Karl Marx: जीवन, व्यक्तित्व, Das Kapital और First International – MCQs के साथ विस्तृत व्याख्या

Karl Marx: जीवन, व्यक्तित्व, Das Kapital, First International और वैश्विक प्रभाव – MCQs सहित विस्तृत व्याख्या

Karl Marx (1818–1883) आधुनिक समाजशास्त्र, राजनीतिक अर्थशास्त्र और समाजवादी विचारधारा के सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक थे। उनके विचार न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया में श्रमिक आंदोलन, सामाजिक सुधार और वर्ग-संघर्ष की दिशा को प्रभावित करते रहे हैं। Marx का जीवन संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों से भरा रहा, जिसमें उन्होंने गरीबी, राजनीतिक निर्वासन और व्यक्तिगत संकटों का सामना किया।

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1. लंदन में प्रवास के दौरान Marx ने अपने सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ Das Kapital की रचना किस परिस्थिति में की?

a) समृद्ध और सुविधा सम्पन्न जीवन में
b) दरिद्रता और कठिनाइयों के बीच
c) सरकारी संरक्षण में
d) पेरिस विश्वविद्यालय में

उत्तर: b) दरिद्रता और कठिनाइयों के बीच

व्याख्या:

1849 में जर्मनी और फ्रांस से निष्कासित किए जाने के बाद Karl Marx ने लंदन में स्थायी निवास किया।
लंदन प्रवास (1849–1883) के आरंभिक वर्षों में Marx अत्यधिक आर्थिक तंगी, बीमारियों, बच्चों की मृत्यु और सामाजिक उपेक्षा से जूझते रहे।
उनका परिवार अत्यंत गरीबी में रहा; कई बार तो खाने-पीने और कपड़ों की भी कमी रहती थी।

इन्हीं विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने Das Kapital (Volume I, published 1867) की रचना की — जो पूँजीवादी व्यवस्था (Capitalism) की संरचना, शोषण और वर्ग-संघर्ष का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
उन्होंने ब्रिटिश म्यूज़ियम के रीडिंग रूम में अनगिनत घंटे बिताए और वहीं से अपने शोध को अंतिम रूप दिया।

2.
कथन A: Marx को Neue Rheinische Zeitung
(न्यू रीनिश जीटिंग) के प्रकाशन के कारण दो मुकदमों का सामना करना पड़ा।
कथन R: अदालत ने Marx और उसके सहकर्मियों को दोषी पाया और उन्हें जेल भेज दिया।

a) A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
b) A और R दोनों सत्य हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
c) A सत्य है, परंतु R असत्य है।
d) A असत्य है, परंतु R सत्य है।

उत्तर: c) A सत्य है, परंतु R असत्य है।

व्याख्या:

1848 की यूरोपीय क्रांतियों के समय Karl Marx ने जर्मनी के कोलोन (Cologne) शहर में एक क्रांतिकारी समाचार पत्र Neue Rheinische Zeitung (New Rhenish Newspaper) का संपादन किया।
यह अख़बार वर्ग संघर्ष, लोकतांत्रिक अधिकारों, और समाजवादी विचारों का प्रबल समर्थक था।

इस पत्र में प्रकाशित लेखों के कारण Marx और उनके सहकर्मियों पर दो बार मुकदमे चलाए गए:

  1. पहला मुकदमा — सरकारी अधिकारियों को उकसाने और कानून का उल्लंघन करने के आरोप में।
  2. दूसरा मुकदमा — जर्मन राजशाही विरोधी गतिविधियों से संबंधित।

हालाँकि दोनों ही मामलों में अदालत ने Marx और उनकी टीम को निर्दोष घोषित किया और वे जेल नहीं गए।
लेकिन 1849 में Neue Rheinische Zeitung को जबरन बंद कर दिया गया, और Marx को प्रशा (Prussia) से निष्कासित कर दिया गया।

3. Marx का यूरोप से निर्वासन और प्रवास क्रम सही क्रम में कौन सा है?

a) बेल्जियम → फ्रांस → जर्मनी → लंदन
b) फ्रांस → जर्मनी → बेल्जियम → लंदन
c) जर्मनी → फ्रांस → बेल्जियम → लंदन
d) बेल्जियम → जर्मनी → फ्रांस → लंदन

उत्तर: c) जर्मनी → फ्रांस → बेल्जियम → लंदन

व्याख्या:

Karl Marx का राजनीतिक निर्वासन कई चरणों में हुआ, और हर स्थान ने उनके विचारों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई —

  1. जर्मनी (1842–1843):
    Marx ने कोलोन (Cologne) में Rheinische Zeitung का संपादन किया। यह पत्र सरकारी नीतियों और पूँजीवादी शोषण की आलोचना करता था।
    प्रुशियन सरकार ने इसे बंद कर दिया और Marx को जर्मनी से निष्कासित (expelled) कर दिया।
  2. फ्रांस (1843–1845):
    Marx पेरिस आए, जहाँ उन्होंने Engels से मुलाकात की और समाजवादी विचारों को गहराई से विकसित किया।
    यहीं पर उन्होंने Economic and Philosophic Manuscripts (1844) और The Holy Family (1845) जैसे ग्रंथ लिखे।
    लेकिन फ्रांसीसी सरकार ने भी दबाव में उन्हें देश छोड़ने को कहा।
  3. बेल्जियम (1845–1848):
    Marx ने ब्रसेल्स में शरण ली और Engels के साथ मिलकर The German Ideology और The Communist Manifesto (1848) की रचना की।
    1848 की क्रांति के बाद बेल्जियम से भी निष्कासन हुआ।
  4. लंदन (1849–1883):
    अंततः Marx ने लंदन में स्थायी निवास किया।
    यहीं उन्होंने Das Kapital की रचना की और First International (1864) की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।

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4. Neue Rheinische Zeitung (न्यू रीनिश जीटिंग) के माध्यम से Marx ने किस लड़ाई का प्रारंभ किया?

a) हथियारबंद क्रांति
b) नागरिक स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी
c) औद्योगिक विकास
d) धार्मिक सुधार

उत्तर: b) नागरिक स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी

व्याख्या:

Karl Marx ने 1848–1849 में कोलोन (Cologne) में Neue Rheinische Zeitung का संपादन किया।
इस अख़बार के माध्यम से उन्होंने:

  1. सरकारी अत्याचार और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया,
  2. नागरिक अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए चेतना बढ़ाई,
  3. श्रमिक वर्ग और किसानों के अधिकारों की वकालत की,
  4. समाजवादी और लोकतांत्रिक विचारों को जनता तक पहुँचाया।

यह लड़ाई कलम की लड़ाई (Struggle through Press) थी, जिसमें Marx ने हिंसा की बजाय तर्क और विचारधारा के माध्यम से समाज सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया।
यह उनका क्रांतिकारी पत्रकारिता में योगदान है, न कि हथियारबंद या धार्मिक सुधार।

5.
सूची-I (Marx के लंदन प्रवास में घटनाएँ)

  1. Das Capital की रचना
  2. आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का अनुभव
  3. First International में योगदान
  4. परिवार की गरीबी और बच्चों की मृत्यु

सूची-II (प्रभाव / परिणाम)
i. विश्वव्यापी समाजवादी आंदोलन की नींव
ii. व्यक्तिगत और पारिवारिक संकट
iii. वैज्ञानिक समाजवाद का ग्रंथ
iv. Marx के विचारों का सैद्धांतिक विकास

a) 1–iii, 2–iv, 3–i, 4–ii
b) 1–iv, 2–iii, 3–ii, 4–i
c) 1–i, 2–ii, 3–iii, 4–iv
d) 1–ii, 2–i, 3–iv, 4–iii

उत्तर: a) 1–iii, 2–iv, 3–i, 4–ii

व्याख्या:

  1. Das Capital की रचना → वैज्ञानिक समाजवाद का ग्रंथ (1–iii)
    • Marx ने लंदन में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में Das Capital (Volume I, 1867) लिखा।
    • यह ग्रंथ पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
  2. आर्थिक और सामाजिक संघर्ष → Marx के विचारों का सैद्धांतिक विकास (2–iv)
    • लंदन में Marx ने गरीबी, श्रमिक वर्ग के संघर्ष और सामाजिक असमानता का गहन अनुभव किया।
    • इन अनुभवों ने उनके सैद्धांतिक दृष्टिकोण और historical materialism के विकास में योगदान दिया।
  3. First International में योगदान → विश्वव्यापी समाजवादी आंदोलन की नींव (3–i)
    • Marx ने 1864 में International Workingmen’s Association (First International) की स्थापना में नेतृत्व किया।
    • इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर समाजवादी और श्रमिक आंदोलन की नींव रखी।
  4. परिवार की गरीबी और बच्चों की मृत्यु → व्यक्तिगत और पारिवारिक संकट (4–ii)
    • Marx और उनकी पत्नी Jenny अत्यंत आर्थिक कठिनाइयों में जीवन यापन कर रहे थे।
    • उनके कई बच्चे बीमारी और मृत्यु का शिकार हुए। यह उनके जीवन का व्यक्तिगत और पारिवारिक संकट था।

