अगस्ट कॉम्ट की अध्ययन विधियाँ (Methods of Study): समाजशास्त्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Auguste Comte Methods of Study in Sociology) पर आधारित MCQs
1. अगस्ट कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र को भौतिक विज्ञानों की तरह वैज्ञानिक और व्यवस्थित रूप देने के लिए किस विधि को मूल आधार माना गया है?
(A) प्रत्यक्षवादी विधि (Positive Method)
(B) सांख्यिकीय विधि (Statistical Method)
(C) अनुमानात्मक विधि (Hypothetical Method)
(D) सैद्धान्तिक विधि (Theoretical Method)
उत्तर: (A) प्रत्यक्षवादी विधि
व्याख्या:
- प्रत्यक्षवादी विधि का महत्व:
- अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को भौतिक विज्ञानों की तरह वैज्ञानिक बनाने के लिए प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण (Positivism) अपनाया।
- इसका अर्थ है कि सभी सामाजिक अध्ययन तथ्यों और अनुभवजन्य अवलोकन (empirical observation) पर आधारित होने चाहिए।
- सिद्धांत और नियमों का पालन:
- निष्कर्ष केवल व्यक्तिगत राय या अनुमान पर आधारित नहीं होने चाहिए।
- निष्कर्षों को वैज्ञानिक नियमों और तर्कसंगत सिद्धांतों के अनुरूप होना आवश्यक है।
- उदाहरण:
- परिवार की संरचना का अध्ययन करते समय केवल परिवार के सदस्यों को देखना पर्याप्त नहीं है; इसे समाज की व्यापक संरचना और सामाजिक नियमों के संदर्भ में जोड़ा जाना चाहिए।
प्रत्यक्षवादी विधि समाजशास्त्र को वैज्ञानिक, व्यवस्थित और तथ्य-आधारित अध्ययन का माध्यम बनाती है, जो समाज में परिवर्तन और नियमों की खोज को संभव बनाती है।
2. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र में किसी निष्कर्ष को वैध मानने के लिए कौन-सी दो शर्तें आवश्यक हैं?
(A) निष्कर्ष धार्मिक ग्रंथों पर आधारित हो और तर्कसंगत हो
(B) निष्कर्ष अनुभवजन्य तथ्य पर आधारित हो और वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप हो
(C) निष्कर्ष परंपरागत विचारों पर आधारित हो और जन-समर्थित हो
(D) निष्कर्ष सांख्यिकीय औसतों पर आधारित हो और तुलनात्मक हो
उत्तर: (B) निष्कर्ष अनुभवजन्य तथ्य पर आधारित हो और वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप हो
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और व्यवस्थित अध्ययन का विषय बनाने के लिए दो मूल शर्तें निर्धारित कीं:
1. तथ्य आधारित (Fact-based): सभी निष्कर्ष अनुभवजन्य तथ्यों पर आधारित होने चाहिए, न कि व्यक्तिगत राय या अटकलों पर।
2. वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप (Conformity with Scientific Laws): निष्कर्ष को सामान्य विज्ञान के नियमों और तर्कसंगत सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।- महत्व:
- इन शर्तों के बिना समाजशास्त्र अनियमित और अनुमानपरक अध्ययन बन जाता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि सामाजिक घटनाओं के पीछे छुपे नियमों और संरचना को सही रूप में समझा जा सके।
- उदाहरण:
- केवल अपराध की घटनाओं की गिनती करना पर्याप्त नहीं है।
- इसे सामाजिक कारणों, आर्थिक स्थिति, वर्ग विभाजन और अन्य सामाजिक कारकों के संदर्भ में अध्ययन करना आवश्यक है।
समाजशास्त्र में निष्कर्ष की वैधता तथ्यों पर आधारित होना और वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है। यह कॉम्ट की प्रत्यक्षवादी विधि की दो मूल शर्तों में से एक महत्वपूर्ण शर्त है।
3. कॉम्ट के अनुसार “तथ्य को बिना सिद्धान्त के देखना अर्थहीन है” — यह कथन किस विधि से संबंधित है?
(A) तुलनात्मक विधि
(B) ऐतिहासिक विधि
(C) अवलोकन विधि
(D) प्रायोगिक विधि
उत्तर: (C) अवलोकन विधि
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र में अवलोकन (Observation) को केवल सैद्धान्तिक दृष्टि से नियंत्रित अवलोकन माना।
- उनका कथन: “A fact without theory is meaningless in social study.”
