ऑगस्ट कॉम्ट के समाजशास्त्रीय सिद्धांत – MCQs विस्तृत व्याख्या के साथ

ऑगस्ट कॉम्ट के समाजशास्त्रीय सिद्धांत

1. अगस्ट कॉम्ट को ‘समाजशास्त्र का जनक’ (Father of Sociology) इसलिए माना जाता है, क्योंकि—

(A) उन्होंने समाज का अध्ययन केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से किया
(B) उन्होंने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में स्थापित किया और ‘Sociology’ शब्द का प्रयोग किया
(C) उन्होंने राजनीतिक और नैतिक दर्शन को नया रूप दिया
(D) उन्होंने मनोविज्ञान और जैविकी के विकास में योगदान दिया

उत्तर: (B) उन्होंने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में स्थापित किया और ‘Sociology’ शब्द का प्रयोग किया

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte) को ‘समाजशास्त्र का जनक’ कहा जाता है, मुख्यतः तीन ठोस कारणों से:

1. ‘Sociology’ शब्द का निर्माण और समाज का वैज्ञानिक अध्ययन

कॉम्ट ने पहली बार ‘Sociology’ शब्द का प्रयोग अपनी पुस्तक
“The Positive Philosophy” (1830–1842)
में किया।
पहले वे इसे “Social Physics” कहते थे, पर बाद में इसे एक स्वतंत्र और वैज्ञानिक अनुशासन (independent scientific discipline) के रूप में स्थापित करने हेतु Sociology नाम दिया।

यह कार्य उनसे पहले किसी ने नहीं किया था।

2. समाजशास्त्र के लिए वैज्ञानिक पद्धति (Positivism) का विकास

कॉम्ट ने कहा कि समाज का अध्ययन भी भौतिक विज्ञान जैसी पद्धतियों से होना चाहिए।
उन्होंने तीन मुख्य वैज्ञानिक विधियाँ दीं—

  • Observation (पर्यवेक्षण)
  • Experimentation (जहाँ संभव हो)
  • Comparison (तुलनात्मक पद्धति)

यह प्रत्यक्षवादी आधार समाजशास्त्र को विज्ञान की श्रेणी में स्थापित करने की पहली कोशिश थी।

3. Social Statics और Social Dynamics का सिद्धांत

कॉम्ट ने समाज के वैज्ञानिक विश्लेषण के दो आयाम बताए:

  • Social Statics → समाज की संरचना और उसके घटक
  • Social Dynamics → समाज में परिवर्तन का वैज्ञानिक अध्ययन

यह ढाँचा आज भी समाजशास्त्र के बुनियादी सैद्धांतिक आधारों में गिना जाता है।

2. कॉम्ट के समाजशास्त्रीय विचारों का विकास किस सामाजिक-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में हुआ था?

(A) औद्योगिक और फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि में
(B) ग्रीक पुनर्जागरण काल में
(C) प्रबोधन (Enlightenment) से पूर्व के धार्मिक युग में
(D) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद

उत्तर: (A) औद्योगिक और फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि में

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के समाजशास्त्रीय विचार किसी खाली प्रयोगशाला में नहीं बने थे।
वे दो बड़े ऐतिहासिक-सामाजिक परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में विकसित हुए—

1. फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution, 1789)

इस क्रांति ने यूरोप की राजनीतिक और सामाजिक संरचना को पूरी तरह बदल दिया—

  • राजशाही का अंत
  • स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व की अवधारणा
  • राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा
  • सामाजिक व्यवस्था का टूटना

कॉम्ट इस अव्यवस्था को देखकर समाज में “Order” (व्यवस्था) स्थापित करने की चिंता से प्रेरित हुए।

2. औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution, 1760–1840)

औद्योगिक क्रांति ने—

  • उत्पादन प्रणालियाँ बदल दीं
  • मजदूर वर्ग (working class) का उदय हुआ
  • सामाजिक असमानताएँ बढ़ीं
  • परिवार, समुदाय और परंपरागत संस्थाएँ कमजोर हुईं

इस परिवर्तन ने समाज में “Progress” (प्रगति) को समझने की वैज्ञानिक आवश्यकता पैदा की।

3. Order and Progress: कॉम्ट की केंद्रीय अवधारणा

इन दोनों क्रांतियों के प्रभाव से कॉम्ट ने समाज के लिए एक मूलमंत्र दिया—

“Order and Progress”

(व्यवस्था + प्रगति = समाज का स्वस्थ विकास)**

यही ब्राज़ील के झंडे पर भी अंकित है, जो कॉम्ट के दर्शन से प्रभावित है।

कॉम्ट का उद्देश्य था—

  • अव्यवस्था को रोकना (post-revolution instability)
  • समाज को वैज्ञानिक आधार पर पुनर्गठित करना

इसलिए उन्होंने Positivism और Sociology का विकास किया।

3. कॉम्ट के अनुसार, समाजशास्त्र का उद्देश्य क्या है?

(A) केवल सामाजिक समस्याओं की आलोचना करना
(B) समाज में नैतिक और राजनीतिक स्थिरता लाना
(C) समाज में वैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग कर व्यवस्था और प्रगति सुनिश्चित करना
(D) केवल आर्थिक असमानता का अध्ययन करना

उत्तर: (C) समाज में वैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग कर व्यवस्था और प्रगति सुनिश्चित करना

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का मुख्य उद्देश्य केवल समाज का अध्ययन करना नहीं है, बल्कि—

1. समाज में ‘व्यवस्था’ (Order) स्थापित करना

फ्रांसीसी क्रांति और औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोप में—

  • राजनीतिक अस्थिरता
  • सामाजिक अव्यवस्था
  • नैतिक शिथिलता
  • पारंपरिक संस्थाओं का पतन

हो रहा था।
कॉम्ट चाहते थे कि समाजशास्त्र इस व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने वाला विज्ञान बने

2. समाज में ‘प्रगति’ (Progress) को समझना और निर्देशित करना

कॉम्ट मानते थे कि मानव समाज तीन अवस्थाओं से होकर आगे बढ़ता है:

  • Theological stage
  • Metaphysical stage
  • Positive (Scientific) stage

इस विकास को समझना और समाज को वैज्ञानिक अवस्था तक पहुँचाना समाजशास्त्र का लक्ष्य है।

3. Order + Progress = समाजशास्त्र का केंद्रीय उद्देश्य

कॉम्ट के अनुसार—

“The goal of Sociology is to ensure Order and Progress through scientific understanding.”

