कक्षा 9 अर्थशास्त्र – अध्याय 2: संसाधन के रूप में लोग (People as Resource) MCQs
अध्याय “संसाधन के रूप में लोग” यह समझाता है कि जनसंख्या केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि देश की एक महत्वपूर्ण उत्पादक शक्ति है। सही शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण मिलने पर लोग आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
इसमें हम जनसंख्या की गुणवत्ता, शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्व, बेरोजगारी और मानव पूँजी निर्माण जैसी अवधारणाओं को समझते हैं।
यह अध्याय कक्षा 9 की परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, Banking) के लिए भी महत्वपूर्ण है। नीचे प्रस्तुत MCQs उत्तर और व्याख्या सहित आपको अध्याय की तैयारी और परीक्षा में सफलता दोनों में मदद करेंगे।
प्रश्न 1.
“संसाधन के रूप में लोग” अध्याय मुख्यतः किस पर केंद्रित है?
(a) केवल कृषि उत्पादन पर
(b) केवल औद्योगिक उत्पादन पर
(c) जनसंख्या को उत्पादक संसाधन के रूप में देखने पर
(d) केवल प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर
उत्तर – (c) जनसंख्या को उत्पादक संसाधन के रूप में देखने पर
व्याख्या:
इस अध्याय का प्रमुख उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि जनसंख्या मात्र बोझ नहीं है, बल्कि यदि उसे उचित शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त हों, तो वही जनसंख्या एक उत्पादक एवं मूल्यवान संसाधन में परिवर्तित हो सकती है। यही दृष्टिकोण मानव संसाधन (Human Resource) की अवधारणा को समझाता है।
प्रश्न 2.
मानव पूँजी (Human Capital) से क्या अभिप्राय है?
(a) केवल धन का संग्रह
(b) शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश
(c) प्राकृतिक संसाधनों का संचय
(d) कृषि योग्य भूमि का विस्तार
उत्तर – (b) शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश
व्याख्या:
मानव पूँजी से तात्पर्य है कि जब किसी देश में शिक्षा, कौशल विकास (training) और स्वास्थ्य पर निवेश किया जाता है, तो लोग अधिक उत्पादक और कुशल बनते हैं।
यह निवेश केवल व्यक्तिगत विकास ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति में योगदान करता है। इसलिए मानव पूँजी को किसी भी राष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है।
प्रश्न 3.
‘सकल राष्ट्रीय उत्पादन’ (Gross National Product) से क्या आशय है?
(a) केवल कृषि उत्पादन का योग
(b) केवल उद्योग और सेवा क्षेत्र का योग
(c) किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य
(d) केवल निर्यात का मूल्य
उत्तर – (c) किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य
व्याख्या:
सकल राष्ट्रीय उत्पादन (GNP) एक महत्वपूर्ण आर्थिक मापदंड है। यह दर्शाता है कि किसी देश के नागरिकों द्वारा, देश के भीतर और विदेश में, एक निश्चित वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य कितना है।
इस आँकड़े का उपयोग किसी देश की आर्थिक प्रगति और जनसंख्या की उत्पादक क्षमता को मापने में किया जाता है।
प्रश्न 4.
भारत की हरित क्रांति किस बात का उदाहरण है?
(a) शिक्षा सुधार का
(b) वैज्ञानिक ज्ञान और बेहतर उत्पादन तकनीकों से कृषि उत्पादकता में वृद्धि का
(c) औद्योगिक क्रांति का
(d) स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास का
उत्तर – (b) वैज्ञानिक ज्ञान और बेहतर उत्पादन तकनीकों से कृषि उत्पादकता में वृद्धि का
व्याख्या:
हरित क्रांति यह दर्शाती है कि वैज्ञानिक ज्ञान, रासायनिक उर्वरकों, सिंचाई सुविधाओं और उच्च उत्पादकता वाले बीजों (HYV seeds) के प्रयोग से सीमित भूमि संसाधनों पर भी कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि की जा सकती है।
यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि मानव संसाधन के ज्ञान और कौशल से प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर आर्थिक विकास संभव है।
प्रश्न 5.
मानव संसाधन को सबसे महत्त्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
(a) यह केवल उपभोक्ता होते हैं
(b) यह प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं
(c) यह केवल श्रमिक शक्ति प्रदान करते हैं
(d) यह केवल सरकारी योजनाएँ लागू करते हैं
उत्तर – (b) यह प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं
व्याख्या:
मानव संसाधन के बिना अन्य संसाधन जैसे भूमि, जल और खनिज निष्क्रिय रहते हैं।
मनुष्य ही अपने ज्ञान, कौशल और तकनीक से इन संसाधनों का दोहन करता है और उन्हें उत्पादक बनाता है।
इसी कारण मानव संसाधन को सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
प्रश्न 6.
मानव पूँजी निर्माण से क्या प्राप्त होता है?
(a) केवल शिक्षा
(b) केवल स्वास्थ्य सुविधाएँ
(c) उच्च आय और उत्पादन क्षमता
(d) केवल रोजगार
उत्तर – (c) उच्च आय और उत्पादन क्षमता
व्याख्या:
मानव पूँजी निर्माण का आशय है शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण में निवेश करना।
इससे लोगों की उत्पादकता बढ़ती है, वे अधिक आय अर्जित कर पाते हैं और देश का सकल राष्ट्रीय उत्पादन (GNP) भी बढ़ता है।
इसीलिए इसे पूँजी निर्माण कहा जाता है, क्योंकि यह भविष्य की आर्थिक प्रगति का आधार बनता है।
प्रश्न 7.
मानव पूँजी में निवेश करने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
(a) केवल कृषि उत्पादन बढ़ता है
(b) केवल औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है
(c) लोगों की उत्पादकता और आय दोनों बढ़ती हैं
(d) प्राकृतिक संसाधनों की मात्रा बढ़ती है
उत्तर – (c) लोगों की उत्पादकता और आय दोनों बढ़ती हैं
व्याख्या:
मानव पूँजी निर्माण का अर्थ है शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य पर निवेश करना।
इससे लोग अधिक ज्ञान और कौशल प्राप्त करते हैं तथा बेहतर स्वास्थ्य के कारण अधिक कुशलता से कार्य कर पाते हैं।
परिणामस्वरूप उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि होती है और देश की आर्थिक प्रगति भी तेज़ होती है।
प्रश्न 8.
