।

कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र = सामाजिक घटनाओं का विज्ञान, जिसे अनुभवजन्य, नियम-आधारित और वैज्ञानिक पद्धति से समझा जा सकता है।

2. प्रत्यक्षवाद (Positivism) का मूल अर्थ क्या है?

A. तर्कवाद
B. विज्ञानवाद
C. ईश्वरवाद
D. भौतिकवाद

उत्तर: B. विज्ञानवाद

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte) ने प्रत्यक्षवाद (Positivism) को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुभवजन्य ज्ञान का आधार माना। इसका मूल तात्पर्य है कि सत्य वही है जिसे वैज्ञानिक पद्धति से जाँचा और प्रमाणित किया जा सके।

मुख्य बिंदु:

  1. ज्ञान का स्रोत:
    • प्रत्यक्ष अवलोकन (Observation) और प्रयोग (Experiment) ही ज्ञान के मुख्य स्रोत हैं।
  2. सत्य का मानक:
    • केवल वही ज्ञान स्वीकार्य है जिसे देखा, मापा, जाँचा और सिद्ध किया जा सके।
    • धार्मिक, metaphysical या speculative व्याख्याएँ अवैज्ञानिक हैं।
  3. समाज का वैज्ञानिक अध्ययन:
    • समाज का अध्ययन भी वैज्ञानिक विधियों (Scientific Methods) के अनुरूप होना चाहिए।
    • समाज और मानव व्यवहार को भौतिक विज्ञान की कठोर पद्धतियों की तरह समझा जा सकता है।
  4. तीन अवस्थाओं का नियम (Law of Three Stages):
    • थियोलाॅजिकल (Theological Stage): ईश्वरवादी व्याख्याएँ
    • मेटाफिजिकल (Metaphysical Stage): दार्शनिक अनुमान
    • पॉजिटिव (Positive/Scientific Stage): शुद्ध वैज्ञानिक ज्ञान
    • कॉम्ट के अनुसार, मानव समाज का सर्वोच्च ज्ञान Positive Stage में प्राप्त होता है।

प्रत्यक्षवाद = वैज्ञानिक ज्ञानवाद
समाज, प्रकृति और मानव व्यवहार का अध्ययन केवल वैज्ञानिक सिद्धांतों और प्रमाणिक तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।

3. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र की अध्ययन पद्धति में निम्न में से कौन-सी विधियाँ शामिल हैं?

A. अवलोकन, प्रायोगिक, तुलनात्मक, ऐतिहासिक
B. तात्विक, धार्मिक, तर्कशास्त्रीय, भावनात्मक
C. मनोवैज्ञानिक, प्रतीकात्मक, दार्शनिक, आध्यात्मिक
D. औपचारिक, अनौपचारिक, व्यावहारिक, पारंपरिक

उत्तर: A. अवलोकन, प्रायोगिक, तुलनात्मक, ऐतिहासिक

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट का लक्ष्य समाजशास्त्र को पूर्ण वैज्ञानिक बनाना था। इसलिए उन्होंने समाज के अध्ययन के लिए चार ऐसी विधियाँ प्रस्तावित कीं जो प्राकृतिक विज्ञानों में उपयोग की जाती हैं, और जो समाज को प्रत्यक्ष, नियमबद्ध और अनुभवजन्य रूप से समझने में सक्षम बनाती हैं।

1. अवलोकन (Observation)

कॉम्ट के अनुसार यह समाजशास्त्र की प्राथमिक और अनिवार्य पद्धति है।
वे कहते हैं:

“Observation is the basis of all social knowledge.”

अवलोकन समाज के वास्तविक, प्रत्यक्ष और अनुभवजन्य डेटा को समझने का प्रथम चरण है—
जैसे संस्थाएँ, भूमिकाएँ, मानदंड, जनसंख्या व्यवहार आदि।

2. प्रायोगिक पद्धति (Experiment / Indirect Experimentation)

कॉम्ट मानते थे कि मानव समाज पर प्रत्यक्ष प्रयोग कठिन है,
परंतु अप्रत्यक्ष प्रयोग (indirect or natural experimentation) किए जा सकते हैं।

उदाहरण:

  • सामाजिक परिवर्तनों के प्रभावों को परखना
  • नीतियों के परिणामों का अध्ययन
  • सामाजिक संकटों के दौरान व्यवहार में बदलाव

कॉम्ट ने इसे “experimentation by circumstances” कहा।

3. तुलनात्मक विधि (Comparative Method)

कॉम्ट के अनुसार तुलना समाजशास्त्र का “सबसे शक्तिशाली उपकरण” है।
इसके माध्यम से:

  • विभिन्न समाजों की तुलना
  • विभिन्न कालों की तुलना
  • संस्थागत संरचनाओं की तुलना

किए जाने से सामाजिक नियमों को समझा जा सकता है।

यह विधि आगे चलकर एमिल दुर्खीम, वेबर, रेडक्लिफ-ब्राउन आदि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी।

4. ऐतिहासिक पद्धति (Historical Method)

इस पद्धति में समाज को समय के प्रवाह में समझा जाता है।
कॉम्ट का “Law of Three Stages” इसी ऐतिहासिक दृष्टिकोण का परिणाम है।

ऐतिहासिक विधि से शोधकर्ता यह समझ पाता है—

  • समाज कैसे बदलता है
  • परिवर्तन के पीछे कौन-से नियम काम करते हैं
  • सामाजिक प्रगति किन पैटर्नों का अनुसरण करती है

कॉम्ट इसे समाजशास्त्र की “व्याख्यात्मक (interpretative)” शक्ति का आधार मानते थे।

4. प्रत्यक्षवाद के अनुसार समाज का विश्लेषण किस आधार पर किया जाना चाहिए?

A. धार्मिक दृष्टिकोण से
B. तात्विक सिद्धांतों के आधार पर
C. वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर
D. नैतिक मूल्यों के आधार पर

उत्तर: C. वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) का मूल सिद्धांत यह है कि—

“समाज का अध्ययन तभी वैज्ञानिकीकरण हो सकता है जब उसे वैज्ञानिक विधियों से समझा जाए, न कि धार्मिक, तात्विक या नैतिक मान्यताओं से।”

प्रत्यक्षवाद के अनुसार सामाजिक वास्तविकता (social reality) कोई कल्पनात्मक या आध्यात्मिक वस्तु नहीं है, बल्कि:

  • अवलोकनीय (observable)
  • अनुभवजन्य (empirical)
  • और नियमबद्ध (law-governed)

घटनाओं का समूह है, जिसे प्राकृतिक विज्ञानों की भाँति वैज्ञानिक पद्धति से समझा जा सकता है।

कॉम्ट का स्पष्ट तर्क था कि:

समाज का विश्लेषण निम्न वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए—

  1. अवलोकन (Observation)
    — सामाजिक व्यवहार, संस्थाएँ, प्रक्रियाएँ प्रत्यक्ष रूप से देखी जा सकती हैं।
  2. तुलना (Comparison)
    — विभिन्न समाजों, कालों और संस्कृतियों की तुलना से सामाजिक नियमों का पता चलता है।
  3. ऐतिहासिक अध्ययन (Historical Method)
    — सामाजिक प्रगति और परिवर्तन की दिशा समझने के लिए आवश्यक।
  4. सत्यापन (Verification)
    — वैज्ञानिक निष्कर्ष प्रमाणित होने चाहिए।

इसीलिए कॉम्ट ने समाज को “Social Physics” कहा — जो बताता है कि समाज का अध्ययन भी फिजिक्स की तरह नियमबद्ध और वैज्ञानिक है।

5. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद में ‘तथ्य’ और ‘सिद्धांत’ के संबंध को कैसे परिभाषित किया गया है?