यही कारण है कि ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज पर भी “Order and Progress” लिखा है, जो कॉम्ट के दर्शन से प्रेरित है।

4. Social Statics + Social Dynamics

कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में बाँटा:

(1) Social Statics (सामाजिक स्थिरता / व्यवस्था)

  • परिवार, राज्य, धर्म, नैतिकता
  • इन संस्थाओं की भूमिका सामाजिक संतुलन बनाए रखने में
  • समाज का विकास
  • विचारों, तकनीक, और श्रम विभाजन में परिवर्तन
  • मानव प्रगति के नियम

इन दोनों का संयुक्त अध्ययन समाज में व्यवस्था और प्रगति दोनों सुनिश्चित करता है

4. कॉम्ट के समाजशास्त्र का सबसे बुनियादी सिद्धांत कौन-सा है?

(A) वर्ग संघर्ष का सिद्धांत
(B) ऐतिहासिक भौतिकवाद
(C) प्रत्यक्षवाद
(D) तर्कवादी आदर्शवाद

उत्तर: (C) प्रत्यक्षवाद (Positivism)

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट के समाजशास्त्र का सबसे बुनियादी, मूलभूत और केन्द्रीय सिद्धांत प्रत्यक्षवाद (Positivism) है।
यह उनकी संपूर्ण दार्शनिक प्रणाली (Positive Philosophy) की नींव है।

कॉम्ट प्रत्यक्षवाद के माध्यम से यह कहते हैं कि—

1. वास्तविक ज्ञान वही है जो अनुभव और अवलोकन द्वारा सत्यापित हो सके

उनके अनुसार—

  • धार्मिक व्याख्याएँ
  • दार्शनिक तर्क
  • कल्पना आधारित निष्कर्ष

विश्वसनीय नहीं हैं।
सच्चा ज्ञान वह है जो empirical और scientific हो।

2. समाज के अध्ययन को भौतिक विज्ञान जैसा वैज्ञानिक बनाना

कॉम्ट का उद्देश्य था कि समाज का अध्ययन उसी प्रकार हो—
जैसे
भौतिकी → प्रयोग + निरीक्षण
रसायन → परीक्षण
जीवविज्ञान → नियम + अवलोकन
वैसे ही
समाज → अवलोकन + तुलना + वैज्ञानिक नियम

यही प्रत्यक्षवाद का मूल है।

3. सामाजिक नियम भी प्राकृतिक नियमों की तरह खोजे जा सकते हैं

कॉम्ट मानते थे कि समाज भी कुछ सार्वभौमिक नियमों पर चलता है, जिन्हें

  • अवलोकन (Observation)
  • तुलना (Comparison)
  • ऐतिहासिक पद्धति (Historical method)

से खोजा जा सकता है।

4. प्रत्यक्षवाद ही कॉम्ट के तीन-स्तरीय नियम का आधार है

मानव सोच की तीन अवस्थाएँ—

  1. Theological (धार्मिक)
  2. Metaphysical (अध्यात्मिक)
  3. Positive (scientific)

तीसरी अवस्था — Positive stage — प्रत्यक्षवाद पर आधारित है।
इसी को वे मानवता की सबसे विकसित अवस्था मानते हैं।

5. कॉम्ट के विचारों के अनुसार, समाजशास्त्र का विकास किन तीन अवस्थाओं से होकर गुजरता है?

(A) तर्कवादी, यथार्थवादी, धार्मिक
(B) धार्मिक, तात्विक, प्रत्यक्षवादी
(C) सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक
(D) आदर्श, व्यावहारिक, वैज्ञानिक

उत्तर: (B) धार्मिक, तात्विक, प्रत्यक्षवादी

व्याख्या:

अगस्ट कॉम्ट का “तीन अवस्थाओं का नियम” (Law of Three Stages) समाजशास्त्र और दर्शन दोनों के क्षेत्र में उनकी सबसे मौलिक और चर्चित अवधारणा है।
कॉम्ट कहते हैं कि मानव ज्ञान—

  • व्यक्तिगत स्तर पर
  • समाज के स्तर पर
  • संपूर्ण मानव इतिहास के स्तर पर

तीन क्रमिक और अनिवार्य चरणों से होकर गुजरता है।

1. धार्मिक अवस्था (Theological Stage)

इस अवस्था में—

  • प्राकृतिक घटनाओं
  • सामाजिक घटनाओं
  • मानव व्यवहार

की व्याख्या अलौकिक शक्तियों के आधार पर की जाती है।

इस अवस्था के तीन उप-स्तर—

  1. Fetishism (वस्तुओं में जीव की कल्पना)
  2. Polytheism (अनेक देवताओं में विश्वास)
  3. Monotheism (एक ईश्वर की धारणा)

यह मानव ज्ञान का प्रारंभिक और कल्पनाशील चरण है।

2. तात्विक या अध्यात्मिक अवस्था (Metaphysical Stage)

इस अवस्था में—

  • अलौकिक शक्तियों की जगह
  • “आवश्यक शक्तियों”
  • “अमूर्त सिद्धांतों”
  • “प्रकृति”

को घटनाओं का कारण माना जाता है।

यह धार्मिक व्याख्याओं से एक कदम आगे है, पर अभी भी वैज्ञानिक नहीं।

3. प्रत्यक्षवादी/वैज्ञानिक अवस्था (Positive/Scientific Stage)

यह मानव ज्ञान की सर्वोच्च अवस्था है।

इसमें—

  • अनुभव (experience)
  • अवलोकन (observation)
  • तुलना (comparison)
  • वैज्ञानिक नियम (scientific laws)

के आधार पर ज्ञान प्राप्त किया जाता है।

यही वह अवस्था है जहाँ समाजशास्त्र एक वैज्ञानिक अनुशासन के रूप में विकसित होता है।

तीन अवस्थाओं का संबंध कॉम्ट के समाजशास्त्र से

कॉम्ट का मानना था कि—

मानवता का बौद्धिक विकास
समाजों का ऐतिहासिक विकास
ज्ञान की प्रगति

इन तीनों को समझने का वैज्ञानिक ढाँचा यही नियम प्रदान करता है।

6. कॉम्ट ने अपने समाजशास्त्रीय चिंतन में “विकास और प्रगति” के प्रश्नों को क्यों उठाया?

