कक्षा 9 अर्थशास्त्र – अध्याय 1: पालमपुर गाँव की कहानी

कक्षा 9 अर्थशास्त्र – अध्याय 1: पालमपुर गाँव की कहानी (The Story of Village Palampur) MCQs

कक्षा 9 अर्थशास्त्र का पहला अध्याय “पालमपुर गाँव की कहानी” छात्रों को उत्पादन की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराता है। इस अध्याय में भूमि, श्रम, पूँजी, मानवीय पूँजी, किसान और मजदूरों की स्थिति, तथा गैर-कृषि गतिविधियों को सरल भाषा में समझाया गया है।

यह अध्याय कक्षा 9वीं की परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, Banking) के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

यहाँ प्रस्तुत MCQs उत्तर और विस्तृत व्याख्या सहित हैं। इन्हें हल करके आप अध्याय की गहरी समझ, संकल्पनात्मक स्पष्टता (Concept Clarity) और परीक्षा की तैयारी दोनों प्राप्त करेंगे।


1. ‘पालमपुर गाँव की कहानी’ अध्याय का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(a) ग्रामीण जीवन का मनोरंजन
(b) उत्पादन से जुड़े मूल विचारों की समझ
(c) गाँव की संस्कृति का अध्ययन
(d) केवल किसानों की समस्याओं का वर्णन

उत्तर – (b) उत्पादन से जुड़े मूल विचारों की समझ

व्याख्या:
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उत्पादन क्रियाओं की मूलभूत अवधारणाओं (जैसे भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता) की समझ देना है। इसके लिए एक काल्पनिक गाँव पालमपुर का उदाहरण लिया गया है, ताकि वास्तविक जीवन से जुड़ी परिस्थितियों के माध्यम से अर्थशास्त्र के सिद्धांतों को सरलता से समझाया जा सके।

2. उत्पादन क्रियाओं के लिए किन-किन प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता होती है?

(a) केवल प्राकृतिक संसाधन
(b) केवल मानवीय श्रम
(c) प्राकृतिक संसाधन, मानव श्रम, पूंजी
(d) केवल पूंजी

उत्तर – (c) प्राकृतिक संसाधन, मानव श्रम, पूंजी

व्याख्या:
उत्पादन क्रियाओं के लिए तीन प्रमुख संसाधनों की आवश्यकता होती है –

  1. प्राकृतिक संसाधन (भूमि आदि) – जो उत्पादन का आधार प्रदान करते हैं।
  2. मानव श्रम – जो कार्य करके उत्पादन को संभव बनाता है।
  3. पूंजी (Capital) – जिसमें उपकरण, मशीनें, बीज, खाद आदि सम्मिलित होते हैं।

इन सभी संसाधनों के संतुलित प्रयोग से ही उत्पादन क्रिया सफल होती है। यही कारण है कि अध्याय की शुरुआत में इन्हें उत्पादन के मुख्य घटक बताया गया है।

3. पालमपुर गाँव किस बड़े गाँव से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है?

(a) दिल्ली
(b) रायगंज
(c) कानपुर
(d) लुधियाना

उत्तर – (b) रायगंज

व्याख्या:
पालमपुर गाँव पास के कस्बे रायगंज से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह पक्की सड़क द्वारा उससे जुड़ा हुआ है। इस मार्ग पर रिक्शा, टोंगा, बस और ट्रक जैसी परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस प्रकार, यह उदाहरण ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन और बाज़ार तक पहुँच की महत्त्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है।

4. पालमपुर गाँव में कुल कितने परिवार रहते हैं?

(a) 400
(b) 450
(c) 480
(d) 500

उत्तर – (b) 450

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में लगभग 450 परिवार रहते हैं। ये परिवार विभिन्न जातियों से संबंधित हैं। इनमें से लगभग 80 परिवार उच्च जातियों से हैं और गाँव के केंद्र में पक्के मकानों में रहते हैं। वहीं, शेष परिवारों में से एक-तिहाई दलित वर्ग के हैं, जो गाँव के कोने पर छोटे कच्चे मकानों में निवास करते हैं।
इस प्रकार, यह विवरण न केवल जनसंख्या का आँकड़ा बताता है, बल्कि गाँव में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को भी उजागर करता है।

5. पालमपुर गाँव की कुल जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई हिस्सा किस समुदाय से संबंधित है?

(a) अनुसूचित जाति
(b) ब्राह्मण
(c) ओबीसी
(d) व्यापारी वर्ग

उत्तर – (a) अनुसूचित जाति (दलित)

व्याख्या:
पालमपुर गाँव की कुल जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय से संबंधित है। ये लोग गाँव के किनारे पर छोटे कच्चे घरों में रहते हैं। यह विवरण न केवल जनसंख्या संरचना बताता है बल्कि गाँव में सामाजिक-आर्थिक असमानता और जातिगत विभाजन को भी उजागर करता है।

6. पालमपुर गाँव में खेती के अतिरिक्त किन सुविधाओं का विकास हुआ है?

(a) सड़कें, बिजली, परिवहन
(b) स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र
(c) सभी विकल्प सही हैं
(d) केवल बिजली और सड़क

उत्तर – (c) सभी विकल्प सही हैं

व्याख्या:
पालमपुर गाँव खेती के अलावा भी कई सुविधाओं से सुसज्जित है। यहाँ –

  1. सड़कें और परिवहन साधन उपलब्ध हैं, जिनसे यह रायगंज जैसे कस्बों से जुड़ा हुआ है।
  2. बिजली की आपूर्ति पूरे गाँव में पहुँच चुकी है, जिससे सिंचाई और अन्य कार्यों में सुविधा होती है।
  3. शिक्षा हेतु प्राथमिक और उच्चतर विद्यालय मौजूद हैं।
  4. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्वास्थ्य केंद्र की भी व्यवस्था है।

इन सभी कारणों से पालमपुर एक साधारण ग्रामीण गाँव न होकर, अपेक्षाकृत उन्नत और विकसित गाँव का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

7. उत्पादन का उद्देश्य क्या है?

(a) केवल वस्तुएँ उत्पन्न करना
(b) केवल सेवाएँ उत्पन्न करना
(c) वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करना, जिनकी आवश्यकता है
(d) केवल लाभ कमाना

उत्तर – (c) वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करना, जिनकी आवश्यकता है

व्याख्या:
उत्पादन का मूल उद्देश्य केवल वस्तुएँ या सेवाएँ उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि ऐसी वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करना है जिनकी समाज को वास्तविक आवश्यकता होती है।
इनके माध्यम से लोगों की जरूरतें पूरी होती हैं, जीवन-स्तर सुधरता है और आर्थिक विकास संभव होता है।
इसलिए उत्पादन का केंद्र-बिंदु केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि जरूरतों की पूर्ति है।

8. उत्पादन के लिए कुल कितनी आवश्यक शर्तें मानी गई हैं?

(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5

उत्तर – (c) 4

व्याख्या:
उत्पादन क्रिया के लिए चार आवश्यक शर्तें (तत्व) मानी गई हैं –

  1. भूमि (Land): प्राकृतिक संसाधन जैसे खेत, जल, खनिज आदि।
  2. श्रम (Labour): कार्य करने की मानवीय शक्ति।
  3. भौतिक पूँजी (Physical Capital): औज़ार, मशीनें, इमारतें, बीज, खाद आदि।
  4. मानवीय पूँजी (Human Capital): शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य से संपन्न कार्यबल।

इन चारों का संतुलित प्रयोग ही उत्पादन को संभव और सफल बनाता है।

9. प्राकृतिक संसाधनों, जैसे जल, वन, खनिज आदि को किस श्रेणी में रखा गया है?

(a) श्रम
(b) भूमि
(c) भौतिक पूँजी
(d) मानवीय पूँजी

उत्तर – (b) भूमि

व्याख्या:
उत्पादन के चार प्रमुख तत्वों में से भूमि (Land) को सबसे पहले रखा गया है। भूमि केवल खेतों या ज़मीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी प्राकृतिक संसाधन – जैसे जल, वन, खनिज, जलवायु आदि – सम्मिलित हैं।
इन्हीं संसाधनों के आधार पर अन्य उत्पादन गतिविधियाँ संचालित होती हैं। इसीलिए भूमि को उत्पादन की प्राथमिक आवश्यकता माना गया है।

10. शारीरिक श्रम करने वाले श्रमिकों को किस नाम से जाना जाता है?

(a) असंगठित श्रमिक
(b) अकुशल श्रमिक
(c) दैनिक मजदूर
(d) श्रम शक्ति

उत्तर – (d) श्रम शक्ति

व्याख्या:
उत्पादन की प्रक्रिया में श्रम शक्ति (Labour Force) उस जनसमूह को कहा जाता है जो शारीरिक अथवा मानसिक श्रम प्रदान करता है।
विशेष रूप से, खेतों में कार्य करने वाले शारीरिक श्रम करने वाले श्रमिक भी इसी श्रेणी में आते हैं।
श्रम शक्ति उत्पादन का दूसरा सबसे महत्त्वपूर्ण तत्व है, क्योंकि बिना मानव श्रम के भूमि और पूँजी का उपयोग संभव नहीं है।

11. भौतिक पूँजी का कौन-सा उदाहरण है?

(a) डॉक्टर का ज्ञान
(b) ट्रैक्टर और मशीनें
(c) किसान का अनुभव
(d) शिक्षक की शिक्षा

उत्तर – (b) ट्रैक्टर और मशीनें

व्याख्या:
भौतिक पूँजी (Physical Capital) से आशय उन साधनों से है जो उत्पादन प्रक्रिया में बार-बार उपयोग किए जाते हैं। इनमें ट्रैक्टर, मशीनें, उपकरण, इमारतें, गोदाम आदि शामिल होते हैं।
यह मानवीय पूँजी (Human Capital) से अलग है, क्योंकि मानवीय पूँजी में व्यक्ति का ज्ञान, कौशल और शिक्षा आती है, जबकि भौतिक पूँजी ठोस (tangible) साधन होते हैं।

12. स्थायी पूँजी किसे कहा जाता है?

(a) जो बार-बार उपयोग में लाई जा सके
(b) जो केवल एक बार उपयोगी हो
(c) मजदूरी का भुगतान
(d) उपभोक्ता वस्तुएँ

उत्तर – (a) जो बार-बार उपयोग में लाई जा सके

व्याख्या:
स्थायी पूँजी (Fixed Capital) उन संसाधनों को कहा जाता है जो उत्पादन प्रक्रिया में लंबे समय तक और बार-बार उपयोग में लाए जाते हैं। इनमें औज़ार, मशीनें, भवन, सिंचाई के पंप, ट्रैक्टर आदि शामिल हैं।
ये साधन तुरंत समाप्त नहीं होते, बल्कि कई वर्षों तक उत्पादन में सहायक रहते हैं। इस कारण इन्हें स्थायी पूँजी कहा जाता है।

13. कच्चे माल और नकद धन को किस श्रेणी में रखा जाता है?

(a) स्थायी पूँजी
(b) उपभोक्ता पूँजी
(c) कार्यशील पूँजी
(d) मानवीय पूँजी

उत्तर – (c) कार्यशील पूँजी

व्याख्या:
कार्यशील पूँजी (Working Capital) से आशय उन संसाधनों से है जिनका उपयोग उत्पादन में केवल अल्पकाल के लिए होता है और जो खपत होकर समाप्त हो जाते हैं।
इसमें मुख्य रूप से कच्चा माल, बीज, खाद, ईंधन और नकद धन आते हैं।
इनका बार-बार नया प्रबंध करना पड़ता है, इसलिए इन्हें स्थायी पूँजी से अलग, कार्यशील पूँजी कहा जाता है।

14. दूध उत्पादन के लिए चारे और चुकंदर जैसी वस्तुएँ किस प्रकार की पूँजी में आती हैं?

