अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte, 1798–1857): प्रत्यक्षवाद के प्रवर्तक और समाजशास्त्र के जनक – MCQs सहित विस्तृत व्याख्या
Auguste Comte को आधुनिक समाजशास्त्र (Sociology) का संस्थापक और “Father of Sociology” कहा जाता है। उन्होंने समाज के अध्ययन को धार्मिक या दार्शनिक दृष्टिकोण से हटाकर वैज्ञानिक आधार पर स्थापित किया। कॉम्ट ने यह विचार दिया कि समाज का अध्ययन उसी प्रकार किया जा सकता है, जैसे हम प्राकृतिक विज्ञानों (Natural Sciences) में करते हैं — इसी विचार को उन्होंने “Positivism” (प्रत्यक्षवाद) कहा।
उनका उद्देश्य समाज में व्यवस्था (Order) और प्रगति (Progress) के बीच संतुलन स्थापित करना था। कॉम्ट का प्रसिद्ध सिद्धांत — तीन अवस्थाओं का नियम (Law of Three Stages) — यह बताता है कि मानव विचार धार्मिक अवस्था से होते हुए दार्शनिक और फिर वैज्ञानिक अवस्था तक विकसित होता है।
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1. मॉण्टेस्क्यू और अगस्ट कॉम्ट के विचारों में प्रमुख अंतर क्या है?
(a) मॉण्टेस्क्यू ने समाज की एकता पर बल दिया, कॉम्ट ने विजातीयता पर
(b) मॉण्टेस्क्यू विजातीयता से एकता तक पहुँचे, कॉम्ट एकता से नियमों की खोज तक
(c) दोनों ने समाज की समानता पर बल दिया
(d) कॉम्ट ने राजनीति को केंद्र में रखा, मॉण्टेस्क्यू ने धर्म को
उत्तर: (b) मॉण्टेस्क्यू विजातीयता से एकता तक पहुँचे, कॉम्ट एकता से नियमों की खोज तक
व्याख्या:
मॉण्टेस्क्यू (Montesquieu, 1689–1755)
- फ्रांसीसी दार्शनिक और समाज-विचारक थे, जिन्होंने “The Spirit of the Laws” (1748) में समाजों और शासन-प्रणालियों की विविधता (heterogeneity) को समझने का प्रयास किया।
- उनका दृष्टिकोण तुलनात्मक (comparative) था — उन्होंने अलग-अलग देशों, जलवायु, कानूनों और परंपराओं का अध्ययन किया।
- वे समाज के विविध रूपों से होकर एक सामान्य सिद्धांत (unity) की ओर पहुँचे — यानी विजातीयता से एकता तक।
अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte, 1798–1857)
- कॉम्ट ने समाज को पहले से ही एक जैविक एकता (organic unity) के रूप में देखा।
- उनका उद्देश्य इस एकता के भीतर निहित वैज्ञानिक नियमों (laws of social phenomena) को खोजना था।
- उन्होंने कहा कि समाज भी प्रकृति की तरह “नियमबद्ध” (law-governed) होता है।
- यह दृष्टिकोण उनके “Law of Three Stages” (Theological → Metaphysical → Positive) में स्पष्ट होता है।
- अतः उन्होंने एकता से शुरुआत की और वैज्ञानिक नियमों की खोज तक पहुँचे।
इस प्रकार,
मॉण्टेस्क्यू: विविधता (differences) से → एकता तक
कॉम्ट: एकता (unity) से → नियमों (laws) तकमॉण्टेस्क्यू ने समाज की विविधता में एकता खोजने का प्रयास किया,
जबकि अगस्ट कॉम्ट ने समाज की एकता को आधार मानकर उसके वैज्ञानिक नियमों की खोज की।
2. अगस्ट कॉम्ट के अनुसार समाज किस प्रकार संचालित होता है?
(a) अनिश्चित परिवर्तन से
(b) मानव इच्छा से
(c) निश्चित प्राकृतिक नियमों से
(d) धार्मिक व्यवस्था से
उत्तर: (c) निश्चित प्राकृतिक नियमों से
व्याख्या:
1. प्रत्यक्षवाद (Positivism) का सिद्धांत:
- अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte, 1798–1857) ने समाज को अध्ययन का विषय बनाते हुए कहा कि समाज भी प्रकृति की तरह निश्चित और अपरिवर्तनीय नियमों (definite and invariable laws) से संचालित होता है।
- यह विचार उनके प्रसिद्ध ग्रंथ “Cours de Philosophie Positive” (The Positive Philosophy) (1830–1842) में प्रतिपादित हुआ।
- उनका कहना था कि जैसे भौतिक संसार में गुरुत्वाकर्षण या गति के नियम हैं, वैसे ही समाज में भी परिवर्तन और स्थिरता के निश्चित नियम मौजूद हैं।
2. समाजशास्त्र का उद्देश्य:
- कॉम्ट का उद्देश्य समाज के व्यवहार को वैज्ञानिक ढंग से समझना था — “To discover the laws of social phenomena.”
- उनके अनुसार समाज मानव इच्छाओं या धार्मिक मान्यताओं से नहीं, बल्कि प्राकृतिक और सामाजिक नियमों (Natural & Social Laws) से संचालित होता है।
- उन्होंने समाज के दो पक्ष बताए:
- Social Statics (सामाजिक स्थिरता): समाज की संरचना और व्यवस्था को समझने का विज्ञान।
- Social Dynamics (सामाजिक परिवर्तन): समाज में परिवर्तन के नियमों का अध्ययन।
3. उदाहरण के रूप में:
जैसे प्रकृति में ऋतुएँ निश्चित नियमों से बदलती हैं, वैसे ही समाज भी ऐतिहासिक, आर्थिक और बौद्धिक नियमों के अधीन विकसित होता है।कॉम्ट के अनुसार समाज न तो केवल ईश्वर की इच्छा से चलता है और न ही मनुष्य की मनमर्जी से,
बल्कि निश्चित और सार्वभौमिक सामाजिक नियमों से संचालित होता है।
यही विचार प्रत्यक्षवाद (Positivism) की जड़ है, जिसने समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक अनुशासन (scientific discipline) के रूप में स्थापित किया।
3. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(a) समाज के धार्मिक पक्ष की व्याख्या करना
(b) समाज की दिशा और दशा के वैज्ञानिक नियमों की खोज करना
(c) नैतिकता की स्थापना करना
(d) क्रांति को उचित ठहराना
उत्तर: (b) समाज की दिशा और दशा के वैज्ञानिक नियमों की खोज करना
व्याख्या:
1. प्रत्यक्षवाद (Positivism) की मूल भावना:
- अगस्ट कॉम्ट (1798–1857) ने यह विचार रखा कि समाज का अध्ययन वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) से किया जा सकता है।
- उनका मानना था कि जैसे भौतिक जगत के पीछे निश्चित प्राकृतिक नियम होते हैं, वैसे ही समाज भी वैज्ञानिक नियमों (Scientific Laws of Society) से संचालित होता है।
- इन नियमों की खोज करना ही प्रत्यक्षवाद (Positivism) का उद्देश्य है।
2. “दिशा और दशा” का अर्थ:
कॉम्ट ने समाज के दो आयाम बताए:
पक्ष अंग्रेज़ी शब्द अर्थ अध्ययन का उद्देश्य दशा (स्थिति/संरचना) Social Statics समाज की स्थिर संरचना, संस्थाएँ, संबंध समाज में व्यवस्था और एकता का विश्लेषण दिशा (गति/परिवर्तन) Social Dynamics समाज का विकास और परिवर्तन समाज में प्रगति के नियमों की खोज कॉम्ट के अनुसार, समाज का विकास भी उतना ही नियमबद्ध (law-governed) है जितना कि प्राकृतिक घटनाएँ।
इसलिए समाजशास्त्र का कार्य है —“To discover the laws of social order and social progress.”
3. प्रत्यक्षवाद का उद्देश्य (Main Objective):
- सामाजिक घटनाओं की वैज्ञानिक व्याख्या करना।
- समाज की संरचना (statics) और विकास (dynamics) के नियमों (laws) की खोज करना।
- धार्मिक या दार्शनिक व्याख्या से हटकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना।
- समाजशास्त्र को “सामाजिक भौतिकी” (Social Physics) के रूप में स्थापित करना।
कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद का मूल उद्देश्य धार्मिक या दार्शनिक व्याख्या नहीं, बल्कि —
समाज की संरचना (दशा) और विकास (दिशा) दोनों के वैज्ञानिक नियमों की खोज करना था।
इस प्रकार समाजशास्त्र को उन्होंने एक “विज्ञान” के रूप में स्थापित किया।
4. “प्रकृति का रथ एक निश्चित दिशा में चलता है” — यह कथन अगस्ट कॉम्ट के किस सिद्धांत से जुड़ा है?
(a) समाज की गतिशीलता
(b) प्रत्यक्षवाद
(c) समाज का वर्गीकरण
(d) समाज की धार्मिक अवस्था
उत्तर: (b) प्रत्यक्षवाद (Positivism)
व्याख्या:
1. कथन का सार:
“प्रकृति का रथ एक निश्चित दिशा में चलता है” — यह विचार इस तथ्य को इंगित करता है किप्रकृति (और समाज दोनों) मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि निश्चित, सार्वभौमिक नियमों (laws) के अधीन चलते हैं।
यही तो कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) कहता है —
कि समाज भी प्रकृति की तरह “नियमबद्ध (law-governed)” है और इसे विज्ञान की पद्धति से समझा जा सकता है।2. प्रत्यक्षवाद का केंद्रीय विचार (Core Idea of Positivism):
- कॉम्ट के अनुसार मानव ज्ञान तीन अवस्थाओं से गुजरता है —
- Theological Stage (धार्मिक अवस्था)
- Metaphysical Stage (अध्यात्मिक अवस्था)
- Positive Stage (वैज्ञानिक या प्रत्यक्ष अवस्था)
- तीसरी अवस्था (Positive Stage) में मनुष्य अब यह नहीं पूछता कि “क्यों”, बल्कि “कैसे” चीजें घटित होती हैं।
- इस अवस्था में समाज को वैज्ञानिक नियमों के अधीन माना जाता है।
- इसलिए कॉम्ट ने कहा कि जैसे प्रकृति निश्चित नियमों से चलती है, वैसे ही समाज भी एक निश्चित दिशा में विकसित होता है —
यह दिशा विज्ञान और तर्क पर आधारित प्रगति की है।3. समाज और प्रकृति में समानता:
कॉम्ट ने समाज और प्रकृति के अध्ययन के बीच समानता बताई —“The laws which govern the physical world also govern the social world.”
इसलिए “प्रकृति का रथ एक निश्चित दिशा में चलता है” — यह विचार सीधे उनके Positivism से संबंधित है,
न कि केवल समाज की गतिशीलता या धार्मिक अवस्था से।“प्रकृति का रथ एक निश्चित दिशा में चलता है” यह कथन इस विश्वास को दर्शाता है कि —
समाज भी प्रकृति की तरह निश्चित वैज्ञानिक नियमों से संचालित होता है।
यह विचार सीधे Comte के प्रत्यक्षवाद (Positivism) से संबंधित है।
5. अगस्ट कॉम्ट के विचार में समाज की “एकता” के पीछे कौन-सा तत्व निहित है?
(a) धार्मिक नियम
(b) प्रत्यक्षवादी नियम
(c) नैतिक सिद्धांत
(d) आर्थिक हित
उत्तर: (b) प्रत्यक्षवादी नियम (Positivist Laws)
व्याख्या:
1. समाज की एकता का विचार (Idea of Social Unity):
- कॉम्ट ने समाज को एक जैविक एकता (organic unity) के रूप में देखा —
जहाँ प्रत्येक संस्था (family, religion, economy, polity आदि) एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।- उन्होंने कहा कि यह एकता प्राकृतिक या वैज्ञानिक नियमों (scientific/positivist laws) के अधीन बनी रहती है।
- जैसे जीवित शरीर के अंग समन्वय के साथ कार्य करते हैं, वैसे ही समाज के विभिन्न भाग भी सामाजिक व्यवस्था (social order) बनाए रखते हैं।
2. प्रत्यक्षवादी नियमों की भूमिका:
- कॉम्ट के अनुसार समाज में एकता “ईश्वर” या “धार्मिक नियमों” से नहीं आती, बल्कि
वैज्ञानिक (प्रत्यक्षवादी) नियमों की समानता से आती है।- ये नियम समाज के दो प्रमुख आयामों को नियंत्रित करते हैं —
- Social Statics (सामाजिक स्थिरता): समाज की संरचना, संतुलन और एकता बनाए रखना।
- Social Dynamics (सामाजिक परिवर्तन): समाज का क्रमिक और नियमबद्ध विकास।
इस प्रकार समाज की “एकता” या “स्थिरता” सामाजिक स्थैतिकता (social statics) के माध्यम से होती है,
और उसका आधार प्रत्यक्षवादी वैज्ञानिक नियम (Positivist Laws) हैं।3. Comte का दृष्टिकोण:
कॉम्ट ने कहा:“Society is held together by consensus, based on universal laws, not by divine will.”
