सामाजिक स्थैतिकी और गतिशीलता
1. अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को किन दो प्रमुख भागों में विभाजित किया था?
A. सामाजिक क्रिया और सामाजिक व्यवस्था
B. सामाजिक स्थैतिकी और सामाजिक गतिशीलता
C. सामाजिक संगठन और सामाजिक परिवर्तन
D. सामाजिक एकता और सामाजिक संघर्ष
उत्तर: B. सामाजिक स्थैतिकी और सामाजिक गतिशीलता
व्याख्या:
अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को प्राकृतिक विज्ञानों की तर्ज पर दो वैज्ञानिक भागों में विभाजित किया—1. सामाजिक स्थैतिकी (Social Statics)
- समाज की संरचना (Structure) का अध्ययन करती है।
- इसमें परिवार, धर्म, राज्य, नैतिक व्यवस्था जैसे संस्थानों की परस्पर निर्भरता और सामाजिक व्यवस्था (Social Order) का विश्लेषण शामिल है।
- स्थैतिकी बताती है कि समाज किस प्रकार स्थिर, संगठित और संतुलित रहता है।
2. सामाजिक गतिशीलता (Social Dynamics)
- समाज के परिवर्तन, विकास, और प्रगति (Progress) के नियमों का अध्ययन करती है।
- यह कॉम्ट के “Law of Three Stages” से सीधे जुड़ी है—
- Theology
- Metaphysics
- Positivism
- गतिशीलता बताती है कि समाज कैसे और किस दिशा में बदलता है।
कॉम्ट का प्रसिद्ध सिद्धांत:
“Order and Progress are inseparable.”
(“व्यवस्था और प्रगति एक-दूसरे पर निर्भर हैं।”)
2. कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में बाँटने की प्रेरणा किस विज्ञान से ली थी?
A. मनोविज्ञान
B. जीवविज्ञान
C. अर्थशास्त्र
D. इतिहास
उत्तर: B. जीवविज्ञान
व्याख्या:
अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने के लिए जीवविज्ञान (Biology) से प्रेरणा ली।
उनके अनुसार:
- जिस प्रकार जीवविज्ञान दो भागों में विभाजित है—
(1) Anatomy (शरीर की संरचना)
(2) Physiology (शरीर की क्रियाएँ)- उसी प्रकार समाजशास्त्र के भी दो वैज्ञानिक भाग होने चाहिए—
(1) Social Statics (सामाजिक स्थैतिकी)
(2) Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता)
जीवविज्ञान समाजशास्त्र Anatomy → शरीर की संरचना Social Statics → समाज की संरचना Physiology → शरीर की क्रियाएँ Social Dynamics → समाज की गति, परिवर्तन कॉम्ट का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि वह समाज को एक सजीव तंत्र (Organic System) की तरह देखते थे।
उनका मानना था कि जैसे शरीर के अंग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, वैसे ही सामाजिक संस्थाएँ भी एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं।
3. कॉम्ट की दृष्टि में समाजशास्त्रीय “स्थैतिकी” किन विषयों के अध्ययन से संबंधित है?
A. समाज की संरचना और संस्थाओं की पारस्परिकता
B. समाज के ऐतिहासिक विकास
C. सामाजिक संघर्ष और परिवर्तन
D. समाज की आर्थिक प्रगति
उत्तर: A. समाज की संरचना और संस्थाओं की पारस्परिकता
व्याख्या:
सामाजिक स्थैतिकी (Social Statics) —
यह अगस्त कॉम्ट द्वारा प्रतिपादित समाजशास्त्र का वह भाग है जो समाज की संरचना, सामाजिक संस्थाओं, और उनकी परस्पर निर्भरता का अध्ययन करता है।कॉम्ट के अनुसार Social Statics में शामिल मुख्य विषय:
- सामाजिक संरचना (Social Structure)
- सामाजिक संस्थाएँ —
- परिवार
- धर्म
- नैतिकता
- राज्य
- भाषा
- वर्ग संरचना
- संस्थाओं की परस्पर निर्भरता (Interrelatedness of Institutions)
- समाज की एकता, व्यवस्था और स्थिरता
- सामाजिक सहमति (Social Consensus)
कॉम्ट मानते थे कि—
- जैसे शरीर के अंग मिलकर शरीर को संतुलन देते हैं,
- वैसे ही सामाजिक संस्थाएँ मिलकर समाज को स्थिरता (Order) प्रदान करती हैं।
इसलिए Static Sociology वह विज्ञान है जो यह समझता है:
“समाज क्यों स्थिर, संगठित और संतुलित रहता है?”
