अध्याय 3 : निर्धनता — एक चुनौती (Poverty as a Challenge) MCQs
भारत जैसे विकासशील देश के सामने निर्धनता (Poverty) एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्या है। यह केवल आय की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के सभी पहलुओं — शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पोषण, और सम्मानजनक जीवन के अवसरों — को प्रभावित करती है।
यह अध्याय हमें बताता है कि निर्धनता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संरचनात्मक (structural) समस्या है, जो आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, संसाधनों की असमान वितरण, और सामाजिक पिछड़ेपन से जुड़ी है।
- कक्षा 9 के लिए यह अध्याय अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण आधार है।
- UPSC/SSC/Banking जैसी परीक्षाओं के लिए यह गरीबी, सामाजिक असमानता और सरकारी नीतियाँ के संदर्भ में प्रश्नों का आधार तैयार करता है।
- अध्याय के अंतर्गत तैयार किए गए MCQs अभ्यास के लिए उपलब्ध हैं, जो छात्रों को समझ और परीक्षा तैयारी दोनों में मदद करेंगे।
निर्धनता को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। समावेशी विकास (Inclusive Growth), मानव संसाधन में निवेश और सरकारी योजनाओं के प्रभाव के माध्यम से ही गरीबी का समाधान संभव है। यह अध्याय छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि गरीबी उन्मूलन के लिए सामाजिक, आर्थिक और सरकारी उपायों का संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
1. “निर्धनता: एक चुनौती” यह अध्याय मुख्य रूप से किस विषय पर आधारित है?
(a) निर्धनता
(b) कृषि संकट
(c) शिक्षा सुधार
(d) औद्योगिकीकरण
उत्तर: (a) निर्धनता
व्याख्या:
अध्याय “निर्धनता: एक चुनौती” भारत में गरीबी की समस्या और उससे जुड़ी विभिन्न चुनौतियों पर केंद्रित है। यह केवल आर्थिक अभाव तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक अवसर और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी है।मुख्य बिंदु:
- निर्धनता के कारण:
- आय और संपत्ति में असमानता
- बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित अवसर
- शिक्षा और कौशल की कमी
- स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण की कमी
- निर्धनता के प्रभाव:
- बच्चों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव
- स्वास्थ्य और जीवन स्तर में गिरावट
- सामाजिक और आर्थिक विकास में बाधा
- समाधान और पहल:
- MGNREGA: ग्रामीण रोजगार सुरक्षा
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY): सस्ते आवास की सुविधा
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA): खाद्यान्न और पोषण सुनिश्चित करना
- स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाएँ: गरीबी से जुड़े सामाजिक प्रभाव को कम करना
इस प्रकार, यह अध्याय गरीबी के कारण, प्रभाव और समाधान को समग्र दृष्टिकोण से समझने में मदद करता है।
2. 2011-12 के अनुसार भारत में लगभग कितने लोग निर्धन थे?
(a) 20 करोड़
(b) 27 करोड़
(c) 35 करोड़
(d) 40 करोड़
उत्तर: (b) 27 करोड़
व्याख्या:
साल 2011-12 के राष्ट्रीय आंकड़ों (Planning Commission/सर्वेक्षण) के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 20%–22% हिस्सा, यानी करीब 27 करोड़ लोग, गरीबी रेखा से नीचे थे।
- गरीबी रेखा का अर्थ:
गरीबी रेखा वह आय स्तर है जिसके नीचे व्यक्ति अपने मूलभूत आवश्यकताओं—खाद्य, वस्त्र, आवास और स्वास्थ्य—को पूरा नहीं कर पाता।- मुख्य तथ्य:
- ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता अधिक थी (लगभग 25%)।
- शहरी क्षेत्रों में निर्धनता थोड़ी कम थी (लगभग 14–15%)।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी ने इस संख्या को प्रभावित किया।
- महत्व:
यह आँकड़ा यह दिखाता है कि 2011-12 में भारत में अभी भी एक बड़ी जनसंख्या गरीबी की समस्या से जूझ रही थी, और सरकार द्वारा लागू नीतियाँ जैसे MGNREGA, NFSA, और PMAY गरीबी कम करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास थे।
3. निर्धनता रेखा का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
(a) अमीरों की पहचान के लिए
(b) निर्धनता मापने के लिए
(c) शिक्षा का स्तर जानने के लिए
(d) कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए
उत्तर: (b) निर्धनता मापने के लिए
व्याख्या:
निर्धनता रेखा एक आर्थिक और सामाजिक मानक है, जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कोई व्यक्ति या परिवार गरीबी की स्थिति में है या नहीं।
- परिभाषा:
निर्धनता रेखा वह आय या खर्च का स्तर है जिसके नीचे जीवन के मूलभूत आवश्यकताओं—जैसे भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, और शिक्षा—को पूरा नहीं किया जा सकता।- मुख्य उद्देश्य:
- गरीबी मापना और गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों की संख्या का आंकलन करना।
- सरकारी नीतियों और योजनाओं के लिए लक्षित समूहों की पहचान करना।
- गरीबी उन्मूलन के उपायों का मूल्यांकन करना।
- महत्व:
निर्धनता रेखा का आंकलन नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभाव को समझने के लिए किया जाता है।
उदाहरण के लिए, MGNREGA, NFSA और PMAY जैसी योजनाएँ इसी आधार पर गरीबों तक लक्षित लाभ पहुँचाती हैं।इस प्रकार, निर्धनता रेखा केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि गरीबी की पहचान और उसे दूर करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
4. शहरी क्षेत्रों में अधिकांश निर्धन लोग किस प्रकार का काम करते हैं?
(a) सरकारी कर्मचारी
(b) व्यापारी
(c) बड़े उद्योगपति
(d) दैनिक वेतनभोगी श्रमिक
उत्तर: (d) दैनिक वेतनभोगी श्रमिक
व्याख्या:
शहरी क्षेत्रों में निर्धन वर्ग के अधिकांश लोग असंगठित क्षेत्र (unorganized sector) में काम करते हैं। यह श्रमिक वर्ग अस्थायी और अनियमित रोजगार करता है, जिसमें स्थायी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की कमी होती है।मुख्य उदाहरण:
- निर्माण स्थल: भवन, सड़क और पुल निर्माण में मजदूरी।
- बाजार और छोटे व्यापार: दुकानों में सहायक, फेरीवाला, परिवहन कार्य।
- घरेलू कामकाज: सफाई, खाना बनाना और देखभाल संबंधी कार्य।
विशेष तथ्य:
- उनकी आय अस्थिर और अनियमित होती है।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का लाभ अक्सर इन्हें नहीं मिलता।
- यह समूह गरीबी के चक्र में फंसा रहता है और आर्थिक असमानता को बढ़ाता है।
महत्व:
सरकार की योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, कौशल विकास और शहर रोजगार योजनाएँ इन श्रमिकों की सुरक्षा और जीवन स्तर सुधारने के लिए बनाई गई हैं।
5. निर्धनता को सामाजिक वैज्ञानिक किस प्रकार की समस्या मानते हैं?
(a) केवल आर्थिक
(b) केवल सांस्कृतिक
(c) बहुआयामी सामाजिक
(d) केवल राजनीतिक
उत्तर: (c) बहुआयामी सामाजिक
व्याख्या:
सामाजिक वैज्ञानिक निर्धनता को केवल आर्थिक समस्या नहीं मानते। इसे बहुआयामी सामाजिक समस्या के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह कई पहलुओं से जुड़ी होती है:
- आर्थिक आयाम: आय और संसाधनों की कमी, रोजगार की असुरक्षा।
- शैक्षिक आयाम: शिक्षा की कमी और कौशल विकास का अभाव।
- स्वास्थ्य और पोषण: असंतुलित भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव।
- आवास और जीवन स्तर: असुरक्षित और अस्वच्छ आवास।
- सामाजिक अवसर: सामाजिक भेदभाव, कमजोर सामाजिक नेटवर्क।
महत्व:
निर्धनता के बहुआयामी स्वरूप को समझना आवश्यक है ताकि सरकारी योजनाएँ और समाजिक सुधार सभी पहलुओं—आर्थिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य और सामाजिक—को ध्यान में रखकर बनाई जा सकें।उदाहरण:
- MGNREGA: रोजगार सुरक्षा
- NFSA: पोषण और खाद्यान्न
- PMAY: आवास सुरक्षा
- आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य सुरक्षा
इस प्रकार, निर्धनता एक समग्र सामाजिक समस्या है, न कि केवल आर्थिक या राजनीतिक।
6. 2011-12 के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का लगभग कितना प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे था?
(a) 10%
(b) 15%
(c) 22%
(d) 30%
उत्तर: (c) 22%
व्याख्या:
2011-12 में योजना आयोग (Planning Commission) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 22% हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे था।
- गरीबी रेखा का अर्थ: वह न्यूनतम आय या खर्च का स्तर जिससे व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं—खाद्य, वस्त्र, आवास और स्वास्थ्य—को पूरा कर सके।
- मुख्य तथ्य:
- ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी अधिक (लगभग 25%) थी।
- शहरी क्षेत्रों में गरीबी कम (लगभग 14–15%) थी।
- महत्व:
- यह आँकड़ा गरीबी की गंभीरता और सामाजिक-आर्थिक असमानता को दिखाता है।
- नीति निर्माण और योजनाओं (MGNREGA, NFSA, PMAY) के लिए लक्षित समूहों की पहचान में मदद करता है।
- यह दिखाता है कि गरीबी केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक और मानव विकास के दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण थी।
निष्कर्ष:
22% आबादी का यह आंकड़ा सरकार और समाज के लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शन है कि गरीबी उन्मूलन के लिए बहुआयामी और लक्षित प्रयासों की आवश्यकता है।
7. बाल-श्रम (child labour) निर्धनता का किस रूप में उदाहरण है?
(a) गरीबी का समाधान
(b) गरीबी का परिणाम
(c) शिक्षा सुधार
(d) शहरीकरण
उत्तर: (b) गरीबी का परिणाम
व्याख्या:
बाल-श्रम निर्धनता का प्रत्यक्ष परिणाम है। गरीब परिवारों में आर्थिक कठिनाई के कारण बच्चों को शिक्षा के बजाय काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह स्थिति निम्न कारणों से उत्पन्न होती है:
- आर्थिक मजबूरी:
- निर्धन परिवार के बच्चों की आय परिवार की जीविका में योगदान करती है।
- बच्चों की मजदूरी से परिवार का न्यूनतम भरण-पोषण संभव होता है।
- शिक्षा की कमी:
- गरीबी के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
- इसके परिणामस्वरूप कौशल और शिक्षा का अभाव बढ़ता है, जिससे भविष्य में रोजगार के अवसर सीमित रहते हैं।
- सामाजिक और कानूनी दृष्टि:
- बाल-श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में बाधा डालता है।
- भारत में बाल श्रम (Prohibition & Regulation) Act, 1986 और Right to Education Act, 2009 जैसे कानून इसे रोकने के लिए बनाए गए हैं।
महत्व:
बाल-श्रम निर्धनता की गंभीर सामाजिक समस्या का उदाहरण है। इसे रोकने के लिए शिक्षा, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ अनिवार्य हैं।
8. 2011-12 में भारत में प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय का निर्धनता रेखा औसतन कितना माना गया था?
(a) 1000 रुपये
(b) 1500 रुपये
(c) 270 रुपये प्रतिदिन
(d) 2400 कैलोरी
उत्तर: (c) 270 रुपये प्रतिदिन
व्याख्या:
गरीबी रेखा वह न्यूनतम आय या खर्च का स्तर है, जिसके नीचे व्यक्ति अपने मूलभूत आवश्यकताओं—जैसे भोजन, वस्त्र, आवास और स्वास्थ्य—को पूरा नहीं कर सकता।नीति निर्माण और लक्षित कल्याण योजनाओं (MGNREGA, NFSA, PMAY) के लिए इसका प्रयोग किया गया।
2011-12 के आंकड़े:
योजना आयोग (Planning Commission) के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा के लिए औसतन 270 रुपये प्रतिदिन प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय को आधार माना गया।यह राशि व्यक्तियों को रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न्यूनतम खर्च दिखाती है।
राशि का अर्थ:
यह 270 रुपये प्रतिदिन लगभग 8100 रुपये प्रति माह के बराबर है।
इसमें खाद्य, वस्त्र, आवास और अन्य मूलभूत खर्च शामिल होते हैं।महत्व:
इस आधार पर गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों की संख्या का अनुमान लगाया गया (लगभग 22% जनसंख्या)।
9. “निर्धनता को केवल आर्थिक समस्या न मानकर सामाजिक समस्या के रूप में देखना चाहिए” – इसका क्या आशय है?
