ऑगस्त कॉम्ट की समाजशास्त्र की परिभाषा MCQs

1. ऑगस्त कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र किसका अध्ययन करता है?

A. केवल राजनीतिक संस्थाओं का
B. केवल धार्मिक आचरणों का
C. मनुष्य की सभी प्रघटनाओं का
D. केवल आर्थिक व्यवहारों का

उत्तर: C. मनुष्य की सभी प्रघटनाओं का

व्याख्या:

ऑगस्त कॉम्ट (1798–1857), जिन्हें “Father of Sociology” कहा जाता है, ने समाजशास्त्र को मानव समाज के सभी सामाजिक प्रघटनाओं (all social phenomena) का वैज्ञानिक अध्ययन माना। उन्होंने समाजशास्त्र को “Positive Science” (प्रत्यक्षवादी विज्ञान) कहा, जिसका कार्य समाज के भीतर कार्यरत नियमों (laws) की खोज करना है।

उनके अनुसार—

1. समाज विविध संस्थाओं और संबंधों का समग्र रूप है

कॉम्ट ने कहा कि समाज एक अकेली संस्था (जैसे राजनीति या अर्थव्यवस्था) नहीं है, बल्कि—

  • परिवार
  • धर्म
  • शिक्षा
  • अर्थव्यवस्था
  • राजनीति
  • समुदाय
  • सामाजिक मूल्य व मान्यताएँ
  • सामाजिक परिवर्तन

इन सभी का सामूहिक समन्वय है।
इसलिए समाजशास्त्र को किसी एक क्षेत्र पर केंद्रित नहीं होना चाहिए।

2. समाजशास्त्र “समस्त मानव गतिविधियों” का वैज्ञानिक अध्ययन है

Comte के अनुसार मनुष्य के सामाजिक व्यवहार प्राकृतिक नियमों की तरह होते हैं—
इन्हें वैज्ञानिक पद्धति से समझा जा सकता है।

इसलिए sociology को चाहिए कि वह—

  • सामाजिक व्यवहार
  • संस्थाएँ
  • समूह
  • सामाजिक व्यवस्था
  • सामाजिक प्रगति
  • सामाजिक संघर्ष
  • जनसंख्या
  • सामाजिक परिवर्तन

सबका एकीकृत (holistic) अध्ययन करे।

3. समाजशास्त्र को “Queen of the Sciences” क्यों कहा?

Comte का तर्क था कि—

  • गणित
  • भौतिकी
  • रसायन
  • जीवविज्ञान
    इन सब में जो वैज्ञानिक नियम लागू होते हैं,
    उसी प्रत्यक्षवादी (positive) तरीकों से समाज को भी समझा जा सकता है।

इसलिए Sociology, सभी विज्ञानों का संश्लेषणात्मक विज्ञान है, जो मानव समाज को व्यापक दृष्टि से समझता है।

4. समाज प्राकृतिक नियमों के अधीन है

Comte ने माना कि—

समाज स्थिर नहीं है; वह नियमबद्ध और क्रमबद्ध तरीके से बदलता है।

इसलिए समाजशास्त्र का उद्देश्य:

  • समाज को वैज्ञानिक रूप से समझना
  • सामाजिक नियमों (laws of society) की खोज करना
  • इन नियमों के आधार पर समाज में सुधार लाना

यही कारण है कि sociology को सभी सामाजिक प्रघटनाओं का अध्ययन करना ही होगा, न कि किसी एक क्षेत्र का।

ऑगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को मनुष्य से संबंधित सभी सामाजिक गतिविधियों, व्यवहारों, संस्थाओं और प्रक्रियाओं का विज्ञान बताया।
यह केवल राजनीति, धर्म या अर्थव्यवस्था जैसे किसी एक क्षेत्र का अध्ययन नहीं करता, बल्कि संपूर्ण मानव समाज का समग्र (holistic) विश्लेषण करता है।

2. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का उद्देश्य क्या है?