(a) स्थायी पूँजी
(b) कार्यशील पूँजी
(c) मानवीय पूँजी
(d) उपभोक्ता पूँजी

उत्तर – (b) कार्यशील पूँजी

व्याख्या:
कार्यशील पूँजी (Working Capital) वे साधन हैं जिनका उपयोग उत्पादन में अल्पकालिक होता है और जो खपत होकर समाप्त हो जाते हैं।
दूध उत्पादन के लिए प्रयुक्त चारा, चुकंदर, दाना आदि पशुओं द्वारा खा लिए जाते हैं और बार-बार उनकी नई व्यवस्था करनी पड़ती है।
इसलिए इन्हें कार्यशील पूँजी की श्रेणी में रखा जाता है, न कि स्थायी पूँजी में।

15. उत्पादन में चौथी आवश्यकता किसे माना गया है?

(a) भूमि
(b) श्रम
(c) भौतिक पूँजी
(d) मानवीय पूँजी

उत्तर – (d) मानवीय पूँजी

व्याख्या:
उत्पादन के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी के साथ-साथ मानवीय पूँजी (Human Capital) भी चौथी आवश्यक शर्त मानी जाती है।
मानवीय पूँजी से आशय उन क्षमताओं से है जो शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल और अच्छे स्वास्थ्य से प्राप्त होती हैं।
यदि किसान या श्रमिक शिक्षित, प्रशिक्षित और स्वस्थ होंगे, तो वे भूमि और पूँजी का बेहतर उपयोग करके उत्पादन को अधिक सफल बना सकते हैं।

16. भूमि मापने की सामान्य इकाई क्या है?

(a) वर्ग मीटर
(b) हेक्टेयर
(c) एकड़
(d) वर्ग किलोमीटर

उत्तर – (b) हेक्टेयर

व्याख्या:
गाँवों में भूमि मापने की सामान्य इकाई हेक्टेयर (Hectare) होती है।
1 हेक्टेयर = 100 मीटर × 100 मीटर का क्षेत्रफल (10,000 वर्ग मीटर)
खेती-बाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के आकार और वितरण को समझने के लिए हेक्टेयर का प्रयोग किया जाता है।

17. 1960 के बाद से पालमपुर में भूमि-क्षेत्र का क्या हाल रहा है?

(a) भूमि-क्षेत्र लगातार बढ़ा
(b) भूमि-क्षेत्र घटा
(c) भूमि-क्षेत्र स्थिर रहा
(d) भूमि-क्षेत्र का सही अनुमान नहीं है

उत्तर – (c) भूमि-क्षेत्र स्थिर रहा

व्याख्या:
1960 के बाद से पालमपुर गाँव में खेती योग्य भूमि का क्षेत्रफल स्थिर रहा, क्योंकि गाँव की लगभग सारी भूमि पहले ही खेती के काम में लाई जा चुकी थी। इस कारण किसानों के पास उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र उपाय नई तकनीक (HYV बीज, रासायनिक खाद, सिंचाई, मशीनरी) और बहुफसली खेती को अपनाना था।

HYV [High Yielding Varieties / अधिक उपज देने वाली किस्में]

18. 1970 के दशक में पालमपुर में किस नए साधन से खेती योग्य भूमि की सिंचाई शुरू हुई?

(a) कुआँ
(b) नलकूप
(c) तालाब
(d) नहर

उत्तर – (b) नलकूप

व्याख्या:
1970 के दशक में पालमपुर में बड़े पैमाने पर बिजली से चलने वाले नलकूप (tube wells) लगाए गए। इससे सिंचाई की सुविधा काफी बढ़ी और खेती का क्षेत्र लगभग पूरे गाँव तक फैल गया। पहले जहाँ किसान परंपरागत साधनों (कुएँ, तालाब) पर निर्भर थे, वहीं नलकूपों ने सालभर फसलों की सिंचाई संभव बना दी।

19. भारत में सबसे ऊँचे स्तर की सिंचाई व्यवस्था किस क्षेत्र में है?

(a) उत्तर प्रदेश का मैदान
(b) मध्य भारत
(c) राजस्थान का रेगिस्तान
(d) दक्षिणी पठार

उत्तर – (a) उत्तर प्रदेश का मैदान

व्याख्या:
भारत में सबसे अधिक सिंचाई की सुविधा गंगा-यमुना के मैदानी क्षेत्रों (उत्तर प्रदेश और आसपास) में उपलब्ध है। यहाँ पर नदियों, नहरों और भूजल स्रोतों की प्रचुरता होने के कारण खेती के लिए पानी आसानी से मिलता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में गेहूँ, गन्ना और धान जैसी अधिक पानी वाली फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं।

20. भारत के किन क्षेत्रों में सिंचाई का स्तर बहुत कम है?

(a) पंजाब और हरियाणा
(b) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश
(c) राजस्थान और दक्षिणी पठार
(d) बिहार और झारखंड

उत्तर – (c) राजस्थान और दक्षिणी पठार

व्याख्या:
भारत में सिंचाई का स्तर बहुत कम रेगिस्तानी क्षेत्रों (विशेषकर राजस्थान) और दक्षिणी पठार में है।

  • राजस्थान में कम वर्षा, रेतीली मिट्टी और बारहमासी नदियों का अभाव होने के कारण सिंचाई सुविधाएँ सीमित हैं।
  • दक्षिणी पठार (जैसे कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र का आंशिक भाग) में असमान वर्षा और कठोर चट्टानी भूमि के कारण जल-संरक्षण कठिन है।

इसलिए इन क्षेत्रों में कृषि मुख्यतः वर्षा-आधारित (rain-fed agriculture) रहती है।

21. पालमपुर के किसान वर्ष में कितनी फसलें उगाते हैं?

(a) केवल 1 फसल
(b) 2 फसलें
(c) 3 फसलें
(d) 4 फसलें

उत्तर – (c) 3 फसलें

व्याख्या:
पालमपुर के किसान वर्ष में तीन अलग-अलग फसलें उगाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि यहाँ सिंचाई की अच्छी सुविधा उपलब्ध है, जिससे खेत सालभर उपयोग में लाए जा सकते हैं।

  • खरीफ़ (बरसात) में धान बोया जाता है।
  • रबी (सर्दी) में गेहूँ उगाया जाता है।
  • गर्मी में आलू, मटर, गन्ना या अन्य फसलें बोई जाती हैं।

इस प्रणाली को तीन फसल प्रणाली (Multiple Cropping) कहा जाता है, और यही पालमपुर की कृषि की विशेषता है।

22. खरीफ मौसम में पालमपुर के किसान मुख्यतः कौन-सी फसलें उगाते हैं?

(a) गेहूँ और आलू
(b) ज्वार और बाजरा
(c) गन्ना और आलू
(d) गेहूँ और गन्ना

उत्तर – (b) ज्वार और बाजरा

व्याख्या:
पालमपुर में खरीफ (बरसात) के मौसम में किसान मुख्यतः ज्वार और बाजरा बोते हैं।

  • ये फसलें कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं और स्थानीय आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  • खरीफ के मौसम में वर्षा अधिक होने से धान की खेती भी की जाती है, लेकिन पालमपुर के किसान पारंपरिक रूप से ज्वार-बाजरा पर अधिक निर्भर रहते हैं।
  • इन फसलों से प्राप्त चारा पशुओं को खिलाने में भी उपयोग होता है।

इससे स्पष्ट होता है कि खरीफ में पालमपुर की कृषि अनाज उत्पादन और पशुपालन दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

23. रबी मौसम में पालमपुर के किसान कौन-सी फसल उगाते हैं?

(a) गेहूँ
(b) आलू
(c) गन्ना
(d) चना

उत्तर – (a) गेहूँ

व्याख्या:
पालमपुर में रबी (सर्दी के मौसम) में किसान मुख्यतः गेहूँ की खेती करते हैं।

  • गेहूँ एक शीत ऋतु की फसल है, जिसे ठंडे मौसम और नियंत्रित सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • पालमपुर में बिजली से चलने वाले नलकूपों की वजह से सर्दियों में भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है।
  • गेहूँ की अच्छी उपज किसानों के लिए भोजन सुरक्षा और आय दोनों का मुख्य साधन है।

यही कारण है कि रबी मौसम में पालमपुर की खेती का केंद्र बिंदु गेहूँ उत्पादन है।

24. पालमपुर में किसानों के लिए गन्ने की फसल का क्या महत्व है?

(a) केवल खाने के लिए
(b) चारे के लिए
(c) शक्कर मिल को बेचने के लिए
(d) नलकूप बनाने के लिए

उत्तर – (c) शक्कर मिल को बेचने के लिए

व्याख्या:
पालमपुर के किसान गन्ने की खेती मुख्यतः बाज़ार में बेचने के लिए करते हैं।

  • गन्ना शक्कर मिलों को बेचा जाता है, जहाँ से चीनी, शीरा और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
  • कुछ गन्ना स्थानीय गुड़ बनाने वाले व्यापारियों को भी दिया जाता है।
  • यह नकदी फसल (cash crop) होने के कारण किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है।

इस प्रकार गन्ना पालमपुर की वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming) का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

25. पालमपुर में उगाई जाने वाली प्रमुख नकदी फसल कौन-सी है?

(a) आलू
(b) गेहूँ
(c) गन्ना
(d) बाजरा

उत्तर – (c) गन्ना

व्याख्या:
गन्ना पालमपुर की प्रमुख नकदी फसल (Cash Crop) है।

  • किसान गन्ने को मुख्यतः शक्कर मिलों और गुड़ बनाने वाले व्यापारियों को बेचते हैं।
  • यह फसल सीधे उपभोग के बजाय बाज़ार के लिए उत्पादन (Commercial Farming) की श्रेणी में आती है।
  • गन्ने से किसानों को अच्छी आय प्राप्त होती है, इसलिए यह उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस प्रकार पालमपुर की कृषि में गन्ना, खाद्यान्न फसलों (गेहूँ, धान, ज्वार-बाजरा) के साथ-साथ आय अर्जित करने वाली मुख्य फसल भी है।

26. 1950-51 में भारत का जुताई क्षेत्र (Net Sown Area) कितना था?

(a) 132 मिलियन हेक्टेयर
(b) 186 मिलियन हेक्टेयर
(c) 196 मिलियन हेक्टेयर
(d) 200 मिलियन हेक्टेयर

उत्तर – (a) 132 मिलियन हेक्टेयर

व्याख्या:
सारणी 1.1 के अनुसार, 1950-51 में भारत का जुताई क्षेत्र 132 मिलियन हेक्टेयर था।

  • जुताई क्षेत्र (Net Sown Area) से तात्पर्य उस कुल भूमि से है, जिस पर एक वर्ष में कम-से-कम एक बार फसल बोई जाती है।
  • स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार और सिंचाई साधनों के विस्तार से खेती योग्य क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ा।
  • हालाँकि 1960 के बाद से खेती योग्य भूमि लगभग स्थिर रही और अब उत्पादन वृद्धि का मुख्य आधार नई तकनीक, उर्वरक, सिंचाई और HYV बीज बन गए।

इस प्रकार 1950-51 का आँकड़ा हमें यह समझने में मदद करता है कि कृषि विस्तार से कृषि आधुनिकीकरण की ओर यात्रा कब और कैसे हुई।

27. 2016-17 में भारत का जुताई क्षेत्र कितना था?

(a) 186 मिलियन हेक्टेयर
(b) 194 मिलियन हेक्टेयर
(c) 197 मिलियन हेक्टेयर
(d) 200 मिलियन हेक्टेयर

उत्तर – (d) 200 मिलियन हेक्टेयर

व्याख्या:
आँकड़ों के अनुसार, 2016-17 में भारत का जुताई क्षेत्र 200 मिलियन हेक्टेयर तक पहुँच गया।

  • इसका अर्थ है कि खेती योग्य भूमि का दायरा स्वतंत्रता के समय (1950-51 में 132 मिलियन हेक्टेयर) से काफी बढ़ गया।
  • हालाँकि 1970 के दशक के बाद से जुताई क्षेत्र में वृद्धि धीमी हो गई और लगभग स्थिर हो गया।
  • इसके बाद कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों ने बहुफसली खेती (multiple cropping), HYV बीज, उर्वरक और आधुनिक तकनीक पर ज़्यादा निर्भर रहना शुरू किया।

इस आँकड़े से स्पष्ट होता है कि भारत में भूमि विस्तार की एक सीमा है, इसलिए भविष्य की कृषि वृद्धि का आधार उपज बढ़ाना ही होगा।

28. “हरित क्रांति” कब शुरू हुई थी?