A. सिद्धांत प्राथमिक है और तथ्य गौण।
B. तथ्य गौण है और सिद्धांत प्राथमिक।
C. तथ्य प्राथमिक है और सिद्धांत गौण।
D. दोनों का कोई संबंध नहीं है।

उत्तर: C. तथ्य प्राथमिक है और सिद्धांत गौण।

व्याख्या:

कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) का मूल सिद्धांत यह है कि सारा ज्ञान प्रत्यक्ष अवलोकन (Observation) से शुरू होता है।
उनके अनुसार:

  • तथ्य (Empirical Facts) → ज्ञान का आधार
  • सिद्धांत (Theory) → तथ्यों का निष्कर्ष / संयोजन (Generalization)

कॉम्ट का मानना था कि सिद्धांत तथ्यों को जन्म नहीं देते
बल्कि तथ्य स्वयं सिद्धांतों को जन्म देते हैं
यदि कोई सिद्धांत प्रत्यक्ष अवलोकित तथ्यों से प्रमाणित न हो, तो वह प्रत्यक्षवादी ज्ञान नहीं माना जाता।

इसलिए प्रत्यक्षवाद में—

  • तथ्य प्राथमिक (Primary) होते हैं।
  • सिद्धांत गौण (Secondary) होते हैं और केवल तथ्यों के बाद आते हैं।

कॉम्ट के शब्दों में:
“सभी वैध ज्ञान प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित होना चाहिए।”
(“All valid knowledge must rest upon observed facts.” — हिंदी अर्थ)

यही कारण है कि उनके समाजशास्त्र में अवलोकन → प्रयोग → तुलनात्मक पद्धति को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता है।

6. कॉम्ट के अनुसार प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A. सामाजिक व्यवस्था की आलोचना करना
B. समाज में ईश्वरीय हस्तक्षेप को सिद्ध करना
C. सामाजिक प्रगति के नियमों की खोज करना
D. दार्शनिक सिद्धांतों की व्याख्या करना

उत्तर: C. सामाजिक प्रगति के नियमों की खोज करना

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) का मुख्य उद्देश्य समाज के विकास और प्रगति (Social Progress) को वैज्ञानिक रूप से समझना था।
उनके अनुसार समाज भी प्रकृति की तरह निश्चित नियमों (Laws) के अनुसार विकसित होता है।

कॉम्ट ने विशेष रूप से दो क्षेत्रों पर जोर दिया:

1. Social Statics (सामाजिक स्थैतिकी)

— समाज की संरचना, व्यवस्था और स्थिरता के नियमों का अध्ययन।

2. Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता)

— समाज के विकास, परिवर्तन और प्रगति के नियमों की खोज।

कॉम्ट का मानना था कि:

“Sociology aims to discover the laws of social progress.”
(“समाजशास्त्र का उद्देश्य सामाजिक प्रगति के नियमों की खोज करना है।” — हिंदी अर्थ)

उन्होंने समझाने की कोशिश की कि:

  • मानव समाज किस तरह आदिम से आधुनिक अवस्था में पहुंचा,
  • यह परिवर्तन किन वैज्ञानिक नियमों के अनुसार हुआ,
  • और समाज का विकास तीन अवस्थाओं के सिद्धांत (Law of Three Stages) के अनुसार कैसे घटित होता है।

इसलिए प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र का मूल लक्ष्य था—
सामाजिक प्रगति के सार्वभौमिक नियमों को वैज्ञानिक पद्धति से खोज निकालना।

7. कॉम्ट के अनुसार प्रत्यक्षवाद __ का हिमायती है।

A. स्थिरता का
B. गतिशीलता का
C. दार्शनिक चिंतन का
D. रहस्यवाद का

उत्तर: B. गतिशीलता का

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) स्थिरता (Statics) और गतिशीलता (Dynamics) के संतुलन पर आधारित था।

  • स्थिरता (Social Statics) समाज की संरचना और नियमितता को समझने में मदद करती है।
  • गतिशीलता (Social Dynamics) समाज के परिवर्तन और विकास के नियमों को समझने का साधन है।

कॉम्ट का मुख्य दृष्टिकोण यह था कि:

समाज केवल स्थिर नहीं है; वह निरंतर परिवर्तनशील (dynamic) है और उसके विकास के नियम वैज्ञानिक पद्धति से समझे जा सकते हैं।

प्रत्यक्षवाद समाज की गतिशीलता को स्वीकार करता है क्योंकि:

  1. समाज निरंतर विकासशील है।
  2. सामाजिक परिवर्तन नियमों के अनुसार घटता है।
  3. यह परिवर्तन वैज्ञानिक अध्ययन (empirical observation) के लिए खुला है।

इसलिए प्रत्यक्षवाद दर्शन या रहस्यवाद नहीं, बल्कि सामाजिक गतिशीलता का हिमायती (supporter) है।

8. कॉम्ट ने समाजशास्त्र को “समाज का भौतिक विज्ञान” (Physics of Society) क्यों कहा?