6. 1873 ई. के आसपास First International के विघटन का मुख्य कारण क्या था?

a) मार्क्स का स्वास्थ्य खराब होना
b) आर्थिक कारण
c) अराजकतावादियों और मार्क्सवादियों के बीच वैचारिक मतभेद
d) ब्रिटिश सरकार का हस्तक्षेप

उत्तर: c) अराजकतावादियों और मार्क्सवादियों के बीच वैचारिक मतभेद

व्याख्या:

  1. First International (1864–1876) का उद्देश्य था श्रमिकों और समाजवादी आंदोलनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करना।
  2. 1870 के दशक तक संगठन में दो प्रमुख ध्रुव बन गए:
    • मार्क्सवादी (Marxists):
      • वर्ग-संघर्ष और संगठित मजदूर आंदोलन पर जोर देते थे।
      • राजनीतिक संघर्ष और राज्य के माध्यम से बदलाव पर भरोसा करते थे।
    • अराजकतावादी (Anarchists):
      • राज्य को पूरी तरह समाप्त करने का तत्काल उद्देश्य रखते थे।
      • संगठन और केंद्रीकृत राजनीतिक गतिविधियों को स्वीकार नहीं करते थे।
  3. इन दो ध्रुवों के बीच गहरे वैचारिक मतभेद और रणनीतिक विरोध के कारण संगठन 1873–1876 तक धीरे-धीरे विघटित हो गया।
  4. Marx का स्वास्थ्य खराब होना या आर्थिक कारण संगठन के विघटन का मुख्य कारण नहीं थे।

7.
कथन A: मार्क्स First International के विघटन के बाद भी अपने विचारों के प्रति आश्वस्त रहे।
कथन R: वे अपनी भूमिका को पैगम्बरी (Prophetic) भूमिका के रूप में देखते थे।


a) A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
b) A और R दोनों सत्य हैं परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
c) A सत्य है, परंतु R असत्य है।
d) A असत्य है, परंतु R सत्य है।

उत्तर: a) A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।

व्याख्या:

  1. First International के विघटन के बाद Marx का दृष्टिकोण:
    • 1873 के आसपास First International के विघटन के बावजूद Marx अपने वैचारिक मिशन से विचलित नहीं हुए।
    • उन्होंने समझा कि अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संघर्ष और वर्ग-संघर्ष का कार्य लंबी अवधि में ही सिद्ध होगा।
  2. Prophetic (पैगम्बरी) दृष्टिकोण:
    • Marx ने स्वयं को एक सामाजिक बदलाव के अग्रदूत (Prophetic figure) के रूप में देखा।
    • उनका मानना था कि समाजवादी क्रांति और श्रमिकों की मुक्ति का कार्य उनके जीवन और लेखन का उद्देश्य है।
    • यह दृष्टिकोण उनके व्यक्तिगत आत्मविश्वास और वैचारिक स्थिरता को दर्शाता है।

इसलिए, A सत्य है और R सत्य है, और R स्पष्ट रूप से A की व्याख्या भी करता है।

8. मार्क्स के व्यक्तित्व की प्रमुख आलोचना उनके समकालीनों द्वारा किस रूप में की गई?

a) आर्थिक सिद्धांतों की कमजोरी
b) सामाजिक रूप से संवेदनशील व्यक्तित्व
c) अत्यधिक महत्वाकांक्षी और अहंकारी स्वभाव
d) धार्मिक प्रवृत्ति का प्रभाव

उत्तर: c) अत्यधिक महत्वाकांक्षी और अहंकारी स्वभाव

व्याख्या:

  1. Marx के व्यक्तित्व पर उनके समकालीनों और इतिहासकारों ने विभिन्न प्रकार की टिप्पणियाँ की हैं।
  2. विशेष रूप से जर्मन क्रांतिकारी और सहकर्मी उन्होंने Marx के बारे में लिखा कि:
    • Marx में “महान हृदय का अभाव” था।
    • उनकी अदम्य महत्वाकांक्षा और कठोर व्यक्तित्व ने कई बार व्यक्तिगत संबंधों और सहयोगियों के साथ संघर्ष उत्पन्न किया।
    • वे दूसरों पर प्रभुत्व जमाने की प्रवृत्ति रखते थे, जो उनके राजनीतिक और वैचारिक संघर्षों में भी परिलक्षित होती थी।
  3. हालांकि यह उनके वैचारिक योगदान को कम नहीं करता, पर Marx का व्यक्तित्व उनके समकालीनों के लिए चुनौतीपूर्ण और कभी-कभी विवादास्पद रहा।