का अर्थ है कि सिर्फ तथ्य को देखना पर्याप्त नहीं, उसे किसी सैद्धान्तिक और तर्कसंगत संदर्भ में समझना आवश्यक है।- अवलोकन विधि की विशेषताएँ:
- तथ्यों का अध्ययन सैद्धान्तिक ढांचे में: केवल आँकड़े या घटना नहीं, बल्कि समाज के नियम और संरचना को समझने के लिए।
- नैतिक या व्यक्तिगत राय से परे: अवलोकन निष्पक्ष और अनुभवजन्य होना चाहिए।
- अन्य विधियों के साथ संयोजन: तुलनात्मक और ऐतिहासिक विधि के साथ मिलकर सामाजिक नियमों की पहचान में मदद करती है।
- उदाहरण:
- परिवार संरचना का अध्ययन:
केवल परिवार के सदस्यों और उनके व्यवहार को देखना पर्याप्त नहीं।
इसे समाज की व्यापक संरचना, वर्ग, आर्थिक स्थिति और सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़कर समझना आवश्यक है।कॉम्ट के अनुसार अवलोकन विधि का मूल सिद्धांत यह है कि तथ्यों का अध्ययन केवल तब ही अर्थपूर्ण होता है जब उन्हें किसी सैद्धान्तिक और वैज्ञानिक ढांचे में रखा जाए।
4. कॉम्ट ने समाजशास्त्र के अध्ययन में प्रयोगात्मक विधि को किस सीमा तक उपयोगी माना?
(A) सामाजिक घटनाओं के प्रत्यक्ष प्रयोग हेतु
(B) सामाजिक विकृतियों के विश्लेषण हेतु
(C) गणितीय समीकरणों के निर्माण हेतु
(D) नैतिक मूल्यों की परीक्षा हेतु
उत्तर: (B) सामाजिक विकृतियों के विश्लेषण हेतु
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- अगस्ट कॉम्ट ने कहा कि सामाजिक घटनाओं पर प्रयोगशाला जैसी प्रत्यक्ष प्रयोग विधि लागू नहीं की जा सकती।
- समाज को नियंत्रित प्रयोगशाला की तरह नियंत्रित करना कठिन है।
- परंतु, असामान्य या विकृत सामाजिक अवस्थाएँ (जैसे अपराध, बेरोजगारी, जनसंख्या विस्फोट) “प्रयोगात्मक अध्ययन” की तरह विश्लेषण की जा सकती हैं।
- प्रयोगात्मक विश्लेषण की उपयोगिता:
- समाज में असामान्य स्थितियों का अध्ययन करके सामाजिक नियम और संरचना की पहचान की जा सकती है।
- इसे सामाजिक रोगविज्ञान (Social Pathology) का प्रारंभिक आधार माना गया।
- उदाहरण: उच्च अपराध दर या बेरोजगारी → समाज के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में अंतर्विरोध → सुधार और नीतिगत सुझाव।
- सीमाएँ:
- वास्तविक प्रयोगशाला जैसा नियंत्रित प्रयोग समाजशास्त्र में संभव नहीं।
- अध्ययन अवलोकन और तुलनात्मक विधि के साथ संयोजन में होना चाहिए।
कॉम्ट के अनुसार प्रयोगात्मक विधि समाजशास्त्र में सामाजिक विकृतियों और असामान्य स्थितियों के विश्लेषण के लिए उपयोगी है।
यह विधि समाज के नियमों और संरचना की गहन समझ प्रदान करती है, जबकि प्रत्यक्ष प्रयोगशाला के अनुभव सामाजिक अध्ययन में सीमित हैं।
5. कॉम्ट की कौन-सी विधि समाजशास्त्र की “केन्द्रीय विधि” कही जाती है?
(A) अवलोकन विधि
(B) तुलनात्मक विधि
(C) ऐतिहासिक विधि
(D) प्रायोगिक विधि
उत्तर: (B) तुलनात्मक विधि
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- तुलनात्मक विधि (Comparative Method) को कॉम्ट ने समाजशास्त्र की केन्द्रीय विधि माना।
- इसका उद्देश्य विभिन्न समाजों या समाज की विभिन्न संरचनाओं के बीच समानताएँ और भिन्नताएँ पहचानना है।
- इससे सामाजिक नियमों और सार्वभौमिक सिद्धांतों की खोज संभव होती है।
- उपयोगिता:
- मानव समाज और पशु समाज के तुलनात्मक अध्ययन में।
- विभिन्न समाजों के ऐतिहासिक और सामाजिक संरचनाओं की तुलना करके सामाजिक विकास और प्रगति के नियम ज्ञात करना।
- यह विधि सामाजिक भौतिकी (Social Physics) के उद्देश्य की पूर्ति करती है।
- उदाहरण:
- सामन्तवादी और पूंजीवादी समाज की तुलना → वर्ग संरचना, श्रम और उत्पादन सम्बन्धों की समझ।
