अध्याय 4: भारत में खाद्य सुरक्षा (Food Security in India) MCQs
भारत में खाद्य सुरक्षा (Food Security) हर नागरिक का मूल अधिकार और एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती है। यह केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित, पोषक और पर्याप्त भोजन सुनिश्चित करना भी इसका हिस्सा है।
कक्षा 9 के अर्थशास्त्र के अध्याय 4 में, भारत में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अपनाई जाने वाली नीतियाँ, सरकारी योजनाएँ और कार्यक्रम जैसे PDS, MSP, बफ़र स्टॉक और अन्य कल्याणकारी उपाय विस्तार से समझाए गए हैं।
यह अध्याय UPSC, SSC, Banking और स्कूल की परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खाद्य नीति, कृषि उत्पादन और सरकारी हस्तक्षेप के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।
उपलब्ध MCQs विस्तृत व्याख्या सहित छात्रों को न केवल अध्याय की समझ बढ़ाने में मदद करेंगे, बल्कि परीक्षा तैयारी को भी आसान और प्रभावी बनाएंगे।
खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर नहीं करती; सतत कृषि, पर्यावरणीय प्रबंधन और समावेशी वितरण प्रणाली इसे सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाती है।
1. “खाद्य सुरक्षा” का अर्थ है —
A. केवल गरीबों को भोजन देना
B. सभी लोगों के लिए सदैव भोजन की उपलब्धता, पहुँच और सामर्थ्य
C. केवल सरकारी गोदामों में अनाज रखना
D. केवल किसानों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराना
उत्तर: B. सभी लोगों के लिए सदैव भोजन की उपलब्धता, पहुँच और सामर्थ्य
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को हर समय पर्याप्त मात्रा में, पौष्टिक, और सुलभ/सस्ता भोजन मिल सके। यह केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तीन मुख्य आयाम शामिल हैं:
- उपलब्धता (Availability):
- देश या क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में भोजन का उत्पादन होना।
- इसमें घरेलू उत्पादन, आयात और भंडारण शामिल होते हैं।
- उदाहरण: भारत में धान, गेहूं और अन्य अनाज का पर्याप्त उत्पादन।
- पहुँच (Access):
- सभी लोगों को भोजन प्राप्त करने की भौतिक और आर्थिक क्षमता होना।
- केवल उपलब्ध भोजन होना पर्याप्त नहीं; लोगों को उसे खरीदने या प्राप्त करने का साधन होना चाहिए।
- उदाहरण: गरीब परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) द्वारा अनाज की पहुँच।
- सामर्थ्य / वहनीयता (Affordability):
- भोजन की कीमत ऐसी हो कि सभी लोग, विशेषकर गरीब, उसे खरीद सकें।
- यह आय और मूल्य स्थिरता पर निर्भर करता है।
2. खाद्य सुरक्षा की तीन प्रमुख शर्तें (आयाम) कौन-सी हैं?
A. उत्पादन, वितरण, उपभोग
B. उपलब्धता, पहुँच, सामर्थ्य
C. निर्यात, आयात, उत्पादन
D. संग्रहण, परिवहन, विपणन
उत्तर: B. उपलब्धता, पहुँच, सामर्थ्य
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा केवल भोजन के भंडारण या उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसे सुनिश्चित करने के लिए तीन मुख्य आयाम होते हैं:
- उपलब्धता (Availability):
- देश या क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में भोजन का उत्पादन या आयात होना।
- उदाहरण: भारत में धान और गेहूं का पर्याप्त उत्पादन।
- पहुँच (Accessibility):
- भोजन हर व्यक्ति तक भौतिक और आर्थिक रूप से पहुँच सके।
- उदाहरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीबों तक अनाज की पहुँच।
- सामर्थ्य / वहनीयता (Affordability):
- भोजन की कीमत ऐसी हो कि गरीब और मध्यम वर्ग इसे खरीद सकें।
- उदाहरण: NFSA के तहत सब्सिडी प्राप्त राशन।
3. “सामर्थ्य” (Affordability) का अर्थ है —
A. देश में खाद्यान्न की उपलब्धता
B. भोजन खरीदने की आर्थिक क्षमता
C. सरकारी अनाज गोदामों की संख्या
D. खाद्यान्न के निर्यात की स्थिति
उत्तर: B. भोजन खरीदने की आर्थिक क्षमता
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा का तीसरा आयाम “सामर्थ्य” है। इसका मतलब है कि लोगों के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन होना चाहिए ताकि वे अपने परिवार के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीद सकें।
- केवल भोजन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है; गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को इसे खरीदने की आर्थिक क्षमता भी होनी चाहिए।
- उदाहरण: यदि किसी गरीब परिवार की आय बहुत कम है और राशन या भोजन महंगा है, तो भले ही भोजन बाजार में उपलब्ध हो, वह परिवार खाद्य असुरक्षित रहेगा।
- यह आय, मूल्य स्थिरता, और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों (जैसे NFSA, PDS) पर निर्भर करता है।
4. खाद्य सुरक्षा की परिभाषा के अनुसार, किसी देश में खाद्य सुरक्षा तभी सुनिश्चित होती है जब —
A. देश में अनाज का अधिक उत्पादन हो
B. विदेशी सहायता उपलब्ध हो
C. केवल सरकारी भंडार भरे हों
D. सभी लोगों के पास भोजन तक पहुँच और उसे खरीदने की क्षमता हो
उत्तर: D. सभी लोगों के पास भोजन तक पहुँच और उसे खरीदने की क्षमता हो
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा केवल देश में अधिक उत्पादन या भंडार रखने तक सीमित नहीं है। यह तभी पूरी तरह सुनिश्चित होती है जब:
- उपलब्धता (Availability): देश में पर्याप्त खाद्यान्न या भोजन मौजूद हो।
- उदाहरण: घरेलू उत्पादन, आयात और भंडारण।
- पहुँच (Accessibility): हर व्यक्ति तक भोजन पहुँच सके।
- भौतिक रूप से (संपत्ति, भंडार से वितरण) और आर्थिक रूप से (खरीदने की क्षमता)।
- सामर्थ्य / वहनीयता (Affordability): लोग भोजन खरीदने में सक्षम हों।
- उदाहरण: गरीब परिवारों के लिए सब्सिडी राशन।
इसलिए, खाद्य सुरक्षा तभी पूरी होती है जब सभी लोग पर्याप्त, पौष्टिक और वहनीय भोजन तक पहुँच सकें।
5. खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) से सबसे अधिक कौन प्रभावित होता है?
A. सम्पन्न वर्ग
B. निर्धन परिवार
C. सरकारी कर्मचारी
D. औद्योगिक क्षेत्र
उत्तर: B. निर्धन परिवार
व्याख्या:
खाद्य असुरक्षा का अर्थ है कि किसी व्यक्ति या परिवार के पास पर्याप्त, पौष्टिक और वहनीय भोजन की न तो उपलब्धता होती है और न ही पहुँच।
- जब खाद्यान्न की कमी या वितरण में बाधा आती है, तो गरीब और निर्धन परिवार सबसे अधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि उनके पास सीमित आय और संसाधन होते हैं।
- सम्पन्न वर्ग और आर्थिक रूप से सक्षम लोग, भले ही खाद्य संकट हो, आम तौर पर इसे सहन कर सकते हैं।
SDG Goal 2 – Zero Hunger से संबंध:
- SDG 2 का उद्देश्य है दुनिया भर में भूख और कुपोषण को समाप्त करना, विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्गों में।
- इसमें शामिल हैं:
- सभी लोगों के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना।
- गरीब और असुरक्षित समूहों की खाद्य पहुँच बढ़ाना।
- सतत कृषि और उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देना ताकि खाद्य सुरक्षा दीर्घकालिक रूप से बनी रहे।
6. 1970 के दशक में ‘खाद्य सुरक्षा’ का अर्थ क्या था?