(a) 1950 के दशक में
(b) 1960 के दशक में
(c) 1970 के दशक में
(d) 1980 के दशक में

उत्तर – (b) 1960 के दशक में

व्याख्या:
भारत में हरित क्रांति (Green Revolution) 1960 के दशक में प्रारंभ हुई थी।

  • इसका मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन में तेज़ी से वृद्धि करना था।
  • इसके अंतर्गत HYV बीज, रासायनिक उर्वरक, सिंचाई सुविधाएँ, कीटनाशक और मशीनरी का बड़े पैमाने पर प्रयोग शुरू हुआ।
  • हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव गेहूँ और धान की फसलों पर पड़ा।
  • इसका नेतृत्व वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन और उस समय के कृषि मंत्री सी. सुब्रमण्यम के प्रयासों से हुआ।

हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम दिया।

29. हरित क्रांति के अंतर्गत भारतीय किसानों को कौन-सी नई किस्में उपलब्ध कराई गईं?

(a) पारंपरिक बीज
(b) अधिक उपज वाली बीज
(c) जैविक बीज
(d) नकली बीज

उत्तर – (b) अधिक उपज वाली बीज (HYVs)

व्याख्या:
1960 के दशक में हरित क्रांति के दौरान भारतीय किसानों को अधिक उपज देने वाली किस्में (High Yielding Varieties – HYVs) उपलब्ध कराई गईं।

  • विशेषकर गेहूँ और चावल की HYV किस्में विकसित की गईं।
  • इन बीजों के उपयोग से फसल उत्पादन परंपरागत बीजों की तुलना में कई गुना बढ़ गया।
  • HYV बीजों की सफलता के लिए पर्याप्त सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों की भी आवश्यकता थी।
  • पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इन बीजों से उल्लेखनीय परिणाम मिले।

इस प्रकार HYV बीज हरित क्रांति का मुख्य आधार बने और भारत के खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने में निर्णायक साबित हुए।

30. HYV बीजों के उपयोग से किसानों की मुख्य आवश्यकता क्या हो गई?

(a) मजदूरों की संख्या कम करना
(b) अधिक उर्वरक और सिंचाई साधन
(c) अधिक पशुशक्ति
(d) खेती योग्य भूमि का विस्तार

उत्तर – (b) अधिक उर्वरक और सिंचाई साधन

व्याख्या:
HYV (High Yielding Varieties) बीजों का उपयोग करने से किसानों की मुख्य आवश्यकता अधिक रासायनिक उर्वरकों और सिंचाई साधनों की हो गई।

  • HYV बीजों से पारंपरिक बीजों की तुलना में कई गुना अधिक उत्पादन संभव था, लेकिन इसके लिए सिंचाई का भरपूर पानी और रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक आवश्यक थे।
  • जहाँ ये साधन उपलब्ध थे (जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश), वहाँ हरित क्रांति का प्रभाव अधिक दिखा।
  • इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में सिंचाई और उर्वरक उपलब्ध नहीं थे, वहाँ किसान इन बीजों का लाभ पूरी तरह नहीं उठा सके।

इस प्रकार HYV बीजों ने कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद की, लेकिन साथ ही अधिक निवेश (high input costs) की आवश्यकता भी पैदा कर दी।

31. HYV बीज पारंपरिक बीजों से किस मामले में भिन्न थे?

(a) कम उपज देते थे
(b) ज्यादा समय लेते थे
(c) अधिक उत्पादन देते थे
(d) पानी की आवश्यकता कम होती थी

उत्तर – (c) अधिक उत्पादन देते थे

व्याख्या:
HYV (High Yielding Varieties) बीज पारंपरिक बीजों से इसलिए भिन्न थे क्योंकि ये कहीं अधिक उत्पादन देते थे।

  • पारंपरिक बीजों की उपज सीमित थी, जबकि HYV बीजों से फसल उत्पादन कई गुना बढ़ गया।
  • गेहूँ और धान की HYV किस्मों ने हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई।
  • हालाँकि, HYV बीजों की सफलता के लिए पर्याप्त सिंचाई, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों की आवश्यकता होती थी।

इस प्रकार HYV बीजों ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ा योगदान दिया।

32. HYV बीजों का सबसे अधिक उपयोग किस फसलों में हुआ?

(a) बाजरा और गन्ना
(b) गेहूँ और चावल
(c) आलू और प्याज
(d) कपास और जूट

उत्तर – (b) गेहूँ और चावल

व्याख्या:
हरित क्रांति मुख्यतः गेहूँ और चावल की HYV किस्मों पर आधारित थी।

  • इन दोनों फसलों के लिए HYV बीज विकसित किए गए और बड़े पैमाने पर किसानों को उपलब्ध कराए गए।
  • गेहूँ की HYV किस्मों से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उत्पादन कई गुना बढ़ गया।
  • चावल की HYV किस्मों का प्रभाव मुख्यतः आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्यों में देखा गया।
  • इन बीजों ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

इस प्रकार HYV बीजों का उपयोग सबसे अधिक गेहूँ और चावल की फसलों में हुआ, जिससे हरित क्रांति सफल हुई।

33. आधुनिक खेती में किसानों द्वारा खाद के रूप में क्या इस्तेमाल किया जाने लगा?

(a) केवल गोबर खाद
(b) केवल जैविक खाद
(c) रासायनिक उर्वरक
(d) कीटनाशक

उत्तर – (c) रासायनिक उर्वरक

व्याख्या:
आधुनिक खेती में किसानों ने पारंपरिक गोबर खाद और जैविक खाद के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग शुरू किया।

  • रासायनिक उर्वरकों (Nitrogen, Phosphorus, Potassium आधारित) ने फसल की पैदावार को तेज़ी से बढ़ाने में मदद की।
  • हरित क्रांति के दौरान HYV बीजों के साथ उर्वरकों का प्रयोग आवश्यक हो गया।
  • हालाँकि, इनके अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटने, जल प्रदूषण और लागत बढ़ने जैसी समस्याएँ भी सामने आईं।

इसलिए आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरक उत्पादन वृद्धि का मुख्य साधन बने, लेकिन साथ ही इनका संतुलित उपयोग भी ज़रूरी है।

34. 1960 के बाद किसानों ने किस कारण पारंपरिक बीजों का उपयोग कम कर दिया?

(a) अधिक खर्चीले थे
(b) HYV बीजों से अधिक उपज मिल रही थी
(c) पानी कम मिलता था
(d) बाजार में उपलब्ध नहीं थे

उत्तर – (b) HYV बीजों से अधिक उपज मिल रही थी

व्याख्या:
1960 के दशक के बाद किसानों ने पारंपरिक बीजों का उपयोग कम कर दिया क्योंकि HYV (High Yielding Varieties) बीजों से उत्पादन कई गुना अधिक मिल रहा था।

  • पारंपरिक बीजों की उपज सीमित थी और वे मौसम पर अधिक निर्भर रहते थे।
  • HYV बीजों ने गेहूँ और धान की पैदावार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया।
  • इन बीजों के साथ यदि पर्याप्त सिंचाई, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध हों, तो किसान अधिक लाभ कमा सकते थे।

इसलिए धीरे-धीरे किसानों ने पारंपरिक बीजों को छोड़कर HYV बीजों को अपनाना शुरू किया और यही हरित क्रांति की सफलता का मुख्य कारण बना।

35. हरित क्रांति के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि में सबसे बड़ा परिवर्तन क्या आया?

(a) मजदूरी बढ़ी
(b) नकदी फसलें कम हुईं
(c) खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा
(d) खेती का क्षेत्रफल घटा

उत्तर – (c) खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा

व्याख्या:
हरित क्रांति का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय कृषि में खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि के रूप में देखा गया।

  • विशेष रूप से गेहूँ और चावल जैसी प्रमुख फसलों की उपज में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई।
  • 1960 के दशक तक भारत खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था और विदेशी आयात (PL-480 योजना के तहत अमेरिका से अनाज आयात) पर निर्भर था।
  • लेकिन हरित क्रांति के बाद भारत धीरे-धीरे खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन गया।
  • इसके साथ ही किसानों की आय बढ़ी, परंतु लाभ मुख्यतः उन्हीं क्षेत्रों और किसानों को मिला जहाँ सिंचाई, बिजली और उर्वरक की सुविधा उपलब्ध थी (जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश)।

इस प्रकार, हरित क्रांति ने भारतीय कृषि को “परंपरागत से आधुनिक” में बदलने का मार्ग प्रशस्त किया।

36. हरित क्रांति के लिए आवश्यक संसाधनों में सबसे महत्वपूर्ण कौन-सा था?

(a) मजदूरी
(b) जल और उर्वरक
(c) मशीनरी
(d) व्यापार

उत्तर – (b) जल और उर्वरक

व्याख्या:
हरित क्रांति के तहत HYV (High Yielding Variety) बीजों का उपयोग किया गया। ये बीज पारंपरिक बीजों की तुलना में अधिक उपज देने वाले थे, लेकिन इनसे लाभ पाने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें थीं:

  • पर्याप्त सिंचाई (जल की आपूर्ति)
  • अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरक
  • कीटनाशक और आधुनिक तकनीक का सहारा

इसलिए हरित क्रांति केवल उन्हीं क्षेत्रों में सफल हो सकी जहाँ पानी और उर्वरकों की उपलब्धता अच्छी थी (जैसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश)।

37. पंजाब और हरियाणा में हरित क्रांति का प्रभाव क्यों सबसे पहले दिखा?

(a) वहाँ किसान मेहनती थे
(b) वहाँ सिंचाई और उर्वरकों की सुविधाएँ उपलब्ध थीं
(c) वहाँ भूमि उपजाऊ थी
(d) वहाँ खेती योग्य भूमि अधिक थी

उत्तर – (b) वहाँ सिंचाई और उर्वरकों की सुविधाएँ उपलब्ध थीं

व्याख्या:
हरित क्रांति के लिए आवश्यक संसाधन जैसे –

  • नलकूप और नहरों से पर्याप्त सिंचाई,
  • रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक,
  • आधुनिक मशीनें (ट्रैक्टर, हार्वेस्टर),
  • और सरकारी सहायता व खरीद की सुविधाएँ (MSP, मंडियाँ)

ये सभी सुविधाएँ पंजाब और हरियाणा में अन्य राज्यों की तुलना में पहले से ही उपलब्ध थीं।
इसी कारण वहाँ पर गेहूँ और चावल का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा और हरित क्रांति की सफलता सबसे पहले इन्हीं राज्यों में दिखाई दी।

38. HYV किस्म का गेहूँ औसतन कितनी उपज देता था?

(a) 1,000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
(b) 1,300 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
(c) 3,200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
(d) 5,000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

उत्तर – (c) 3,200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

व्याख्या:
पारंपरिक गेहूँ की किस्में औसतन 1,000–1,200 किग्रा/हेक्टेयर उत्पादन देती थीं, जबकि HYV गेहूँ की औसत उपज लगभग 3,200 किग्रा/हेक्टेयर थी। इस प्रकार, HYV बीजों से किसानों को लगभग तीन गुना अधिक उत्पादन मिला, जो हरित क्रांति की सफलता का मुख्य आधार बना।

39. पारंपरिक गेहूँ किस्मों की औसत उपज कितनी थी?