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9. मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से Marx के भीतर क्रांति और वर्ग-संघर्ष की भावना का स्रोत क्या माना गया है?

a) आर्थिक असमानता के प्रत्यक्ष अनुभव
b) विनाश की अनियंत्रित भूख और पैगम्बरी स्वभाव
c) धार्मिक प्रेरणा
d) सामाजिक न्याय की नैतिक चेतना

उत्तर: b) विनाश की अनियंत्रित भूख और पैगम्बरी स्वभाव

व्याख्या:

  1. Marx के व्यक्तित्व और वैचारिक प्रेरणाओं का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण यह दर्शाता है कि उनके भीतर:
    • एक “विनाश की अनियंत्रित भूख” (destructive drive) थी, यानी वे मौजूदा पूँजीवादी और अन्यायपूर्ण सामाजिक ढाँचे को पूरी तरह उखाड़ फेंकने का इच्छुक थे।
    • वे स्वयं को “मानव मुक्ति के दूत (prophetic figure for human emancipation)” के रूप में देखते थे।
    • इस दृष्टिकोण ने उनके लेखन, Das Kapital और First International में सक्रिय योगदान को प्रेरित किया।
  2. यह पैगम्बरी और क्रांतिकारी दृष्टिकोण उनके आर्थिक और सामाजिक विश्लेषण के पीछे मनोवैज्ञानिक प्रेरणा को स्पष्ट करता है।
  3. हालांकि आर्थिक असमानता का अनुभव और सामाजिक न्याय की नैतिक चेतना उनके विचारों को प्रभावित करती रही,
    मूल प्रेरणा स्रोत उनके मनोवैज्ञानिक पैगम्बरी स्वभाव और विनाश की भावना मानी जाती है।

10.
सूची-I (व्यक्तित्व के पहलू)

  1. अदम्य महत्वाकांक्षा
  2. विनाश की भूख
  3. पैगम्बरी दृष्टि
  4. सामाजिक व्यवहार में प्रभुत्व की प्रवृत्ति

सूची-II (प्रभाव)
i. दूसरों के प्रति तिरस्कार
ii. वर्ग-संघर्ष और क्रांति का आग्रह
iii. आत्मविश्वास और वैचारिक दृढ़ता
iv. संगठनात्मक मतभेद

a) 1–iv, 2–ii, 3–iii, 4–i
b) 1–i, 2–iv, 3–ii, 4–iii
c) 1–iii, 2–ii, 3–i, 4–iv
d) 1–ii, 2–i, 3–iv, 4–iii

उत्तर: a) 1–iv, 2–ii, 3–iii, 4–i

व्याख्या:

  1. अदम्य महत्वाकांक्षा → संगठनात्मक मतभेद (1–iv)
    • Marx की महत्वाकांक्षा और दृढ़ता कभी-कभी उनके सहयोगियों और संगठन में मतभेद उत्पन्न करती थी।
    • यह उनके नेतृत्व और First International जैसी संस्थाओं में विवाद का कारण बनी।
  2. विनाश की भूख → वर्ग-संघर्ष और क्रांति का आग्रह (2–ii)
    • Marx में सामाजिक ढांचे को पूरी तरह बदलने की इच्छाशक्ति थी।
    • इसी विनाशक दृष्टिकोण ने उन्हें वर्ग-संघर्ष और क्रांतिकारी आंदोलन के प्रति प्रेरित किया।
  3. पैगम्बरी दृष्टि → आत्मविश्वास और वैचारिक दृढ़ता (3–iii)
    • Marx ने स्वयं को मानव मुक्ति का “दूत” माना।
    • इस दृष्टिकोण ने उन्हें अपने वैचारिक मिशन में अत्यधिक आत्मविश्वासी और स्थिर बनाया।
  4. सामाजिक व्यवहार में प्रभुत्व की प्रवृत्ति → दूसरों के प्रति तिरस्कार (4–i)
    • Marx में दूसरों पर प्रभुत्व जमाने की प्रवृत्ति थी।
    • यह उनके व्यक्तिगत और सहयोगियों के साथ संबंधों में तिरस्कार और संघर्ष के रूप में दिखती थी।

11. टेचोव के अनुसार कार्ल मार्क्स के व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्या था?

a) उनका गहन सामाजिक दृष्टिकोण
b) उनका अदम्य महत्वाकांक्षा भाव
c) उनकी धार्मिक आस्था
d) उनका अत्यधिक विनम्र स्वभाव