(a) निर्धनता का हल केवल धन से संभव है
(b) निर्धनता शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास सभी को प्रभावित करती है
(c) निर्धनता का असर केवल गाँव में है
(d) निर्धनता केवल राजनीतिक नारा है
उत्तर: (b) निर्धनता शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास सभी को प्रभावित करती है
व्याख्या:
निर्धनता केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी गंभीर समस्या है। इसका अर्थ है कि गरीबी व्यक्ति के जीवन के लगभग सभी पहलुओं को प्रभावित करती है:
- शिक्षा:
- निर्धन परिवार के बच्चे अक्सर स्कूल नहीं जा पाते।
- कौशल और रोजगार की क्षमता सीमित होती है।
- स्वास्थ्य और पोषण:
- उचित पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।
- आवास और जीवन स्तर:
- गरीब लोग असुरक्षित और अस्वच्छ आवास में रहते हैं।
- मूलभूत सुविधाओं की कमी जीवन स्तर को घटाती है।
- सामाजिक अवसर:
- गरीबी के कारण सामाजिक भेदभाव और असमानता बढ़ती है।
महत्व:
- इस दृष्टिकोण से सरकार और समाज को समग्र और बहुआयामी नीतियाँ बनानी चाहिए।
- उदाहरण: MGNREGA, NFSA, PMAY, आयुष्मान भारत, जो आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य पहलुओं को समेटती हैं।
10. “निर्धनता एक चुनौती” अध्याय का उद्देश्य छात्रों को किस ओर जागरूक करना है?
(a) अमीर बनने के तरीकों पर
(b) निर्धनता के कारणों, स्वरूप और समाधानों पर
(c) केवल उद्योग और व्यापार पर
(d) केवल राजनीतिक विचारों पर
उत्तर: (b) निर्धनता के कारणों, स्वरूप और समाधानों पर
व्याख्या:
अध्याय “निर्धनता: एक चुनौती” छात्रों को यह समझाने के लिए बनाया गया है कि गरीबी केवल आय की कमी नहीं, बल्कि बहुआयामी सामाजिक समस्या है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक और आर्थिक जागरूकता पैदा करना है।
- निर्धनता के कारण:
- आय और संसाधनों में असमानता
- रोजगार की कमी और अस्थिरता
- शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की कमी
- निर्धनता के स्वरूप:
- ग्रामीण और शहरी गरीबी
- बाल-श्रम और बच्चों की शिक्षा में कमी
- असंगठित क्षेत्र में असुरक्षित रोजगार
- समाधान और उपाय:
- सरकारी योजनाएँ: MGNREGA, PMAY, NFSA, आयुष्मान भारत
- सामाजिक सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और कौशल विकास
- नीति निर्माण और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से गरीबी उन्मूलन
महत्व:
- यह अध्याय छात्रों को सामाजिक जिम्मेदारी और समग्र दृष्टिकोण सिखाता है।
- इसे समझने से छात्रों को गरीबी के आर्थिक, सामाजिक और मानव विकास पर प्रभाव का ज्ञान मिलता है।
11. निर्धनता से संबंधित दिए गए मुद्दों में से कौन-सा शामिल है?
(a) भूमिहीनता
(b) निरक्षरता
(c) बेरोजगारी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (d) उपरोक्त सभी
व्याख्या:
निर्धनता केवल आय की कमी नहीं है; यह बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक समस्या है। निर्धनता से जुड़ी प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं:
- भूमिहीनता:
- गरीब परिवारों के पास कृषि योग्य भूमि का अभाव होता है।
- इससे खेती और स्थायी आय के अवसर सीमित हो जाते हैं।
- निरक्षरता:
- गरीब बच्चों और वयस्कों को शिक्षा तक पहुँच नहीं मिल पाती।
- शिक्षा की कमी भविष्य में रोजगार और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है।
- बेरोजगारी:
- रोजगार की कमी और अस्थिर रोजगार गरीबी को बढ़ाता है।
- अन्य समस्याएँ:
- कुपोषण, बाल-श्रम, अस्वच्छता, स्वास्थ्य और आवास की कमी।
- ये सभी जीवन के मूलभूत पहलुओं को प्रभावित करते हैं।
महत्व:
- यह दृष्टिकोण नीति निर्माण और सामाजिक योजनाओं के लिए आवश्यक है।
- उदाहरण: MGNREGA, NFSA, PMAY, आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ इन सभी समस्याओं को हल करने के लिए बनाई गई हैं।
12. निर्धन परिवारों में बच्चों के जल्दी काम पर लगने का मुख्य कारण क्या है?
(a) खेलकूद से दूरी
(b) पढ़ाई में रुचि न होना
(c) परिवार की आर्थिक मजबूरी
(d) सरकारी दबाव
उत्तर: (c) परिवार की आर्थिक मजबूरी
व्याख्या:
बाल-श्रम निर्धन परिवारों में आम समस्या है और इसका मुख्य कारण आर्थिक मजबूरी है। गरीब परिवारों में बच्चे छोटी उम्र से ही काम करने के लिए मजबूर होते हैं ताकि वे परिवार की जीविका में योगदान कर सकें।
- आर्थिक कारण:
- परिवार की आय अस्थिर और न्यूनतम होती है।
- बच्चों की मजदूरी से रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना संभव होता है।
- शिक्षा पर प्रभाव:
- आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
- इससे बच्चों का शैक्षिक और कौशल विकास प्रभावित होता है।
- सामाजिक और कानूनी दृष्टि:
- बाल-श्रम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डालता है।
- भारत में Child Labour (Prohibition & Regulation) Act, 1986 और Right to Education Act, 2009 इसे रोकने के लिए बनाए गए हैं।
- अन्य प्रभाव:
- गरीब बच्चों के लिए स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा का अभाव।
- गरीबी के चक्र में फंसने का जोखिम बढ़ता है।
13. भारत में निर्धनता का ऐतिहासिक कारण क्या है?
(a) हरित क्रांति
(b) ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन की नीतियाँ
(c) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
(d) औद्योगिकीकरण
उत्तर: (b) ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन की नीतियाँ
व्याख्या:
भारत में आज भी गरीबी के पीछे कुछ ऐतिहासिक कारण हैं, जिनमें प्रमुख है ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नीतियाँ।
- पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प का पतन:
- ब्रिटिश नीतियों ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को कमजोर किया।
- सस्ते ब्रिटिश उत्पादों ने स्थानीय कारीगरों और उद्योगों को बर्बाद कर दिया।
- कृषि और भूमि नीति:
- ज़मींदारी प्रथा और उच्च करों ने छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक रूप से कमजोर किया।
- कृषि उत्पादन सीमित रहा और किसान ऋणग्रस्त हो गए।
- आर्थिक विकास की धीमी गति:
- औपनिवेशिक नीतियों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन को लाभ पहुँचाना था, न कि भारत के समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
- इस कारण औद्योगिक और बुनियादी अवसंरचना का विकास बहुत धीमा हुआ।
महत्व:
- ऐतिहासिक दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि गरीबी का केवल आधुनिक कारण नहीं, बल्कि औपनिवेशिक नीतियों का भी गहरा प्रभाव रहा है।
- यह दृष्टिकोण नीति निर्माताओं को सामाजिक और आर्थिक सुधारों के महत्व को समझने में मदद करता है।
14. औपनिवेशिक शासन के कारण कौन सा उद्योग प्रभावित हुआ?
(a) वस्त्र उद्योग
(b) स्टील उद्योग
(c) सूचना प्रौद्योगिकी
(d) ऑटोमोबाइल उद्योग
उत्तर: (a) वस्त्र उद्योग
व्याख्या:
ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग पर गहरा प्रभाव डाला।
- भारतीय वस्त्र उद्योग पर असर:
- भारत के हाथ से बने वस्त्र, जैसे कपास और सिल्क के कपड़े, ब्रिटिश मशीन वाले सस्ते वस्त्रों के मुकाबले महंगे थे।
- ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय वस्त्रों पर भारी कर लगाया और सस्ते ब्रिटिश वस्त्रों का आयात बढ़ाया।
- रोजगार पर प्रभाव:
- कुटीर उद्योग और घरेलू उद्योगों में लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए।
- इससे ग्रामीण और शहरी गरीबों की आय घट गई और गरीबी बढ़ी।
- आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:
- औपनिवेशिक नीतियों का उद्देश्य भारत के उद्योगों को कमजोर करना और ब्रिटेन को लाभ पहुँचाना था।
- इससे स्थानीय उद्योगों की विकास क्षमता प्रभावित हुई और आर्थिक असमानता बढ़ी।
महत्व:
- यह उदाहरण दर्शाता है कि आर्थिक निर्धनता का ऐतिहासिक आधार केवल आधुनिक समय का परिणाम नहीं है।
- नीति निर्माण और सामाजिक योजनाओं में ऐतिहासिक दृष्टिकोण को समझना आवश्यक है।
15. भारत में निर्धनता बढ़ने का एक कारण क्या है?
(a) जनसंख्या की उच्च वृद्धि दर
(b) औद्योगिकीकरण
(c) उच्च आय
(d) शिक्षा का बढ़ना
उत्तर: (a) जनसंख्या की उच्च वृद्धि दर
व्याख्या:
भारत में निर्धनता को बढ़ाने वाले कई कारणों में से सबसे प्रमुख कारण है तेज़ जनसंख्या वृद्धि।
- प्रतिव्यक्ति आय पर प्रभाव:
- जब जनसंख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती है और उत्पादन की वृद्धि धीमी रहती है, तो प्रति व्यक्ति आय घट जाती है।
- कम आय का सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और जीवन-स्तर पर पड़ता है।
- संसाधनों पर दबाव:
- सीमित संसाधन (भूमि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ) जनसंख्या वृद्धि के कारण सभी तक समान रूप से नहीं पहुँच पाते।
- इसका नतीजा है बेरोजगारी, भूमिहीनता और असमान विकास।
- गरीबी का चक्र (Poverty Cycle):
- अधिक जनसंख्या → कम उत्पादन और आय → शिक्षा/स्वास्थ्य पर कम निवेश → फिर से अधिक निर्धनता।
- इस प्रकार निर्धनता एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती रहती है।
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:
- स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक दशकों में (1951-1981) भारत में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत ऊँची थी (लगभग 2% प्रतिवर्ष)।
- इसी अवधि में निर्धनता दर भी सबसे अधिक रही।
16. शहरों में निर्धन लोग किस प्रकार के काम करने लगे?
(a) उच्च वेतन वाले सरकारी कर्मचारी
(b) रिक्शा चालक, विक्रेता, घरेलू नौकर
(c) आईटी पेशेवर
(d) किसान
उत्तर: (b) रिक्शा चालक, विक्रेता, घरेलू नौकर
व्याख्या:
- शहरी निर्धनता का स्वरूप:
- ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और गरीबी के कारण बहुत से लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं।
- लेकिन शहरों में उनके पास शिक्षा, कौशल और पूँजी की कमी होती है, इसलिए वे अस्थायी और कम आय वाले कार्य करने लगते हैं।
- सामान्य कार्य:
- रिक्शा चालक
- ठेले/पटरी पर सामान बेचने वाले छोटे विक्रेता
- घरेलू नौकरानी/नौकर
- निर्माण स्थलों पर दिहाड़ी मजदूर
- इन कार्यों की विशेषताएँ:
- स्थिरता नहीं होती (आज काम है तो कल नहीं भी हो सकता)।
- वेतन बहुत कम मिलता है।
- किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा (pension, medical, leave benefits) नहीं होती।
- काम कठिन और थकाऊ होता है, लेकिन जीवन स्तर फिर भी निम्न बना रहता है।
- प्रभाव:
- शहरी निर्धन लोगों को झुग्गियों में रहना पड़ता है।
- बच्चों को अक्सर शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है।
- निर्धनता का यह स्वरूप बहुआयामी सामाजिक समस्या बन जाता है।
17. भारत में आय असमानता का प्रमुख कारण क्या है?