- ग्रामीण और शहरी समाज की तुलना → सामाजिक प्रथाओं और आर्थिक संरचना में भिन्नताएँ।
कॉम्ट के अनुसार तुलनात्मक विधि समाजशास्त्र की केन्द्रीय विधि है क्योंकि यह सामाजिक संरचनाओं और विकास के सार्वभौमिक नियमों की खोज में सहायक है।
इस विधि के माध्यम से विभिन्न समाजों की समानताओं और अंतरों का विश्लेषण करके समाज के नियमों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।
6. कॉम्ट की ऐतिहासिक विधि का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(A) वर्तमान समाज की कार्यप्रणाली समझना
(B) समाजों के ऐतिहासिक विकास और सामान्य नियमों की खोज करना
(C) केवल प्राचीन समाजों की तुलना करना
(D) व्यक्तियों के नैतिक विकास का अध्ययन करना
उत्तर: (B) समाजों के ऐतिहासिक विकास और सामान्य नियमों की खोज करना
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- ऐतिहासिक विधि (Historical Method) का उद्देश्य केवल वर्तमान समाज का अध्ययन नहीं है।
- इसका उद्देश्य समाजों के विकास (Evolution) के सामान्य नियमों को पहचानना है।
- यह विधि Three Stages of Knowledge सिद्धांत (Theological → Metaphysical → Positive) पर आधारित है।
- उपयोगिता:
- विभिन्न समाजों के बीच समानताएँ और भिन्नताएँ पहचानकर सामाजिक नियमों की खोज।
- ऐतिहासिक दृष्टि से समाज की सामाजिक संरचना, संस्थाएँ और विकास प्रक्रिया को समझना।
- यह विधि समाजशास्त्र को वैज्ञानिक अनुशासन बनाने में मदद करती है।
- उदाहरण:
- आदिम सामुदायिक समाज से दास-स्वामित्व, सामन्तवाद और पूंजीवाद तक की सामाजिक संरचना और वर्ग संघर्ष का ऐतिहासिक विश्लेषण।
- इतिहास के विभिन्न चरणों में सामाजिक नियमों और उत्पादन सम्बन्धों के बदलाव का अध्ययन।
कॉम्ट के अनुसार ऐतिहासिक विधि समाजशास्त्र का एक केंद्रीय उपकरण है।
इसके माध्यम से समाजों के ऐतिहासिक विकास और सार्वभौमिक नियमों की पहचान संभव होती है, जिससे समाज में परिवर्तन और प्रगति के नियमों को वैज्ञानिक रूप से समझा जा सकता है।
7. कॉम्ट की प्रायोगिक विधि की प्रेरणा उन्होंने किस विज्ञान से ली थी?
(A) भौतिक विज्ञान
(B) जीव विज्ञान
(C) गणित
(D) मनोविज्ञान
उत्तर: (B) जीव विज्ञान
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट समाज को एक जीव (Organism) की तरह मानते थे।
- उन्होंने कहा कि समाज में विकृतियाँ और असामान्यताएँ उसी तरह होती हैं जैसे जीव में रोग।
- इसलिए समाज के अध्ययन में जीव विज्ञान (Biology) की विधियों और सिद्धांतों से प्रेरणा ली।
- प्रायोगिक विधि में उपयोगिता:
- समाज की असामान्य स्थितियाँ (जैसे अपराध, बेरोजगारी, जनसंख्या विस्फोट) समाज के “रोग” की तरह हैं।
- इन सामाजिक रोगों का अध्ययन समाज की सामाजिक संरचना और नियम को समझने में मदद करता है।
- इसे कॉम्ट ने सामाजिक रोगविज्ञान (Social Pathology) के प्रारंभिक आधार के रूप में प्रस्तुत किया।
- सीमाएँ:
- समाज को पूरी तरह प्रयोगशाला की तरह नियंत्रित करना संभव नहीं।
- इसलिए यह सैद्धान्तिक और तुलनात्मक अध्ययन के साथ संयोजन में लागू होती है।
कॉम्ट ने अपनी प्रायोगिक विधि में जीव विज्ञान से प्रेरणा ली, ताकि समाज को जीव की तरह एक समग्र प्रणाली मानते हुए उसकी विकृतियों और असामान्यताओं का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके।
यह दृष्टिकोण समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक स्तर पर लाने का प्रयास है।
8. कॉम्ट के अनुसार समाज में बेरोजगारी, अपराध या जनसंख्या-विस्फोट को किस दृष्टि से देखा जाना चाहिए?