उत्तर: b) उनका अदम्य महत्वाकांक्षा भाव

व्याख्या:

  1. जर्मन क्रांतिकारी और Marx के समकालीन, टेचोव (Teichow / Teutchev), ने Marx के व्यक्तित्व का विश्लेषण किया।
  2. उनका निष्कर्ष था कि Marx में:
    • “महान हृदय का अभाव” था।
    • उनकी अदम्य महत्वाकांक्षा ने कई गुणों को दबा दिया और दूसरों के साथ उनके व्यवहार में प्रभुत्व की प्रवृत्ति दिखाई दी।
  3. यह महत्वाकांक्षा Marx के व्यक्तित्व की केन्द्रीय विशेषता थी और उनके राजनीतिक, वैचारिक और सामाजिक संघर्षों में भी परिलक्षित होती थी।
  4. यह आलोचना Marx के वैचारिक योगदान को कम नहीं करती, बल्कि उनके व्यक्तित्व के जटिल पहलू को उजागर करती है।

12. मार्क्स के समकालीन आलोचकों ने उनके विचारों को किस मानसिक धरातल से उत्पन्न बताया?

a) समाजशास्त्रीय विश्लेषण
b) वैज्ञानिक भौतिकवाद
c) मनोवैज्ञानिक ग्रंथियाँ और प्रेरणाएँ
d) नैतिक दर्शन

उत्तर: c) मनोवैज्ञानिक ग्रंथियाँ और प्रेरणाएँ

व्याख्या:

  1. Marx के आलोचकों का यह दृष्टिकोण था कि उनके विचार केवल आर्थिक या सामाजिक संरचना से उत्पन्न नहीं हुए, बल्कि मनोवैज्ञानिक प्रेरणाओं और आंतरिक उद्दीपनों से भी प्रभावित थे।
  2. उदाहरण:
    • Marx की विनाश की अनियंत्रित भूख, अदम्य महत्वाकांक्षा और पैगम्बरी दृष्टि उनके व्यक्तित्व और मानसिक प्रेरणाओं का परिणाम मानी जाती थी।
    • इसी मनोवैज्ञानिक धरातल ने उनके वर्ग-संघर्ष, क्रांतिकारी दृष्टिकोण, और सर्वहारा मुक्ति के विचारों को जन्म दिया।
  3. आलोचकों का तर्क यह था कि Marx के वैचारिक आंदोलन में व्यक्तित्व और मानसिक प्रेरणा का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण था जितना कि आर्थिक और सामाजिक विश्लेषण।

13. मार्क्स के समाधि स्तंभ पर अंकित प्रसिद्ध नारा कौन-सा है?

a) दुनिया के शासकों एक हो जाओ
b) दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ
c) सर्वहारा की जय हो
d) बुर्जुआ का अंत हो

उत्तर: b) दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ

व्याख्या:

  1. Marx के समाधि स्तंभ (Tomb / Grave monument) लंदन के Highgate Cemetery में स्थित है।
  2. उनके समाधि पर सबसे प्रसिद्ध उद्धरण अंकित है: “Workers of the world, unite!”
    • यह नारा Marx और Engels के Communist Manifesto (1848) का केंद्रीय संदेश है।
    • इसका अर्थ है कि सभी श्रमिक वर्ग, जो पूँजीवाद के अधीन हैं, राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष में एकजुट हों
  3. यह नारा Marx के वैचारिक सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक आंदोलन का प्रतीक बन गया।
  4. यह नारा केवल समाधि तक सीमित नहीं है; यह आज भी सामाजिक आंदोलन और मजदूर आंदोलनों में प्रेरक सूत्र के रूप में उपयोग होता है।

14. मार्क्स की मृत्यु कब हुई थी?

a) 1881 ई.
b) 1882 ई.
c) 1883 ई.
d) 1885 ई.

उत्तर: c) 1883 ई.

व्याख्या:

  1. मृत्यु तिथि:
    • Karl Marx का निधन 14 मार्च 1883 को लंदन में हुआ।
  2. संदर्भ और परिस्थितियाँ:
    • Marx की मृत्यु के समय वे लगातार मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।
    • उनकी पत्नी Jenny Marx और एक पुत्री की मृत्यु ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को और प्रभावित किया।
    • Marx का शव Highgate Cemetery, London में दफन किया गया।
  3. महत्व:
    • Marx की मृत्यु के बाद भी उनके लेखन और विचारों का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय समाजवादी आंदोलन और राजनीतिक विचारधारा पर बना रहा।