मानव पूँजी को भूमि और पूँजी जैसे अन्य संसाधनों से श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
(a) क्योंकि भूमि और पूँजी मानव पर निर्भर हैं
(b) क्योंकि भूमि और पूँजी असीमित हैं
(c) क्योंकि मानव पूँजी प्राकृतिक संसाधनों को समाप्त नहीं करती
(d) क्योंकि मानव पूँजी को आयात किया जा सकता है
उत्तर – (a) क्योंकि भूमि और पूँजी मानव पर निर्भर हैं
व्याख्या:
भूमि, पूँजी और अन्य संसाधन तब तक उत्पादक नहीं होते जब तक मनुष्य अपनी शिक्षा, कौशल और ज्ञान से उनका उपयोग न करे।
मानव संसाधन ही इन निर्जीव संसाधनों को सक्रिय और उत्पादक बनाता है।
इसीलिए मानव पूँजी को भूमि और भौतिक पूँजी से श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रश्न 9.
“सकल की कहानी” किस तथ्य को स्पष्ट करती है?
(a) केवल खेती पर निर्भरता की समस्या
(b) शिक्षा और प्रशिक्षण से जीवन स्तर व आय में सुधार
(c) बेरोज़गारी का बोझ
(d) परिवार नियोजन का महत्व
उत्तर – (b) शिक्षा और प्रशिक्षण से जीवन स्तर व आय में सुधार
व्याख्या:
“सकल की कहानी” यह दर्शाती है कि सकल ने सिलाई का प्रशिक्षण लेकर सिलाई मशीन खरीदी और मेहनत से काम शुरू किया।
बाद में उसने सिलाई केंद्र खोला और अन्य लोगों को भी काम पर रखा। इस प्रकार उसकी आय और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
यह तथ्य स्पष्ट करता है कि शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) किसी व्यक्ति और समाज की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 10.
सकल के परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार का मुख्य कारण क्या था?
(a) जमीन का मालिक होना
(b) बैंक से ऋण प्राप्त करना
(c) शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करना
(d) सरकारी योजना का लाभ लेना
उत्तर – (c) शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करना
व्याख्या:
सकल पहले केवल अपने पिता की मदद करता था, लेकिन जब उसने सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया तो उसने अपनी मेहनत से रोजगार के नए अवसर बनाए।
इस प्रकार उसकी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण ने उसकी आर्थिक प्रगति का आधार तैयार किया।
यह दर्शाता है कि मानव पूँजी में निवेश (शिक्षा व कौशल) व्यक्ति और उसके परिवार की स्थिति सुधारने में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
प्रश्न 11.
मानव पूँजी निर्माण का अर्थ है—
(a) केवल अधिक स्कूल बनाना
(b) शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं पर निवेश
(c) केवल रोजगार उपलब्ध कराना
(d) केवल अधिक जनसंख्या होना
उत्तर – (b) शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं पर निवेश
व्याख्या:
मानव पूँजी निर्माण (Human Capital Formation) का आशय है लोगों को ज्ञान, कौशल और स्वास्थ्य से सशक्त बनाना।
शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं पर निवेश से व्यक्ति की उत्पादकता और कार्य क्षमता बढ़ती है, जिससे वह अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दे पाता है।
इसीलिए इसे किसी भी देश के विकास की मूल आधारशिला माना जाता है।
प्रश्न 12.
उच्च आय के समाजों में शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर अधिक क्यों होता है?
(a) क्योंकि वहाँ प्राकृतिक संसाधन अधिक हैं
(b) क्योंकि वहाँ लोग मेहनती होते हैं
(c) क्योंकि वे अपनी आय का बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर पाते हैं
(d) क्योंकि वहाँ सरकार शिक्षा पर ध्यान नहीं देती
उत्तर – (c) क्योंकि वे अपनी आय का बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर पाते हैं
व्याख्या:
उच्च आय वाले समाजों के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन होते हैं, जिससे वे शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक निवेश कर पाते हैं।
इस निवेश से लोगों का कौशल, स्वास्थ्य और उत्पादकता बढ़ती है, जिससे उनकी मानव पूँजी (Human Capital) और अधिक विकसित होती है।
इसी कारण उच्च आय वाले देशों में शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर अपेक्षाकृत अधिक होता है।
प्रश्न 13.
मानव संसाधन में निवेश को भूमि और पूँजी में निवेश के समान क्यों माना जाता है?
(a) क्योंकि यह केवल तात्कालिक आय देता है
(b) क्योंकि यह भविष्य में अधिक उत्पादन और उच्च जीवन स्तर प्रदान करता है
(c) क्योंकि यह जनसंख्या घटाता है
(d) क्योंकि यह संसाधनों पर निर्भरता घटाता है
उत्तर – (b) क्योंकि यह भविष्य में अधिक उत्पादन और उच्च जीवन स्तर प्रदान करता है
व्याख्या:
मानव संसाधन में निवेश का अर्थ है शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल पर खर्च करना। इससे लोग कुशल, स्वस्थ और उत्पादक बनते हैं, जिससे उनका योगदान अर्थव्यवस्था में बढ़ता है।
यह भविष्य में अधिक उत्पादन, उच्च आय और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करता है।
इसी कारण इसे भूमि और पूँजी में निवेश के समान महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) कहा जाता है।
प्रश्न 14.
जापान के उदाहरण से क्या स्पष्ट होता है?
(a) प्राकृतिक संसाधन विकास का एकमात्र आधार हैं
(b) मानव संसाधन पर निवेश से ही विकास संभव है
(c) अधिक जनसंख्या विकास की कुंजी है
(d) तकनीकी विकास केवल बड़े देशों में संभव है
उत्तर – (b) मानव संसाधन पर निवेश से ही विकास संभव है
व्याख्या:
जापान के पास प्राकृतिक संसाधनों की कमी है, फिर भी उसने शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी कौशल पर निवेश करके स्वयं को एक विकसित राष्ट्र बना लिया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि किसी देश का वास्तविक विकास केवल प्राकृतिक संसाधनों पर नहीं, बल्कि मानव संसाधन के निर्माण (Human Capital Formation) पर निर्भर करता है।
प्रश्न 15.
