1. मार्क्स के अनुसार अलगाव (Alienation) किस स्थिति को दर्शाता है?
(a) व्यक्ति केवल अपने परिवार से दूर हो जाता है।
(b) व्यक्ति अपनी मानवीय प्रकृति, कार्य प्रणाली और सामाजिक जीवन से दूर हो जाता है।
(c) व्यक्ति केवल अपने कार्यस्थल पर असमर्थ होता है।
(d) व्यक्ति केवल धार्मिक गतिविधियों में निष्क्रिय होता है।
उत्तर: (b) व्यक्ति अपनी मानवीय प्रकृति, कार्य प्रणाली और सामाजिक जीवन से दूर हो जाता है।
व्याख्या:
मार्क्स का “अलगाव” (Alienation) वह स्थिति है जिसमें मानव अपने ही श्रम, उत्पाद, सामाजिक संबंधों और मानवीय सार (Human Essence) से दूर हो जाता है।Karl Marx – Economic and Philosophic Manuscripts (1844) में उन्होंने अलगाव के चार रूप (Four Dimensions of Alienation) बताए हैं:
- उत्पाद से अलगाव (Alienation from the Product):
श्रमिक वह वस्तु बनाता है जिसे वह स्वयं नियंत्रित नहीं करता। उत्पाद उसका नहीं रहता।- उत्पादन प्रक्रिया से अलगाव (Alienation from the Process of Labour):
श्रमिक काम को “जीवन गतिविधि” नहीं बल्कि मजबूरी की तरह करता है।- मानवीय सार से अलगाव (Alienation from Species-being):
मनुष्य की रचनात्मक, चिंतनशील क्षमता दब जाती है — वह केवल मशीन जैसा काम करता है।- अन्य व्यक्तियों से अलगाव (Alienation from Other Humans):
पूँजीवादी ढांचा मनुष्य-मनुष्य के संबंधों को वस्तु संबंधों में बदल देता है।इन सभी रूपों का सार यही है कि व्यक्ति मानवीय प्रकृति, श्रम, सामाजिक जीवन और अपनी चेतना से दूर हो जाता है।
2. निम्नलिखित में से कौन सा कथन मार्क्स के अलगाव की व्याख्या के अनुरूप नहीं है?
(a) व्यक्ति अपनी कार्य प्रणाली और जीवन गतिविधि से दूर हो जाता है।
(b) व्यक्ति दूसरों और अपने इर्द-गिर्द की वास्तविकता से कट जाता है।
(c) अलगाव केवल बाहरी परिस्थितियों और परिवारिक दूरी का परिणाम है।
(d) व्यक्ति अपने स्वभाव और मानवीय सार से विमुख हो जाता है।
उत्तर: (c) अलगाव केवल बाहरी परिस्थितियों और परिवारिक दूरी का परिणाम है।
व्याख्या:
मार्क्स के अनुसार “अलगाव” (Alienation) व्यक्तिगत भावनाओं, पारिवारिक सम्बन्धों या बाहरी परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाली साधारण दूरी नहीं है।
यह पूँजीवादी उत्पादन प्रणाली (Capitalist Mode of Production) की एक गहराई से जकड़ी हुई संरचनात्मक समस्या है।मार्क्स के अनुसार अलगाव के प्रमुख आयाम:
- उत्पाद से अलगाव (Alienation from the Product)
श्रमिक जो वस्तु बनाता है, उसे नियंत्रित नहीं करता; वस्तु उससे अलग होकर पूँजीपति की संपत्ति बन जाती है।- उत्पादन प्रक्रिया से अलगाव (Alienation from Labour Process)
श्रमिक को प्रक्रिया पर कोई नियंत्रण नहीं होता; वह केवल मशीन की तरह काम करता है।- मानवीय सार से अलगाव (Alienation from Species-being)
मनुष्य की रचनात्मकता, चेतना और स्व-प्रकृति दब जाती है — वह अपने ही “मानवीय सार” से कट जाता है।- अन्य मनुष्यों से अलगाव (Alienation from Other Humans)
बाज़ार संबंध मानव संबंधों को वस्तु बना देते हैं।इस प्रकार, मार्क्स के अनुसार अलगाव पूँजीवाद द्वारा निर्मित सामाजिक-आर्थिक संबंधों का परिणाम है, न कि केवल पारिवारिक दूरी या व्यक्तिगत परिस्थितियाँ।
मार्क्स का अलगाव एक सिस्टम-जनित सामाजिक-आर्थिक समस्या है, जो श्रमिक को उसके श्रम, उत्पाद, मानवीय सार और संबंधों से काट देती है।
इसी कारण विकल्प (c) गलत है, क्योंकि यह अलगाव को केवल “परिवारिक दूरी या बाहरी कारणों” तक सीमित कर देता है, जबकि मार्क्स इसे पूरी उत्पादन प्रणाली का परिणाम मानते हैं।
3.
कथन 1: अलगाव की अवधारणा का दर्शनशास्त्र में प्रयोग हीगेल के बाद मार्क्स ने किया।
कथन 2: मार्क्स ने इसे केवल धार्मिक संदर्भ में ही उपयोग किया।
(a) केवल कथन 1 सही है।
(b) केवल कथन 2 सही है।
(c) दोनों कथन सही हैं।
(d) दोनों कथन गलत हैं।
उत्तर: (a) केवल कथन 1 सही है।
व्याख्या:
कथन 1 का विश्लेषण — सही
अलगाव (Alienation) की अवधारणा दार्शनिक परंपरा में पहले हीगेल (Hegel) ने प्रस्तुत की।
हीगेल के अनुसार अलगाव एक मानसिक-दार्शनिक प्रक्रिया है, जिसमें “मानस” (Geist) स्वयं से बाहर होकर वस्तुगत रूप लेता है।मार्क्स ने इस विचार को अपनाया, किन्तु पूरी तरह भौतिकवादी (Materialist) और सामाजिक-आर्थिक आधार पर विकसित किया।
मार्क्स के यहाँ अलगाव धार्मिक या दार्शनिक नहीं, बल्कि श्रम और उत्पादन संबंधों से उत्पन्न होता है।इसलिए कथन 1 पूरी तरह सही है।
कथन 2 का विश्लेषण — गलत
मार्क्स ने अलगाव की अवधारणा को केवल धार्मिक संदर्भ में उपयोग नहीं किया।
धार्मिक विमुखता (Religious Alienation) की चर्चा फ़ोएरबाख (Feuerbach) ने की थी — कि मनुष्य अपने गुणों को “ईश्वर” पर प्रक्षेपित कर देता है।मार्क्स ने इसे स्वीकार तो किया, लेकिन आगे जाकर यह कहा कि:
“धार्मिक अलगाव वास्तविक, भौतिक अलगाव का केवल प्रतिबिंब है।”
और उन्होंने मुख्य रूप से पूँजीवादी श्रम व्यवस्था, श्रमिक और उत्पादन, मानवीय सार तथा सामाजिक संबंधों में अलगाव को समझाया।
इसलिए कथन 2 गलत है क्योंकि मार्क्स का फोकस धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक अलगाव पर है।
- हीगेल → दार्शनिक (Idealist) अलगाव
- फ़ोएरबाख → धार्मिक अलगाव
- मार्क्स → सामाजिक-आर्थिक, भौतिकवादी (Materialist) अलगाव
अतः
कथन 1 सही है क्योंकि मार्क्स ने हीगेल की अवधारणा को भौतिकवादी रूप दिया।
कथन 2 गलत है क्योंकि मार्क्स ने अलगाव का उपयोग केवल धर्म के संदर्भ में नहीं, बल्कि पूरे पूँजीवादी श्रम ढाँचे में किया।
4. निम्नलिखित में से अलगाव के कौन-कौन से लक्षण हैं?