A. आधारिक खाद्य पदार्थों की सदैव पर्याप्त उपलब्धता
B. सभी को सस्ता भोजन देना
C. केवल अनाज निर्यात बढ़ाना
D. केवल गरीबों को अनाज देना
उत्तर: A. आधारिक खाद्य पदार्थों की सदैव पर्याप्त उपलब्धता
व्याख्या:
- 1970 के दशक में खाद्य सुरक्षा:
- उस समय खाद्य सुरक्षा को केवल उत्पादन और मुख्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता के रूप में देखा जाता था।
- उद्देश्य यह था कि देश में पर्याप्त अनाज और अन्य आधारिक खाद्य पदार्थ मौजूद हों ताकि भुखमरी न हो।
- इसमें गरीबों की पहुँच या आर्थिक क्षमता को प्रमुखता नहीं दी गई थी।
- Amartya Sen का योगदान:
- अमर्त्य सेन (Nobel Laureate in Economics) ने “Entitlement Approach” प्रस्तुत किया।
- उनके अनुसार, केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं है; लोगों तक भोजन पहुँचने के अधिकार और क्षमता (Entitlements) भी जरूरी हैं।
- उदाहरण: किसी के पास पर्याप्त आय या सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम हों ताकि वह भोजन खरीद सके।
1970s → Food Security = Availability (उपलब्धता)
बाद में (Sen के विचार अनुसार) → Food Security = Availability + Access + Affordability
7. “हकदारियों (Entitlements)” की अवधारणा किसने दी?
A. जॉन रॉल्स
B. अमर्त्य सेन
C. पी. चिदंबरम
D. रघुराम राजन
उत्तर: B. अमर्त्य सेन
व्याख्या:
- अमर्त्य सेन और हकदारियों (Entitlements):
- अमर्त्य सेन ने यह सिद्धांत पेश किया कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन या उपलब्धता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि व्यक्ति के पास भोजन प्राप्त करने के लिए सामाजिक और आर्थिक साधन मौजूद हैं।
- इसे उन्होंने अपनी पुस्तक Poverty and Famines (1981) में विस्तृत किया।
- Entitlement Approach का अर्थ:
- Entitlements = किसी व्यक्ति के पास भोजन प्राप्त करने के अधिकार या साधन।
- उदाहरण:
- आय के माध्यम से खरीदना
- सरकारी सहायता (PDS, राशन)
- खेती या अन्य स्थानीय संसाधन
- यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त Entitlements नहीं हैं, तो भले ही खाद्य उत्पादन पर्याप्त हो, वह भूखमरी या खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकता है।
यह दृष्टिकोण बताता है कि गरीबी और असमानता खाद्य असुरक्षा का मूल कारण हैं, केवल उत्पादन की कमी नहीं।
8. 1996 के विश्व खाद्य शिखर सम्मेलन (World Food Summit) के अनुसार, खाद्य सुरक्षा का अर्थ क्या है?
A. सभी लोगों को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक निरंतर पहुँच
B. केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना
C. केवल सरकारी सहायता से भोजन देना
D. केवल ग्रामीण इलाकों में खाद्य वितरण
उत्तर: A. सभी लोगों को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक निरंतर पहुँच
व्याख्या:
- विश्व खाद्य शिखर सम्मेलन (World Food Summit – 1996):
- FAO (Food and Agriculture Organization) ने इसे आयोजित किया।
- इसका उद्देश्य दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की स्थिति सुधारना और भूख को कम करना था।
- खाद्य सुरक्षा की परिभाषा:
- उपलब्धता (Availability): देश या क्षेत्र में पर्याप्त खाद्य उत्पादन और आयात होना।
- पहुँच (Accessibility): हर व्यक्ति तक भोजन पहुँच सके।
- सामर्थ्य / वहनीयता (Affordability): लोग भोजन खरीदने में सक्षम हों।
- पोषण सुरक्षा (Food Safety & Nutrition): भोजन पर्याप्त और पौष्टिक होना चाहिए।
- मुख्य बिंदु:
- केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।
- सभी व्यक्तियों तक आर्थिक और भौतिक रूप से निरंतर भोजन पहुँचाना जरूरी है।
- यह दृष्टिकोण आधुनिक खाद्य सुरक्षा के संपूर्ण और वैश्विक मानक का आधार बनता है।
9. प्राकृतिक आपदाएँ खाद्य सुरक्षा को कैसे प्रभावित करती हैं?
A. खाद्य की कीमतें कम कर देती हैं
B. भंडार क्षमता बढ़ा देती हैं
C. खाद्यान्न की उपलब्धता घटा देती हैं
D. कृषि निर्यात बढ़ा देती हैं
उत्तर: C. खाद्यान्न की उपलब्धता घटा देती हैं
व्याख्या:
- प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव:
- सूखा, बाढ़, भूकंप, तूफान या फसल नष्ट होने जैसी आपदाएँ कृषि उत्पादन को सीधे प्रभावित करती हैं।
- परिणामस्वरूप, खाद्य की कुल उपलब्धता कम हो जाती है।
- अर्थव्यवस्था और कीमतों पर प्रभाव:
- उत्पादन कम होने से खाद्य की कीमतें बढ़ जाती हैं।
- गरीब और निर्धन परिवारों के लिए भोजन खरीदना कठिन हो जाता है, जिससे खाद्य असुरक्षा बढ़ती है।
- खाद्य सुरक्षा के तीन आयाम पर प्रभाव:
- उपलब्धता (Availability): आपदा से कम उत्पादन → उपलब्धता घटती है।
- पहुँच (Accessibility): महँगी कीमतें → लोगों की पहुँच घटती है।
- सामर्थ्य / वहनीयता (Affordability): निर्धन परिवार भोजन खरीदने में असमर्थ।
- उदाहरण:
- 2002 में महाराष्ट्र में सूखा → धान और गेहूँ की कमी → PDS पर दबाव। (PDS (Public Distribution System) का अर्थ है सार्वजनिक वितरण प्रणाली, जो भारत में गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाने का सरकारी कार्यक्रम है।)
- 2018 के केरल बाढ़ → फसल नष्ट → स्थानीय खाद्य कीमतें बढ़ीं।
10. अकाल के दौरान लोगों की मृत्यु मुख्यतः किस कारण से होती है?
A. केवल भोजन की अनुपलब्धता के कारण
B. केवल बेरोजगारी और गरीबी से
C. युद्ध और राजनीतिक संघर्ष से
D. दूषित जल, सड़ा भोजन और रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी से
उत्तर: D. दूषित जल, सड़ा भोजन और रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी से
व्याख्या:
- अकाल (Famine) और मृत्यु का कारण:
- अकाल केवल भोजन की कमी तक सीमित नहीं है।
- जब लोग पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं पाते, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) कमजोर हो जाती है।
- इस दौरान दूषित पानी और सड़ा भोजन भी स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाते हैं।
- प्रमुख कारण:
- भूख और कुपोषण: शरीर कमजोर → रोगों का सामना नहीं कर पाता।
- संक्रामक रोग: जैसे डायरिया, हैजा, टीबी आदि।
- साफ-सफाई की कमी और दूषित भोजन/जल का सेवन।
- महत्वपूर्ण बिंदु:
- अकाल के दौरान सीधे भूख से मृत्यु कम होती है, अधिकांश मृत्यु कुपोषण और रोगों से जुड़ी होती है।
- इस दृष्टिकोण ने खाद्य सुरक्षा नीतियों में सिर्फ उपलब्धता पर नहीं बल्कि स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
उदाहरण:
- 1943 का बंगाल अकाल → मुख्यतः भूख से कमजोर लोगों में डायरिया और हैजा जैसी महामारियों के कारण मृत्यु।
11. भारत का सबसे भयानक अकाल कौन-सा था जिसमें लगभग 30 लाख लोग मारे गए थे?