(a) भूमि और संसाधनों का असमान वितरण
(b) उच्च शिक्षा
(c) औद्योगिकीकरण
(d) हरित क्रांति
उत्तर: (a) भूमि और संसाधनों का असमान वितरण
व्याख्या:
- भूमि का असमान वितरण:
- भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है।
- लेकिन भूमि का अधिकांश हिस्सा कुछ ही लोगों (जमींदारों/बड़े किसानों) के पास है।
- छोटे और भूमिहीन किसान मजदूरी पर निर्भर रहते हैं, जिससे उनकी आय बहुत कम रहती है।
- संसाधनों का असमान उपयोग:
- ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब किसानों के पास उन्नत तकनीक, सिंचाई साधन और ऋण की पहुँच नहीं होती।
- दूसरी ओर अमीर किसान अधिक उत्पादन कर अधिक लाभ कमा लेते हैं।
- सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:
- गरीब किसान या मजदूर अपनी बुनियादी आवश्यकताओं (भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य) को पूरा नहीं कर पाते।
- अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौड़ी हो जाती है।
- यह स्थिति गरीबी और असमानता का चक्र (poverty cycle) बना देती है।
- ऐतिहासिक दृष्टि:
- ब्रिटिश शासन ने भूमि व्यवस्था (जमींदारी प्रथा) लागू की, जिससे कुछ लोगों के पास बहुत अधिक भूमि और संपत्ति आ गई।
- स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधारों का प्रयास हुआ, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो पाए।
18. भारत में निर्धन लोगों के लिए ऋणग्रस्तता का कारण क्या है?
(a) बचत की अधिकता
(b) कृषि आवश्यकताओं के लिए कर्ज लेना
(c) उच्च वेतन
(d) सरकारी सहायता
उत्तर: (b) कृषि आवश्यकताओं के लिए कर्ज लेना
व्याख्या:
- कृषि पर निर्भरता:
- भारत के छोटे और सीमांत किसान अपनी आय से खेती के लिए आवश्यक साधन (बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई) जुटा नहीं पाते।
- इसलिए उन्हें अक्सर साहूकारों और बिचौलियों से ऊँचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है।
- ऋणग्रस्तता का चक्र:
- प्राकृतिक आपदाओं (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि) और फसल खराबी की वजह से किसान कर्ज नहीं चुका पाते।
- पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ता है, जिससे वे “कर्ज के जाल (Debt Trap)” में फँस जाते हैं।
- गरीबी और ऋण का संबंध:
- ऋणग्रस्त किसान अपनी भूमि या पशुधन तक गिरवी रख देते हैं।
- इससे उनकी निर्धनता और गहरी हो जाती है।
- सरकारी प्रयास और ऋण माफी योजनाएँ:
- सरकार ने समय-समय पर किसानों की मदद के लिए ऋण माफी (Loan Waiver) योजनाएँ चलाई हैं।
- 2008: “किसान ऋण माफी एवं ऋण राहत योजना (Agricultural Debt Waiver and Debt Relief Scheme – ADWRS)” लाई गई, जिससे करोड़ों किसानों को राहत मिली।
- 2017-18 से अब तक कई राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान) ने राज्य-स्तर पर किसानों के कृषि ऋण माफ किए।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) जैसी योजनाओं से किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता दी जा रही है।
19. 1980 के दशक से भारत की आर्थिक संवृद्धि दर में वृद्धि का निर्धनता पर क्या प्रभाव पड़ा?
(a) प्रत्यक्ष रूप से निर्धनता कम हुई
(b) अवसरों में वृद्धि हुई लेकिन निर्धन लोग सीधे लाभ नहीं उठा सके
(c) निर्धनता बढ़ी
(d) कोई प्रभाव नहीं पड़ा
उत्तर: (b) अवसरों में वृद्धि हुई लेकिन निर्धन लोग सीधे लाभ नहीं उठा सके
व्याख्या:
- संवृद्धि और अवसरों का विकास
- 1980 के दशक के बाद भारत में आर्थिक वृद्धि दर में सुधार हुआ, विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और उद्योगों में विस्तार हुआ।
- इस वृद्धि से रोजगार, अधोसंरचना, निवेश और संसाधन उपलब्धता में वृद्धि हुई।
- लेकिन यह वृद्धि निष्पक्ष और समावेशी नहीं थी — अधिकांश निर्धन लोग, खासकर ग्रामीण और कृषि-आधारित आबादी, इन अवसरों का प्रत्यक्ष लाभ नहीं उठा पाए।
- नवीनतम बहुआयामी गरीबी (MPI) आँकड़े
- NITI Aayog द्वारा प्रकाशित “National Multidimensional Poverty Index: A Progress Review 2023” रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबी दर 2013-14 में 29.17% थी, जो 2022-23 में लगभग 11.28% हुई है।
- इस अवधि में 24.82 करोड़ लोग बहुआयम गरीबी से बाहर आए।
- यह सुधार दर्शाता है कि संवृद्धि + सरकार की नीतियाँ कुछ समुदायों तक पहुँच पा रही हैं, पर यह सुधार सभी निर्धन लोगों तक नहीं पहुँचा।
- निर्धन लोगों को लाभ न पहुँच पाने के कारण
- शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, संसाधन पहुँच और वित्तीय समावेशन की कमी
- ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी
- संवृद्धि का मुख्य लाभ शहरी, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को मिला
- अस्थिर रोजगार, भूमि वितरण असमत्व, और सामाजिक भेदभाव
- निष्कर्ष
- आर्थिक संवृद्धि ने अवसरों और संसाधनों को बढ़ाया, जिससे गरीबी धीरे-धीरे कम हुई।
- लेकिन निर्धन लोगों की सीमित पहुँच और संरचनात्मक असमानताएँ उन्हें इस लाभ से पूरी तरह जोड़ने में बाधक रहीं।
- नवीनतम MPI डेटा यह पुष्टि करता है कि गरीबी में कमी हुई है, मगर सुधार की गति और पहुंच में असमानताएँ विद्यमान हैं।
20. मनरेगा योजना का उद्देश्य क्या है?
(a) शहरी विकास
(b) ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 100 दिन रोजगार उपलब्ध कराना
(c) औद्योगिकीकरण
(d) विदेश निवेश बढ़ाना
उत्तर: (b) ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 100 दिन रोजगार उपलब्ध कराना
व्याख्या:
- योजना का पूरा नाम
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 में लागू किया गया।
- इसे 2 फरवरी 2006 से आरंभ किया गया था।
- मुख्य उद्देश्य
- ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों का मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराना।
- यह रोजगार अकुशल (unskilled) और श्रम आधारित कार्यों के लिए दिया जाता है।
- ग्रामीण निर्धनता कम करने और आजीविका सुरक्षा प्रदान करने का मुख्य साधन।
- अतिरिक्त लाभ
- ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियाँ (जैसे तालाब, सड़कें, कुएँ, वृक्षारोपण) बनाना।
- महिला सशक्तिकरण — इसमें महिलाओं के लिए कम से कम 33% भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
- पलायन कम करना और स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध कराना।
- हालिया स्थिति
- वित्त वर्ष 2022-23 में लगभग 6 करोड़ परिवारों ने MGNREGA के अंतर्गत रोजगार पाया।
- ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ मिलकर यह योजना गरीबी उन्मूलन में बड़ी भूमिका निभा रही है।
- कोविड-19 महामारी के समय (2020) यह योजना ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा साबित हुई।
इस तरह मनरेगा केवल रोजगार गारंटी योजना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा का भी प्रमुख साधन है।
21. मनरेगा योजना में महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था कितनी सुरक्षित की गई है?
(a) 50%
(b) 25%
(c) 33%
(d) 10%
उत्तर:(c) 33% (एक-तिहाई)
व्याख्या:
- महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य
- MGNREGA का एक प्रमुख लक्ष्य महिलाओं को रोजगार में समान अवसर देना है।
- कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि कम से कम 33% (एक-तिहाई) रोजगार महिला श्रमिकों को प्रदान किया जाएगा।
- प्रभाव और लाभ
- महिलाओं को आय का स्रोत मिलता है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरती है।
- यह सामाजिक सशक्तिकरण और निर्णय क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का आर्थिक सक्रिय होना लिंग असमानता को कम करने में भी योगदान देता है।
- आधिकारिक आँकड़े
- वित्त वर्ष 2022-23 में MGNREGA में कुल कार्यकर्ताओं में महिलाओं का हिस्सा लगभग 55% रहा।
- यह दिखाता है कि 33% न्यूनतम आरक्षित को पार कर वास्तविक में अधिक महिलाएँ लाभ उठा रही हैं।
- स्रोत: MGNREGA MIS रिपोर्ट, Ministry of Rural Development, Govt. of India (2023)
- निष्कर्ष
- MGNREGA केवल रोजगार योजना ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की मुख्य रणनीति भी है।
- आरक्षित 33% अवसर सुनिश्चित करना कानून का हिस्सा है और इसका असर ग्रामीण समाज में प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है।
22. कृषि क्षेत्र में संवृद्धि अपेक्षा से कम होने का क्या प्रभाव पड़ा?
(a) ग्रामीण निर्धनों को अधिक लाभ मिला
(b) ग्रामीण निर्धनों के लिए प्रत्यक्ष लाभ कम रहा
(c) शहरी निर्धनों को अधिक लाभ मिला
(d) सभी क्षेत्र समान रूप से लाभान्वित हुए
उत्तर: (b) ग्रामीण निर्धनों के लिए प्रत्यक्ष लाभ कम रहा
व्याख्या:
- कृषि क्षेत्र पर निर्धनता का प्रभाव
- 1980 के दशक और उसके बाद आर्थिक संवृद्धि दर में वृद्धि हुई, लेकिन कृषि क्षेत्र की संवृद्धि अपेक्षा से कम रही।
- ग्रामीण निर्धन आबादी ज्यादातर कृषि और खेतिहर मजदूरी पर आश्रित थी।
- इसलिए ग्रामीण निर्धनों को संवृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पाया।
- कारण
- सीमांत और छोटे किसान सीमित भूमि और संसाधनों पर निर्भर थे।
- तकनीकी और बुनियादी सुधार (irrigation, modern seeds, fertilizer) हर किसान तक नहीं पहुँचे।
- प्राकृतिक आपदाएँ और असमान भूमि वितरण ने भी संवृद्धि का लाभ कम किया।
- परिणाम
- ग्रामीण निर्धन गरीबी रेखा से ऊपर नहीं उठ पाए।
- पलायन (Migration) बढ़ा क्योंकि ग्रामीण लोग रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने लगे।
- सामाजिक और आर्थिक असमानता बनी रही।
- सरकारी प्रयास
- MGNREGA, PM-KISAN, कृषि बीमा योजनाएँ (PMFBY) ग्रामीण निर्धनों को संवृद्धि का लाभ पहुँचाने के लिए लागू की गईं।
- इनसे ग्रामीण आजीविका सुरक्षित हुई और कृषि जोखिम कम हुआ।
23. निर्धनता को सामान्यतः किस अवधारणा के द्वारा मापा जाता है?
(a) मानव विकास सूचकांक
(b) निर्धनता रेखा
(c) प्रति व्यक्ति आय
(d) शिक्षा स्तर
उत्तर: (b) निर्धनता रेखा
व्याख्या:
निर्धनता (Poverty) को मापने के लिए निर्धनता रेखा (Poverty Line) का उपयोग किया जाता है। यह एक ऐसी आर्थिक सीमा है जो यह दर्शाती है कि किसी व्यक्ति या परिवार की आय या उपभोग व्यय न्यूनतम जीवन स्तर बनाए रखने के लिए पर्याप्त है या नहीं।भारत में निर्धनता रेखा को तय करने के लिए उपभोग व्यय, भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मूलभूत आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है।
उदाहरण:
- 1979 में तेंदुलकर समिति ने निर्धनता रेखा तय करने के मानक सुझाए।
- रंगराजन समिति (2014) ने इसे और परिष्कृत करते हुए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए।
इसलिए निर्धनता को सामान्यतः निर्धनता रेखा द्वारा मापा जाता है।
24. वर्ष 1990 के बाद निर्धनता के विश्लेषण में कौन सी नई अवधारणा जुड़ी है?