(समाज की एकता ईश्वर की इच्छा से नहीं, बल्कि सार्वभौमिक नियमों पर आधारित सहमति से बनी रहती है।)इसलिए उन्होंने धर्म या अर्थशास्त्र को एकता का मूल नहीं माना, बल्कि सामाजिक विज्ञान के नियमों को समाज की एकता का आधार बताया।
कॉम्ट के अनुसार समाज की “एकता” धार्मिक या आर्थिक नहीं,
बल्कि वैज्ञानिक (प्रत्यक्षवादी) नियमों पर आधारित है,
जो समाज की स्थिरता (Statics) और प्रगति (Dynamics) दोनों को नियंत्रित करते हैं।
6. मॉण्टेस्क्यू ने समाज को किस आधार पर समझने की कोशिश की?
(a) प्राकृतिक नियमों के माध्यम से
(b) धर्मशास्त्र के माध्यम से
(c) निर्धारक तत्वों के आधार पर
(d) आर्थिक व्यवस्था के आधार पर
उत्तर: (c) निर्धारक तत्वों के आधार पर
व्याख्या:
1. मॉण्टेस्क्यू का दृष्टिकोण (Montesquieu’s Approach):
- शार्ल लुई दे मॉण्टेस्क्यू (Charles-Louis de Montesquieu, 1689–1755) ने समाज और राज्य का अध्ययन किया।
- उन्होंने समाज को धार्मिक या दार्शनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि “निर्धारक तत्वों” (determinant factors) के आधार पर समझने का प्रयास किया।
- इन निर्धारक तत्वों में शामिल थे —
- जलवायु (Climate)
- भूगोल (Geography)
- जनसंख्या (Population)
- आर्थिक स्थिति (Economic conditions)
- राजनीतिक व्यवस्था (Political system)
- रीति-रिवाज और परंपराएँ (Customs & Traditions)
इन सभी तत्वों का संयुक्त प्रभाव समाज की संरचना और शासन-प्रणाली पर पड़ता है।
2. प्रमुख ग्रंथ:
“The Spirit of the Laws” (1748)
इसमें मॉण्टेस्क्यू ने कहा कि —“Laws should be considered in relation to the physical aspect of the country, the climate, the religion, the situation of the people, their manners and customs.”
अर्थात्, कानूनों और शासन प्रणाली को समझने के लिए हमें उन प्राकृतिक और सामाजिक निर्धारक तत्वों को देखना होगा, जिन पर वे आधारित हैं।
3. समाजशास्त्रीय दृष्टि से महत्त्व:
- मॉण्टेस्क्यू को समाजशास्त्र का एक प्रारंभिक वैज्ञानिक चिंतक (precursor of sociology) माना जाता है।
- उन्होंने यह दिखाया कि सामाजिक घटनाएँ मनमानी नहीं होतीं, बल्कि विभिन्न परिस्थितियों के निर्धारण (determination) के अधीन होती हैं।
- उन्होंने समाज को “कानूनों और कारणों के नेटवर्क” के रूप में देखा —
जो बाद में अगस्ट कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (positivism) के लिए बौद्धिक आधार बना।मॉण्टेस्क्यू ने समाज को समझने के लिए धर्म या दर्शन नहीं,
बल्कि भौगोलिक, जलवायु, राजनीतिक और सांस्कृतिक निर्धारक तत्वों को आधार बनाया।
उनका दृष्टिकोण तुलनात्मक और विश्लेषणात्मक था — जो बाद में समाजशास्त्र के वैज्ञानिक अध्ययन की नींव बना।
7. अगस्ट कॉम्ट का प्रमुख बौद्धिक मुहावरा क्या है?
(a) संघर्ष और शक्ति
(b) प्रगति और व्यवस्था
(c) संस्कृति और सभ्यता
(d) वर्ग और धर्म
उत्तर: (b) प्रगति और व्यवस्था
व्याख्या:
1. “Order and Progress” का अर्थ:
- “Order and Progress” (व्यवस्था और प्रगति) अगस्ट कॉम्ट का सबसे प्रसिद्ध बौद्धिक सूत्र (motto) है।
- यह उनके समाजशास्त्रीय चिंतन के दो मुख्य आधारों को दर्शाता है —
- Order (व्यवस्था) → समाज में स्थिरता, सामंजस्य और एकता (Social Statics)
- Progress (प्रगति) → समाज में विकास और परिवर्तन (Social Dynamics)
कॉम्ट ने कहा कि समाज में स्थिरता (order) और परिवर्तन (progress) दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
“Order is the condition for progress, and progress is the development of order.”
(व्यवस्था प्रगति की शर्त है, और प्रगति व्यवस्था का विकास है।)2. समाजशास्त्रीय दृष्टि से अर्थ:
- कॉम्ट का मानना था कि बिना व्यवस्था (social order) के समाज में स्थायित्व नहीं रह सकता,
और बिना प्रगति (social progress) के समाज जड़ हो जाता है।- इसलिए समाजशास्त्र को दोनों का अध्ययन करना चाहिए —
- Social Statics → समाज की स्थिर संरचना (व्यवस्था)
- Social Dynamics → समाज का विकास और परिवर्तन (प्रगति)
यही दो आयाम उनके प्रत्यक्षवाद (Positivism) के भीतर समाहित हैं।
3. ऐतिहासिक महत्त्व:
- “Order and Progress” वाक्यांश इतना प्रसिद्ध हुआ कि
यह ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज (Brazilian National Flag) पर भी अंकित किया गया। 🇧🇷
ब्राज़ील ने इसे Comte के Positivist Philosophy के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया।- यह कॉम्ट के उस विश्वास को दर्शाता है कि समाज का विकास नियमबद्ध और संतुलित होना चाहिए —
जहाँ व्यवस्था और प्रगति का संतुलन बना रहे।कॉम्ट के लिए समाज की स्थिरता और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक तत्व थे।
उनका सूत्र “Order and Progress” यही सिखाता है कि —
व्यवस्था (Order) समाज की नींव है,
प्रगति (Progress) उसका लक्ष्य।
8. कॉम्ट ने समाज की संरचना और परिवर्तन का अध्ययन किन दो अवधारणाओं में बाँटा?
(a) धर्म और राजनीति
(b) स्थैतिकि और गतिशीलता
(c) वर्ग और समूह
(d) तर्क और भावना
उत्तर: (b) स्थैतिकि (Statics) और गतिशीलता (Dynamics)
व्याख्या:
1. कॉम्ट की दो प्रमुख अवधारणाएँअगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो मुख्य भागों में विभाजित किया —
समाजशास्त्र का भाग अध्ययन का विषय हिंदी अर्थ Social Statics समाज की संरचना, संगठन और स्थिरता सामाजिक स्थैतिकि Social Dynamics समाज का विकास, परिवर्तन और प्रगति सामाजिक गतिशीलता 2. Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि)
- यह समाज की संरचना (structure) से संबंधित है — अर्थात् वे संस्थाएँ, मूल्य, और संबंध जो समाज में स्थिरता बनाए रखते हैं।
- उदाहरण: परिवार, धर्म, शिक्षा, नैतिकता आदि संस्थाएँ समाज में व्यवस्था (order) बनाए रखती हैं।
- कॉम्ट के अनुसार, सामाजिक स्थिरता “व्यवस्था” (Order) का प्रतीक है।
Comte: “Social statics studies the conditions of social order.”
3. Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता)
- यह समाज में होने वाले परिवर्तन (change) और विकास (progress) के नियमों का अध्ययन करती है।
- कॉम्ट ने समाज के विकास को तीन अवस्थाओं के नियम (Law of Three Stages) से समझाया:
- Theological Stage (धार्मिक अवस्था)
- Metaphysical Stage (अध्यात्मिक अवस्था)
- Positive Stage (प्रत्यक्षवादी अवस्था)
इन अवस्थाओं के माध्यम से उन्होंने बताया कि मानव बुद्धि और समाज धीरे-धीरे प्रगति की ओर बढ़ते हैं।
Comte: “Social dynamics considers the laws of succession of social phenomena.”
4. आपसी संबंध
कॉम्ट के अनुसार, Social Statics और Social Dynamics परस्पर पूरक (complementary) हैं:
- बिना स्थैतिकि के, समाज अस्थिर हो जाएगा।
- बिना गतिशीलता के, समाज ठहर जाएगा।
इसलिए समाजशास्त्र को दोनों का संतुलित अध्ययन करना चाहिए।
अगस्ट कॉम्ट का मानना था कि समाज को समझने के लिए हमें दो दृष्टिकोण अपनाने होंगे:
- Social Statics → समाज की व्यवस्था और संगठन को समझना।
- Social Dynamics → समाज में परिवर्तन और प्रगति को समझना।
9. कॉम्ट के अनुसार समाज का अध्ययन किस प्रकार होना चाहिए?
(a) धार्मिक और नैतिक दृष्टि से
(b) दार्शनिक दृष्टि से
(c) वैज्ञानिक और अनुभवजन्य दृष्टि से
(d) साहित्यिक दृष्टि से
उत्तर: (c) वैज्ञानिक और अनुभवजन्य दृष्टि से
व्याख्या:
1. प्रत्यक्षवाद (Positivism) का मूल विचारअगस्ट कॉम्ट ने “Positivism” (प्रत्यक्षवाद) का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार सत्य वही है जिसे अनुभव (experience) और अवलोकन (observation) द्वारा सिद्ध किया जा सके।
वे मानते थे कि समाज का अध्ययन भी उसी वैज्ञानिक पद्धति (scientific method) से किया जाना चाहिए, जैसी प्राकृतिक विज्ञान (natural sciences) में प्रयोग की जाती है — जैसे भौतिकी, रसायन या जीवविज्ञान में।
Comte: “Sociology should be studied in the same positive way as the natural sciences.”
2. धार्मिक या दार्शनिक दृष्टिकोण का अस्वीकार
कॉम्ट ने समाज के अध्ययन में अध्यात्मिक (metaphysical) और धार्मिक (theological) व्याख्याओं को अस्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि अब मानव बुद्धि प्रत्यक्षवादी अवस्था (Positive Stage) में पहुँच चुकी है — जहाँ
- कल्पना या आस्था की जगह
- अनुभव (Experience), अवलोकन (Observation) और तथ्य (Facts) को महत्व दिया जाना चाहिए।
3. वैज्ञानिक दृष्टि से समाज का अध्ययन
कॉम्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज एक प्राकृतिक घटना (Natural Phenomenon) है, इसलिए उसके व्यवहार, संस्थाएँ, और परिवर्तन भी नियमबद्ध (Law-governed) होते हैं।
उन्होंने समाज के अध्ययन के लिए निम्न पद्धतियाँ सुझाईं —
- Observation (अवलोकन)
- Experimentation (प्रयोग)
- Comparison (तुलना)
- Historical Method (ऐतिहासिक पद्धति)
“Social phenomena must be studied by observation, experimentation, and comparison, just like any other natural science.”
4. कॉम्ट का उद्देश्य
कॉम्ट का लक्ष्य था कि समाजशास्त्र को एक “Science of Society” बनाया जाए —
जो न केवल समाज के संरचनात्मक पहलुओं (Statics) बल्कि उसके परिवर्तनशील पहलुओं (Dynamics) को भी नियमों द्वारा समझा सके।कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद यह सिखाता है कि —
“समाज का अध्ययन धार्मिक या दार्शनिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और अनुभवजन्य होना चाहिए।”
10. अगस्ट कॉम्ट के पिता किस धर्म के अनुयायी थे?
(a) प्रोटेस्टेंट
(b) कैथोलिक
(c) बौद्ध
(d) यहूदी
उत्तर: (b) कैथोलिक
व्याख्या:
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि
- अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte, 1798–1857) का जन्म 19 जनवरी 1798 को मोंपेलिये (Montpellier), फ्रांस में हुआ था।
- उनका परिवार परंपरागत कैथोलिक (Conservative Roman Catholic) और राजभक्त (Royalist) था।
- उनके पिता Louis Comte फ्रांसीसी राजकीय कोषागार (French Treasury Office) में कार्यरत थे।
- उनकी माता Rosalie Boyer भी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं।
इस धार्मिक और पारंपरिक परिवेश का प्रभाव कॉम्ट के प्रारंभिक जीवन पर पड़ा,
परंतु बाद में उन्होंने धार्मिक मतवाद से अलग होकर “प्रत्यक्षवादी धर्म” (Religion of Humanity) की संकल्पना विकसित की।2. कॉम्ट का धार्मिक दृष्टिकोण
- यद्यपि उनका जन्म एक कैथोलिक परिवार में हुआ, परंतु वे धीरे-धीरे धार्मिक रूढ़िवादिता (Religious Orthodoxy) से असहमत हुए।
- उन्होंने एक नए प्रकार का “मानवतावादी धर्म” (Religion of Humanity) विकसित किया —
जिसमें किसी ईश्वर की उपासना नहीं, बल्कि मानवता (Humanity) को सर्वोच्च माना गया।- यह विचार उनकी पुस्तक “System of Positive Polity” (1851–54) में विस्तार से मिलता है।
Comte: “Humanity should replace God as the object of our veneration.”