A. 1943 का बंगाल अकाल
B. 1876 का मद्रास अकाल
C. 1966 का बिहार अकाल
D. 1979 का महाराष्ट्र अकाल
उत्तर: A. 1943 का बंगाल अकाल
व्याख्या:
- अकाल का परिचय:
- 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश शासनकाल में यह भयंकर अकाल पड़ा था।
- इसे “The Great Bengal Famine of 1943” कहा जाता है।
- मुख्य कारण:
- ब्रिटिश सरकार द्वारा युद्धकालीन नीतियों के तहत चावल का निर्यात और भंडारण की कमी।
- सूखा, बाढ़ और परिवहन की बाधाएँ।
- कृत्रिम अभाव (Artificial scarcity) — अनाज बाजार में मौजूद था, लेकिन गरीबों की पहुँच से बाहर था।
- परिणाम:
- लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई (भूख, रोग और कुपोषण से)।
- ग्राम्य अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई।
- यह अकाल अमर्त्य सेन (Amartya Sen) के “Entitlement Approach” (अधिकार सिद्धांत) का प्रमुख उदाहरण है — जिसमें उन्होंने बताया कि अकाल हमेशा भोजन की कमी से नहीं बल्कि लोगों की भोजन तक पहुँच (access) की कमी से होता है।
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- ब्रिटिश शासन ने राहत के पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
- भारत की स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस अकाल ने औपनिवेशिक शासन की नीतियों की अमानवीयता को उजागर किया।
12. बंगाल अकाल (1943) से सबसे अधिक कौन-से वर्ग प्रभावित हुए थे?
A. बड़े किसान और व्यापारी
B. सरकारी अधिकारी और सैनिक
C. खेतिहर मजदूर, मछुआरे और परिवहनकर्मी
D. ज़मींदार और उद्योगपति
उत्तर: C. खेतिहर मजदूर, मछुआरे और परिवहनकर्मी
व्याख्या:
- पृष्ठभूमि:
1943 में जब बंगाल में अकाल पड़ा, तो खाद्य पदार्थों की कीमतें अचानक कई गुना बढ़ गईं।
अमीर वर्ग और व्यापारी वर्ग के पास भंडारण और खरीद की क्षमता थी, लेकिन गरीब श्रमिक वर्ग के पास भोजन खरीदने की शक्ति नहीं रही।- सबसे अधिक प्रभावित वर्ग:
- खेतिहर मजदूर (Agricultural Labourers): उनके पास न तो भूमि थी, न ही अनाज का भंडार।
- मछुआरे: उनकी आय दैनिक थी, और अकाल के दौरान बाजारों में क्रयशक्ति घट गई।
- रिक्शा चालक व परिवहनकर्मी: रोज़ की कमाई बंद हो जाने से वे भोजन नहीं खरीद पाए।
इस वर्ग की “क्रय शक्ति (purchasing power)” सबसे पहले समाप्त हुई।- अमर्त्य सेन का विश्लेषण:
- अमर्त्य सेन ने अपने प्रसिद्ध अध्ययन “Poverty and Famines (1981)” में बताया कि बंगाल अकाल केवल उत्पादन की कमी से नहीं, बल्कि भोजन तक पहुँच (entitlement failure) की वजह से हुआ था।
- जिनके पास भोजन खरीदने की शक्ति नहीं थी, वे सबसे पहले अकाल के शिकार बने।
इस अकाल ने दिखाया कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक पहुँच (economic access) पर निर्भर करती है।
13. 1943 के बंगाल अकाल के दौरान चावल की कीमतों में वृद्धि का प्रमुख कारण क्या था?
A. उत्पादन में भारी गिरावट
B. ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्यात नीति
C. वितरण व्यवस्था की विफलता और जमाखोरी
D. जलवायु परिवर्तन
उत्तर: C. वितरण व्यवस्था की विफलता और जमाखोरी
व्याख्या:
- वास्तविक स्थिति:
1943 में बंगाल में चावल का उत्पादन बहुत कम नहीं हुआ था, फिर भी लाखों लोग भूख से मरे।
इसका कारण था — अनुचित वितरण (failure of distribution system), जमाखोरी (hoarding), और युद्धकालीन आर्थिक अस्थिरता।- मुख्य कारण:
- ब्रिटिश सरकार की युद्ध नीति (World War II):
द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सेना के लिए भारी मात्रा में चावल खरीदा गया, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो गई।- जमाखोरी और काला बाज़ारी:
व्यापारियों ने चावल छिपाकर ऊँचे दाम पर बेचना शुरू किया।- परिवहन संकट:
युद्ध के दौरान रेलवे और नौवहन सेवाएँ बाधित होने से ग्रामीण क्षेत्रों तक खाद्य पहुँच नहीं पाई।- वितरण व्यवस्था की विफलता:
गरीब वर्ग तक सरकारी सहायता समय पर नहीं पहुँची।- अमर्त्य सेन का विश्लेषण:
अर्थशास्त्री Amartya Sen ने अपनी पुस्तक “Poverty and Famines (1981)” में बताया कि
बंगाल अकाल का कारण खाद्यान्न की कमी नहीं, बल्कि लोगों की ‘हकदारियों (Entitlements)’ की विफलता थी।
यानी लोगों के पास भोजन खरीदने की आर्थिक और सामाजिक पहुँच नहीं रही।इस अकाल ने यह स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि समान वितरण और प्रभावी शासन तंत्र से सुनिश्चित होती है।
14. 1943 के बंगाल अकाल में लगभग कितने लोग मारे गए थे?
A. 10 लाख
B. 20 लाख
C. 30 लाख
D. 50 लाख
उत्तर: C. 30 लाख
व्याख्या:
- ऐतिहासिक संदर्भ:
1943 का बंगाल अकाल (Bengal Famine of 1943) ब्रिटिश शासन काल में हुआ था, जब द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) चल रहा था।
इस अकाल को 20वीं सदी के सबसे भयानक मानवीय संकटों में से एक माना जाता है।- मृत्यु का अनुमान:
विभिन्न ऐतिहासिक रिपोर्टों के अनुसार —
- सरकारी अभिलेखों में मृतकों की संख्या लगभग 30 लाख (3 million) बताई गई है।
- कुछ स्वतंत्र अध्ययनों में यह आंकड़ा 20 से 40 लाख के बीच माना गया है।
औसत अनुमान के अनुसार 30 लाख लोग भूख, रोग और कुपोषण से मारे गए।- मुख्य कारण:
- युद्धकालीन परिस्थितियों में खाद्यान्न का अनुचित वितरण,
- जमाखोरी और मूल्यवृद्धि,
- सरकारी उदासीनता,
- रोगों का फैलाव और कुपोषण।
- अमर्त्य सेन का दृष्टिकोण:
नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा कि यह अकाल केवल भोजन की कमी (food shortage) के कारण नहीं था,
बल्कि लोगों की ‘हकदारियों (Entitlements)’ की विफलता के कारण था — यानी गरीब वर्ग के पास भोजन खरीदने की क्षमता नहीं बची थी।
15. बंगाल प्रांत में चावल की कुल उपलब्धता (सारणी 4.1) किस वर्ष में सबसे अधिक कम हुई थी?