4. कॉम्ट के अनुसार, समाज की सबसे छोटी इकाई क्या है?
A. व्यक्ति
B. समुदाय
C. परिवार
D. जाति
उत्तर: C. परिवार
व्याख्या:
अगस्त कॉम्ट की समाजशास्त्रीय दृष्टि में परिवार (Family) समाज की सबसे छोटी और सबसे महत्वपूर्ण इकाई है।कॉम्ट व्यक्ति (Individual) को समाज की मूल इकाई क्यों नहीं मानते?
कॉम्ट कहते हैं—
- मनुष्य जन्मजात सामाजिक नहीं होता;
- वह परिवार के माध्यम से सामाजिक बनता है (Socialized through family)।
- इसलिए व्यक्ति अपने-आप में सामाजिक इकाई नहीं है, बल्कि परिवार के अंदर ही उसका समाजीकरण (Socialization) शुरू होता है।
परिवार क्यों मूल सामाजिक इकाई है?
कॉम्ट के अनुसार:
- परिवार = सामाजिक जीवन की प्राथमिक इकाई।
- परिवार से ही—
- नैतिकता
- धर्म
- भाषा
- अनुशासन
- सामाजिक दायित्व
- सहयोग
— का विकास होता है।- परिवार समाज की सभी महान संस्थाओं (धर्म, शिक्षा, राजनीति, वर्ग-व्यवस्था) की बुनियादी संरचना का निर्माण करता है।
कॉम्ट का स्पष्ट कथन
उन्होंने परिवार को समाज का “fundamental social unit” कहा, जो सामाजिक व्यवस्था (Social Order) का आधार है।
5. निम्नलिखित में से कौन-सा “सामाजिक स्थैतिकी” का एक प्रमुख घटक नहीं है?
A. परिवार
B. भाषा
C. धर्म
D. औद्योगिक क्रांति
उत्तर: D. औद्योगिक क्रांति
व्याख्या:
सामाजिक स्थैतिकी (Social Statics) वह भाग है जिसमें कॉम्ट समाज की उन संरचनाओं का विश्लेषण करते हैं,
जो समाज को स्थिरता (Order), संतुलन, और संगठन प्रदान करती हैं।स्थैतिकी में क्या शामिल है?
कॉम्ट के अनुसार सामाजिक स्थैतिकी में शामिल हैं—
- परिवार (Family) – समाज की सबसे छोटी संरचनात्मक इकाई
- भाषा (Language) – सांस्कृतिक स्थिरता का माध्यम
- धर्म (Religion) – नैतिक एकता और सामाजिक समरसता का स्रोत
- नैतिकता (Morality)
- सामाजिक सहमति (Consensus)
- सामाजिक संस्थाओं की परस्पर निर्भरता
ये सभी समाज की संरचनात्मक स्थिरता को बनाए रखते हैं।
क्यों ‘औद्योगिक क्रांति’ स्थैतिकी का भाग नहीं है?
औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution)—
- समाज में तेज परिवर्तन,
- नए वर्गों का उदय,
- उत्पादन प्रौद्योगिकी में बदलाव,
- शहरीकरण और नए सामाजिक संबंध—
इन सबका प्रतिनिधित्व करती है।
इसलिए यह सामाजिक गतिशीलता (Social Dynamics) का हिस्सा है,
क्योंकि यह समाज में “परिवर्तन और प्रगति” को दर्शाती है,
स्थिर संरचना को नहीं।
6. कॉम्ट के अनुसार समाज में “स्थैतिकी” और “गतिशीलता” के बीच क्या संबंध है?