(a) 1,000 किग्रा/हेक्टेयर
(b) 1,300 किग्रा/हेक्टेयर
(c) 2,000 किग्रा/हेक्टेयर
(d) 3,200 किग्रा/हेक्टेयर

उत्तर – (b) 1,300 किग्रा/हेक्टेयर

व्याख्या:
पारंपरिक गेहूँ की किस्में औसतन केवल 1,300 किग्रा/हेक्टेयर उपज देती थीं। जबकि HYV (High Yielding Variety) गेहूँ लगभग 3,200 किग्रा/हेक्टेयर उत्पादन देता था। इस अंतर ने किसानों को पारंपरिक बीजों की बजाय HYV बीज अपनाने के लिए प्रेरित किया और यही हरित क्रांति की मुख्य सफलता थी।

40. हरित क्रांति का सबसे बड़ा लाभ किस फसल को हुआ?

(a) गेहूँ
(b) बाजरा
(c) दलहन
(d) तिलहन

उत्तर – (a) गेहूँ

व्याख्या:
हरित क्रांति का सबसे बड़ा लाभ गेहूँ की फसल को हुआ। HYV (High Yielding Variety) किस्मों के प्रयोग से गेहूँ की उपज पर सबसे अधिक असर पड़ा और उत्पादन कई गुना बढ़ गया। चावल की फसल में भी कुछ वृद्धि हुई, लेकिन दलहन और तिलहन जैसी फसलें हरित क्रांति से लगभग अछूती रहीं।

निष्कर्ष: गेहूँ = सबसे अधिक लाभ, चावल = आंशिक लाभ, दलहन व तिलहन = लगभग कोई लाभ नहीं।

41. हरित क्रांति का लाभ किस प्रकार की फसलों को अपेक्षाकृत कम हुआ?

(a) गेहूँ और चावल
(b) तिलहन और दलहन
(c) गन्ना और आलू
(d) कपास और जूट

उत्तर – (b) तिलहन और दलहन

व्याख्या:
हरित क्रांति मुख्य रूप से गेहूँ और चावल जैसी खाद्यान्न फसलों पर केंद्रित थी। HYV बीजों का विकास इन्हीं फसलों के लिए हुआ था। तिलहन और दलहन की फसलों के लिए उस समय उच्च उत्पादक किस्में उपलब्ध नहीं थीं, इसलिए इन फसलों को हरित क्रांति का लाभ अपेक्षाकृत कम मिला।

निष्कर्ष: गेहूँ-चावल = अधिक लाभ, तिलहन-दलहन = कम लाभ।

42. 1965-66 में तिलहन का उत्पादन कितना था?

(a) 8 लाख टन
(b) 10 लाख टन
(c) 12 लाख टन
(d) 14 लाख टन

उत्तर – (b) 10 लाख टन

व्याख्या:
सारणी 1.2 के अनुसार 1965-66 में भारत में तिलहन का कुल उत्पादन लगभग 10 लाख टन था। यह आँकड़ा दर्शाता है कि उस समय तिलहन उत्पादन अपेक्षाकृत कम था और हरित क्रांति का लाभ इन फसलों को पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाया। हरित क्रांति मुख्यतः गेहूँ और चावल पर केंद्रित थी, जबकि तिलहन और दलहन जैसी फसलें पीछे रह गईं।

43. 1965-66 में गेहूँ का उत्पादन कितना था?

(a) 10 लाख टन
(b) 12 लाख टन
(c) 11 लाख टन
(d) 15 लाख टन

उत्तर – (c) 11 लाख टन

व्याख्या:
1965-66 में भारत में गेहूँ का कुल उत्पादन लगभग 11 लाख टन था। यह आँकड़ा दर्शाता है कि हरित क्रांति से पहले गेहूँ का उत्पादन सीमित था। बाद में HYV बीज, रासायनिक उर्वरक और सिंचाई के साधनों के प्रयोग से गेहूँ का उत्पादन तेजी से बढ़ा और यह हरित क्रांति की सबसे सफल फसल बन गई।

44. 2021-22 में तिलहन का उत्पादन कितना था?

(a) 22 लाख टन
(b) 26 लाख टन
(c) 28 लाख टन
(d) 30 लाख टन

उत्तर – (c) 28 लाख टन

व्याख्या:
1965-66 में तिलहन उत्पादन मात्र 10 लाख टन था, जबकि 2021-22 में यह बढ़कर लगभग 28 लाख टन हो गया। यद्यपि इसमें वृद्धि हुई, लेकिन गेहूँ और चावल जैसी फसलों की तुलना में यह प्रगति धीमी रही। इसके कारण भारत आज भी खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भर है। सरकार ने इस समस्या के समाधान हेतु राष्ट्रीय तिलहन मिशन (NMOOP) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी योजनाएँ शुरू कीं, ताकि आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।

45. 2021-22 में गेहूँ का उत्पादन कितना था?

(a) 97 लाख टन
(b) 101 लाख टन
(c) 107 लाख टन
(d) 110 लाख टन

उत्तर – (c) 107 लाख टन

व्याख्या:
1965-66 में भारत का गेहूँ उत्पादन मात्र 11 लाख टन था, जबकि 2021-22 तक यह बढ़कर 107 लाख टन पहुँच गया। यह वृद्धि मुख्यतः हरित क्रांति, उच्च उपज वाले बीजों (HYV), सिंचाई विस्तार और सरकारी समर्थन नीतियों (MSP, सार्वजनिक वितरण प्रणाली) का परिणाम है। गेहूँ हरित क्रांति का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा। हालाँकि, जलवायु परिवर्तन, घटते भूजल स्तर और एक फसल पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में इसके लिए चुनौती बन सकते हैं।

46. आधुनिक खेती का एक नकारात्मक प्रभाव क्या था?

(a) फसल का उत्पादन कम हुआ
(b) भूमि की उपजाऊ शक्ति घटी
(c) किसानों की आय कम हुई
(d) मजदूरी घट गई

उत्तर – (b) भूमि की उपजाऊ शक्ति घटी

व्याख्या:
आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और भूजल आधारित सिंचाई का अत्यधिक प्रयोग किया गया। इससे प्रारंभिक वर्षों में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, लेकिन दीर्घकाल में भूमि की प्राकृतिक उर्वरता घटने लगी। लगातार मोनोक्रॉपिंग (जैसे केवल गेहूँ-चावल की खेती) और अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से मृदा का पोषण असंतुलन बिगड़ गया। यह समस्या आज “सतत कृषि” (Sustainable Agriculture) की चुनौती के रूप में देखी जाती है।

47. आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग का परिणाम क्या हुआ?

(a) सिंचाई कम हो गई
(b) फसल उत्पादन घट गया
(c) जल और मिट्टी प्रदूषित हुए
(d) मजदूरों की आवश्यकता कम हुई

उत्तर – (c) जल और मिट्टी प्रदूषित हुए

व्याख्या:
आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग हुआ। इससे मृदा में रासायनिक अवशेष जमा होने लगे और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता घटने लगी। साथ ही, भूजल और सतही जल स्रोतों में नाइट्रेट और फॉस्फेट का प्रदूषण बढ़ा, जिससे जल गुणवत्ता प्रभावित हुई। यह समस्या आज सतत कृषि (Sustainable Agriculture) और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है।

48. भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए क्या आवश्यक है?

(a) केवल और अधिक उर्वरक
(b) केवल अधिक भूमि
(c) टिकाऊ खेती की पद्धतियाँ
(d) केवल मशीनरी

उत्तर – (c) टिकाऊ खेती की पद्धतियाँ

व्याख्या:
भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाने और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए टिकाऊ खेती (Sustainable Agriculture) की पद्धतियाँ आवश्यक हैं। इसका अर्थ है—

  1. मृदा की उर्वरता बनाए रखना,
  2. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग,
  3. वर्षा-आधारित और सिंचित क्षेत्रों का उचित प्रबंधन,
  4. जैविक खेती और फसल चक्रीकरण अपनाना।

इस तरह की पद्धतियाँ न केवल उत्पादन बढ़ाती हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि-आधारित आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित करती हैं।

49. भारत में भूमि का विस्तार क्यों संभव नहीं है?

(a) भूमि की उर्वरता कम है
(b) भूमि पहले से ही उपयोग में है
(c) भूमि महँगी है
(d) सिंचाई सुविधाएँ नहीं हैं

उत्तर – (b) भूमि पहले से ही उपयोग में है

व्याख्या:
भारत में 1960 के बाद से जुताई योग्य भूमि का क्षेत्र लगभग स्थिर है। इसका कारण यह है कि अधिकांश कृषि योग्य भूमि पहले से ही खेती में लगी हुई है और नए क्षेत्रों का विस्तार कठिन है। भू-राजनीतिक सीमाएँ, शहरीकरण और भूमि के गैर-कृषि उपयोग भी भूमि विस्तार की संभावनाओं को सीमित करते हैं। इसलिए भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक भूमि के बजाय उपज और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर ध्यान देना आवश्यक है।

50. टिकाऊ खेती का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(a) केवल वर्तमान उत्पादन बढ़ाना
(b) प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखते हुए उत्पादन करना
(c) अधिक मजदूर लगाना
(d) केवल सिंचाई बढ़ाना

उत्तर – (b) प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखते हुए उत्पादन करना

व्याख्या:
टिकाऊ खेती (Sustainable Agriculture) का मुख्य उद्देश्य है—उत्पादन बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा एक साथ सुनिश्चित करना। इसका अर्थ है कि खेती के दौरान मृदा की उर्वरता, जल संसाधन, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जाए। टिकाऊ खेती में फसल चक्रीकरण, जैविक उर्वरक, संतुलित रासायनिक उर्वरक, वर्षा-आधारित सिंचाई और संसाधन संरक्षण जैसी पद्धतियाँ अपनाई जाती हैं।

महत्व: टिकाऊ खेती से न केवल वर्तमान खाद्यान्न उत्पादन सुरक्षित रहता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि आधारित संसाधन भी संरक्षित रहते हैं।

51. रासायनिक उर्वरक मिट्टी को किस रूप में प्रभावित करते हैं?

(a) मिट्टी को और उपजाऊ बनाते हैं
(b) मिट्टी की उर्वरता घटाते हैं
(c) केवल जल को प्रदूषित करते हैं
(d) केवल फसल का रंग बदलते हैं

उत्तर – (b) मिट्टी की उर्वरता घटाते हैं

व्याख्या:
लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों का लगातार प्रयोग मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को कम कर देता है। अत्यधिक रासायनिक उर्वरक उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा घटती है, मृदा की संरचना बिगड़ती है और पोषक तत्व असंतुलित हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति घट जाती है और सतत कृषि के लिए खतरा उत्पन्न होता है।

महत्व: टिकाऊ कृषि और जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है ताकि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण सुरक्षित रहे।

52. रासायनिक उर्वरकों का सबसे अधिक उपयोग किस राज्य में होता है?

(a) उत्तर प्रदेश
(b) पंजाब
(c) बिहार
(d) पश्चिम बंगाल

उत्तर – (b) पंजाब

व्याख्या:
भारत में रासायनिक उर्वरकों का सबसे अधिक उपयोग पंजाब में होता है। इसका मुख्य कारण हरित क्रांति के समय पंजाब में गेहूँ और चावल की उच्च उपज वाली (HYV) फसलों की व्यापक खेती है। सिंचाई की सुविधाओं और सरकारी समर्थन (जैसे MSP) के कारण किसान इन फसलों में अधिक रासायनिक उर्वरक का उपयोग करते हैं। हालांकि, लगातार रासायनिक खाद के प्रयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता घटती है और भूजल प्रदूषण की समस्या बढ़ती है।

महत्व: यह उदाहरण दिखाता है कि सतत कृषि और मृदा संरक्षण के उपाय क्यों जरूरी हैं।

53. पालमपुर में कुल कितने परिवार रहते हैं?

(a) 250
(b) 350
(c) 450
(d) 500

उत्तर – (c) 450 परिवार

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में कुल 450 परिवार रहते हैं। यह संख्या गाँव की सामाजिक और आर्थिक संरचना को समझने में मदद करती है। प्रत्येक परिवार कृषि और सहायक गतिविधियों (जैसे पशुपालन, बागवानी) में संलग्न है। परिवारों की संख्या यह भी दर्शाती है कि भूमि का वितरण, संसाधनों की उपलब्धता और मजदूरी आधारित गतिविधियाँ किस पैमाने पर होती हैं।

54. पालमपुर के कितने परिवारों के पास भूमि नहीं है?

