ऐतिहासिक भौतिकवाद – मार्क्सवादी दृष्टिकोण
मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) समाज और इतिहास की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। यह सिद्धांत बताता है कि समाज का विकास भौतिक परिस्थितियों — विशेष रूप से उत्पादन शक्तियों और उत्पादन सम्बन्धों — से होता है। इस लेख में अत्यंत महत्वपूर्ण MCQs और उनके विस्तृत व्याख्यान दिए गए हैं, जो UPSC Sociology, UGC-NET, JRF और अन्य सामाजिक विज्ञान परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ संकल्पनात्मक (conceptual) व्याख्या दी गई है जिससे विद्यार्थी मार्क्सवादी दृष्टिकोण को गहराई से समझ सकें।
1. मार्क्स ने हेगेल की दर्शन-पद्धति से क्या ग्रहण किया और उसे भौतिकवादी दृष्टिकोण में किस प्रकार रूपांतरित किया?
(a) अध्यात्मिक द्वन्द्ववाद को अपनाकर उसे भौतिकवादी द्वन्द्ववाद में परिवर्तित किया
(b) उत्पादन सम्बन्धों और श्रम की भूमिका को व्याख्यायित किया
(c) सामाजिक संघर्ष के सिद्धान्त को विकसित किया
(d) पूंजीवादी समाज की न्यायिक संरचना का विश्लेषण किया
उत्तर: (a) अध्यात्मिक द्वन्द्ववाद को अपनाकर उसे भौतिकवादी द्वन्द्ववाद में परिवर्तित किया
व्याख्या:
हेगेल का आदर्शवादी द्वन्द्ववाद (Hegel’s Idealist Dialectic)
जर्मन दार्शनिक G.W.F. Hegel (1770–1831) ने समाज और इतिहास की व्याख्या के लिए द्वन्द्वात्मक पद्धति (Dialectical Method) प्रस्तुत की।
उनके अनुसार —“Reality is the unfolding of the Absolute Idea.”
“वास्तविकता ‘परम विचार’ (Absolute Idea) के क्रमिक प्रस्फुटन (unfolding) का परिणाम है।”
— हेगेल (G. W. F. Hegel)अर्थात् वास्तविकता का मूल स्रोत विचार या आत्मा (Spirit) है।
हेगेल का मानना था कि मानव इतिहास “विचारों की आत्म-विकास प्रक्रिया” (self-development of Idea) है।उन्होंने तीन चरणों की प्रक्रिया बताई:
- थीसिस (Thesis) — कोई विचार या स्थिति
- एंटीथीसिस (Antithesis) — उसका विरोध या विपरीत स्थिति
- सिंथेसिस (Synthesis) — दोनों का समन्वय, जिससे एक उच्चतर अवस्था उत्पन्न होती है
यह पूरी प्रक्रिया विचार के स्तर पर चलती है, इसलिए इसे अध्यात्मिक द्वन्द्ववाद (Idealist Dialectic) कहा जाता है।
मार्क्स का रूपांतरण: भौतिकवादी द्वन्द्ववाद (Marx’s Dialectical Materialism)
Karl Marx (1818–1883) ने हेगेल की द्वन्द्वात्मक पद्धति को अपनाया,
लेकिन उसकी आदर्शवादी नींव को उलटकर भौतिकवादी रूप में परिवर्तित कर दिया।उन्होंने लिखा —
“My dialectic method is not only different from the Hegelian, but is its direct opposite.”
— Karl Marx, Afterword to the Second German Edition of Capital (1873)
“मेरी द्वंद्वात्मक पद्धति (Dialectical Method) न केवल हेगेल की पद्धति से भिन्न है, बल्कि उसकी ठीक विपरीत है।”मार्क्स के अनुसार —
- विचार नहीं, बल्कि भौतिक जीवन की परिस्थितियाँ (Material Conditions) समाज को निर्धारित करती हैं।
- चेतना (Consciousness) को सामाजिक अस्तित्व (Social Being) निर्धारित करता है। “It is not the consciousness of men that determines their being, but their social being that determines their consciousness.”
— Marx, Preface to A Contribution to the Critique of Political Economy (1859)इस प्रकार मार्क्स ने हेगेल के आदर्शवादी द्वन्द्ववाद को भौतिकवादी द्वन्द्ववाद में रूपांतरित किया।
मुख्य अंतर (Hegel vs Marx)
पहलू हेगेल मार्क्स दर्शन का स्वरूप आदर्शवादी (Idealist) भौतिकवादी (Materialist) वास्तविकता का आधार विचार / आत्मा भौतिक परिस्थिति / उत्पादन संबंध परिवर्तन का स्रोत विचारों का संघर्ष वर्ग संघर्ष और भौतिक विरोधाभास ऐतिहासिक विकास चेतना का विकास उत्पादन शक्तियों का विकास अंतिम लक्ष्य परम विचार (Absolute Idea) वर्गहीन समाज (Classless Society) Friedrich Engels ने कहा —
“The dialectic of Hegel was standing on its head. It must be turned right side up again to discover the rational kernel within the mystical shell.”
— Engels, Socialism: Utopian and Scientific (1880)
“हेगेल का द्वंद्व अपने सिर के बल खड़ा था; उसे सीधा (अपने पैरों पर) खड़ा करना आवश्यक था ताकि उसकी रहस्यमयी परत के भीतर छिपे तर्कसंगत सार को खोजा जा सके।”इसका अर्थ है कि मार्क्स ने हेगेल के दर्शन के तार्किक सार (rational kernel) को बचाया,
पर उसकी रहस्यमय (mystical) और आदर्शवादी परत को हटा दिया।मार्क्स ने हेगेल के द्वन्द्वात्मक तर्क को बनाए रखा,
पर उसे विचार से हटाकर भौतिक जीवन की वास्तविकता में उतार दिया।
इस प्रकार उन्होंने “इतिहास के दर्शन” को “विज्ञान” में परिवर्तित किया —
यही परिवर्तन भौतिकवादी द्वन्द्ववाद (Dialectical Materialism) की आधारशिला बना।
2. द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद और ऐतिहासिक भौतिकवाद में क्या अंतर है?
(a) द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद विचारों पर आधारित है, ऐतिहासिक भौतिकवाद आर्थिक संरचना पर
(b) द्वंद्वात्मक भौतिकवाद प्रकृति और वस्तुओं के विकास का दर्शन है, जबकि ऐतिहासिक भौतिकवाद समाज और इतिहास के विकास की आर्थिक व्याख्या करता है
(c) ऐतिहासिक भौतिकवाद केवल पूँजीवाद को देखता है
(d) कोई अंतर नहीं है
उत्तर: (b) द्वंद्वात्मक भौतिकवाद प्रकृति और वस्तुओं के विकास का दर्शन है, जबकि ऐतिहासिक भौतिकवाद समाज और इतिहास के विकास की आर्थिक व्याख्या करता है
व्याख्या:
द्वंद्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism):
- यह प्रकृति, पदार्थ और वास्तविकता के विकास को समझने की वैज्ञानिक पद्धति है।
- यह हेगेल के द्वंद्ववाद से प्रेरित है, परंतु भौतिक आधार पर टिका है।
- इसके अनुसार परिवर्तन किसी बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि वस्तुओं के भीतर निहित विरोधाभासों (Contradictions) से उत्पन्न होता है।
- यह संपूर्ण अस्तित्व के विकास का दर्शन (Philosophy of Development) है।
“The material world is in a constant process of change and development through contradictions.”