A. समाज के आदर्श रूपों की कल्पना करना
B. समाज के विकास के नियमों को समझना
C. समाज की धार्मिक व्याख्या करना
D. समाज में नैतिकता स्थापित करना

उत्तर: B. समाज के विकास के नियमों को समझना

व्याख्या:

ऑगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को “Positive Science of Society” कहा — अर्थात समाज का वैज्ञानिक अध्ययन, जो अवलोकन, तुलना, और तर्क पर आधारित हो।
कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का मूल उद्देश्य (primary aim) है:

समाज के विकास (social evolution) और परिवर्तन (social change) को नियंत्रित करने वाले नियमों (laws) की खोज करना।

इस उद्देश्य को समझने के लिए नीचे प्रमुख बिंदु दिए जा रहे हैं:

1. समाज प्राकृतिक नियमों के अधीन चलता है

कॉम्ट का मानना था कि जैसे—

  • भौतिक जगत में गति के नियम (laws of motion)
  • जैविक जगत में विकास के नियम (laws of life)

वैसे ही मानव समाज भी नियमों (laws of social progress) के अनुसार आगे बढ़ता है।

समाजशास्त्र का कार्य इन नियमों को खोज निकालना है।

2. कॉम्ट का “कानून तीन अवस्थाओं का” (Law of Three Stages)

कॉम्ट ने समाज और मानव बुद्धि दोनों के विकास को तीन क्रमिक चरणों में बाँटा:

  1. Theological Stage (दैववादी अवस्था)
  2. Metaphysical Stage (तात्विक अवस्था)
  3. Positive Stage (प्रत्यक्षवादी अवस्था)

यह उनके लिए केवल इतिहास-वर्णन नहीं था —
बल्कि एक वैज्ञानिक नियम (scientific law) था।

समाजशास्त्र का उद्देश्य इस विकास-पथ (developmental trajectory) को पहचानना और समझना था।

3. समाजशास्त्र “Social Dynamics” का विज्ञान है

कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो शाखाओं में बाँटा:

  • Social Statics (सामाजिक स्थिरता)
  • Social Dynamics (सामाजिक परिवर्तन)

Social Dynamics का कार्य है:

समाज कैसे बदलता है, क्यों बदलता है, और किस “नियम” के अनुसार बदलता है — इसे समझना।

यही समाजशास्त्र का मुख्य उद्देश्य है।

4. समाज आदिम अवस्था से सभ्यता तक “नियमबद्ध” तरीके से पहुँचा

कॉम्ट लिखते हैं कि:

  • मानवता ने अज्ञान से ज्ञान की ओर
  • काल्पनिक कारणों से वैज्ञानिक कारणों की ओर
  • अराजकता से व्यवस्था की ओर

नियमित (law-governed) ढंग से प्रगति की है।

समाजशास्त्र का उद्देश्य इस नियमबद्ध प्रगति (law-governed progress) को खोज निकालना है।

5. समाजशास्त्र का उद्देश्य “Prediction + Control” भी है

कॉम्ट का प्रसिद्ध सूत्र:

Science → Prediction → Action

विज्ञान नियम खोजता है → नियम भविष्यवाणी देते हैं → भविष्यवाणी समाज को व्यवस्थित करने में सहायक होती है।

इसलिए समाजशास्त्र का उद्देश्य केवल समझना नहीं,
बल्कि समाज को विवेकपूर्ण और वैज्ञानिक रूप से संचालित करने में मदद करना भी है।

कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का केंद्रीय उद्देश्य है:

  • समाज के विकास और परिवर्तन की दिशा, स्वरूप और क्रम को समझना
  • सामाजिक प्रगति को नियंत्रित करने वाले वैज्ञानिक नियमों (laws of social evolution) की खोज करना
  • इन नियमों के आधार पर समाज की भविष्यवाणी और सुधार करना

3. कॉम्ट ने समाजशास्त्र के लिए प्रारंभ में कौन-सा नाम प्रयोग किया था?

A. सामाजिक रसायन
B. सामाजिक भौतिकी
C. सामाजिक जीवविज्ञान
D. सामाजिक मनोविज्ञान

उत्तर: B. सामाजिक भौतिकी

व्याख्या:

ऑगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र के निर्माण के प्रारंभिक चरण में इस विज्ञान को “Social Physics” (सामाजिक भौतिकी) नाम दिया था। यह उनकी Positive Philosophy (Course of Positive Philosophy, 1830–42) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।

कॉम्ट द्वारा “Social Physics” शब्द के चयन के पीछे कई गहरे कारण थे:

1. समाज को भौतिक जगत की तरह ‘नियमों’ द्वारा संचालित मानना

कॉम्ट का उद्देश्य था कि समाज को भी उसी प्रकार के वैज्ञानिक नियमों, सार्वभौमिक सिद्धांतों और अवलोकन-आधारित पद्धतियों से समझा जाए जैसे:

  • भौतिकी (Physics) प्राकृतिक घटनाओं के नियम खोजती है
  • रसायन (Chemistry) पदार्थों के व्यवहार के नियम खोजती है
  • जीवविज्ञान (Biology) जीवन के नियम खोजता है