(a) 50 परिवार
(b) 100 परिवार
(c) 150 परिवार
(d) 200 परिवार

उत्तर – (c) 150 परिवार

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में कुल 450 परिवारों में से लगभग 150 परिवार भूमिहीन हैं। यह आंकड़ा ग्रामीण भारत में भूमि असमानता की समस्या को दर्शाता है। भूमिहीन परिवार मुख्यतः मजदूरी और अन्य सहायक कार्यों पर निर्भर रहते हैं। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक संरचना और कृषि उत्पादन पर प्रभाव डालती है।

55. भूमिहीन परिवार अपनी आय के लिए किस पर निर्भर होते हैं?

(a) पशुपालन
(b) दिहाड़ी मजदूरी
(c) छोटे व्यवसाय
(d) उधार

उत्तर – (b) दिहाड़ी मजदूरी

व्याख्या:
भूमिहीन परिवार अपनी जीविका मुख्यतः दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर करते हैं। ये परिवार अन्य किसानों के खेतों में काम करके आय प्राप्त करते हैं। इस प्रकार की निर्भरता ग्रामीण अर्थव्यवस्था में असमानता और सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाती है। भूमि का अभाव उन्हें कृषि निर्णयों में स्वतंत्रता नहीं देता और आय अस्थिर रहती है।

56. पालमपुर में कितने परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है?

(a) 150
(b) 200
(c) 240
(d) 300

उत्तर – (c) 240 परिवार

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में लगभग 240 परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। यह आंकड़ा भारत में कृषि भूमि के छोटे-बंटवारे (Fragmentation) की समस्या को दर्शाता है। छोटे भूखंडों में खेती करने से उत्पादन सीमित होता है और कृषकों की आर्थिक स्थिति अस्थिर रहती है। ऐसे परिवार अक्सर दिहाड़ी मजदूरी या अन्य सहायक गतिविधियों पर निर्भर रहते हैं।

57. छोटे किसानों की भूमि की औसत सीमा कितनी होती है?

(a) 0.75 हेक्टेयर
(b) 1 हेक्टेयर
(c) 2 हेक्टेयर
(d) 3 हेक्टेयर

उत्तर – (a) 0.75 हेक्टेयर

व्याख्या:
छोटे किसानों की औसत भूमि लगभग 0.75 हेक्टेयर है। इतनी सीमित भूमि होने के कारण ये किसान बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं कर पाते और उनकी आय अस्थिर रहती है। छोटे भूखंडों के कारण फसल चक्रीकरण और मशीनीकरण भी कठिन होता है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था में असमानता और भूमिहीन परिवारों की संख्या बढ़ने का कारण बनती है।

58. छोटे किसान अपनी खेती में सुधार हेतु क्या करते हैं?

(a) उधार लेकर आधुनिक साधन खरीदते हैं
(b) अधिक मजदूर रखते हैं
(c) केवल पारंपरिक तरीके अपनाते हैं
(d) खेत खाली छोड़ देते हैं

उत्तर – (a) उधार लेकर आधुनिक साधन खरीदते हैं

व्याख्या:
छोटे किसान महँगे आधुनिक साधन (बीज, उर्वरक आदि) खरीदने के लिए अक्सर उधार लेते हैं।

59. पालमपुर में बड़े किसान कितने हैं?

(a) 40
(b) 50
(c) 60
(d) 75

उत्तर – (c) 60 किसान

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में लगभग 60 परिवार बड़े किसान हैं। ये किसान आम तौर पर 4 हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि पर खेती करते हैं। बड़े किसानों के पास पर्याप्त संसाधन, आधुनिक खेती के साधन और सिंचाई की सुविधाएँ होती हैं, जिससे उनका उत्पादन और आय छोटे किसानों की तुलना में अधिक होती है। इस असमान भूमि वितरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय और सामाजिक असमानता दिखाई देती है।

60. बड़े किसानों की औसत भूमि कितनी होती है?

(a) 2 हेक्टेयर
(b) 5 हेक्टेयर
(c) 7.5 हेक्टेयर
(d) 10 हेक्टेयर

उत्तर – (d) 10 हेक्टेयर

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में बड़े किसानों के पास औसतन 10 हेक्टेयर भूमि है। इतनी विशाल भूमि होने के कारण वे आधुनिक खेती के साधनों (मशीनरी, उर्वरक, सिंचाई) का अधिक उपयोग कर सकते हैं और उत्पादन भी अधिक होता है। इस प्रकार की भूमि-संपत्ति वितरण से ग्रामीण आय में असमानता और छोटे किसानों व भूमिहीन परिवारों के बीच आर्थिक अंतर बढ़ता है।

61. छोटे किसानों को बड़े किसानों से अलग कौन सी समस्या होती है?

(a) सिंचाई की कमी
(b) उधार लेने की मजबूरी
(c) मशीनों की कमी
(d) बाजार तक पहुँच

उत्तर – (b) उधार लेने की मजबूरी

व्याख्या:
छोटे किसान अक्सर उधार लेने के लिए मजबूर होते हैं क्योंकि उनकी भूमि सीमित (0.75–2 हेक्टेयर) और संसाधन कम होते हैं। वे बीज, उर्वरक और सिंचाई के साधन खरीदने के लिए पैसे उधार लेते हैं। इसके विपरीत, बड़े किसानों के पास पर्याप्त संसाधन और आय होती है, जिससे उन्हें उधार लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आर्थिक असमानता और ऋण जाल जैसी समस्याओं को जन्म देती है।

62. पालमपुर में कितने प्रतिशत परिवार भूमिहीन हैं?

(a) एक-तिहाई
(b) एक-चौथाई
(c) आधे
(d) दो-तिहाई

उत्तर – (a) एक-तिहाई

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में कुल 450 परिवारों में से लगभग 150 परिवार भूमिहीन हैं, यानी एक-तिहाई (≈33%) परिवारों के पास कृषि योग्य भूमि नहीं है। भूमिहीन परिवार मुख्यतः दिहाड़ी मजदूरी या अन्य सहायक कार्यों पर निर्भर रहते हैं।

63. भूमि वितरण में सबसे अधिक भूमि किसके पास केंद्रित है?

(a) भूमिहीन मजदूर
(b) छोटे किसान
(c) बड़े किसान
(d) सरकारी जमीन

उत्तर – (c) बड़े किसान

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 60 बड़े किसानों के पास केंद्रित है। बड़े किसानों के पास औसतन 10 हेक्टेयर भूमि होती है, जिससे उनके पास उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और बाजार तक पहुँचने की अधिक क्षमता होती है। इसके विपरीत, छोटे और भूमिहीन किसानों की भूमि सीमित या न के बराबर होती है, जिससे ग्रामीण आर्थिक असमानता स्पष्ट होती है।

64. रासायनिक उर्वरकों की अधिक मात्रा का असर किस पर पड़ता है?

(a) केवल फसल पर
(b) केवल जल पर
(c) मिट्टी की सूक्ष्मजीव गतिविधियों पर
(d) मजदूरों पर

उत्तर – (c) मिट्टी की सूक्ष्मजीव गतिविधियों पर

व्याख्या:
रासायनिक उर्वरकों की अधिक मात्रा मिट्टी की सूक्ष्मजीव गतिविधियों को प्रभावित करती है। मिट्टी में सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों को सुलझाने, नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अत्यधिक रासायनिक उर्वरक इनके जैविक गुणों और संख्या को घटा देता है, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता कम होती है और दीर्घकालीन खेती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

65. भूमि वितरण के आधार पर पालमपुर की प्रमुख समस्या कौन-सी है?

(a) भूमि का अभाव
(b) भूमि का असमान वितरण
(c) भूमि की अधिकता
(d) भूमि की गुणवत्ता

उत्तर – (b) भूमि का असमान वितरण

व्याख्या:
पालमपुर में भूमि का असमान वितरण प्रमुख समस्या है। अधिकांश भूमि केवल कुछ बड़े किसानों के पास केंद्रित है, जबकि छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों के पास बहुत कम या कोई भूमि नहीं है। इस असमानता से ग्रामीण समाज में आर्थिक और सामाजिक विभाजन बढ़ता है, छोटे किसानों की आय अस्थिर रहती है, और भूमि पर आधारित विकास सीमित होता है।

66. सीमांत और छोटे किसान किसे कहते हैं?

(a) 2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसान
(b) 5 हेक्टेयर भूमि वाले किसान
(c) 10 हेक्टेयर भूमि वाले किसान
(d) भूमिहीन किसान

उत्तर – (a) 2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसान

व्याख्या:
किसानों को सीमांत और छोटे किसान कहा जाता है जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि होती है। सीमित भूमि होने के कारण ये किसान आधुनिक खेती के साधन (मशीनरी, सिंचाई) का पूरा उपयोग नहीं कर पाते और उत्पादन सीमित रहता है। इन्हें अक्सर उधारी, मजदूरी या अन्य सहायक गतिविधियों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय असमानता और आर्थिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।

67. भारत में कुल कितने प्रतिशत छोटे व सीमांत किसान हैं?

(a) 25%
(b) 55%
(c) 85%
(d) 90%

उत्तर – (c) 85%

व्याख्या:
भारत में लगभग 85% किसान सीमांत और छोटे किसान हैं। इन किसानों के पास भूमि सीमित (2 हेक्टेयर से कम) होने के कारण उनकी उत्पादन क्षमता कम होती है और आय अस्थिर रहती है। अधिकांश छोटे किसान पारंपरिक खेती, मजदूरी या उधारी पर निर्भर रहते हैं। इस आंकड़े से भारतीय कृषि की संरचना, भूमि असमानता और ग्रामीण विकास नीतियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है।

68. भारत की कुल भूमि का कितना प्रतिशत भाग छोटे किसानों के पास है?

(a) 15%
(b) 25%
(c) 35%
(d) 45%

उत्तर – (a) 15%

व्याख्या:
भारत में लगभग 85% छोटे और सीमांत किसान केवल 15% कृषि भूमि पर खेती करते हैं। इसका अर्थ है कि अधिकांश भूमि बड़े किसानों के पास केंद्रित है। छोटे किसानों के पास भूमि सीमित होने के कारण उत्पादन, आय और संसाधनों का उपयोग सीमित रहता है। यह ग्रामीण आर्थिक असमानता और भूमि वितरण में असंतुलन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

69. बड़े और मध्यम किसानों के पास भारत की कितनी प्रतिशत कृषि भूमि है?

(a) 15%
(b) 25%
(c) 40%
(d) 55%

उत्तर – (d) 55%

व्याख्या:
भारत में मध्यम और बड़े किसान कुल किसानों के लगभग 15% हैं, लेकिन इनके पास 55% कृषि भूमि केंद्रित है। इसका मतलब है कि भूमि वितरण में असमानता बहुत अधिक है। बड़े और मध्यम किसानों के पास संसाधन, आधुनिक कृषि तकनीक और सिंचाई सुविधाएँ अधिक होती हैं, जिससे उनका उत्पादन और आय छोटे किसानों की तुलना में काफी बेहतर होता है।

70. भारत में भूमि वितरण की समस्या कैसी है?

(a) भूमि समान रूप से बँटी है
(b) भूमि असमान रूप से बँटी है
(c) भूमि बहुत अधिक है
(d) भूमि का उपयोग नहीं होता

उत्तर – (b) भूमि असमान रूप से बँटी है

व्याख्या:
भारत में भूमि असमान रूप से बँटी हुई है। अधिकांश कृषि भूमि कुछ बड़े और मध्यम किसानों के पास केंद्रित है, जबकि छोटे और सीमांत किसानों के पास बहुत कम भूमि है और कई किसान भूमिहीन हैं। यह असमान वितरण ग्रामीण आर्थिक असमानता, आय में अंतर और सामाजिक समस्याओं का कारण बनता है।

71. खेती में उत्पादन के दूसरे आवश्यक साधन कौन से हैं?