(A) ऐतिहासिक तथ्य
(B) सांस्कृतिक विचलन
(C) सामाजिक व्याधि
(D) मनोवैज्ञानिक विचलन
उत्तर: (C) सामाजिक व्याधि (Social Pathology)
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट समाज को एक जीव (Organism) के समान मानते थे।
- समाज में जब असंतुलन या विकृति उत्पन्न होती है, जैसे बेरोजगारी, अपराध, जनसंख्या विस्फोट, तो यह समाज की बीमारी या रोग के रूप में देखा जाना चाहिए।
- इसे उन्होंने Social Pathology (सामाजिक रोगविज्ञान) कहा।
- प्रयोगात्मक विश्लेषण:
- यह दृष्टिकोण समाज की असामान्य स्थितियों का वैज्ञानिक अध्ययन करने में सहायक है।
- सामाजिक रोगों का अध्ययन समाज की सामाजिक संरचना, नियम और सुधार की संभावनाओं को समझने में मदद करता है।
- उदाहरण:
- अत्यधिक अपराध दर: समाज में असमानता और न्याय व्यवस्था की विकृति का संकेत।
- बेरोजगारी: आर्थिक ढांचे में असंतुलन, उत्पादन साधनों और रोजगार सम्बन्धों की समस्या।
- जनसंख्या विस्फोट: सामाजिक नियोजन और संसाधन प्रबंधन की विफलता।
कॉम्ट के अनुसार, सामाजिक विकृतियाँ या असंतुलन समाज के रोग (Social Pathology) के समान हैं।
इन्हें समझना और अध्ययन करना समाजशास्त्र का उद्देश्य है, जिससे सामाजिक सुधार और नियमों की खोज संभव हो सके।
9. कॉम्ट ने समाजशास्त्र को किस नाम से पुकारा था?
(A) Social Philosophy
(B) Social Physics
(C) Social Metaphysics
(D) Social Morality
उत्तर: (B) Social Physics
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने समाज को एक वैज्ञानिक प्रणाली मानकर उसका अध्ययन किया।
- प्रारंभ में उन्होंने समाजशास्त्र को “Social Physics” (सामाजिक भौतिकी) कहा।
- इसका उद्देश्य समाज में नियम और स्थिरता की खोज करना था, जैसे भौतिक विज्ञानों में नियम होते हैं।
- Social Physics का महत्व:
- यह दृष्टिकोण समाज में सामाजिक नियमों, संरचनाओं और प्रक्रियाओं को समझने में मदद करता है।
- बाद में कॉम्ट ने इसे “Sociology” नाम दिया, जो समाजशास्त्र के आधुनिक नाम के रूप में प्रचलित हुआ।
- सिद्धांत:
- समाज में परिवर्तन और स्थिरता के नियम खोजने का प्रयास।
- समाज को एक संगठित और नियमबद्ध प्रणाली के रूप में देखना।
कॉम्ट ने समाजशास्त्र को प्रारंभ में “Social Physics” कहा ताकि इसे भौतिक विज्ञानों की तरह वैज्ञानिक, नियमबद्ध और विश्लेषणात्मक बनाया जा सके।
बाद में उन्होंने इसे Sociology का आधुनिक रूप दिया, जो आज समाजशास्त्र के लिए मानक शब्द है।
10. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का कोई भी अध्ययन कब तक अर्थपूर्ण नहीं हो सकता?
(A) जब तक वह मानवीय नैतिकता पर केंद्रित न हो
(B) जब तक वह ऐतिहासिक उत्क्रांति के नियमों को न खोजे
(C) जब तक वह केवल वर्तमान सामाजिक व्यवहार न मापे
(D) जब तक वह सांख्यिकीय रूप से न किया जाए
उत्तर: (B) जब तक वह ऐतिहासिक उत्क्रांति के नियमों को न खोजे
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक और तार्किक अनुशासन बनाने का प्रयास किया।
- उनका मानना था कि समाज का अध्ययन केवल वर्तमान सामाजिक व्यवहार को देखकर अधूरा रहेगा।
- ऐतिहासिक उत्क्रांति (Historical Development):
- समाजशास्त्र का उद्देश्य समाजों के विकास और उनके सामान्य नियमों को समझना है।
- इसे उन्होंने “Historical Development of Human Mind” के रूप में प्रस्तुत किया।
- यह दृष्टिकोण उनके Three Stages of Knowledge सिद्धांत (Theological → Metaphysical → Positive) से जुड़ा हुआ है।
- सिद्धांत:
- केवल तथ्य देखने से ज्ञान नहीं बनता, बल्कि यह समझना आवश्यक है कि समाज किस तरह विकसित होता है और किन नियमों के तहत परिवर्तन करता है।
- ऐतिहासिक नियमों की खोज से ही सामाजिक भविष्यवाणी और सुधार संभव हो पाता है।
कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र तब तक पूर्णतः अर्थपूर्ण और वैज्ञानिक नहीं हो सकता जब तक कि वह समाज की ऐतिहासिक उत्क्रांति और उसके विकास को संचालित करने वाले सामान्य नियमों की खोज न करे।
इस दृष्टिकोण से समाजशास्त्र में वर्तमान और अतीत दोनों का अध्ययन आवश्यक है।
11. कॉम्ट द्वारा प्रत्यक्षवादी विधि (Positive Method) की स्थापना का अंतिम उद्देश्य क्या था?