A. दोनों स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं
B. दोनों का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं
C. दोनों का सामंजस्य समाज के जीवित रहने के लिए आवश्यक है
D. दोनों एक-दूसरे के विरोधी हैं
उत्तर: C. दोनों का सामंजस्य समाज के जीवित रहने के लिए आवश्यक है
व्याख्या:
अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र में द्वि-आधारी (Dual) दृष्टिकोण अपनाया—
- Social Statics → समाज की संरचना, व्यवस्था, संस्थाओं की एकता
- Social Dynamics → समाज का विकास, प्रगति और परिवर्तन
लेकिन उन्होंने दोनों को अलग-अलग या विरोधी तत्व नहीं माना।
उनके अनुसार—समाज की स्थिरता (Order) और प्रगति (Progress) एक-दूसरे के पूरक हैं।
कॉम्ट का अत्यंत प्रसिद्ध सिद्धांत है:
“Order and Progress are inseparable.”
(“व्यवस्था और प्रगति एक-दूसरे से अविभाज्य हैं।”)
क्यों दोनों का सामंजस्य आवश्यक है?
- केवल स्थैतिकी (Order) हो तो समाज ठहराव का शिकार हो जाएगा।
- केवल गतिशीलता (Progress) हो तो समाज अराजकता में बदल जाएगा।
- इसलिए समाज एक जीवित जीव (social organism) की तरह तभी फल-फूल सकता है जब संरचना और परिवर्तन में संतुलन हो।
कॉम्ट ने इसे Biological Analogy द्वारा समझाया—
जैसे शरीर की Anatomy (संरचना) और Physiology (क्रिया) में सामंजस्य से ही जीवन संभव है,
वैसे ही समाज के स्थिर और गतिशील पक्षों का संतुलन ही सामाजिक जीवन का आधार है।
7. कॉम्ट ने समाज की गतिशीलता (Social Dynamics) में किस तत्व को प्रमुख माना?
A. स्थिरता
B. प्रगति और विकास
C. संस्थागत संरचना
D. वर्ग संघर्ष
उत्तर: B. प्रगति और विकास
व्याख्या:
Social Dynamics अगस्त कॉम्ट के समाजशास्त्र का वह भाग है जो समाज को परिवर्तनशील, विकासशील और निरंतर आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया के रूप में देखता है।कॉम्ट का स्पष्ट मत था कि—
मानव समाज हमेशा “Progress” और “Development” की दिशा में अग्रसर रहता है।
यह प्रगति केवल आर्थिक या राजनीतिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि
- बौद्धिक (intellectual),
- नैतिक (moral),
- आध्यात्मिक (religious),
- वैज्ञानिक (scientific)
उत्थान को भी शामिल करती है।कॉम्ट का “तीन अवस्थाओं का नियम” (Law of Three Stages)
गतिशीलता की उनकी अवधारणा का मूल आधार है, जिसमें समाज तीन चरणों से गुजरकर प्रगति करता है:
- Theological stage
- Metaphysical stage
- Positive (scientific) stage
इसका अर्थ यह है कि—
समाज क्रमिक विकास (evolutionary development) की एक अपरिहार्य और प्राकृतिक प्रक्रिया से गुजरता है।इसलिए गतिशीलता का सार = प्रगति + विकास + परिवर्तन + उन्नति
8. अगस्त कॉम्ट ने समाज के विकास को किस दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया?
A. ऐतिहासिक दृष्टिकोण से
B. धार्मिक दृष्टिकोण से
C. प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण से
D. मार्क्सवादी दृष्टिकोण से
उत्तर: C. प्रत्यक्षवादी (Positivist) दृष्टिकोण से
व्याख्या:
अगस्त कॉम्ट (Auguste Comte) को प्रत्यक्षवाद (Positivism) का जनक माना जाता है।
कॉम्ट का उद्देश्य था कि समाज का अध्ययन प्राकृतिक विज्ञानों की तरह किया जाए, ताकि समाजशास्त्र एक “विज्ञान” का दर्जा पा सके।कॉम्ट का प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण
कॉम्ट कहते हैं कि:
- समाज को केवल देखे जाने योग्य तथ्यों (observables) के आधार पर समझा जाना चाहिए।
- मनुष्य और समाज, दोनों वैज्ञानिक नियमों (laws of society) के अधीन विकसित होते हैं।
- समाज का विकास “कानूनों और कारणों” पर आधारित है, न कि अनुमान या मिथकीय व्याख्याओं पर।
कॉम्ट का मुख्य प्रत्यक्षवादी योगदान
- Law of Three Stages – theological → metaphysical → positive
- Scientific Method को समाजशास्त्र में लागू करना
- समाज के दो पहलू –
- Static (स्थैतिकी)
- Dynamic (गतिशीलता)
दोनों का अध्ययन वैज्ञानिक तरीके से करने का प्रस्तावइसलिए कॉम्ट ने समाज के विकास को किसी धार्मिक, दार्शनिक या वर्ग संघर्ष आधारित दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण से समझाया।
9. कॉम्ट के अनुसार भाषा का समाज में क्या कार्य है?