A. 1939
B. 1941
C. 1942
D. 1943
उत्तर: D. 1943
व्याख्या:
- उपलब्धता में गिरावट:
1943 में बंगाल में चावल की उपलब्धता लगभग 76 लाख टन रह गई थी, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम थी।
इससे स्पष्ट है कि 1943 में खाद्यान्न की गंभीर कमी थी।- परिणाम:
- चावल की कीमतें कई गुना बढ़ीं,
- गरीब वर्ग की पहुँच समाप्त हो गई,
- और इसी वर्ष बंगाल अकाल (Bengal Famine) का सबसे भयावह रूप देखने को मिला।
- अमर्त्य सेन का दृष्टिकोण:
यद्यपि उत्पादन घटा, पर वास्तविक संकट वितरण और पहुँच की विफलता के कारण उत्पन्न हुआ।
यानी Availability कम हुई, पर Accessibility और Affordability की विफलता ने इसे अकाल में बदला।
16.
कथन: 1943 का बंगाल अकाल केवल उत्पादन की कमी के कारण हुआ था।
कारण: सरकार ने खाद्य वितरण की उचित व्यवस्था नहीं की थी।
A. कथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण, कथन का सही कारण है।
B. कथन सही है, लेकिन कारण गलत है।
C. कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
D. दोनों गलत हैं।
उत्तर: C. कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
व्याख्या:
- कथन (A) गलत क्यों है?
- बंगाल में 1943 में चावल का उत्पादन लगभग 76 लाख टन था (Table 4.1)।
- यह मात्रा अकाल उत्पन्न करने के लिए अपर्याप्त नहीं थी।
- इसलिए यह कहना कि अकाल “केवल उत्पादन की कमी” से हुआ, भ्रमपूर्ण है।
- कारण (R) सही क्यों है?
- ब्रिटिश सरकार ने युद्धकाल में चावल की जमाखोरी, निर्यात और आपूर्ति नियंत्रण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
- गरीबों के लिए सरकारी वितरण प्रणाली (Public Distribution System) मौजूद नहीं थी।
- इस कारण गरीब वर्ग भोजन खरीदने या प्राप्त करने में असमर्थ हो गया।
- अमर्त्य सेन का ‘Entitlement Approach’:
- सेन के अनुसार, अकाल का कारण था लोगों की “हकदारियों (entitlements)” की विफलता —
यानी भोजन तक पहुँच और आर्थिक सामर्थ्य का समाप्त होना।- इस दृष्टिकोण से स्पष्ट है कि वितरण की विफलता ही वास्तविक कारण थी, उत्पादन की कमी नहीं।
17. खाद्य असुरक्षा से सबसे अधिक कौन प्रभावित होता है?
A. बड़े ज़मींदार और व्यापारी
B. भूमिहीन मजदूर, पारंपरिक दस्तकार और अनियत कार्यकर्ता
C. सरकारी कर्मचारी और शिक्षक
D. औद्योगिक श्रमिक
उत्तर: B. भूमिहीन मजदूर, पारंपरिक दस्तकार और अनियत कार्यकर्ता
व्याख्या:
- खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) का अर्थ:
- खाद्य असुरक्षा तब होती है जब व्यक्ति या परिवार को नियमित, पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिल पाता।
- यह भूख, कुपोषण और स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण बनती है।
- सबसे प्रभावित वर्ग:
- भूमिहीन मजदूर: जिनके पास खेती के लिए जमीन नहीं होती, और वे दूसरों के खेतों में मजदूरी पर निर्भर रहते हैं।
- पारंपरिक दस्तकार: जैसे बुनकर, लोहार, कुम्हार आदि, जिनकी आय अस्थायी और मौसम पर निर्भर होती है।
- अनियत कार्यकर्ता: जैसे रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू नौकर, जिनके पास स्थायी रोजगार नहीं होता।
- मुख्य कारण:
- सीमित आय और असंगठित रोजगार।
- भूख और पोषण के लिए नियमित संसाधनों की कमी।
- प्राकृतिक आपदाएँ या आर्थिक अस्थिरता इन वर्गों को और कमजोर करती हैं।
- सरकारी प्रयास:
- PDS (Public Distribution System): गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराना।
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY): अत्यंत गरीब परिवारों को भोजन।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA, 2013): खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- SDG (Sustainable Development Goal 2 – Zero Hunger) संदर्भ:
- संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि 2030 तक दुनिया में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।
- भारत की खाद्य सुरक्षा नीतियाँ इस लक्ष्य की दिशा में काम कर रही हैं।
18. प्राकृतिक आपदा या महामारी के दौरान खाद्य सुरक्षा कैसे प्रभावित होती है?
A. खाद्य की उपलब्धता स्थिर रहती है
B. आपदा या महामारी के कारण खाद्य आपूर्ति और आर्थिक पहुँच प्रभावित होती है
C. केवल संपन्न वर्ग प्रभावित होता है
D. सभी लोग भोजन से समृद्ध हो जाते हैं
उत्तर: B. आपदा या महामारी के कारण खाद्य आपूर्ति और आर्थिक पहुँच प्रभावित होती है
व्याख्या:
- खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव:
प्राकृतिक आपदाएँ (जैसे बाढ़, सूखा, भूकंप) या महामारी (जैसे COVID-19) खाद्य सुरक्षा के तीन आयामों को प्रभावित करती हैं:
- उपलब्धता (Availability):
आपदा से कृषि उत्पादन कम हो सकता है, या आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।- पहुंच (Accessibility):
लॉकडाउन, परिवहन बाधा या बाजार बंद होने से गरीब वर्ग भोजन तक नहीं पहुँच पाता।- सामर्थ्य (Affordability):
आपदा के कारण आय घटती है और भोजन खरीदना कठिन हो जाता है।- वास्तविक उदाहरण:
- COVID-19 महामारी (2020–21):
- लॉकडाउन और श्रमिकों की पलायन गति के कारण खाद्य वितरण बाधित हुआ।
- असंगठित क्षेत्र के मजदूर, भूमिहीन किसान और गरीब वर्ग खाद्य असुरक्षा का शिकार हुए।
- प्राकृतिक आपदाएँ:
- सूखा → फसल कम हुई → अनाज की कीमतें बढ़ीं।
- बाढ़ → भंडारण और परिवहन प्रभावित → ग्रामीण क्षेत्रों में भूख बढ़ी।
- सामाजिक प्रभाव:
- सबसे अधिक प्रभावित वर्ग वे होते हैं जिनकी आय स्थायी नहीं है।
- सरकारी सहायता (जैसे PDS, राहत शिविर) इस स्थिति को कम करने में मदद करती है।
प्राकृतिक आपदा या महामारी सिर्फ उत्पादन की कमी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि लोगों की खाद्य तक पहुँच और खरीदने की क्षमता को भी प्रभावित करती है।
19. शहरी क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षित कौन होते हैं?