इसी समानता को दिखाने के लिए उन्होंने समाजशास्त्र को Social Physics कहा।

2. समाजशास्त्र को ‘Positive Science’ बनाने की परियोजना

कॉम्ट की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा थी:

“मानव समाज का अध्ययन भी उतना ही वैज्ञानिक बने जितना भौतिक विज्ञान है।”

इसलिए उन्होंने समाजशास्त्र को भौतिक विज्ञान की वैज्ञानिक कठोरता (scientific rigour) और पद्धति (method) देने के उद्देश्य से इसे “Social Physics” कहा।

3. Social Statics + Social Dynamics = Social Physics

कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में बाँटा:

  • Social Statics = समाज की स्थिर संरचना का अध्ययन
  • Social Dynamics = समाज के विकास और परिवर्तन का अध्ययन

इन दोनों का सम्मिलित विज्ञान उनके अनुसार Social Physics था —
यानी वह विज्ञान जो समाज की “structure + progress” दोनों की जांच करे।

4. बाद में “Social Physics” शब्द छोड़कर “Sociology” अपनाया

हालाँकि 1830 के दशक में कॉम्ट ने “Social Physics” शब्द का उपयोग किया,
लेकिन 1842 के बाद उन्होंने “Sociology” शब्द को अपनाया (जो उसी पुस्तक में पहली बार प्रकट होता है)।

कारण:

  • बेल्जियम के एक सांख्यिकीविद् Adolphe Quetelet ने भी अपनी पुस्तक में “Social Physics” शब्द का प्रयोग करना शुरू किया।
  • कॉम्ट भ्रम और प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए नया शब्द चाहते थे।
  • इसलिए उन्होंने ग्रीक शब्दों “Socius + Logos” से Sociology शब्द गढ़ा।

कॉम्ट ने समाजशास्त्र के प्रारंभिक चरण में उसे “Social Physics” (सामाजिक भौतिकी) कहा, क्योंकि वे समाज को भी प्राकृतिक जगत की तरह नियमबद्ध, वैज्ञानिक और पूर्वानुमेय (predictable) मानते थे।
बाद में उन्होंने इसे बदलकर “Sociology” नाम दिया, जो आज विश्वभर में प्रचलित है।

4. कॉम्ट ने समाजशास्त्र को ‘Positive Science’ कहते हुए इसे प्राकृतिक विज्ञानों के समान क्यों माना?

A. क्योंकि दोनों कल्पना और अनुभूति पर आधारित हैं
B. क्योंकि दोनों अलौकिक कारणों की खोज करते हैं
C. क्योंकि दोनों व्यवस्थित प्रेक्षण और तर्क आधारित वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हैं
D. क्योंकि दोनों सामाजिक न्याय स्थापित करने के उपकरण हैं

उत्तर: C. क्योंकि दोनों व्यवस्थित प्रेक्षण और तर्क आधारित वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हैं

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को “Positive Science” कहा, और इसे प्राकृतिक विज्ञानों (भौतिकी, जीवविज्ञान, रसायनशास्त्र) के समान रखने का प्रयास किया। उनका तर्क था कि—

1. समाज भी प्राकृतिक संसार की तरह नियमों (laws) से संचालित होता है

जैसे प्रकृति में ग्रहों की गति, पदार्थ की संरचना और जीवों का विकास वैज्ञानिक नियमों का पालन करते हैं,
वैसे ही समाज में भी व्यवहार, संस्थाएँ, परिवर्तन, संघर्ष और विकास के नियम मौजूद हैं।

2. दोनों के अध्ययन की पद्धति एक जैसी है — Observation + Reasoning

कॉम्ट का मानना था कि समाजशास्त्र को भी वही विधियाँ अपनानी चाहिए, जो प्राकृतिक विज्ञान अपनाते हैं:

  • प्रत्यक्ष प्रेक्षण (Observation) — सामाजिक व्यवहार को वास्तविक रूप में देखना
  • तुलनात्मक विधि (Comparative Method) — समाजों की तुलना करना
  • ऐतिहासिक विधि (Historical Method) — समाज के विकास का क्रम समझना
  • तर्कपूर्ण विश्लेषण (Logical Reasoning) — निष्कर्ष निकालना

कॉम्ट के अनुसार ज्ञान तभी positive होता है, जब वह—

  • वास्तविक (Real)
  • निश्चित (Certain)
  • परीक्षण योग्य (Verifiable)
  • तर्क आधारित (Rational)