— Marx and Engels
“भौतिक संसार विरोधों के माध्यम से निरंतर परिवर्तन और विकास की प्रक्रिया में है।”ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism):
- यह मानव समाज और इतिहास के विकास की वैज्ञानिक व्याख्या है।
- इसके अनुसार समाज का स्वरूप और उसका परिवर्तन आर्थिक ढांचे (Economic Structure) और उत्पादन सम्बन्धों (Relations of Production) पर निर्भर करता है।
- इतिहास, विभिन्न वर्गों के बीच होने वाले वर्ग-संघर्ष (Class Struggle) का परिणाम है।
“The history of all hitherto existing society is the history of class struggles.”
— Karl Marx, Communist Manifesto (1848)
“अब तक के समस्त समाज का इतिहास वर्ग-संघर्षों का इतिहास है।”मुख्य अंतर :
आधार द्वंद्वात्मक भौतिकवाद ऐतिहासिक भौतिकवाद क्षेत्र प्रकृति और पदार्थ का दर्शन समाज और इतिहास का विश्लेषण केन्द्रबिंदु वस्तुओं में निहित विरोध और परिवर्तन आर्थिक ढाँचा और वर्ग-संघर्ष दृष्टिकोण दार्शनिक (Philosophical) समाजशास्त्रीय (Sociological) स्रोत हेगेल के द्वंद्ववाद का भौतिक रूपांतरण द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का सामाजिक प्रयोग
3. मार्क्स के अनुसार समाज का वास्तविक या केन्द्रीय बिंदु क्या है?
(a) राज्य
(b) उत्पादन सम्बन्ध
(c) आदमी या मनुष्य
(d) विचार और धर्म
उत्तर: (b) उत्पादन सम्बन्ध
व्याख्या:
मार्क्स के अनुसार —
समाज का वास्तविक स्वरूप आर्थिक संरचना (Economic Structure) से निर्धारित होता है।
यह संरचना दो प्रमुख तत्वों से मिलकर बनती है —
- उत्पादन के साधन (Means of Production) – जैसे भूमि, मशीनें, पूँजी, तकनीक आदि
- उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) – अर्थात् मनुष्य एक-दूसरे से उत्पादन की प्रक्रिया में कैसे सम्बन्ध रखते हैं (जैसे – मालिक और मजदूर, पूँजीपति और श्रमिक)।
मार्क्स के अनुसार ये उत्पादन सम्बन्ध ही समाज का केन्द्रीय बिंदु (Central Point) हैं, क्योंकि —
इन्हीं के आधार पर समाज की राजनीतिक, धार्मिक और वैचारिक संस्थाएँ निर्मित होती हैं।“The mode of production of material life conditions the social, political and intellectual life process in general.”
— Karl Marx, Preface to A Contribution to the Critique of Political Economy (1859)
“भौतिक जीवन के उत्पादन की प्रक्रिया ही सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक जीवन-प्रक्रिया को निर्धारित करती है।”मुख्य बिंदु:
पक्ष व्याख्या केंद्रीय तत्व उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) मार्क्स का दृष्टिकोण समाज की संरचना आर्थिक आधार पर टिकी है मनुष्य की भूमिका मनुष्य इन आर्थिक सम्बन्धों के माध्यम से समाज को बनाता है परिणाम समाज की अन्य सभी संस्थाएँ (राज्य, धर्म, विचारधारा) इन्हीं सम्बन्धों पर आधारित होती हैं
4. एंजिल्स के अनुसार ऐतिहासिक भौतिकवाद का अध्ययन किस बात की खोज करता है?
(a) नैतिकता और धर्म की व्याख्या
(b) निर्णायक ऐतिहासिक घटनाओं को चलाने वाली वास्तविक भौतिक शक्तियों की खोज
(c) हीगेल के विचारों का अनुसरण
(d) राजनीतिक सत्ता का विकास
उत्तर: (b) निर्णायक ऐतिहासिक घटनाओं को चलाने वाली वास्तविक भौतिक शक्तियों की खोज
व्याख्या:
एंगेल्स ने “Socialism: Utopian and Scientific (1880)” तथा “Anti-Dühring (1878)” जैसी रचनाओं में स्पष्ट किया कि —ऐतिहासिक भौतिकवाद वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो इतिहास की व्याख्या “विचारों” या “नैतिकताओं” से नहीं, बल्कि भौतिक परिस्थितियों (Material Conditions), उत्पादन प्रणाली (Mode of Production) और उत्पादन सम्बन्धों (Relations of Production) से करता है।उनके अनुसार, ऐतिहासिक भौतिकवाद का उद्देश्य यह खोज करना है कि —
इतिहास की निर्णायक घटनाएँ (Revolutions, Transformations, Class Conflicts) किन भौतिक शक्तियों (Material Forces) द्वारा संचालित होती हैं।“The final causes of all social changes and political revolutions are to be sought, not in men’s brains, not in man’s better insight into eternal truth and justice, but in changes in the modes of production and exchange.”
— Friedrich Engels, Socialism: Utopian and Scientific (1880)
“सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक क्रांतियों के अंतिम कारण मनुष्यों के मस्तिष्क या उनकी नैतिक समझ में नहीं, बल्कि उत्पादन और विनिमय की विधियों में होने वाले परिवर्तनों में खोजे जाने चाहिए।”मुख्य बिंदु:
पक्ष व्याख्या मुख्य खोज इतिहास की वास्तविक (भौतिक) प्रेरक शक्तियाँ प्रमुख तत्व उत्पादन प्रणाली, उत्पादन सम्बन्ध, आर्थिक संरचना विरोध में आदर्शवाद (Idealism) और नैतिक-धार्मिक व्याख्याएँ उद्देश्य इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से समझना
5. मार्क्स के अनुसार व्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता क्यों संभव नहीं होती?