A. सरकारी कर्मचारी और बैंक अधिकारी
B. कम वेतन वाले व्यवसायों में काम करने वाले और अनियत श्रमिक
C. उच्च आय वाले व्यापारी
D. केवल छात्र और बच्चे
उत्तर: B. कम वेतन वाले व्यवसायों में काम करने वाले और अनियत श्रमिक
व्याख्या:
- खाद्य असुरक्षा का शहरी परिप्रेक्ष्य:
शहरी क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा का कारण आय की अस्थिरता और उच्च जीवन-यापन लागत है।
- यहां खाद्यान्न की उपलब्धता आमतौर पर बनी रहती है, लेकिन लोगों की आर्थिक पहुँच (affordability) प्रभावित होती है।
- सबसे प्रभावित वर्ग:
- कम वेतन वाले कर्मचारी:
जैसे छोटे दुकानदार, सफाई कर्मचारी, होटलों/रेस्टोरेंट्स में काम करने वाले।- अनियत या असंगठित श्रमिक (Casual Workers):
जैसे रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू नौकर।- इनके पास स्थायी रोजगार और नियमित आय नहीं होती, इसलिए भोजन खरीदने की क्षमता सीमित रहती है।
- कारण:
- उच्च किराया और जीवन यापन लागत।
- आय अस्थिर होने के कारण भोजन की सामर्थ्य (Affordability) प्रभावित होती है।
- सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का कम उपयोग या पहुँच।
- उदाहरण:
- COVID-19 लॉकडाउन के दौरान शहरी अनियमित श्रमिकों को खाद्य संकट का सामना करना पड़ा।
- कई लोग राहत शिविर और PDS पर निर्भर हुए।
शहरी क्षेत्र में खाद्य असुरक्षा मुख्यतः उन परिवारों को प्रभावित करती है जिनके सदस्य कम वेतन वाले और अनियमित रोजगार में लगे हैं, क्योंकि उनकी आर्थिक क्षमता सीमित होती है और जीवन-यापन खर्च अधिक होता है।
20. कृषि को मौसमी क्रिया क्यों कहा जाता है?
A. फसल की बुवाई, रोपण और कटाई वर्ष में कुछ ही समय में होती है
B. कृषि केवल खेती तक सीमित है
C. सभी किसान पूरे वर्ष खेतों में काम करते हैं
D. फसल की कटाई बिना मौसम के भी होती है
उत्तर: A. फसल की बुवाई, रोपण और कटाई वर्ष में कुछ ही समय में होती है
व्याख्या:
- मौसमी कृषि का अर्थ:
- कृषि को “मौसमी क्रिया (Seasonal Activity)” इसलिए कहा जाता है क्योंकि
कृषि संबंधी कार्य वर्ष के कुछ निश्चित महीनों में ही किए जाते हैं।- पूरे वर्ष किसान खेतों में काम नहीं कर सकते, क्योंकि बीज बोना, पौधा रोपण, सिंचाई और कटाई का समय मौसम और फसल चक्र पर निर्भर होता है।
- मुख्य क्रियाएँ:
- बुआई (Sowing/Seeding): मानसून या सिंचाई पर निर्भर।
- रोपण (Transplanting): जैसे धान का रोपण जलभराव और मौसम के अनुसार।
- कटाई (Harvesting): फसल पकने के बाद ही संभव।
- असंगठित रोजगार का कारण:
- फसल चक्र के बाहर किसान या खेतिहर मजदूरों को अन्य अस्थायी कार्य (casual work) की तलाश करनी पड़ती है।
- इसलिए कृषि क्षेत्र में मौसमी बेरोजगारी और आय अस्थिरता आम समस्या है।
- उदाहरण:
- भारत में खरीफ फसल (जैसे धान, मक्का) मानसून में बोई जाती है और अक्टूबर–नवंबर में कटाई होती है।
- रबी फसल (जैसे गेहूं, जौ) सर्दियों में बोई जाती है और मार्च–अप्रैल में कटाई होती है।
कृषि को मौसमी क्रिया कहा जाता है क्योंकि इसकी गतिविधियाँ वर्ष के कुछ निश्चित मौसम/महीनों तक सीमित रहती हैं, और बाकी समय किसान/मजदूर अन्य कार्यों पर निर्भर होते हैं।
21. सामाजिक संरचना खाद्य असुरक्षा में किस प्रकार भूमिका निभाती है?
A. केवल संपन्न जातियाँ प्रभावित होती हैं
B. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग अधिक असुरक्षित होते हैं
C. सभी लोग समान रूप से सुरक्षित हैं
D. केवल शहरी मध्यम वर्ग प्रभावित होता है
उत्तर: B. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग अधिक असुरक्षित होते हैं
व्याख्या:
- सामाजिक संरचना का प्रभाव:
- भारत में जाति और सामाजिक वर्ग निर्धारण खाद्य असुरक्षा को प्रभावित करता है।
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्ग (OBC) के पास भूमि, धन और संसाधन कम होते हैं, इसलिए वे अधिक असुरक्षित हैं।
- मुख्य कारण:
- भूमि और आय की असमानता: अधिकांश पिछड़े वर्गों के पास खेती के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है।
- रोजगार की अस्थिरता: ये वर्ग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिससे आय अनियमित होती है।
- प्राकृतिक आपदाएँ: जैसे सूखा, बाढ़, महामारी — कमजोर वर्गों को और प्रभावित करती हैं।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: सीमित शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण पोषण की कमी बढ़ती है।
- सरकारी उपाय:
- PDS (Public Distribution System)
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY)
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA, 2013)
- SDG संदर्भ:
- SDG Goal 2 – Zero Hunger के अनुसार, खाद्य असुरक्षा को समाप्त करना और सभी वर्गों को पोषण सुनिश्चित करना लक्ष्य है।
सामाजिक और आर्थिक असमानता के कारण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग खाद्य असुरक्षा के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं।
22. भारत में खाद्य असुरक्षित आबादी में सबसे अधिक कौन प्रभावित होता है?
A. गर्भवती और दूध पिला रही महिलाएँ, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
B. केवल पुरुष मजदूर
C. केवल उच्च आय वर्ग
D. केवल वृद्ध नागरिक
उत्तर: A. गर्भवती और दूध पिला रही महिलाएँ, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
व्याख्या:
- खाद्य असुरक्षा और संवेदनशील समूह:
- भारत में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण के सबसे संवेदनशील वर्ग हैं:
- गर्भवती महिलाएँ: उनके लिए पर्याप्त पोषण न मिलने पर स्वयं और अजन्मे बच्चे का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
- दूध पिला रही महिलाएँ (Lactating Mothers): शिशु के लिए पोषण आवश्यक, मां की पोषण कमी बच्चे को प्रभावित कर सकती है।
- 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे: ये वृद्धि और विकास के लिए अत्यधिक पोषण पर निर्भर हैं।
- मुख्य कारण:
- आर्थिक सीमाएँ: गरीब परिवारों में महिला और बच्चों का पोषण अक्सर प्राथमिकता में नहीं होता।
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारण: कई जगह बच्चों और महिलाओं की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को अनदेखा किया जाता है।
- स्वास्थ्य और रोग: कुपोषण से प्रतिरक्षा कमजोर होती है, जिससे महामारी या बीमारियाँ तेजी से प्रभाव डालती हैं।
- परिणाम:
- गर्भवती महिलाओं में: एनीमिया, कम जन्म भार (Low Birth Weight), और प्रसव में जटिलताएँ।
- बच्चों में: दुर्विकास (stunting), कुपोषण (underweight), और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी।
- सरकारी उपाय:
- मध्यान्ह भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme)
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
- आईसीडीएस (Integrated Child Development Services)
- राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan)
- SDG संदर्भ:
- SDG Goal 2 – Zero Hunger के अनुसार सभी बच्चों और माताओं को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य है।
भारत में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण से सबसे अधिक प्रभावित समूह गर्भवती महिलाएँ, दूध पिला रही महिलाएँ और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। उनके पोषण की कमी सीधे स्वास्थ्य, विकास और मृत्यु दर को प्रभावित करती है।
23. दीर्घकालिक भुखमरी किस कारण होती है?