3. प्रभाव का विश्लेषण
कॉम्ट के पिता की कैथोलिक धार्मिकता और राजभक्ति ने उन्हें सामाजिक व्यवस्था (Order) के महत्व को समझने में मदद की,
लेकिन उन्होंने अपने पिता की आस्था को विज्ञान और मानवतावाद के माध्यम से परिवर्तित कर दिया।इस प्रकार, उनका प्रत्यक्षवाद धार्मिक परंपरा से अलग होकर भी एक नैतिक और सामाजिक धर्म का रूप लेता है।
- कॉम्ट के पिता एक परंपरागत कैथोलिक और राजभक्त सरकारी कर्मचारी थे।
- यद्यपि कॉम्ट ने बाद में पारंपरिक धर्म का विरोध किया, पर उनके विचारों में “व्यवस्था और नैतिकता” का जो ज़ोर है, वह उनके पारिवारिक संस्कारों से ही आया।
11. अगस्ट कॉम्ट का जन्म किस नगर में हुआ था?
(a) पेरिस
(b) लंदन
(c) मॉण्टपेलियर
(d) बर्लिन
उत्तर: (c) मॉण्टपेलियर
व्याख्या:
1. जन्म और प्रारंभिक जीवन
- अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte) का जन्म 19 जनवरी 1798 को मोंपेलिये (Montpellier), दक्षिण फ्रांस (Southern France) में हुआ।
- Montpellier उस समय एक शैक्षिक और धार्मिक केंद्र था — यहाँ का वातावरण बौद्धिक रूप से सक्रिय था, जिसने कॉम्ट के प्रारंभिक विचारों को आकार दिया।
- उनका पूरा नाम था — Isidore Auguste Marie François Xavier Comte।
2. पारिवारिक स्थिति
- उनके पिता Louis Comte फ्रांस के कोषागार (Treasury Office) में कार्यरत एक राजभक्त (Royalist) और कैथोलिक (Catholic) व्यक्ति थे।
- उनकी माता Rosalie Boyer अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं।
- इसी धार्मिक और अनुशासित परिवेश में कॉम्ट का बचपन बीता।
3. शिक्षा
- कॉम्ट ने Lycée of Montpellier से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की।
- 1814 में वे École Polytechnique (पेरिस) में प्रवेश पाए — यह फ्रांस का एक प्रसिद्ध तकनीकी संस्थान था, जहाँ गणित, भौतिकी और सामाजिक विज्ञानों का गहन अध्ययन होता था।
- यहीं से उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण (scientific outlook) का विकास हुआ, जिसने आगे चलकर प्रत्यक्षवाद (Positivism) की नींव रखी।
4. जीवन की दिशा
- Montpellier के बाद पेरिस में रहकर कॉम्ट ने अपने बौद्धिक जीवन की शुरुआत की।
- यहीं पर उनकी मुलाकात Saint-Simon (सेंट-साइमोन) से हुई, जिन्होंने उन पर गहरा प्रभाव डाला।
- बाद में उन्होंने उनसे अलग होकर अपना स्वतंत्र समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण विकसित किया।
- अगस्ट कॉम्ट का जन्म मॉण्टपेलियर (Montpellier), दक्षिण फ्रांस में 19 जनवरी 1798 को हुआ था।
- यहीं से उनकी बौद्धिक यात्रा आरंभ हुई, जिसने आगे चलकर प्रत्यक्षवाद (Positivism) और समाजशास्त्र (Sociology) को आकार दिया।
12. अगस्ट कॉम्ट को “विचारक” कहने का प्रमुख कारण क्या है?
(a) उन्होंने धर्म की आलोचना की
(b) उन्होंने समाज के नियमों को प्रकृति के नियमों से जोड़ा
(c) उन्होंने समाज में समानता की वकालत की
(d) उन्होंने राजनीति का नया सिद्धांत दिया
उत्तर: (b) उन्होंने समाज के नियमों को प्रकृति के नियमों से जोड़ा
व्याख्या:
1. कॉम्ट का मौलिक योगदानअगस्ट कॉम्ट ने सबसे पहले यह प्रतिपादित किया कि —
“समाज भी उसी प्रकार निश्चित प्राकृतिक नियमों (Natural Laws) से संचालित होता है,
जैसे कि भौतिक प्रकृति (Physical Nature) होती है।”यह दृष्टिकोण ही उन्हें अन्य दार्शनिकों से अलग बनाता है और “वैज्ञानिक समाज के विचारक (Thinker of Scientific Society)” की उपाधि देता है।
2. समाज और प्रकृति के बीच समानता
कॉम्ट ने कहा कि:
- जैसे भौतिकी (Physics) में वस्तुओं की गति नियमबद्ध होती है,
- वैसे ही समाजशास्त्र (Sociology) में सामाजिक घटनाएँ भी नियमबद्ध (Law-Governed) होती हैं।
उन्होंने इन सामाजिक नियमों को खोजने का प्रयास किया — इसे ही उन्होंने समाजशास्त्र का वैज्ञानिक उद्देश्य (Scientific Objective) बताया।
Comte: “Social phenomena, like physical phenomena, are governed by natural laws.”
3. प्रत्यक्षवाद (Positivism) की भूमिका
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद इसी विचार पर आधारित है कि समाज को समझने के लिए हमें वैज्ञानिक और अनुभवजन्य पद्धति अपनानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज का विकास और परिवर्तन सामाजिक नियमों (Social Laws) से निर्धारित होते हैं, न कि किसी अलौकिक शक्ति या इच्छा से।इसीलिए उन्हें आधुनिक समाजशास्त्र का पिता (Father of Sociology) और एक “वैज्ञानिक विचारक (Scientific Thinker)” कहा गया।
4. “विचारक” कहे जाने का कारण
कॉम्ट केवल दार्शनिक नहीं थे — वे वैज्ञानिक दृष्टि से समाज का विश्लेषण करने वाले पहले व्यक्ति थे।
उन्होंने मानव समाज के लिए एक सुसंगत सिद्धांत (Systematic Theory) दिया —
जिसमें समाज की संरचना (Statics) और परिवर्तन (Dynamics) दोनों को प्राकृतिक नियमों से जोड़ा गया।यही कारण है कि वे “Scientific Thinker of Society” के रूप में विख्यात हुए।
कॉम्ट को “विचारक” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने —
समाज को प्रकृति की तरह नियमबद्ध (Law-governed) माना,
और यह विचार प्रस्तुत किया कि समाजशास्त्र भी एक वैज्ञानिक अनुशासन (Scientific Discipline) होना चाहिए।
13. “Order and Progress” किस समाजशास्त्री की विचारधारा से सम्बद्ध है?
(a) कार्ल मार्क्स
(b) एमिल दुर्खीम
(c) हर्बर्ट स्पेंसर
(d) अगस्ट कॉम्ट
उत्तर: (d) अगस्ट कॉम्ट
व्याख्या:
1. “Order and Progress” का अर्थअगस्ट कॉम्ट के समाजशास्त्रीय दर्शन में “Order” (व्यवस्था) और “Progress” (प्रगति) दो पूरक सिद्धांत हैं।
उन्होंने कहा कि —“सामाजिक व्यवस्था (Order) ही समाज की नींव है, और प्रगति (Progress) उसी पर आधारित होती है।”
इसका अर्थ है कि समाज में स्थिरता (stability) और परिवर्तन (change) दोनों आवश्यक हैं —
एक बिना दूसरे के टिक नहीं सकता।2. सामाजिक स्थैतिकि और गतिशीलता का संबंध
कॉम्ट ने समाज के अध्ययन को दो भागों में बाँटा था:
- Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि):
समाज की संरचना, संगठन और व्यवस्था का अध्ययन।
→ यह “Order” से संबंधित है।- Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता):
समाज में परिवर्तन, विकास और प्रगति की प्रक्रिया का अध्ययन।
→ यह “Progress” से संबंधित है।इस प्रकार “Order and Progress” कॉम्ट की समाजशास्त्र की द्वैत अवधारणा (Dual Concept) का सार है।
3. “Order and Progress” का व्यावहारिक महत्त्व
कॉम्ट के अनुसार —
“Order is the basis of progress; progress is the development of order.”
अर्थात् यदि समाज में स्थिरता और संगठन न हो, तो प्रगति संभव नहीं।
और यदि केवल व्यवस्था हो और कोई परिवर्तन न हो, तो समाज ठहर जाएगा।इसलिए उन्होंने इन दोनों को परस्पर पूरक और आवश्यक शर्तें (Complementary Conditions) माना।
4. ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज पर प्रभाव 🇧🇷
कॉम्ट का यह विचार इतना प्रभावशाली था कि
ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज पर लिखा गया है —“Ordem e Progresso” (Order and Progress)
यह कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद (Positivism) के आदर्श वाक्य का संक्षिप्त रूप है:
“Love as a principle, Order as the basis, and Progress as the goal.”
(L’amour pour principe et l’ordre pour base; le progrès pour but)इससे स्पष्ट होता है कि यह वाक्य केवल दार्शनिक नहीं बल्कि एक राजनीतिक और नैतिक आदर्श भी बन गया।
5. कॉम्ट के विचार में संतुलन का दर्शन
कॉम्ट का मानना था कि —
- “Order” समाज में स्थिरता और एकता लाता है,
- “Progress” समाज में विकास और परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है।
दोनों मिलकर ही मानव समाज की वैज्ञानिक उन्नति (Scientific Advancement of Society) को संभव बनाते हैं।
इसलिए “Order and Progress” को कॉम्ट की विचारधारा का केन्द्रीय सूत्र (Central Motto) माना जाता है।
अगस्ट कॉम्ट के लिए “Order and Progress” केवल नारा नहीं, बल्कि उनके पूरे समाजशास्त्र की नींव है —
जहाँ स्थिरता (Order) और परिवर्तन (Progress) एक-दूसरे के पूरक हैं।
14. नीचे दी गई सूचियों का सही मिलान कीजिए —
| सूची I (अवस्था) | सूची II (मुख्य विशेषता) |
|---|---|
| A. धार्मिक अवस्था (Theological Stage) | 1. ईश्वर और अलौकिक शक्तियों में विश्वास |
| B. दार्शनिक अवस्था (Metaphysical Stage) | 2. अमूर्त शक्तियों और तर्क द्वारा व्याख्या |
| C. प्रत्यक्षवादी अवस्था (Positive Stage) | 3. वैज्ञानिक अवलोकन और अनुभवजन्य अध्ययन |
(a) A–1, B–2, C–3
(b) A–2, B–3, C–1
(c) A–3, B–1, C–2
(d) A–1, B–3, C–2
उत्तर: (a) A–1, B–2, C–3
व्याख्या:
अगस्ट कॉम्ट ने मानव ज्ञान और समाज के विकास को तीन अवस्थाओं में बाँटा —
इसे उन्होंने कहा “The Law of Three Stages” या “तीन अवस्थाओं का नियम”।यह नियम बताता है कि मानव समाज, बौद्धिक और वैज्ञानिक रूप से अंधविश्वास से लेकर वैज्ञानिक विवेक तक विकसित होता है।
1. धार्मिक अवस्था (Theological Stage) – A → 1
मुख्य विशेषता:
ईश्वर और अलौकिक शक्तियों में विश्वास।
इस अवस्था में लोग प्राकृतिक और सामाजिक घटनाओं को देवताओं, आत्माओं या ईश्वर की इच्छा से जोड़कर समझाते हैं।
उप-अवस्थाएँ (Sub-stages):
- Fetishism – वस्तुओं में शक्ति मानना
- Polytheism – अनेक देवताओं में विश्वास
- Monotheism – एक ईश्वर में विश्वास
उदाहरण:
बिजली को “देवता का क्रोध” या “अलौकिक शक्ति” मानना।2. दार्शनिक अवस्था (Metaphysical Stage) – B → 2
मुख्य विशेषता:
अमूर्त (abstract) शक्तियों और तर्क द्वारा व्याख्या।
इस अवस्था में लोग घटनाओं को “प्राकृतिक शक्तियों (Nature, Essence, Vital Force)” के आधार पर समझाने लगते हैं।
अभी भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होते, लेकिन धार्मिक व्याख्याएँ कमजोर पड़ने लगती हैं।उदाहरण:
“प्रकृति ने ऐसा किया” या “जीवनी शक्ति के कारण जीवन है” — यह सोच इस अवस्था का उदाहरण है।3. प्रत्यक्षवादी अवस्था (Positive Stage) – C → 3
मुख्य विशेषता:
वैज्ञानिक अवलोकन (Scientific Observation) और अनुभवजन्य अध्ययन (Empirical Study)।
यह सबसे उच्च अवस्था है, जिसमें मनुष्य अब किसी अलौकिक या अमूर्त कारण के बजाय वैज्ञानिक नियमों और अनुभव पर भरोसा करता है।
कॉम्ट के अनुसार, समाजशास्त्र भी इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित होना चाहिए।
यही “Positivism (प्रत्यक्षवाद)” का सार है।उदाहरण:
भूकंप को अब “टेक्टोनिक प्लेटों की गति” से समझाया जाता है, न कि देवता के क्रोध से।सारांश तालिका (Summary Table)
अवस्था ज्ञान का स्रोत विशेषता उदाहरण A. धार्मिक अवस्था (Theological) आस्था और ईश्वर अलौकिक शक्ति में विश्वास देवताओं की इच्छा से घटनाएँ B. दार्शनिक अवस्था (Metaphysical) तर्क और अमूर्त विचार अमूर्त शक्ति या सार का उपयोग “प्रकृति ने ऐसा किया” C. प्रत्यक्षवादी अवस्था (Positive) अवलोकन और अनुभव वैज्ञानिक नियमों की खोज भूकंप का वैज्ञानिक कारण कॉम्ट का “तीन अवस्थाओं का नियम” यह दर्शाता है कि —
मानव विचार धीरे-धीरे अंधविश्वास (Faith) से तर्क (Reason) और फिर विज्ञान (Science) की ओर बढ़ता है।
15. अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को किसके समान माना?