(A) वे जीवविज्ञान के सिद्धांतों को समाज में लागू करना चाहते थे
(B) यूरोप में सामाजिक अराजकता और राजनीतिक तानाशाही का दौर चल रहा था
(C) उन्होंने हर्बर्ट स्पेंसर की विचारधारा से प्रेरणा ली थी
(D) वे समाज को धार्मिक एकता की ओर ले जाना चाहते थे

उत्तर: (B) यूरोप में सामाजिक अराजकता और राजनीतिक तानाशाही का दौर चल रहा था

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने अपने समाजशास्त्रीय चिंतन में “विकास (Development) और प्रगति (Progress)” के प्रश्नों को इसलिए उठाया क्योंकि 19वीं सदी के यूरोप में तीव्र सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक अशांति फैली हुई थी।

यूरोप का सामाजिक संकट (European Social Crisis)

• फ्रांसीसी क्रांति (1789) के बाद यूरोप राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा था।
• पुराने सामंती ढाँचे टूट चुके थे लेकिन नए औद्योगिक समाज की स्थिर संरचना अभी बनी नहीं थी।
• इस संक्रमण ने समाज में अव्यवस्था (Social Disorder) पैदा की।

कॉम्ट ने इसे “social disorganization” कहा।

राजनीतिक तानाशाही और अस्थिरता

• नेपोलियन के शासन ने समाज में सैन्यवादी तानाशाही को बढ़ाया।
• राजशाहियों और लोकतंत्र के बीच टकराव बढ़ा।
• निरंतर युद्ध, अस्थायी सरकारें, और असंतोष ने यूरोप को अस्थिर बना दिया।

कॉम्ट पूरी तरह से इस चिंता में थे कि समाज व्यवस्था खो चुका है।

औद्योगिक क्रांति का प्रभाव

• नई मशीनें, फैक्ट्रियाँ और श्रमिक वर्ग ने उत्पादन का स्वरूप बदल दिया।
• पुराने मूल्य टूटे, नए मूल्य स्थापित नहीं हो पाए।
• इससे सामाजिक एकता (Social Cohesion) खतरे में पड़ गई।

कॉम्ट का मूल लक्ष्य था:
“Order and Progress” → व्यवस्था + प्रगति

इससे कॉम्ट को विकास और प्रगति का सिद्धांत गढ़ने की प्रेरणा मिली

• वे समाज के वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से स्थिरता (Order) लाना चाहते थे।
• उन्होंने तीन अवस्थाओं का नियम (Law of Three Stages) इसी संकट की पृष्ठभूमि में गढ़ा।
• समाज की बुद्धि, ज्ञान और संस्थाओं के विकास को वे “प्रगति” कहते थे।
• जबकि सामाजिक एकता को “व्यवस्था” कहते थे।

कॉम्ट ने “विकास और प्रगति” के प्रश्न इसलिए उठाए क्योंकि:

यूरोप में गहरी सामाजिक अराजकता, राजनीतिक उथल-पुथल और औद्योगिक परिवर्तन ने समाज को अस्थिर कर दिया था।
वह वैज्ञानिक समाजशास्त्र बनाकर दुनिया को “व्यवस्था + प्रगति” का एक स्थायी मार्ग देना चाहते थे।

7. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र अन्य विज्ञानों से किस रूप में भिन्न है?

(A) यह केवल दार्शनिक तर्कों पर आधारित है
(B) यह मनोविज्ञान की शाखा है
(C) यह मानव समाज का सर्वोच्च विज्ञान है जो अन्य सभी विज्ञानों का समन्वय करता है
(D) यह केवल सांख्यिकीय विश्लेषण पर निर्भर करता है

उत्तर: (C) यह मानव समाज का सर्वोच्च विज्ञान है जो अन्य सभी विज्ञानों का समन्वय करता है

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को Science of Society और साथ ही सभी विज्ञानों का समन्वय करने वाला सर्वोच्च विज्ञान (Supreme Science) कहा।

उन्होंने विज्ञानों की एक श्रृंखला (Hierarchy of Sciences) प्रस्तुत की:

  1. Mathematics
  2. Astronomy
  3. Physics
  4. Chemistry
  5. Biology
  6. Sociology (Social Physics)सर्वोच्च विज्ञान

कॉम्ट के अनुसार:

सामाजिक जीवन की जटिलता सबसे अधिक है

• समाज में अनेक संस्थाएँ, नियम, मूल्य और मानव व्यवहार शामिल होते हैं।
• इसलिए इसे समझने के लिए सभी निम्नतर विज्ञानों के सिद्धांतों की जरूरत होती है।

समाजशास्त्र सभी विज्ञानों को एकीकृत (Integrate) करता है

कॉम्ट ने कहा कि:

“Sociology is the queen of sciences because it coordinates all other sciences.”
(मतलब: समाजशास्त्र सभी विज्ञानों को एक पद्धति में जोड़कर सामाजिक व्यवस्था को समझता है।)

इसलिए समाजशास्त्र केवल अपने स्वतंत्र सिद्धांत नहीं बनाता, बल्कि विज्ञानों की प्रगति को समाज की प्रगति से जोड़कर देखता है।

समाजशास्त्र का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से समाज में व्यवस्था (Order) और प्रगति (Progress) लाना है

यह वैज्ञानिक उद्देश्य इसे अन्य विज्ञानों से अलग और श्रेष्ठ बनाता है।

कॉम्ट के अनुसार, समाजशास्त्र:
मानव समाज का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण विज्ञान है।
सभी अन्य विज्ञानों के सिद्धांतों को समन्वित कर समाज को समझता है।
इसलिए इसे “विज्ञानों की रानी” (Queen of Sciences) कहा गया।

8. कॉम्ट ने “Social Physics” शब्द का प्रयोग किस उद्देश्य से किया?