(A) समाजशास्त्र को मानवीय मूल्यों से जोड़ना
(B) समाज के अध्ययन में धार्मिक दृष्टिकोण लागू करना
(C) समाजशास्त्र को एक भविष्यवाणी करने वाला विज्ञान बनाना
(D) समाज को केवल ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर समझना
उत्तर: (C) समाजशास्त्र को एक भविष्यवाणी करने वाला विज्ञान बनाना
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने समाज को एक वैज्ञानिक प्रणाली मानकर उसका अध्ययन करने की प्रत्यक्षवादी विधि प्रस्तुत की।
- उनका उद्देश्य यह था कि समाजशास्त्र भौतिक विज्ञानों की तरह भविष्यवाणी कर सके।
- भविष्यवाणी का अर्थ:
- समाज में घटित होने वाली घटनाओं का अध्ययन करके, सामान्य नियमों की खोज करना।
- उदाहरण: जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक विकृतियाँ, वर्ग संघर्ष आदि की संभावित दिशा और परिणामों का अनुमान।
- सिद्धांत:
- Observation + Comparative + Historical + Experimental Methods के माध्यम से समाजशास्त्र सामाजिक घटनाओं के पैटर्न और नियम पहचान सके।
- यह दृष्टिकोण समाजशास्त्र को प्रयोगात्मक और विश्लेषणात्मक विज्ञान बनाता है।
कॉम्ट का मुख्य उद्देश्य था कि समाजशास्त्र एक भविष्यवाणी करने वाला विज्ञान बने।
इसका अर्थ यह है कि समाजशास्त्र सामाजिक घटनाओं की पूर्व-कथनीयता और नियमों की पहचान में सक्षम हो, जैसे प्राकृतिक विज्ञानों में नियमों के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है।
12. कॉम्ट द्वारा प्रत्यक्षवादी विधि को अपनाने की प्रेरणा किस वैज्ञानिक आंदोलन से मिली थी?
(A) प्रबोधन आंदोलन
(B) औद्योगिक क्रांति
(C) गणितीय तर्कवाद का उदय
(D) जीववैज्ञानिक विकासवाद
उत्तर: (A) प्रबोधन आंदोलन (Enlightenment Movement)
व्याख्या:
- कॉम्ट और प्रबोधन आंदोलन:
- यूरोप में 17वीं–18वीं शताब्दी के प्रबोधन (Enlightenment) आंदोलन ने तर्क, अनुभव और वैज्ञानिक पद्धति को ज्ञान का मुख्य आधार माना।
- इस आंदोलन ने धार्मिक अंधविश्वास और परंपरागत दृष्टिकोण की आलोचना की।
- कॉम्ट ने इसे अपनाया और समाजशास्त्र में वैज्ञानिक विधि और प्रत्यक्षवाद लागू किया।
- प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण (Positive Method):
- केवल सिद्धांत या मान्यताओं पर भरोसा नहीं, बल्कि प्रयोग, अवलोकन और तर्क पर आधारित अध्ययन।
- समाज में घटित घटनाओं की पूर्वकथनीयता और नियमों की खोज का उद्देश्य।
- सिद्धांत और उदाहरण:
- उदाहरण: सामाजिक विकृतियों (जैसे अपराध, बेरोजगारी) का विश्लेषण सैद्धांतिक और अनुभवजन्य दृष्टि से, जैसा प्राकृतिक विज्ञानों में रोगों का अध्ययन किया जाता है।
- यह दृष्टिकोण Comte का Social Physics और Sociology का वैज्ञानिक आधार बन गया।
कॉम्ट ने प्रबोधन आंदोलन (Enlightenment) से प्रेरणा लेकर समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और प्रत्यक्षवादी विधि पर आधारित बनाया।
इसका उद्देश्य था कि समाजशास्त्र सामाजिक घटनाओं के नियम और भविष्यवाणी में सक्षम हो, जैसे प्राकृतिक विज्ञान में नियम आधारित अध्ययन होता है।
13. कॉम्ट द्वारा बताए गए चार विधियों में से कौन-सी विधि “समाजों की तुलना” के बजाय “समाजों के विकास” पर केंद्रित है?
(A) तुलनात्मक विधि
(B) ऐतिहासिक विधि
(C) प्रायोगिक विधि
(D) अवलोकन विधि
उत्तर: (B) ऐतिहासिक विधि
व्याख्या:
- तुलनात्मक विधि बनाम ऐतिहासिक विधि:
- तुलनात्मक विधि (Comparative Method):
- विभिन्न समाजों के समानताओं और भिन्नताओं का अध्ययन करती है।
- समाजों के संरचनात्मक और संस्थागत नियमों को समझने में सहायक।
- ऐतिहासिक विधि (Historical Method):
- समाजों के दीर्घकालिक विकास (Evolution) और परिवर्तन का अध्ययन करती है।
- यह विधि यह खोजती है कि समाजों में सामान्य नियम और प्रगति के क्रमिक चरण कैसे चलते हैं।
- ऐतिहासिक विधि का महत्व:
- समाजशास्त्र केवल वर्तमान का अध्ययन नहीं, बल्कि समाज के ऐतिहासिक उत्क्रांति (Historical Development) और परिवर्तन को भी समझना चाहिए।
- कॉम्ट ने इसे “Historical Development of Human Mind” के रूप में प्रस्तुत किया, जो उनके Three Stages of Knowledge सिद्धांत का आधार भी है।
- उदाहरण:
- आदिम समाज → दास-स्वामित्व → सामन्तवाद → पूंजीवाद → समाजवाद/कम्युनिज़्म।
- ऐतिहासिक विधि प्रत्येक युग में सामाजिक नियमों, संरचना और प्रगति को समझने में सहायक है।
कॉम्ट की ऐतिहासिक विधि समाजों के विकास और परिवर्तन पर केंद्रित है, जबकि तुलनात्मक विधि केवल समाजों के समानताओं और भिन्नताओं का अध्ययन करती है।
यह दृष्टिकोण समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक नियमों के आधार पर समझने में सहायक बनाता है।
14. कॉम्ट ने कहा था कि “प्रत्येक विज्ञान को उसी क्रम में विकसित होना चाहिए जिस क्रम में मानव मस्तिष्क विकसित होता है।” — यह कथन किस विधि से संबंधित है?