A. क्योंकि वे समाज के रहस्यों को धार्मिक दृष्टि से समझना चाहते थे।
B. क्योंकि वे समाज को प्राकृतिक नियमों के अधीन मानते थे।
C. क्योंकि वे मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण के समर्थक थे।
D. क्योंकि वे समाज को केवल नैतिक दृष्टि से समझते थे।

उत्तर: B. क्योंकि वे समाज को प्राकृतिक नियमों के अधीन मानते थे।

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को प्रारंभ में Social Physics (समाज का भौतिक विज्ञान) कहा। इसका मुख्य कारण यह था कि:

  1. समाज में प्राकृतिक नियम लागू होते हैं
    • जैसे भौतिक विज्ञान में नियम (laws of physics) होते हैं, वैसे ही समाज में भी नियम हैं।
    • ये नियम समाज के विकास, संरचना और परिवर्तन को नियंत्रित करते हैं।
  2. कारण–परिणाम (Cause–Effect) का सिद्धांत
    • समाजशास्त्र में घटनाएँ और सामाजिक बदलाव किसी नियत कारण–परिणाम के आधार पर घटित होते हैं।
    • कॉम्ट ने इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया।
  3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना
    • कॉम्ट प्रत्यक्षवादी (Positivist) थे।
    • उनका उद्देश्य समाज के नियमों को वैज्ञानिक पद्धति से खोजकर समझना था।

इसलिए, उन्होंने समाज को एक प्राकृतिक प्रणाली मानकर उसका अध्ययन किया, और इसे Social Physics कहा, जो बाद में Sociology (समाजशास्त्र) के रूप में विकसित हुआ।

कॉम्ट ने समाज को नियत नियमों वाला, वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन योग्य माना, इसलिए इसे भौतिक विज्ञान से तुलना दी।

9. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद का मूल दार्शनिक आधार क्या है?

A. अनुभववाद (Empiricism)
B. आदर्शवाद (Idealism)
C. अध्यात्मवाद (Spiritualism)
D. रहस्यवाद (Mysticism)

उत्तर: A. अनुभववाद (Empiricism)

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) अनुभवजन्य ज्ञान (Empirical Knowledge) पर आधारित था। उनका मुख्य दृष्टिकोण था:

  1. ज्ञान का स्रोत प्रत्यक्ष अनुभव (Observation) है
    • कोई भी सिद्धांत तभी स्वीकार्य है जब वह तथ्यों और अवलोकन पर आधारित हो।
  2. सिद्धांत = व्यवस्थित तथ्य
    • सिद्धांत और नियम तब तक वैज्ञानिक नहीं माने जाते जब तक उन्हें अनुभवजन्य तथ्यों से स्थापित न किया जाए।
  3. समाजशास्त्र का अनुभवजन्य स्वरूप
    • कॉम्ट ने समाजशास्त्र को अनुभवजन्य विज्ञान (Empirical Science) के रूप में विकसित करने का प्रयास किया।
    • उनका मानना था कि समाज को दार्शनिक कल्पना या रहस्यवाद की दृष्टि से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और अनुभवजन्य अध्ययन के माध्यम से समझा जाना चाहिए।

कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद अनुभववाद (Empiricism) पर आधारित है, जो समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और तथ्यात्मक दृष्टि प्रदान करता है।

10. कॉम्ट के अनुसार धार्मिक और तात्विक व्याख्याओं की विफलता का कारण क्या था?