हो — और यही गुण प्राकृतिक विज्ञानों में पहले से मौजूद थे।

3. समाजशास्त्र को ‘Meta-physics’ और ‘Theology’ से अलग करना

कॉम्ट समाज को धर्म, मिथक, अलौकिक और दार्शनिक कल्पनाओं से मुक्त करना चाहते थे।
इसीलिए उन्होंने कहा:

“Sociology must rise from speculation to scientific observation.”
(“समाजशास्त्र को कल्पनाओं से उठकर वैज्ञानिक प्रेक्षण पर आधारित होना चाहिए।”)

कॉम्ट के अनुसार—
समाजशास्त्र तभी वास्तविक विज्ञान बन सकता है, जब यह प्राकृतिक विज्ञानों की तरह व्यवस्थित, तर्कसंगत और प्रमाण-आधारित पद्धति अपनाए।

इसीलिए उन्होंने इसे “Positive Science” कहा और यह दावा किया कि—
“सामाजिक घटनाएँ भी प्रकृति की तरह विज्ञान के सार्वभौमिक नियमों का पालन करती हैं।”

5. कॉम्ट ने समाजशास्त्र के अध्ययन को किस दृष्टिकोण से देखा?

A. धार्मिक दृष्टिकोण से
B. दार्शनिक दृष्टिकोण से
C. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से
D. नैतिक दृष्टिकोण से

उत्तर: C. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट को आधुनिक समाजशास्त्र का जनक इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने समाज को समझने के लिए धार्मिक, दार्शनिक और कल्पनाशील व्याख्याओं से हटकर एक पूर्ण वैज्ञानिक पद्धति की वकालत की।

उनका विश्वास था कि:

1. समाज भी एक ‘प्राकृतिक घटना’ (Natural Phenomenon) है

कॉम्ट ने कहा कि समाज प्रकृति के नियमों की तरह ही चलता है।
इसलिए सामाजिक घटनाओं का भी अध्ययन उसी तरह किया जा सकता है जैसे—

  • भौतिकी भौतिक घटनाओं को
  • जीवविज्ञान जीवों को
  • खगोलशास्त्र खगोलीय प्रणालियों को

—अध्ययन करता है।

2. समाजशास्त्र को ‘Positive Science’ बनाना

कॉम्ट का मुख्य उद्देश्य था—

समाजशास्त्र = नियमबद्ध, परीक्षण योग्य, निष्पक्ष विज्ञान

इसके लिए उन्होंने तीन सिद्धांत दिए:

  • Observation (प्रेक्षण)
  • Experimentation (सामाजिक परिस्थितियों का परीक्षण)
  • Comparison (तुलनात्मक विधि)

कॉम्ट के अनुसार—

“Sociology must rely on observed facts and logical reasoning.”
(“समाजशास्त्र को प्रेक्षित तथ्यों और तार्किक विश्लेषण पर आधारित होना चाहिए।”)

3. धर्म और दर्शन से दूरी

कॉम्ट का मानना था:

  • धर्म समाज की अलौकिक व्याख्या करता है
  • दर्शन समाज की अमूर्त/तर्कशास्त्रीय व्याख्या करता है
  • लेकिन विज्ञान समाज को प्रत्यक्ष, प्रमाण और तर्क से समझता है

इसीलिए कॉम्ट ने समाजशास्त्र को पूर्णतः scientific discipline बनाने पर ज़ोर दिया।

कॉम्ट ने समाजशास्त्र को न तो धार्मिक बनाया, न दार्शनिक और न ही नैतिक चिंतन का विषय।
उन्होंने इसे एक rigorous, evidence-based, rule-governed scientific discipline घोषित किया।

इसलिए समाजशास्त्र का अध्ययन उनके अनुसार “वैज्ञानिक दृष्टिकोण” से ही होना चाहिए।

6. कॉम्ट का ‘सामाजिक भौतिकी’ (Social Physics) शब्द किस पुस्तक में मिलता है?