(a) राजनीति विज्ञान
(b) भौतिकी
(c) जीवविज्ञान
(d) गणित
उत्तर: (b) भौतिकी
व्याख्या:
1. “Social Physics” की अवधारणाअगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र (Sociology) शब्द देने से पहले समाज के वैज्ञानिक अध्ययन को “Social Physics” (सामाजिक भौतिकी) कहा।
उनका उद्देश्य था कि समाज का अध्ययन भी भौतिक विज्ञान (Physics) की तरह वैज्ञानिक नियमों (Scientific Laws) और अनुभवजन्य पद्धति (Empirical Method) से किया जाए।Comte: “Sociology is to social phenomena what physics is to natural phenomena.”
अर्थात —
जैसे भौतिकी भौतिक घटनाओं (Physical Phenomena) के नियमों को खोजती है,
वैसे ही समाजशास्त्र सामाजिक घटनाओं (Social Phenomena) के नियमों को खोजता है।2. समाज का वैज्ञानिक अध्ययन
कॉम्ट का मानना था कि समाज भी एक प्राकृतिक व्यवस्था (Natural Order) है,
और इसके कार्यों को समझने के लिए हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Approach) अपनाना चाहिए।उन्होंने कहा —
“Social phenomena are governed by invariable natural laws, just like physical phenomena.”
अर्थात समाज की गतिविधियाँ भी कुछ निश्चित नियमों के अनुसार चलती हैं, जिन्हें अध्ययन द्वारा समझा जा सकता है।
3. “Social Physics” से “Sociology” तक
शुरुआत में कॉम्ट ने अपने विज्ञान का नाम “Social Physics” रखा,
परंतु बेल्जियम के सांख्यिकीविद Adolphe Quetelet ने पहले ही यह शब्द अपने सांख्यिकीय कार्यों में उपयोग कर लिया था।इसलिए कॉम्ट ने नया शब्द “Sociology” (समाजशास्त्र) गढ़ा —
जो लैटिन ‘Socius’ (साथ या समाज) और ग्रीक ‘Logos’ (अध्ययन) से बना है।इस प्रकार, Sociology = Scientific study of society बना।
4. “Social Physics” का उद्देश्य
कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का लक्ष्य था —
“To discover the laws of social order and social progress.”
अर्थात समाज की व्यवस्था (Order) और विकास (Progress) दोनों के नियमों का वैज्ञानिक रूप से अध्ययन करना।
अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को भौतिकी के समान माना क्योंकि —
उन्होंने समाज को एक नियमबद्ध, प्राकृतिक, और वैज्ञानिक प्रणाली के रूप में देखा।
उनके अनुसार समाज का अध्ययन भी “Physics” की तरह किया जा सकता है —
अवलोकन, तुलना, और वैज्ञानिक तर्क के माध्यम से।
16. कॉम्ट के अनुसार समाज की स्थैतिकि किससे संबंधित है?
(a) समाज के तत्वों के आपसी संबंधों से
(b) समाज के ऐतिहासिक विकास से
(c) समाज के धार्मिक पहलू से
(d) राजनीतिक संघर्ष से
उत्तर: (a) समाज के तत्वों के आपसी संबंधों से
व्याख्या:
1. “Social Statics” की अवधारणा
अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में बाँटा —
- Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि)
- Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता)
Social Statics का संबंध समाज की संरचना (Structure) से है,
जबकि Social Dynamics का संबंध समाज के परिवर्तन (Change) से है।2. स्थैतिकि का अर्थ
कॉम्ट के अनुसार, सामाजिक स्थैतिकि वह शाखा है जो इस बात का अध्ययन करती है कि —
“समाज के विभिन्न अंग और संस्थाएँ एक-दूसरे से कैसे जुड़ी हैं और कैसे संतुलन (Order) बनाए रखती हैं।”
अर्थात यह समाज के तत्वों के आपसी संबंधों (Interrelations), सह-अस्तित्व (Co-existence) और संतुलन (Harmony) का अध्ययन करती है।
3. स्थैतिकि का उद्देश्य
कॉम्ट ने कहा कि समाज की स्थिरता या व्यवस्था तभी संभव है जब —
- परिवार, धर्म, शिक्षा, नैतिकता आदि संस्थाओं में समन्वय (Coordination) हो।
- व्यक्ति और समाज के बीच सामंजस्य (Harmony) स्थापित हो।
इसलिए, Social Statics का अध्ययन समाज में “व्यवस्था (Order)” को समझने के लिए किया जाता है।
Comte: “Social statics deals with the conditions of existence and the laws of co-existence of the social elements.”
4. गतिशीलता से भेद
पहलू सामाजिक स्थैतिकि (Statics) सामाजिक गतिशीलता (Dynamics) केन्द्र बिंदु समाज की संरचना और संतुलन समाज का विकास और परिवर्तन मुख्य प्रश्न समाज कैसे स्थिर रहता है? समाज कैसे बदलता है? मुख्य अवधारणा व्यवस्था (Order) प्रगति (Progress) कॉम्ट का उद्देश्य स्थिरता का अध्ययन परिवर्तन के नियमों की खोज कॉम्ट के अनुसार —
“सामाजिक स्थैतिकि समाज की संरचना का अध्ययन करती है —
अर्थात समाज के विभिन्न तत्वों (जैसे परिवार, धर्म, राज्य) के आपसी संबंधों और संतुलन को समझती है।”
17. कॉम्ट के अनुसार समाज की गतिशीलता किसका अध्ययन करती है?
(a) समाज की स्थिरता
(b) समाज के परिवर्तन और प्रगति की प्रक्रिया
(c) समाज के धार्मिक मूल्यों का अध्ययन
(d) समाज के आर्थिक सिद्धांतों का विश्लेषण
उत्तर: (b) समाज के परिवर्तन और प्रगति की प्रक्रिया
व्याख्या:
1. कॉम्ट का द्वि-आयामी समाजशास्त्र (Twofold Division of Sociology)अगस्ट कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में विभाजित किया:
भाग विषय उद्देश्य 1. Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि) समाज की संरचना और संगठन समाज में व्यवस्था (Order) को समझना 2. Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता) समाज के विकास और परिवर्तन की प्रक्रिया समाज में प्रगति (Progress) को समझना Social Statics बताता है कि समाज कैसे संगठित और स्थिर रहता है,
जबकि Social Dynamics बताता है कि समाज कैसे विकसित और परिवर्तित होता है।2. सामाजिक गतिशीलता का अर्थ
“Social Dynamics refers to the study of the laws of social progress and change.”
कॉम्ट का मानना था कि समाज निरंतर परिवर्तनशील है —
यह एक जैविक (organic) विकास की प्रक्रिया से गुजरता है,
जहाँ प्रत्येक अवस्था पिछले की तुलना में अधिक विकसित होती है।उनका प्रसिद्ध सिद्धांत “Law of Three Stages” (तीन अवस्थाओं का नियम)
यही गतिशीलता का व्यावहारिक उदाहरण है —
मानव विचार धार्मिक → दार्शनिक → प्रत्यक्षवादी अवस्थाओं से होकर विकसित होता है।3. गतिशीलता और प्रगति का संबंध
कॉम्ट के अनुसार —
“Progress is the development of Order.”
यानी, प्रगति (Progress) तभी संभव है जब समाज में व्यवस्था (Order) बनी रहे।इसलिए उन्होंने अपने आदर्श वाक्य (Motto) में कहा —
“Order and Progress”
जो ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज 🇧🇷 पर भी अंकित है।4. समाज की गतिशीलता का उद्देश्य
सामाजिक गतिशीलता का उद्देश्य है —
- समाज में होने वाले परिवर्तनों को समझना,
- उन परिवर्तनों के पीछे के नियमों (laws) की खोज करना,
- और यह जानना कि मानव समाज कैसे आगे बढ़ता है (progresses).
कॉम्ट के अनुसार, इन परिवर्तनों के पीछे प्राकृतिक और वैज्ञानिक नियम होते हैं,
जो समाजशास्त्र का अध्ययन विषय बनते हैं।कॉम्ट के अनुसार —
समाज की गतिशीलता (Dynamics) का अध्ययन समाज के परिवर्तन और प्रगति की वैज्ञानिक प्रक्रिया का अध्ययन है।
यह उनके समाजशास्त्र का “प्रगति वाला पक्ष (Aspect of Progress)” दर्शाता है।
18. अगस्ट कॉम्ट के पिता का स्वभाव कैसा था?
(a) उदार और प्रगतिशील
(b) कट्टर राजभक्त और रूढ़िवादी
(c) वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले
(d) धार्मिक रूप से नास्तिक
उत्तर: (b) कट्टर राजभक्त और रूढ़िवादी
व्याख्या:
1. पारिवारिक पृष्ठभूमिअगस्ट कॉम्ट का जन्म 19 जनवरी 1798 को मोंटपेलियर (Montpellier), फ्रांस में हुआ था।
उनका परिवार धार्मिक और राजनीतिक रूप से कैथोलिक (Catholic) एवं राजभक्त (Royalist) था।उनके पिता, लुई ऑगस्ट कॉम्ट (Louis Comte),
→ एक राजभक्त (Monarchist) सरकारी कर्मचारी थे, जो फ्रांस में राजा की सत्ता के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते थे।
→ वे कैथोलिक धर्म में गहरी आस्था रखते थे और किसी भी राजनीतिक परिवर्तन या विद्रोह का विरोध करते थे।इसलिए उनका स्वभाव कट्टर, रूढ़िवादी और राजभक्त कहा जाता है।
2. पिता के विचारों का कॉम्ट पर प्रभाव
कॉम्ट के पिता के कट्टर धार्मिक और राजभक्त स्वभाव ने प्रारंभ में उनके जीवन को प्रभावित किया,
लेकिन समय के साथ कॉम्ट ने इन विचारों से स्वयं को अलग कर लिया।उन्होंने धार्मिक रूढ़िवाद और राजशाही दोनों को अस्वीकार करते हुए
समाज को वैज्ञानिक और तार्किक आधार पर समझने की दिशा में कदम बढ़ाया।इस विरोधाभास ने उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण (scientific outlook) के विकास में योगदान दिया।
3. माता का स्वभाव (संदर्भ के रूप में)
कॉम्ट की माता फेलिसिटी रोसेट (Félicité Rosette) भी गहरी धार्मिक आस्था रखती थीं और
अपने पुत्र में नैतिकता और कर्तव्यभावना के बीज बोए,
हालाँकि कॉम्ट ने बाद में धार्मिक आस्था के स्थान पर मानवता (Humanity) को केंद्र में रखा।अतः स्पष्ट है कि —
सामाजिक गतिशीलता (Social Dynamics) समाज के परिवर्तन और प्रगति की प्रक्रिया का अध्ययन करती है।
यह समाजशास्त्र को वैज्ञानिक रूप से परिवर्तनशील और विकसित होने वाली इकाई के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान करती है।
19. अगस्ट कॉम्ट ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
(a) सोरबोन विश्वविद्यालय
(b) पेरिस का पॉलिटेकनिक स्कूल
(c) लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स
(d) मॉण्टपेलियर विश्वविद्यालय
उत्तर: (b) पेरिस का पॉलिटेकनिक स्कूल
व्याख्या:
1. प्रारंभिक शिक्षा का स्थानअगस्ट कॉम्ट ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने जन्मस्थान मॉण्टपेलियर (Montpellier) में प्राप्त की,
परंतु उच्च शिक्षा के लिए वे पेरिस (Paris) गए और वहाँ के प्रसिद्ध
École Polytechnique (पॉलिटेकनिक स्कूल) में दाखिल हुए।यह संस्थान फ्रांस का श्रेष्ठ वैज्ञानिक एवं गणितीय शिक्षा केंद्र था —
जहाँ विज्ञान, गणित, और अभियांत्रिकी (engineering) के क्षेत्र में कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था।2. पॉलिटेकनिक स्कूल में कॉम्ट का प्रदर्शन
कॉम्ट एक अत्यंत प्रतिभाशाली छात्र थे,
विशेषकर गणित और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि थी।उन्होंने यहीं से “वैज्ञानिक दृष्टि” (scientific outlook) विकसित की,
जिसने आगे चलकर उनके समाजशास्त्रीय सिद्धांत — प्रत्यक्षवाद (Positivism) — की नींव रखी।हालाँकि, 1816 में राजनीतिक कारणों से पॉलिटेकनिक स्कूल अस्थायी रूप से बंद हो गया,
जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में रोकनी पड़ी।3. आगे की शिक्षा और सेंट-साइमोन से संबंध
स्कूल बंद होने के बाद कॉम्ट ने निजी रूप से अध्ययन जारी रखा
और काउंट सेंट-साइमोन (Saint-Simon) के सचिव के रूप में कार्य किया।सेंट-साइमोन के साथ कार्यकाल के दौरान कॉम्ट ने “समाज के वैज्ञानिक अध्ययन” की दिशा में अपने विचार विकसित किए।
अतः यह स्पष्ट है कि —
अगस्ट कॉम्ट ने अपनी उच्च शिक्षा (Higher Education) पेरिस के École Polytechnique (पॉलिटेकनिक स्कूल) से प्राप्त की,
जहाँ से उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विश्लेषणात्मक सोच विकसित की।
20. कॉम्ट का कौन-सा विषय में विशेष झुकाव था?