(सूची-I)
- व्यक्ति अपनी मानवीय प्रकृति से दूर हो जाता है।
- व्यक्ति अपनी कार्य प्रणाली और जीवन गतिविधि से दूर हो जाता है।
- व्यक्ति दूसरों और अपने इर्द-गिर्द की वास्तविकता से कट जाता है।
- व्यक्ति अपने वर्ग चेतना से पूर्ण रूप से मुक्त होता है।
सूची-II (लक्षण)
A. सामाजिक और आर्थिक जीवन से बेखबर होना
B. पूर्ण वैचारिक स्वतंत्रता
C. मानसिक सुन्नता और निष्क्रियता
D. व्यक्तियों से अलगाव
(a) 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
(b) 1-D, 2-A, 3-C, 4-B
(c) 1-A, 2-A, 3-C, 4-D
(d) 1-C, 2-A, 3-B, 4-D
उत्तर: (c) 1-A, 2-A, 3-C, 4-D
व्याख्या:
मार्क्स ने 1844 Manuscripts में अलगाव के चार मुख्य आयाम बताए—
(1) प्रकृति/मानवीय सार से अलगाव
(2) श्रम प्रक्रिया से अलगाव
(3) उत्पाद से अलगाव
(4) अन्य मनुष्यों से अलगावइन आयामों को ध्यान में रखकर सही मिलान इस प्रकार है:
(1) व्यक्ति अपनी मानवीय प्रकृति से दूर हो जाता है → A (सामाजिक और आर्थिक जीवन से बेखबर होना)
मार्क्स के अनुसार जब श्रमिक अपनी “species-being” (मानवीय सार) से दूर होता है, तब वह अपने वास्तविक सामाजिक और आर्थिक जीवन को समझ नहीं पाता।
→ इसलिए यह A से मेल खाता है।(2) व्यक्ति अपनी कार्य प्रणाली और जीवन गतिविधि से दूर हो जाता है → A (सामाजिक और आर्थिक जीवन से बेखबर होना)
श्रम प्रक्रिया से अलगाव व्यक्ति को अपने ही श्रम, उत्पादन और आर्थिक वास्तविकता से अंजान कर देता है।
→ इसलिए यह भी A से मेल खाता है।(3) व्यक्ति दूसरों और वास्तविकता से कट जाता है → C (मानसिक सुन्नता और निष्क्रियता)
जब मनुष्य अपने आसपास की वास्तविकता और संबंधों से कट जाता है तो सामाजिक संपर्क, संवेदनशीलता और चेतना सुन्न पड़ जाती है।
→ इसलिए यह C से मेल खाता है।(4) व्यक्ति अपने वर्ग चेतना से मुक्त होता है → D (व्यक्तियों से अलगाव)
वर्ग-चेतना की कमी व्यक्ति को अपने वर्ग से, साथ ही व्यापक सामाजिक संबंधों से भी अलग कर देती है।
→ इसलिए यह D से मेल खाता है।मार्क्स के अनुसार अलगाव एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति
- अपनी मानव प्रकृति,
- श्रम प्रक्रिया,
- सामाजिक संबंधों,
- और वर्ग-चेतना
सबसे दूर होता जाता है।यही कारण है कि सूची–I और सूची–II का सही मिलान (1-A, 2-A, 3-C, 4-D) है।
5.
कथन 1: अलगाव केवल कामगारों की व्यक्तिगत कमजोरी है।
कथन 2: अलगाव पूंजीवादी उत्पादन सम्बन्धों और वस्तुगत स्थितियों का परिणाम है।
(a) केवल कथन 1 सही है।
(b) केवल कथन 2 सही है।
(c) दोनों कथन सही हैं।
(d) दोनों कथन गलत हैं।
उत्तर: (b) केवल कथन 2 सही है।
व्याख्या:
कथन 1 — गलत
मार्क्स के अनुसार अलगाव (Alienation) व्यक्तिगत कमजोरी, आलस्य, अक्षमता या मानसिक कमी का परिणाम नहीं है।
यह किसी व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं है, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक संरचनात्मक समस्या है।पूँजीवादी व्यवस्था में श्रमिक स्वयं निर्णय नहीं लेता, न उत्पादन का मालिक होता है; वह उत्पादन प्रक्रिया का “हिस्सा” बन जाता है।
इसलिए अलगाव को “व्यक्तिगत कमजोरी” कहना मार्क्स की अवधारणा का गलत अर्थ है।कथन 2 — सही
मार्क्स का स्पष्ट तर्क है कि अलगाव की जड़ें पूंजीवादी उत्पादन सम्बन्धों में हैं।
क्योंकि:
- श्रमिक अपने श्रम के उत्पाद से अलग हो जाता है।
- श्रमिक उत्पादन प्रक्रिया पर अपना नियंत्रण खो देता है।
- श्रमिक अपनी species-being (मानवीय सार) से दूर हो जाता है।
- श्रमिक अन्य मनुष्यों से प्रतिस्पर्धा और शोषण के कारण अलग हो जाता है।
ये सभी कारण श्रमिक की व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि पूंजीवाद की संरचना (Structure of Capitalism) से उत्पन्न होते हैं।
इसलिए कथन 2 पूरी तरह सही है।
मार्क्स के अनुसार अलगाव:
- न तो व्यक्तिगत असफलता है
- न ही कामगार की कोई कमजोरी
बल्कि यह पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली का स्वाभाविक परिणाम है, जिसमें श्रमिक का श्रम, उत्पाद, और मानवीय सार उससे छीन लिया जाता है।
इसीलिए सही विकल्प (b) केवल कथन 2 सही है।
6. मार्क्स के अनुसार अलगाव (Alienation) का अमानवीकरण (De-humanisation) किसमें प्रकट होता है?
(a) कामगार केवल अपनी दिहाड़ी या वेतन के लिए काम करता है, लाभ से उसका कोई सम्बन्ध नहीं होता।
(b) कामगार अपने परिवार से पूरी तरह अलग हो जाता है।
(c) कामगार केवल धार्मिक गतिविधियों में निष्क्रिय रहता है।
(d) कामगार उत्पादन प्रक्रिया को पूरी तरह नियंत्रित करता है।
उत्तर: (a) कामगार केवल अपनी दिहाड़ी या वेतन के लिए काम करता है, लाभ से उसका कोई सम्बन्ध नहीं होता।
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स के अनुसार अलगाव (Alienation) का सबसे महत्वपूर्ण रूप है अमानवीकरण (De-humanisation) — अर्थात वह प्रक्रिया जिसमें मजदूर अपनी मानवीय सार, उसकी रचनात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति से कट जाता है।पूंजीवादी व्यवस्था में मजदूर उत्पादन प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करता। वह केवल इतना जानता है कि उसे काम के बदले कुछ दिहाड़ी या वेतन मिलेगा।
- उसे उत्पादन पर कोई अधिकार नहीं होता।
- उत्पादित वस्तुओं से उसका कोई भावनात्मक या सामाजिक सम्बन्ध नहीं बचता।
- उसका श्रम उसके लिए “सृजन” नहीं, बल्कि “जीविका कमाने का साधन” बन जाता है।
इसीलिए मार्क्स लिखते हैं:
“The worker feels himself at home only during his leisure time, whereas at work he feels homeless.”