(a) औद्योगिक विकास
(b) सामाजिक अपवर्जन
(c) तकनीकी प्रगति
(d) हरित क्रांति
उत्तर: (b) सामाजिक अपवर्जन
व्याख्या:
वर्ष 1990 के बाद, निर्धनता का अध्ययन केवल आय या उपभोग के आधार पर नहीं किया जाने लगा, बल्कि सामाजिक अपवर्जन (Social Exclusion) और मानव निर्धनता (Human Poverty) जैसी नई अवधारणाएँ भी जोड़ी गईं।सामाजिक अपवर्जन का अर्थ है — समाज के कुछ वर्गों को मुख्यधारा से अलग कर देना, जैसे –
- जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव,
- शिक्षा, रोजगार या राजनीतिक भागीदारी से वंचित रहना।
इस दृष्टिकोण से निर्धनता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय समस्या के रूप में भी देखी जाने लगी है।
25. किस वर्ष से भारत में निर्धनता की प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है?
(a) 1950
(b) 1973
(c) 1980
(d) 2000
उत्तर: (b) 1973
व्याख्या:
भारत में निर्धनता की प्रवृत्तियों (Trends in Poverty) का आधिकारिक रूप से अध्ययन वर्ष 1973-74 से किया जाने लगा।
इसी समय से भारत में निर्धनता रेखा के आधार पर निर्धनता मापन प्रारंभ हुआ।इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि —
- देश में कितने लोग निर्धनता रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं,
- और समय के साथ निर्धनता की स्थिति में सुधार हुआ है या नहीं।
उसके बाद योजना आयोग (Planning Commission) ने समय-समय पर निर्धनता से संबंधित आँकड़े जारी किए।
26. मानव निर्धनता में कौन सा पहलू शामिल है?
(a) केवल आय की कमी
(b) आय, शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी
(c) केवल रोजगार की कमी
(d) केवल सामाजिक असमानता
उत्तर: (b) आय, शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी
व्याख्या:
मानव निर्धनता (Human Poverty) केवल आय की कमी को नहीं दर्शाती, बल्कि यह व्यक्ति के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर, और मानवीय जीवन स्तर की कमी को भी सम्मिलित करती है।इस दृष्टिकोण से निर्धनता का अर्थ केवल आर्थिक पिछड़ापन नहीं है, बल्कि यह मानव विकास (Human Development) की सीमाओं को भी प्रकट करती है।
इस अवधारणा को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने अपने मानव विकास प्रतिवेदन (Human Development Report) में प्रमुखता दी है।
27. भारत में अंतर-राज्यीय निर्धनता में अंतर के मुख्य कारण क्या हैं?
(a) औद्योगिकीकरण की समानता
(b) भूमि, संसाधनों और विकास की असमानता
(c) समान कृषि उत्पादन
(d) समान शिक्षा सुविधाएँ
उत्तर: (b) भूमि, संसाधनों और विकास की असमानता
व्याख्या:
भारत के विभिन्न राज्यों में निर्धनता की स्थिति एक जैसी नहीं है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है:
- प्राकृतिक संसाधनों की असमानता: कुछ राज्यों में कोयला, लोहा, जल, वन आदि की भरपूर उपलब्धता है, जबकि अन्य राज्यों में ये सीमित हैं।
- विकास की गति में अंतर: जैसे पंजाब और केरल में सामाजिक संकेतक बेहतर हैं, जबकि बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में विकास की गति धीमी रही है।
- औद्योगिक और कृषि विकास में अंतर: कुछ राज्य औद्योगिक रूप से आगे हैं, जबकि अन्य कृषि पर निर्भर हैं और वहां उत्पादन भी कम है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता: विकसित राज्यों में मानव संसाधन बेहतर हैं, जिससे गरीबी कम होती है।
28. वैश्विक निर्धनता की प्रवृत्तियों का अध्ययन किससे किया जाता है?
(a) केवल राष्ट्रीय आंकड़ों से
(b) अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट और वैश्विक सूचकांक से
(c) केवल ऐतिहासिक दस्तावेज़ों से
(d) केवल शिक्षा आंकड़ों से
उत्तर: (b) अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट और वैश्विक सूचकांक से
व्याख्या:
वैश्विक निर्धनता की प्रवृत्तियों को समझने के लिए केवल किसी एक देश के आंकड़े पर्याप्त नहीं होते। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों और सूचकांकों का उपयोग किया जाता है:
- विश्व बैंक (World Bank): गरीबी रेखा की वैश्विक परिभाषा (जैसे $2.15 प्रतिदिन) और देशों की तुलना।
- संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP): Human Development Index (HDI), Multidimensional Poverty Index (MPI) जैसे सूचकांक।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और OECD: आर्थिक असमानता और सामाजिक विकास के आंकड़े।
- ग्लोबल हंगर इंडेक्स, ग्लोबल पॉवर्टी रिपोर्ट्स: भूख, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़े संकेतक।
इन रिपोर्टों से यह पता चलता है कि किस देश में गरीबी कितनी है, किस गति से घट रही है, और किन नीतियों से सुधार हो रहा है।
29. भारत में निर्धनता उन्मूलन के लिए वर्तमान सरकारी रणनीति किन दो मुख्य कारकों पर आधारित है?
(a) औद्योगिक निवेश और शिक्षा
(b) आर्थिक संवृद्धि और लक्षित निर्धनता कार्यक्रम
(c) स्वास्थ्य और रोजगार
(d) कृषि सुधार और हरित क्रांति
उत्तर: (b) आर्थिक संवृद्धि और लक्षित निर्धनता कार्यक्रम
व्याख्या:
भारत सरकार निर्धनता को समाप्त करने के लिए दो मुख्य रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करती है:आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth):
- जब देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है, तो नए रोजगार, उद्योग, और सेवाओं के अवसर पैदा होते हैं।
- इससे लोगों की आय बढ़ती है, जिससे वे गरीबी से बाहर निकल सकते हैं।
लक्षित निर्धनता कार्यक्रम (Targeted Poverty Alleviation Programmes):
- ये कार्यक्रम सीधे उन लोगों को लाभ पहुँचाते हैं जो गरीबी रेखा के नीचे हैं।
- उदाहरण:
- MGNREGA: ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
- PMAY: प्रधानमंत्री आवास योजना
- PDS: सार्वजनिक वितरण प्रणाली
- NSAP: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम
इन दोनों रणनीतियों का संयुक्त प्रभाव निर्धनता को घटाने में सहायक होता है।
अगर आप चाहें तो मैं इन कार्यक्रमों का एक चार्ट या फ्लो डायग्राम भी बना सकता हूँ जो छात्रों को समझने में मदद करे। या फिर पूरे अध्याय के MCQs को एक अभ्यास सेट में बदल दूँ — बताइए, किस दिशा में आगे बढ़ें?
30. भारत में निर्धनता की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित एवं निरुपाय कौन-से वर्ग हैं?
(a) शहरी मध्यम वर्ग
(b) सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग
(c) उच्च आय वाले वर्ग
(d) औद्योगिक श्रमिक
उत्तर: (b) सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग
व्याख्या:
भारत में निर्धनता का सर्वाधिक प्रभाव सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों पर पड़ता है। इनमें प्रमुख रूप से अनुसूचित जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ, भूमिहीन मजदूर, छोटे एवं सीमांत किसान तथा दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक सम्मिलित हैं।
इन वर्गों के पास शिक्षा, रोजगार एवं संसाधनों की कमी होने के कारण ये निर्धनता से बाहर निकलने में सबसे अधिक संवेदनशील और असहाय रहते हैं।
31. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (NREGA) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) शहरी विकास को बढ़ावा देना
(b) ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना
(c) विदेशी निवेश आकर्षित करना
(d) औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना
उत्तर: (b) ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना
व्याख्या:
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (NREGA) का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिन का सुनिश्चित मजदूरी रोजगार देने का प्रावधान किया गया है।
यह अधिनियम ग्रामीण निर्धनता घटाने, आजीविका सृजन और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में सहायक है। बाद में इसका नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) रखा गया।
32. मानव निर्धनता की अवधारणा पारंपरिक निर्धनता माप से किस प्रकार भिन्न है?
(a) केवल आय पर केंद्रित है
(b) शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक अवसरों को भी मापती है
(c) केवल सामाजिक स्थिति मापती है
(d) केवल रोजगार पर केंद्रित है
उत्तर: (b) शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक अवसरों को भी मापती है
व्याख्या:
पारंपरिक निर्धनता माप केवल आय और उपभोग स्तर पर आधारित होती है, जबकि मानव निर्धनता की अवधारणा में व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, और सामाजिक अवसरों की उपलब्धता को भी शामिल किया जाता है।
इस प्रकार, मानव निर्धनता एक बहुआयामी दृष्टिकोण (multidimensional approach) अपनाती है जो केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानवीय विकास के सभी पहलुओं को मापती है।
33. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के अंतर्गत कितने परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया था?
(a) 1 करोड़
(b) 2.5 करोड़
(c) 4.78 करोड़
(d) 10 करोड़
उत्तर: (c) 4.78 करोड़
व्याख्या:
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के अंतर्गत लगभग 4.78 करोड़ ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया था।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम 100 दिन का सुनिश्चित मजदूरी रोजगार प्रदान करना था, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह आँकड़ा 2013–14 के समयावधि से संबंधित है और योजना ने ग्रामीण निर्धनता कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
34. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के अंतर्गत महिलाओं की भागीदारी लगभग कितनी है?
(a) 23%
(b) 53%
(c) 17%
(d) 33%
उत्तर: (b) 53%
व्याख्या:
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) में प्रावधान है कि कुल रोजगार का कम से कम एक-तिहाई (33%) भाग महिलाओं के लिए सुनिश्चित किया जाए।
हालाँकि, वास्तविक क्रियान्वयन में महिलाओं की भागीदारी औसतन लगभग 53% तक पहुँची है, जो कि न्यूनतम निर्धारित सीमा से अधिक है।
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।
35. “काम के बदले अनाज” (Food for Work Programme) योजना कब लागू की गई थी?
(a) 1993
(b) 1995
(c) 2000
(d) 2004
उत्तर: (d) 2004
व्याख्या:
“काम के बदले अनाज” (Food for Work Programme) को वर्ष 2004 में प्रारंभ किया गया था।
यह योजना प्रारंभ में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू की गई थी।
इसका उद्देश्य निर्धन ग्रामीण परिवारों को अनाज के रूप में मजदूरी देकर रोजगार उपलब्ध कराना और साथ ही ग्रामीण आधारभूत संरचना का निर्माण करना था।
बाद में इस योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) में समाहित कर दिया गया।
36. NREGA के अंतर्गत यदि आवेदक को आवेदन करने के 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं दिया जाता है, तो उसे क्या अधिकार प्राप्त होता है?
(a) कोई लाभ नहीं
(b) दैनिक बेरोज़गारी भत्ता प्राप्त करने का अधिकार
(c) योजना से नाम हटाया जाएगा
(d) अतिरिक्त रोजगार दिया जाएगा
उत्तर: (b) दैनिक बेरोज़गारी भत्ता प्राप्त करने का अधिकार
व्याख्या:
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के अंतर्गत यह कानूनी प्रावधान है कि यदि किसी पात्र ग्रामीण परिवार के सदस्य को आवेदन की तिथि से 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं दिया जाता, तो वह व्यक्ति दैनिक बेरोज़गारी भत्ते (Unemployment Allowance) का हकदार होता है।
यह व्यवस्था सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करती है तथा रोजगार का कानूनी अधिकार स्थापित करती है।
37. प्रधानमंत्री रोजगार योजना (Prime Minister’s Rozgar Yojana, 1993) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(a) शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास
(b) ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना
(c) किसानों को लघु व्यवसाय शुरू करने के लिए सहायता देना
(d) केवल महिलाओं को रोजगार देना
उत्तर: (b) ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना
व्याख्या:
प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) की शुरुआत 1993 में की गई थी। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना था।
योजना के तहत युवाओं को लघु उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन दिया जाता था।
इससे रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण दोनों को बढ़ावा मिलता है।
38. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) बैंक ऋण और सरकारी सहायता के माध्यम से निर्धन परिवारों को स्वसहायता समूहों में संगठित करना
(b) केवल शिक्षा उपलब्ध कराना
(c) केवल स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना
(d) शहरी रोजगार बढ़ाना
उत्तर: (a) बैंक ऋण और सरकारी सहायता के माध्यम से निर्धन परिवारों को स्वसहायता समूहों में संगठित करना
व्याख्या:
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (Swarnjayanti Gram Swarozgar Yojana, SGSY) 1999 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से:
- गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
- स्वसहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से रोजगार सृजन।
- बैंक ऋण और सरकारी अनुदान के माध्यम से लघु व्यवसाय, कुटीर उद्योग और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
इस योजना से गरीब परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनते हैं और धीरे-धीरे निर्धनता रेखा से ऊपर उठते हैं।
39. 2013–14 में NREGA के तहत औसत मजदूरी कितनी थी?