(a) दर्शनशास्त्र
(b) गणित
(c) इतिहास
(d) जीवविज्ञान
उत्तर: (b) गणित
व्याख्या:
1. गणित में गहरी रुचि और प्रतिभाअगस्ट कॉम्ट बचपन से ही गणित (Mathematics) के प्रति अत्यधिक रुचि रखते थे।
वे संख्याओं और तार्किक विश्लेषण में निपुण थे — यही विश्लेषणात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उनके समाजशास्त्र के निर्माण में मुख्य आधार बना।कॉम्ट मानते थे कि जैसे गणित में घटनाओं का अध्ययन नियमों के आधार पर किया जाता है,
वैसे ही समाज को भी निश्चित सामाजिक नियमों (Social Laws) के तहत समझा जा सकता है।2. गणित का समाजशास्त्र से संबंध
कॉम्ट ने गणितीय तर्क (Mathematical Logic) से प्रेरित होकर
समाजशास्त्र को एक “वैज्ञानिक अनुशासन” (Scientific Discipline) के रूप में स्थापित किया।उन्होंने कहा कि —
“Society, like nature, operates according to fixed and discoverable laws.”
और इन नियमों की खोज में तर्क, गणना, और प्रमाण की भूमिका उतनी ही आवश्यक है जितनी भौतिकी या गणित में होती है।
3. “Social Physics” की अवधारणा
कॉम्ट ने समाजशास्त्र को प्रारंभ में “Social Physics (सामाजिक भौतिकी)” कहा।
इस नाम से उनका आशय यह था कि जैसे भौतिकी और गणित प्राकृतिक नियमों की खोज करते हैं,
वैसे ही समाजशास्त्र को भी सामाजिक नियमों की खोज करनी चाहिए।इसलिए कहा जा सकता है कि उनके समाजशास्त्र का वैज्ञानिक ढाँचा (Scientific Framework)
गणितीय दृष्टि पर आधारित था।अतः यह स्पष्ट है कि —
अगस्ट कॉम्ट का प्रमुख झुकाव गणित (Mathematics) की ओर था,
और इसी गणितीय दृष्टि ने उन्हें समाज के अध्ययन में
नियमबद्धता (Law), क्रम (Order) और वैज्ञानिकता (Scientific Method) की खोज करने के लिए प्रेरित किया।
21. पॉलिटेकनिक स्कूल में अगस्ट कॉम्ट का रवैया कैसा था?
(a) अनुशासित और आज्ञाकारी
(b) विद्रोही और परंपरा-विरोधी
(c) निष्क्रिय और असहयोगी
(d) उदासीन और निरपेक्ष
उत्तर: (b) विद्रोही और परंपरा-विरोधी
व्याख्या:
1. कॉम्ट का छात्र जीवन: बौद्धिक स्वतंत्रता का दौरअगस्ट कॉम्ट ने अपनी शिक्षा École Polytechnique (पॉलिटेकनिक स्कूल, पेरिस) में प्राप्त की —
यह संस्थान फ्रांस के सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान एवं गणित केंद्रों में से एक था।लेकिन यहाँ रहते हुए कॉम्ट ने —
- पारंपरिक शिक्षण प्रणाली (traditional education)
- रटने की पद्धति (rote learning)
- और संस्थागत अनुशासन (institutional discipline)
के विरुद्ध खुलकर असहमति जताई।
वे हर चीज़ को तर्क के आधार पर परखना चाहते थे,
जिसके कारण उनका रवैया “विद्रोही और परंपरा-विरोधी (rebellious and anti-traditional)” माना गया।2. अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि वैचारिक स्वतंत्रता
कॉम्ट का यह विद्रोह अनुशासनहीनता (indiscipline) नहीं था,
बल्कि एक बौद्धिक असहमति (intellectual dissent) थी।वे मानते थे कि —
“Blind obedience destroys the spirit of science.”
इसलिए वे शिक्षकों और प्रशासन के आदेशों पर प्रश्न उठाते थे,
जिसके कारण उन्हें स्कूल से अस्थायी निष्कासन (temporary expulsion) का सामना करना पड़ा।3. यह रवैया आगे चलकर क्यों महत्वपूर्ण बना?
यही “परंपरा-विरोधी” और “तर्कशील” दृष्टिकोण आगे चलकर उनके
प्रत्यक्षवाद (Positivism) और वैज्ञानिक समाजशास्त्र (Scientific Sociology) की नींव बना।उन्होंने समाजशास्त्र में भी यही सिद्धांत अपनाया कि —
सत्य को परंपरा नहीं, बल्कि अनुभव (experience) और अवलोकन (observation) से सिद्ध किया जाना चाहिए।कॉम्ट के छात्र जीवन का रवैया “विद्रोही और परंपरा-विरोधी (rebellious and anti-traditional)” था,
जो बाद में उनके वैज्ञानिक और प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण का आधार बना।
22. कॉम्ट ने अपने विद्यालय में किस व्यक्ति के आगमन पर विरोध प्रकट किया था?
(a) लुई फिलिप
(b) नेपोलियन
(c) रूसो
(d) मोंटेस्क्यू
उत्तर: (b) नेपोलियन
व्याख्या:
1. घटना का ऐतिहासिक संदर्भअगस्ट कॉम्ट अपने छात्र जीवन में पेरिस के École Polytechnique में अध्ययन कर रहे थे।
यह वह दौर था जब नेपोलियन बोनापार्ट को फ्रांस में एक महान शासक और राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जाता था।जब नेपोलियन को विद्यालय में मुख्य अतिथि (chief guest) के रूप में आमंत्रित किया गया,
तो अधिकांश छात्र और शिक्षक उनके स्वागत में उत्साहित थे।लेकिन कॉम्ट ने इसके विरुद्ध खुलकर विरोध (protest) किया।
2. कॉम्ट का विरोध क्यों?
कॉम्ट का विरोध व्यक्तिगत नहीं, बल्कि वैचारिक (ideological) था।
उनका मानना था कि —“नेपोलियन ने विज्ञान और बुद्धिजीवियों की स्वतंत्रता को दबाया है।”
कॉम्ट को लगता था कि राजनीतिक तानाशाही (political authoritarianism)
और वैज्ञानिक तर्कशीलता (scientific rationalism) एक साथ नहीं चल सकते।इसलिए उन्होंने कहा कि —
“उस युग के बुद्धिजीवी नासमझ (fools) हैं जो ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा करते हैं जिसने ज्ञान और स्वतंत्रता को कुचला।”
इस टिप्पणी से विद्यालय प्रशासन नाराज़ हो गया,
और कॉम्ट को अस्थायी निष्कासन (temporary suspension) भी झेलना पड़ा।3. इस घटना का महत्व
यह घटना दर्शाती है कि —
- कॉम्ट का स्वभाव स्वतंत्र विचारक (independent thinker) का था।
- वे सत्ता के आगे झुकने वाले नहीं, बल्कि बौद्धिक ईमानदारी (intellectual integrity) को सर्वोच्च मानते थे।
- यही दृष्टिकोण आगे चलकर उनके दर्शन “प्रत्यक्षवाद (Positivism)” की नींव बना,
जिसमें उन्होंने कहा कि समाज को “राजनीतिक शक्ति” नहीं बल्कि “वैज्ञानिक समझ” के आधार पर संगठित होना चाहिए।कॉम्ट ने अपने विद्यालय में नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) के आगमन पर विरोध किया,
क्योंकि वे राजनीतिक तानाशाही और बौद्धिक स्वतंत्रता को परस्पर विरोधी मानते थे।
23. अगस्ट कॉम्ट के जीवन में सबसे अधिक बौद्धिक प्रभाव किसका था?
(a) रूसो का
(b) हर्बर्ट स्पेंसर का
(c) सेंट साइमन का
(d) डेविड ह्यूम का
उत्तर: (c) सेंट साइमन का
व्याख्या:
1. कॉम्ट और सेंट-साइमोन का संबंध
- अगस्ट कॉम्ट ने अपने प्रारंभिक बौद्धिक जीवन में फ्रांसीसी विचारक Claude Henri de Saint-Simon (1760–1825) के साथ काम किया।
- 1817 से 1824 तक कॉम्ट, सेंट-साइमोन के सहयोगी, सचिव और शिष्य रहे।
- इस अवधि में उन्होंने सेंट-साइमोन की कई रचनाओं में योगदान दिया, जैसे:
“Plan des travaux scientifiques nécessaires pour réorganiser la société” (1822) — जिसे बाद में कॉम्ट ने अपना स्वतंत्र लेख बताया।2. सेंट-साइमोन का कॉम्ट पर प्रभाव
क्षेत्र सेंट-साइमोन का विचार कॉम्ट द्वारा ग्रहण समाज का अध्ययन समाज को वैज्ञानिक ढंग से समझना चाहिए “Social Physics” (Sociology) की अवधारणा सामाजिक सुधार विज्ञान और उद्योग पर आधारित समाज प्रत्यक्षवाद का सामाजिक प्रयोग व्यवस्था और प्रगति समाज में नैतिक एवं वैज्ञानिक नेतृत्व की आवश्यकता “Order and Progress” — कॉम्ट का नारा ज्ञान की भूमिका वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों की भूमिका निर्णायक “Priests of Humanity” का विचार 3. मतभेद और अलगाव
हालाँकि शुरुआत में दोनों के विचार काफी समान थे,
लेकिन 1824 के बाद उनके बीच मतभेद हो गए —
मुख्यतः इसलिए क्योंकि सेंट-साइमोन अपने सुधारों को धार्मिक रूप देना चाहते थे,
जबकि कॉम्ट पूर्ण वैज्ञानिक दृष्टिकोण (pure positivism) के पक्षधर थे।इसलिए कॉम्ट ने अपने बाद के लेखन में कहा —
“I owe to Saint-Simon the first impulse, but I built my own system independently.”
4. इस प्रभाव का परिणाम
- कॉम्ट के Positive Philosophy (1830–42) में सेंट-साइमोन के सामाजिक-वैज्ञानिक विचारों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
- समाज के स्थैतिक (Statics) और गतिशील (Dynamics) अध्ययन की अवधारणा भी सेंट-साइमोन की प्रेरणा से विकसित हुई।
- उनका प्रसिद्ध नारा — “Love as a principle, Order as the basis, Progress as the goal” — सेंट-साइमोन के नैतिक-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मेल खाता है।
अतः, अगस्ट कॉम्ट के जीवन में सबसे गहरा बौद्धिक प्रभाव सेंट-साइमोन (Saint-Simon) का था।
उनकी प्रेरणा से ही कॉम्ट ने समाज को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने की परंपरा —
अर्थात् प्रत्यक्षवाद (Positivism) — की नींव रखी।
24. सेंट साइमन और कॉम्ट के संबंधों का परिणाम क्या हुआ?
(a) आजीवन मित्रता
(b) बौद्धिक संघर्ष और अलगाव
(c) आर्थिक सहयोग
(d) धार्मिक गठबंधन
उत्तर: (b) बौद्धिक संघर्ष और अलगाव
व्याख्या:
1. प्रारंभिक सहयोग (1817–1824)
- अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte) ने अपने बौद्धिक जीवन की शुरुआत में सेंट-साइमोन (Saint-Simon) के साथ कार्य किया।
- दोनों का उद्देश्य था — समाज का वैज्ञानिक पुनर्गठन (scientific reorganization of society)।
- कॉम्ट, सेंट-साइमोन के सहयोगी, सचिव और संपादक के रूप में कार्यरत थे।
- इस दौरान कॉम्ट ने सेंट-साइमोन की कई रचनाओं को संपादित किया, जिनमें उनका प्रभाव स्पष्ट दिखता है।
2. विचारों का टकराव
समय के साथ दोनों के बीच गहरे बौद्धिक मतभेद (intellectual differences) उभरने लगे।
विषय सेंट-साइमोन कॉम्ट समाज का स्वरूप नैतिक और धार्मिक आधार पर पुनर्गठन वैज्ञानिक और प्रत्यक्षवादी पद्धति से अध्ययन नेतृत्व का दृष्टिकोण उद्योगपतियों और वैज्ञानिकों का नेतृत्व वैज्ञानिकों के नैतिक नेतृत्व (Priesthood of Humanity) धर्म की भूमिका सामाजिक नैतिकता के लिए “New Christianity” की आवश्यकता धर्म को विज्ञान से प्रतिस्थापित करने की वकालत ज्ञान की दिशा व्यवहारिक और सुधारवादी दार्शनिक और प्रणालीबद्ध (systematic) इस प्रकार दोनों के बीच विचारों का संघर्ष बढ़ता गया।
3. अलगाव का कारण और परिणाम
- 1824 में कॉम्ट ने सेंट-साइमोन से पूर्णतः अलग होने का निर्णय लिया।
- उन्होंने कहा कि सेंट-साइमोन उनके विचारों को अपने नाम से प्रकाशित कर रहे थे।
- इसके बाद कॉम्ट ने अपनी स्वतंत्र बौद्धिक पहचान बनाई और “Positive Philosophy” की रचना की।
Comte ने लिखा:
“I was indebted to Saint-Simon for the initial impulse, but my system is entirely my own creation.”4. परिणाम — बौद्धिक संघर्ष और अलगाव
इस बौद्धिक टकराव का परिणाम यह हुआ कि —
- दोनों का संबंध टूट गया,
- कॉम्ट ने स्वतंत्र रूप से समाजशास्त्र (Sociology) को वैज्ञानिक रूप में विकसित किया,
- और सेंट-साइमोन सुधारवादी विचारक के रूप में जाने गए।
अतः यह संबंध आजीवन सहयोग नहीं, बल्कि बौद्धिक संघर्ष और अलगाव में समाप्त हुआ।
अतः,
सेंट-साइमोन और कॉम्ट के संबंधों का परिणाम था —
बौद्धिक संघर्ष (Intellectual Conflict) और अलगाव (Separation),
जिसने कॉम्ट को एक स्वतंत्र वैज्ञानिक विचारक बनने की दिशा दी।
25. कॉम्ट के विवाह जीवन के बारे में कौन-सा कथन सही है?