(A) ऐतिहासिक विधि
(B) अवलोकन विधि
(C) तुलनात्मक विधि
(D) प्रत्यक्षवादी विधि
उत्तर: (A) ऐतिहासिक विधि
व्याख्या:
- तीन अवस्थाओं का नियम (Law of Three Stages):
- कॉम्ट के अनुसार मानव ज्ञान और समाज का विकास तीन अवस्थाओं से गुजरता है:
- धार्मिक (Theological) अवस्था – प्राकृतिक घटनाओं को देवी‑देवताओं और अलौकिक शक्तियों से जोड़कर समझना।
- दर्शन‑तर्क/कल्पनात्मक (Metaphysical) अवस्था – प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या abstract तर्क और दर्शन के माध्यम से।
- वैज्ञानिक / प्रत्यक्षवादी (Positive) अवस्था – घटनाओं का तथ्य‑आधारित और वैज्ञानिक विश्लेषण।
- ऐतिहासिक विधि का सम्बन्ध:
- कॉम्ट ने कहा कि समाज और विज्ञान का विकास मानव मस्तिष्क की प्रगति के समान क्रम में होना चाहिए।
- इसलिए यह कथन ऐतिहासिक विधि से जुड़ा है, क्योंकि यह समाजों के सैद्धांतिक और ऐतिहासिक विकास के क्रम को दर्शाता है।
- महत्व:
- ऐतिहासिक विधि समाजशास्त्र को केवल वर्तमान घटनाओं के अध्ययन तक सीमित नहीं रखती।
- यह समाज के ऐतिहासिक उत्क्रांति (Evolution) और नियमों की खोज करती है।
- मानव मस्तिष्क और समाज की प्रगति का क्रम एक-दूसरे से संबंधित है।
कॉम्ट का यह कथन ऐतिहासिक विधि से संबंधित है, जो समाज और विज्ञान के ऐतिहासिक और तार्किक विकास को समझने में सहायक है।
मानव मस्तिष्क की प्रगति का क्रम समाजों के विकास का दर्पण है।
15. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्रीय अनुसंधान में गणित की क्या भूमिका है?
(A) यह एक अनिवार्य वैज्ञानिक आधार है
(B) यह सहायक उपकरण है, पर मूल आधार नहीं
(C) यह समाजशास्त्र की केंद्रीय विधि है
(D) यह समाज की नैतिकता को मापने का माध्यम है
उत्तर: (B) यह सहायक उपकरण है, पर मूल आधार नहीं
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और तथ्य-आधारित अध्ययन बनाने का प्रयास किया।
- उन्होंने गणित को उपयोगी माना क्योंकि यह संगति और निश्चितता प्रदान करता है।
- परंतु, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गणितीय विश्लेषण समाजशास्त्र का मूल आधार नहीं हो सकता।
- अनुभवजन्य तथ्यों का महत्व:
- समाज का अध्ययन अवलोकन, तुलनात्मक और ऐतिहासिक विधियों से करना चाहिए।
- तथ्य और वैज्ञानिक नियमों पर आधारित निष्कर्ष समाजशास्त्र का मुख्य आधार हैं।
- गणित केवल सहायक उपकरण (Auxiliary Tool) के रूप में काम करता है, जैसे कि सांख्यिकी और डेटा विश्लेषण में।
- उदाहरण:
- जनसंख्या वृद्धि, बेरोज़गारी दर, अपराध दर आदि के आँकड़े गणितीय रूप से उपयोगी हैं।
- परंतु समाज में बदलाव और नियमों की व्याख्या केवल तथ्य-आधारित अवलोकन और ऐतिहासिक विश्लेषण से ही संभव है।
कॉम्ट के अनुसार, गणित समाजशास्त्र में सहायक उपकरण के रूप में महत्वपूर्ण है, परंतु समाज का अध्ययन हमेशा अनुभवजन्य तथ्यों और वैज्ञानिक नियमों के आधार पर होना चाहिए।
16. कॉम्ट की प्रायोगिक विधि समाजशास्त्र में सीमित क्यों है?