(a) व्यक्ति की चेतना अधूरी है
(b) पूँजीवादी समाज में उत्पादन शक्तियों और सामाजिक संबंधों में द्वन्द्व होता है
(c) धार्मिक नियम व्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करते हैं
(d) राजनीतिक संरचना स्थिर और कठोर है
उत्तर: (b) पूँजीवादी समाज में उत्पादन शक्तियों और सामाजिक संबंधों में द्वन्द्व होता है
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स के अनुसार व्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Individual) केवल नैतिक या दार्शनिक धारणा नहीं है, बल्कि यह समाज की आर्थिक संरचना (Economic Structure) और उत्पादन संबंधों (Relations of Production) से गहराई से जुड़ी हुई है।पूँजीवादी समाज (Capitalist Society) में —
- उत्पादन के साधन (Means of Production) कुछ पूँजीपतियों (Bourgeoisie) के हाथों में केंद्रित होते हैं,
- जबकि श्रमिक वर्ग (Proletariat) केवल अपना श्रम बेचने को बाध्य होता है।
इससे समाज में दो विरोधी शक्तियाँ बनती हैं —
भौतिक उत्पादन शक्तियाँ (Material/Productive Forces)
सामाजिक उत्पादन संबंध (Social Relations of Production)इन दोनों के बीच द्वन्द्व (Contradiction or Conflict) उत्पन्न होता है, जिसे मार्क्स ने ऐतिहासिक विकास का मूल स्रोत बताया।
यह द्वन्द्व व्यक्ति को उस समाज की परिस्थितियों का दास बना देता है —
वह अपने श्रम, अपने उत्पाद और अपने निर्णयों पर नियंत्रण नहीं रख पाता।इस प्रकार व्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता (Complete Freedom) तब तक संभव नहीं जब तक यह आर्थिक-सामाजिक द्वन्द्व समाप्त न हो जाए।
सिद्धान्तगत आधार (Theoretical Basis):
मार्क्स ने अपनी कृति A Contribution to the Critique of Political Economy (1859) की भूमिका में कहा —
“At a certain stage of development, the material productive forces of society come into conflict with the existing relations of production.”
(समाज की भौतिक उत्पादन शक्तियाँ, किसी स्तर पर, मौजूदा उत्पादन संबंधों से टकराने लगती हैं।)जब तक यह टकराव मौजूद रहता है, तब तक व्यक्ति और समाज दोनों की स्वतंत्रता सीमित रहती है।
मार्क्स का मानना था कि वर्गहीन समाज (Classless Society) में ही व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता संभव है।मार्क्स के अनुसार —
“The free development of each is the condition for the free development of all.”
(प्रत्येक व्यक्ति का स्वतंत्र विकास, सबके स्वतंत्र विकास की शर्त है।)
परंतु पूँजीवादी समाज में यह स्थिति संभव नहीं, क्योंकि वहाँ व्यक्ति आर्थिक और सामाजिक शक्तियों के द्वन्द्व में बँधा हुआ है।
अतः पूर्ण स्वतंत्रता केवल वर्ग-विहीन समाज में ही संभव है।
6. ऐतिहासिक भौतिकवाद किस आधार पर समाज और इतिहास का विश्लेषण करता है?
(a) राजा और अभिजात्य वर्ग की गतिविधियों
(b) धार्मिक विचारों और नैतिक मूल्यों
(c) उत्पादन विधियाँ, उत्पादन सम्बन्ध और उत्पादन शक्तियाँ
(d) युद्ध और सत्ता संघर्ष
उत्तर: (c) उत्पादन विधियाँ, उत्पादन सम्बन्ध और उत्पादन शक्तियाँ
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स (Karl Marx) और फ्रेडरिक एंगेल्स (Friedrich Engels) के अनुसार, समाज और इतिहास की गति का वास्तविक आधार भौतिक जीवन की स्थितियाँ (Material Conditions of Life) हैं।
इसी सिद्धान्त को ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) कहा जाता है।इस सिद्धान्त के अनुसार —
“It is not the consciousness of men that determines their existence, but their social existence that determines their consciousness.”
(अर्थात्: मनुष्य का चेतन अस्तित्व उसकी सामाजिक वास्तविकता से निर्धारित होता है, न कि उसके विचारों से।)मार्क्स के अनुसार, समाज की संरचना तीन प्रमुख तत्त्वों पर आधारित होती है —
- उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production):
जैसे — श्रमिक, औज़ार, तकनीक और प्राकृतिक संसाधन।- उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production):
जैसे — स्वामी (Owners) और श्रमिक (Workers) के बीच का सम्बन्ध।- उत्पादन विधियाँ (Modes of Production):
जैसे — दास प्रथा (Slave Mode), सामन्तवाद (Feudalism), पूँजीवाद (Capitalism) आदि।इन तीनों के बीच अंतर्विरोध (Contradictions) समाज में परिवर्तन का कारण बनता है।
अतः समाज और इतिहास का विकास राजाओं, धर्म या विचारों से नहीं, बल्कि भौतिक आर्थिक संरचना (Economic Base) से होता है।मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक भौतिकवाद का आधार – भौतिक जीवन की परिस्थितियाँ (Material Conditions of Life)
- यह दृष्टिकोण आदर्शवादी (Idealist) व्याख्याओं के विपरीत है।
- मार्क्स ने समाज को “आर्थिक आधार (Base)” और “विचारधारात्मक अधिरचना (Superstructure)” में विभाजित किया।
7. मार्क्स और एंजिल्स के अनुसार परम्परागत इतिहास किस वजह से अधूरा और असंतुलित है?
(a) यह केवल राजा और अभिजात्य वर्ग पर केन्द्रित होता है
(b) यह उत्पादन सम्बन्ध और साधनों को नजरअंदाज करता है
(c) यह निम्न वर्गों और श्रमिकों की भूमिका को अनदेखा करता है
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (d) उपरोक्त सभी
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने परम्परागत इतिहास लेखन की तीव्र आलोचना की।
उनके अनुसार, परम्परागत इतिहास “राजाओं, विजेताओं और अभिजात्य वर्ग” की घटनाओं और युद्धों पर केन्द्रित रहता है।
यह इतिहास समाज की वास्तविक नींव — आर्थिक उत्पादन प्रणाली, श्रमिक वर्ग, तथा उत्पादन सम्बन्धों — की उपेक्षा करता है।इस कारण यह इतिहास अधूरा और असंतुलित (incomplete and one-sided) बन जाता है।
मार्क्स का दृष्टिकोण:
मार्क्स और एंगेल्स ने कहा कि —
“The history of all hitherto existing society is the history of class struggles.”