(a) वे अपनी पत्नी के साथ सुखी जीवन व्यतीत करते थे।
(b) उनका विवाह जीवन असफल रहा और उन्होंने उससे दूरी बना ली।
(c) वे अविवाहित रहे।
(d) उनका विवाह जीवन बाद में सुधार गया।
उत्तर: (b) उनका विवाह जीवन असफल रहा और उन्होंने उससे दूरी बना ली।
व्याख्या:
1. कॉम्ट का वैवाहिक जीवन
अगस्ट कॉम्ट ने 1825 में कैरोलिन मासिन (Caroline Massin) से विवाह किया था।
शुरुआत में यह विवाह प्रेम-आधारित था, लेकिन समय के साथ उनके बीच तनाव, मतभेद और मानसिक असंतुलन बढ़ने लगे।कॉम्ट मानसिक रूप से भी अस्थिर रहने लगे, और 1826 में उन्होंने आत्महत्या का भी प्रयास किया था।
आख़िरकार, कॉम्ट और कैरोलिन अलग हो गए, और उनका विवाह जीवन समाप्त हो गया।यह अनुभव उनके जीवन का अत्यंत दुखद अध्याय था, जिसने उनके विचारों को भावनात्मक रूप से गहराई दी।
2. विवाह जीवन और दार्शनिक परिवर्तन का संबंध
विवाह विफल होने के बाद कॉम्ट और अधिक आध्यात्मिक और भावनात्मक दृष्टिकोण की ओर मुड़े।
बाद के वर्षों में वे क्लोथिल्ड डी वो (Clotilde de Vaux) नामक एक महिला से गहराई से प्रभावित हुए, जो उनके लिए नैतिक और भावनात्मक प्रेरणा बनीं।कॉम्ट ने अपनी “Religion of Humanity” (मानवता का धर्म) की अवधारणा को क्लोथिल्ड से प्रेरित होकर विकसित किया।
इस प्रकार, उनके असफल वैवाहिक जीवन और बाद के भावनात्मक अनुभवों ने उनके दार्शनिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. जीवन का बाद का चरण
विवाहिक असफलता और क्लोथिल्ड की असामयिक मृत्यु के बाद, कॉम्ट ने अपना जीवन पूरी तरह मानवता की सेवा और समाजशास्त्र के विकास को समर्पित कर दिया।
उनकी रचनाएँ जैसे —
The Positive Philosophy (1830–42) और The System of Positive Polity (1851–54) —
इन्हीं भावनात्मक और दार्शनिक परिवर्तनों का परिणाम थीं।कॉम्ट का वैवाहिक जीवन असफल और तनावपूर्ण था।
उन्होंने अपनी पत्नी से दूरी बना ली, और यह व्यक्तिगत पीड़ा उनके दार्शनिक दृष्टिकोण को गहराई देने का कारण बनी।
26. अगस्ट कॉम्ट ने आर्थिक तंगी के समय कौन-सी गतिविधि अपनाई?
(a) शिक्षण और व्याख्यान देना
(b) वैज्ञानिक प्रयोग करना
(c) राजनीति में भाग लेना
(d) धार्मिक प्रवचन देना
उत्तर: (a) शिक्षण और व्याख्यान देना
व्याख्या:
1. कॉम्ट की आर्थिक स्थितिअगस्ट कॉम्ट के जीवन का अधिकांश भाग आर्थिक कठिनाइयों से भरा हुआ था।
सेंट-साइमोन से अलग होने के बाद उनके पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं था।
उनकी वैवाहिक असफलता और मानसिक अस्थिरता ने भी उनकी आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया।वे अपने जीवनयापन के लिए कभी-कभी मित्रों की सहायता लेते थे, लेकिन मुख्यतः शिक्षण और व्याख्यानों पर निर्भर रहे।
2. शिक्षण और व्याख्यान की भूमिका
कॉम्ट ने पॉलिटेक्निक स्कूल (École Polytechnique, Paris) में ट्यूटर और व्याख्याता के रूप में कार्य किया।
उन्होंने “Course of Positive Philosophy” (Cours de Philosophie Positive) शीर्षक से व्याख्यानों की एक श्रृंखला शुरू की (सन् 1830–1842)।इन व्याख्यानों में उन्होंने अपने प्रसिद्ध सिद्धांत —
प्रत्यक्षवाद (Positivism), तीन अवस्थाओं का नियम (Law of Three Stages),
और समाज की स्थैतिकि व गतिशास्त्र (Social Statics & Dynamics) —
को विकसित और प्रस्तुत किया।इन व्याख्यानों ने ही बाद में “The Positive Philosophy” नामक उनकी प्रसिद्ध पुस्तक का रूप लिया।
3. प्रत्यक्षवाद के प्रचार का माध्यम
कॉम्ट ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से यह विचार प्रसारित किया कि —
समाज को वैज्ञानिक विधि (Scientific Method) से समझा जाना चाहिए,
और समाजशास्त्र (Sociology) को भी प्राकृतिक विज्ञानों की तरह व्यवस्थित ढंग से विकसित किया जा सकता है।इस प्रकार, आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने शिक्षण और व्याख्यानों को अपने विचारों के प्रचार का माध्यम बनाया।
अगस्ट कॉम्ट ने आर्थिक संकट के समय शिक्षण और सार्वजनिक व्याख्यानों को ही अपने जीवनयापन और विचार-प्रचार का साधन बनाया।
इन्हीं व्याख्यानों से उनका प्रसिद्ध प्रत्यक्षवाद (Positivism) विकसित हुआ।
27. कॉम्ट के व्याख्यानों का मुख्य विषय क्या था?
(a) धर्म और समाज
(b) प्रत्यक्षवाद और समाज के नियम
(c) कला और सौंदर्यशास्त्र
(d) इतिहास और राजनीति
उत्तर: (b) प्रत्यक्षवाद और समाज के नियम
व्याख्या:
1. व्याख्यानों का उद्देश्य
अगस्ट कॉम्ट ने 1826 में “Course of Positive Philosophy (Cours de Philosophie Positive)” शीर्षक से व्याख्यानों की श्रृंखला प्रारंभ की।
इनका मुख्य उद्देश्य था — समाज का अध्ययन वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) से करना और यह दिखाना कि समाज भी नियमबद्ध (Law-governed) घटनाओं का समूह है।उन्होंने यह प्रतिपादित किया कि समाज का विश्लेषण भी उसी प्रकार किया जा सकता है,
जैसे प्राकृतिक विज्ञान (Physics, Biology) में वस्तुओं और घटनाओं का होता है।2. प्रत्यक्षवाद (Positivism) का केंद्र
कॉम्ट का पूरा विचारधारात्मक तंत्र प्रत्यक्षवाद (Positivism) पर आधारित था।
उन्होंने कहा कि —“मनुष्य को केवल उन तथ्यों (Facts) का अध्ययन करना चाहिए, जिन्हें देखा जा सकता है, परखा जा सकता है और अनुभव से सिद्ध किया जा सकता है।”
इस प्रकार, उनके व्याख्यानों का मुख्य विषय “प्रत्यक्षवाद और समाज के वैज्ञानिक नियमों” की व्याख्या था।
3. समाज के नियमों की खोज
कॉम्ट का मानना था कि जैसे न्यूटन ने प्रकृति के नियमों की खोज की, वैसे ही समाजशास्त्र (Sociology) का कार्य समाज के नियमों (Laws of Society) की खोज करना है।
इसी उद्देश्य से उन्होंने दो प्रमुख उपविषय विकसित किए —
- Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि): समाज की संरचना और व्यवस्था का अध्ययन
- Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता): समाज के परिवर्तन और विकास के नियमों का अध्ययन
इन दोनों पहलुओं का वर्णन उनके व्याख्यानों का मूल केंद्र था।
4. परिणाम
कॉम्ट के ये व्याख्यान आगे चलकर उनकी महान पुस्तक
“The Positive Philosophy” (1830–1842) के रूप में प्रकाशित हुए।
इस पुस्तक ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र और वैज्ञानिक विषय के रूप में स्थापित किया।कॉम्ट के व्याख्यानों का प्रमुख विषय था —
समाज को वैज्ञानिक दृष्टि से समझना, प्रत्यक्षवाद के आधार पर समाज के नियमों की खोज करना।
28. अगस्ट कॉम्ट कब मानसिक रूप से अस्वस्थ हुए थे?
(a) 1815
(b) 1827
(c) 1835
(d) 1848
उत्तर: (b) 1827
व्याख्या:
1. मानसिक अस्वस्थता का काल (1826–1827)
अगस्ट कॉम्ट ने जब 1826 में “Course of Positive Philosophy” शीर्षक से व्याख्यान श्रृंखला शुरू की,
तो उनके ऊपर अत्यधिक मानसिक और आर्थिक दबाव था।
इन परिस्थितियों के कारण 1827 में वे गंभीर मानसिक तनाव (mental breakdown) से ग्रसित हो गए।वे गहरे अवसाद (Depression) में चले गए और कुछ समय के लिए पूरी तरह अस्थिर हो गए।
उनके मित्र और सहयोगियों ने उन्हें चिकित्सकीय देखभाल दिलाई।2. पुनः स्वस्थ होकर वापसी
लगभग एक वर्ष बाद (1828 के आसपास) कॉम्ट धीरे-धीरे स्वस्थ हुए और फिर से अपने बौद्धिक कार्यों में लौट आए।
इसके बाद उन्होंने अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य —
“The Positive Philosophy (1830–1842)” — लिखना प्रारंभ किया,
जो समाजशास्त्र की बुनियादी ग्रंथ के रूप में प्रसिद्ध है।मानसिक संकट के बाद उनका चिंतन और अधिक दार्शनिक और मानवतावादी हो गया।
3. इस घटना का प्रभाव
यह मानसिक संकट उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट (Turning Point) साबित हुआ —
क्योंकि इसके बाद उन्होंने “वैज्ञानिकता” (scientific rationality) के साथ-साथ
“मानवता” (humanism) को भी अपने दर्शन का केंद्र बना लिया।उनकी बाद की रचनाओं जैसे System of Positive Polity (1851–54) में
“मानव धर्म (Religion of Humanity)” की अवधारणा इसी मानसिक अनुभव का परिणाम थी।अगस्ट कॉम्ट सन् 1827 में मानसिक रूप से अस्वस्थ हुए थे।
यह अवधि उनके जीवन का संकट काल थी, लेकिन इसी के बाद वे और भी गंभीर, संवेदनशील और वैज्ञानिक विचारक बनकर उभरे।
29. मानसिक बीमारी से उबरने के बाद कॉम्ट ने क्या किया?
(a) राजनीति में प्रवेश किया
(b) धार्मिक आंदोलन शुरू किया
(c) पुनः समाजशास्त्र पर कार्य प्रारंभ किया
(d) फ्रांस छोड़ दिया
उत्तर: (c) पुनः समाजशास्त्र पर कार्य प्रारंभ किया
व्याख्या:
1. मानसिक अस्वस्थता का काल (1826–1827)अगस्ट कॉम्ट 1826 में जब अपने Positivist Philosophy पर सार्वजनिक व्याख्यानों की श्रृंखला आयोजित कर रहे थे, तभी वे मानसिक तनाव और गहन अवसाद का शिकार हो गए।
1827 में उनकी स्थिति गंभीर हो गई — यहाँ तक कि उन्होंने आत्महत्या का प्रयास भी किया था।
लगभग एक वर्ष के विश्राम और चिकित्सा के बाद वे स्वस्थ हुए।यह मानसिक संकट उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
2. स्वस्थ होने के बाद — बौद्धिक पुनर्जागरण
स्वस्थ होने के बाद कॉम्ट ने पुनः समाजशास्त्र और प्रत्यक्षवाद (Positivism) पर कार्य प्रारंभ किया।
उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाज के अध्ययन की योजना को व्यवस्थित रूप दिया।
यही दौर उनके महान ग्रंथ “Course of Positive Philosophy” (1830–1842) की तैयारी का था।Comte: “I resumed my lectures and writings to develop the positive philosophy which I had conceived before my illness.”