A. वर्षभर काम न मिलना
B. फसल कटाई के समय बेरोजगारी
C. केवल शहरी क्षेत्रों में
D. सरकारी सहायता अधिक होने पर
उत्तर: A. वर्षभर काम न मिलना
व्याख्या:
- दीर्घकालिक भुखमरी (Chronic Hunger) का अर्थ:
- दीर्घकालिक भुखमरी तब होती है जब व्यक्ति या परिवार साल भर पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं जुटा पाता।
- यह केवल समय-समय की फसल असफलता या अस्थायी समस्याओं के कारण नहीं होती, बल्कि लगातार आर्थिक असुरक्षा का परिणाम है।
- मुख्य कारण:
- सालभर अस्थायी या बेरोजगार श्रमिक: भूमिहीन किसान, असंगठित क्षेत्र के मजदूर।
- निम्न आय और गरीबी: आय इतनी कम होती है कि भोजन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती।
- सामाजिक और क्षेत्रीय असमानताएँ: पिछड़े और अनुसूचित वर्गों में दीर्घकालिक भुखमरी अधिक होती है।
- अंतर अस्थायी भुखमरी से (Seasonal Hunger):
- मौसमी भुखमरी (Seasonal Hunger): केवल फसल चक्र के कुछ महीनों में होती है।
- दीर्घकालिक भुखमरी (Chronic Hunger): पूरे वर्ष बनी रहती है और कुपोषण का गंभीर कारण बनती है।
- परिणाम:
- शारीरिक विकास में कमी (stunting)
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर
- बच्चों और महिलाओं में स्वास्थ्य समस्याएँ
- सरकारी प्रयास:
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY)
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)
- कामगार सुरक्षा और रोजगार योजनाएँ
दीर्घकालिक भुखमरी मुख्यतः वर्षभर काम न मिलने और लगातार कम आय के कारण होती है। यह गरीब और असंगठित श्रमिकों में सबसे अधिक देखी जाती है।
24. मौसमी भुखमरी किससे जुड़ी होती है?
A. फसल उपजाने और कटाई के चक्र से
B. सालभर स्थिर आय से
C. केवल सरकारी योजनाओं से
D. शहरी घरों की संख्या से
उत्तर: A. फसल उपजाने और कटाई के चक्र से
व्याख्या:
- मौसमी भुखमरी (Seasonal Hunger) का अर्थ:
- मौसमी भुखमरी वह स्थिति है जब व्यक्ति या परिवार केवल साल के कुछ महीनों में भोजन की कमी का सामना करता है।
- यह पूरे वर्ष नहीं बल्कि कृषि चक्र और मौसमी रोजगार की अस्थिरता से जुड़ी होती है।
- मुख्य कारण:
- कृषि चक्र:
- खरीफ और रबी फसल के दौरान बुआई, रोपण और कटाई के समय ही मजदूरी या फसल मिलती है।
- फसल से पहले और बाद के कुछ महीनों में मजदूरों या भूमिहीन किसानों के पास काम नहीं होता।
- शहरी अस्थायी रोजगार:
- जैसे निर्माण श्रमिक, रिक्शा चालक, घरेलू नौकर — बरसात या सर्दियों में काम कम होता है।
- परिणाम:
- अल्पकालिक कुपोषण और भूख
- बच्चों में विकास की रफ्तार धीमी
- अस्थायी आय संकट और खाद्य असुरक्षा
- सरकारी उपाय:
- Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA): मौसमी बेरोजगारी कम करने के लिए रोजगार सुनिश्चित।
- PDS और स्थानीय खाद्य वितरण
मौसमी भुखमरी मुख्यतः कृषि फसल चक्र और अस्थायी रोजगार के समय से जुड़ी होती है, और यह केवल कुछ महीनों तक प्रभावित करती है।
25. 1983–2000 के बीच भारत में भुखमरी के प्रतिशत में क्या परिवर्तन हुआ?
A. मौसमी और दीर्घकालिक भुखमरी दोनों में गिरावट हुई
B. केवल ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धि हुई
C. शहरी क्षेत्रों में दीर्घकालिक भुखमरी बढ़ी
D. कोई बदलाव नहीं हुआ
उत्तर: A. मौसमी और दीर्घकालिक भुखमरी दोनों में गिरावट हुई
व्याख्या:
1983–2000 के बीच भारत में मौसमी और दीर्घकालिक भुखमरी दोनों में कमी देखी गई। इसका मुख्य कारण था:
- कृषि उत्पादन में वृद्धि (हरित क्रांति के प्रभाव)
- सरकारी वितरण और पोषण योजनाएँ जैसे PDS और ICDS
- स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों का प्रभाव विशेषकर बच्चों और माताओं के लिए
इस अवधि में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ।
26. भारत में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कौन-सी पहल की गई?
A. हरित क्रांति
B. केवल आयात बढ़ाना
C. खेती छोड़ना
D. ग्रामीण मजदूरों को रोकना
उत्तर: A. हरित क्रांति (Green Revolution)
व्याख्या:
1. स्वतंत्रता के बाद की स्थिति:
1947 के बाद भारत ने लगातार खाद्यान्न की कमी, अकाल, और विदेशी आयात पर निर्भरता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना किया।
1950 और 1960 के दशक में देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन कृषि उत्पादन उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहा था।
इस समय भारत को अमेरिका से PL-480 योजना के तहत गेहूँ आयात करना पड़ता था — जो भारत की खाद्य असुरक्षा को दर्शाता था।2. हरित क्रांति की शुरुआत (Green Revolution):
इस संकट से निपटने के लिए 1960 के दशक के मध्य में वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन, नॉर्मन बोरलॉग, और अन्य कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से भारत ने “हरित क्रांति” की शुरुआत की।इस पहल में शामिल थे —
- HYV seeds (उच्च उपज वाले बीज) का उपयोग,
- रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग,
- सिंचाई सुविधाओं का विस्तार,
- और कृषि अनुसंधान व विस्तार सेवाओं को प्रोत्साहन।
3. परिणाम (Impact):
- भारत में गेहूँ और चावल की पैदावार में जबरदस्त वृद्धि हुई।
- 1970 के दशक तक भारत ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता (Self-Sufficiency) प्राप्त कर ली।
- खाद्यान्न भंडारण (Buffer Stock) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की नींव मजबूत हुई।
- कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण (Modernization) और उत्पादकता बढ़ी।
4. सीमाएँ (Limitations):
हालाँकि हरित क्रांति का लाभ मुख्यतः सिंचित और विकसित क्षेत्रों — पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश — तक सीमित रहा।
शुष्क और वर्षा-निर्भर क्षेत्रों को इसका समान लाभ नहीं मिला।भारत ने खाद्यान्न आत्मनिर्भरता (Food Self-Sufficiency) मुख्यतः हरित क्रांति (Green Revolution) के माध्यम से प्राप्त की।
यह केवल तकनीकी सुधार नहीं था, बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा नीति (Food Security Policy) का बुनियादी स्तंभ बना।
27. हरित क्रांति के दौरान गेहूँ की सफलता के बाद क्या हुआ?