(A) सामाजिक नियमों को भौतिक विज्ञान की तरह निश्चित करने के लिए
(B) समाज के दार्शनिक अर्थ को समझाने के लिए
(C) नैतिक मूल्य स्थापित करने के लिए
(D) राजनीति को धार्मिक आधार देने के लिए

उत्तर: (A) सामाजिक नियमों को भौतिक विज्ञान की तरह निश्चित करने के लिए

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने 1822 में लिखे अपने प्रसिद्ध लेख
“Plan of the Scientific Operations Necessary for the Reorganisation of Society”
में सबसे पहली बार “Social Physics” शब्द का प्रयोग किया।

उद्देश्य — समाज को “विज्ञान” बनाना

कॉम्ट चाहते थे कि:

सामाजिक घटनाओं का अध्ययन भी भौतिकी (Physics) की तरह निश्चित नियमों के आधार पर किया जाए।

मतलब:

  • समाज में भी कारण–परिणाम के नियम (Cause–Effect Laws) होते हैं
  • सामाजिक व्यवहार को वैज्ञानिक ढंग से समझा जा सकता है
  • समाज के विकास में भी “नियमितता (Regularity)” और “पूर्वानुमान (Prediction)” संभव है

इसलिए उन्होंने इसे “Social Physics” कहा।

बाद में नाम बदला: Social Physics → Sociology

कॉम्ट ने यह महसूस किया कि समाज भौतिक वस्तु नहीं है—यह मानसिक, नैतिक और सांस्कृतिक आयामों वाला जटिल तंत्र है।

इसलिए उन्होंने नया शब्द दिया:

“Sociology” (1838)

और कहा कि यह मानव समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है।

कॉम्ट का “Social Physics” शब्द इस उद्देश्य से प्रयोग हुआ:
समाज का अध्ययन भी भौतिक विज्ञान की तरह नियमबद्ध (Law-governed) और वैज्ञानिक बने।
यही प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण (Positivism) की शुरुआत थी।

9. कॉम्ट के अनुसार समाज का अध्ययन किस प्रकार किया जाना चाहिए?

(A) काल्पनिक और तात्विक विधियों से
(B) धार्मिक और नैतिक दृष्टि से
(C) अनुभवजन्य, व्यवस्थित और वैज्ञानिक विधियों से
(D) केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से

उत्तर: (C) अनुभवजन्य, व्यवस्थित और वैज्ञानिक विधियों से

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने यह स्पष्ट रूप से कहा था कि:

“Sociology must be studied in the same scientific manner as natural sciences.”
(स्रोत: The Positive Philosophy)

उनके अनुसार, समाज का अध्ययन तीन मुख्य वैज्ञानिक चरणों से होकर गुजरता है:

अवलोकन (Observation)

कॉम्ट के अनुसार:

  • समाज के तथ्यों पर सीधा अवलोकन
  • विचारधाराओं और धार्मिक मान्यताओं से मुक्त अध्ययन
  • तथ्यों पर आधारित निष्कर्ष

वर्गीकरण (Classification)

कॉम्ट सामाजिक तथ्यों को व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत करने पर जोर देते हैं:

  • परिवार
  • राज्य
  • धर्म
  • सामाजिक संस्थाएँ
  • सामाजिक परिवर्तन

इन्हें वैज्ञानिक ढंग से क्रमबद्ध करना आवश्यक है।

वैज्ञानिक विश्लेषण (Scientific Analysis)

कॉम्ट ने समाजशास्त्र की दो शाखाएँ बताईं:

  1. Social Statics – नियम जो सामाजिक व्यवस्था की व्याख्या करते हैं
  2. Social Dynamics – नियम जो सामाजिक प्रगति/परिवर्तन की व्याख्या करते हैं

इन दोनों का अध्ययन भी वैज्ञानिक पद्धति से ही किया जाना चाहिए।

कॉम्ट ने प्रत्यक्षवाद (Positivism) के आधार पर समाज को विज्ञान की तरह समझने की वकालत की।
इसलिए समाज का अध्ययन अनुभवजन्य (empirical), व्यवस्थित (systematic) और वैज्ञानिक (scientific) होना चाहिए।

10. आज के समाजशास्त्रीय विमर्श में कॉम्ट को क्यों याद किया जाता है जबकि पश्चिम में उनका नाम कम लिया जाता है?

(A) क्योंकि उन्होंने आधुनिक समाज की सभी समस्याओं का समाधान दिया
(B) क्योंकि उन्होंने समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक पद्धति और विशिष्ट अनुशासन का रूप दिया
(C) क्योंकि वे पहले राजनीतिक वैज्ञानिक थे
(D) क्योंकि उनके धार्मिक विचारों ने पश्चिम को प्रभावित किया

उत्तर: (B) क्योंकि उन्होंने समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक पद्धति और विशिष्ट अनुशासन का रूप दिया

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट को आधुनिक समाजशास्त्रीय भाषा में “classical but outdated thinker” कहा जाता है, लेकिन इसके बावजूद उनकी ऐतिहासिक भूमिका स्थायी और अद्वितीय है

आज के समय में कॉम्ट को याद करने के मुख्य कारण:

उन्होंने “Sociology” नाम दिया — इसलिए वे संस्थापक हैं

Comte पहली बार वह व्यक्ति थे जिसने कहा:

“Sociology is a distinct science.”
(Cours de Philosophie Positive, 1830–42)

“समाजशास्त्र एक स्वतंत्र और विशिष्ट विज्ञान है।”

इससे पहले समाज के अध्ययन को कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुशासन नहीं मानता था।

उन्होंने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक (Scientific/Empirical) पद्धति से जोड़ने का प्रयास किया

उन्होंने यह सिद्ध किया कि—

  • समाज को भी “natural laws” के आधार पर समझा जा सकता है
  • सामाजिक घटनाएँ भी वैज्ञानिक नियमों के अधीन होती हैं
  • अवलोकन → वर्गीकरण → विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया समाज पर भी लागू होती है

यह एक बुनियादी “methodological revolution” था।

पश्चिम में उनका प्रभाव कम क्यों हुआ?