3. “Course of Positive Philosophy” — समाजशास्त्र की नींव
यह ग्रंथ छह खंडों में प्रकाशित हुआ और इसमें उन्होंने मानव ज्ञान के विकास को तीन अवस्थाओं —
Theological → Metaphysical → Positive — में विभाजित किया।इसी कृति में उन्होंने पहली बार “Sociology” शब्द का प्रयोग किया और इसे एक वैज्ञानिक अनुशासन (Scientific Discipline) के रूप में परिभाषित किया।
यह कृति ही आधुनिक समाजशास्त्र की आधारशिला बनी।
4. प्रत्यक्षवाद का पुनर्गठन
मानसिक बीमारी के बाद कॉम्ट और भी दृढ़ हो गए कि समाज को केवल अनुभवजन्य और वैज्ञानिक पद्धति से ही समझा जा सकता है।
इसलिए उन्होंने अपने व्याख्यानों और लेखन में “Positive Philosophy” के माध्यम से समाजशास्त्र को प्राकृतिक विज्ञानों के समकक्ष स्थापित करने की दिशा में काम किया।अगस्ट कॉम्ट ने मानसिक बीमारी से उबरने के बाद —
पुनः अपने बौद्धिक जीवन की शुरुआत की,
समाजशास्त्र और प्रत्यक्षवाद को वैज्ञानिक रूप में विकसित किया,
और “Course of Positive Philosophy” के माध्यम से समाजशास्त्र की नींव रखी।
30. जीवन के अंतिम चरण में कॉम्ट स्वयं को किस रूप में देखने लगे थे?
(a) वैज्ञानिक
(b) तत्त्वज्ञानी
(c) पैग़म्बर
(d) सामाजिक सुधारक
उत्तर: (c) पैग़म्बर (Prophet)
व्याख्या:
1. कॉम्ट के विचारों का अंतिम रूप
कॉम्ट के जीवन के अंतिम वर्षों (लगभग 1848 के बाद) में उनके विचारों में एक दार्शनिक से धार्मिक रूपांतरण देखा गया।
उन्होंने “Religion of Humanity (मानवता का धर्म)” की स्थापना की, जिसमें वे स्वयं को एक “नए पैग़म्बर” या “High Priest of Humanity” के रूप में देखने लगे।Comte believed that humanity itself should be the object of worship,
and he considered himself as the prophet of this new religion.2. “Religion of Humanity” क्या था?
कॉम्ट ने महसूस किया कि वैज्ञानिकता (Science) और बुद्धिवाद (Rationalism) मानव जीवन में नैतिक दिशा नहीं दे पा रहे थे।
इसलिए उन्होंने एक ऐसे “धर्म” की कल्पना की, जो भगवान की जगह मानवता को पूजनीय बनाए।इस धर्म के मुख्य तत्त्व थे —
- ईश्वर की जगह मानवता (Humanity) की पूजा
- समाज की सेवा को नैतिक कर्तव्य मानना
- वैज्ञानिक ज्ञान और नैतिकता का समन्वय करना
उन्होंने इसके लिए एक धार्मिक ढांचा भी तैयार किया —
- Calendar of Great Men (महान व्यक्तियों का पंचांग)
- Positivist Church (प्रत्यक्षवादी चर्च)
- और Prayers, Rituals, and Worship जैसी व्यवस्थाएँ
3. स्वयं को “पैग़म्बर” क्यों कहा?
कॉम्ट को विश्वास हो गया था कि वे मानवता के नए युग (Age of Positivity) के अग्रदूत हैं।
इसलिए उन्होंने स्वयं को “Prophet of the Religion of Humanity” घोषित किया —
एक ऐसे धर्म के संदेशवाहक के रूप में जो तर्क, विज्ञान, और मानवता के प्रेम पर आधारित था।Comte: “I am the founder and the high priest of the Religion of Humanity.”
(A General View of Positivism, 1848)4. समाजशास्त्र से धर्म की ओर झुकाव
- प्रारंभिक कॉम्ट ने समाज को वैज्ञानिक रूप से समझाने पर बल दिया।
- परंतु अंतिम कॉम्ट ने भावनात्मक और नैतिक एकता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
इस प्रकार, उन्होंने समाजशास्त्र को “Social Physics” से “Moral Science of Humanity” तक विकसित किया —
जहाँ विज्ञान के साथ नैतिकता और धर्म का समावेश हुआ।कॉम्ट ने अपने जीवन के अंतिम चरण में यह विश्वास कर लिया था कि —
मानवता को एक नए धर्म की आवश्यकता है,
और वे स्वयं उस धर्म के पैग़म्बर हैं।
31. कॉम्ट के “Religion of Humanity” का उद्देश्य क्या था?
(a) ईश्वर की उपासना को पुनर्स्थापित करना
(b) मानव को धर्म के केंद्र में रखना
(c) पुराने धर्मों का विरोध करना
(d) धार्मिक संस्थाओं का पुनर्गठन
उत्तर: (b) मानव को धर्म के केंद्र में रखना
व्याख्या:
1. “Religion of Humanity” की पृष्ठभूमि
अपने जीवन के अंतिम चरण में (1848 के बाद) कॉम्ट ने महसूस किया कि समाज में केवल वैज्ञानिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है —
मनुष्य को नैतिक और भावनात्मक दिशा की भी आवश्यकता होती है।उन्होंने माना कि पारंपरिक धर्म (Theological Religions) अब मानवता की सेवा नहीं कर रहे हैं।
इसलिए उन्होंने एक नया धर्म प्रस्तावित किया — “Religion of Humanity”,
जिसका केंद्र ईश्वर नहीं, बल्कि मनुष्य स्वयं (Human Being) था।“To live for others — that is the eternal law of human life.” — Auguste Comte
2. मुख्य उद्देश्य
कॉम्ट का उद्देश्य किसी ईश्वर या अलौकिक सत्ता की उपासना नहीं था,
बल्कि मानवता (Humanity) को ही नैतिक प्रेरणा और पूजा का केंद्र बनाना था।मुख्य लक्ष्य:
- मानवता की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानना
- समाज में नैतिक एकता (Moral Unity) स्थापित करना
- आत्म-नियंत्रण, परोपकार और प्रेम जैसे मूल्यों को बढ़ावा देना
उन्होंने कहा — “The new religion shall worship Humanity as the Great Being.”
3. “Religion of Humanity” की विशेषताएँ
विशेषता विवरण केंद्र बिंदु मानवता (Humanity) – ईश्वर की जगह मुख्य सिद्धांत “Live for Others” — दूसरों के लिए जीना उद्देश्य नैतिक पुनर्निर्माण और सामाजिक एकता पुरोहित वर्ग वैज्ञानिक और समाजसेवी (Priesthood of Humanity) पवित्र प्रतीक पृथ्वी (Earth), महिला (Woman), और मानवता (Humanity) प्रार्थना/अनुष्ठान नैतिक मूल्यों पर केंद्रित, न कि ईश्वर की पूजा 4. समाजशास्त्रीय दृष्टि से महत्व
कॉम्ट का यह धर्म एक प्रकार का नैतिक समाजशास्त्र (Moral Sociology) था —
उन्होंने धर्म को समाज में एकजुटता (Social Cohesion) बनाए रखने के साधन के रूप में देखा।
“Religion of Humanity” ने नैतिकता, प्रेम और सहयोग को सामाजिक स्थिरता का आधार माना।यह विचार आगे चलकर Émile Durkheim के “Moral Order” सिद्धांत से भी जुड़ता है।
कॉम्ट का “Religion of Humanity” एक मानव-केंद्रित नैतिक धर्म था,
जिसका उद्देश्य था —
“मानवता को सर्वोच्च मूल्य बनाना और नैतिक एकता के माध्यम से समाज का पुनर्निर्माण करना।”
32. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य अगस्ट कॉम्ट के प्रमुख योगदानों में नहीं आता?
(a) समाजशास्त्र का नामकरण
(b) प्रत्यक्षवादी विधि का प्रतिपादन
(c) समाज की गतिशीलता और स्थैतिकि का विश्लेषण
(d) ऐतिहासिक भौतिकवाद का प्रतिपादन
उत्तर: (d) ऐतिहासिक भौतिकवाद का प्रतिपादन
व्याख्या:
1. कॉम्ट के प्रमुख योगदान
अगस्ट कॉम्ट (Auguste Comte, 1798–1857) समाजशास्त्र के जनक (Father of Sociology) माने जाते हैं।
उन्होंने समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की नींव रखी और कई मूलभूत अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं —
क्षेत्र कॉम्ट का योगदान समाजशास्त्र का नामकरण “Sociology” शब्द का पहली बार प्रयोग किया (1839) वैज्ञानिक पद्धति प्रत्यक्षवाद (Positivism) का प्रतिपादन समाज की संरचना और परिवर्तन “Social Statics” (स्थैतिकि) और “Social Dynamics” (गतिशीलता) की अवधारणा ज्ञान की त्रि-चरणीय प्रक्रिया Theological → Metaphysical → Positive चरण मानवता का धर्म “Religion of Humanity” की स्थापना इन योगदानों के कारण कॉम्ट को “सामाजिक विज्ञान के प्रवर्तक” कहा जाता है।
2. ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism)
यह विचार कॉम्ट का नहीं, बल्कि कार्ल मार्क्स (Karl Marx) का है।
मार्क्स ने यह सिद्धांत अपने ग्रंथ “A Contribution to the Critique of Political Economy” और “Das Kapital” में प्रस्तुत किया।मुख्य विचार:
इतिहास का विकास भौतिक (आर्थिक) परिस्थितियों पर आधारित होता है —
अर्थात् आर्थिक संरचना (economic structure) समाज की राजनीतिक और वैचारिक संस्थाओं को निर्धारित करती है।
तुलना अगस्ट कॉम्ट कार्ल मार्क्स दृष्टिकोण प्रत्यक्षवाद (Positivism) ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) अध्ययन का केंद्र सामाजिक व्यवस्था और नैतिकता उत्पादन संबंध और वर्ग संघर्ष पद्धति वैज्ञानिक अवलोकन व वर्गीकरण ऐतिहासिक-भौतिक विश्लेषण उद्देश्य सामाजिक एकता सामाजिक परिवर्तन (क्रांति) इसलिए, जबकि कॉम्ट का कार्य समाजशास्त्र की संरचना, पद्धति और नैतिकता से जुड़ा था,
ऐतिहासिक भौतिकवाद का प्रतिपादन कार्ल मार्क्स द्वारा किया गया।
33. अगस्ट कॉम्ट की बौद्धिक यात्रा की शुरुआत किस विचार से हुई थी?
(a) धार्मिक सुधार से
(b) तर्कवाद से
(c) वैज्ञानिक प्रत्यक्षवाद से
(d) मानवतावाद से
उत्तर: (c) वैज्ञानिक प्रत्यक्षवाद से
व्याख्या:
1. प्रत्यक्षवाद (Positivism) — कॉम्ट का मूल विचार
अगस्ट कॉम्ट की बौद्धिक यात्रा का आरंभ ही प्रत्यक्षवाद (Positivism) के विचार से हुआ था।
उन्होंने माना कि —“मनुष्य का ज्ञान केवल उसी पर आधारित होना चाहिए जिसे देखा (observe), परखा (verify) और अनुभव (experience) किया जा सके।”
यानी, समाज का अध्ययन भी वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) द्वारा किया जाना चाहिए।
2. कॉम्ट की वैज्ञानिक दृष्टि
कॉम्ट का मानना था कि जैसे भौतिक विज्ञान (Physics) या खगोल विज्ञान (Astronomy) प्राकृतिक नियमों की खोज करते हैं,
वैसे ही समाजशास्त्र को भी सामाजिक नियमों (Social Laws) की खोज करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि —
“Social phenomena, like physical phenomena, are governed by natural laws.”
इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को उन्होंने “Positive Philosophy” कहा।
3. प्रत्यक्षवाद का अर्थ
“Positivism” शब्द लैटिन शब्द positus से बना है, जिसका अर्थ है “that which is given” या “which can be known by observation।”
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद तीन मूल सिद्धांतों पर आधारित था:
- Observation (प्रेक्षण)
- Experimentation (प्रयोग)
- Comparison (तुलना)
इन तरीकों से समाज को समझने की बात करके उन्होंने समाजशास्त्र को एक वैज्ञानिक अनुशासन (Scientific Discipline) बनाने की नींव रखी।
4. धार्मिक या दार्शनिक नहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण
कॉम्ट ने अपनी बौद्धिक यात्रा धर्म या रहस्यवाद से नहीं, बल्कि विज्ञान के अध्ययन से प्रारंभ की।
उन पर भौतिकी, खगोलशास्त्र, और गणित की शिक्षा का गहरा प्रभाव था।
इसीलिए उन्होंने “Social Physics” शब्द का प्रयोग भी प्रारंभ में किया, जो बाद में “Sociology” कहलाया।अगस्ट कॉम्ट की बौद्धिक यात्रा का आरंभ वैज्ञानिक प्रत्यक्षवाद (Scientific Positivism) से हुआ,
जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि समाज का अध्ययन भी प्राकृतिक विज्ञानों की तरह अनुभवजन्य (empirical) और वैज्ञानिक (scientific) तरीकों से होना चाहिए।
34. कॉम्ट ने समाजशास्त्र को किस रूप में परिभाषित किया?