15. टेचोव ने मार्क्स के किस स्वभाव को “दुर्लभ क्षमता के साथ कमजोर सामाजिक दृष्टिकोण” कहा था?

a) उनकी उदारता
b) उनका व्यंग्यात्मक व्यवहार
c) उनका नास्तिक दृष्टिकोण
d) उनका क्रांतिकारी स्वभाव

उत्तर: b) उनका व्यंग्यात्मक व्यवहार

व्याख्या:

  1. जर्मन क्रांतिकारी और Marx के समकालीन टेचोव (Teichow) ने Marx के व्यक्तित्व का विश्लेषण किया।
  2. उनका निष्कर्ष था कि Marx:
    • अक्सर दूसरों पर हावी रहते थे।
    • मजदूर वर्ग और बुर्जुआ दोनों का व्यंग्यात्मक और कटाक्षपूर्ण अंदाज अपनाते थे।
    • इस व्यवहार ने उनके सामाजिक दृष्टिकोण की कमजोरियों को उजागर किया।
  3. टेचोव के अनुसार, यह Marx की दुर्लभ क्षमता और मजबूत वैचारिक दृष्टि के साथ द्वंद्वात्मक विशेषता थी — यानी उनके विचार महान थे, लेकिन व्यवहार में कभी-कभी कठोर और व्यंग्यात्मक।

16. निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
कथन 1: मार्क्स ने अपने अंतिम वर्षों में कोई उल्लेखनीय रचना नहीं लिखी।
कथन 2: मार्क्स के जीवन के अंतिम वर्षों को ‘गुमनामी का काल’ कहा जाता है।


a) केवल कथन 1 सही है
b) केवल कथन 2 सही है
c) दोनों कथन सही हैं
d) दोनों कथन गलत हैं

उत्तर: c) दोनों कथन सही हैं

व्याख्या:

  1. Marx के जीवन के अंतिम 15 वर्षों (लगभग 1868–1883) में उन्होंने कोई प्रमुख ग्रंथ नहीं लिखा।
    • Das Kapital के पहले खंड का प्रकाशन 1867 में हुआ था, और इसके बाद के खंडों पर Engels ने उनके नोट्स के आधार पर कार्य किया।
  2. इस अवधि को अक्सर “गुमनामी का काल” कहा जाता है, क्योंकि Marx सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से पीछे हट गए और व्यक्तिगत स्वास्थ्य व मानसिक थकान के कारण सक्रिय लेखन सीमित हो गया।
  3. इसका अर्थ है कि उनके अंतिम वर्षों में उनकी वैचारिक उत्पादकता और सार्वजनिक सक्रियता में कमी आई।

17. सही मेल चुनिए:
सूची–I (घटनाएँ)
A. मार्क्स की पत्नी जेनी की मृत्यु
B. मार्क्स की पुत्री की मृत्यु
C. मार्क्स की स्वयं की मृत्यु

सूची–II (वर्ष)
1. 1883
2. 1881
3. 1882

a) A–2, B–3, C–1
b) A–1, B–2, C–3
c) A–3, B–2, C–1
d) A–2, B–1, C–3

उत्तर: a) A–2, B–3, C–1

व्याख्या:

  1. जेनी मार्क्स की मृत्यु (1881)
    • Marx की पत्नी Jenny Marx का निधन 1881 में हुआ।
  2. मार्क्स की पुत्री की मृत्यु (1882)
    • Marx की पुत्री (Jenny, Laura, या Eleanor के संदर्भ में) की मृत्यु 1882 में हुई।
  3. मार्क्स की मृत्यु (1883)
    • Karl Marx का निधन 14 मार्च 1883 को लंदन में हुआ।
यह काल Marx और उनके परिवार के लिए व्यक्तिगत संकट और मानसिक थकान का समय माना जाता है।

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18. मार्क्स अपने किस आदर्श के विपरीत जीवन व्यतीत करते थे?

a) सर्वहारा आदर्श
b) भौतिकवाद आदर्श
c) धर्मनिरपेक्ष आदर्श
d) नैतिक आदर्श

उत्तर: a) सर्वहारा आदर्श

व्याख्या:

  1. Marx ने अपने जीवन और लेखन में सर्वहारा (Proletariat) आदर्श का समर्थन किया, जिसमें सामाजिक समानता, श्रमिकों का उत्थान और भौतिक संपत्ति पर समान अधिकार शामिल थे।
  2. वास्तविक जीवन में Marx का परिवार कुलीन जीवनशैली और अपेक्षाकृत संपन्न परिस्थितियों में रहा।
    • उन्होंने अपनी पुत्रियों को संपन्न घरों में विवाह करने की सलाह दी।
    • उनके व्यक्तिगत जीवन में संपत्ति और सामाजिक स्थिति की चिंता दिखाई देती थी।
  3. इस प्रकार, Marx का निजी जीवन उनके सर्वहारा आदर्श के विचारों के विपरीत प्रतीत होता है।
  4. यह विरोधाभास Marx के वैचारिक जीवन और व्यक्तिगत जीवन के बीच एक रोचक मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक तथ्य प्रस्तुत करता है।