(अब तक के सभी समाजों का इतिहास वर्ग-संघर्ष का इतिहास है।)इस उद्धरण से स्पष्ट होता है कि मार्क्स के लिए इतिहास का केंद्र राजा या नायक नहीं, बल्कि श्रमिक वर्ग और आर्थिक शक्तियाँ हैं।
मार्क्सवादी इतिहास की विशेषताएँ:
पहलू पारंपरिक इतिहास मार्क्सवादी इतिहास केन्द्र राजा, युद्ध, अभिजात वर्ग उत्पादन प्रणाली, वर्ग-संघर्ष दृष्टिकोण आदर्शवादी (Idealist) भौतिकवादी (Materialist) प्रमुख बल विचार और व्यक्ति आर्थिक शक्तियाँ और वर्ग सम्बन्ध उपेक्षित पक्ष श्रमिक, निम्न वर्ग प्रमुख विश्लेषण का केन्द्र मार्क्स और एंगेल्स ने इतिहास को केवल घटनाओं का क्रम न मानकर, बल्कि समाज के भौतिक आधार (Material Base) के विकास का परिणाम बताया।
उन्होंने दिखाया कि इतिहास की वास्तविक गति उत्पादन सम्बन्धों और वर्ग-संघर्षों से होती है, न कि राजाओं या धार्मिक नायकों से।
8. ऐतिहासिक भौतिकवाद के अनुसार समाज का विकास किन परिस्थितियों से होता है?
(a) नैतिक और धार्मिक आदर्शों से
(b) केवल विचारों और दर्शन से
(c) भौतिक परिस्थितियों में परिवर्तन से
(d) राजनीतिक सत्ता संघर्ष से
उत्तर: (c) भौतिक परिस्थितियों में परिवर्तन से
व्याख्या:
मार्क्स और एंगेल्स ने इतिहास और समाज के विकास को समझाने के लिए ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
उनके अनुसार समाज का आधार भौतिक जीवन की परिस्थितियाँ (Material Conditions of Life) हैं — जैसे उत्पादन की विधियाँ, तकनीक, संसाधन, और उत्पादन सम्बन्ध।जब इन भौतिक परिस्थितियों में परिवर्तन होता है, तो उसके साथ ही समाज की सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक संरचना भी बदल जाती है।
अर्थात् — समाज का विकास विचारों से नहीं, बल्कि आर्थिक और भौतिक परिवर्तनों से होता है।मार्क्स का प्रसिद्ध कथन:
“It is not the consciousness of men that determines their existence, but their social existence that determines their consciousness.”
— Karl Marx, Preface to A Contribution to the Critique of Political Economy (1859)
(मनुष्य का अस्तित्व उसके विचारों से नहीं, बल्कि उसका सामाजिक अस्तित्व उसके विचारों को निर्धारित करता है।)इस कथन से स्पष्ट है कि समाज की गति और विकास का मूल कारण भौतिक जीवन की परिस्थितियाँ हैं, न कि नैतिक या धार्मिक विचार।
मार्क्सवादी दृष्टिकोण का सार:
पक्ष पारंपरिक दृष्टिकोण मार्क्सवादी दृष्टिकोण विकास का आधार विचार, धर्म, नैतिकता भौतिक परिस्थितियाँ परिवर्तन का कारण चेतना में बदलाव उत्पादन शक्तियों का विकास परिणाम वैचारिक परिवर्तन सामाजिक संरचना का रूपांतरण मुख्य अवधारणा:
ऐतिहासिक भौतिकवाद यह मानता है कि इतिहास और समाज का विकास “आर्थिक आधार” (Economic Base) में होने वाले परिवर्तनों से होता है।
जब उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production) और उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) में विरोध उत्पन्न होता है, तो नया सामाजिक ढाँचा (Social Order) जन्म लेता है।उदाहरण:
औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) ने उत्पादन की तकनीकों को बदल दिया, जिससे सामंतवाद (Feudalism) का पतन हुआ और पूँजीवाद (Capitalism) की उत्पत्ति हुई।
यह परिवर्तन विचारों से नहीं, बल्कि भौतिक उत्पादन परिस्थितियों में बदलाव से हुआ — यही ऐतिहासिक भौतिकवाद का सार है।
9. मार्क्स और एंगेल्स की पुस्तक “The German Ideology” (1846) में क्या सिद्ध किया गया?
(a) समाज और इतिहास का पारंपरिक, राजा-केंद्रित दृष्टिकोण
(b) समाज का विकास केवल विचारों और धर्म से होता है
(c) समाज का विकास भौतिक परिस्थितियों और उत्पादन सम्बन्धों से होता है
(d) समाज का विकास राजनीतिक सत्ता संघर्ष से नियंत्रित होता है
उत्तर: (c) समाज का विकास भौतिक परिस्थितियों और उत्पादन सम्बन्धों से होता है
व्याख्या:
The German Ideology (1846) कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स की वह महत्वपूर्ण कृति है जिसमें उन्होंने पहली बार ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) का व्यवस्थित रूप से प्रतिपादन किया।उन्होंने कहा कि समाज और इतिहास का विकास भौतिक परिस्थितियों — जैसे उत्पादन के साधन (Means of Production), उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production), और उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) — से निर्धारित होता है।
मार्क्स ने इस ग्रंथ में यह तर्क दिया कि —
“Life is not determined by consciousness, but consciousness by life.”
(जीवन विचारों से नहीं, बल्कि भौतिक जीवन की परिस्थितियों से निर्धारित होता है।)मनुष्य के विचार उसकी भौतिक परिस्थितियों का परिणाम हैं, न कि उन परिस्थितियों के कारण।
मुख्य तर्क:
- भौतिक आधार की प्रधानता:
समाज का वास्तविक आधार (Base) उत्पादन की भौतिक प्रणाली है। विचार, नैतिकता, धर्म आदि इस आधार पर निर्मित अधिरचना (Superstructure) हैं।- विचारों की द्वितीयक भूमिका:
विचार स्वतंत्र नहीं होते, वे समाज की आर्थिक संरचना का प्रतिबिंब (Reflection) हैं।- इतिहास की भौतिक प्रक्रिया:
इतिहास, विचारों का परिणाम नहीं, बल्कि उत्पादन शक्तियों और वर्ग-संघर्षों के विकास की भौतिक प्रक्रिया है।मुख्य अवधारणा (Core Concept):
“The German Ideology” ने यह सिद्ध किया कि मानव समाज का विकास आर्थिक उत्पादन प्रणाली और भौतिक परिस्थितियों से होता है।
विचारधारा (Ideology) इन भौतिक सम्बन्धों का परिणाम होती है, न कि उनका कारण।उदाहरण:
सामंतवाद (Feudalism) से पूँजीवाद (Capitalism) में परिवर्तन केवल राजनीतिक सुधार या धार्मिक सुधारों से नहीं हुआ, बल्कि उत्पादन तकनीक और औद्योगिक प्रणाली में आए भौतिक परिवर्तन के कारण हुआ।
यह परिवर्तन The German Ideology के ऐतिहासिक भौतिकवाद का प्रत्यक्ष उदाहरण है।मार्क्स और एंगेल्स ने The German Ideology में यह स्पष्ट किया कि इतिहास को समझने के लिए व्यक्ति या विचार नहीं, बल्कि समाज की आर्थिक संरचना (Economic Structure) को समझना आवश्यक है।
जब भौतिक परिस्थितियाँ बदलती हैं, तो समाज की पूरी अधिरचना — राजनीति, कानून, धर्म और विचार — भी बदल जाती है।
10. मार्क्स और एंजिल्स के अनुसार समाज में परिवर्तन और नया युग कब उत्पन्न होता है?