A. केवल संचार का माध्यम
B. संस्कृति के संप्रेषण का साधन
C. सत्ता प्राप्ति का उपकरण
D. आर्थिक संगठन का आधार
उत्तर: B. संस्कृति के संप्रेषण का साधन
व्याख्या:
अगस्त कॉम्ट (Auguste Comte) ने अपनी Social Statics (सामाजिक स्थैतिकी) में भाषा को समाज के स्थायी और संरचनात्मक तत्वों में शामिल किया है।कॉम्ट के अनुसार—
भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह:
- समाज की संस्कृति (Culture)
- परंपराएँ (Traditions)
- मूल्य (Values)
- सामूहिक चेतना (Collective sentiments)
को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाने का मुख्य साधन है।
भाषा समाज को एकीकृत करती है
कॉम्ट कहते हैं कि भाषा के बिना—
- संस्कृति का प्रसारण असंभव है
- सामाजिक व्यवस्था (Order) टूट जाएगी
- सामूहिक विचारों की निरंतरता नहीं रह पाएगी
इसलिए भाषा सामाजिक स्थिरता (Statics) का अनिवार्य घटक है, जबकि सामाजिक परिवर्तन (Dynamics) उससे आगे विकसित होते हैं।
कॉम्ट की नजर में भाषा:
- समाज का मूलभूत सामाजिक संस्थान है
- एकता और निरंतरता बनाए रखने वाला तंत्र है
- संस्कृति का “जीवित माध्यम” है
इसलिए कॉम्ट ने भाषा को केवल बोलने का उपकरण न मानकर संस्कृति के वाहक और परंपराओं के संरक्षक के रूप में माना।
10. निम्न में से कौन-सा कथन कॉम्ट के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण का सार व्यक्त करता है?
A. समाज एक व्यक्तिगत रचना है
B. समाज का अस्तित्व व्यक्ति से स्वतंत्र है
C. व्यक्ति समाज की मूल इकाई है
D. समाज केवल आर्थिक शक्तियों से संचालित है
उत्तर: B. समाज का अस्तित्व व्यक्ति से स्वतंत्र है
व्याख्या:
Auguste Comte के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण की मूलभूत मान्यता यह है कि—समाज व्यक्ति से पहले है और उसके अस्तित्व से स्वतंत्र है।
कॉम्ट ने समाज को एक सामूहिक, संगठित और संरचनात्मक इकाई (Organized Social System) माना, जिसकी—
- नियम (laws)
- संस्थाएँ (institutions)
- संरचना (structure)
- कार्य (functions)
व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर नहीं होते।
कॉम्ट की दृष्टि में व्यक्ति ≠ समाज
कॉम्ट व्यक्ति को समाज की “न्यूनतम इकाई” नहीं मानते।
वे कहते हैं:
- व्यक्ति सामाजिक होता है समाज के कारण
- समाज की स्थिरता और प्रगति, व्यक्ति से अधिक मौलिक है
- व्यक्तिगत मनोविज्ञान से समाज का अध्ययन संभव नहीं
यह दृष्टिकोण क्या स्थापित करता है?