19. मार्क्स ने अपने व्यक्तित्व को किस रूप में देखा था?

a) वैज्ञानिक
b) पैगम्बरी
c) दार्शनिक
d) क्रांतिकारी

उत्तर: b) पैगम्बरी (Prophetic)

व्याख्या:

  1. आलोचकों और मनोवैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार, Marx स्वयं को एक पैगम्बर (Prophet) के रूप में मानते थे।
  2. इसका अर्थ है कि वे अपने विचारों और कार्यों को मानवता के उद्धार और मुक्ति के संदेश के रूप में देखते थे।
  3. Marx के पैगम्बरी दृष्टिकोण का प्रतिबिंब उनके:
    • वर्ग-संघर्ष के सिद्धांत
    • सर्वहारा मुक्ति के लक्ष्य
    • और क्रांतिकारी गतिविधियों में देखा जा सकता है।
  4. यह दृष्टिकोण उन्हें केवल एक वैचारिक विश्लेषक या दर्शनशास्त्री नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य के संदेशवाहक के रूप में प्रस्तुत करता है।

20. निम्न में से कौन-सा कथन मार्क्स के Praxis की भावना को व्यक्त करता है?

a) विचारों की सैद्धांतिक व्याख्या
b) समाज को बदलने के व्यावहारिक प्रयास
c) आर्थिक विश्लेषण की आलोचना
d) वर्ग-संघर्ष का दर्शन

उत्तर: b) समाज को बदलने के व्यावहारिक प्रयास

व्याख्या:

  1. Marx के दर्शन में Praxis का अर्थ है विचारों और सिद्धांतों का व्यावहारिक क्रियान्वयन
  2. Marx ने यह माना कि:
    • “दुनिया की केवल व्याख्या करना पर्याप्त नहीं है; इसे बदलना आवश्यक है।”
    • इसका मतलब है कि सिद्धांत और क्रिया एक साथ जुड़े हुए हैं
  3. Praxis का मुख्य उद्देश्य है:
    • वर्ग-संघर्ष के माध्यम से सर्वहारा वर्ग का उत्थान
    • समाज में समानता और न्याय स्थापित करना
  4. इसलिए, Praxis केवल वैचारिक विश्लेषण नहीं, बल्कि व्यावहारिक क्रांति और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है।

21. टेचोव के अनुसार मार्क्स की किस प्रवृत्ति ने उनके व्यक्तित्व की अच्छाइयों को नष्ट किया?

a) नास्तिकता
b) महत्वाकांक्षा
c) असंवेदनशीलता
d) आत्ममुग्धता

उत्तर: b) महत्वाकांक्षा

व्याख्या:

  1. जर्मन क्रांतिकारी और Marx के समकालीन टेचोव (Teichow) ने Marx के व्यक्तित्व का विश्लेषण किया।
  2. उनका निष्कर्ष था कि Marx की अदम्य महत्वाकांक्षा (Unbounded Ambition) ने उनके अन्य गुणों को छिपा दिया।
  3. इसके प्रभाव:
    • Marx का व्यवहार कभी-कभी कट्टर और प्रभुत्वपूर्ण प्रतीत होता था।
    • उन्होंने सामाजिक और व्यक्तिगत रिश्तों में दूरी बनाई।
  4. टेचोव के अनुसार, यह महत्वाकांक्षा Marx के वैचारिक दृढ़ता और क्रांतिकारी दृष्टिकोण का हिस्सा थी, लेकिन उनकी सहानुभूति और मित्रता को प्रभावित करती थी।

22. “दार्शनिकों ने अब तक केवल विश्व की व्याख्या की है; मुद्दा यह है कि इसे बदला कैसे जाए” — यह मार्क्स का कौन-सा दृष्टिकोण दर्शाता है?

a) ऐतिहासिक भौतिकवाद
b) क्रांतिकारी कार्यवाद
c) द्वंद्वात्मक भौतिकवाद
d) वर्ग चेतना

उत्तर: b) क्रांतिकारी कार्यवाद (Revolutionary Activism)

व्याख्या:

  1. यह कथन Marx के Theses on Feuerbach (1845) का प्रसिद्ध उद्धरण है।
  2. Marx का उद्देश्य था कि:
    • केवल विचार और विश्लेषण करना पर्याप्त नहीं है।
    • सिद्धांतों को क्रियान्वित करना और समाज में परिवर्तन लाना आवश्यक है।
  3. इसे Marx का Revolutionary Activism / क्रांतिकारी कार्यवाद कहा जाता है, जो व्याख्या से आगे बढ़कर व्यावहारिक क्रांति और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सक्रियता पर जोर देता है।
  4. यह दृष्टिकोण Marx के Praxis और सर्वहारा मुक्ति के विचारों से सीधे जुड़ा है।

23. मार्क्स के विचारों का विश्लेषण करने वाले मनोवैज्ञानिकों ने उनके किस तत्व पर बल दिया?

a) वर्ग चेतना
b) विनाश की अनियंत्रित भूख
c) नैतिक बोध
d) दार्शनिक बुद्धिमत्ता

उत्तर: b) विनाश की अनियंत्रित भूख

व्याख्या:

  1. मनोवैज्ञानिक विश्लेषकों का मानना था कि Marx में “विनाश की अनियंत्रित भूख” थी।
    • इसका अर्थ है कि Marx पुराने सामाजिक ढाँचे को पूरी तरह उखाड़ फेंकने की प्रवृत्ति रखते थे।
  2. यह प्रवृत्ति उनके वर्ग-संघर्ष और क्रांतिकारी गतिविधियों में स्पष्ट रूप से झलकती है।
  3. Marx का यह मनोवैज्ञानिक तत्व उन्हें केवल वैचारिक विश्लेषक नहीं, बल्कि सक्रिय सामाजिक परिवर्तनकर्ता और पैगम्बर के रूप में प्रस्तुत करता है।
  4. यह दृष्टिकोण उनके Praxis और Revolution Activism से सीधे जुड़ा है।

24. कथन आधारित
कथन 1: मार्क्स ने कहा था कि “मुझे लगता था कि मैं जर्मनी का पहला समाजवादी तानाशाह बनूंगा।”
कथन 2: यह कथन उनके भीतर की सत्ता-आकांक्षा और क्रांतिकारी आत्मविश्वास को प्रकट करता है।


a) कथन 1 सही, कथन 2 गलत
b) कथन 1 गलत, कथन 2 सही
c) दोनों कथन सही और एक-दूसरे से संबंधित
d) दोनों कथन सही परंतु असंबंधित

उत्तर: c) दोनों कथन सही और एक-दूसरे से संबंधित

व्याख्या:

  1. Marx ने अपने मित्रों और सहकर्मियों के सामने यह कथन किया था, जिससे स्पष्ट होता है कि उनके भीतर क्रांतिकारी महत्वाकांक्षा और सत्ता की आकांक्षा थी।
  2. यह कथन Marx के व्यक्तित्व की जटिलता को उजागर करता है:
    • एक ओर वे सर्वहारा के लिए सामाजिक सुधार चाहते थे।
    • दूसरी ओर, वे स्वयं को सामाजिक परिवर्तन के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखते थे।
  3. इस प्रकार, कथन 1 और कथन 2 दोनों सत्य हैं और स्पष्ट रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
  4. यह दृष्टिकोण Marx के क्रांतिकारी आत्मविश्वास और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिचायक है।

25. मार्क्स के जीवन के अंतिम काल की स्थिति को निम्न में से कौन-सा वाक्यांश सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता है?

a) “बौद्धिक उत्कर्ष का युग”
b) “गुमनामी और शारीरिक क्षीणता का काल”
c) “क्रांति की पुनः योजना का समय”
d) “वैचारिक पुनर्जागरण का काल”

उत्तर: b) “गुमनामी और शारीरिक क्षीणता का काल”

व्याख्या:

  1. Marx के जीवन के अंतिम 15 वर्ष (लगभग 1868–1883) को उनके निष्क्रिय और शारीरिक रूप से दुर्बल काल के रूप में जाना जाता है।
  2. इस अवधि में:
    • उन्होंने कोई महत्वपूर्ण नई कृति नहीं लिखी।
    • वे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय नहीं थे
    • व्यक्तिगत जीवन में भी उन्हें परिवारिक संकट और मानसिक थकान का सामना करना पड़ा।
  3. इसलिए, इस काल को “गुमनामी और शारीरिक क्षीणता का काल” कहा जाता है।
  4. यह Marx के जीवन और कृतित्व के अंतिम चरण की वास्तविक स्थिति को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

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