(a) जब राजा सत्ता बदलते हैं
(b) जब भौतिक परिस्थितियों में परिवर्तन आता है
(c) जब धर्म और नैतिक मूल्य बदलते हैं
(d) जब समाज में शिक्षा बढ़ती है
उत्तर: (b) जब भौतिक परिस्थितियों में परिवर्तन आता है
व्याख्या:
मार्क्स और एंगेल्स के अनुसार समाज का विकास किसी व्यक्ति, राजा या विचारों के कारण नहीं होता,
बल्कि यह भौतिक परिस्थितियों (Material Conditions) — विशेष रूप से उत्पादन शक्तियों (Forces of Production) और उत्पादन सम्बन्धों (Relations of Production) — में परिवर्तन के कारण होता है।जब उत्पादन शक्तियों का विकास पुराने उत्पादन सम्बन्धों से टकराने लगता है,
तो सामाजिक संरचना (Social Structure) में द्वन्द्व (Contradiction) उत्पन्न होता है,
और यह द्वन्द्व अंततः समाज में एक नए युग या नए सामाजिक रूप को जन्म देता है।मार्क्स का प्रसिद्ध कथन:
“At a certain stage of development, the material productive forces of society come into conflict with the existing relations of production.”
— Karl Marx, Preface to A Contribution to the Critique of Political Economy (1859)
(समाज की उत्पादन शक्तियाँ जब मौजूदा उत्पादन सम्बन्धों से टकराने लगती हैं, तो सामाजिक क्रांति की नींव पड़ती है।)मुख्य अवधारणा (Core Concept):
- समाज में परिवर्तन की प्रक्रिया भौतिक उत्पादन परिस्थितियों के भीतर से उत्पन्न होती है।
- उत्पादन शक्तियाँ और उत्पादन सम्बन्ध जब परस्पर विरोधी हो जाते हैं, तो एक नया सामाजिक ढाँचा जन्म लेता है।
- यह परिवर्तन “वर्ग-संघर्ष” के माध्यम से इतिहास को आगे बढ़ाता है।
उदाहरण:
औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के समय मशीनों और तकनीक ने उत्पादन की प्रकृति बदल दी।
पुराने सामंती सम्बन्ध (Feudal Relations) इन नई शक्तियों के अनुरूप नहीं रहे,
जिससे सामंतवाद का पतन और पूँजीवाद (Capitalism) का जन्म हुआ।
यह परिवर्तन मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद का प्रत्यक्ष उदाहरण है।मार्क्स और एंगेल्स के अनुसार इतिहास की गति का मूल कारण भौतिक जीवन की परिस्थितियों में परिवर्तन है।
राजनीतिक सत्ता या नैतिकता में परिवर्तन उसके परिणाम हैं, कारण नहीं।
इसलिए नया युग तभी उत्पन्न होता है जब आर्थिक आधार (Economic Base) बदल जाता है।
11. मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) के अनुसार समाज और इतिहास को किस दृष्टिकोण से समझा जाता है?
(a) राजा-महाराजाओं और संवतों के कालक्रमिक विवरण के रूप में
(b) भौतिक उत्पादन के तरीके, उत्पादन शक्तियों और उत्पादन सम्बन्धों के संदर्भ में
(c) धार्मिक विश्वासों और नैतिक मूल्यों के अनुसार
(d) केवल युद्ध और सत्ता संघर्ष के आधार पर
उत्तर: (b) भौतिक उत्पादन के तरीके, उत्पादन शक्तियों और उत्पादन सम्बन्धों के संदर्भ में
व्याख्या:
मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) समाज और इतिहास को समझने का एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Approach) है।
उनके अनुसार, इतिहास का मूल आधार भौतिक जीवन की परिस्थितियाँ (Material Conditions of Life) हैं।समाज का ढाँचा (Social Structure) और उसकी विचारधारा (Superstructure) — दोनों ही उत्पादन के तरीके (Mode of Production) पर निर्भर करते हैं।
जब उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production) और उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) में विरोधाभास (Contradiction) उत्पन्न होता है, तो सामाजिक परिवर्तन (Social Change) होता है।मार्क्स का कथन:
“The mode of production of material life determines the general character of the social, political, and intellectual life.”
“भौतिक जीवन के उत्पादन का तरीका ही सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक जीवन के स्वरूप को निर्धारित करता है।”
12. मार्क्स के अनुसार समाज के भौतिक आधार (Material Base) में कौन-सी वस्तुएँ सम्मिलित होती हैं?
(a) साहित्य, कला और दर्शन
(b) रोटी, कपड़ा और मकान अर्थात जीवन की भौतिक आवश्यकताएँ
(c) धर्म और नैतिक मूल्य
(d) राजनीति और शासन प्रणाली
उत्तर: (b) रोटी, कपड़ा और मकान अर्थात जीवन की भौतिक आवश्यकताएँ
व्याख्या:
मार्क्स ने समाज के विश्लेषण में “आर्थिक आधार” (Economic Base) या “भौतिक आधार” (Material Base) को सबसे मूलभूत तत्व माना।
यह आधार मानव के जीवन निर्वाह के साधनों से निर्मित होता है — जैसे भोजन (रोटी), वस्त्र (कपड़ा), और आवास (मकान)।
इन्हीं के चारों ओर उत्पादन प्रणाली (Mode of Production) और उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) विकसित होते हैं।भौतिक आधार से ही समाज की अन्य संस्थाएँ — जैसे राजनीति, धर्म, दर्शन, कला, साहित्य आदि उत्पन्न होती हैं, जिन्हें मार्क्स ने “अधिरचना” (Superstructure) कहा है।
मार्क्स के शब्दों में:
“It is not the consciousness of men that determines their existence, but their social existence that determines their consciousness.”
"मनुष्य की चेतना उसके अस्तित्व को निर्धारित नहीं करती, बल्कि उसका सामाजिक अस्तित्व ही उसकी चेतना को निर्धारित करता है।"इससे स्पष्ट होता है कि समाज के सभी विचारात्मक तत्त्व (Ideological Elements) — धर्म, कला, संस्कृति — भौतिक जीवन परिस्थितियों से ही उत्पन्न होते हैं।
13. मार्क्स के अनुसार समाज की वास्तविक आधारशिला क्या है?