(a) मानव व्यवहार का अध्ययन
(b) सामाजिक तथ्यों का अध्ययन
(c) समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की विधि
(d) आर्थिक संबंधों का विश्लेषण
उत्तर: (c) समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की विधि
व्याख्या:
1. कॉम्ट का उद्देश्य — समाज का वैज्ञानिक अध्ययन
अगस्ट कॉम्ट का प्रमुख उद्देश्य था कि समाज का अध्ययन भी वैसा ही वैज्ञानिक रूप से (Scientifically) किया जाए,
जैसा प्राकृतिक जगत (Natural World) का अध्ययन भौतिकी, रसायन या जीवविज्ञान में किया जाता है।Comte: “Sociology is the science of social phenomena subjected to natural laws.”
इस दृष्टिकोण के कारण कॉम्ट ने समाजशास्त्र को “Science of Society” कहा —
अर्थात् समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करने की विधा।2. समाजशास्त्र — “Queen of Sciences”
कॉम्ट का मानना था कि सभी विज्ञानों में समाजशास्त्र सर्वोच्च है, क्योंकि यह
अन्य सभी विज्ञानों के निष्कर्षों को समन्वित करता है और मानव समाज की एकता को समझाता है।उन्होंने कहा — “Sociology is the Queen of Sciences.”
यानी समाजशास्त्र सभी विज्ञानों की चरम अवस्था (culmination) है,
जहाँ मानव बुद्धि का सर्वोच्च विकास सामाजिक स्तर पर दिखाई देता है।3. दो भागों में विभाजन — सामाजिक स्थैतिकि और गतिकि
कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो प्रमुख भागों में बाँटा:
- Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि):
समाज की संरचना, संस्थाएँ और उनके बीच संतुलन का अध्ययन।- Social Dynamics (सामाजिक गतिकि):
समाज में परिवर्तन, विकास और प्रगति के नियमों का अध्ययन।इन दोनों के माध्यम से उन्होंने समाज को एक सजीव प्रणाली (living system) माना,
जिसे वैज्ञानिक ढंग से समझा जा सकता है।4. प्रत्यक्षवाद (Positivism) का प्रभाव
कॉम्ट का प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण कहता है कि समाजशास्त्र को भी उन्हीं नियमों और विधियों का उपयोग करना चाहिए
जो प्राकृतिक विज्ञानों में होते हैं — अर्थात् अवलोकन (Observation), प्रयोग (Experimentation), और तुलना (Comparison)।यही कारण है कि उन्होंने समाजशास्त्र को “सामाजिक घटनाओं के अध्ययन की वैज्ञानिक विधि” कहा।
कॉम्ट ने समाजशास्त्र को इस प्रकार परिभाषित किया —
“समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करता है।”
उन्होंने इसे सभी विज्ञानों की “रानी (Queen of Sciences)” कहा,
क्योंकि यह मानवता के विकास और सामाजिक नियमों की खोज का सर्वोच्च प्रयास है।
35. कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का अंतिम उद्देश्य क्या था?
(a) राजनीतिक स्थिरता
(b) सामाजिक व्यवस्था और प्रगति का संतुलन
(c) धार्मिक एकता
(d) आर्थिक समानता
उत्तर: (b) सामाजिक व्यवस्था और प्रगति का संतुलन
व्याख्या:
1. कॉम्ट के दर्शन का केन्द्रीय विचार — Order and Progress
अगस्ट कॉम्ट का समाजशास्त्र दो मूलभूत अवधारणाओं पर आधारित है:
Order (व्यवस्था) और
Progress (प्रगति)उनका मानना था कि —
“Without order, there can be no progress; and without progress, order would decay.”
— Auguste Comte, The Positive Philosophyअर्थात् — यदि समाज में व्यवस्था न हो, तो प्रगति संभव नहीं,
और यदि प्रगति न हो, तो व्यवस्था स्थिर होकर नष्ट हो जाएगी।इस प्रकार समाज का अंतिम उद्देश्य व्यवस्था और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करना है।
2. सामाजिक स्थैतिकि (Statics) और सामाजिक गतिकि (Dynamics)
कॉम्ट ने अपने समाजशास्त्र को दो भागों में विभाजित किया था —
- Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि) —
समाज की संरचना, संस्थाएँ और उनके बीच सामंजस्य (Order) का अध्ययन।- Social Dynamics (सामाजिक गतिकि) —
समाज में विकास, परिवर्तन और प्रगति (Progress) का अध्ययन।इन दोनों का समन्वय (integration) ही समाजशास्त्र का उद्देश्य है —
यानी “सामाजिक व्यवस्था में प्रगति” और “प्रगति में व्यवस्था”।3. कॉम्ट का आदर्श समाज
कॉम्ट का आदर्श समाज वह था जिसमें —
- नैतिक और बौद्धिक एकता (Moral & Intellectual Unity) हो,
- राजनीतिक स्थिरता हो, और
- वैज्ञानिक प्रगति भी निरंतर जारी रहे।
उन्होंने कहा कि समाज की स्थिरता केवल तभी बनी रह सकती है जब उसमें
नैतिकता (morality) और विज्ञान (science) का संतुलन हो।4. “Order and Progress” का ऐतिहासिक महत्व
कॉम्ट का यह नारा —
“L’Ordre et le Progrès” (Order and Progress)
इतना प्रसिद्ध हुआ कि यह ब्राज़ील के राष्ट्रीय ध्वज (Flag of Brazil) पर भी अंकित है 🇧🇷 —
जो उनके विचारों की वैश्विक स्वीकृति को दर्शाता है।कॉम्ट के अनुसार समाजशास्त्र का अंतिम उद्देश्य है —
“सामाजिक व्यवस्था (Order) और सामाजिक प्रगति (Progress) के बीच संतुलन स्थापित करना।”
यही उनका मूल आदर्श था और उनके पूरे प्रत्यक्षवादी दर्शन का सार भी।
36 कॉम्ट के बौद्धिक जीवन में “Religion of Humanity” किस चरण का प्रतीक है?
(a) प्रारंभिक वैज्ञानिक चरण
(b) दार्शनिक संक्रमण चरण
(c) भावनात्मक और धार्मिक चरण
(d) आलोचनात्मक और तर्कसंगत चरण
उत्तर: (c) भावनात्मक और धार्मिक चरण
व्याख्या:
1. कॉम्ट के बौद्धिक जीवन के तीन चरणअगस्ट कॉम्ट के जीवन और विचारों का विकास तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया जाता है —
चरण अवधि विशेषता (1) प्रारंभिक वैज्ञानिक चरण (Scientific Phase) 1826–1830 समाजशास्त्र और प्रत्यक्षवाद की नींव रखी। समाज को विज्ञान के रूप में समझाने का प्रयास किया। (2) दार्शनिक संक्रमण चरण (Philosophical Transition) 1830–1842 “Course of Positive Philosophy” के लेखन के दौरान तर्कसंगत प्रत्यक्षवाद से आगे बढ़े। (3) भावनात्मक और धार्मिक चरण (Emotional & Religious Phase) 1845–1857 इस काल में उन्होंने “Religion of Humanity” की संकल्पना दी — जिसमें मानवता को ही सर्वोच्च नैतिक मूल्य माना गया। 2. “Religion of Humanity” का अर्थ
कॉम्ट ने अपने अंतिम वर्षों में यह प्रतिपादित किया कि —
“मानवता स्वयं एक प्रकार का धर्म है, जिसकी पूजा नैतिकता, प्रेम और परोपकार के माध्यम से की जानी चाहिए।”
इस धर्म में ईश्वर या अलौकिक शक्ति का स्थान “Humanity (मानवता)” ने ले लिया।
यह उनके विचारों के भावनात्मक और धार्मिक चरण (Emotional and Religious Phase) का प्रतीक था,
जहाँ उन्होंने विज्ञान की ठोसता के साथ मानव भावना और नैतिकता को जोड़ने की कोशिश की।3. कॉम्ट के विचारों का यह परिवर्तन क्यों हुआ?
- कॉम्ट का जीवन अत्यधिक मानसिक संघर्ष और अकेलेपन से गुज़रा।
- उनकी प्रेरणास्रोत क्लोटिल्ड दे वो (Clotilde de Vaux) की मृत्यु ने उन पर गहरा प्रभाव डाला।
- इसके बाद उन्होंने अपने तर्कवादी दृष्टिकोण में भावनात्मक गहराई और नैतिक तत्व जोड़े।
- इसीलिए उन्होंने “Religion of Humanity” को एक नैतिक धर्म (Moral Religion) के रूप में स्थापित किया।
Comte: “Love as a principle, order as the basis, and progress as the goal.”
(यह उनका ‘Religion of Humanity’ का मूल सूत्र था।)4. समाजशास्त्र पर प्रभाव
कॉम्ट के इस अंतिम चरण ने समाजशास्त्र को केवल एक वैज्ञानिक अनुशासन ही नहीं,
बल्कि एक नैतिक विज्ञान (Moral Science) के रूप में भी स्थापित किया।
उन्होंने समाज में नैतिक एकता (Moral Unity) को बनाए रखने के लिए धर्म जैसी भावना की आवश्यकता बताई।कॉम्ट का “Religion of Humanity” उनके जीवन के अंतिम चरण का प्रतीक है,
जहाँ उन्होंने समाज के अध्ययन में भावना, नैतिकता और मानवता को स्थान दिया।
यह उनका भावनात्मक और धार्मिक चरण (Emotional & Religious Phase) था,
जो उनके वैज्ञानिक प्रत्यक्षवाद का मानवीय विस्तार (Humanistic Extension) था।
37. अगस्ट कॉम्ट का समाजशास्त्र में स्थायी योगदान क्या है?
(a) समाज की धार्मिक व्याख्या
(b) समाज के अध्ययन को वैज्ञानिक रूप देना
(c) सामाजिक संघर्ष सिद्धांत
(d) समाज के आर्थिक आधार पर विश्लेषण
उत्तर: (b) समाज के अध्ययन को वैज्ञानिक रूप देना
व्याख्या:
1. समाजशास्त्र को “विज्ञान” बनाना — कॉम्ट की सबसे बड़ी देनअगस्ट कॉम्ट ने सबसे पहले यह प्रतिपादित किया कि —
“समाज का अध्ययन उसी प्रकार किया जाना चाहिए जैसे प्राकृतिक विज्ञानों (Natural Sciences) में किया जाता है —
अनुभव (Observation), तुलना (Comparison) और ऐतिहासिक विश्लेषण (Historical Method) के आधार पर।”यही उनका स्थायी और मौलिक योगदान (Permanent Contribution) है,
जिससे समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र और वैज्ञानिक अनुशासन (Independent Scientific Discipline) के रूप में मान्यता मिली।2. “Sociology” शब्द का निर्माण
कॉम्ट ने 1838 में “Sociology” शब्द का प्रयोग किया —
“Socius” (Latin – समाज) + “Logos” (Greek – अध्ययन)
इस प्रकार उन्होंने समाज के अध्ययन को वैज्ञानिक भाषा और पद्धति दी।
उन्होंने समाजशास्त्र को सभी विज्ञानों की “Queen of Sciences” कहा, क्योंकि यह अन्य सभी विज्ञानों को एकीकृत करता है।3. प्रत्यक्षवाद (Positivism) के माध्यम से वैज्ञानिकता
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) ही वह सिद्धांत था जिसने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक रूप प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि —
- समाजिक तथ्यों (Social Facts) का अध्ययन अनुभवजन्य (Empirical) और निरपेक्ष (Objective) होना चाहिए।
- समाज के नियम भी प्राकृतिक नियमों (Natural Laws) की तरह खोजे जा सकते हैं।
Comte: “Sociology is the study of social phenomena governed by natural laws.”
4. समाज की स्थैतिकि (Statics) और गतिशीलता (Dynamics)
कॉम्ट ने समाजशास्त्र को दो भागों में बाँटा —
- Social Statics (सामाजिक स्थैतिकि): सामाजिक व्यवस्था, संस्थाएँ और संरचना का अध्ययन।
- Social Dynamics (सामाजिक गतिशीलता): समाज के परिवर्तन और विकास के नियमों का अध्ययन।
इस विभाजन ने समाज के अध्ययन को संगठित वैज्ञानिक रूप दिया।
5. स्थायी योगदान क्यों कहा जाता है?
क्योंकि कॉम्ट ने —
- समाजशास्त्र को दर्शन से अलग करके स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुशासन बनाया,
- अनुभवजन्य और व्यवस्थित पद्धति दी,
- और सामाजिक नियमों की खोज को संभव बनाया।
यही कारण है कि उन्हें “Father of Sociology” कहा जाता है।
अगस्ट कॉम्ट का समाजशास्त्र में स्थायी योगदान यह था कि उन्होंने —
समाज के अध्ययन को वैज्ञानिक रूप (Scientific Form) दिया,
और समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान (Independent Science) के रूप में स्थापित किया।
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