तीन मुख्य कारण:

(i) उनकी अंतिम विचारधारा “Religion of Humanity” आलोचना का विषय बनी

Comte ने जीवन के अंत में:

  • अपनी धार्मिक-नैतिक व्यवस्था बनाई
  • स्वयं को उच्च पैगंबर की तरह प्रस्तुत किया
  • महिलाओं को आध्यात्मिक भूमिका देने का दावा किया

पश्चिमी विद्वानों ने इसे “pseudo-religious” कहकर अस्वीकार कर दिया।

(ii) उनके विचार “अत्यधिक प्रणालीबद्ध (over-systematic)” माने गए

पश्चिम में बाद के समाजशास्त्रियों — Marx, Weber, Durkheim — ने अधिक गहराई, विविधता और आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया, जिसके सामने Comte का ढाँचा सीमित लगने लगा।

(iii) सांख्यिकीय और आधुनिक शोध विधियों में कॉम्ट का योगदान सीमित था

इसलिए पश्चिम के empirical sociology में उनका उपयोग कम हो गया।

आज भी उन्हें क्यों याद किया जाता है? — भारत और अन्य देशों में

क्योंकि—

समाजशास्त्र की शुरुआती संरचना कॉम्ट ने ही बनाई।
सामाजिक व्यवस्था (Order) और प्रगति (Progress) की अवधारणा विकासशील देशों में बहुत प्रासंगिक है।
समाज को विज्ञान की तरह पढ़ने की Positivist foundation उन्हीं ने रखी।

यही उनकी स्थायी विरासत है।

11. कॉम्ट की “सामाजिक स्थैतिकी” (Social Statics) और “सामाजिक गतिकी” (Social Dynamics) में मूल अंतर क्या है?

(A) स्थैतिकी समाज के भौतिक रूप का अध्ययन करती है, गतिकी उसके सांस्कृतिक रूप का
(B) स्थैतिकी सामाजिक व्यवस्था का अध्ययन करती है, गतिकी सामाजिक परिवर्तन का
(C) दोनों समानार्थी हैं
(D) स्थैतिकी केवल राजनीति से संबंधित है

उत्तर: (B) स्थैतिकी सामाजिक व्यवस्था का अध्ययन करती है, गतिकी सामाजिक परिवर्तन का

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो प्रमुख भागों में बाँटा:

Social Statics (सामाजिक स्थैतिकी)

यह समाजशास्त्र की वह शाखा है जो:

  • सामाजिक व्यवस्था (Social Order)
  • सामाजिक संरचना (Structure)
  • सामाजिक संस्थाएँ — परिवार, धर्म, राज्य
  • मानव आपसी निर्भरता (Human Interdependence)
  • सामाजिक एकता (Social Harmony)

इन सभी का अध्ययन करती है।

कॉम्ट के अनुसार:

“Social Statics studies the conditions of social order.”
(The Positive Philosophy)
“सामाजिक स्थैतिकी समाज की सामाजिक व्यवस्था की अवस्थाओं का अध्ययन करती है।”

Social Dynamics (सामाजिक गतिकी)

यह समाज में होने वाले:

  • परिवर्तन (Change)
  • विकास (Development)
  • प्रगति (Progress)
  • बौद्धिक विकास के चरण (Three Stages Theory)

का अध्ययन करती है।

कॉम्ट के अनुसार:

“Social Dynamics explains the laws of social progress.”
“सामाजिक गतिकी समाज की प्रगति के नियमों की व्याख्या करती है।”

मूल अंतर (Core Difference)

Social StaticsSocial Dynamics
समाज की संरचना और व्यवस्था का अध्ययनसमाज में परिवर्तन और प्रगति का अध्ययन
OrderProgress
संस्थाएँ स्थिर कैसे रहती हैंसंस्थाएँ समय के साथ कैसे बदलती हैं
सामाजिक एकता एवं संतुलनसामाजिक विकास एवं रूपांतरण

12. कॉम्ट के “तीन अवस्थाओं के नियम” का मूल उद्देश्य क्या था?

(A) धर्म और दर्शन की आलोचना करना
(B) समाज के ज्ञानात्मक विकास को वैज्ञानिक रूप से समझाना
(C) समाज में समानता स्थापित करना
(D) राजनीतिक शासन का औचित्य सिद्ध करना

उत्तर: (B) समाज के ज्ञानात्मक विकास को वैज्ञानिक रूप से समझाना

व्याख्या:

कॉम्ट का “Law of Three Stages” केवल समाज या इतिहास की व्याख्या नहीं है, बल्कि मानव बुद्धि और ज्ञान की विकास यात्रा का वैज्ञानिक सिद्धांत है।

इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि:

मानव सोच (Human Thought) धार्मिक—→ दार्शनिक—→ वैज्ञानिक चरणों से गुजरकर विकसित होती है।

कॉम्ट का मूल उद्देश्य (Core Purpose)

“समाज के बौद्धिक (intellectual) और ज्ञानात्मक (cognitive) विकास को वैज्ञानिक नियमों के रूप में समझाना।”

तीन अवस्थाओं का संक्षिप्त वैज्ञानिक विश्लेषण

Theological Stage (धार्मिक अवस्था)

  • मानव प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या “ईश्वर/अलौकिक शक्तियों” से करता है।
  • समाज व्यक्तिगत विश्वास पर चलता है।

Metaphysical Stage (तात्विक अवस्था)

  • व्याख्या धार्मिक से हटकर “अमूर्त दार्शनिक शक्तियों” पर आधारित होती है।
  • यह एक संक्रमणकाल होता है।

Positive Stage (प्रत्यक्षवादी अवस्था)

  • वैज्ञानिक अवलोकन, प्रयोग, और अनुभवजन्य प्रमाण ही ज्ञान का आधार बनते हैं।
  • समाज “scientific laws” पर चलता है।

इसी अंतिम वैज्ञानिक चरण को Comte ने “संपूर्ण ज्ञान का भविष्य” कहा।

उनका लक्ष्य था:

मानव ज्ञान की दिशा को विज्ञान की ओर अग्रसर मानना
समाज और बुद्धि दोनों की प्रगति को वैज्ञानिक नियमबद्धता में रखना

13. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) में किस प्रकार का ज्ञान “वैध” (Valid) माना गया है?