(“मजदूर स्वयं को केवल अवकाश के समय घर जैसा महसूस करता है; काम के दौरान वह स्वयं को बेघर-सा महसूस करता है।”)यही अमानवीकरण है—मजदूर अपनी ही मानवीय क्षमता और रचनात्मकता से अलग हो जाना।
पूंजीवाद में मजदूर उत्पादन का सक्रिय रचनाकार नहीं, बल्कि केवल एक साधन बन जाता है। वह केवल वेतन पर केंद्रित हो जाता है, लाभ और उत्पादन प्रक्रिया से उसका कोई सम्बन्ध नहीं रहता—यही अलगाव का अमानवीकरण दिखाता है।
7. निम्नलिखित में से अलगाव की अवस्था का सही क्रम चुनें (Stages of Alienation According to Marx):
- सामान्य सहयोग की अवस्था
- आत्म अलगाव (Self Alienation)
- सामूहिक अलगाव (Collective Alienation)
- अ-अलगाव (De-alienation)
(a) 1 → 2 → 3 → 4
(b) 2 → 1 → 3 → 4
(c) 1 → 3 → 2 → 4
(d) 4 → 3 → 2 → 1
उत्तर: (a) 1 → 2 → 3 → 4
व्याख्या:
मार्क्स के अनुसार अलगाव (Alienation) का विकास एक क्रमिक सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति और समाज दोनों प्रभावित होते हैं।1. सामान्य सहयोग की अवस्था (Normal Cooperation Stage)
यह प्रारंभिक अवस्था है, जब मनुष्य सामूहिक रूप से उत्पादन करता है और श्रम ही उसकी रचनात्मकता और सामाजिकता का प्राकृतिक विस्तार होता है। इस अवस्था में अलगाव अभी प्रारंभ नहीं हुआ होता।
2. आत्म अलगाव (Self Alienation)
पूंजीवादी उत्पादन संबंधों के कारण व्यक्ति अपने ही श्रम, अपनी रचनात्मकता और मानवीय सार से दूर होने लगता है।
- काम बोझ बन जाता है
- श्रम उसका नहीं रह जाता
- वह स्वयं से ही कटने लगता है
3. सामूहिक अलगाव (Collective Alienation)
जब यह व्यक्तिगत अलगाव व्यापक हो जाता है, तब पूरा वर्ग (मजदूर वर्ग) इससे प्रभावित होता है।
- श्रमिक वर्ग एक सामूहिक रूप से असहाय
- उत्पादन पर नियंत्रणहीन
- सामाजिक विघटन का शिकार
यह सामूहिक चेतना के स्तर पर अलगाव है।
4. अ-अलगाव (De-alienation)
मार्क्स के अनुसार यह अंतिम चरण है, जो सामूहिक वर्ग-संघर्ष और क्रांतिकारी चेतना के माध्यम से प्राप्त होता है।
- मजदूर उत्पादन पर नियंत्रण पाता है
- मानव अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता लौटाता है
- सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित होती है
इसे मार्क्स क्रांतिकारी मुक्ति की अवस्था मानते हैं।
मार्क्स के अनुसार अलगाव का विकास पहले व्यक्ति के स्तर पर शुरू होकर सामूहिक सामाजिक स्तर तक पहुँचता है, और अंततः क्रान्तिकारी परिवर्तन के द्वारा समाप्त होता है। अतः सही क्रम है:
सामान्य सहयोग → आत्म अलगाव → सामूहिक अलगाव → अ-अलगाव
8.
कथन 1: अलगाव की अंतिम अवस्था में कामगारों में क्रान्तिकारी शक्ति पैदा होती है।
कथन 2: अ-अलगाव (De-alienation) के पश्चात कामगार अपनी शक्तिहीनता को स्वीकार करता है।
(a) केवल कथन 1 सही है।
(b) केवल कथन 2 सही है।
(c) दोनों कथन सही हैं।
(d) दोनों कथन गलत हैं।
उत्तर: (a) केवल कथन 1 सही है।
व्याख्या:
मार्क्स के अनुसार अलगाव (Alienation) एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसकी अंतिम अवस्था अंतर-व्यक्तिगत और सामूहिक संघर्ष से क्रान्तिकारी चेतना का निर्माण करती है।
कथन 1 — सही
- अ-अलगाव (De-alienation) की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब श्रमिक अपनी वस्तुगत अलगाव की स्थिति और पूँजीवादी शोषण को समझता है।
- इस चेतना के विकास से क्रान्तिकारी शक्ति और सामूहिक संघर्ष की क्षमता उत्पन्न होती है।
- मजदूर उत्पादन पर नियंत्रण पाकर और सामाजिक समानता स्थापित करके अपने अलगाव को समाप्त करता है।
इसलिए कथन 1 पूरी तरह सही है।
कथन 2 — गलत
- अ-अलगाव का मतलब श्रमिक की शक्तिहीनता का स्वीकार करना नहीं है।
- बल्कि इसका अर्थ है कि श्रमिक अपने अधिकारों और शक्ति को पुनः प्राप्त करता है और उत्पादन प्रक्रिया पर नियंत्रण स्थापित करता है।
- श्रमिक अब वस्तु, श्रम और अन्य व्यक्तियों से अलग नहीं रहता।
इसलिए कथन 2 गलत है।
अलगाव की अंतिम अवस्था में मजदूर क्रान्तिकारी शक्ति और सामूहिक चेतना प्राप्त करता है।
अधिक शक्तिहीनता या हार स्वीकार करना अ-अलगाव की अवधारणा का हिस्सा नहीं है।
9. अलगाववादी अवधारणा पर विवाद किसके कारण बढ़ा?
(a) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दार्शनिक और समाजशास्त्रियों के बीच इसके अर्थ पर मतभेद।
(b) मार्क्स ने इसे केवल धार्मिक संदर्भ में रखा।
(c) अलगाव केवल व्यक्तिगत कमजोरी मान ली गई।
(d) यह केवल कामगारों के व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित थी।
उत्तर: (a) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दार्शनिक और समाजशास्त्रियों के बीच इसके अर्थ पर मतभेद।
व्याख्या:
इतिहास और संदर्भ
- अलगाव (Alienation) की अवधारणा मार्क्स से पहले ही हीगेल और फ़ोएरबाख जैसे दार्शनिकों द्वारा प्रस्तुत की गई थी।
- मार्क्स ने इसे सामाजिक-आर्थिक और पूंजीवादी श्रम व्यवस्था से जोड़कर व्यावहारिक रूप दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विवाद
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप और अमेरिका में साहित्यिक और दार्शनिक ध्यान बढ़ा।
- अलगाव की अवधारणा पर मार्क्सवादी और गैर-मार्क्सवादी विचारकों में मतभेद उत्पन्न हुए।
- कुछ विचारकों ने इसे व्यक्तिगत और मानसिक अनुभव माना, जबकि अन्य ने इसे सामाजिक और आर्थिक संरचना से संबंधित माना।
- नतीजतन, अलगाव की व्याख्या और इसके प्रभावों को लेकर विचारों में विरोधाभास पैदा हुआ।
अन्य विकल्पों का खंडन
- (b) गलत: मार्क्स ने इसे केवल धार्मिक संदर्भ में नहीं रखा।
- (c) गलत: अलगाव व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है।
- (d) गलत: अलगाव सिर्फ व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं है, यह सामाजिक-आर्थिक संरचना से जुड़ा है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अलगाव की अवधारणा पर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि दार्शनिक और समाजशास्त्री इसके अर्थ और व्याख्या पर सहमत नहीं थे।
मार्क्सवादी और गैर-मार्क्सवादी दृष्टिकोणों में अंतर ने इस विवाद को गहरा किया।
10. निम्नलिखित में से कौन-कौन लेखक अलगाव की अवधारणा पर लिखे हैं?