प्राथमिक क्षेत्र में कौन-सी गतिविधियाँ आती हैं?
(a) उद्योग और निर्माण कार्य
(b) व्यापार, परिवहन और संचार
(c) कृषि, वानिकी, पशुपालन और मत्स्यपालन
(d) शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ
उत्तर – (c) कृषि, वानिकी, पशुपालन और मत्स्यपालन
व्याख्या:
प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष उपयोग किया जाता है। इसमें कृषि, वानिकी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
यह क्षेत्र किसी भी अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है क्योंकि यहीं से कच्चा माल अन्य क्षेत्रों को प्राप्त होता है।
प्रश्न 16.
द्वितीयक क्षेत्र की गतिविधियों का मुख्य कार्य क्या है?
(a) व्यापार और सेवाएँ प्रदान करना
(b) कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलना
(c) प्राकृतिक संसाधनों का दोहन
(d) शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ देना
उत्तर – (b) कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलना
व्याख्या:
द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector) में उद्योग और विनिर्माण की गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसका मुख्य कार्य प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) से प्राप्त कच्चे माल को उपयोगी एवं तैयार वस्तुओं में बदलना है।
उदाहरण के लिए – कपड़ा उद्योग, इस्पात उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि।
प्रश्न 17.
तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियों में क्या शामिल है?
(a) कृषि और खनन
(b) उद्योग और विनिर्माण
(c) व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाएँ
(d) पशुपालन और वानिकी
उत्तर – (c) व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाएँ
व्याख्या:
तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) को सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है। यह प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं का उत्पादन नहीं करता, बल्कि उत्पादन और उपभोग की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक सेवाएँ प्रदान करता है।
इसमें व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
प्रश्न 18.
किस आधार पर किसी व्यक्ति की आय का मुख्य निर्धारण होता है?
(a) परिवार का आकार
(b) शिक्षा और कौशल
(c) जाति और धर्म
(d) भौगोलिक क्षेत्र
उत्तर – (b) शिक्षा और कौशल
व्याख्या:
किसी व्यक्ति की आय मुख्य रूप से उसकी शिक्षा और कौशल पर निर्भर करती है। बेहतर शिक्षा और तकनीकी कौशल रोजगार की संभावनाएँ और आय दोनों को बढ़ाते हैं। यही कारण है कि शिक्षा और कौशल को मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) का सबसे महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।
प्रश्न 19.
परिवार में महिलाओं के घरेलू कार्यों को राष्ट्रीय आय में क्यों नहीं जोड़ा जाता?
(a) क्योंकि महिलाएँ कार्य नहीं करतीं
(b) क्योंकि यह कार्य परिवार के पालन-पोषण से जुड़ा है और उसका बाज़ार मूल्य नहीं आँका जाता
(c) क्योंकि यह केवल ग्रामीण क्षेत्रों में होता है
(d) क्योंकि यह शिक्षा से संबंधित नहीं है
उत्तर – (b) क्योंकि यह कार्य परिवार के पालन-पोषण से जुड़ा है और उसका बाज़ार मूल्य नहीं आँका जाता
व्याख्या:
महिलाएँ घर पर बच्चों की देखभाल, भोजन पकाना, कपड़े धोना, सफाई जैसे अनेक कार्य करती हैं। यह कार्य समाज और परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका बाज़ार मूल्य निर्धारित नहीं होता। अर्थशास्त्र की परिभाषा के अनुसार राष्ट्रीय आय में केवल उन्हीं गतिविधियों को शामिल किया जाता है जिनका मौद्रिक लेन-देन हो। इसलिए महिलाओं का घरेलू कार्य राष्ट्रीय आय में नहीं गिना जाता।
प्रश्न 20.
“जनसंख्या की गुणवत्ता” से क्या आशय है?
(a) केवल जनसंख्या की संख्या
(b) जनसंख्या का स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल
(c) रोजगार की दर
(d) औसत आयु
उत्तर – (b) जनसंख्या का स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल
व्याख्या:
किसी भी देश की प्रगति केवल उसकी जनसंख्या की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि लोग कितने स्वस्थ, शिक्षित और कुशल हैं। एक गुणवत्तापूर्ण जनसंख्या ही उत्पादक श्रमबल बनती है, जो उच्च आय और आर्थिक विकास में योगदान देती है। इसलिए इसे जनसंख्या की गुणवत्ता कहा जाता है।
प्रश्न 21.
साक्षर और स्वस्थ जनसंख्या को किस प्रकार का संसाधन माना जाता है?
(a) बोझ
(b) परजीवी
(c) परिसंपत्ति
(d) बाधा
उत्तर – (c) परिसंपत्ति
व्याख्या:
यदि जनसंख्या साक्षर, स्वस्थ और कुशल है तो वह उत्पादनशील श्रमबल बनती है और आर्थिक विकास में योगदान करती है। ऐसी जनसंख्या देश की परिसंपत्ति (Asset) कहलाती है। इसके विपरीत, अशिक्षित और अस्वस्थ जनसंख्या संसाधन नहीं बल्कि बोझ साबित होती है।
प्रश्न 22.
अशिक्षित और अस्वस्थ जनसंख्या अर्थव्यवस्था के लिए क्या बन जाती है?
(a) संपत्ति
(b) बोझ
(c) अवसर
(d) उत्पादन
उत्तर – (b) बोझ
व्याख्या:
अशिक्षित और अस्वस्थ जनसंख्या उत्पादनशील कार्यों में प्रभावी योगदान नहीं दे पाती। ऐसी जनसंख्या प्रायः दूसरों पर निर्भर रहती है और आर्थिक संसाधनों पर दबाव डालती है। इसीलिए इसे अर्थव्यवस्था के लिए बोझ माना जाता है।
प्रश्न 23.
शिक्षा व्यक्ति को किस रूप में बदलने में मदद करती है?