(A) काल्पनिक ज्ञान
(B) रहस्यात्मक ज्ञान
(C) अनुभवजन्य और वैज्ञानिक ज्ञान
(D) धार्मिक या दार्शनिक ज्ञान

उत्तर: (C) अनुभवजन्य और वैज्ञानिक ज्ञान

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) 19वीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण बौद्धिक क्रांतियों में से एक माना जाता है। कॉम्ट ने तर्क दिया कि —
“वैध (Valid) ज्ञान केवल वही है जो वास्तविक दुनिया के अनुभव, अवलोकन और वैज्ञानिक विधि पर आधारित हो।”

इसलिए उनके अनुसार:

  • काल्पनिक (Fictional) ज्ञान → अवैध
  • अध्यात्मिक/मेटाफिज़िकल ज्ञान → अपर्याप्त
  • धार्मिक या रहस्यात्मक ज्ञान → वैज्ञानिक मानकों पर खरा नहीं
  • वैध ज्ञान = वैज्ञानिक + अनुभवजन्य + सत्यापन योग्य

कॉम्ट की प्रसिद्ध उक्ति:
“True knowledge is positive knowledge.”
(हिंदी अर्थ: “सच्चा ज्ञान वही है जो प्रत्यक्ष और वैज्ञानिक हो।”)

कॉम्ट का यह दृष्टिकोण समाजशास्त्र को विज्ञान बनाने की दिशा में निर्णायक कदम था।

14. कॉम्ट का “Order and Progress” सूत्र क्या संकेत करता है?

(A) समाज में व्यवस्था बनाए रखना और परिवर्तन का विरोध करना
(B) व्यवस्था और प्रगति को परस्पर विरोधी मानना
(C) सामाजिक स्थिरता और परिवर्तन के संतुलन की आवश्यकता
(D) केवल प्रगति पर ध्यान देना

उत्तर: (C) सामाजिक स्थिरता और परिवर्तन के संतुलन की आवश्यकता

व्याख्या:

कॉम्ट ने समाजशास्त्र की वैज्ञानिक बनावट को “Order and Progress” के सूत्र में समाहित किया।
उनके अनुसार:

1. Order (सामाजिक व्यवस्था / Social Statics)

  • समाज की संरचना
  • संस्थाएँ
  • नियम और मूल्य
  • स्थिरता प्रदान करने वाले तत्व

Order वह आधार है जिससे समाज टिकता है।

2. Progress (सामाजिक प्रगति / Social Dynamics)

  • परिवर्तन
  • विकास
  • आगे बढ़ना
  • मानव बुद्धि का विकास

Progress वह प्रक्रिया है जिससे समाज आगे बढ़ता है।

3. दोनों परस्पर पूरक हैं

कॉम्ट की मुख्य दलील:

“Order is the basis of Progress, and Progress is the goal of Order.”
(हिंदी अर्थ: “व्यवस्था प्रगति का आधार है, और प्रगति व्यवस्था का लक्ष्य है।”)

  • यदि व्यवस्था न हो → अव्यवस्था और अराजकता
  • यदि केवल व्यवस्था हो और परिवर्तन न हो → ठहराव (Stagnation)
  • समाज के सतत विकास के लिए संतुलन अनिवार्य है

15. कॉम्ट के समाजशास्त्र की तुलना में कार्ल मार्क्स के समाजशास्त्र में मुख्य अंतर क्या है?

(A) कॉम्ट वैज्ञानिक विधियों के पक्षधर थे, जबकि मार्क्स दार्शनिक व्याख्या के
(B) कॉम्ट सामाजिक स्थिरता पर बल देते हैं, जबकि मार्क्स सामाजिक संघर्ष पर
(C) दोनों ने समान सिद्धांत दिए
(D) कॉम्ट धार्मिक विचारक थे, मार्क्स नास्तिक नहीं थे

उत्तर: (B) कॉम्ट सामाजिक स्थिरता पर बल देते हैं, जबकि मार्क्स सामाजिक संघर्ष पर

व्याख्या:

1. कॉम्ट: सामाजिक व्यवस्था और स्थिरता (Order) के समर्थक

  • कॉम्ट समाज को एक सजीव जैविक प्रणाली (Organic System) की तरह देखते हैं।
  • उनके समाजशास्त्र में मुख्य बल:
    • सामाजिक स्थैतिकी (Social Statics) → व्यवस्था
    • सामाजिक गतिकी (Social Dynamics) → प्रगति
  • उनका लक्ष्य था समाज में समन्वय, एकता और स्थिरता बनाए रखना।
  • उन्होंने सामाजिक परिवर्तन को धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया माना, संघर्ष को नहीं।

मुख्य विचार:
“Order is the basis of Progress.”
(व्यवस्था प्रगति का आधार है।)

2. मार्क्स: सामाजिक संघर्ष और क्रांति (Class Struggle) के समर्थक

  • मार्क्स समाज को वर्ग विभाजित संरचना (Class-divided structure) के रूप में देखते हैं।
  • सामाजिक परिवर्तन का मूल स्रोत: वर्ग संघर्ष (Class Struggle)
  • मार्क्स के अनुसार इतिहास का हर चरण “संघर्ष” का परिणाम है—
    • दास बनाम स्वामी
    • सामंत बनाम किसान
    • पूँजीपति बनाम मजदूर

मार्क्स का समाजशास्त्र → सामाजिक संघर्ष + ऐतिहासिक भौतिकवाद + उत्पादन संबंधों का विश्लेषण

मुख्य उद्धरण:
“The history of all hitherto existing society is the history of class struggles.”
(अब तक के समस्त समाजों का इतिहास वर्ग संघर्षों का इतिहास है।)

Comte vs Marx — मूल अंतर

पहलूकॉम्ट (Comte)मार्क्स (Marx)
दृष्टिकोणPositivism (वैज्ञानिक व्यवस्था)Historical Materialism (संघर्ष आधारित)
केंद्रसामाजिक व्यवस्था (Order)वर्ग संघर्ष (Conflict)
समाजएकीकृत, संतुलितविरोधाभासी, संघर्षशील
परिवर्तनक्रमिक और शांतिपूर्णसंघर्ष और क्रांति द्वारा

16. कॉम्ट के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण में “Human Intellect” की भूमिका क्या है?