(a) भूमि और श्रम
(b) पूँजी और श्रम
(c) भूमि और बीज
(d) बीज और उर्वरक

उत्तर – (b) पूँजी और श्रम

व्याख्या:
कृषि उत्पादन के लिए भूमि सबसे मूलभूत साधन है, लेकिन इसके साथ पूँजी और श्रम भी आवश्यक हैं। पूँजी में बीज, उर्वरक, मशीनरी और सिंचाई के साधन शामिल हैं, जबकि श्रम फसल की बुवाई, देखभाल और कटाई के लिए जरूरी है। इन साधनों की उपलब्धता कृषि उत्पादन और किसानों की आय को सीधे प्रभावित करती है।

72. छोटे किसान अपने खेतों में श्रम की पूर्ति कैसे करते हैं?

(a) मजदूर रखते हैं
(b) स्वयं और परिवार मिलकर काम करता है
(c) उधार लेकर मजदूर बुलाते हैं
(d) खेत छोड़ देते हैं

उत्तर – (b) स्वयं और परिवार मिलकर काम करता है

व्याख्या:
छोटे किसान स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों की मदद से खेतों में श्रम की पूर्ति करते हैं। उनके पास पूंजी कम होने के कारण मजदूर रखना महंगा होता है। यह स्थिति कृषि उत्पादन, समय प्रबंधन और परिवार की आय पर असर डालती है। इसके साथ ही यह ग्रामीण परिवारों में श्रम की भूमिका और पारिवारिक सहयोग को भी दर्शाती है।

73. खेतों में काम करने वाले मजदूरों का मुख्य आधार क्या है?

(a) स्वयं की भूमि
(b) दिहाड़ी मजदूरी
(c) पशुपालन
(d) सरकारी नौकरी

उत्तर – (b) दिहाड़ी मजदूरी

व्याख्या:
पालमपुर में भूमिहीन परिवार और बहुत छोटे किसान मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। इनके पास खेती के लिए अपनी भूमि नहीं है, इसलिए वे अन्य किसानों के खेतों में काम करके अपनी आजीविका कमाते हैं। यह स्थिति ग्रामीण भारत में भूमि असमानता और आर्थिक असुरक्षा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

74. पालमपुर में भूमिहीन मजदूरों की स्थिति कैसी है?

(a) उनके पास अपनी खेती है
(b) वे उधार देकर पैसा कमाते हैं
(c) वे दूसरों के खेतों में काम करते हैं
(d) वे केवल पशुपालन करते हैं

उत्तर – (c) वे दूसरों के खेतों में काम करते हैं

व्याख्या:
पालमपुर में भूमिहीन मजदूर अपने जीवन निर्वाह के लिए मुख्यतः दूसरों के खेतों में काम करते हैं। उनके पास खुद की खेती के लिए भूमि नहीं है, इसलिए वे दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। यह स्थिति भूमि असमानता, ग्रामीण गरीबी और सामाजिक असुरक्षा को दर्शाती है।

75. खेती में किस प्रकार का श्रम सबसे अधिक प्रयोग होता है?

(a) अकुशल श्रम
(b) कुशल श्रम
(c) मशीन आधारित श्रम
(d) केवल पारिवारिक श्रम

उत्तर – (a) अकुशल श्रम

व्याख्या:
खेती में सबसे अधिक अकुशल श्रम का प्रयोग होता है। जैसे बीज बोना, निराई-गुड़ाई, कटाई और अन्य दैनिक कार्यों में कुशलता की आवश्यकता कम होती है। छोटे और सीमांत किसान अक्सर परिवार के सदस्य या स्थानीय मजदूरों पर निर्भर रहते हैं। यह श्रम संरचना ग्रामीण अर्थव्यवस्था, उत्पादन लागत और कृषि दक्षता को प्रभावित करती है।

76. मजदूरों को काम कब मिलता है?

(a) पूरे साल लगातार
(b) केवल खेती के मौसम में
(c) केवल बरसात में
(d) केवल गर्मी में

उत्तर – (b) केवल खेती के मौसम में

व्याख्या:
पालमपुर में भूमिहीन और छोटे किसान मजदूरों को पूरे साल लगातार रोजगार नहीं मिलता। उन्हें मुख्यतः खरीफ और रबी जैसे फसल मौसमों में ही खेतों में काम मिल पाता है। इस अस्थायी रोजगार की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में आय की अनिश्चितता और आर्थिक असुरक्षा को दर्शाती है।

77. सीमांत व छोटे किसान मजदूरों से कैसे भिन्न होते हैं?

(a) उनके पास कोई भी काम नहीं होता
(b) उनके पास थोड़ी सी भूमि होती है
(c) वे केवल मजदूरी करते हैं
(d) वे बड़े व्यापारी होते हैं

उत्तर – (b) उनके पास थोड़ी सी भूमि होती है

व्याख्या:
सीमांत और छोटे किसान मजदूरों से इसलिए भिन्न होते हैं क्योंकि उनके पास थोड़ी-सी भूमि होती है, जिसके माध्यम से वे अपनी जरूरत के लिए कुछ उत्पादन कर सकते हैं। वहीं, भूमिहीन मजदूर पूरी तरह दूसरों के खेतों पर दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। यह अंतर ग्रामीण सामाजिक और आर्थिक संरचना को स्पष्ट करता है।

78. खेत मजदूरों की आय की स्थिरता कैसी होती है?

(a) बहुत स्थिर
(b) बिल्कुल अस्थिर
(c) हमेशा बढ़ती रहती है
(d) स्थायी नौकरी जैसी

उत्तर – (b) बिल्कुल अस्थिर

व्याख्या:
पालमपुर के खेत मजदूरों की आय बिल्कुल अस्थिर होती है। उन्हें मुख्यतः फसल बोने और काटने के मौसम में ही काम मिलता है, जबकि बाकी समय उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिलता। इस अस्थिरता के कारण मजदूरों की आर्थिक सुरक्षा कम होती है और वे अक्सर कर्ज़ या उधार पर निर्भर रहते हैं।

79. खेती में मजदूर रखने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

(a) क्योंकि किसान आलसी होते हैं
(b) क्योंकि खेती में बहुत अधिक श्रम की जरूरत होती है
(c) क्योंकि मजदूर सस्ते होते हैं
(d) क्योंकि कानून ऐसा कहता है

उत्तर – (b) क्योंकि खेती में बहुत अधिक श्रम की जरूरत होती है

व्याख्या:
खेती में मजदूर रखने की आवश्यकता इसलिए पड़ती है क्योंकि कृषि कार्य जैसे बुवाई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कटाई में बहुत अधिक श्रम लगता है। छोटे और सीमांत किसान अपने परिवार के श्रम के अतिरिक्त स्थायी या अस्थायी मजदूरों पर निर्भर रहते हैं। यह ग्रामीण कृषि प्रणाली में श्रम की भूमिका और उत्पादन क्षमता को स्पष्ट करता है।

80. छोटे किसान और खेत मजदूरों की मुख्य समस्या क्या है?

(a) मशीनों की कमी
(b) उर्वरक की कमी
(c) भूमि और स्थायी रोजगार की कमी
(d) सिंचाई साधनों की कमी

उत्तर – (c) भूमि और स्थायी रोजगार की कमी

व्याख्या:
छोटे किसान और खेत मजदूर मुख्य रूप से भूमि की कमी और स्थायी रोजगार की अनुपलब्धता जैसी समस्याओं से जूझते हैं। छोटे किसानों के पास केवल थोड़ी भूमि होती है और वे अतिरिक्त आय के लिए मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। भूमिहीन मजदूरों के पास कोई खेती योग्य भूमि नहीं होती और उन्हें केवल मौसम आधारित अस्थायी रोजगार मिलता है। यह स्थिति ग्रामीण आर्थिक असमानता और सामाजिक असुरक्षा को स्पष्ट करती है।

81. पालमपुर के खेत मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या क्या है?

(a) भूमि का बँटवारा
(b) कम काम और कम मज़दूरी
(c) आधुनिक मशीनों की कमी
(d) सिंचाई की कमी

उत्तर – (b) कम काम और कम मज़दूरी

व्याख्या:
पालमपुर के खेत मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या है कम काम और कम मजदूरी। उन्हें मुख्यतः फसल बोने और काटने के मौसम में ही अस्थायी रोजगार मिलता है, और मजदूरी भी बहुत सीमित होती है। इस वजह से उनकी आर्थिक सुरक्षा कमजोर रहती है और वे अक्सर कर्ज़ या उधार पर निर्भर रहते हैं।

82. मजदूरों को अधिकतर काम कौन देता है?

(a) सरकारी विभाग
(b) बड़े और मध्यम किसान
(c) छोटे किसान
(d) सहकारी समितियाँ

उत्तर – (b) बड़े और मध्यम किसान

व्याख्या:
पालमपुर में मजदूरों को अधिकतर बड़े और मध्यम किसान ही काम देते हैं। उनके पास पर्याप्त भूमि और संसाधन होते हैं, इसलिए वे अस्थायी और दिहाड़ी मजदूरों को रोजगार पर रखते हैं। छोटे किसान या सीमांत किसान अक्सर केवल अपने परिवार के श्रम पर निर्भर रहते हैं और भूमिहीन मजदूरों को बहुत कम अवसर दे पाते हैं।

83. खेत मजदूरों को पूरे साल काम क्यों नहीं मिल पाता?

(a) खेती में काम ही नहीं होता
(b) मशीनें काम कर लेती हैं
(c) खेती मौसमी काम है
(d) मजदूर काम नहीं करना चाहते

उत्तर – (c) खेती मौसमी काम है

व्याख्या:
पालमपुर के खेत मजदूरों को पूरे साल काम नहीं मिल पाता क्योंकि खेती मौसमी गतिविधि है। मुख्यतः खरीफ और रबी के मौसम में ही बुवाई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कटाई के लिए श्रम की जरूरत होती है। इस वजह से भूमिहीन और अस्थायी मजदूरों की आय अस्थिर और असुरक्षित रहती है।

84. मजदूरी की दर किस पर निर्भर करती है?

(a) खेत की उपज पर
(b) किसानों की इच्छा पर
(c) मजदूरों की संख्या और काम की मांग पर
(d) सरकार की सब्सिडी पर

उत्तर – (c) मजदूरों की संख्या और काम की मांग पर

व्याख्या:
खेती में मजदूरी की दर मुख्यतः मजदूरों की संख्या (आपूर्ति) और काम की मांग पर निर्भर करती है। जब मजदूर कम हों और काम अधिक हो, तो मजदूरी बढ़ती है; और जब मजदूर अधिक हों या काम कम हो, तो मजदूरी घटती है। यह ग्रामीण कृषि में मजदूरी का बाजार आधारित निर्धारण दर्शाता है।

85. पालमपुर के मजदूर को ईंट-भट्ठे पर काम करने के लिए कितनी मज़दूरी मिली?

(a) ₹1000
(b) ₹2000
(c) ₹300
(d) ₹500

उत्तर – (a) ₹1000

व्याख्या:
पालमपुर के मजदूरों को खेतों में काम न मिलने पर अन्य अस्थायी रोजगार, जैसे ईंट-भट्ठे पर काम, करना पड़ता है। इस काम के लिए उन्हें लगभग ₹1000 मजदूरी मिली। यह उदाहरण ग्रामीण मजदूरी की अस्थिरता और रोजगार विकल्पों की सीमितता को स्पष्ट करता है।

86. मजदूरों की स्थिति कठिन क्यों है?