A. Positive Politics
B. Positive Philosophy
C. System of Policy
D. Spirit of Positivism

उत्तर: B. Positive Philosophy

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट ने सबसे पहले “Social Physics” (सामाजिक भौतिकी) शब्द अपनी प्रसिद्ध पुस्तक

“The Course of Positive Philosophy” (1830–1842)

में प्रयोग किया था। यह छह भागों में प्रकाशित उनकी महान पुस्तक-श्रृंखला है, जिसने आधुनिक समाजशास्त्र की नींव रखी।

1. सामाजिक घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन — प्राकृतिक विज्ञानों की तरह

कॉम्ट का विचार था कि:

  • प्रकृति के नियम जिस प्रकार भौतिकी में खोजे जाते हैं,
  • उसी प्रकार समाज के नियम “Social Physics” में खोजे जा सकते हैं।

उनकी मान्यता:

“Social phenomena are governed by natural laws just like physical phenomena.”
(“सामाजिक घटनाएँ भी प्राकृतिक घटनाओं की तरह प्राकृतिक नियमों से संचालित होती हैं।”)

इस प्रकार कॉम्ट समाज को प्राकृतिक विज्ञानों की विधि से समझाना चाहते थे।

2. “Social Physics” से “Sociology” तक का विकास

कॉम्ट का मूल नाम “Social Physics” था,
लेकिन बाद में Adolphe Quetelet ने भी इसी शब्द का उपयोग शुरू कर दिया।

इसलिए 1839 में कॉम्ट ने पहली बार अपनी पुस्तक में ही एक नया शब्द गढ़ा:

“Sociology” (सोशियोलॉजी / समाजशास्त्र)

इस प्रकार—

Social Physics → Sociology

अर्थात् “सामाजिक भौतिकी” से “समाजशास्त्र” शब्द का जन्म इसी पुस्तक में हुआ।

3. Positive Philosophy में ‘Social Physics’ का महत्व

इस पुस्तक ने समाज के अध्ययन को—

  • धार्मिक व्याख्या
  • दार्शनिक तर्क-अटकल
  • और अलौकिक मान्यताओं

से निकालकर वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित अध्ययन में बदल दिया।

यही समाजशास्त्र के जन्म की निर्णायक शुरुआत थी।

कॉम्ट ने “सामाजिक भौतिकी (Social Physics)” शब्द अपनी महान पुस्तक
“Positive Philosophy”
में सबसे पहले प्रयुक्त किया।

बाद में यही अवधारणा विकसित होकर “Sociology” बनी — आधुनिक समाजशास्त्र का औपचारिक नाम।

7. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का सैद्धान्तिक उद्देश्य क्या था?

A. समाज का सुधार करना
B. समाज की व्याख्या करना
C. समाज का सैद्धान्तिक अमूर्तिकरण करना
D. समाज की आलोचना करना

उत्तर: C. समाज का सैद्धान्तिक अमूर्तिकरण करना

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में विभाजित किया था:

  1. Social Statics (सामाजिक स्थिरता)
  2. Social Dynamics (सामाजिक परिवर्तन)

इन दोनों के माध्यम से समाजशास्त्र का कार्य केवल वर्णन या सुधार नहीं, बल्कि सैद्धान्तिक (theoretical) अमूर्तिकरण था।

“सैद्धान्तिक अमूर्तिकरण” का अर्थ

कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का उद्देश्य था—

  • सामाजिक घटनाओं को प्रत्यक्ष रूप में देखने के बजाय
  • उनके नीचे छिपे सार्वभौमिक सिद्धांतों की खोज करना
  • सामाजिक प्रक्रियाओं के नियम (laws) और सैद्धान्तिक ढांचे तैयार करना

यानी समाजशास्त्र सिर्फ “क्या हो रहा है” नहीं बताता, बल्कि—

“किस नियम से, क्यों और कैसे समाज कार्य करता है?”

—यह खोजता है।

1. समाजशास्त्र का मूल लक्ष्य: सिद्धांत निर्माण

कॉम्ट का मानना था:

“The first task of Sociology is to discover the general laws governing social phenomena.”
(“समाजशास्त्र का पहला कार्य सामाजिक घटनाओं को संचालित करने वाले सामान्य नियमों की खोज करना है।”)

इसलिए उनका सैद्धान्तिक उद्देश्य था:

  • समाज को नियंत्रित करने वाले नियमों की पहचान
  • सामाजिक संरचना व परिवर्तन के सिद्धांत विकसित करना
  • समाज की जटिल वास्तविकताओं को सैद्धान्तिक मॉडल में बदलना

2. यह केवल समाज का सुधार (Reform) क्यों नहीं है?

कॉम्ट ने स्पष्ट कहा था कि सामाजिक सुधार समाजशास्त्र का प्राथमिक उद्देश्य नहीं है।
उसका कार्य है—

  • पहले समाज कैसे चलता है,
  • फिर कौन-से नियम समाज को स्थिर बनाते हैं,
  • और कौन-से नियम समाज को परिवर्तित करते हैं,

—इनका वैज्ञानिक सिद्धांत तैयार करना।

इसलिए सुधार बाद का चरण है;
पहला चरण है — सैद्धान्तिक वैज्ञानिक समझ।

3. यह केवल व्याख्या (Explanation) क्यों नहीं है?