(A) यह समाज से अलग स्वतंत्र रूप से विकसित होता है
(B) यह समाज की संरचना को आकार देता है और उसके साथ विकसित होता है
(C) इसका कोई प्रभाव नहीं होता
(D) यह केवल धार्मिक संस्थाओं में सीमित है

उत्तर: (B) यह समाज की संरचना को आकार देता है और उसके साथ विकसित होता है

व्याख्या:

कॉम्ट के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण में Human Intellect (मानव बुद्धि) समाज के विकास की मुख्य धुरी है।

1. समाज और मानव बुद्धि साथ-साथ विकसित होते हैं

कॉम्ट के अनुसार समाज का इतिहास वास्तव में मानव बुद्धि के विकास का इतिहास है।
मानव सोच (Human Thinking) बदलती है → सामाजिक संस्थाएँ, मानदंड और व्यवस्था भी बदलती हैं।

इसीलिए उन्होंने मानव बुद्धि के तीन चरण बताए (Law of Three Stages):

  1. धार्मिक अवस्था
  2. तात्विक अवस्था
  3. वैज्ञानिक/प्रत्यक्षवादी अवस्था

जैसे-जैसे बुद्धि इन अवस्थाओं से गुजरती है, समाज भी उसी अनुसार नया रूप ग्रहण करता है।

2. बुद्धि सामाजिक संरचना को आकार देती है

कॉम्ट का मानना था कि:

  • समाज की संरचना
  • संस्थाएँ
  • रीति-नीतियाँ
  • राजनीतिक व्यवस्था

सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि किसी समय मानव बुद्धि कैसे सोचती है

इसलिए सामाजिक परिवर्तन का मूल चालक intellectual development है, न कि संघर्ष (Conflict) या जैविक नियम।

3. प्रसिद्ध कथन

“Social progress depends upon the intellectual progress of mankind.”
सामाजिक प्रगति मानव बुद्धि की प्रगति पर निर्भर करती है।

यह कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) का केंद्रीय सिद्धांत है।

17. कॉम्ट के ‘Hierarchy of Sciences’ सिद्धांत के संदर्भ में समाजशास्त्र को “सर्वोच्च (Highest) विज्ञान” क्यों माना गया है?

(A) क्योंकि यह दार्शनिक तर्कों पर आधारित है
(B) क्योंकि यह सभी विज्ञानों के सिद्धांतों का समन्वय कर समाज का अध्ययन करता है
(C) क्योंकि यह धार्मिक सिद्धांतों को प्रतिस्थापित करता है
(D) क्योंकि यह केवल सांख्यिकीय विधि पर आधारित है

उत्तर: (B) क्योंकि यह सभी विज्ञानों के सिद्धांतों का समन्वय कर समाज का अध्ययन करता है

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने विज्ञानों का क्रमबद्ध विकास समझाने के लिए Hierarchy of Sciences प्रस्तुत किया। इस क्रम में—
गणित → खगोल → भौतिकी → रसायन → जीवविज्ञान → समाजशास्त्र (Sociology)

यह क्रम सरल (simple) से जटिल (complex), और सामान्य (general) से विशिष्ट (particular) की ओर बढ़ता है।

क्यों समाजशास्त्र ‘सर्वोच्च विज्ञान’ है?

  1. समाज सबसे जटिल वास्तविकता है
    मनुष्य, संस्कृति, संस्थाएँ, मूल्य, राजनीति, अर्थव्यवस्था—ये सभी अत्यंत जटिल सामाजिक संरचनाएँ हैं।
    इसलिए इनका अध्ययन भी सबसे विकसित और परिपक्व विज्ञान के रूप में माना गया।
  2. समाजशास्त्र सभी विज्ञानों का संश्लेष (Synthesis) करता है
    कॉम्ट के अनुसार:
    “Sociology is the synthesis of all sciences.”
    (समाजशास्त्र सभी विज्ञानों का समन्वित और संयुक्त रूप है।)
  3. अन्य सभी विज्ञानों के सिद्धांत समाज को समझने में उपयोग होते हैं
    • गणित → सामाजिक शोध में सांख्यिकी
    • जीवविज्ञान → मानव व्यवहार
    • मनोविज्ञान → व्यक्तिगत क्रियाएँ
    • अर्थशास्त्र → उत्पादन-वितरण
    • राजनीति → सत्ता-संरचना
    यह सब समाजशास्त्र के भीतर समाहित है।
    इसलिए यह अंतिम और सर्वोच्च विज्ञान है।
  4. समाजशास्त्र वैज्ञानिक अवलोकन का सबसे उन्नत स्तर प्रस्तुत करता है
    भौतिक संसार के बाद सामाजिक संसार का वैज्ञानिक अध्ययन “Positive Science” की उच्चतम अवस्था है।
  5. मानव जीवन की संपूर्णता का अध्ययन
    अन्य विज्ञान केवल जीवन के एक हिस्से का अध्ययन करते हैं,
    जबकि समाजशास्त्र समग्र मानव जीवन का वैज्ञानिक अध्ययन करता है।

इसी आधार पर कॉम्ट ने समाजशास्त्र को कहा—
“Queen of Sciences” (विज्ञानों की रानी)

18. कॉम्ट का “सामाजिक पुनर्गठन” (Reorganisation of Society) का विचार किससे प्रेरित था?

(A) धार्मिक पुनर्जागरण से
(B) फ्रांसीसी समाज की अराजकता और नैतिक पतन से
(C) औद्योगिक विकास की प्रशंसा से
(D) प्राचीन ग्रीक दर्शन से

उत्तर: (B) फ्रांसीसी समाज की अराजकता और नैतिक पतन से

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट का “सामाजिक पुनर्गठन” (Reorganisation of Society) का विचार 19वीं सदी के फ्रांस की गहरी अस्थिरता से निकला।
यह वह समय था जब —

1. फ्रांसीसी क्रांति (1789) के बाद समाज में गहरी अव्यवस्था थी

  • राजशाही का पतन
  • रक्तपात, हिंसा, और “Reign of Terror”
  • सत्ता के निरंतर परिवर्तन
  • समाज में गहरी राजनीतिक अस्थिरता

कॉम्ट ने इसे “मोरल क्राइसिस” (नैतिक संकट) कहा।

2. औद्योगिकीकरण ने पुरानी सामाजिक संरचनाओं को तोड़ा

  • श्रमिक वर्ग का शोषण
  • परिवार और समुदाय कमजोर
  • शहरों में अव्यवस्था
  • संपत्ति और वर्ग विभाजन बढ़ता गया

इससे समाज में नैतिक दिशाहीनता (moral anarchy) पैदा हुई।

3. धार्मिक संरचनाएँ ढह रही थीं, लेकिन नए वैज्ञानिक मूल्य स्थापित नहीं हुए थे

कॉम्ट ने इसे “Intellectual Anarchy” कहा—
न तो पुरानी धार्मिक व्यवस्था बची थी, न नई वैज्ञानिक नैतिकता बनी थी।