(a) बोझ
(b) राष्ट्रीय संसाधन
(c) परजीवी
(d) बेरोजगार
उत्तर – (b) राष्ट्रीय संसाधन
व्याख्या:
शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, कौशल और सोचने की क्षमता को विकसित करती है। इससे वह उत्पादक बनता है और समाज व राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान देता है। इस प्रकार, शिक्षा व्यक्ति को राष्ट्रीय संसाधन में परिवर्तित कर देती है।
प्रश्न 24.
भारत में प्राथमिक शिक्षा को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने पर विशेष ज़ोर किस पंचवर्षीय योजना से दिया गया?
(a) प्रथम पंचवर्षीय योजना
(b) तृतीय पंचवर्षीय योजना
(c) चतुर्थ पंचवर्षीय योजना
(d) पंचम पंचवर्षीय योजना
उत्तर – (a) प्रथम पंचवर्षीय योजना
व्याख्या:
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने शिक्षा को योजनाबद्ध रूप से बढ़ाने की शुरुआत प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951–56) से की। इस योजना में प्राथमिक शिक्षा के विस्तार और सर्वसुलभता पर विशेष बल दिया गया। इसे आगे चलकर सभी पंचवर्षीय योजनाओं में प्राथमिकता दी गई।
प्रश्न 25.
1951-52 में शिक्षा पर कुल व्यय का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रतिशत कितना था?
(a) 0.64%
(b) 1.2%
(c) 2.4%
(d) 3.1%
उत्तर – (a) 0.64%
व्याख्या:
स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में भारत सरकार का शिक्षा पर व्यय बहुत सीमित था। 1951-52 में शिक्षा पर व्यय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.64% था। बाद की पंचवर्षीय योजनाओं में इसे बढ़ाने का प्रयास किया गया, ताकि मानव संसाधन के विकास को गति मिल सके।
प्रश्न 26.
2019-20 में शिक्षा पर व्यय (GDP के प्रतिशत के रूप में) कितना हो गया?
(a) 1.2%
(b) 2.4%
(c) 3.1%
(d) 4.5%
उत्तर – (c) 3.1%
व्याख्या:
भारत सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं और शिक्षा नीतियों के माध्यम से शिक्षा पर खर्च को लगातार बढ़ाया। 1951-52 में यह जहाँ मात्र 0.64% था, वहीं 2019-20 तक शिक्षा पर व्यय बढ़कर लगभग 3.1% हो गया। यह मानव संसाधन के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जाती है।
प्रश्न 27.
1951 से 2017 तक भारत की साक्षरता दर में क्या प्रवृत्ति रही?
(a) घटती हुई
(b) स्थिर रही
(c) लगातार बढ़ती हुई
(d) पहले घटी फिर बढ़ी
उत्तर – (c) लगातार बढ़ती हुई
व्याख्या:
1951 में भारत की साक्षरता दर मात्र 18.3% थी। स्वतंत्रता के बाद योजनाबद्ध शिक्षा विस्तार और सरकारी कार्यक्रमों (जैसे राष्ट्रीय साक्षरता अभियान, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम) की वजह से यह निरंतर बढ़ती रही।
- 1991 में यह बढ़कर लगभग 52% हो गई।
- 2011 की जनगणना में साक्षरता दर 74.04% दर्ज की गई।
- 2017-18 के आँकड़ों के अनुसार यह और भी बढ़कर लगभग 77% तक पहुँच गई।
इसलिए 1951 से 2017 तक साक्षरता दर की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती हुई रही।
प्रश्न 28.
2017 तक भारत में किस वर्ग की साक्षरता दर अधिक रही?
(a) पुरुष
(b) महिला
(c) दोनों समान
(d) कोई नहीं
उत्तर – (a) पुरुष
व्याख्या:
भारत में साक्षरता दर में लैंगिक असमानता रही है।
- 1951 में पुरुष साक्षरता दर लगभग 27% थी, जबकि महिला साक्षरता दर मात्र 8.9% थी।
- 2011 की जनगणना में पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% और महिलाओं की 65.46% रही।
- 2017-18 तक यह क्रमशः लगभग 84.7% (पुरुष) और 70.3% (महिला) तक पहुँच गई।
इस प्रकार, 2017 तक पुरुषों की साक्षरता दर महिलाओं की तुलना में अधिक रही, हालाँकि महिलाओं में भी लगातार सुधार देखा गया।
प्रश्न 29.
1951 में भारत की साक्षरता दर कितनी थी?
(a) 12%
(b) 18%
(c) 28%
(d) 35%
उत्तर – (b) 18%
व्याख्या:
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में शिक्षा का स्तर बहुत निम्न था।
- 1951 की जनगणना के अनुसार कुल साक्षरता दर 18.33% थी।
- इसमें पुरुष साक्षरता दर लगभग 27.16% और महिला साक्षरता दर मात्र 8.86% थी।
इससे स्पष्ट होता है कि उस समय शिक्षा व्यवस्था में गंभीर लैंगिक असमानता भी मौजूद थी।
प्रश्न 30.
2018 तक भारत की साक्षरता दर बढ़कर कितनी हो गई?
(a) 62%
(b) 72%
(c) 78%
(d) 94%
उत्तर – (c) 78%
व्याख्या:
- 1951 में भारत की साक्षरता दर केवल 18.33% थी।
- 2011 की जनगणना में यह 74.04% दर्ज की गई।
- 2018 तक विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार यह बढ़कर लगभग 77–78% तक पहुँच गई।
- हालाँकि पुरुषों की साक्षरता दर महिलाओं की तुलना में अब भी अधिक है।
प्रश्न 31.
सर्व शिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) उच्च शिक्षा का विस्तार करना
(b) स्वास्थ्य सेवाओं का प्रसार करना
(c) प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिक लक्ष्य प्राप्त करना
(d) तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना
उत्तर – (c) प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिक लक्ष्य प्राप्त करना
व्याख्या:
- सर्व शिक्षा अभियान (SSA) की शुरुआत वर्ष 2001-02 में की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना था।
- यह कार्यक्रम संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और RTE अधिनियम 2009 से भी जुड़ा है।
- SSA ने भारत में शिक्षा का विस्तार और नामांकन दर बढ़ाने में अहम योगदान दिया।
प्रश्न 32.