(a) 65 रुपये
(b) 132 रुपये
(c) 200 रुपये
(d) 281 रुपये
उत्तर: (b) 132 रुपये
व्याख्या:
- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के तहत मजदूरी दर समय के साथ बढ़ती रही है।
- वर्ष 2006–07 में औसत मजदूरी 65 रुपये थी।
- धीरे-धीरे मजदूरी दर बढ़ी और 2013–14 में यह औसत 132 रुपये प्रति दिन पहुँच गई।
- यह बढ़ोतरी योजना की प्रभावशीलता और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की मांग को दर्शाती है।
40. NREGA के अंतर्गत मजदूरी दर किस राज्य के लिए सबसे अधिक और किसके लिए सबसे कम तय की गई थी (2018)?
(a) हरियाणा सबसे अधिक, बिहार/झारखण्ड सबसे कम
(b) बिहार सबसे अधिक, हरियाणा सबसे कम
(c) पंजाब सबसे अधिक, महाराष्ट्र सबसे कम
(d) उत्तर प्रदेश सबसे अधिक, गुजरात सबसे कम
उत्तर: (a) हरियाणा सबसे अधिक, बिहार/झारखण्ड सबसे कम
व्याख्या:
- मार्च 2018 में NREGA के तहत राज्यों के लिए मजदूरी दर अलग-अलग तय की गई थी।
- हरियाणा में सबसे अधिक मजदूरी ₹281/- प्रतिदिन निर्धारित थी।
- बिहार और झारखण्ड में सबसे कम मजदूरी ₹168/- प्रतिदिन थी।
- यह अंतर राज्यों की जीवनयापन लागत और स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित किया गया था।
41. काम के बदले अनाज योजना (NFSA/Antyodaya Anna Yojana) किस प्रकार से वित्त पोषित है?
(a) केवल राज्य सरकार द्वारा
(b) 50% केंद्र, 50% राज्य
(c) शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषित
(d) विदेशी सहायता से
उत्तर: (c) शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषित
व्याख्या:
- यह योजना पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
- राज्य सरकारें केवल खाद्यान्न वितरण और योजना के कार्यान्वयन में सहयोग करती हैं।
- योजना का उद्देश्य निर्धन और वंचित परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।
- इससे राज्य पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ता और योजना का क्रियान्वयन केंद्र द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।
42. भारत में अगले दशक में निर्धनता उन्मूलन में प्रगति मुख्यतः किन कारणों से संभव है?
(a) उच्च आर्थिक संवृद्धि, मुफ्त प्राथमिक शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, महिलाओं और कमजोर वर्गों का सशक्तीकरण
(b) केवल औद्योगिकीकरण
(c) केवल स्वास्थ्य सेवाएँ
(d) केवल कृषि विकास
उत्तर: (a) उच्च आर्थिक संवृद्धि, मुफ्त प्राथमिक शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, महिलाओं और कमजोर वर्गों का सशक्तीकरण
व्याख्या:
- उच्च आर्थिक संवृद्धि से रोजगार और आय के अवसर बढ़ते हैं, जिससे गरीबी कम होती है।
- मुफ्त प्राथमिक शिक्षा बच्चों को सशक्त बनाती है और दीर्घकाल में गरीबी चक्र तोड़ती है।
- जनसंख्या नियंत्रण संसाधनों पर दबाव कम करता है और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारता है।
- महिलाओं और कमजोर वर्गों का सशक्तीकरण उन्हें सामाजिक-आर्थिक निर्णयों में भागीदारी देने से गरीबी घटती है।
- इन सभी उपायों का समन्वय ही निर्धनता उन्मूलन की संभावना बढ़ाता है।
43. मानव निर्धनता की अवधारणा पारंपरिक निर्धनता से किस प्रकार भिन्न है?
(a) केवल आय पर केंद्रित है
(b) शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार सुरक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक सम्मान को भी शामिल करती है
(c) केवल रोजगार पर आधारित है
(d) केवल घर और भोजन तक सीमित है
उत्तर: (b) शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार सुरक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक सम्मान को भी शामिल करती है
व्याख्या:
- पारंपरिक निर्धनता केवल आय या आर्थिक संसाधनों तक सीमित होती है।
- मानव निर्धनता (Human Poverty) एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें शामिल हैं:
- शिक्षा: आधारभूत साक्षरता और कौशल
- स्वास्थ्य: जीवन प्रत्याशा और पोषण
- रोज़गार सुरक्षा: स्थिर और पर्याप्त रोजगार के अवसर
- लैंगिक समानता: महिलाओं और कमजोर वर्गों की समान भागीदारी
- सामाजिक सम्मान: सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों तक पहुंच
- इस दृष्टिकोण से गरीबी केवल आर्थिक संकट नहीं बल्कि जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक अवसरों में कमी भी है।
44. भारत में निर्धनता रेखा का आकलन किस आधार पर किया जाता है?
(A) औसत आय
(B) उपभोग व्यय सर्वेक्षण
(C) सकल घरेलू उत्पाद
(D) शिक्षा स्तर
उत्तर: (B) उपभोग व्यय सर्वेक्षण
व्याख्या:
- भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Consumer Expenditure Survey) के आधार पर किया जाता है।
- यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किया जाता है।
- इसमें परिवारों द्वारा भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि पर किए गए खर्च का आकलन किया जाता है।
- इन आंकड़ों से प्रति व्यक्ति न्यूनतम उपभोग आवश्यकता का निर्धारण कर निर्धनता रेखा (Poverty Line) तय की जाती है।
45. 1973 से 2023 तक भारत में निर्धनता की प्रवृत्तियों में क्या परिवर्तन आया है?
(A) स्थिर रही
(B) वृद्धि हुई
(C) गिरावट आई
(D) अनिश्चित रही
उत्तर: (C) गिरावट आई
व्याख्या:
- 1973-74 में भारत की लगभग 55% जनसंख्या निर्धनता रेखा से नीचे थी।
- इसके बाद योजनाबद्ध विकास, ग्रामीण रोजगार योजनाएँ और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के कारण निर्धनता में निरंतर कमी आई।
- 2023 तक निर्धनता दर घटकर लगभग 4.9% रह गई है (नीति आयोग और विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार)।
- यह प्रवृत्ति भारत में आर्थिक विकास, शिक्षा, और कल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
46. भारत में निर्धनता में अंतर-राज्य असमानताओं के मुख्य कारण क्या हैं?
(A) समान विकास दर
(B) समान शैक्षिक अवसर
(C) असमान संसाधन वितरण
(D) समान स्वास्थ्य सेवाएँ
उत्तर: (C) असमान संसाधन वितरण
व्याख्या:
- भारत में विभिन्न राज्यों के बीच निर्धनता की दर में उल्लेखनीय अंतर पाया जाता है।
- इसके मुख्य कारण हैं:
- असमान प्राकृतिक संसाधन वितरण – कुछ राज्यों में खनिज, भूमि और जल संसाधन अधिक हैं, जबकि अन्य में सीमित।
- भौगोलिक और अवसंरचनात्मक विषमता – परिवहन, उद्योग और बाजार की पहुँच में अंतर।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में असमानता – मानव पूँजी का असमान विकास।
- राजनीतिक इच्छाशक्ति और नीतिगत क्रियान्वयन में अंतर।
- उदाहरण के लिए, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में निर्धनता अधिक है, जबकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में यह काफी कम है।
47. ‘मानव निर्धनता’ की अवधारणा किसे संदर्भित करती है?
(A) केवल आय की कमी
(B) शिक्षा, स्वास्थ्य, और जीवन स्तर की कमी
(C) केवल रोजगार की कमी
(D) केवल खाद्य सुरक्षा की कमी
उत्तर: (B) शिक्षा, स्वास्थ्य, और जीवन स्तर की कमी
व्याख्या:
- मानव निर्धनता (Human Poverty) एक ऐसी अवधारणा है जो पारंपरिक निर्धनता की तुलना में अधिक व्यापक और बहुआयामी है।
- यह केवल आय की कमी पर नहीं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता पर केंद्रित है।
- इसमें शामिल हैं:
- शिक्षा की कमी: साक्षरता और कौशल की कमी।
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: जीवन प्रत्याशा और पोषण स्तर का निम्न होना।
- जीवन स्तर की कमी: आवास, स्वच्छता, रोजगार सुरक्षा आदि का अभाव।
- इस दृष्टिकोण को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा मानव विकास प्रतिवेदन (Human Development Report) में प्रमुखता दी गई है।
48. भारत में निर्धनता उन्मूलन के लिए कौन सी योजना 2005 में लागू की गई थी?
(A) प्रधानमंत्री रोजगार योजना
(B) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
(C) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
(D) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना
उत्तर: (C) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA)
व्याख्या:
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) वर्ष 2005 में पारित किया गया और 2 फ़रवरी 2006 से लागू हुआ।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों को 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार उपलब्ध कराना है।
- यह योजना निर्धनता उन्मूलन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, और स्थायी विकास कार्यों को बढ़ावा देने में सहायक है।
- यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक रोजगार गारंटी योजना मानी जाती है।
49. भारत में निर्धनता उन्मूलन एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कौन-सी योजना वर्ष 1993 में प्रारंभ की गई थी?
(A) प्रधानमंत्री रोजगार योजना
(B) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
(C) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
(D) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना
उत्तर: (A) प्रधानमंत्री रोजगार योजना
व्याख्या:
- प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) वर्ष 1993 में प्रारंभ की गई थी।
- इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना था।
- योजना के अंतर्गत युवाओं को कम ब्याज पर ऋण, औद्योगिक प्रशिक्षण, और वित्तीय सहायता दी जाती थी ताकि वे स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें।
- इस योजना का लक्ष्य निर्धनता उन्मूलन और स्वावलंबन को प्रोत्साहन देना था।
50. भारत में निर्धनता उन्मूलन हेतु 1999 में प्रारंभ की गई प्रमुख योजना कौन-सी थी?
(A) प्रधानमंत्री रोजगार योजना
(B) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
(C) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
(D) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना
उत्तर: (B) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
व्याख्या:
- स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) वर्ष 1999 में प्रारंभ की गई थी।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों को स्वसहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) के रूप में संगठित कर उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना था।
- योजना के अंतर्गत निर्धन परिवारों को बैंक ऋण एवं सरकारी अनुदान (Subsidy) का संयोजन उपलब्ध कराया गया।
- इसका लक्ष्य था — ग्रामीण निर्धनता में कमी लाना और सतत आय सृजन के माध्यम से उन्हें निर्धनता रेखा से ऊपर उठाना।
- बाद में इस योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) में समाहित किया गया।
51. भारत में निर्धनता उन्मूलन के लिए कौन सी योजना 2000 में शुरू की गई थी?
(A) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना
(B) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
(C) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
(D) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना
उत्तर: (A) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना
व्याख्या:
- प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY) वर्ष 2000-01 में प्रारंभ की गई थी।
- इसका उद्देश्य था — ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, ताकि समग्र ग्रामीण विकास और निर्धनता उन्मूलन संभव हो सके।
- योजना के अंतर्गत प्रमुख घटक थे:
- प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल
- प्राथमिक शिक्षा
- पेयजल आपूर्ति
- ग्रामीण आवास (इंदिरा आवास योजना के माध्यम से)
- ग्रामीण विद्युतीकरण
- योजना ने ग्रामीण ढांचे को सुदृढ़ बनाकर निर्धन परिवारों के जीवन स्तर में सुधार का मार्ग प्रशस्त किया।
52. भारत में निर्धनता उन्मूलन के लिए कौन-सी योजना 2004 में प्रारंभ की गई थी?