(A) क्योंकि यह केवल मनोविज्ञान में उपयोगी है
(B) क्योंकि समाज स्थिर नहीं है
(C) क्योंकि समाज में प्रयोगशाला जैसी स्थितियाँ निर्मित नहीं की जा सकतीं
(D) क्योंकि समाज में कोई नियम नहीं हैं
उत्तर: (C) क्योंकि समाज में प्रयोगशाला जैसी स्थितियाँ निर्मित नहीं की जा सकतीं
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने समाज को एक वास्तविक और जीवंत प्रणाली के रूप में देखा।
- उन्होंने कहा कि सामाजिक घटनाओं पर प्रयोगशाला जैसी नियंत्रित परिस्थितियाँ लागू नहीं की जा सकतीं, क्योंकि समाज अनेक अंतःक्रियात्मक और अप्रत्याशित कारकों से प्रभावित होता है।
- सामाजिक प्रयोग की सीमाएँ:
- समाज स्थिर नहीं है; इसमें भौगोलिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कारक लगातार बदलते रहते हैं।
- इसलिए, प्राकृतिक विज्ञानों की तरह Controlled Experiments करना समाजशास्त्र में संभव नहीं।
- परंतु उपयोगिता:
- कॉम्ट ने कहा कि सामाजिक विकृतियों और असमानताओं का अध्ययन प्रायोगिक दृष्टि से किया जा सकता है, जैसे कि “सामाजिक रोगविज्ञान (Social Pathology)” में।
- उदाहरण: बेरोज़गारी, अपराध, जनसंख्या विस्फोट आदि का विश्लेषण, समाज में “अनियमितताओं” को समझने के लिए प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के समान है।
कॉम्ट के अनुसार, समाज में प्रायोगिक विधि सीमित है क्योंकि समाज को पूर्ण रूप से नियंत्रित परिस्थिति में नहीं रखा जा सकता। फिर भी, समाज की असमानताओं और विकृतियों का अध्ययन समान्य प्रयोगात्मक विश्लेषण की तरह किया जा सकता है।
17. कॉम्ट द्वारा “सामाजिक व्याधि (Social Pathology)” की अवधारणा किस विधि की उपज है?
(A) तुलनात्मक विधि
(B) ऐतिहासिक विधि
(C) प्रायोगिक विधि
(D) अवलोकन विधि
उत्तर: (C) प्रायोगिक विधि
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने समाज को एक जीवित प्रणाली (Living Organism) की तरह देखा।
- जैसे किसी जीव में रोग उसके शरीर में गड़बड़ी को दर्शाता है, वैसे ही समाज में असामान्यताएँ और विकृतियाँ समाज की स्वास्थ्य और संरचना में समस्याएँ दिखाती हैं।
- सामाजिक व्याधि (Social Pathology):
- सामाजिक व्याधियाँ वह घटनाएँ हैं जो समाज के संतुलन या सामंजस्य को बाधित करती हैं।
- उदाहरण: अपराध, बेरोज़गारी, जनसंख्या विस्फोट, आर्थिक असमानताएँ।
- इनका अध्ययन प्रायोगिक/विश्लेषणात्मक दृष्टि से किया जाता है, ताकि समाज में नियम और पैटर्न समझे जा सकें।
- प्रायोगिक विधि की उपयुक्तता:
- हालांकि समाज में नियंत्रित प्रयोग (Laboratory Experiment) करना कठिन है,
- फिर भी, सामाजिक असमानताओं का विवेचनात्मक विश्लेषण “Experimental Method in Sociology” के समान है।
कॉम्ट के अनुसार, सामाजिक व्याधि की अवधारणा प्रायोगिक विधि की उपज है। यह समाज में असामान्यताओं और विकृतियों का विश्लेषण कर सामाजिक नियमों और संरचना को समझने का एक वैज्ञानिक तरीका प्रदान करती है।
18. कॉम्ट की तुलनात्मक विधि का उपयोग किस प्रश्न के उत्तर खोजने के लिए किया जाता है?
(A) समाजों में समानता और भिन्नता क्यों होती है?
(B) सामाजिक घटनाओं की भविष्यवाणी कैसे की जाए?
(C) मानव चेतना कैसे विकसित होती है?
(D) सामाजिक मूल्य क्यों स्थिर रहते हैं?
उत्तर: (A) समाजों में समानता और भिन्नता क्यों होती है?