बच्चों की उपस्थिति और पोषण स्तर सुधारने के लिए कौन-सी योजना लागू की गई?
(a) सर्व शिक्षा अभियान
(b) मिड-डे मील योजना
(c) शिक्षा का अधिकार अधिनियम
(d) विद्यालय चलो अभियान
उत्तर – (b) मिड-डे मील योजना
व्याख्या:
- मिड-डे मील योजना की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी।
- इस योजना के अंतर्गत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्राथमिक स्तर (बाद में उच्च प्राथमिक स्तर तक) के बच्चों को मुफ़्त दोपहर का भोजन दिया जाता है।
- उद्देश्य:
- बच्चों की विद्यालय में उपस्थिति और नामांकन बढ़ाना।
- विद्यालय में छोड़ने की दर (Drop-out rate) कम करना।
- बच्चों के पोषण स्तर और स्वास्थ्य में सुधार करना।
- यह दुनिया की सबसे बड़ी स्कूल भोजन योजनाओं में से एक है।
प्रश्न 33.
2019-20 में भारत में विश्वविद्यालयों की संख्या कितनी थी?
(a) 753
(b) 1,236
(c) 628
(d) 523
उत्तर – (b) 1,236
व्याख्या:
- शिक्षा मंत्रालय (पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्रालय) द्वारा प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार 2019-20 में भारत में कुल 1,236 विश्वविद्यालय थे।
- इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, और डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
- स्वतंत्रता के समय (1950-51) विश्वविद्यालयों की संख्या बहुत कम थी, परंतु समय के साथ उच्च शिक्षा के विस्तार हेतु यह लगातार बढ़ती गई।
- यह वृद्धि भारत में उच्च शिक्षा के प्रसार और पहुँच को दर्शाती है।
प्रश्न 34.
1950-51 में भारत में महाविद्यालयों की संख्या कितनी थी?
(a) 523
(b) 750
(c) 7,346
(d) 11,089
उत्तर – (b) 750
व्याख्या:
- स्वतंत्रता के शुरुआती समय में उच्च शिक्षा का प्रसार बहुत सीमित था।
- 1950-51 में भारत में केवल 750 महाविद्यालय कार्यरत थे।
- इसके बाद शिक्षा पर सरकारी निवेश, पंचवर्षीय योजनाओं, विश्वविद्यालयों के विस्तार और निजी संस्थानों की भागीदारी से इनकी संख्या लगातार बढ़ी।
- 2019-20 तक यह संख्या 39,931 महाविद्यालयों तक पहुँच गई और
- 2025 तक यह बढ़कर 43,796 से अधिक महाविद्यालय हो चुकी है। (स्रोत: AISHE रिपोर्ट, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार)
प्रश्न 35.
2020-21 तक भारत में विद्यार्थियों की कुल संख्या कितनी हो गई?
(a) 9,26,599
(b) 2,63,000
(c) 39,434,256
(d) 49,25,000
उत्तर – (c) 39,434,256
व्याख्या:
- AISHE (All India Survey on Higher Education) 2020-21 के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में लगभग 3.94 करोड़ (39,434,256) विद्यार्थी पंजीकृत थे।
- इसमें से पुरुष विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.92 करोड़ और महिला विद्यार्थियों की संख्या 2.02 करोड़ थी, यानी महिलाओं की भागीदारी पहली बार पुरुषों से अधिक रही।
- यह भारत में शिक्षा के स्त्री-शिक्षा विस्तार और जेंडर इक्विटी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है।
- 2021-22 AISHE रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या और बढ़कर लगभग 4.14 करोड़ विद्यार्थियों तक पहुँच गई है।
प्रश्न 36.
स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करने से व्यक्ति को क्या लाभ होता है?
(a) जीवन स्तर गिरता है
(b) कार्य करने की क्षमता घटती है
(c) उत्पादकता बढ़ती है
(d) आय कम होती है
उत्तर – (c) उत्पादकता बढ़ती है
व्याख्या:
- स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश का सीधा लाभ यह होता है कि लोग बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं और उनकी कार्य करने की क्षमता (Work Efficiency) बढ़ जाती है।
- स्वस्थ व्यक्ति अधिक समय तक काम कर सकता है, उसकी उत्पादकता (Productivity) और आय अर्जन की क्षमता (Earning Capacity) दोनों बढ़ती हैं।
- यही कारण है कि स्वास्थ्य को मानव पूंजी (Human Capital) का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।
- विश्व बैंक और WHO की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य पर निवेश करने से मानव संसाधन का विकास होता है और यह सीधे-सीधे आर्थिक प्रगति (Economic Growth) से जुड़ा है।
प्रश्न 37.
1951 में भारत की जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) कितनी थी?
(a) 32 वर्ष
(b) 47 वर्ष
(c) 54 वर्ष
(d) 69.4 वर्ष
उत्तर – (a) 32 वर्ष
व्याख्या:
- 1951 में स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारत की औसत जीवन प्रत्याशा केवल 32 वर्ष थी।
- इसका कारण था –
- स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव,
- संक्रामक रोगों (जैसे मलेरिया, टीबी, हैजा) का प्रकोप,
- स्वच्छ पेयजल और पोषण की कमी।
- स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, शिक्षा और पोषण कार्यक्रमों में निवेश के कारण जीवन प्रत्याशा में लगातार वृद्धि हुई।
- 1970-71 में यह बढ़कर 47 वर्ष,
- 2011 में लगभग 67 वर्ष,
- और 2023 तक 69.4 वर्ष तक पहुँच चुकी है।
प्रश्न 38.
2016 तक भारत की जीवन प्रत्याशा कितनी हो गई?
(a) 32 वर्ष
(b) 47 वर्ष
(c) 64.5 वर्ष
(d) 68 वर्ष
उत्तर – (c) 64.5 वर्ष
व्याख्या:
- 1951 में जीवन प्रत्याशा केवल 32 वर्ष थी।
- 1970–71 तक यह बढ़कर 47 वर्ष हुई।
- 1991 में लगभग 58 वर्ष।
- 2016 तक जीवन प्रत्याशा 68 वर्ष (WHO) आँकी गई।
- 2022–23 में यह बढ़कर 69.4 वर्ष हो गई।
इस तरह लगातार स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण, शिक्षा और स्वच्छता में सुधार से जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रश्न 39.