(a) कानूनी और राजनैतिक अधिरचना
(b) आर्थिक संरचना और उत्पादन सम्बन्ध
(c) सामाजिक चेतना
(d) धार्मिक और नैतिक मूल्य
उत्तर: (b) आर्थिक संरचना और उत्पादन सम्बन्ध
व्याख्या:
मार्क्स के अनुसार समाज की वास्तविक आधारशिला (Real Foundation) उसकी आर्थिक संरचना (Economic Structure) है, जो उत्पादन के तरीके (Mode of Production) और उत्पादन सम्बन्धों (Relations of Production) पर आधारित होती है।यह आर्थिक आधार समाज की अन्य सभी संस्थाओं — जैसे कानून, राजनीति, धर्म, दर्शन और संस्कृति — को निर्धारित (determine) करता है।
इन्हीं संस्थाओं को मार्क्स ने अधिरचना (Superstructure) कहा है।मार्क्स ने लिखा:
“The economic structure of society is the real foundation, on which rises a legal and political superstructure and to which correspond definite forms of social consciousness.”
"समाज की आर्थिक संरचना ही वास्तविक आधार है, जिस पर कानूनी और राजनैतिक अधिरचना निर्मित होती है, और जिससे विशिष्ट सामाजिक चेतना के रूप विकसित होते हैं।"अर्थात —
समाज का राजनीतिक और वैचारिक जीवन (superstructure) उस आर्थिक ढाँचे पर निर्भर करता है जो उत्पादन की प्रणाली द्वारा निर्मित होता है। जब आर्थिक संरचना बदलती है, तो अधिरचना भी रूपांतरित हो जाती है — यही समाज परिवर्तन का मूल नियम है।मुख्य बिंदु:
- आर्थिक संरचना = उत्पादन शक्तियाँ + उत्पादन सम्बन्ध
- यह समाज की नींव (Base) है।
- इस आधार पर टिकी होती हैं अधिरचना — यानी विचारधारा, कानून, राजनीति, धर्म आदि।
- आधार में परिवर्तन = सम्पूर्ण समाज में परिवर्तन।
14. समाज में उत्पादन सम्बन्धों का भौतिक जीवन पर क्या प्रभाव होता है?
(a) जीवन के सामाजिक, राजनैतिक और बौद्धिक प्रक्रियाओं को सामान्यतया निश्चित करता है
(b) केवल धार्मिक और नैतिक मूल्यों को प्रभावित करता है
(c) समाज में राजा और अभिजात्य वर्ग के शासन को स्थायी बनाता है
(d) केवल युद्ध और सत्ता संघर्ष को नियंत्रित करता है
उत्तर: (a) जीवन के सामाजिक, राजनैतिक और बौद्धिक प्रक्रियाओं को सामान्यतया निश्चित करता है
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स का मानना था कि समाज का भौतिक जीवन (Material Life) — अर्थात उत्पादन की प्रक्रिया और उससे जुड़े सम्बन्ध — समाज के राजनैतिक, सामाजिक और बौद्धिक जीवन को निर्धारित (determine) करते हैं।दूसरे शब्दों में, उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) यह तय करते हैं कि समाज की विचारधारा, राजनीति, कानून, धर्म, संस्कृति, और दर्शन किस रूप में विकसित होंगे।
मार्क्स ने अपनी पुस्तक A Contribution to the Critique of Political Economy (1859) में लिखा:
“The mode of production of material life determines the general character of the social, political and intellectual life.”
"भौतिक जीवन के उत्पादन का तरीका समाज के सामाजिक, राजनैतिक और बौद्धिक जीवन की सामान्य प्रकृति को निर्धारित करता है।"अर्थात —
यदि उत्पादन प्रणाली (जैसे—सामंतवाद, पूँजीवाद, समाजवाद) बदलती है, तो समाज के विचार, राजनीति और संस्कृति भी उसी के अनुसार बदलते हैं।
इस प्रकार, आर्थिक आधार (Economic Base) समाज के अधिरचना (Superstructure) को आकार देता है।मुख्य बिंदु:
- भौतिक जीवन के उत्पादन की प्रक्रिया समाज की संरचना तय करती है।
- उत्पादन सम्बन्ध समाज के विचारों और मूल्यों को प्रभावित करते हैं।
- जब उत्पादन सम्बन्ध बदलते हैं, तो समाज की वैचारिक और राजनीतिक संरचना भी बदलती है।
- यही समाज परिवर्तन (Social Change) का मूल नियम है।
15. ऐतिहासिक भौतिकवाद के अनुसार किसी समाज का बुनियादी ढाँचा किस पर आधारित होता है?
(a) धार्मिक विश्वासों पर
(b) भौतिक उत्पादन साधनों और तरीकों पर
(c) राजा-महाराजाओं और नेताओं पर
(d) नैतिक और आचारिक मूल्यों पर
उत्तर: (b) भौतिक उत्पादन साधनों और तरीकों पर
व्याख्या:
कार्ल मार्क्स के अनुसार किसी भी समाज की वास्तविक नींव (Real Foundation) उसके भौतिक उत्पादन साधनों (Means of Production) और उत्पादन के तरीकों (Mode of Production) पर आधारित होती है।यही भौतिक आधार (Material Base) समाज की अधिरचना (Superstructure) — यानी कानून, राजनीति, धर्म, नैतिकता और विचारधारा — को आकार देता है।
मार्क्स का यह दृष्टिकोण आदर्शवादी (Idealist) नहीं बल्कि भौतिकवादी (Materialist) है।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि समाज के विचार या धर्म स्वयं उत्पन्न कारण नहीं हैं, बल्कि उत्पादन की वास्तविक परिस्थितियों का परिणाम हैं।मार्क्स ने लिखा:
“In the social production of their life, men enter into definite relations that are independent of their will... The sum total of these relations of production constitutes the economic structure of society, the real foundation.”
(Karl Marx – A Contribution to the Critique of Political Economy, 1859)
“अपने जीवन के सामाजिक उत्पादन में मनुष्य कुछ निश्चित सम्बन्धों में प्रवेश करता है, जो उसकी इच्छा पर निर्भर नहीं होते... इन सभी उत्पादन सम्बन्धों का योग समाज की आर्थिक संरचना, अर्थात् उसकी वास्तविक नींव बनाता है।”मुख्य बिंदु:
- समाज का बुनियादी ढाँचा भौतिक होता है, न कि आध्यात्मिक या धार्मिक।
- उत्पादन साधन (जैसे — भूमि, मशीनें, तकनीक, श्रम) समाज की संरचना का मूल हैं।
- उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) समाज में वर्ग-संरचना और सत्ता सम्बन्ध तय करते हैं।
- जब उत्पादन की शक्तियाँ बदलती हैं, तो समाज की पूरी संरचना (Superstructure) भी बदल जाती है।
16. उत्पादन के तरीकों में किन तत्वों का समावेश होता है?