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- तुलनात्मक विधि (Comparative Method) समाजशास्त्र की केन्द्रीय विधि है।
- इसका उद्देश्य यह समझना है कि क्यों कुछ समाज समान ऐतिहासिक और भौगोलिक परिस्थितियों में भी दूसरों से आगे बढ़ते हैं, जबकि अन्य पीछे रह जाते हैं।
- तुलनात्मक अध्ययन के उपयोग:
- मानव और पशु समाज का तुलनात्मक अध्ययन।
- विभिन्न समाजों या एक ही समाज के वर्ग व्यवस्था की तुलना।
- इससे सामाजिक संरचना और विकास के सार्वभौमिक नियमों की खोज संभव होती है।
- सिद्धांत का महत्व:
- तुलनात्मक अध्ययन से यह पता चलता है कि सामाजिक प्रगति का पैटर्न नियमबद्ध है।
- यह समाजशास्त्र को वैज्ञानिक, अनुभवजन्य और विश्लेषणात्मक बनाने में सहायक है।
कॉम्ट की तुलनात्मक विधि समाजों में समानता और भिन्नता की व्याख्या करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह विधि समाजशास्त्र को वैज्ञानिक विश्लेषण और सार्वभौमिक नियमों की खोज की दिशा देती है।
19. कॉम्ट के अनुसार अवलोकन (Observation) का सही स्वरूप क्या होना चाहिए?
(A) निष्पक्ष और उद्देश्यहीन अवलोकन
(B) सैद्धान्तिक ढाँचे से जुड़ा व्यवस्थित अवलोकन
(C) व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित अवलोकन
(D) राजनीतिक दृष्टि से निर्देशित अवलोकन
उत्तर: (B) सैद्धान्तिक ढाँचे से जुड़ा व्यवस्थित अवलोकन
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- कॉम्ट ने कहा कि सिर्फ तथ्य को देखना पर्याप्त नहीं है, उसे सैद्धान्तिक संदर्भ और व्यवस्थित ढांचे में देखना आवश्यक है।
- यही अवलोकन विधि (Observation Method) का मूल सिद्धांत है।
- वैज्ञानिक अवलोकन के तत्व:
- तथ्य (Facts) और सिद्धान्त (Theory) का संपूर्ण समन्वय।
- अवलोकन अनियमित या व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित नहीं, बल्कि सैद्धान्तिक ढाँचे से नियंत्रित होना चाहिए।
- उदाहरण: परिवार के व्यवहार का अध्ययन समाज की व्यापक संरचना और नियमों से जोड़कर करना।
- महत्त्व:
- यह पद्धति समाजशास्त्र को भौतिक विज्ञानों की तरह वैज्ञानिक, विश्लेषणात्मक और पूर्वकथनीय बनाती है।
कॉम्ट की अवलोकन विधि केवल सैद्धान्तिक ढाँचे से नियंत्रित, व्यवस्थित और वैज्ञानिक अवलोकन को स्वीकार करती है। यह समाजशास्त्र को वैज्ञानिकता और विश्लेषणात्मक क्षमता प्रदान करती है।
20. कॉम्ट के अनुसार “ऐतिहासिक विधि” समाजशास्त्र की कौन-सी आवश्यकता पूरी करती है?
(A) समाज में तत्कालीन घटनाओं का मापन
(B) सामाजिक स्थायित्व का संरक्षण
(C) समाजों की प्रगति और विकास के सार्वभौमिक नियमों की खोज
(D) समाज में नैतिकता की व्याख्या
उत्तर: (C) समाजों की प्रगति और विकास के सार्वभौमिक नियमों की खोज
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण:
- ऐतिहासिक विधि (Historical Method) का उद्देश्य केवल वर्तमान समाज का अध्ययन नहीं, बल्कि समाजों के विकास और प्रगति के नियमों का पता लगाना है।
- यह विधि उनके Three Stages Law (Law of Three Stages) पर आधारित है — धार्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक (Positive) अवस्थाएँ।
- सिद्धांत:
- समाज केवल वर्तमान घटनाओं से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक उत्क्रांति (Historical Evolution) से समझा जा सकता है।
- इसके माध्यम से यह पता चलता है कि सामाजिक परिवर्तन के सार्वभौमिक नियम क्या हैं।
- महत्त्व:
- ऐतिहासिक विधि समाजशास्त्र को वैज्ञानिक आधार और भविष्यवाणी की क्षमता प्रदान करती है।
- यह विधि समाज में नियमितता और विकास की प्रक्रिया को समझने में सहायक है।
- उदाहरण:
- मानव मस्तिष्क के विकास के क्रम का अध्ययन करके समाज के तीन अवस्थाओं (Theological → Metaphysical → Positive) में परिवर्तन की व्याख्या।
- विभिन्न सभ्यताओं के ऐतिहासिक विकास की तुलना करते हुए सार्वभौमिक सामाजिक नियम निकालना।
कॉम्ट की ऐतिहासिक विधि समाजशास्त्र को सामाजिक परिवर्तन और प्रगति के सार्वभौमिक नियमों को समझने का अवसर देती है। यह विधि समाज को केवल वर्तमान घटनाओं के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और विकासात्मक प्रक्रियाओं के माध्यम से वैज्ञानिक रूप से समझने में सहायक है।
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