1951 में भारत की शिशु मृत्यु दर (IMR) कितनी थी?
(a) 374
(b) 147
(c) 113
(d) 69.4
उत्तर – (b) 147
व्याख्या:
- 1951 में भारत की शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate – IMR) प्रति 1000 जीवित जन्म पर लगभग 147 थी।
- इसका मुख्य कारण था – स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, कुपोषण, स्वच्छता की खराब स्थिति और संक्रामक रोगों का प्रसार।
- समय के साथ सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, टीकाकरण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाएँ, मातृ एवं शिशु कल्याण कार्यक्रम) से IMR में भारी कमी आई।
- 2022–23 तक शिशु मृत्यु दर घटकर लगभग 27 प्रति 1000 जीवित जन्म रह गई है।
प्रश्न 40.
2020 में भारत की शिशु मृत्यु दर (IMR) घटकर कितनी रह गई?
(a) 28
(b) 47
(c) 69.4
(d) 113
उत्तर – (a) 28
व्याख्या:
- स्वतंत्रता के समय (1951) भारत की शिशु मृत्यु दर (IMR) 147 प्रति 1000 जीवित जन्म थी।
- सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं जैसे मिशन इंद्रधनुष, आंगनवाड़ी सेवाएँ, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, पोषण अभियान और स्वच्छ भारत अभियान ने शिशु मृत्यु दर कम करने में अहम योगदान दिया।
- 2020 तक IMR घटकर 28 प्रति 1000 जीवित जन्म रह गई।
- हाल की रिपोर्टों के अनुसार (SRS 2022), यह और घटकर लगभग 27 हो गई है।
प्रश्न 41.
भारत की मातृ मृत्यु दर (MMR) वर्ष 2000 में कितनी थी?
(a) 113
(b) 147
(c) 374
(d) 269
उत्तर – (c) 374
व्याख्या:
- मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio – MMR) का अर्थ है प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर मातृ मृत्यु की संख्या।
- वर्ष 2000 में भारत की MMR 374 थी।
- इसका मुख्य कारण था –
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी,
- प्रशिक्षित दाई और डॉक्टरों की अनुपलब्धता,
- संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) का कम होना,
- कुपोषण और एनीमिया की अधिकता।
- सरकार ने जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाएँ शुरू कीं।
- इसके परिणामस्वरूप 2000 के बाद लगातार गिरावट आई और हाल की रिपोर्ट (SRS 2020–22) के अनुसार भारत की MMR घटकर 97 हो गई है।
प्रश्न 42.
2018 में भारत की मातृ मृत्यु दर (MMR) घटकर कितनी रह गई?
(a) 269
(b) 113
(c) 147
(d) 28
उत्तर – (b) 113
व्याख्या:
- मातृ मृत्यु दर (MMR) का अर्थ है प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर मातृ मृत्यु की संख्या।
- वर्ष 2018 तक भारत की MMR 113 रह गई, जो 2000 के 374 से बहुत कम है।
- इसका श्रेय जाता है –
- स्वास्थ्य अवसंरचना में सुधार,
- संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) की वृद्धि,
- जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम जैसी योजनाओं,
- महिलाओं में बढ़ती जागरूकता,
- टीकाकरण और पोषण सुधारों को।
SRS (Sample Registration System / सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) 2020–22 के अनुसार भारत की MMR और घटकर 97 हो गई है।
प्रश्न 43.
1951 से 2020 तक चिकित्सकों की संख्या में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई?
(a) 50%
(b) 100%
(c) 300%
(d) 370%
उत्तर – (d) 370%
व्याख्या:
1951 में भारत में चिकित्सकों की संख्या बहुत सीमित थी। लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और सरकारी प्रयासों के चलते 2020 तक चिकित्सकों की संख्या में लगभग 370% की वृद्धि हुई। यह वृद्धि देश में स्वास्थ्य अवसंरचना और जनसंख्या की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के प्रयासों को दर्शाती है।
प्रश्न 44.
1951 से 2020 तक नर्सों एवं नर्सिंगकर्मियों की संख्या में कितनी प्रतिशत वृद्धि हुई?
(a) 200%
(b) 350%
(c) 390%
(d) 450%
उत्तर – (c) 390%
व्याख्या:
1951 में भारत में नर्सों एवं नर्सिंगकर्मियों की संख्या बहुत कम थी, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित रहीं। लेकिन 2020 तक इसमें लगभग 390% की वृद्धि हुई। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर देखभाल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार में मदद मिली।
प्रश्न 45.
भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए किस पर विशेष ध्यान दिया?
(a) भारी उद्योगों की स्थापना
(b) स्कूल और कॉलेजों का निर्माण
(c) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टीकाकरण और पोषण सेवाएँ
(d) रेलवे और सड़क निर्माण
उत्तर – (c) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टीकाकरण और पोषण सेवाएँ
व्याख्या:
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार हेतु भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, पोषण सेवाएँ, मातृ एवं शिशु देखभाल पर विशेष बल दिया। इसके परिणामस्वरूप संक्रामक रोगों में कमी आई, शिशु मृत्यु दर (IMR) और मातृ मृत्यु दर (MMR) घटी तथा जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
प्रश्न 46.
1951 से 2020 तक जीवन प्रत्याशा बढ़ने का प्रमुख कारण क्या था?
(a) कृषि उत्पादन में वृद्धि
(b) औद्योगिक विकास
(c) स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
(d) विदेशी निवेश
उत्तर – (c) स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
व्याख्या:
- 1951 में भारत की औसत जीवन प्रत्याशा केवल 32 वर्ष थी।
- 2020 तक यह बढ़कर लगभग 69 वर्ष हो गई।
- इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार था, जैसे –
- अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,
- नर्सिंग और मेडिकल स्टाफ की संख्या में वृद्धि,
- टीकाकरण और संक्रामक रोग नियंत्रण,
- पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम,
- स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता अभियान।
- इन सुधारों ने शिशु मृत्यु दर (IMR) और मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी लाकर जीवन प्रत्याशा में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की।
प्रश्न 47.
भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) केवल शहरों में अस्पताल खोलना
(b) ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करना
(c) सभी नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना
(d) निजी कंपनियों को बढ़ावा देना
उत्तर – (c) सभी नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना
व्याख्या:
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (National Health Policy – NHP) का उद्देश्य है – सभी नागरिकों को समान रूप से स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना, चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी।
- नीति में शामिल हैं:
- प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार,
- समान और किफायती स्वास्थ्य देखभाल,
- टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और रोग नियंत्रण कार्यक्रम,
- स्वास्थ्य में नवाचार और गुणवत्ता सुधार।
- यह नीति सभी के लिए स्वास्थ्य (Health for All) सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करती है।
प्रश्न 48.
भारत में बेरोज़गारी का सबसे बड़ा कारण क्या है?
(a) शिक्षा का अभाव
(b) पूँजी की कमी
(c) जनसंख्या का अत्यधिक दबाव
(d) संसाधनों का समान वितरण
उत्तर – (c) जनसंख्या का अत्यधिक दबाव
व्याख्या:
- भारत की विशाल और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण सभी लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं हैं।
- संसाधन सीमित हैं, जबकि काम खोजने वालों की संख्या अधिक है, जिससे बेरोज़गारी बढ़ती है।
- इसके अलावा बेरोज़गारी के अन्य कारण भी हैं:
- शिक्षा और कौशल का अभाव,
- औद्योगीकरण और निवेश में कमी,
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार का असंतुलित वितरण।
- जनसंख्या दबाव को नियंत्रित करने और कौशल विकास बढ़ाने से बेरोज़गारी में कमी संभव है।
प्रश्न 49.
किस प्रकार की बेरोज़गारी कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक पाई जाती है?
(a) मौसमी बेरोज़गारी
(b) छिपी हुई बेरोज़गारी
(c) शहरी बेरोज़गारी
(d) तकनीकी बेरोज़गारी
उत्तर – (b) छिपी हुई बेरोज़गारी
व्याख्या:
- कृषि में अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा लोग काम करते हैं।
- यदि कुछ लोग काम छोड़ भी दें, तो उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता।
- इसे छिपी हुई बेरोज़गारी (Disguised Unemployment) कहा जाता है।
- यह मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों और पारंपरिक खेती में अधिक देखी जाती है।
प्रश्न 50.
मौसमी बेरोज़गारी मुख्यतः कहाँ देखने को मिलती है?
(a) उद्योग क्षेत्र
(b) सेवाएँ क्षेत्र
(c) ग्रामीण कृषि क्षेत्र
(d) परिवहन क्षेत्र
उत्तर – (c) ग्रामीण कृषि क्षेत्र
व्याख्या:
- मौसमी बेरोज़गारी (Seasonal Unemployment) वह है जो फसल या कृषि कार्यों के मौसम तक ही सीमित रहती है।
- कृषि क्षेत्र में काम केवल बुवाई, कटाई और फसल सीज़न में होता है।
- बाकी समय लोग काम नहीं पाते और बेरोज़गार रहते हैं।
- यह समस्या मुख्यतः ग्रामीण और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था में देखी जाती है।
- इसे कम करने के लिए ग्रामीण उद्योगों, कृषि के अतिरिक्त कार्यों और कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाता है।
प्रश्न 51.
भारत की जनसंख्या का कौन सा आयु समूह उत्पादक जनसंख्या (working population) कहलाता है?
(a) 0–6 वर्ष
(b) 7–14 वर्ष
(c) 15–59 वर्ष
(d) 60 वर्ष से ऊपर
उत्तर – (c) 15–59 वर्ष
व्याख्या:
- उत्पादक जनसंख्या (Working Population) वह आयु वर्ग है जो आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय होता है और उत्पादन में योगदान देता है।
- भारत में यह आयु वर्ग आम तौर पर 15–59 वर्ष के बीच होता है।
- यह जनसंख्या देश की आर्थिक शक्ति और मानव संसाधन का आधार है।
- इसके विपरीत, 0–14 वर्ष और 60 वर्ष से ऊपर के लोग आधारिक जनसंख्या (dependent population) माने जाते हैं क्योंकि ये उत्पादन में सीमित या असमर्थ होते हैं।
प्रश्न 52.
यदि किसी अर्थव्यवस्था में शिक्षित लोग भी रोजगार नहीं पा रहे हैं तो इसे क्या कहा जाएगा?
(a) अव्यवसायिकता
(b) खुली बेरोज़गारी
(c) मौसमी बेरोज़गारी
(d) छिपी बेरोज़गारी
उत्तर – (b) खुली बेरोज़गारी
व्याख्या:
- खुली बेरोज़गारी (Open Unemployment) वह स्थिति है जिसमें लोग काम ढूँढ रहे हैं लेकिन रोजगार नहीं मिल रहा।
- यह स्थिति शिक्षित और प्रशिक्षित व्यक्तियों में भी हो सकती है।
- उदाहरण: स्नातक, तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त लोग जो नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं।
- इसका असर आर्थिक उत्पादन और व्यक्तियों की आय पर पड़ता है।
प्रश्न 53.
भारत में बेरोज़गारी की समस्या का समाधान किससे संभव है?
(a) केवल कृषि पर निर्भर रहना
(b) केवल सरकारी नौकरियाँ बढ़ाना
(c) शिक्षा, कौशल विकास और औद्योगिकरण
(d) जनसंख्या को बढ़ावा देना
उत्तर – (c) शिक्षा, कौशल विकास और औद्योगिकरण
व्याख्या:
- बेरोज़गारी का समाधान केवल सरकारी नौकरियों बढ़ाने या कृषि पर निर्भर रहने से संभव नहीं है।
- इसके लिए आवश्यक है:
- शिक्षा और कौशल विकास: लोगों को रोजगार योग्य बनाना, विशेषकर तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण।
- औद्योगिक और सेवा क्षेत्र का विकास: अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न करना।
- स्टार्टअप, लघु उद्योग और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।
- इस तरह बेरोज़गारी में कमी आएगी और आर्थिक उत्पादन और जीवन स्तर में सुधार होगा।
प्रश्न 54.