(सूची-I)
- लुकास (Luckas)
- ब्लाँच (Bloch)
- ई. फ्रोम (E. Fromm)
- हीगेल (Hegel)
सूची-II
A. मार्क्स और हीगेल की परम्परा में अलगाव
B. समाजशास्त्र और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
C. केवल दर्शनशास्त्र का प्रयोग
D. व्यक्तिगत श्रम का महत्व
(a) 1-A, 2-B, 3-B, 4-C
(b) 1-B, 2-A, 3-C, 4-D
(c) 1-A, 2-A, 3-B, 4-A
(d) 1-C, 2-B, 3-A, 4-B
उत्तर: (a) 1-A, 2-B, 3-B, 4-C
व्याख्या:
1. लुकास (Luckas) → A
- लुकास ने मार्क्सवादी दृष्टिकोण को हीगेल की दर्शन परंपरा के साथ जोड़ा और सामाजिक अलगाव (Social Alienation) पर लिखा।
- उन्होंने यह दिखाया कि कैसे पूंजीवादी समाज में श्रमिक अपने श्रम और सामाजिक संबंधों से अलग हो जाता है।
2. ब्लाँच (Bloch) → B
- ब्लाँच ने अलगाव को समाजशास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण में लिखा।
- उन्होंने विचार किया कि सामाजिक असमानता और आदर्शों की कमी व्यक्ति के मानसिक और सामाजिक अलगाव को बढ़ाती है।
3. ई. फ्रोम (E. Fromm) → B
- फ्रोम ने अलगाव (Alienation) को मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय संदर्भ में व्याख्यायित किया।
- उनकी किताब The Sane Society में आधुनिक समाज में व्यक्ति की अलगाव और अकेलेपन पर जोर है।
4. हीगेल (Hegel) → C
- हीगेल ने अलगाव की अवधारणा दर्शनशास्त्र (Philosophy) में दी।
- उनके अनुसार यह “मानस (Geist)” की स्व-विदारक प्रक्रिया (Self-alienation) है, जो अंततः आत्म-साक्षात्कार और सामूहिक चेतना में बदलती है।
अलगाव की अवधारणा कई दृष्टिकोणों में विकसित हुई:
- दर्शनशास्त्र (Hegel)
- मार्क्सवादी सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण (Luckas, Marx)
- समाजशास्त्र और मनोविज्ञान (Bloch, Fromm)
11. संरचनावादी मार्क्सवादियों (Structuralist-Marxists) के अनुसार अलगाव का मुख्य कारण क्या है?
(a) व्यक्तिगत अनुभव और भावनाएँ
(b) व्यक्तिगत सम्पत्ति, वर्ग प्रभुत्व, शोषण और श्रम विभाजन
(c) केवल अस्तित्ववादी दृष्टिकोण
(d) सामाजिक अनुकूलन की कमी
उत्तर: (b) व्यक्तिगत सम्पत्ति, वर्ग प्रभुत्व, शोषण और श्रम विभाजन
व्याख्या:
संरचनावादी मार्क्सवाद (Structuralist Marxism), जिसे प्रमुख रूप से लुई अलथूसर (Louis Althusser) और उनके अनुयायियों ने विकसित किया, यह मानता है कि समाज की संरचना और उत्पादन संबंध व्यक्ति के अनुभव से अधिक प्रभावशाली होते हैं।अलगाव (Alienation) की प्रक्रिया मुख्य रूप से पूंजीवादी सामाजिक-आर्थिक संरचना से उत्पन्न होती है। इसके प्रमुख कारण हैं:
- व्यक्तिगत सम्पत्ति (Private Property):
- पूंजीपति वर्ग उत्पादन साधनों का मालिक होता है।
- श्रमिक केवल अपनी श्रम शक्ति बेचता है, उसका श्रम और उत्पाद पूंजीपति के पास चले जाते हैं।
- वर्ग प्रभुत्व (Class Domination):
- पूंजीपति वर्ग श्रमिकों पर नियंत्रण रखता है।
- श्रमिक अपने कार्य और उत्पाद पर निर्णय लेने में स्वतंत्र नहीं होता।
- श्रम विभाजन (Division of Labour):
- श्रम प्रक्रिया में काम के छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजन श्रमिक को केवल एक सीमित कार्य तक सीमित कर देता है।
- इससे श्रमिक अपने श्रम की रचनात्मकता और सार से कट जाता है।
- शोषण (Exploitation):
- श्रमिक का उत्पादन पूंजीपति के लाभ के लिए उपयोग होता है।
- श्रमिक को उसका श्रमपूर्ण योगदान प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलता, जिससे अमानवीकरण और मानसिक अलगाव बढ़ता है।
इस प्रकार, संरचनावादी मार्क्सवादियों के अनुसार अलगाव संरचनात्मक और सामाजिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न होता है, न कि केवल व्यक्तिगत अनुभव या मानसिक स्थिति से।
संरचनावादी मार्क्सवादियों का दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि पूंजीवादी समाज में श्रमिक का अलगाव व्यक्तिगत कमजोरी या अनुभव का परिणाम नहीं, बल्कि संपत्ति, वर्ग प्रभुत्व, श्रम विभाजन और शोषण की संरचना के कारण उत्पन्न होता है।
12. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अस्तित्ववादी दृष्टिकोण से अलगाव को सही ढंग से व्याख्यायित करता है?