समाज मनुष्यों के ऊपर एक सर्वोपरि व्यवस्था है
व्यक्ति समाज के नियमों एवं संस्थाओं से निर्मित होता है
समाज का “वास्तविक अस्तित्व” (real & independent existence) हैइसलिए कथन —
“समाज का अस्तित्व व्यक्ति से स्वतंत्र है”
कॉम्ट के प्रत्यक्षवादी समाजशास्त्र का मूल सार है।
11. कॉम्ट के अनुसार समाज की “स्थैतिकी” का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. सामाजिक संस्थाओं के विकास की प्रक्रिया को समझना
B. समाज के क्रम, एकता और संतुलन को स्पष्ट करना
C. सामाजिक संघर्षों के स्रोतों की पहचान करना
D. राजनीतिक परिवर्तन को समझाना
उत्तर: B. समाज के क्रम, एकता और संतुलन को स्पष्ट करना
व्याख्या:
Auguste Comte ने Social Statics (सामाजिक स्थैतिकी) को समाजशास्त्र का पहला मूल स्तंभ माना।
इसका केंद्रीय उद्देश्य है—समाज के Order (क्रम), Harmony (एकता) और Equilibrium (संतुलन) की व्याख्या करना।
कॉम्ट के अनुसार:
- समाज मात्र व्यक्तियों का समूह नहीं
- बल्कि एक संगठित संरचना (organized structure) है
- जहाँ संस्थाएँ (Institutions) एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं
- और इनकी पारस्परिक क्रियाएँ समाज में स्थिरता पैदा करती हैं
सामाजिक स्थैतिकी किन चीज़ों का अध्ययन करती है?
- परिवार → सामाजिकता का प्रथम संस्थान
- भाषा → संस्कृति का संवाहक
- धर्म → नैतिक एकता का स्रोत
- विभाजन-ए-श्रम (Division of Labour) → सामाजिक संगठन
- नैतिकता एवं सह-अनुभूति (Moral sentiments) → सामाजिक एकजुटता
ये सभी तत्व मिलकर समाज की एकता, निरंतरता और संतुलन बनाते हैं।
कॉम्ट का तर्क
यदि समाज में स्थिरता (Order) नहीं होगी,
तो प्रगति (Progress) संभव नहीं होगी।इसलिए Static (स्थैतिकी) समाज का “Structure” है,
और Dynamic (गतिशीलता) उसका “Development”।
12. कॉम्ट की “सामाजिक गतिशीलता” किस प्रक्रिया पर केंद्रित है?
A. सामाजिक नियंत्रण
B. सामाजिक प्रगति
C. सामाजिक विकृति
D. सामाजिक एकीकरण
उत्तर: B. सामाजिक प्रगति
व्याख्या:
Auguste Comte के अनुसार Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता) समाज के विकास (Development) और प्रगति (Progress) के वैज्ञानिक अध्ययन का नाम है।कॉम्ट का मुख्य तर्क
समाज निरंतर—
- सरल → जटिल
- सैन्य (Military) → औद्योगिक (Industrial)
- धार्मिक → वैज्ञानिक (Theological → Positive)
दिशा में आगे बढ़ता है।
यह आगे बढ़ने की प्रक्रिया ही सामाजिक गतिशीलता है।
सामाजिक गतिशीलता किन बातों को समझाती है?
- मानव विचारों का विकास (Three Stages Law)
- संस्थागत परिवर्तन
- बौद्धिक प्रगति
- वैज्ञानिक मानसिकता का उदय
- समाज की जटिलता में वृद्धि
कॉम्ट के लिए Progress ही समाज की गति का केंद्र है।
वे कहते हैं—
“Order is the basis of Progress.”
(“व्यवस्था प्रगति का आधार है।”)इसलिए स्थैतिकी (Order) और गतिशीलता (Progress) दोनों मिलकर समाज की पूर्ण व्याख्या करते हैं।
13. कॉम्ट की “सामाजिक गतिशीलता” की अवधारणा उनके किस सिद्धांत से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है?