(a) खेती छोड़ना नहीं चाहते
(b) कम मजदूरी और ज्यादा कर्ज
(c) सरकारी नौकरी मिल जाती है
(d) वे शहर में रहते हैं

उत्तर – (b) कम मजदूरी और ज्यादा कर्ज

व्याख्या:
पालमपुर के खेत मजदूरों की स्थिति कठिन है क्योंकि उन्हें कम मजदूरी मिलती है और जीवन चलाने के लिए अक्सर उधार लेना पड़ता है, जिससे कर्ज बढ़ जाता है। इसके कारण उनकी आर्थिक सुरक्षा कमजोर रहती है और जीवनस्तर अस्थिर होता है। यह ग्रामीण मजदूरों की आर्थिक असमानता और सामाजिक असुरक्षा को स्पष्ट करता है।

87. न्यूनतम मजदूरी का उद्देश्य क्या है?

(a) मजदूरों को गरीब बनाए रखना
(b) किसानों की आय बढ़ाना
(c) मजदूरों का शोषण रोकना
(d) भूमि का बँटवारा करना

उत्तर – (c) मजदूरों का शोषण रोकना

व्याख्या:
न्यूनतम मजदूरी का मुख्य उद्देश्य है कि मजदूरों को उनके श्रम का न्यायसंगत भुगतान मिले और उन्हें शोषण से बचाया जा सके। यह नीति विशेष रूप से अस्थायी और भूमिहीन मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए खेती और अन्य अस्थायी रोजगार पर निर्भर रहते हैं।

88. मजदूर को काम की तलाश में कहाँ जाना पड़ा?

(a) खेतों में
(b) शहर में ईंट-भट्ठे पर
(c) फैक्ट्रियों में
(d) स्कूल में

उत्तर – (b) शहर में ईंट-भट्ठे पर

व्याख्या:
पालमपुर के मजदूरों को गाँव में काम न मिलने पर अस्थायी रोजगार के लिए शहर के ईंट-भट्ठों पर काम करना पड़ा। यह स्थिति ग्रामीण अस्थायी श्रमिकों की आर्थिक असुरक्षा और रोजगार की मौसमी प्रकृति को दर्शाती है।

89. पालमपुर में मजदूरों को किन कारणों से कठिनाई होती है?

(a) खेत की उपज अधिक होना
(b) काम का मौसमी होना
(c) मजदूरी का कम होना
(d) दोनों (b) और (c)

उत्तर – (d) दोनों (b) और (c)

व्याख्या:
पालमपुर के मजदूरों को मुख्यतः दो कारणों से कठिनाई होती है:

  1. काम का मौसमी होना – खेती के काम केवल बुवाई और कटाई के मौसम में ही होता है।
  2. मजदूरी का कम होना – सीमित अवसरों में मिलने वाली मजदूरी पर्याप्त नहीं होती।

यह स्थिति ग्रामीण अस्थायी मजदूरों की आय की अस्थिरता और आर्थिक असुरक्षा को स्पष्ट करती है।

90. मजदूरों की तुलना किसानों से कैसे की जा सकती है?

(a) मजदूर हमेशा अमीर होते हैं
(b) मजदूरों के पास भूमि नहीं होती जबकि किसानों के पास कुछ भूमि होती है
(c) मजदूर और किसान दोनों समान हैं
(d) मजदूर केवल उद्योग में काम करते हैं

उत्तर – (b) मजदूरों के पास भूमि नहीं होती जबकि किसानों के पास कुछ भूमि होती है

व्याख्या:
किसान और मजदूर के बीच मुख्य अंतर भूमि का स्वामित्व है।

  • किसान (Farmers): अधिकांश किसानों के पास थोड़ी-बहुत भूमि होती है, जिस पर वे खेती करके अपनी जीविका चलाते हैं।
  • मजदूर (Labourers): भूमिहीन होते हैं, इसलिए उन्हें दूसरों की ज़मीन पर काम करना पड़ता है और वे मजदूरी पर निर्भर रहते हैं।

इस प्रकार, किसान चाहे गरीब हो, लेकिन उसके पास कुछ न कुछ भूमि होती है; जबकि मजदूर पूरी तरह से भूमिहीन होता है।

91. प्रवासी मजदूरों के प्रवास का मुख्य कारण क्या है?

(a) गाँव में शिक्षा की कमी
(b) गाँव में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएँ न होना
(c) गाँव में रोजगार और आय का अभाव
(d) गाँव में पानी की कमी

उत्तर – (c) गाँव में रोजगार और आय का अभाव

व्याख्या:
गाँवों में कृषि कार्य मौसमी होता है और पूरे साल पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं होता। इसके अलावा उद्योग-धंधों और वैकल्पिक रोज़गार की कमी के कारण मजदूरों की आय बहुत सीमित रहती है। जीवन-यापन के लिए अधिक आय की आवश्यकता होने पर मजदूर बेहतर रोजगार अवसरों की तलाश में शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, सूरत और हैदराबाद की ओर प्रवास करते हैं। यही प्रवासी मजदूरों के प्रवास का मुख्य कारण है।

92. खेती के लिए किसानों को सबसे पहले किस चीज़ की आवश्यकता होती है?

(a) ट्रैक्टर
(b) आवश्यक पूँजी
(c) बिजली
(d) मजदूर

उत्तर – (b) आवश्यक पूँजी

व्याख्या:
किसान जब खेती की शुरुआत करता है तो सबसे पहली आवश्यकता पूँजी की होती है। बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई का प्रबंध, कृषि यंत्रों का उपयोग और मजदूरों की मजदूरी—इन सभी के लिए धन चाहिए। यदि पूँजी उपलब्ध न हो तो किसान खेती का कार्य आरंभ ही नहीं कर सकता। इसलिए खेती की मूलभूत आवश्यकता पूँजी है।

93. खेती में पूँजी की आवश्यकता क्यों होती है?

(a) फसल बेचने के लिए
(b) बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई के साधनों के लिए
(c) केवल मजदूरों के वेतन के लिए
(d) केवल मशीन खरीदने के लिए

उत्तर – (b) बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई के साधनों के लिए

व्याख्या:
खेती में उत्पादन शुरू करने के लिए किसान को सबसे पहले पूँजी की आवश्यकता होती है। इस पूँजी से वह बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई के साधन, कृषि यंत्र और मजदूरी जैसी आवश्यक चीज़ों की व्यवस्था करता है। यदि पूँजी न हो तो किसान खेती का कार्य सुचारु रूप से नहीं कर सकता। इसलिए खेती में पूँजी का होना अत्यंत आवश्यक है।

94. पूँजी का कृषि उत्पादन में क्या महत्व है?

(a) यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है
(b) केवल फसल कटाई के लिए उपयोग होती है
(c) बीज, खाद, कीटनाशक, पानी और मजदूरी के लिए आवश्यक है
(d) केवल बड़े किसान ही उपयोग करते हैं

उत्तर – (c) बीज, खाद, कीटनाशक, पानी और मजदूरी के लिए आवश्यक है

व्याख्या:
खेती में पूँजी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। किसान को बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी, कृषि यंत्र और अन्य साधन प्राप्त करने के लिए पूँजी की आवश्यकता होती है। बिना पूँजी के किसान इन साधनों की व्यवस्था नहीं कर सकता और उत्पादन संभव नहीं हो पाता। इस प्रकार कृषि उत्पादन की आधारशिला पूँजी ही है।

95. किसान अपने उत्पादन का सबसे पहला उपयोग किसके लिए करते हैं?

(a) बाजार में बेचने के लिए
(b) अपने परिवार की आवश्यकताओं के लिए
(c) ऋण चुकाने के लिए
(d) व्यापार करने के लिए

उत्तर – (b) अपने परिवार की आवश्यकताओं के लिए

व्याख्या:
किसान अपने खेत से प्राप्त उत्पादन का सबसे पहला उपयोग अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं। वे परिवार के उपभोग हेतु गेहूँ, चावल, दाल जैसी अनाज की वस्तुएँ सुरक्षित रखते हैं। इसके बाद ही शेष उत्पादन को वे बाजार में बेचते हैं। इस प्रकार, कृषि उत्पादन का प्राथमिक उद्देश्य परिवार का पोषण और जीवन-यापन होता है, जबकि अतिरिक्त उत्पादन से आय अर्जित की जाती है।

96. छोटे किसान आम तौर पर अधिशेष उत्पादन क्यों नहीं बेच पाते?

(a) उनके पास बाजार तक पहुँच नहीं होती
(b) उनकी ज़मीन बंजर होती है
(c) उनका उत्पादन केवल उनके परिवार की ज़रूरतों तक सीमित रहता है
(d) वे बाजार में बिक्री करना नहीं चाहते

उत्तर – (c) उनका उत्पादन केवल उनके परिवार की ज़रूरतों तक सीमित रहता है

व्याख्या:
छोटे किसानों के पास भूमि बहुत सीमित होती है, जिससे उनकी खेती का उत्पादन भी कम होता है। यह उत्पादन केवल उनके परिवार की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने लायक होता है। इस कारण उनके पास अतिरिक्त (अधिशेष) अनाज बचता ही नहीं, जिसे वे बाजार में बेच सकें। इसलिए छोटे किसान आम तौर पर बाजार में अधिशेष उत्पादन नहीं बेच पाते।

97. बड़े किसान अधिशेष उत्पादन का क्या करते हैं?

(a) उसे बर्बाद कर देते हैं
(b) शहरों में दान कर देते हैं
(c) बाजार में बेचकर नकद कमाई करते हैं
(d) मजदूरों को बाँट देते हैं

उत्तर – (c) बाजार में बेचकर नकद कमाई करते हैं

व्याख्या:
बड़े किसानों के पास भूमि अधिक होती है, इसलिए उनका उत्पादन परिवार की आवश्यकताओं से कहीं अधिक होता है। इस अतिरिक्त (अधिशेष) उत्पादन को वे बाजार में बेचते हैं। बिक्री से प्राप्त नकद आय का उपयोग वे कृषि में नई मशीनें, उर्वरक, बीज आदि खरीदने, कर्ज चुकाने और जीवन-स्तर सुधारने में करते हैं। इस प्रकार अधिशेष उत्पादन बड़े किसानों की आय और संपन्नता का मुख्य स्रोत होता है।

98. खेती में पूँजी की व्यवस्था का सबसे कठिन कार्य किसके लिए होता है?

(a) बड़े किसान
(b) छोटे किसान
(c) मजदूर
(d) व्यापारी

उत्तर – (b) छोटे किसान

व्याख्या:
खेती के लिए बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और मशीनों जैसी चीज़ों हेतु पूँजी की आवश्यकता होती है। बड़े किसानों के पास अधिशेष उत्पादन और बचत होती है, जिससे वे आसानी से पूँजी जुटा लेते हैं। लेकिन छोटे किसानों के पास न तो अधिशेष उत्पादन होता है और न ही पर्याप्त बचत। इसलिए उन्हें पूँजी की व्यवस्था करने में कठिनाई होती है और अक्सर उन्हें महाजनों या साहूकारों से ऊँचे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है।

99. अधिशेष उत्पादन से किसानों को क्या लाभ होता है?

(a) पूँजी इकट्ठी कर सकते हैं
(b) उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है
(c) जीवन स्तर सुधरता है
(d) उपरोक्त सभी

उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

व्याख्या:
जब किसानों को अपनी ज़रूरत से अधिक (अधिशेष) उत्पादन प्राप्त होता है, तो वे इसे बाजार में बेचकर नकद आय अर्जित करते हैं। इस आय से वे नई पूँजी इकट्ठी कर सकते हैं, जैसे – उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक और मशीनरी खरीदना। इससे भविष्य में उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। साथ ही अधिशेष उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आय उनके जीवन स्तर को भी सुधारती है, जैसे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन-यापन पर खर्च करना। इसलिए अधिशेष उत्पादन किसानों के लिए आर्थिक प्रगति और सामाजिक उत्थान दोनों का साधन है।

100. पालमपुर के केवल कितने प्रतिशत लोग खेती के अलावा अन्य कार्यों में लगे हैं?