(A) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना
(B) प्रधानमंत्री रोजगार योजना
(C) राष्ट्रीय “काम के बदले अनाज” कार्यक्रम
(D) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना
उत्तर: (C) राष्ट्रीय “काम के बदले अनाज” कार्यक्रम
व्याख्या:
- राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम (National Food for Work Programme) को वर्ष 2004 में प्रारंभ किया गया।
- इसका मुख्य उद्देश्य था — ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन लोगों को अकुशल शारीरिक कार्य के बदले खाद्यान्न (अनाज) प्रदान करना।
- यह योजना देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू की गई थी।
- यह कार्यक्रम बाद में मनरेगा (MGNREGA, 2005) में समाहित कर दिया गया।
- इससे ग्रामीण रोजगार सृजन और खाद्य सुरक्षा – दोनों लक्ष्यों को एक साथ साधा गया।
53. भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण किस आधार पर किया जाता है?
(A) औसत आय
(B) उपभोग व्यय सर्वेक्षण
(C) सकल घरेलू उत्पाद
(D) शिक्षा स्तर
उत्तर: (B) उपभोग व्यय सर्वेक्षण
व्याख्या:
- भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Consumption Expenditure Survey) के आधार पर किया जाता है।
- यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किया जाता है।
- इसमें परिवारों द्वारा खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं पर किए गए व्यय का अध्ययन किया जाता है।
- इन आँकड़ों के आधार पर यह तय किया जाता है कि किस स्तर की आय या उपभोग पर व्यक्ति को निर्धन माना जाएगा।
54. 1993-94 से 2004-05 के बीच ग्रामीण भारत में निर्धनता अनुपात में गिरावट क्यों आई, फिर भी निर्धनों की संख्या लगभग 40.7 करोड़ क्यों बनी रही?
(A) गरीबी रेखा बढ़ गई थी
(B) जनसंख्या वृद्धि के कारण
(C) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घटे
(D) कृषि उत्पादन कम हुआ
उत्तर: (B) जनसंख्या वृद्धि के कारण
व्याख्या:
- 1993-94 में ग्रामीण निर्धनता लगभग 50% थी, जो 2004-05 में घटकर 42% रह गई।
- हालांकि प्रतिशत में गिरावट आई, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के कारण निर्धनों की कुल संख्या लगभग 40.7 करोड़ बनी रही।
- यह दर्शाता है कि जब जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, तो निर्धनता दर (प्रतिशत) घटने पर भी निर्धनों की कुल संख्या स्थिर रह सकती है।
- इसलिए, जनसंख्या नियंत्रण निर्धनता उन्मूलन के लिए एक प्रमुख आवश्यकता है।
55. 2011-12 में भारत के शहरी क्षेत्रों में निर्धनता अनुपात कितना था?
(A) 14%
(B) 21%
(C) 26%
(D) 32%
उत्तर: (A) 14%
व्याख्या:
योजना आयोग के अनुसार, 2011-12 में शहरी निर्धनता अनुपात 14% था, जो 1993-94 के 32% से काफी कम हुआ।
यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में निर्धनता में गिरावट की गति ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेज रही, जिसका मुख्य कारण बेहतर रोजगार अवसर, शिक्षा, और बुनियादी सुविधाएँ थीं।
56. अनुसूचित जनजातियों में 2011-12 में निर्धनता रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत कितना था?
(A) 22%
(B) 29%
(C) 34%
(D) 43%
उत्तर: (D) 43%
व्याख्या:
2011-12 के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों का लगभग 43% हिस्सा निर्धनता रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा था।
यह दर्शाता है कि अनुसूचित जनजातियाँ अब भी भारत के सबसे निर्धन और असुरक्षित सामाजिक समूहों में से एक हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में पिछड़ी हुई हैं।
57. भारत में कौन सा समूह शहरी क्षेत्रों में निर्धनता के लिए सबसे अधिक असुरक्षित माना जाता है?
(A) शहरी मध्यम वर्ग
(B) अनियत गैर-कृषि श्रमिक
(C) अनुसूचित जाति
(D) व्यापारी वर्ग
उत्तर: (B) अनियत गैर-कृषि श्रमिक
व्याख्या:
शहरी क्षेत्रों में अनियत गैर-कृषि श्रमिक निर्धनता के प्रति सबसे अधिक असुरक्षित समूह हैं।
2011-12 के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ग के लगभग 34% लोग निर्धनता रेखा के नीचे जीवनयापन करते हैं।
इन लोगों को नियमित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पर्याप्त आय के अवसर नहीं मिलते, जिससे ये समूह आर्थिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाता है।
58. ग्रामीण कृषि श्रमिकों की निर्धनता रेखा के नीचे रहने की दर कितनी है?
(A) 22%
(B) 29%
(C) 34%
(D) 43%
उत्तर: (C) 34%
व्याख्या:
2011–12 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण कृषि श्रमिकों में लगभग 34% लोग निर्धनता रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे थे।
ये श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत होते हैं, जिनकी आय अनिश्चित और अत्यंत कम होती है।
इस कारण वे ग्रामीण निर्धनता के सबसे अधिक प्रभावित वर्गों में से एक हैं।
59. अनुसूचित जातियों में निर्धनता रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का अनुपात कितना था (2011–12 के अनुसार)?
(A) 22%
(B) 29%
(C) 34%
(D) 43%
उत्तर: (B) 29%
व्याख्या:
2011–12 के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जातियों का लगभग 29% जनसंख्या निर्धनता रेखा के नीचे जीवनयापन कर रही थी।
यह दर्शाता है कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को आर्थिक अवसरों और संसाधनों तक समान पहुंच अब भी नहीं मिली है।
इसलिए अनुसूचित जातियाँ निर्धनता से सबसे अधिक प्रभावित समूहों में से एक हैं।
60. 2011–12 में भारत में कुल औसत निर्धनता अनुपात कितना था?
(A) 14%
(B) 22%
(C) 30%
(D) 37%
उत्तर: (B) 22%
व्याख्या:
राष्ट्रीय स्तर पर 2011–12 में कुल निर्धनता अनुपात 22% था।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह लगभग 25% और शहरी क्षेत्रों में 14% था।
यह आँकड़ा दर्शाता है कि 1993–94 के 45% निर्धनता स्तर की तुलना में भारत ने गरीबी में उल्लेखनीय कमी हासिल की है।
61. 1993–94 से 2011–12 तक निर्धनता में गिरावट की गति ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कैसी रही?
(A) समान रही
(B) शहरी क्षेत्रों में तेज रही
(C) ग्रामीण क्षेत्रों में तेज रही
(D) दोनों में असमानता रही
उत्तर: (B) शहरी क्षेत्रों में तेज रही
व्याख्या:
1993–94 में शहरी निर्धनता अनुपात 32% था, जो 2011–12 में घटकर 14% रह गया।
वहीं, ग्रामीण निर्धनता अनुपात 50% से घटकर 26% हुआ।
अतः स्पष्ट है कि शहरी क्षेत्रों में निर्धनता घटने की गति ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक रही।
62. भारत में निर्धनता में असमानता के मुख्य कारण कौन से हैं?
(A) केवल आर्थिक असमानता
(B) सामाजिक और आर्थिक दोनों असमानता
(C) केवल शिक्षा की कमी
(D) केवल भूमि की कमी
उत्तर: (B) सामाजिक और आर्थिक दोनों असमानता
व्याख्या:
भारत में निर्धनता केवल आर्थिक कारणों का परिणाम नहीं है, बल्कि सामाजिक भेदभाव और अवसरों की असमानता भी प्रमुख कारण हैं।
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अनियमित श्रमिक वर्ग निर्धनता से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
- इन समूहों के पास शिक्षा, रोजगार, भूमि और सामाजिक अवसरों की कमी है।
इस प्रकार निर्धनता सामाजिक तथा आर्थिक दोनों असमानताओं का संयुक्त परिणाम है।
63. भारत में सबसे असुरक्षित समूह कौन से हैं?
(A) मध्यम वर्ग
(B) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
(C) व्यापारी वर्ग
(D) शिक्षित बेरोजगार
उत्तर: (B) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
व्याख्या:
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) सबसे अधिक निर्धनता के शिकार समूह हैं।
- ये समूह ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव और आर्थिक वंचना से प्रभावित रहे हैं।
- 2011-12 के आँकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों में लगभग 43% और अनुसूचित जातियों में लगभग 29% लोग निर्धनता रेखा के नीचे थे।
- इनकी शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच सीमित है, जिससे ये सबसे असुरक्षित वर्गों में गिने जाते हैं।
64. निर्धनता रेखा का निर्धारण किस आधार पर किया जाता है?
(A) केवल आय के आधार पर
(B) मूल आवश्यकताओं और आय के संयोजन पर
(C) केवल भोजन पर
(D) केवल शिक्षा और स्वास्थ्य पर
उत्तर: (B) मूल आवश्यकताओं और आय के संयोजन पर
व्याख्या:
निर्धनता रेखा का निर्धारण करते समय व्यक्ति या परिवार की मूल आवश्यकताओं जैसे —
- भोजन,
- वस्त्र,
- आवास,
- ईंधन,
- शिक्षा और स्वास्थ्य —
इन सभी की न्यूनतम लागत को ध्यान में रखा जाता है।
इन वस्तुओं और सेवाओं की कुल मौद्रिक लागत के आधार पर निर्धनता रेखा (Poverty Line) तय की जाती है।
65. भारत में 2011-12 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिव्यक्ति निर्धनता रेखा कितनी थी?
(A) 816 रुपये प्रति माह
(B) 1000 रुपये प्रति माह
(C) 4080 रुपये प्रति माह
(D) 5000 रुपये प्रति माह
उत्तर: (A) 816 रुपये प्रति माह
व्याख्या:
- एन.एस.एस.ओ. (NSO) के उपभोग व्यय सर्वेक्षण और खाद्य कैलोरी आवश्यकताओं के आधार पर, ग्रामीण क्षेत्रों में 2011-12 में प्रतिव्यक्ति निर्धनता रेखा 816 रुपये प्रति माह तय की गई थी।
- यह राशि उस न्यूनतम आय का प्रतिनिधित्व करती है जो व्यक्ति को आवश्यक भोजन, वस्त्र, आवास और अन्य मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए चाहिए।
66. शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में उच्च निर्धनता रेखा क्यों निर्धारित की गई?
(A) शहरी लोगों को अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है
(B) शहरी क्षेत्रों में वस्तुओं की कीमतें अधिक होती हैं
(C) शहरी लोगों के पास अधिक संपत्ति होती है
(D) शहरी क्षेत्रों में रोजगार की कमी है
उत्तर: (B) शहरी क्षेत्रों में वस्तुओं की कीमतें अधिक होती हैं
व्याख्या:
- ग्रामीण क्षेत्रों में कैलोरी की आवश्यकताएँ अधिक होती हैं, लेकिन जीवनयापन की कुल लागत कम होती है।
- शहरी क्षेत्रों में भोजन, आवास, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें अधिक होती हैं।
- इसलिए शहरी क्षेत्रों में उच्च निर्धनता रेखा निर्धारित की जाती है ताकि न्यूनतम जीवन स्तर बनाए रखा जा सके।
67. पांच सदस्यों वाले ग्रामीण परिवार के लिए 2011-12 में निर्धनता रेखा कितनी थी?
(A) 4080 रुपये प्रति माह
(B) 5000 रुपये प्रति माह
(C) 816 रुपये प्रति माह
(D) 1000 रुपये प्रति माह
उत्तर: (A) 4080 रुपये प्रति माह
व्याख्या:
- प्रतिव्यक्ति निर्धनता रेखा (Per Capita Poverty Line) = 816 रुपये प्रति माह
- पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए = 816 × 5 = 4080 रुपये प्रति माह
- इसका अर्थ है कि इस परिवार को आवश्यक भोजन, वस्त्र, आवास और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कम से कम 4080 रुपये प्रति माह की आय होनी चाहिए।
68. भारत में कैलोरी आवश्यकता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कितनी निर्धारित की गई है?