(a) केवल उत्पादन साधन
(b) उत्पादन शक्तियाँ और उत्पादन सम्बन्ध
(c) सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्य
(d) केवल तकनीकी उपकरण
उत्तर: (b) उत्पादन शक्तियाँ और उत्पादन सम्बन्ध
व्याख्या:
मार्क्स के अनुसार किसी भी समाज की आर्थिक संरचना का मूल तत्व है —
उत्पादन का तरीका (Mode of Production)।
यह दो प्रमुख घटकों से मिलकर बनता है:
- उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production):
इनमें शामिल हैं —
- श्रम (Labour)
- तकनीक (Technology)
- उपकरण और साधन (Tools and Means of Production)
- प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)
ये सभी मिलकर यह तय करते हैं कि वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कैसे होगा।- उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production):
यह बताता है कि लोग उत्पादन प्रक्रिया में कैसे आपसी सम्बन्ध रखते हैं —
यानी कौन मालिक है, कौन श्रमिक है, और उत्पादन के साधनों पर किसका नियंत्रण है।इन दोनों तत्वों का समन्वय (Interaction) ही समाज की आर्थिक संरचना और वर्ग-संबंधों का निर्माण करता है।
जब इन दोनों में विरोधाभास (contradiction) उत्पन्न होता है — जैसे नई उत्पादन शक्तियाँ पुराने सम्बन्धों से टकराती हैं — तब समाज में परिवर्तन (social revolution) होता है।मार्क्स का कथन (Quote):
“The mode of production in material life determines the general character of the social, political and intellectual life.”
— Karl Marx, A Contribution to the Critique of Political Economy (1859)
“भौतिक जीवन के उत्पादन का तरीका ही सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक जीवन के सामान्य स्वरूप को निर्धारित करता है।”मुख्य बिंदु:
- उत्पादन का तरीका = उत्पादन शक्तियाँ + उत्पादन सम्बन्ध।
- यह समाज की वर्ग-संरचना और सत्ता-संबंधों की नींव है।
- उत्पादन के तरीके बदलने से समाज की संरचना और विचारधारा दोनों बदलते हैं।
- यही परिवर्तन इतिहास की गति को आगे बढ़ाता है।
17. रामकृष्ण मुखर्जी के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा उत्पादन सम्बन्धों की श्रेणी में आता है?
(a) यौन नियंत्रण और पारिवारिक सम्बन्ध
(b) नैतिक मूल्य और साहित्य
(c) युद्ध और राजनीतिक विजय
(d) धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकांड
उत्तर: (a) यौन नियंत्रण और पारिवारिक सम्बन्ध
व्याख्या:
रामकृष्ण मुखर्जी (Ramkrishna Mukherjee) भारतीय समाजशास्त्र में एक प्रमुख मार्क्सवादी चिंतक थे जिन्होंने मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) को भारतीय संदर्भ में लागू करने का प्रयास किया।उनके अनुसार —
उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) केवल आर्थिक या वर्गीय सम्बन्धों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के अन्य सामाजिक सम्बन्धों जैसे —
- यौन नियंत्रण (Sexual Regulation),
- पारिवारिक सम्बन्ध (Family Relations),
- नातेदारी (Kinship) —
से भी गहराई से जुड़े होते हैं।मुखर्जी का मत था कि पारिवारिक संरचना स्वयं आर्थिक उत्पादन प्रणाली से गहराई से सम्बद्ध है।
परिवार केवल भावनात्मक संस्था नहीं, बल्कि यह उत्पादन और संपत्ति के नियंत्रण की एक सामाजिक इकाई है।उदाहरण के लिए —
- सामंतवादी समाज में उत्तराधिकार (inheritance) और विवाह के नियम भूमि के स्वामित्व से जुड़े होते थे।
- पूँजीवादी समाज में यौन सम्बन्धों पर नियंत्रण और परिवार की संरचना संपत्ति के हस्तांतरण (property transmission) से जुड़ी होती है।
इसलिए मुखर्जी ने कहा कि “sexual control and kinship relations are themselves a form of production relations.”
यानी — यौन और पारिवारिक सम्बन्ध भी समाज के भौतिक (material) ढाँचे का हिस्सा हैं।मार्क्सवादी दृष्टिकोण के संदर्भ में:
मार्क्स ने स्वयं उत्पादन सम्बन्धों को केवल आर्थिक दृष्टि से परिभाषित किया था।
लेकिन मुखर्जी ने इसे विस्तारित (extended) करते हुए कहा कि —सामाजिक पुनरुत्पादन (Social Reproduction) और जैविक पुनरुत्पादन (Biological Reproduction) दोनों मिलकर उत्पादन सम्बन्धों का हिस्सा हैं।मुख्य बिंदु:
- मुखर्जी ने मार्क्सवाद को भारतीय सामाजिक सन्दर्भ में विस्तारित किया।
- उन्होंने परिवार और नातेदारी को “भौतिक जीवन की संरचना” का अंग बताया।
- यौन नियंत्रण समाज की आर्थिक संरचना से जुड़ा हुआ है।
- यह दृष्टिकोण पारंपरिक पश्चिमी मार्क्सवाद से अधिक व्यापक है।
18. ऐतिहासिक भौतिकवाद के विश्लेषण में तीन मूलभूत तत्व कौन-कौन से हैं?
(a) धर्म, नैतिकता और राजनीति
(b) उत्पादन पद्धति, उत्पादन शक्तियाँ और उत्पादन सम्बन्ध
(c) राजा, सेनापति और नागरिक
(d) विचार, भावना और चेतना
उत्तर: (b) उत्पादन पद्धति, उत्पादन शक्तियाँ और उत्पादन सम्बन्ध
व्याख्या:
ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism), कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा विकसित एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है, जो यह समझाने का प्रयास करता है कि मानव समाज का इतिहास किस प्रकार भौतिक परिस्थितियों — विशेषकर उत्पादन की प्रक्रिया — से निर्धारित होता है।मार्क्स के अनुसार, समाज की संरचना और परिवर्तन का विश्लेषण करने के लिए तीन प्रमुख तत्व होते हैं:
- उत्पादन पद्धति (Mode of Production) —
यह उस प्रणाली को दर्शाता है जिसके अंतर्गत उत्पादन किया जाता है।
उदाहरण: सामंतवादी उत्पादन पद्धति, पूँजीवादी उत्पादन पद्धति आदि।- उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production) —
इसमें उत्पादन के साधन (जमीन, औज़ार, मशीनें, कच्चा माल) और मानव श्रम (मानव श्रमिकों का कौशल और श्रम-शक्ति) शामिल हैं।- उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) —
यह उन सामाजिक सम्बन्धों को दर्शाता है जो उत्पादन प्रक्रिया के दौरान लोगों के बीच बनते हैं — जैसे मालिक और मज़दूर, जमींदार और किसान आदि।मार्क्स का कथन था —
“The mode of production of material life conditions the social, political, and intellectual life process in general.”