A. क्योंकि वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हो सकती थीं।
B. क्योंकि उनमें सामाजिक कल्पना की कमी थी।
C. क्योंकि वे समाज की स्थिरता का समर्थन करती थीं।
D. क्योंकि वे केवल नैतिक उद्देश्यों पर केंद्रित थीं।

उत्तर: A. क्योंकि वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हो सकती थीं।

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) धार्मिक और तात्विक (Philosophical/Metaphysical) व्याख्याओं को समाजशास्त्र के लिए अप्रयुक्त और असत्यापनीय मानता है।

  1. वैज्ञानिक परीक्षण का अभाव
    • धार्मिक और दार्शनिक व्याख्याएँ अनुभवजन्य अवलोकन (Empirical Observation) पर आधारित नहीं होतीं।
    • इनके कारण–परिणाम (Cause–Effect) संबंध सत्यापित नहीं किए जा सकते, इसलिए वे समाजशास्त्र का आधार नहीं बन सकतीं।
  2. प्रत्यक्षवाद का समाधान
    • कॉम्ट ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) के अधीन रखा।
    • ज्ञान का स्रोत केवल प्रत्यक्ष तथ्य (Facts) और अनुभवजन्य अवलोकन (Observation) होना चाहिए।
  3. निष्कर्ष
    • धार्मिक और तात्विक व्याख्याएँ अमूर्त (Abstract) और अनुभवजन्य परीक्षण से परे होती हैं।
    • इसलिए प्रत्यक्षवाद उनका अस्वीकार करता है और वैज्ञानिक, अनुभवजन्य दृष्टि को अपनाता है।

धार्मिक और तात्विक व्याख्याएँ विफल हैं क्योंकि वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं की जा सकतीं, और प्रत्यक्षवाद इन्हें ज्ञान के स्रोत के रूप में स्वीकार नहीं करता।

11. प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण के अनुसार समाजशास्त्र का प्रमुख कार्य क्या है?

A. समाज में मूल्यगत परिवर्तन लाना
B. समाज की व्याख्या को धार्मिक रूप देना
C. समाज के नियमों का वैज्ञानिक अध्ययन करना
D. नैतिकता का निर्माण करना

उत्तर: C. समाज के नियमों का वैज्ञानिक अध्ययन करना

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवादी (Positivist) दृष्टिकोण के अनुसार, समाजशास्त्र का प्रमुख कार्य है समाज के नियमों और उसके विकास के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन करना।

  1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण
    • समाजशास्त्र को अनुभवजन्य अवलोकन (Empirical Observation) और तथ्यों (Facts) के आधार पर अध्ययन करना चाहिए।
    • सिद्धांत और नियम तब तक स्वीकार्य नहीं हैं जब तक वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित न हों।
  2. सामाजिक नियमों की खोज
    • कॉम्ट ने समाज के विकास और परिवर्तन को निश्चित नियमों (Laws of Social Evolution) के अनुसार समझने का प्रयास किया।
    • इसका उद्देश्य समाज में अनियमितता या अराजकता से बचना और सामाजिक प्रगति को समझना था।
  3. धार्मिक या मूल्यगत व्याख्या अस्वीकार
    • प्रत्यक्षवाद किसी भी अमूर्त या धार्मिक व्याख्या को समाजशास्त्र का आधार नहीं मानता।
    • केवल तथ्यात्मक और अनुभवजन्य ज्ञान को ही स्वीकार किया जाता है।

समाजशास्त्र का प्रमुख कार्य समाज के नियमों का वैज्ञानिक अध्ययन करना है, न कि मूल्य निर्माण या धार्मिक व्याख्या देना।

12. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र की प्रमुख विशेषता नहीं है?

A. तथ्यों पर आधारित विश्लेषण
B. धार्मिक आधार पर व्याख्या
C. वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग
D. अवलोकन और तुलना की विधि

उत्तर: B. धार्मिक आधार पर व्याख्या

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र (Positivist Sociology) की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  1. तथ्यों पर आधारित विश्लेषण (Fact-Based Analysis)
    • समाज का अध्ययन केवल प्रत्यक्ष अवलोकन (Observation) और तथ्य के आधार पर किया जाता है।
  2. वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग (Scientific Method)
    • सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में तुलना, प्रयोग और अवलोकन जैसी वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जाता है।
  3. अवलोकन और तुलना की विधि (Observation & Comparison)
    • विभिन्न समाजों और उनके विकास के पैटर्न की तुलनात्मक विधि अपनाई जाती है।

धार्मिक व्याख्या का अस्वीकार

  • प्रत्यक्षवाद में धार्मिक या दार्शनिक व्याख्या को समाजशास्त्र का आधार नहीं माना जाता।
  • क्योंकि धार्मिक व्याख्याएँ अनुभवजन्य परीक्षण (Empirical Verification) योग्य नहीं होतीं और समाज के नियमों को वैज्ञानिक रूप से नहीं समझा सकतीं।

प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र की मुख्य विशेषता धार्मिक आधार पर व्याख्या नहीं करना है।

13. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद के अनुसार ‘ज्ञान’ का सर्वोच्च स्तर कौन-सा है?