(A) ग्रामीण: 2100, शहरी: 2400
(B) ग्रामीण: 2400, शहरी: 2100
(C) ग्रामीण और शहरी दोनों: 2400
(D) ग्रामीण और शहरी दोनों: 2100
उत्तर: (B) ग्रामीण: 2400, शहरी: 2100
व्याख्या:
- ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अधिक शारीरिक श्रम करते हैं, इसलिए उन्हें प्रतिदिन 2400 कैलोरी की आवश्यकता होती है।
- शहरी क्षेत्रों में शारीरिक श्रम कम होता है, इसलिए वहां प्रतिदिन 2100 कैलोरी निर्धारित की गई है।
- यह कैलोरी आवश्यकताएँ निर्धनता रेखा और उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आधार पर तय की जाती हैं।
69. विभिन्न देशों में निर्धनता रेखाएँ अलग-अलग क्यों होती हैं?
(A) सभी देशों में वस्तुओं की कीमतें समान नहीं हैं
(B) न्यूनतम आवश्यकताओं और सामाजिक मानदंड में अंतर के कारण
(C) आयु और लिंग में अंतर के कारण
(D) केवल आर्थिक विकास दर के कारण
उत्तर: (B) न्यूनतम आवश्यकताओं और सामाजिक मानदंड में अंतर के कारण
व्याख्या:
- प्रत्येक देश में मूल आवश्यकताएँ और सामाजिक मानदंड अलग होते हैं।
- उदाहरण के लिए, अमेरिका में कार होना आवश्यक माना जा सकता है, जबकि भारत में यह आवश्यक नहीं है।
- इस कारण से निर्धनता रेखा समय और स्थान के अनुसार भिन्न होती है, और इसे उसी देश के जीवन स्तर और सामाजिक मानदंड के अनुसार तय किया जाता है।
70. भारत में निर्धनता रेखा का आकलन कितने वर्षों में किया जाता है?
(A) हर साल
(B) हर दो वर्ष
(C) हर पांच वर्ष
(D) हर दस वर्ष
उत्तर: (C) हर पांच वर्ष
व्याख्या:
- भारत में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSSO) के माध्यम से परिवारों के उपभोग व्यय और जीवन स्तर का आंकलन किया जाता है।
- इसके आधार पर लगभग हर पांच वर्ष में निर्धनता रेखा का आकलन और अद्यतन किया जाता है।
- यह प्रक्रिया देश में गरीबी और आर्थिक असमानता की स्थिति का सटीक चित्र प्रदान करती है।
71. 2011-12 में शहरी क्षेत्रों में पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए निर्धनता रेखा कितनी थी?
(A) 4080 रुपये प्रति माह
(B) 5000 रुपये प्रति माह
(C) 1000 रुपये प्रति माह
(D) 1320 रुपये प्रति माह
उत्तर: (B) 5000 रुपये प्रति माह
व्याख्या:
- शहरी क्षेत्रों में प्रतिव्यक्ति निर्धनता रेखा 1000 रुपये प्रति माह निर्धारित की गई थी।
- पाँच सदस्यों वाले परिवार के लिए इसे 1000 × 5 = 5000 रुपये प्रति माह माना गया।
- यह राशि परिवार को आवश्यक भोजन, वस्त्र, आवास और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आय का प्रतिनिधित्व करती है।
72. विश्व बैंक द्वारा निर्धनता के लिए प्रयोग किया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय मानक क्या है?
(A) $1.9 प्रतिव्यक्ति/दिन (2011 PPP)
(B) $2.5 प्रतिव्यक्ति/दिन (2011 PPP)
(C) $1 प्रतिव्यक्ति/दिन (2011 PPP)
(D) $5 प्रतिव्यक्ति/दिन (2011 PPP)
उत्तर: (A) $1.9 प्रतिव्यक्ति/दिन (2011 PPP)
व्याख्या:
- विश्व बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धनता की तुलना के लिए $1.9 प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन (2011 PPP) का मानक अपनाता है।
- यह मानक सिर्फ आय पर आधारित है और इसे विकासशील देशों में अत्यधिक गरीबी की पहचान के लिए प्रयोग किया जाता है।
73. 2004-05 से 2011-12 तक भारत में निर्धनता रेखा से नीचे लोगों की संख्या में औसत वार्षिक गिरावट कितनी हुई?
(A) 1.5%
(B) 2.2%
(C) 3%
(D) 4%
उत्तर: (B) 2.2%
व्याख्या:
- वर्ष 2004-05 में निर्धनता रेखा से नीचे लोगों की संख्या 407 मिलियन थी।
- वर्ष 2011-12 में यह घटकर लगभग 270 मिलियन रह गई।
- इस अवधि (2004-05 से 2011-12) में औसत वार्षिक गिरावट लगभग 2.2% रही।
- यह दर्शाता है कि इस अवधि में प्रतिशत निर्धनता में गिरावट के साथ-साथ वास्तविक संख्या में भी महत्वपूर्ण कमी आई।
- नए आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभाव से यह गिरावट और तेज हो सकती है।
74. 2011 जनगणना के अनुसार, भारत में किन तीन राज्यों में निर्धनता अनुपात सबसे अधिक था?
(A) तमिलनाडु, दिल्ली, आंध्र प्रदेश
(B) बिहार, ओडिशा, असम
(C) राजस्थान, महाराष्ट्र, त्रिपुरा
(D) उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश
उत्तर: (B) बिहार, ओडिशा, असम
व्याख्या:
- 2011 की एन.एस.एस.ओ. उपभोग व्यय सर्वेक्षण और राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार, सबसे अधिक निर्धनता अनुपात वाले राज्य थे:
- बिहार: लगभग 40%
- ओडिशा: लगभग 33.7%
- असम: लगभग 32.6%
- ये राज्य आर्थिक रूप से पिछड़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आबादी निर्भर है।
- सामाजिक और भौगोलिक असमानताएँ इन राज्यों में निर्धनता के उच्च स्तर का प्रमुख कारण हैं।
74. 2011 जनगणना के अनुसार, भारत में किन तीन राज्यों में निर्धनता अनुपात सबसे कम था?
(A) दिल्ली, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
(B) बिहार, ओडिशा, असम
(C) मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
(D) त्रिपुरा, राजस्थान, महाराष्ट्र
उत्तर: (A) दिल्ली, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
व्याख्या:
- 2011 की एन.एस.एस.ओ. सर्वेक्षण और जनगणना के अनुसार, सबसे कम निर्धनता अनुपात वाले क्षेत्र थे:
- दिल्ली: लगभग 8.1%
- तमिलनाडु: लगभग 8.3%
- आंध्र प्रदेश: लगभग 9.2%
- ये राज्य आर्थिक दृष्टि से अधिक विकसित हैं, शहरीकरण का स्तर उच्च है और सामाजिक-आर्थिक आधार बेहतर है।
- इसलिए, इन क्षेत्रों में निर्धनता अनुपात कम देखा गया।
75. 2017 से 2019 तक सब-सहारा अफ्रीका में निर्धनता अनुपात में क्या परिवर्तन हुआ?
(A) 36.6% से घटकर 35.4%
(B) 35.4% से बढ़कर 36.6%
(C) कोई परिवर्तन नहीं हुआ
(D) घटकर 30%
उत्तर: (A) 36.6% से घटकर 35.4%
व्याख्या:
- विश्व बैंक (World Bank) की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में सब-सहारा अफ्रीका में निर्धनता अनुपात लगभग 36.6% था।
- 2019 तक यह अनुपात घटकर 35.4% रह गया।
- यह हल्की गिरावट मुख्यतः क्षेत्रीय आर्थिक सुधारों, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों, और अंतरराष्ट्रीय सहायता के प्रभाव के कारण हुई।
- हालांकि, यह गिरावट बहुत अधिक नहीं थी, जो दर्शाता है कि क्षेत्र में गरीबी अभी भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
76. 2017-2021 में लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में निर्धनता अनुपात में क्या परिवर्तन हुआ?
(A) 4.4% से घटकर 4.2%
(B) 4.4% से बढ़कर 4.6%
(C) स्थिर 4.4%
(D) 5% तक बढ़ गया
सही उत्तर: (B) 4.4% से बढ़कर 4.6%
व्याख्या:
- विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2017 में इस क्षेत्र में निर्धनता अनुपात लगभग 4.4% था।
- 2021 तक यह अनुपात बढ़कर 4.6% हो गया।
- इस मामूली वृद्धि का कारण आर्थिक असमानता, स्थानीय मंदी, और COVID-19 महामारी जैसी घटनाएँ हो सकती हैं।
- हालांकि वृद्धि छोटी थी, यह संकेत देती है कि लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में गरीबी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और सामाजिक-आर्थिक सुधारों की आवश्यकता बनी हुई है।
77. 2021 के अनुसार, भारत में $2.15 प्रतिदिन से कम कमाने वाले लोगों का प्रतिशत कितना था?
(A) 9.6%
(B) 11.9%
(C) 4.9%
(D) 5.8%
उत्तर: (B) 11.9%
व्याख्या:
- यह आंकड़ा विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय निर्धनता मानक ($2.15 प्रतिव्यक्ति/दिन, 2017 PPP) के आधार पर है।
- 2021 में भारत की कुल आबादी का लगभग 11.9% $2.15 प्रतिदिन से कम कमाता था।
- यह दर्शाता है कि आर्थिक संवृद्धि के बावजूद, भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लोग अंतरराष्ट्रीय निर्धनता रेखा से नीचे हैं।
- वैश्विक तुलना में, यह प्रतिशत दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समान है, लेकिन भारत में सामाजिक कल्याण योजनाओं और रोजगार योजनाओं के प्रभाव से यह अनुपात धीरे-धीरे घट रहा है।
78. 2020 में चीन में $2.15 प्रतिदिन से कम कमाने वालों का अनुपात कितना था?
(A) 0.1%
(B) 1%
(C) 5%
(D) 10%
उत्तर: (A) 0.1%
व्याख्या:
चीन ने पिछले दो दशकों में निर्धनता उन्मूलन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।
2020 तक, विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, केवल 0.1% जनसंख्या ही $2.15 प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन (2017 PPP) की अंतरराष्ट्रीय निर्धनता रेखा से नीचे थी।
यह सफलता तेज़ आर्थिक विकास, ग्रामीण विकास कार्यक्रमों, और लक्षित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के कारण संभव हुई।
इससे चीन को “चरम निर्धनता समाप्त करने वाला देश” घोषित किया गया।
79. निम्नलिखित में से कौन सा देश 2021 में $2.15 प्रतिदिन से कम कमाने वालों की संख्या के मामले में भारत के बाद आता है?
(A) पाकिस्तान
(B) नाइजीरिया
(C) ब्राज़ील
(D) इंडोनेशिया
उत्तर: (B) नाइजीरिया
व्याख्या:
विश्व बैंक की “Poverty and Inequality Platform (2023)” के अनुसार,
2021 में भारत में लगभग 11.9% लोग $2.15 प्रतिदिन से कम आय पर जीवित थे,
जबकि नाइजीरिया में यह अनुपात लगभग 30.9% था।
नाइजीरिया में निर्धनता की दर अधिक है, पर जनसंख्या कम होने के कारण भारत के बाद इसका स्थान आता है।
यह स्थिति आर्थिक असमानता, बेरोज़गारी और तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था की अस्थिरता से जुड़ी है।
80. निम्नलिखित में से कौन-सा देश 2022 में $2.15 प्रतिदिन से कम कमाने वालों के मामले में सबसे कम निर्धनता वाला था?
(A) श्रीलंका
(B) पाकिस्तान
(C) ब्राज़ील
(D) चीन
उत्तर: (D) चीन
व्याख्या:
2022 में चीन में केवल 0.1% लोग $2.15 प्रति व्यक्ति प्रति दिन से कम आय पर जीवन यापन कर रहे थे,
जो सभी देशों में सबसे कम है।
यह चीन की तीव्र आर्थिक प्रगति और निर्धनता उन्मूलन नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
81. अंतरराष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्य 2030 का प्रमुख उद्देश्य निर्धनता के संदर्भ में क्या है?
(A) निर्धनता में 50% कमी
(B) सभी प्रकार की गरीबी समाप्त करना
(C) केवल ग्रामीण निर्धनता कम करना
(D) केवल बच्चों की गरीबी समाप्त करना
उत्तर: (B) सभी प्रकार की गरीबी समाप्त करना
व्याख्या:
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-2030) के लक्ष्य 1 का उद्देश्य विश्व से सभी प्रकार की गरीबी समाप्त करना है — चाहे वह ग्रामीण हो, शहरी, लिंग, आयु या सामाजिक आधार पर।
यह वैश्विक स्तर पर निर्धनता उन्मूलन के लिए सबसे व्यापक लक्ष्य है।
82. भारत में किस वर्ष निर्धनता अनुपात 22% तक गिरा?