(a) अलगाव केवल उत्पादन और श्रम विभाजन का परिणाम है।
(b) अलगाव व्यक्ति की स्वयं की अस्तित्ववादी स्थिति और अनुभव से जुड़ा है।
(c) अलगाव केवल वंशानुगत सम्पत्ति से जुड़ा है।
(d) अलगाव केवल सामाजिक चेतना का उत्पादन है।
उत्तर: (b) अलगाव व्यक्ति की स्वयं की अस्तित्ववादी स्थिति और अनुभव से जुड़ा है।
व्याख्या:
अस्तित्ववादी दृष्टिकोण (Existentialist Perspective) में अलगाव (Alienation) को मुख्य रूप से व्यक्ति के स्वयं के अस्तित्व (Being) और अनुभव (Experience) से जोड़ा जाता है।मुख्य विचारक और अवधारणा
- Jean-Paul Sartre:
- व्यक्ति का अस्तित्व ही उसकी स्वतंत्रता और विकल्पों से जुड़ा है।
- अलगाव तब उत्पन्न होता है जब व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता, उद्देश्य और वास्तविक अस्तित्व से कट जाता है।
- यह सामाजिक या उत्पादन संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति का व्यक्तिगत अनुभव और चेतना मुख्य हैं।
- Paul Tillich:
- Tillich के अनुसार व्यक्ति का धार्मिक और अस्तित्वगत संघर्ष भी अलगाव का कारण बनता है।
- व्यक्ति अपने अस्तित्व की वास्तविकता से विमुख हो सकता है, जिससे मानसिक और भावनात्मक अलगाव उत्पन्न होता है।
अलगाव की विशेषताएँ अस्तित्ववादी दृष्टिकोण में
- यह अंदरूनी, व्यक्तिगत और अनुभवात्मक होता है।
- समाज और उत्पादन प्रणाली इसके कारक हो सकते हैं, लेकिन मुख्य कारण व्यक्ति का आत्म-बोध और अस्तित्वगत संघर्ष है।
- अस्तित्ववादी दृष्टिकोण में अलगाव की समझ व्यक्तिगत स्वतंत्रता, चेतना और आत्म-अभिव्यक्ति से जुड़ी होती है।
अस्तित्ववादी दृष्टिकोण के अनुसार, अलगाव केवल सामाजिक या उत्पादन संबंधों का परिणाम नहीं है। यह व्यक्ति के स्वयं के अस्तित्व, अनुभव और चेतना से उत्पन्न होता है।
13.
कथन 1: वैयक्तिक विघटन (Personal Disorganization) को ऐनोमिक स्थिति भी कहा गया है।
कथन 2: ऐनोमिक स्थिति के विचार को मार्क्स ने प्रतिपादित किया।
(a) केवल कथन 1 सही है।
(b) केवल कथन 2 सही है।
(c) दोनों कथन सही हैं।
(d) दोनों कथन गलत हैं।
उत्तर: (a) केवल कथन 1 सही है।
व्याख्या:
वैयक्तिक विघटन (Personal Disorganization) का विचार समाजशास्त्र में ऐनोमी (Anomie) से संबंधित है।ऐनोमी और वैयक्तिक विघटन
- ऐनोमी का सिद्धांत Émile Durkheim ने विकसित किया।
- इसका अर्थ है सामाजिक मानकों और नियमों का टूटना, जिसके कारण व्यक्ति मानसिक और सामाजिक असंतुलन का अनुभव करता है।
- इसे Personal Disorganization के समान माना गया क्योंकि व्यक्ति अपने सामाजिक और नैतिक ढांचे से कट जाता है।
मार्क्स का दृष्टिकोण
- मार्क्स ने अलगाव (Alienation) की अवधारणा विकसित की, जो सामाजिक-आर्थिक संरचना और श्रम संबंधों पर केंद्रित है।
- मार्क्स ने ऐनोमी या वैयक्तिक विघटन की अवधारणा प्रतिपादित नहीं की।
- ऐनोमी और अलगाव दोनों अलग-अलग सामाजिक प्रक्रियाओं को समझाते हैं।
आधुनिक विकास
- रॉबर्ट मर्टन (Robert Merton) ने ऐनोमी के सिद्धांत को सामाजिक संरचना और उद्देश्य/साधन के असंतुलन के रूप में विकसित किया।
- यह विचार वैयक्तिक विघटन की आधुनिक व्याख्या में महत्वपूर्ण है।
वैयक्तिक विघटन को ऐनोमिक स्थिति कहा गया है और इसे दुर्खीम तथा मर्टन ने विकसित किया।
मार्क्स ने ऐनोमी का विचार प्रतिपादित नहीं किया।
14. अलगाव की दार्शनिक बहुलता (Philosophical Plurality) में किन विचारकों का योगदान महत्वपूर्ण है?
सूची-I
- हैडेगर (Heidegger)
- सात्रै (Sartre)
- अल्युजर (Althusser)
- टीलिच (Tillich)
सूची-II
A. अस्तित्ववादी दृष्टिकोण
B. संरचनावादी मार्क्सवाद
C. पूंजीवादी समाज में श्रमिक का अमानवीकरण
D. वैयक्तिक विघटन
(a) 1-A, 2-A, 3-B, 4-A
(b) 1-B, 2-B, 3-A, 4-D
(c) 1-C, 2-D, 3-B, 4-A
(d) 1-A, 2-B, 3-A, 4-C
उत्तर: (a) 1-A, 2-A, 3-B, 4-A
व्याख्या:
1. हैडेगर (Heidegger) → अस्तित्ववादी दृष्टिकोण (A)
- हैडेगर ने मानव अस्तित्व (Being) और दुनिया में उसके स्थान के संदर्भ में अलगाव की व्याख्या की।
- उनके अनुसार, व्यक्ति का दुनिया और स्वयं से कटाव अस्तित्ववादी अलगाव का मूल है।
2. सात्रै (Sartre) → अस्तित्ववादी दृष्टिकोण (A)
- सात्रै ने अस्तित्ववादी दृष्टिकोण से अलगाव को समझाया।
- मानव की स्वतंत्रता, विकल्प और अस्तित्वगत संघर्ष उसे सामाजिक और आत्मिक अलगाव की स्थिति में ले जाता है।
- उनकी किताब Being and Nothingness में यह गहन रूप से स्पष्ट है।
3. अल्युजर (Althusser) → संरचनावादी मार्क्सवाद (B)
- अल्युजर ने संरचनावादी मार्क्सवादी दृष्टिकोण से अलगाव को समझाया।
- उनके अनुसार यह पूंजीवादी समाज, श्रम विभाजन और वर्ग प्रभुत्व की संरचना का परिणाम है।
4. टीलिच (Tillich) → अस्तित्ववादी दृष्टिकोण (A)
- टीलिच ने धार्मिक और अस्तित्ववादी दृष्टिकोण से अलगाव की व्याख्या की।
- उन्होंने बताया कि व्यक्ति का आध्यात्मिक और अस्तित्वगत संघर्ष भी अलगाव का कारण बनता है।
अलगाव की दार्शनिक बहुलता को समझने के लिए विभिन्न दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं:
- हैडेगर और सात्रै: अस्तित्ववादी दृष्टिकोण
- अल्युजर: संरचनावादी मार्क्सवाद
- टीलिच: अस्तित्ववादी और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
15. मार्क्स के अनुसार अलगाव की विशेषताओं में ‘अमानवीकरण’ किस प्रकार प्रकट होता है?
(a) उत्पादन प्रक्रिया में भावनाओं और संवेगों का जुड़ाव नहीं होना
(b) व्यक्तियों का समूह के साथ अनुकूलन होना
(c) केवल धार्मिक गतिविधियों में शामिल होना
(d) वंशानुगत सम्पत्ति के कारण वर्ग निर्धारण
उत्तर: (a) उत्पादन प्रक्रिया में भावनाओं और संवेगों का जुड़ाव नहीं होना
व्याख्या:
अमानवीकरण (De-humanisation), मार्क्स के अलगाव (Alienation) सिद्धांत का एक प्रमुख पहलू है।मुख्य बिंदु
- उत्पादन प्रक्रिया में यांत्रिक श्रम:
- पूंजीवादी समाज में कामगार अपने श्रम को केवल मजदूरी या दिहाड़ी के लिए करता है।
- काम की रचनात्मकता और भावनात्मक जुड़ाव नष्ट हो जाता है।
- भावनाओं और संवेगों का कटाव:
- कामगार अपने श्रम के उत्पाद और प्रक्रिया से भावनात्मक रूप से अलग हो जाता है।
- इसका परिणाम यह होता है कि श्रमिक मानवीय अनुभव और संतोष से कट जाता है।
- अलगाव का प्रभाव:
- व्यक्ति अपने काम, सामाजिक जीवन और आत्म-साक्षात्कार से विमुख हो जाता है।
- उत्पादन के केवल यांत्रिक पहलुओं में संलग्न रहने के कारण मानसिक और सामाजिक अमानवीकरण होता है।
मार्क्स के अनुसार अमानवीकरण उस स्थिति को दर्शाता है जब कामगार उत्पादन प्रक्रिया में केवल यांत्रिक रूप से शामिल होता है, और उसके काम में भावनाएँ और संवेग जुड़ते नहीं हैं। यह श्रमिक को अपने श्रम, उत्पाद और सामाजिक जीवन से अलग कर देता है।
16. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता ‘वैयक्तिक विघटन (Personal Disorganization)’ से सम्बंधित है?