A. सामाजिक संधि सिद्धांत
B. तीन अवस्थाओं के नियम
C. जैविक अनुरूपता सिद्धांत
D. सामाजिक एकता सिद्धांत
उत्तर: B. तीन अवस्थाओं के नियम (Law of Three Stages)
व्याख्या:
Auguste Comte की “Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता)” पूरी तरह से मानव विचार, ज्ञान, और समाज के विकास की प्रगति पर आधारित है।इसका मूल आधार है:
कॉम्ट का तीन अवस्थाओं का नियम (Law of Three Stages)
कॉम्ट का दावा था कि:
मानव समाज और मानव बुद्धि, दोनों तीन विकासात्मक चरणों (stages) से गुजरते हुए प्रगति करते हैं।
ये तीन चरण हैं—
- Theological Stage (धार्मिक अवस्था)
- समाज प्रकृति और घटनाओं का कारण अलौकिक शक्तियों में खोजता है।
- Metaphysical Stage (अधिभौतिक अवस्था)
- घटनाओं को दार्शनिक/सत्तात्मक शक्तियों से समझा जाता है।
- Positive Stage (वैज्ञानिक/प्रत्यक्षवादी अवस्था)
- समाज केवल तथ्यों, अवलोकन (observation) और वैज्ञानिक नियमों पर आधारित होता है।
सामाजिक गतिशीलता = समाज की इसी “ज्ञान-विकास यात्रा” का अध्ययन
सामाजिक गतिशीलता इस बात की व्याख्या करती है कि:
- समाज कैसे और क्यों बदलता है
- सामाजिक विचारों का विकास समाज को कैसे प्रगति की ओर ले जाता है
- धार्मिक सोच से वैज्ञानिक सोच तक के परिवर्तन से समाज किस दिशा में आगे बढ़ता है
इसलिए Social Dynamics और Law of Three Stages एक-दूसरे से अविभाज्य हैं।
14. कॉम्ट की स्थैतिकी और गतिशीलता की तुलना में डर्काइम ने किस पहलू को अधिक महत्व दिया?
A. व्यक्ति की भूमिका
B. सामाजिक तथ्यों की वस्तुनिष्ठता
C. समाज की नैतिक एकता
D. वर्ग संघर्ष
उत्तर: C. समाज की नैतिक एकता
व्याख्या:
एमीले डर्काइम (Emile Durkheim) ने कॉम्ट की स्थैतिकी और गतिशीलता की परंपरा को आगे बढ़ाया, लेकिन उन्होंने समाज की स्थिरता (Social Order) के लिए एक नए पहलू पर ज़ोर दिया:नैतिक एकता (Moral Integration)
- डर्काइम का मानना था कि सामाजिक संरचना तभी स्थिर रहती है जब समाज में नैतिक एकता हो।
- यह नैतिक एकता समाज के नियमों, मान्यताओं और साझा मूल्यों (collective conscience) के माध्यम से प्राप्त होती है।
सामाजिक एकजुटता (Solidarity)
डर्काइम ने Solidarity को दो प्रकार से परिभाषित किया:
- Mechanical Solidarity → परंपरा और समान मूल्यों पर आधारित
- Organic Solidarity → विशेषीकरण और आपसी निर्भरता पर आधारित
डर्काइम के अनुसार, यही सामाजिक स्थिरता (Static Balance) बनाए रखती है और समाज की क्रियाशीलता संभव बनाती है।
- कॉम्ट: सामाजिक स्थिरता का आधार संरचना और संस्थाएँ (Institutions) हैं।
- डर्काइम: सामाजिक स्थिरता का आधार नैतिक एकता (Moral Integration) और Solidarity) है।
इसलिए स्थैतिकी और गतिशीलता की तुलना में डर्काइम ने समाज की नैतिक एकता पर अधिक जोर दिया।
15. कॉम्ट की स्थैतिकी में “परिवार” की भूमिका किस प्रकार की मानी गई है?
A. उत्पादन का केंद्र
B. समाज की नैतिक शिक्षा का आधार
C. राजनीतिक संघर्ष का स्थल
D. आर्थिक असमानता का कारण
उत्तर: B. समाज की नैतिक शिक्षा का आधार
व्याख्या:
Auguste Comte के अनुसार परिवार (Family) समाज की सबसे छोटी और मूलभूत इकाई है।
यह केवल जैविक संरचना नहीं है, बल्कि सामाजिक स्थिरता (Social Statics) का महत्वपूर्ण आधार भी है।परिवार की भूमिका स्थैतिकी में (Role of Family in Social Statics)
- नैतिक शिक्षा (Moral Education)
- परिवार बच्चों को अनुशासन, सामाजिक मूल्य और नैतिक व्यवहार सिखाने का प्राथमिक स्थल है।
- सामाजिक चेतना (Social Consciousness)
- परिवार के माध्यम से समाज की मान्यताओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं का संचार पीढ़ी दर पीढ़ी होता है।
- स्थिरता और सामंजस्य (Stability & Harmony)
- परिवार समाज में सामाजिक व्यवस्था और एकता बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
कॉम्ट का दृष्टिकोण
- समाज की संरचना (Structure) परिवार से शुरू होती है।
- स्थिरता और प्रगति (Order and Progress) के लिए परिवार आवश्यक संस्थान है।
- परिवार सामाजिक क्रियाओं और नैतिकता का प्राथमिक शिक्षण स्थल है।
इसलिए कॉम्ट की स्थैतिकी में परिवार को “समाज की नैतिक शिक्षा का आधार” माना गया।
16. कॉम्ट की दृष्टि में समाज का विकास किस दिशा में होता है?