A. धार्मिक स्तर
B. तात्विक स्तर
C. वैज्ञानिक स्तर
D. नैतिक स्तर

उत्तर: C. वैज्ञानिक स्तर

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट ने Law of Three Stages (तीन अवस्थाओं का नियम) प्रस्तुत किया, जो मानव बुद्धि और समाज के ज्ञान के विकास को समझाता है:

  1. धार्मिक अवस्था (Theological Stage)
    • समाज और घटनाओं को ईश्वरीय या अलौकिक शक्तियों से जोड़कर समझना।
  2. तात्विक अवस्था (Metaphysical Stage)
    • कारणों और सिद्धांतों के माध्यम से व्याख्या करना, लेकिन अभी भी तथ्यों पर आधारित नहीं
  3. वैज्ञानिक अवस्था (Positive / Scientific Stage)
    • ज्ञान का सर्वोच्च स्तर।
    • घटनाओं और समाज को अनुभवजन्य तथ्य (Empirical Facts) और वैज्ञानिक विधियों (Scientific Methods) के माध्यम से समझना।
    • सिद्धांत तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक वे तथ्यों पर आधारित न हों

प्रत्यक्षवाद का मुख्य संदेश:

मानव बुद्धि और समाज का अध्ययन वैज्ञानिक स्तर पर आधारित होना चाहिए, न कि धार्मिक या तात्विक स्तर पर।

14. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद के संदर्भ में “सामाजिक घटनाएँ” किनके समान मानी गई हैं?

A. दार्शनिक विचारों के समान
B. प्राकृतिक घटनाओं के समान
C. नैतिक नियमों के समान
D. धार्मिक आस्थाओं के समान

उत्तर: B. प्राकृतिक घटनाओं के समान

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) के अनुसार, सामाजिक घटनाएँ भी प्राकृतिक घटनाओं की तरह अध्ययन योग्य होती हैं।

  1. नियतात्मकता (Determinism)
    • प्राकृतिक घटनाओं की तरह, सामाजिक घटनाओं पर भी निश्चित कारण–परिणाम (Cause–Effect) संबंध लागू होता है।
    • उदाहरण: समाज में असमानता, नियमों का पालन, या आर्थिक परिवर्तन किसी न किसी कारण से घटित होते हैं।
  2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Approach)
    • सामाजिक घटनाओं का अध्ययन अनुभवजन्य (Empirical) अवलोकन और तुलनात्मक विधि (Comparative Method) के माध्यम से किया जाता है।
    • सिद्धांत और नियम केवल तथ्यों और अवलोकन से स्थापित होते हैं।
  3. धार्मिक या दार्शनिक व्याख्या अस्वीकार
    • सामाजिक घटनाओं को अलौकिक या केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता।

कॉम्ट ने सामाजिक घटनाओं को वैज्ञानिक और प्राकृतिक घटनाओं के समान, नियमबद्ध और अनुभवजन्य रूप से समझने की आवश्यकता बताई।

15. कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद समाजशास्त्र को किस दिशा में ले गया?

A. सैद्धांतिक दर्शन की ओर
B. अनुभवजन्य अनुसंधान की ओर
C. धार्मिक व्याख्या की ओर
D. रहस्यवादी चिंतन की ओर

उत्तर: B. अनुभवजन्य अनुसंधान की ओर

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) समाजशास्त्र को कल्पनात्मक या दार्शनिक दृष्टिकोण से निकालकर वैज्ञानिक और अनुभवजन्य अध्ययन की दिशा में ले गया।