(भौतिक जीवन की उत्पादन पद्धति सामान्यतः सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक जीवन प्रक्रियाओं को निर्धारित करती है।)इससे स्पष्ट है कि समाज के सभी संस्थान (राजनीति, धर्म, कानून, शिक्षा) अंततः इसी भौतिक आधार (Base) पर टिके होते हैं।
19. ऐतिहासिक भौतिकवाद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) केवल राजा और अभिजात्य वर्ग के शासन का अध्ययन
(b) समाज में धार्मिक और नैतिक मूल्यों का अध्ययन
(c) इतिहास में आए परिवर्तनों के मूल कारणों को भौतिक आधार पर समझना
(d) केवल साहित्य और कला का विश्लेषण
उत्तर: (c) इतिहास में आए परिवर्तनों के मूल कारणों को भौतिक आधार पर समझना
व्याख्या:
ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) मार्क्सवादी दर्शन का एक केंद्रीय सिद्धांत है।
इसका मूल उद्देश्य समाज और इतिहास में होने वाले परिवर्तनों को भौतिक परिस्थितियों (Material Conditions) के आधार पर समझाना है — न कि धार्मिक या आदर्शवादी कारणों से।मार्क्स ने इतिहास की व्याख्या के लिए यह मान्यता दी कि —
“It is not the consciousness of men that determines their existence, but their social existence that determines their consciousness.”
(मनुष्य की चेतना उसके सामाजिक अस्तित्व को निर्धारित नहीं करती, बल्कि उसका सामाजिक अस्तित्व उसकी चेतना को निर्धारित करता है।)अर्थात्, विचारों, नैतिकताओं या धार्मिक मान्यताओं की तुलना में आर्थिक आधार (Economic Base) और उत्पादन की प्रक्रिया (Mode of Production) ही समाज के विकास और ऐतिहासिक परिवर्तन का मूल कारण हैं।
ऐतिहासिक भौतिकवाद का मुख्य उद्देश्य:
- समाज के विकास की भौतिक नींव (Material Basis) को उजागर करना।
- यह समझना कि उत्पादन शक्तियाँ (Forces of Production) और उत्पादन सम्बन्ध (Relations of Production) में परिवर्तन कैसे सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक संरचनाओं को बदल देते हैं।
- इतिहास में होने वाले सभी संघर्षों — विशेषकर वर्ग-संघर्ष (Class Struggle) — को आर्थिक आधार से जोड़कर देखना।
उदाहरण:
- सामंतवाद से पूँजीवाद में परिवर्तन — यह धार्मिक सुधारों से नहीं, बल्कि उत्पादन पद्धति और वर्ग सम्बन्धों में हुए आर्थिक परिवर्तनों के कारण हुआ।
- औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) — भौतिक उत्पादन शक्तियों के विकास ने पूरे समाज के ढाँचे को रूपांतरित कर दिया।
20. मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद में ‘भौतिक आधार (Economic Base)’ और ‘अधिरचना (Superstructure)’ के द्वंद्वात्मक संबंध को आप कैसे समझते हैं? क्या यह संबंध एकतरफा निर्धारण (One-way Determinism) है या परस्पर प्रभावी (Reciprocal Interaction)?
(a) यह पूरी तरह एकतरफा निर्धारण है — केवल आर्थिक आधार अधिरचना को निर्धारित करता है।
(b) यह पूरी तरह वैचारिक है — अधिरचना आर्थिक आधार को निर्धारित करती है।
(c) यह द्वंद्वात्मक प्रक्रिया है — आर्थिक आधार अधिरचना को जन्म देता है, परन्तु अधिरचना भी पुनः आर्थिक आधार को प्रभावित करती है।
(d) यह केवल आदर्शवादी दृष्टिकोण है, जिसमें भौतिक तत्व गौण हैं।
उत्तर: (c) यह द्वंद्वात्मक प्रक्रिया है — आर्थिक आधार अधिरचना को जन्म देता है, परन्तु अधिरचना भी पुनः आर्थिक आधार को प्रभावित करती है।
व्याख्या:
मार्क्स ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ “A Contribution to the Critique of Political Economy (1859)” में कहा —“The mode of production of material life conditions the social, political and intellectual life process in general.”
(भौतिक जीवन के उत्पादन का तरीका सामाजिक, राजनैतिक और बौद्धिक जीवन-प्रक्रिया को सामान्यतः निर्धारित करता है।)इस कथन से यह स्पष्ट होता है कि समाज की आर्थिक संरचना (Economic Structure / Base) —
जिसमें उत्पादन शक्तियाँ और उत्पादन सम्बन्ध शामिल हैं —
वह समाज की अधिरचना (Superstructure) जैसे —
राज्य, कानून, धर्म, नैतिकता, विचारधारा, दर्शन आदि — को जन्म देती है।लेकिन यह प्रक्रिया एकतरफा (Unidirectional) नहीं है।
मार्क्स और एंगेल्स दोनों ने बाद के लेखों में स्पष्ट किया कि —“The superstructure, in turn, reacts upon the economic base and can accelerate or retard its development.”
(अधिरचना भी आर्थिक आधार पर प्रभाव डालती है और उसके विकास को तेज या धीमा कर सकती है।)द्वंद्वात्मक (Dialectical) संबंध का अर्थ:
- आर्थिक आधार (Base) – यह समाज की भौतिक वास्तविकता है; उत्पादन की प्रक्रिया, साधन और सम्बन्धों से निर्मित।
- अधिरचना (Superstructure) – यह आधार पर निर्मित विचारों, संस्थाओं और मान्यताओं का समूह है।
इन दोनों के बीच संबंध स्थिर नहीं, बल्कि परस्पर गतिशील (Mutual Dynamic) है।
आर्थिक आधार में परिवर्तन आने पर अधिरचना भी बदलती है, और कभी-कभी अधिरचना (जैसे – क्रांतिकारी विचारधारा या धर्म सुधार आंदोलन) आर्थिक संरचना में परिवर्तन लाने में सहायक बनती है।उदाहरण:
- यूरोप में औद्योगिक क्रांति ने पूँजीवादी आर्थिक आधार को जन्म दिया।
इसके साथ ही अधिरचना में –
“व्यक्तिगत स्वतंत्रता”, “निजी संपत्ति” और “संवैधानिक राज्य” के विचार उभरे।- लेकिन फ्रांसीसी क्रांति जैसी वैचारिक घटनाएँ (Superstructural forces)
स्वयं आगे चलकर आर्थिक व्यवस्था (Feudal → Capitalist) के रूपांतरण का कारण बनीं।मार्क्स का ऐतिहासिक भौतिकवाद न तो यांत्रिक निर्धारणवाद (Mechanical Determinism) है,
और न ही पूर्ण स्वतंत्र अधिरचनात्मक प्रक्रिया (Idealism)।
यह एक द्वंद्वात्मक, परस्पर-निर्भर (Dialectical and Reciprocal) प्रक्रिया है,
जहाँ भौतिक आधार और अधिरचना दोनों एक-दूसरे को प्रभावित और रूपांतरित करते हैं।
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