A. जटिल से सरल की ओर
B. यांत्रिक से जैविक की ओर
C. सामान्य से जटिल की ओर
D. आधुनिक से पारंपरिक की ओर
उत्तर: C. सामान्य से जटिल की ओर
व्याख्या:
Auguste Comte के अनुसार समाज की प्रगति (Progress) एक सतत विकास प्रक्रिया है, जो हमेशा सरल (Simple) → जटिल (Complex) की दिशा में होती है।मुख्य बिंदु:
- मानसिक विकास:
- मानव विचार धार्मिक (Theological) → दार्शनिक (Metaphysical) → वैज्ञानिक (Positive) स्तर तक विकसित होता है।
- इसे Comte ने “Law of Three Stages” में स्पष्ट किया है।
- नैतिक और सामाजिक विकास:
- सामाजिक संस्थाएँ और नियम समय के साथ अधिक जटिल और परिष्कृत बनते हैं।
- भौतिक और आर्थिक विकास:
- सरल सामाजिक संरचनाओं से औद्योगिक और शहरी समाजों तक का विकास।
समाज हमेशा सामान्य से जटिल, सरल से परिष्कृत, और साधारण से व्यवस्थित रूपों की ओर विकसित होता है।
यह विकास कॉम्ट की सामाजिक गतिशीलता (Social Dynamics) का मूल आधार है।
17. हर्बर्ट स्पेंसर ने कॉम्ट की स्थैतिकी और गतिशीलता की तुलना किस प्रकार के अध्ययन से की?
A. संरचनात्मक-कार्यात्मक
B. जैविक (Organic)
C. विकासात्मक (Evolutionary)
D. प्रणालीगत (Systemic)
उत्तर: B. जैविक (Organic)
व्याख्या:
Herbert Spencer ने Auguste Comte की Social Statics और Social Dynamics की अवधारणाओं को जैविक दृष्टिकोण (Organic Analogy) से समझाया।मुख्य बिंदु:
- समाज = सजीव जीव (Social Organism)
- समाज एक जीवित तंत्र (Living System) है, जिसमें विभिन्न अंग (Institutions) एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- जैसे शरीर में हृदय, मस्तिष्क और अंग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, वैसे ही समाज में परिवार, धर्म, भाषा और शिक्षा का आपसी संबंध होता है।
- स्थैतिकी (Statics)
- समाज की संरचना, संस्थाओं का संगठन और स्थिरता जैविक अंगों के समान है।
- गतिशीलता (Dynamics)
- समाज का विकास और प्रगति, जैविक विकास (Growth and Evolution) की तरह होती है।
स्पेंसर ने कॉम्ट के विचारों को जीवविज्ञान (Organic Analogy) से विस्तारित किया, जिससे समाज की स्थिरता और परिवर्तन की प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझा जा सके।
18. कॉम्ट की “सामाजिक गतिशीलता” पर कौन-सी आलोचना की गई है?