(a) कामगार अपने समूह और समाज के नियमों को स्वीकार नहीं करता।
(b) कामगार उत्पादन प्रक्रिया से पूर्णतः जुड़ा रहता है।
(c) कामगार अपने परिवार से पूर्णतः अलग हो जाता है।
(d) कामगार पूंजीपति के लाभ में पूर्णतः भागीदार होता है।
उत्तर: (a) कामगार अपने समूह और समाज के नियमों को स्वीकार नहीं करता।
व्याख्या:
वैयक्तिक विघटन (Personal Disorganization) की अवधारणा समाजशास्त्र में ऐनोमी (Anomie) से जुड़ी हुई है।मुख्य बिंदु
- सामाजिक नियमों और मानकों का उल्लंघन:
- वैयक्तिक विघटन की अवस्था में व्यक्ति समाज और समूह के स्थापित नियमों और अपेक्षाओं का पालन नहीं करता।
- इसे दुर्खीम (Émile Durkheim) ने समझाया और “Anomic Condition” के रूप में प्रतिपादित किया।
- सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी की कमी:
- व्यक्ति अपनी सामाजिक भूमिका और जिम्मेदारी के प्रति बेखबर हो जाता है।
- इससे सामाजिक और मानसिक असंतुलन उत्पन्न होता है।
- आधुनिक दृष्टिकोण:
- रॉबर्ट मर्टन (Robert K. Merton) ने इसे सामाजिक संरचना और लक्ष्य/साधन असंतुलन के संदर्भ में विकसित किया।
- इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत और सामाजिक कर्तव्यों से विमुख हो जाता है।
वैयक्तिक विघटन (Personal Disorganization) की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि व्यक्ति समूह और समाज के नियमों को स्वीकार नहीं करता, और सामाजिक भूमिका के प्रति चेतना खो देता है।
17. Josephson और Josephson के अनुसार अलगाव में व्यक्ति किस स्थिति में होता है?
(a) केवल अपने परिवार से अलग
(b) स्वयं, अपने इर्द-गिर्द के लोगों और दुनियाँ से पृथक
(c) केवल उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े
(d) केवल श्रम विभाजन के कारण
उत्तर: (b) स्वयं, अपने इर्द-गिर्द के लोगों और दुनियाँ से पृथक
व्याख्या:
Josephson & Josephson ने अलगाव (Alienation) को व्यक्तिगत और मानसिक अनुभव के दृष्टिकोण से परिभाषित किया।मुख्य बिंदु
- व्यक्तिगत अनुभव पर केंद्रित:
- व्यक्ति केवल सामाजिक या आर्थिक कारणों से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के अनुभव और चेतना के आधार पर अलगाव का अनुभव करता है।
- संपूर्ण सामाजिक और मानसिक पृथकता:
- व्यक्ति अपने आप, अपने इर्द-गिर्द के लोगों और संपूर्ण दुनियाँ से कट जाता है।
- इसका प्रभाव मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर दिखता है।
- व्यक्तिगत समस्या के रूप में अलगाव:
- यह केवल आर्थिक शोषण या सामाजिक संरचना का परिणाम नहीं है।
- व्यक्ति अपने आत्म-बोध और सामाजिक संपर्कों की कमी के कारण अलगाव अनुभव करता है।
Josephson और Josephson के अनुसार अलगाव वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति स्वयं, अपने आस-पास के लोगों और पूरे सामाजिक और भौतिक जगत से पृथक हो जाता है।
18. अलगाव को वस्तुगत जीवन पद्धति (Objective Life Pattern) के रूप में समझने का तात्पर्य क्या है?
(a) व्यक्ति की केवल भावना और अनुभूति को देखना
(b) जीवनयापन की एक पद्धति जो व्यक्ति को समाज और कारखाने से विमुख कर देती है
(c) केवल मानसिक स्थिति का अध्ययन
(d) उत्पादन में भागीदारी का पूर्ण नियंत्रण
उत्तर: (b) जीवनयापन की एक पद्धति जो व्यक्ति को समाज और कारखाने से विमुख कर देती है
व्याख्या:
अलगाव (Alienation) केवल मानसिक या भावनात्मक स्थिति नहीं है, बल्कि वस्तुगत जीवन पद्धति (Objective Life Pattern) के रूप में भी मौजूद है।मुख्य बिंदु
- वस्तुगत पहलू:
- व्यक्ति का अलगाव केवल उसके अनुभव या भावना का विषय नहीं है।
- यह सामाजिक और आर्थिक संरचना, जैसे उत्पादन प्रक्रिया और जीवनयापन की व्यवस्था, द्वारा निर्मित होता है।
- उत्पादन और समाज से विमुखता:
- पूंजीवादी समाज में जीवनयापन और उत्पादन की पद्धति कामगार को सामाजिक और आर्थिक जीवन से अलग कर देती है।
- व्यक्ति अपने श्रम के उत्पाद और समाज के सामान्य जीवन से कट जाता है।
- व्यक्तिगत और सामाजिक प्रभाव:
- यह केवल मानसिक या भावनात्मक स्थिति नहीं है;
- यह व्यक्तिगत अनुभव और सामाजिक वास्तविकताओं का मिश्रण है।
अलगाव को वस्तुगत जीवन पद्धति के रूप में समझना यह दर्शाता है कि जीवनयापन और उत्पादन की संरचना व्यक्ति को समाज और कार्यस्थल से विमुख करती है, न कि केवल मानसिक या भावनात्मक स्तर पर।