व्याख्या केवल “बताना” है,
लेकिन कॉम्ट का उद्देश्य था—

दृश्यमान तथ्यों को अमूर्त सिद्धांतों (abstract principles) में बदलना।

यही “सैद्धान्तिक अमूर्तिकरण” है।

कॉम्ट ने समाजशास्त्र को एक “सैद्धान्तिक विज्ञान” के रूप में विकसित किया।
इसका मुख्य उद्देश्य था—

समाज के गहरे, सार्वभौमिक और वैज्ञानिक नियमों का अमूर्तिकरण

जिससे समाज को वैज्ञानिक रूप से समझा जा सके।

8. कॉम्ट की दृष्टि में समाजशास्त्र का अध्ययन किस संदर्भ में किया जाना चाहिए?

A. यूरोप की धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में
B. यूरोप की प्रगति के नियमों के संदर्भ में
C. एशिया की सांस्कृतिक विविधता के संदर्भ में
D. मानव की नैतिकता के संदर्भ में

उत्तर: B. यूरोप की प्रगति के नियमों के संदर्भ में

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र का अध्ययन करते समय यूरोप को एक ‘प्रयोगशाला’ (laboratory) की तरह देखा।
उनके अनुसार:

  • 18वीं–19वीं शताब्दी का यूरोप
  • बौद्धिक (intellectual), औद्योगिक (industrial) और वैज्ञानिक (scientific)
  • इतना तीव्र परिवर्तन देख रहा था कि समाज की प्रगति को समझने के लिए यह सबसे उपयुक्त मॉडल था।

इसीलिए कॉम्ट ने कहा कि समाजशास्त्र को पहले यूरोप की प्रगति के नियमों को समझना चाहिए, क्योंकि—

  • यूरोप आधुनिकता की ओर सबसे तेज़ बढ़ने वाला समाज था।
  • यही संक्रमण (transition) सार्वभौमिक सामाजिक नियमों को उजागर कर सकता था।
  • यूरोप के विकास से पूरे मानव समाज की प्रगति के ‘नियम’ (laws of progress) को पहचाना जा सकता था।

1. यूरोप ‘Historical Laboratory’ क्यों था?

कॉम्ट के अनुसार यूरोप में तीन बड़े परिवर्तन एक साथ हो रहे थे:

  1. वैज्ञानिक क्रांति
  2. औद्योगिक क्रांति
  3. राजनीतिक क्रांति (फ्रेंच रिवोल्यूशन)

ये घटनाएँ इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण थीं कि समाज कैसे और किस नियम से आगे बढ़ता है।

इसलिए समाजशास्त्र का अध्ययन यूरोपीय समाज की प्रगति के नियमों से शुरू होना चाहिए।

2. कॉम्ट की दृष्टि: “यूरोप = मानव प्रगति का मानक”

कॉम्ट का कहना था:

“Europe represents the most advanced stage of human progress.”
(“यूरोप मानव प्रगति के सर्वाधिक उन्नत चरण का प्रतिनिधित्व करता है।”)

इसलिए:

  • यूरोप के विकास को समझना
  • मानव सभ्यता की प्रगति के नियम समझना
  • समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक स्वरूप देना

—इन सबका आधार यूरोप की प्रगति ही थी।

3. उन्होंने धार्मिक परंपरा, संस्कृति या नैतिकता को आधार क्यों नहीं बनाया?

कॉम्ट का उद्देश्य था:

  • सामाजिक नियम पहचानना
  • वैज्ञानिक सिद्धांत बनाना

धार्मिक परंपराएँ, सांस्कृतिक विविधता और नैतिकता —
यह सब विशिष्ट (particular) हैं,
जबकि कॉम्ट सार्वभौमिक नियम (universal laws) खोज रहे थे।

और यूरोप उस समय यह सार्वभौमिकता दिखाने वाला सबसे अच्छा उदाहरण था।

कॉम्ट का मानना था कि समाजशास्त्र का अध्ययन यूरोप की प्रगति के नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए,
क्योंकि यूरोप का वैज्ञानिक, औद्योगिक और राजनीतिक विकास समाज के सार्वभौमिक नियमों को समझने का सबसे सटीक मॉडल प्रस्तुत करता है।


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