A. यह बहुत अधिक अमूर्त है
B. इसमें वैज्ञानिक तर्क की कमी है
C. यह केवल पश्चिमी विकास पर केंद्रित है
D. उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
व्याख्या:
कॉम्ट की Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता) पर आलोचनाएँ मुख्यतः निम्नलिखित हैं:
- अमूर्तता (Abstractness)
- कॉम्ट का समाजशास्त्र अत्यंत सिद्धांतात्मक और अमूर्त था।
- व्यवहारिक और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर इसकी व्याख्या सीमित थी।
- वैज्ञानिक तर्क की सीमाएँ (Lack of Empirical Evidence)
- उन्होंने समाज की प्रगति और विकास के नियमों को प्रस्तुत किया, लेकिन वास्तविक आंकड़ों और विविध सामाजिक अनुभवों पर आधारित ठोस वैज्ञानिक प्रमाण कम थे।
- पश्चिमी समाज पर केंद्रीकरण (Eurocentrism)
- कॉम्ट का विकास मॉडल मुख्यतः पश्चिमी समाज के ऐतिहासिक विकास (धार्मिक → दार्शनिक → वैज्ञानिक) पर आधारित था।
- यह अन्य संस्कृतियों और ऐतिहासिक विविधताओं को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
इसलिए कॉम्ट की सामाजिक गतिशीलता पर आलोचना यह कहती है कि यह बहुत अमूर्त, सीमित वैज्ञानिक आधार और पश्चिमी दृष्टिकोण केंद्रित है।
19. सोरोकिन ने कॉम्ट की गतिशीलता की अवधारणा की आलोचना करते हुए क्या तर्क दिया?
A. समाज स्थिर होता है
B. समाज का विकास चक्रीय होता है
C. समाज केवल संघर्ष से बदलता है
D. समाज में कोई क्रमिकता नहीं होती
उत्तर: B. समाज का विकास चक्रीय (Cyclical) होता है
व्याख्या:
पितिरिम सोरोकिन (Pitirim Sorokin) ने कॉम्ट की Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता) की अवधारणा पर आलोचना करते हुए कहा कि:
- विकास रैखिक नहीं है:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण यह मानता है कि समाज हमेशा सरल → जटिल और धार्मिक → दार्शनिक → वैज्ञानिक रैखिक क्रम में विकसित होता है।
- सोरोकिन ने इसे सीमित और यथार्थ से दूर माना।
- सामाजिक विकास चक्रीय है:
- सोरोकिन के अनुसार समाज विभिन्न सांस्कृतिक रूपों (Cultural Types) के बीच घूमता रहता है:
- Sensate → भौतिक-संवेदी संस्कृति
- Ideational → आध्यात्मिक-सांस्कृतिक संस्कृति
- Idealistic → संयोजनात्मक दृष्टिकोण
- समाज समय-समय पर इन चरणों के बीच चक्रीय रूप से बदलता है।
- कॉम्ट के दृष्टिकोण से भिन्न:
- कॉम्ट: प्रगति हमेशा रैखिक और निरंतर।
- सोरोकिन: प्रगति निरंतर नहीं, बल्कि चक्रीय और पुनरावृत्तिमूलक है।
20. कॉम्ट के समाजशास्त्र में “स्थैतिकी” और “गतिशीलता” के संतुलन का क्या दार्शनिक अर्थ क्या है?
A. यह समाज की स्थिरता और परिवर्तन के द्वंद्वात्मक एकीकरण को दर्शाता है
B. यह धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोणों का विरोध है
C. यह व्यक्ति और समाज के संघर्ष को रेखांकित करता है
D. यह केवल राजनीतिक व्यवस्था की व्याख्या है
उत्तर: A. यह समाज की स्थिरता और परिवर्तन के द्वंद्वात्मक एकीकरण को दर्शाता है
व्याख्या:
Auguste Comte के अनुसार:
- स्थैतिकी (Social Statics)
- समाज की संरचना, संस्थाएँ और एकता प्रदान करती है।
- यह समाज को स्थिरता और संतुलन देता है।
- गतिशीलता (Social Dynamics)
- समाज में परिवर्तन, प्रगति और विकास की प्रक्रिया को स्पष्ट करती है।
- यह समाज को रचनात्मक और उन्नत बनाती है।
- संतुलन का दार्शनिक अर्थ:
- स्थैतिकी और गतिशीलता का समन्वय (Integration) समाज के जीवन और संतुलन का आधार है।
- यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि स्थिरता और परिवर्तन आपस में विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं, और समाज के अस्तित्व के लिए दोनों आवश्यक हैं।
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हर प्रश्न के साथ उसकी विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation) दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर न याद करें, बल्कि विषय को गहराई से समझ सकें।
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