19. A.P. Ogurtsov के अनुसार अलगाव की दार्शनिक व्याख्या में क्या मुख्य बिंदु है?
(a) केवल उत्पादन से लाभ कमाना
(b) व्यक्ति की गतिविधियों का वस्तुगत परिवर्तन और क्रियाकलापों का गौण होना
(c) केवल सामाजिक चेतना का निर्माण
(d) व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विकास
उत्तर: (b) व्यक्ति की गतिविधियों का वस्तुगत परिवर्तन और क्रियाकलापों का गौण होना
व्याख्या:
A.P. Ogurtsov ने अलगाव (Alienation) की दार्शनिक व्याख्या में इसे व्यक्तिगत गतिविधियों और क्रियाकलापों के वस्तुगत परिवर्तन के रूप में देखा।मुख्य बिंदु
- वस्तुगत परिवर्तन:
- व्यक्ति की दैनिक गतिविधियाँ और श्रम के क्रियाकलाप पूंजीवादी उत्पादन प्रक्रिया के कारण स्वतंत्र और रचनात्मक नहीं रहते।
- उनका उद्देश्य केवल उत्पादन प्रक्रिया और पूंजीपति के हितों के अधीन हो जाता है।
- क्रियाकलापों का गौण होना:
- व्यक्ति की व्यक्तिगत पहल, रचनात्मकता और स्वतंत्र क्रियाएँ गौण हो जाती हैं।
- कामगार अपने श्रम और जीवन के निर्णयों पर नियंत्रण खो देता है।
- दार्शनिक दृष्टिकोण:
- Ogurtsov ने इसे मार्क्सवादी अलगाव का दार्शनिक रूप कहा, जो दिखाता है कि व्यक्ति का कार्य और गतिविधियाँ वस्तुगत बन कर उस पर हावी हो जाती हैं।
Ogurtsov के अनुसार, अलगाव का मुख्य बिंदु यह है कि व्यक्ति की गतिविधियाँ वस्तुगत रूप से बदल जाती हैं और उनके क्रियाकलाप गौण हो जाते हैं, जिससे उसका नियंत्रण और रचनात्मकता समाप्त हो जाती है।
20. अलगाव की ऐतिहासिक और उत्पादन प्रक्रिया संदर्भ में व्याख्या किस दार्शनिक पर आधारित है?
(a) Sartre
(b) Hegel
(c) Tillich
(d) Marx
उत्तर: (d) Marx
व्याख्या:
मार्क्स (Karl Marx) ने अलगाव (Alienation) की व्याख्या को ऐतिहासिक और उत्पादन प्रक्रिया के दो मुख्य संदर्भों में समझाया।मुख्य बिंदु
- ऐतिहासिक संदर्भ:
- मार्क्स ने अलगाव को समाज और उत्पादन संबंधों के ऐतिहासिक विकास के हिस्से के रूप में देखा।
- उन्होंने बताया कि पूंजीवादी उत्पादन व्यवस्था ने श्रमिकों को उनके श्रम और उत्पाद से अलग कर दिया।
- उत्पादन प्रक्रिया संदर्भ:
- उत्पादन प्रक्रिया में श्रमिक का श्रम उसके नियंत्रण और रचनात्मकता से अलग हो जाता है।
- इसके कारण श्रमिक अमानवीकृत और सामाजिक रूप से अलग महसूस करता है।
- दार्शनिक पृष्ठभूमि:
- यह विचार मूल रूप से Hegel के दर्शन से प्रभावित है, लेकिन मार्क्स ने इसे वैज्ञानिक और सामाजिक स्तर पर विकसित किया।
- यह दृष्टिकोण ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) और पूंजीवादी उत्पादन संरचना पर आधारित है।
मार्क्स ने अलगाव की व्याख्या ऐतिहासिक और उत्पादन प्रक्रिया दोनों संदर्भों में की है। यह व्यक्तित्व, श्रम और सामाजिक संरचना के बीच संबंध को समझने का सबसे प्रमुख और वैज्ञानिक दृष्टिकोण है।
21. Richard Swat के अनुसार अलगाव के किस प्रकार में व्यक्ति अपने काम और स्वयं के मस्तिष्क से अलग होता है?
(a) आदमी का प्रकृति से अलगाव
(b) आदमी का अपने मित्रों से अलगाव
(c) आदमी का अपने काम तथा स्वयं मस्तिष्क से अलगाव
(d) आदमी का स्वयं से अलगाव
उत्तर: (c) आदमी का अपने काम तथा स्वयं मस्तिष्क से अलगाव
व्याख्या:
Richard Swat ने अलगाव (Alienation) को सामाजिक और मानसिक विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया।मुख्य बिंदु
- काम और मस्तिष्क से अलगाव (Work and Mind Alienation):
- व्यक्ति अपने श्रम और मानसिक क्रियाओं से कट जाता है।
- उत्पादन प्रक्रिया केवल यांत्रिक कार्य बन जाती है और रचनात्मक या बौद्धिक पहलू गौण हो जाते हैं।
- मानसिक और सामाजिक विमुखता:
- व्यक्ति न केवल शारीरिक श्रम से बल्कि अपने सोचने, निर्णय लेने और रचनात्मक मानसिक क्रियाओं से भी अलग हो जाता है।
- यह प्रकार मुख्य रूप से पूंजीवादी समाज और विभाजित श्रम प्रणाली में दिखाई देता है।
- Swat का दृष्टिकोण:
- अलगाव केवल बाहरी सामाजिक संरचना का परिणाम नहीं है;
- यह व्यक्तिगत मानसिक अनुभव और सामाजिक उत्पादन प्रक्रिया का संयोजन है।
Richard Swat के अनुसार, अलगाव का यह प्रकार व्यक्ति को अपने काम और मानसिक क्रियाओं से पूरी तरह विमुख कर देता है, जिससे उसकी रचनात्मकता और आत्म-संवेदना कमजोर होती है।
22. मार्क्स के अनुसार अलगाव की पाँच कोटियों में शामिल नहीं है:
(a) शक्तिहीनता
(b) अर्थहीनता
(c) उत्पादन संतुलन
(d) आत्म उदासीनता
उत्तर: (c) उत्पादन संतुलन
व्याख्या:
मार्क्स और Seeman (1960) के अनुसार अलगाव (Alienation) को समाजशास्त्र और मनोविज्ञान में पाँच मुख्य कोटियों (dimensions) में वर्गीकृत किया गया है।अलगाव की पाँच कोटियाँ:
- शक्तिहीनता (Powerlessness):
- व्यक्ति अपने जीवन और श्रम पर नियंत्रण खो देता है।
- अर्थहीनता (Meaninglessness):
- व्यक्ति को अपने कार्यों और सामाजिक घटनाओं का कोई अर्थ महसूस नहीं होता।
- सामाजिक पृथक्करण (Social Isolation):
- व्यक्ति समाज और अन्य व्यक्तियों से कट जाता है।
- नियमहीनता (Normlessness):
- सामाजिक नियम और अपेक्षाएँ अस्पष्ट या विफल प्रतीत होती हैं।
- आत्म उदासीनता (Self-Estrangement):
- व्यक्ति अपने स्वभाव, इच्छा और मानवत्व से विमुख हो जाता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- उत्पादन संतुलन (Production Balance) अलगाव की पाँच कोटियों में शामिल नहीं है।
- यह केवल उत्पादन संबंधी एक तकनीकी या आर्थिक शब्द है, जिसका मार्क्स के अलगाव सिद्धांत से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है।
मार्क्स के अनुसार अलगाव की पाँच कोटियाँ हैं: शक्तिहीनता, अर्थहीनता, सामाजिक पृथक्करण, नियमहीनता और आत्म उदासीनता।
23. आत्म अलगाव की अवधारणा पर मार्क्सवादियों की आलोचना का मुख्य तर्क क्या है?