(a) 10%
(b) 15%
(c) 25%
(d) 50%

उत्तर – (c) 25%

व्याख्या:
पालमपुर गाँव की लगभग 75% आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन लगभग 25% लोग गैर-कृषि कार्यों में लगे हुए हैं। इनमें परिवहन, दुकानदारी, छोटे उद्योग, दुग्ध उत्पादन, बढ़ईगिरी, शिक्षण, सरकारी सेवाएँ आदि शामिल हैं। यह दर्शाता है कि पालमपुर जैसे गाँवों में भी केवल खेती ही आय का साधन नहीं है, बल्कि अन्य कार्यों से भी लोग अपनी आजीविका चलाते हैं।

101. पालमपुर में प्रमुख गैर-कृषि गतिविधि कौन सी है?

(a) परिवहन
(b) डेयरी
(c) छोटे उद्योग
(d) दुकानदारी

उत्तर – (b) डेयरी

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में खेती के अलावा डेयरी व्यवसाय सबसे प्रमुख गैर-कृषि गतिविधि है। कई परिवार दूध उत्पादन के लिए भैंस और गाय पालते हैं और प्राप्त दूध को रायगंज के पासवाले दूध सहकारी समितियों या सीधे बाजार में बेचते हैं। डेयरी से उन्हें नियमित नकद आय प्राप्त होती है, जो खेती के मौसमी रोजगार पर निर्भरता को कम करती है। यही कारण है कि पालमपुर की सबसे बड़ी गैर-कृषि गतिविधि डेयरी है।

102. पालमपुर के लोग किस पशु का दूध बेचकर आय अर्जित करते हैं?

(a) गाय और भैंस
(b) भेड़
(c) बकरी
(d) घोड़ी

उत्तर – (a) गाय और भैंस

व्याख्या:
पालमपुर के किसान और परिवार गाय और भैंस पालते हैं और उनसे प्राप्त दूध को दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से नजदीकी कस्बों और शहरों में भेजते हैं। इस व्यवसाय से उन्हें नियमित नकद आय प्राप्त होती है। दुग्ध उत्पादन (डेयरी) खेती पर पूरी तरह निर्भर न रहकर अतिरिक्त आजीविका का साधन बन जाता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

103. पालमपुर में दुग्ध उत्पादन का अधिकतर दूध कहाँ भेजा जाता है?

(a) गाँव के मंदिर
(b) रायगंज कस्बे
(c) नज़दीकी स्कूल
(d) केवल गाँव के अंदर

उत्तर – (b) रायगंज कस्बे

व्याख्या:
पालमपुर में डेयरी सबसे प्रमुख गैर-कृषि गतिविधि है। गाँव के लोग गाय और भैंस का दूध दुग्ध सहकारी समितियों को देते हैं। ये समितियाँ दूध को एकत्रित कर पास के रायगंज कस्बे और अन्य नज़दीकी शहरों में भेजती हैं। इस प्रक्रिया से गाँव के लोगों को नियमित नकद आय मिलती है और शहरी क्षेत्रों को ताज़ा दूध उपलब्ध हो पाता है।

104. गैर-कृषि गतिविधियाँ खेती से कैसे अलग हैं?

(a) इनमें भूमि की आवश्यकता कम होती है
(b) इनमें पूँजी और श्रम दोनों की जरूरत होती है
(c) यह किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करती हैं
(d) उपरोक्त सभी

उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

व्याख्या:
गैर-कृषि गतिविधियाँ (जैसे – डेयरी, परिवहन, दुकानदारी, छोटे उद्योग आदि) खेती से कई मामलों में अलग होती हैं। इनमें भूमि की आवश्यकता बहुत कम या लगभग नहीं होती, जबकि पूँजी और श्रम की ज़रूरत अधिक होती है। ये गतिविधियाँ किसानों और ग्रामीण परिवारों को खेती पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचाती हैं और उन्हें अतिरिक्त आय प्रदान करती हैं। इस कारण ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संतुलन और स्थिरता देती हैं।

105. छोटे किसान अधिशेष उत्पादन न बेच पाने के कारण मुख्यतः किस पर निर्भर रहते हैं?

(a) साहूकार
(b) सहकारी समितियाँ
(c) बैंक
(d) व्यापार मंडल

उत्तर – (a) साहूकार

व्याख्या:
छोटे किसानों का उत्पादन इतना कम होता है कि वे उसे अपने परिवार की आवश्यकताओं से अधिक नहीं बेच पाते। इस कारण उनके पास अतिरिक्त नकद आय नहीं होती। जब खेती के लिए बीज, खाद, कीटनाशक या अन्य आवश्यक वस्तुओं की ज़रूरत पड़ती है, तो वे बैंक या सहकारी समितियों की बजाय साहूकारों से कर्ज लेने को मजबूर होते हैं। साहूकार अधिक ब्याज वसूलते हैं, जिससे छोटे किसान अक्सर कर्ज़ के जाल में फँस जाते हैं।

106. गैर-कृषि गतिविधियों की आवश्यकता क्यों है?

(a) केवल बड़े किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए
(b) गाँव के लोगों को खेती के अलावा रोजगार देने के लिए
(c) फसल बर्बादी रोकने के लिए
(d) सिर्फ़ साहूकारों की कमाई के लिए

उत्तर – (b) गाँव के लोगों को खेती के अलावा रोजगार देने के लिए

व्याख्या:
गाँवों में सभी लोग खेती पर निर्भर नहीं रह सकते क्योंकि भूमि सीमित है और हर किसी को पर्याप्त काम नहीं मिल पाता। ऐसे में गैर-कृषि गतिविधियाँ जैसे – डेयरी, परिवहन, छोटे उद्योग और व्यापार ग्रामीण लोगों को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराती हैं। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़ते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

107. पालमपुर के छोटे उद्योग किस प्रकार के हैं?

(a) बड़े कारखाने
(b) पूँजी व मशीनरी पर आधारित
(c) घरेलू और श्रम आधारित
(d) बहुराष्ट्रीय कंपनियों के

उत्तर – (c) घरेलू और श्रम आधारित

व्याख्या:
पालमपुर में चलने वाले छोटे उद्योग मुख्यतः घरेलू व श्रम आधारित हैं, जैसे – गेंहूँ पिसाई, गुड़ बनाना, सिलाई-बुनाई और कुटीर उद्योग। इन उद्योगों में अधिक पूँजी या मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि स्थानीय श्रम और साधनों पर ही आधारित रहते हैं।

108. पालमपुर में स्थापित छोटे उद्योगों की संख्या लगभग कितनी है?

(a) 25
(b) 50
(c) 100
(d) 200

उत्तर – (b) 50

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में लगभग 50 छोटे उद्योग चल रहे हैं। इनमें अनाज पिसाई, गुड़ बनाना, सिलाई-बुनाई और कुटीर उद्योग शामिल हैं। ये उद्योग गाँव की अतिरिक्त आय और रोजगार का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।

109. पालमपुर में आटा चक्की किस प्रकार के उद्योग का उदाहरण है?

(a) आधुनिक उद्योग
(b) घरेलू व छोटे उद्योग
(c) बड़े पैमाने का उद्योग
(d) विदेशी उद्योग

उत्तर – (b) घरेलू व छोटे उद्योग

व्याख्या:
पालमपुर में आटा चक्की (फ्लोर मिल) घरेलू और छोटे उद्योग का उदाहरण है। यह स्थानीय स्तर पर कम पूँजी और सीमित मशीनरी से संचालित होता है और गाँव के लोगों को आटा पिसाई की सुविधा के साथ-साथ अतिरिक्त रोजगार भी उपलब्ध कराता है।

110. पालमपुर के छोटे उद्योगों में किसका उत्पादन किया जाता है?

(a) कपड़ा और गुड़
(b) सीमेंट
(c) गाड़ी के पुर्ज़े
(d) दवाइयाँ

उत्तर – (a) कपड़ा और गुड़

व्याख्या:
पालमपुर के छोटे उद्योग स्थानीय कच्चे माल और श्रम पर आधारित हैं। इनमें मुख्य रूप से गुड़ (गन्ने से) का उत्पादन, कपड़ा बुनाई (हाथकरघा/पावरलूम से) और आटा चक्की जैसे कार्य किए जाते हैं। ये उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त आय और रोजगार उपलब्ध कराते हैं।

111. छोटे उद्योगों की स्थापना के लिए किसानों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?

(a) पूँजी की कमी
(b) प्रशिक्षण का अभाव
(c) बाजार की समस्या
(d) उपरोक्त सभी

उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

व्याख्या:
छोटे उद्योगों की स्थापना में ग्रामीण किसानों और मजदूरों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

  • पूँजी की कमी के कारण वे मशीन, उपकरण या कच्चा माल नहीं खरीद पाते।
  • प्रशिक्षण का अभाव होने से आधुनिक तकनीक और उत्पादन विधियों का उपयोग नहीं कर पाते।
  • बाजार की समस्या के कारण बने हुए उत्पाद आसानी से बिक नहीं पाते।

इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों का विकास धीमा रहता है।

112. पालमपुर में परिवहन साधनों का उपयोग किसके लिए होता है?

(a) केवल लोगों को ढोने के लिए
(b) केवल सामान ढोने के लिए
(c) दोनों – सामान और लोगों को ढोने के लिए
(d) केवल फसलें ढोने के लिए

उत्तर – (c) दोनों – सामान और लोगों को ढोने के लिए

व्याख्या:
पालमपुर में परिवहन साधनों का उपयोग दो प्रकार से किया जाता है—

  1. लोगों को ढोने के लिए – ग्रामीण बस, टेम्पो, रिक्शा आदि से अपने काम और यात्राएँ पूरी करते हैं।
  2. सामान और फसलें ढोने के लिए – गन्ना, गेहूँ, दूध और अन्य उत्पाद बाज़ारों और रायगंज कस्बे तक ले जाए जाते हैं।

इससे गाँव की अर्थव्यवस्था और शहर से जुड़ाव दोनों मजबूत होते हैं।

113. पालमपुर में परिवहन के साधनों में कौन-कौन शामिल हैं?

(a) ट्रक, टेम्पो, जीप
(b) बैलगाड़ी, ई-रिक्शा
(c) ऊँटगाड़ी, मोटरसाइकिल
(d) उपरोक्त सभी

उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

व्याख्या:
पालमपुर में परिवहन के साधनों में आधुनिक साधन (जैसे ट्रक, टेम्पो, जीप, मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा) और पारंपरिक साधन (जैसे बैलगाड़ी, ऊँटगाड़ी) दोनों का उपयोग किया जाता है।
इन साधनों का प्रयोग गाँव के लोग लोगों को ढोने और सामान/फसलों को बाज़ार तक पहुँचाने के लिए करते हैं।

114. पालमपुर में परिवहन का कार्य कितने लोगों को रोजगार देता है?

(a) लगभग 25 लोग
(b) लगभग 50 लोग
(c) लगभग 100 लोग
(d) लगभग 200 लोग

उत्तर – (b) लगभग 50 लोग

व्याख्या:
पालमपुर गाँव में लगभग 50 लोग परिवहन कार्य से जुड़े हुए हैं। इनमें कुछ लोग ट्रक, टेम्पो, जीप, ई-रिक्शा या मोटरसाइकिल चलाते हैं, जबकि कुछ लोग बैलगाड़ी और ऊँटगाड़ी चलाकर भी रोज़गार प्राप्त करते हैं।
इस प्रकार परिवहन पालमपुर के लोगों को खेती के अलावा अतिरिक्त रोजगार प्रदान करता है।

115. परिवहन का महत्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है?

(a) किसानों की फसल बाजार तक पहुँचती है
(b) लोगों का आवागमन आसान होता है
(c) रोजगार मिलता है
(d) उपरोक्त सभी

उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

व्याख्या:
परिवहन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि –

  • यह किसानों की फसल को बाजार तक पहुँचाता है, जिससे वे आय अर्जित कर पाते हैं।
  • इससे लोगों का आवागमन गाँव से कस्बों और शहरों तक आसान हो जाता है।
  • यह ग्रामीण लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है, जैसे – ट्रक, टेम्पो, बैलगाड़ी या ई-रिक्शा चलाने वाले।

इस प्रकार परिवहन गाँव को बाहरी दुनिया से जोड़ता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सीधा योगदान देता है।


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