4. सामाजिक अराजकता (Social Disorder) को सुधारने के लिए वैज्ञानिक समाज चाहिए

इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा —

“The reconstruction of society must be based on positive science.”
(समाज का पुनर्गठन सकारात्मक/वैज्ञानिक ज्ञान पर आधारित होना चाहिए।)

इसलिए उनका Reorganisation of Society एक प्रयास था—

  • वैज्ञानिक सोच →
  • नैतिक व्यवस्था →
  • सामाजिक स्थिरता + प्रगति का संतुलन

स्थापित करने का।

5. Saint-Simon का प्रभाव

Saint-Simon, कॉम्ट के गुरु, पहले ही “Scientific Management of Society” की बात कर चुके थे।
इसी पर कॉम्ट ने अपने प्रत्यक्षवादी समाज का विचार विकसित किया।

कॉम्ट का “सामाजिक पुनर्गठन” सीधे तौर पर
फ्रांस के राजनीतिक अस्थिरता, नैतिक पतन, धार्मिक शून्यता, और औद्योगिक अव्यवस्था
से प्रेरित था।
उन्होंने वैज्ञानिक समाज (Positive Society) की स्थापना को ही समाधान माना।

19. कॉम्ट की दृष्टि में समाज का अध्ययन किन दो स्तरों पर किया जाना चाहिए?

(A) व्यक्तिगत और धार्मिक स्तर पर
(B) संरचनात्मक (Structural) और ऐतिहासिक (Historical) स्तर पर
(C) स्थैतिक (Static) और गतिक (Dynamic) स्तर पर
(D) आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर

उत्तर: (C) स्थैतिक (Static) और गतिक (Dynamic) स्तर पर

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति स्थापित करने के लिए कहा कि समाज का अध्ययन दो स्तरों (Two Levels) पर होना चाहिए:

1. Social Statics (सामाजिक स्थैतिकी)

यह समाज की संरचना, संस्थाएँ, और सामाजिक व्यवस्था (Order) का अध्ययन करती है।
इस स्तर पर समाज को एक स्थिर इकाई मानकर यह देखा जाता है कि —

  • परिवार, धर्म, विवाह, शिक्षा जैसी संस्थाएँ
  • समाज की एकता, सहमति और स्थिरता
  • व्यक्तियों के बीच संबंध

कैसे कार्य करते हैं और सामाजिक व्यवस्था कैसे बनी रहती है।

कॉम्ट के अनुसार:
“Statical study reveals the conditions of social order.”
(स्थैतिक अध्ययन सामाजिक व्यवस्था की स्थितियों को प्रकट करता है।)

2. Social Dynamics (सामाजिक गतिकी)

यह समाज में परिवर्तन, विकास और प्रगति (Progress) का अध्ययन करती है।
इसमें देखा जाता है कि समाज समय के साथ—

  • ज्ञान, विचार और विज्ञान में परिवर्तन
  • संस्थाओं का विकास
  • जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और नैतिकता का परिवर्तन

कैसे होता है।

कॉम्ट इसे मानवता की “बौद्धिक प्रगति” (Intellectual Progress) से जोड़ते हैं।

उनका प्रसिद्ध कथन है:
“Social progress depends upon intellectual progress.”
(सामाजिक प्रगति मानव बुद्धि की प्रगति पर निर्भर करती है।)

कॉम्ट का मुख्य तर्क

समाज को समझने के लिए केवल एक पहलू (जैसे व्यवस्था या परिवर्तन) पर्याप्त नहीं है।
इसलिए उन्होंने कहा—

  • Statical Study = समाज कैसे बना है
  • Dynamical Study = समाज कैसे बदलता है

इन दोनों के संयुक्त अध्ययन से ही समाज का विज्ञान पूर्ण होता है।

20. कॉम्ट की विचारधारा का आज के समाजशास्त्रीय सिद्धांतों में क्या महत्व है?

(A) केवल ऐतिहासिक दृष्टि से
(B) प्रत्यक्षवादी कार्यप्रणाली और समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की नींव के रूप में
(C) राजनीतिक अर्थशास्त्र के रूप में
(D) धार्मिक आंदोलन के रूप में

उत्तर: (B) प्रत्यक्षवादी कार्यप्रणाली और समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की नींव के रूप में

व्याख्या:

ऑगस्ट कॉम्ट के विचारों का महत्व आज भी तीन प्रमुख कारणों से बहुत अधिक है, भले ही उनके कुछ दार्शनिक विचार (जैसे “Positive Religion”) अब अप्रासंगिक माने जाते हों।

1. आज के समाजशास्त्र की वैज्ञानिक नींव कॉम्ट से आती है

कॉम्ट ने पहली बार कहा कि—
“सामाजिक घटनाओं को भी प्राकृतिक विज्ञानों की तरह वैज्ञानिक विधियों से अध्ययन किया जा सकता है।”

यहीं से sociology एक distinct science बनी।
उनकी यह अवधारणा आज भी:

  • empirical research
  • hypothesis testing
  • observation-based studies

में उपयोग होती है।

2. उनकी Positivist Methodology आज की Research Methods की आधारशिला है

कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) ने सामाजिक विज्ञानों में वैज्ञानिकता लाने के लिए 4 मूल बातें स्थापित कीं:

  • अवलोकन (Observation)
  • वर्गीकरण (Classification)
  • तुलना (Comparison)
  • ऐतिहासिक विधि (Historical Method)

आज का empirical sociology—survey, field work, statistical methods—इसी नींव पर खड़ा है।

3. “Order and Progress” का सिद्धांत आज भी Social Theory का आधार है

कॉम्ट ने दिखाया कि समाज में स्थिरता (Order) और परिवर्तन (Progress) विरोधी नहीं, बल्कि पूरक प्रक्रियाएँ हैं।
आज:

  • functionalism
  • modernization theory
  • social change theories

कॉम्ट की इसी धारणा से प्रभावित हैं।

संक्षेप में—कॉम्ट का आधुनिक महत्व

क्षेत्रकॉम्ट का प्रभाव
समाजशास्त्रीय सिद्धांतPositivism, Scientific Sociology
समाजशास्त्रीय विधियाँObservation, Comparison, Historical Method
सिद्धांत का विकासOrder–Progress Framework
आधुनिक सिद्धांतों पर प्रभावDurkheim, Spencer, Functionalism

इसलिए कॉम्ट का महत्व केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि methodological और foundational है।


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