(a) यह उत्पादन प्रक्रिया और शोषण को नजरअंदाज करती है
(b) यह केवल ऐतिहासिक शक्ति को देखती है
(c) यह केवल आर्थिक दृष्टि पर आधारित है
(d) यह सामाजिक चेतना को नजरअंदाज करती है
उत्तर: (a) यह उत्पादन प्रक्रिया और शोषण को नजरअंदाज करती है
व्याख्या:
आत्म अलगाव (Self-Alienation) की अवधारणा पर आलोचना मुख्य रूप से मार्क्सवादी दृष्टिकोण से की जाती है।मुख्य बिंदु:
- आलोचना का आधार:
- आत्म अलगाव को केवल व्यक्ति की मानसिक और आत्म-चेतना की समस्या माना जाता है।
- यह दृष्टिकोण सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं, जैसे उत्पादन प्रणाली और श्रम शोषण, को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
- मार्क्सवादी दृष्टिकोण:
- मार्क्स के अनुसार अलगाव मुख्य रूप से उत्पादन प्रक्रिया और पूंजीवादी शोषण के कारण उत्पन्न होता है।
- केवल व्यक्तिगत मानसिक विमुखता को देखना वास्तविक सामाजिक कारणों को अनदेखा करना है।
- सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ:
- आत्म अलगाव की अवधारणा व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित रह जाती है।
- मार्क्सवाद इसे व्यापक सामाजिक और ऐतिहासिक संरचना के संदर्भ में देखती है।
मार्क्सवादी आलोचना के अनुसार, आत्म अलगाव की अवधारणा उत्पादन प्रक्रिया और श्रमिक शोषण को नजरअंदाज करती है, इसलिए इसे सामाजिक और ऐतिहासिक स्तर पर अधूरा माना जाता है।
24. इरविंग जेटलिन के अनुसार पूंजीवादी व्यवस्था में कामगार का अंतिम उद्देश्य क्या है?
(a) अधिक मुनाफा कमाना
(b) तकनीकी दबाव से मुक्त होना
(c) उत्पादन में श्रम घटाना
(d) सामाजिक चेतना का विकास
उत्तर: (b) तकनीकी दबाव से मुक्त होना
व्याख्या:
Irving Jettlin ने अलगाव और श्रमिक अनुभव पर अपने अध्ययन में यह बताया कि पूंजीवादी उत्पादन प्रक्रिया में कामगारों की स्थिति विशिष्ट रूप से सीमित और दबावपूर्ण होती है।मुख्य बिंदु
- उत्पादन प्रक्रिया में नियंत्रण का अभाव:
- कामगार अपने श्रम और उत्पादन पर नियंत्रण नहीं रखते।
- मशीनों और तकनीकी प्रक्रियाओं का दबाव उन्हें रचनात्मक निर्णय लेने से रोकता है।
- अंतिम उद्देश्य:
- कामगार का उद्देश्य तकनीकी दबाव से मुक्त होना है, ताकि वह अपने श्रम पर नियंत्रण पा सके और मानसिक और शारीरिक तनाव कम हो।
- यह केवल व्यक्तिगत या समूहिक राहत तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना में सुधार की आवश्यकता को भी दर्शाता है।
- मार्क्सवादी संदर्भ:
- यह विचार मार्क्स के अलगाव और अमानवीकरण के सिद्धांत के अनुरूप है।
- उत्पादन प्रक्रिया में नियंत्रण का अभाव कामगार के आत्म-विमुखता (Self-Alienation) का मुख्य कारण है।
इरविंग जेटलिन के अनुसार, पूंजीवादी व्यवस्था में कामगार का अंतिम लक्ष्य अपने आप को तकनीकी दबाव से मुक्त करना है, ताकि वह अपने श्रम और जीवन पर नियंत्रण पा सके।
25. मार्क्स के अनुसार अतिरिक्त मूल्य (Surplus Value) किससे उत्पन्न होता है?
(a) उत्पादन की लागत बढ़ने से
(b) कामगार द्वारा उत्पादित वस्तु का दिहाड़ी से अधिक मूल्य में बिक्री
(c) पूंजीपति के निवेश से
(d) केवल उत्पादन प्रक्रिया में विलम्ब से
उत्तर: (b) कामगार द्वारा उत्पादित वस्तु का दिहाड़ी से अधिक मूल्य में बिक्री
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स की मूलधनवादी (Capitalist) अर्थशास्त्र में अतिरिक्त मूल्य (Surplus Value) का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है।मुख्य बिंदु
- अतिरिक्त मूल्य की परिभाषा:
- अतिरिक्त मूल्य वह मूल्य है जो कामगार अपने श्रम से उत्पादन करने वाली वस्तु में जोड़ता है, लेकिन उसे केवल अपनी दिहाड़ी (Wage) के रूप में भुगतान मिलता है।
- शेष मूल्य पूंजीपति के मुनाफे के रूप में जाता है।
- उत्पत्ति का स्रोत:
- कामगार का अतिरिक्त श्रम समय (Surplus Labor) अतिरिक्त मूल्य का मुख्य स्रोत है।
- उदाहरण: यदि कामगार 8 घंटे का श्रम करता है और केवल 4 घंटे का मूल्य उसके वेतन में दिया जाता है, तो शेष 4 घंटे का उत्पादन पूंजीपति के लिए मुनाफा बनता है।
- मार्क्स का दृष्टिकोण:
- यह पूंजीवादी शोषण (Exploitation) का आधार है।
- पूंजीवादी समाज में कामगार अपने श्रम का पूरा मूल्य प्राप्त नहीं करता, और यही अतिरिक्त मूल्य बनता है।
मार्क्स के अनुसार अतिरिक्त मूल्य उत्पन्न होता है क्योंकि कामगार अपने श्रम से उत्पादित वस्तु का मूल्य अपने वेतन से अधिक है, और यह पूंजीपति का मुनाफा बनता है।
26. अतिरिक्त मूल्य और लाभ/दिहाड़ी का सम्बन्ध क्या है?
(a) केवल आर्थिक स्वार्थ से संबंधित
(b) श्रम का वस्तुगत स्वरूप
(c) व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
(d) समाज की नैतिक जिम्मेदारी
उत्तर: (b) श्रम का वस्तुगत स्वरूप
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स के पूंजीवादी अर्थशास्त्र में लाभ और दिहाड़ी (Wages) को समझने का मूल आधार श्रम का वस्तुगत रूप (Objectified Labor) है।मुख्य बिंदु
- लाभ और दिहाड़ी का स्वरूप:
- दिहाड़ी (Wage): कामगार को उसके श्रम के लिए दिया गया भुगतान।
- लाभ/अतिरिक्त मूल्य (Profit/Surplus Value): कामगार द्वारा उत्पादित मूल्य का वह भाग जो उसके वेतन से अधिक है और पूंजीपति के पास जाता है।
- श्रम का वस्तुगत स्वरूप:
- दिहाड़ी और लाभ दोनों मुद्रा में व्यक्त होते हैं, लेकिन ये श्रम के वस्तुगत रूप को दर्शाते हैं।
- श्रम वस्तु में वस्तुगत होकर मूल्य का निर्माण करता है।
- पूंजीवादी शोषण:
- पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में कामगार का श्रम वस्तु में परिवर्तित होकर पूंजीपति के लिए लाभ उत्पन्न करता है।
- यह लाभ और दिहाड़ी का सम्बन्ध केवल आर्थिक स्वार्थ या मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि श्रम की वस्तुगत प्रकृति से उत्पन्न होता है।
मार्क्स के अनुसार लाभ और दिहाड़ी श्रम का वस्तुगत स्वरूप हैं, जो पूंजीवादी उत्पादन और शोषण से सीधे जुड़े हैं।