A. चावल के क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ा
B. केवल गेहूँ की फसल बढ़ी
C. सभी अनाज की फसल घट गई
D. कृषि उत्पादन स्थिर रहा
उत्तर: A. चावल के क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ा
व्याख्या:
भारत में 1960 के दशक की शुरुआत में खाद्यान्न संकट बहुत गहरा था। लगातार सूखा और बढ़ती जनसंख्या के कारण देश को खाद्य आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। इसी पृष्ठभूमि में हरित क्रांति (Green Revolution) की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य था —“उच्च उत्पादकता वाली फसलों, आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक साधनों के प्रयोग से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना।”1. प्रारंभिक सफलता – गेहूँ उत्पादन में वृद्धि:
हरित क्रांति का पहला प्रयोग पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किया गया। वहाँ पर उच्च उपज वाले बीज (HYV seeds), रासायनिक उर्वरक, सिंचाई, और कीटनाशकों का उपयोग शुरू किया गया।
इससे गेहूँ की पैदावार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई — भारत ने पहली बार खाद्यान्न संकट से राहत पाई।2. दूसरा चरण – चावल उत्पादन में वृद्धि:
गेहूँ में मिली सफलता के बाद यह तकनीक चावल की फसल पर भी लागू की गई।
दक्षिण भारत (विशेषकर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) और पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा) में उच्च उत्पादकता वाले चावल के बीज लगाए गए।
परिणामस्वरूप, 1970 के दशक में चावल उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।3. कुल प्रभाव (Overall Impact):
- भारत में कुल खाद्यान्न उत्पादन दोगुना हो गया।
- खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल हुई — विदेशी आयात पर निर्भरता घट गई।
- खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को स्थायी आधार मिला।
हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि हरित क्रांति का लाभ मुख्य रूप से सिंचित और उर्वरक-संपन्न क्षेत्रों तक सीमित रहा; पूर्वोत्तर और शुष्क क्षेत्रों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
हरित क्रांति की शुरुआत भले ही गेहूँ की सफलता से हुई, लेकिन बाद में इसका विस्तार चावल उत्पादन तक हुआ, जिससे भारत में खाद्य सुरक्षा की नींव मजबूत हुई।
28. भारत में अनाज उत्पादन में सर्वाधिक दशकीय वृद्धि किस दशक में हुई?
A. 1960-70
B. 1970-80
C. 1980-90
D. 1990-2000
उत्तर: B. 1970-80
व्याख्या:
- पृष्ठभूमि:
- 1960 के दशक में भारत खाद्यान्न संकट और अकाल का सामना कर रहा था।
- इस दौरान गेहूँ और चावल की उत्पादकता कम थी और देश विदेशी आयात पर निर्भर था।
- हरित क्रांति का प्रभाव (1970–80):
- 1970 के दशक में हरित क्रांति (Green Revolution) की शुरुआत हुई।
- उच्च उत्पादकता वाले बीज (HYV seeds), रासायनिक उर्वरक, सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया।
- मुख्य फसलें: गेहूँ (Punjab, Haryana, Western UP) और चावल (Andhra Pradesh, Tamil Nadu, West Bengal)।
- परिणाम :
- 1970–80 के दशक में गेहूँ और चावल का उत्पादन दोगुना होने के करीब पहुँच गया।
- भारत में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता (Food Self-Sufficiency) सुनिश्चित हुई।
- कुल खाद्यान्न उत्पादन में दशकीय वृद्धि सबसे अधिक इसी दशक में हुई।
मुख्य बिंदु
- 1970–80 = हरित क्रांति का दशक।
- गेहूँ और चावल उत्पादन में सर्वाधिक वृद्धि।
- भारत की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में अहम योगदान।
29. क्या 2000-01 से भारत में अनाज उत्पादन में वृद्धि स्थायी रही है?
A. हाँ, स्थायी वृद्धि हुई
B. नहीं, उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखा गया
C. केवल गेहूँ में स्थायी वृद्धि हुई
D. केवल चावल में वृद्धि हुई
उत्तर: B. नहीं, उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखा गया
व्याख्या:
- 2000-01 के बाद का परिदृश्य:
- भारत ने 2000-01 में पहली बार कुल अनाज उत्पादन 200 मिलियन टन के पार किया।
- इसके बाद उत्पादन लगातार बढ़ा, लेकिन स्थिर नहीं रहा।
- उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण:
- मौसम की दशाएँ (Weather Conditions): सूखा, बाढ़, अनियमित वर्षा।
- कीट और रोग (Pest & Disease Attacks)
- खाद और सिंचाई की उपलब्धता में अंतर।
- अन्य कृषि आर्थिक कारक, जैसे बाजार मूल्य और कृषि नीति में बदलाव।
- परिणाम:
- कुल उत्पादन में वर्ष-दर-वर्ष उतार-चढ़ाव देखा गया।
- कुछ वर्ष रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जबकि कुछ वर्ष कम उत्पादन हुआ।
- यह दर्शाता है कि 2000-01 के बाद भारत का उत्पादन स्थायी रूप से बढ़ता रहा, लेकिन लगातार नहीं।
मुख्य बिंदु:
- 2000-01 के बाद उत्पादन स्थिर रूप से नहीं बढ़ा।
- मौसम, सिंचाई, कीट और आर्थिक कारक उतार-चढ़ाव के प्रमुख कारण।
- कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव खाद्य सुरक्षा योजना और PDS के महत्व को बढ़ाता है।
30. बफ़र स्टॉक क्या है?
A. सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज का भंडार
B. केवल निजी कंपनियों द्वारा रखा गया अनाज
C. केवल विदेशों से आयातित अनाज
D. केवल गेहूँ का निजी भंडार
उत्तर: A. सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज का भंडार
व्याख्या:
- परिभाषा (Definition):
- Buffer Stock वह अनाज का भंडार है जिसे सरकार खरीदकर स्टोर करती है।
- मुख्य उद्देश्य: बाजार में अनाज की आपूर्ति स्थिर रखना और कीमतें नियंत्रित करना।
- प्रमुख संचालन (Key Operations):
- भारत में यह कार्य भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India – FCI) के माध्यम से किया जाता है।
- खरीदा गया अनाज मुख्यतः गेहूँ और चावल होता है।
- Buffer Stock का उपयोग आपातकाल, सूखा, बाढ़ या खाद्य संकट के समय किया जाता है।
- उद्देश्य (Objectives):
- कीमत नियंत्रण: बाजार में अनाज की कीमतें अत्यधिक न बढ़ें।
- खाद्य सुरक्षा: गरीब और निम्न-आय वर्ग को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराना।
- आपूर्ति स्थिरता: कृषि उत्पादन के उतार-चढ़ाव के बावजूद अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
मुख्य बिंदु:
- Buffer Stock = सरकार द्वारा अधिग्रहीत गेहूँ और चावल का भंडार।
- संचालन: FCI (Food Corporation of India)
- उद्देश्य: कीमत नियंत्रण + खाद्य सुरक्षा + आपूर्ति स्थिरता
31. न्यूनतम समर्थित मूल्य (MSP) का उद्देश्य क्या है?