  1. अनुभवजन्य दृष्टिकोण (Empirical Approach)
    • समाजशास्त्र को वास्तविक तथ्यों और अवलोकन (Observation of Facts) पर आधारित बनाया गया।
    • सिद्धांत और नियम तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित न हों
  2. वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method)
    • अवलोकन, तुलना और विश्लेषण जैसी वैज्ञानिक विधियाँ अपनाई गईं।
    • समाज के नियमों, प्रगति और परिवर्तन को सत्यापित और व्यवस्थित रूप से समझा गया।
  3. आगे का प्रभाव (Influence on Sociology)
    • कॉम्ट का यह दृष्टिकोण समाजशास्त्र को सामाजिक विज्ञान के रूप में स्थापित करता है।
    • आगे चलकर एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim) जैसे समाजशास्त्रियों को भी इस अनुभवजन्य पद्धति ने प्रभावित किया।

कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सैद्धांतिक या धार्मिक व्याख्या से हटाकर अनुभवजन्य और तथ्यपरक विज्ञान की दिशा में विकसित किया।

16. कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद किन दो प्रमुख तत्वों पर आधारित है?

A. तथ्य और सिद्धांत
B. अवलोकन और प्रयोग
C. व्यवस्था और प्रगति
D. धर्म और तर्क

उत्तर: C. व्यवस्था और प्रगति

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) का मूल दर्शन “Order and Progress” (व्यवस्था और प्रगति) पर आधारित है।

  1. व्यवस्था (Order / Social Statics)
    • समाज की संरचना और स्थायित्व को समझने का आधार।
    • यह सुनिश्चित करता है कि सामाजिक संगठन और नियम प्रभावी ढंग से काम करें।
  2. प्रगति (Progress / Social Dynamics)
    • समाज के विकास, परिवर्तन और उन्नति के नियमों को समझने का माध्यम।
    • परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन यह व्यवस्था के ढांचे के भीतर होना चाहिए।
  3. प्रत्यक्षवाद में संतुलन
    • कॉम्ट के अनुसार समाज एक जीवंत प्रणाली है, जो स्थिरता और परिवर्तन दोनों पर आधारित है।
    • यह संतुलन समाजशास्त्र को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने का आधार बनाता है।

प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र व्यवस्था (Order) और प्रगति (Progress) के दो प्रमुख तत्वों पर केंद्रित है, जो समाज की स्थायित्व और परिवर्तनशीलता दोनों को समझने में मदद करते हैं।

17. कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद बाद के समाजशास्त्रियों को किस रूप में सर्वाधिक प्रभावित करता है?

A. समाजशास्त्र की आध्यात्मिक व्याख्या के रूप में
B. समाजशास्त्र के मूल्यात्मक अध्ययन के रूप में
C. समाजशास्त्र के वैज्ञानिक आधार की स्थापना के रूप में
D. समाजशास्त्र के धार्मिक रूपांतरण के रूप में

उत्तर: C. समाजशास्त्र के वैज्ञानिक आधार की स्थापना के रूप में

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) समाजशास्त्र को वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में स्थापित करने में अग्रणी था।

  1. दार्शनिक और नैतिक चिंतन से पृथक
    • कॉम्ट ने समाजशास्त्र को धार्मिक, नैतिक या दार्शनिक व्याख्या से अलग किया।
    • इसका उद्देश्य समाज के नियमों और विकास को अनुभवजन्य और वैज्ञानिक रूप से समझना था।
  2. वैज्ञानिक आधार (Scientific Foundation)
    • प्रत्यक्षवाद ने समाजशास्त्र को तथ्यों, अवलोकन और नियमों के आधार पर अध्ययन योग्य बनाया।
    • यह दृष्टिकोण बाद में एमिल दुर्खीम (Émile Durkheim) जैसे समाजशास्त्रियों को प्रेरित करने वाला बना।
  3. समाजशास्त्र का स्वतंत्र अनुशासन
    • कॉम्ट ने समाजशास्त्र को केवल दार्शनिक विचारधारा नहीं बल्कि स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में स्थापित किया।
    • इसका प्रभाव आधुनिक समाजशास्त्र की अनुभवजन्य पद्धति और विधियों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद समाजशास्त्र को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने वाला अग्रणी दृष्टिकोण है, जिसने आधुनिक समाजशास्त्र की नींव रखी।


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सभी प्रश्नों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें या सीधे वेबसाइट पर जाएँ:
Link – [Auguste Comte]

Sociological Thinkers [Link]

UGC NET/JRF MCQs [Link]

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