“मानव संसाधन” शब्द का तात्पर्य किससे है?
(a) प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता
(b) मशीनों और तकनीक की उपलब्धता
(c) लोगों की संख्या, उनकी शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य
(d) केवल शिक्षित लोगों की संख्या
उत्तर – (c) लोगों की संख्या, उनकी शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य
व्याख्या:
- मानव संसाधन (Human Resource) केवल जनसंख्या नहीं है।
- यह उन लोगों का समूह है जो शारीरिक, मानसिक और कौशल के लिहाज से उत्पादक हैं।
- इसमें शामिल हैं:
- शिक्षा और प्रशिक्षण – ज्ञान और कौशल का विकास,
- स्वास्थ्य और पोषण – कार्य क्षमता बढ़ाना,
- अनुभव और क्षमताएँ – उत्पादन और सेवा में योगदान।
- एक राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में मानव संसाधन की गुणवत्ता ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 55.
भारत में मानव संसाधन विकास के प्रमुख साधन कौन से हैं?
(a) केवल शिक्षा
(b) केवल स्वास्थ्य
(c) शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों
(d) केवल रोजगार
उत्तर – (c) शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों
व्याख्या:
- मानव संसाधन विकास (Human Resource Development) का उद्देश्य लोगों को अधिक उत्पादक और कुशल बनाना है।
- इसके प्रमुख साधन हैं:
- शिक्षा:
- व्यक्ति ज्ञान और कौशल अर्जित करता है।
- रोजगार और नवाचार के अवसर बढ़ते हैं।
- स्वास्थ्य:
- शारीरिक और मानसिक क्षमता बढ़ती है।
- काम करने की क्षमता और उत्पादकता में सुधार होता है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य मिलकर किसी व्यक्ति को सशक्त और उत्पादक मानव संसाधन बनाते हैं।
- यही किसी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति और सामाजिक विकास का आधार है।
प्रश्न 56.
साक्षरता दर में वृद्धि से राष्ट्र को क्या लाभ होता है?
(a) जनसंख्या में वृद्धि
(b) उत्पादन और रोजगार के अवसर घट जाते हैं
(c) प्रशासनिक क्षमता और उत्पादनशीलता बढ़ती है
(d) बेरोज़गारी स्वतः समाप्त हो जाती है
उत्तर – (c) प्रशासनिक क्षमता और उत्पादनशीलता बढ़ती है
व्याख्या:
- साक्षरता और शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान, कौशल और जागरूकता प्रदान करती है।
- लाभ:
- प्रशासनिक क्षमता में सुधार: लोग सरकारी और सामाजिक योजनाओं को बेहतर ढंग से समझ और लागू कर सकते हैं।
- उत्पादनशीलता बढ़ती है: शिक्षित व्यक्ति अधिक कुशल और नवाचारी होते हैं, जिससे उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों में योगदान बढ़ता है।
- सामाजिक लाभ: स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक जागरूकता में सुधार होता है।
- NOTE-: साक्षरता से बेरोज़गारी स्वतः समाप्त नहीं होती, लेकिन कौशल और शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
प्रश्न 57.
मानव संसाधन को उत्पादक बनाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(a) मानव पूंजी निर्माण
(b) प्राकृतिक पूंजी निर्माण
(c) तकनीकी विकास
(d) औद्योगिकरण
उत्तर – (a) मानव पूंजी निर्माण
व्याख्या:
- मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) का अर्थ है लोगों को उत्पादक और कुशल बनाना।
- इसमें शामिल है:
- शिक्षा: ज्ञान और कौशल का विकास।
- प्रशिक्षण: रोजगार और उत्पादन के लिए व्यावहारिक क्षमता का निर्माण।
- स्वास्थ्य: कार्य क्षमता और जीवन प्रत्याशा बढ़ाना।
- यह प्रक्रिया आर्थिक विकास और उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- उदाहरण: तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा, स्वास्थ्य कार्यक्रम।
प्रश्न 58.
भारत में मानव संसाधन की गुणवत्ता सुधारने के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
(a) छोटे भू-खण्ड
(b) कृषि पर अधिक निर्भरता
(c) अधिक जनसंख्या और असमान अवसर
(d) जलवायु परिवर्तन
उत्तर – (c) अधिक जनसंख्या और असमान अवसर
व्याख्या:
- मानव संसाधन की गुणवत्ता केवल जनसंख्या की संख्या से नहीं बल्कि शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य स्तर से मापी जाती है।
- भारत में दो बड़ी समस्याएँ हैं:
- अत्यधिक जनसंख्या: पर्याप्त संसाधन और अवसर सीमित हैं।
- असमान अवसर: शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाएँ सभी वर्गों और क्षेत्रों में समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
- इन कारणों से मानव संसाधन को कुशल और उत्पादक बनाना चुनौतीपूर्ण है।
- समाधान के लिए समान शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार आवश्यक है।
प्रश्न 59.
मानव संसाधन विकास का अंतिम उद्देश्य क्या है?
(a) अधिक से अधिक धन कमाना
(b) लोगों को केवल नौकरी दिलाना
(c) लोगों को समृद्ध, स्वस्थ और राष्ट्र को प्रगतिशील बनाना
(d) प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना
उत्तर – (c) लोगों को समृद्ध, स्वस्थ और राष्ट्र को प्रगतिशील बनाना
व्याख्या:
- मानव संसाधन विकास (Human Resource Development) केवल रोज़गार देने तक सीमित नहीं है।
- इसका उद्देश्य है:
- व्यक्तिगत समृद्धि: लोगों को ज्ञान, कौशल और स्वास्थ्य प्रदान करना।
- सामाजिक और आर्थिक विकास: उत्पादनशील और कुशल नागरिक राष्ट्र की प्रगति में योगदान दें।
- सतत विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के माध्यम से स्थायी आर्थिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करना।
- एक विकसित मानव संसाधन ही देश की समृद्धि, स्वास्थ्य और प्रगति की कुंजी है।
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