(A) 1993-94
(B) 2004-05
(C) 2009-10
(D) 2011-12
उत्तर: (D) 2011-12
व्याख्या:
2011-12 में भारत में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत 22% था।
यह 1993-94 के 45% और 2004-05 के 37% से काफी कम है, जो यह दर्शाता है कि इस अवधि में निर्धनता में उल्लेखनीय कमी आई।
83. 2005 से 2019 तक $1.90 प्रतिदिन पर जीवनयापन करने वाले लोगों की संख्या में दक्षिण एशिया में क्या प्रवृत्ति रही?
(A) घटती रही
(B) बढ़ती रही
(C) स्थिर रही
(D) पहले बढ़ी फिर घट गई
उत्तर: (A) घटती रही
व्याख्या:
दक्षिण एशिया में $1.90 प्रतिदिन से कम आय वाले लोगों का अनुपात लगातार घटा है।
यह गिरावट तेजी से हो रहे आर्थिक विकास, सरकारी योजनाओं और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के कारण हुई।
84. 2005 से 2019 तक सब-सहारा अफ्रीका में $1.90 प्रतिदिन पर जीवनयापन करने वाले लोगों का अनुपात कैसा रहा?
(A) लगभग स्थिर और उच्च
(B) तेजी से घटा
(C) बहुत कम और स्थिर
(D) घटा और फिर बढ़ा
उत्तर: (A) लगभग स्थिर और उच्च
व्याख्या:
सब-सहारा अफ्रीका में निर्धनता का अनुपात लगभग 35%–36% के आसपास स्थिर बना रहा।
जबकि दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में निर्धनता में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
यह दर्शाता है कि सब-सहारा अफ्रीका में आर्थिक विकास की गति धीमी रही और गरीबी उन्मूलन की चुनौतियाँ अभी भी गंभीर हैं।
85. 2030 तक सबसे अधिक अति गरीब लोगों का अनुमान किस क्षेत्र में है?
(A) दक्षिण एशिया
(B) सब-सहारा अफ्रीका
(C) पूर्व एशिया एवं प्रशांत
(D) लैटिन अमेरिका और कैरीबियन
उत्तर: (B) सब-सहारा अफ्रीका
व्याख्या:
2030 तक विश्व के लगभग 90% अति गरीब लोग (10 में से 9 व्यक्ति)
सब-सहारा अफ्रीका क्षेत्र में रहने की संभावना है।
इसका कारण वहाँ की कम आर्थिक वृद्धि दर, राजनीतिक अस्थिरता,
और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार के सीमित अवसर हैं।
दक्षिण एशिया में निर्धनता में तेजी से कमी आई है, जबकि
सब-सहारा अफ्रीका निर्धनता का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
86. 2019 तक चीन में $1.90 प्रतिदिन पर जीवनयापन करने वाले लोगों का प्रतिशत कितना था?
(A) लगभग 0%
(B) 10%
(C) 25%
(D) 35%
उत्तर: (A) लगभग 0%
व्याख्या:
चीन में 2019 तक अति गरीबों की संख्या नगण्य थी।
इसके प्रमुख कारण हैं:
- सरकार की व्यापक गरीबी उन्मूलन नीतियाँ
- तेज़ आर्थिक संवृद्धि
- सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभाव
इससे चीन ने अति गरीबों की संख्या में लगभग शून्य तक कमी हासिल की।
87. 2005 से 2019 तक लेटिन अमेरिका और कैरीबियन में $1.90 प्रतिदिन पर जीवनयापन करने वालों की प्रवृत्ति कैसी रही?
(A) बढ़ती रही
(B) घटती रही
(C) स्थिर रही
(D) पहले बढ़ी फिर घट गई
उत्तर: (B) घटती रही
व्याख्या:
लेटिन अमेरिका और कैरीबियन में $1.90 प्रतिदिन से कम जीवनयापन करने वालों का प्रतिशत धीरे-धीरे कम हुआ।
इसका कारण है:
- क्षेत्रीय आर्थिक सुधार
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन
- गरीबी उन्मूलन के लिए सामाजिक कार्यक्रमों का प्रभाव
इससे क्षेत्र में निर्धनता में स्थिर लेकिन धीमी गिरावट देखने को मिली।
88. 2019 में सबसे अधिक अति गरीब लोगों की संख्या किस क्षेत्र में थी?
(A) दक्षिण एशिया
(B) सब-सहारा अफ्रीका
(C) पूर्व एशिया एवं प्रशांत
(D) लैटिन अमेरिका एवं कैरीबियन
उत्तर: (B) सब-सहारा अफ्रीका
व्याख्या:
2019 में सब-सहारा अफ्रीका में अति गरीब लोगों का अनुपात और संख्या सबसे अधिक थी। इसका कारण सीमित आर्थिक विकास, उच्च बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, और सामाजिक असमानताएँ हैं। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 40–50 मिलियन लोग $1.90/दिन से कम आय पर जीवन यापन कर रहे थे। यह आंकड़ा दक्षिण एशिया की तुलना में अधिक है, जहाँ गरीबी में लगातार गिरावट देखी गई।
89. 2005-2019 के बीच पूर्व एशिया एवं प्रशांत में $1.90 प्रतिदिन पर जीवनयापन करने वालों की प्रवृत्ति कैसी रही?
(A) तेजी से घटी
(B) स्थिर रही
(C) बढ़ी
(D) पहले बढ़ी फिर घटी
उत्तर: (A) तेजी से घटी
व्याख्या:
पूर्व एशिया एवं प्रशांत में 2005-2019 के बीच $1.90 प्रतिदिन से कम कमाने वालों का प्रतिशत तेजी से घटा। इसका मुख्य कारण तेज़ आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं का प्रभाव, और शिक्षा व स्वास्थ्य में सुधार है। विशेष रूप से चीन और अन्य विकसित एशियाई देशों में अति गरीबों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई। यह गिरावट दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीका की तुलना में अधिक स्थायी और तीव्र रही।
90. 2015 से 2030 तक अति गरीबों की संख्या का पूर्वानुमान किस आधार पर है?
(A) केवल आर्थिक संवृद्धि दर
(B) पिछले ट्रेंड और आर्थिक-सामाजिक मॉडल
(C) केवल सरकारी योजनाएँ
(D) केवल जनसंख्या वृद्धि
उत्तर: (B) पिछले ट्रेंड और आर्थिक-सामाजिक मॉडल
व्याख्या:
2015 से 2030 तक अति गरीबों की संख्या का पूर्वानुमान पूर्व के डेटा और आर्थिक-सामाजिक मॉडल पर आधारित है। इसमें पिछले निर्धनता रुझान, आर्थिक संवृद्धि दर, जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक कल्याण योजनाओं और क्षेत्रीय असमानताओं को ध्यान में रखा जाता है। यह मॉडल भविष्य में अति गरीबों की संख्या और वितरण का अनुमान लगाने में मदद करता है और नीति निर्धारण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
91. भारत में अंतर-राज्यीय निर्धनता के उदाहरण में किन राज्यों में उच्च निर्धनता अनुपात है?
(A) केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश
((B) मध्य प्रदेश, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा
(C) पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु
(D) पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु
उत्तर: (B) मध्य प्रदेश, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा
व्याख्या:
भारत में अंतर-राज्यीय निर्धनता असमानताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
2011-12 के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में निर्धनता अनुपात राष्ट्रीय औसत (22%) से अधिक पाया गया।
इन राज्यों में गरीबी अधिक होने के प्रमुख कारण हैं —
- आर्थिक विकास की धीमी दर
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और कम उत्पादकता
- औद्योगिकीकरण का अभाव
- शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की कमी
- सामाजिक असमानताएँ और क्षेत्रीय पिछड़ापन
ये राज्य मुख्यतः ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ निर्धनता की समस्या अधिक गहराई से विद्यमान है।
92. भारत में किस राज्य ने मानव संसाधन विकास पर अधिक ध्यान देकर निर्धनता कम की है?
(A) केरल
(B) उत्तर प्रदेश
(C) बिहार
(D) ओडिशा
उत्तर: (A) केरल
व्याख्या:
केरल ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय पर निरंतर निवेश करके निर्धनता को उल्लेखनीय रूप से कम किया है।
इस राज्य ने “मानव संसाधन विकास मॉडल” को अपनाया, जिसमें—
- सर्वजन साक्षरता,
- सुलभ व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ,
- लिंग समानता और
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर विशेष बल दिया गया।
इन पहलों के परिणामस्वरूप केरल में मानव विकास सूचकांक (HDI) सबसे अधिक है और निर्धनता दर देश में सबसे कम रही है।
93. वैश्विक स्तर पर $2.15 प्रतिदिन से कम जीवन यापन करने वाले लोगों का प्रतिशत 2010 से 2019 तक कैसे बदल गया?
(A) बढ़ा
(B) घटा
(C) स्थिर रहा
(D) पहले बढ़ा फिर घटा
उत्तर: (B) घटा
व्याख्या:
2010 से 2019 के बीच वैश्विक निर्धनता में उल्लेखनीय कमी आई।
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अति गरीब आबादी 16.27% से घटकर 9.05% रह गई।यह गिरावट मुख्यतः —
- विकासशील देशों में तेजी से आर्थिक संवृद्धि,
- शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार,
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार,
- तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत वैश्विक प्रयासों के कारण हुई।
फिर भी, कुछ क्षेत्रों — जैसे सब-सहारा अफ्रीका — में गरीबी की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
94. चीन में 2020 तक $2.15 प्रतिदिन से कम जीवन यापन करने वाले लोगों का प्रतिशत कितना था?
(A) 2.1%
(B) 1.2%
(C) 0.1%
(D) 10%
उत्तर: (C) 0.1%
व्याख्या:
विश्व बैंक के अनुसार, चीन में 2020 तक केवल 0.1% आबादी $2.15 प्रतिदिन से कम आय पर जीवन यापन कर रही थी।
यह उपलब्धि चीन की तेजी से औद्योगिक वृद्धि, ग्रामीण विकास योजनाओं, और सरकारी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों (जैसे Targeted Poverty Alleviation Programme) का परिणाम है।2020 में चीन ने आधिकारिक रूप से “पूर्ण निर्धनता उन्मूलन” (Eradication of Extreme Poverty) की घोषणा की, जो वैश्विक स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती है।
95. 2017 से 2021 तक दक्षिण एशिया में निर्धनता अनुपात किस तरह घटा?
(A) 12.8% से 10.9%
(B) 16.27% से 9.05%
(C) 35% से 30%
(D) 2.1% से 0.1%
उत्तर: (A) 12.8% से 10.9%
व्याख्या:
दक्षिण एशियाई देशों में आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक विकास कार्यक्रमों से निर्धनता घटकर 12.8% से 10.9% हुई।
96. निर्धनों की संख्या में 2017 से 2021 तक दक्षिण एशिया में कमी कितनी हुई?
(A) 233 मिलियन से 207 मिलियन
(B) 300 मिलियन से 250 मिलियन
(C) 100 मिलियन से 50 मिलियन
(D) 400 मिलियन से 350 मिलियन
उत्तर: (A) 233 मिलियन से 207 मिलियन
व्याख्या:
विश्व बैंक की रिपोर्ट और पाठ के अनुसार, दक्षिण एशिया में निर्धनों की संख्या 2017 में 233 मिलियन से घटकर 2021 में 207 मिलियन रह गई।
इस गिरावट का श्रेय निम्न कारणों को दिया जाता है —
- निरंतर आर्थिक संवृद्धि,
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार,
- ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों का प्रभाव, और
- शिक्षा व स्वास्थ्य में सुधार।
यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण एशिया ने 2010 के बाद गरीबी उन्मूलन में ठोस प्रगति की, हालांकि COVID-19 महामारी के कारण कुछ देशों में यह गिरावट थोड़ी धीमी भी पड़ी।
- इन MCQs को हल करके आप निर्धनता और उससे जुड़े सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को बेहतर समझ पाएंगे।
- यह अभ्यास कक्षा 9 अर्थशास्त्र और प्रतियोगी परीक्षाओं दोनों के लिए उपयोगी है।
- याद रखें: अच्छा अभ्यास ही सफलता की कुंजी है!
कक्षा 9 अर्थशास्त्र MCQs [Link]
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