A. किसानों को उनकी फसल के लिए निश्चित कीमत देना और उत्पादन को प्रोत्साहित करना
B. केवल बाजार कीमत बढ़ाना
C. केवल सरकारी दुकानों के लिए अनाज खरीदना
D. गरीबों को मुफ्त अनाज देना
उत्तर: A. किसानों को उनकी फसल के लिए निश्चित कीमत देना और उत्पादन को प्रोत्साहित करना
व्याख्या:
- परिभाषा (Definition):
- MSP (Minimum Support Price) वह कीमत है जिसे सरकार किसानों से फसल खरीदने के लिए सुनिश्चित करती है।
- इसे बुआई से पहले घोषित किया जाता है।
- उद्देश्य (Objectives):
- किसानों को सुरक्षा प्रदान करना: यदि बाजार कीमत MSP से कम हो, तो सरकार MSP पर खरीदती है।
- उत्पादन को प्रोत्साहित करना: किसानों को फसल उगाने में प्रोत्साहन मिलता है।
- खाद्य आपूर्ति स्थिर रखना: पर्याप्त उत्पादन सुनिश्चित होने से भारत की खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।
- मुख्य तथ्य (Key Facts):
- MSP प्रमुख फसलों जैसे गेहूँ, धान, गन्ना, दलहन, तेल बीज आदि पर लागू होता है।
- इसे कृषि बजट और नीति निर्णयों के आधार पर हर साल संशोधित किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
- MSP = किसान सुरक्षा + उत्पादन प्रोत्साहन
- घोषणा: बुआई से पहले
- लाभ: खाद्य आपूर्ति स्थिर और किसानों की आय सुरक्षित
32. बफ़र स्टॉक क्यों बनाया जाता है?
A. कमी वाले क्षेत्रों और गरीब वर्ग में सस्ते अनाज के लिए
B. केवल निर्यात के लिए
C. किसानों के लिए उच्च लाभ सुनिश्चित करने के लिए
D. निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए
उत्तर: A. कमी वाले क्षेत्रों और गरीब वर्ग में सस्ते अनाज के लिए
व्याख्या:
- परिभाषा (Definition):
- Buffer Stock वह अनाज है जिसे सरकार FCI (Food Corporation of India) द्वारा अधिग्रहित कर भंडारित करती है।
- उद्देश्य (Objectives):
- खाद्य आपूर्ति स्थिर रखना: अनियमित कृषि उत्पादन या मौसम की प्रतिकूलता से उत्पन्न संकट में मदद।
- गरीब वर्ग तक पहुँच: आपातकाल में गरीब और निम्न-आय वर्ग को सस्ती दर पर अनाज उपलब्ध कराना।
- कीमत नियंत्रण: बाजार में अनाज की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि रोकना।
- प्रमुख तथ्य (Key Facts):
- Buffer Stock मुख्यतः गेहूँ और चावल का भंडार है।
- इसे सूखा, बाढ़, प्राकृतिक आपदा या खाद्यान्न संकट के समय इस्तेमाल किया जाता है।
- यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण साधन है।
मुख्य बिंदु:
- Buffer Stock = सरकारी भंडारित अनाज
- उद्देश्य = सस्ती दर पर अनाज + आपूर्ति स्थिरता + गरीबों की सहायता
- संचालन = FCI (Food Corporation of India)
33. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का उद्देश्य क्या है?
A. गरीब वर्ग को विनियमित दर पर अनाज उपलब्ध कराना
B. केवल निजी दुकानों को लाभ देना
C. केवल शहरी क्षेत्रों में अनाज भेजना
D. किसानों को सब्सिडी देना
उत्तर: A. गरीब वर्ग को विनियमित दर पर अनाज उपलब्ध कराना
व्याख्या:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद वर्गों को सस्ते दामों पर आवश्यक खाद्य वस्तुएँ उपलब्ध कराना है।
इसके अंतर्गत सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से गेहूँ, चावल, चीनी और मिट्टी का तेल आदि का भंडारण और वितरण किया जाता है।
ये वस्तुएँ न्यायसंगत मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops) के माध्यम से विनियमित (subsidized) दरों पर दी जाती हैं।PDS का लक्ष्य केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि
- गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation),
- मूल्य स्थिरता (Price Stability)
और- सामाजिक न्याय (Social Equity)
को भी बढ़ावा देना है।प्रमुख तथ्य:
- PDS का आरंभ स्वतंत्रता के बाद 1940 के दशक में किया गया था।
- इसे 1997 में Targeted PDS (TPDS) के रूप में पुनर्गठित किया गया, जिससे BPL (Below Poverty Line) और APL (Above Poverty Line) परिवारों को अलग-अलग दरों पर अनाज दिया जाने लगा।
- 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) ने PDS को एक कानूनी अधिकार (Legal Entitlement) बना दिया।
34. भारत में राशन कार्ड कितने प्रकार के हैं?
A. 2
B. 3
C. 4
D. 5
उत्तर: B. 3
व्याख्या:
भारत में राशन कार्ड (Ration Card) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) के अंतर्गत जारी किए जाते हैं, ताकि पात्र परिवारों को सस्ते दरों पर खाद्य वस्तुएँ (जैसे गेहूँ, चावल, चीनी आदि) मिल सकें।
इन कार्डों को परिवार की आर्थिक स्थिति (Economic Status) के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है।
राशन कार्डों के प्रकार (Types of Ration Cards in India):
क्रमांक राशन कार्ड का नाम लाभार्थी वर्ग 1. अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana – AAY) कार्ड सबसे गरीब और अत्यंत निर्धन परिवार – “सबसे गरीब परिवारों” (Poorest of the Poor) को जारी किया जाता है।
– प्रति परिवार 35 किग्रा अनाज प्रति माह मिलता है — गेहूँ ₹2/किग्रा और चावल ₹3/किग्रा।2. बीपीएल (Below Poverty Line – BPL) कार्ड गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार – इन्हें सब्सिडी दर पर खाद्यान्न मिलता है।
– राज्य सरकारें अपनी सूची के अनुसार BPL परिवारों को चिन्हित करती हैं।3. एपीएल (Above Poverty Line – APL) कार्ड गरीबी रेखा से ऊपर के परिवार – इन परिवारों को अनाज बाज़ार मूल्य के करीब दर पर दिया जाता है।
– सब्सिडी सीमित या बहुत कम होती है।अतिरिक्त जानकारी:
- 2013 में लागू राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act – NFSA, 2013) के बाद, अब दो प्रमुख वर्ग बनाए गए हैं —
- Priority Households (PHH) – जिन्हें सब्सिडी वाला अनाज मिलता है।
- Antyodaya Households (AAY) – सबसे गरीब परिवार, जिन्हें अधिक मात्रा में सस्ता अनाज मिलता है।
इस प्रकार, परंपरागत रूप से तीन प्रकार (AAY, BPL, APL) जबकि NFSA के तहत दो मुख्य वर्ग (AAY और PHH) लागू हैं।
35. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की शुरुआत किस समय हुई?
A. 1920 के दशक में
B. 1940 के दशक में बंगाल अकाल के समय
C. 1960 के दशक में हरित क्रांति के बाद
D. 1975 में ICDS के साथ
उत्तर: B. 1940 के दशक में बंगाल अकाल के समय
व्याख्या:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की सबसे पुरानी योजनाओं में से एक है।
इसकी शुरुआत 1940 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध और 1943 के बंगाल अकाल (Bengal Famine) के दौरान की गई थी।उस समय ब्रिटिश सरकार ने अकाल से प्रभावित लोगों को सस्ते दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए राशनिंग व्यवस्था शुरू की।
यही प्रणाली बाद में स्वतंत्र भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के रूप में विकसित हुई।विकास क्रम (Evolution of PDS):
काल प्रमुख विशेषता 1940 का दशक द्वितीय विश्व युद्ध और बंगाल अकाल के समय खाद्य संकट से निपटने के लिए राशनिंग प्रणाली की शुरुआत। 1951 स्वतंत्र भारत में PDS को एक सामाजिक सुरक्षा उपाय (Social Safety Measure) के रूप में अपनाया गया। 1960 का दशक हरित क्रांति (Green Revolution) के बाद देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा और भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना (1965) हुई। 1992 Revamped PDS (RPDS) की शुरुआत – पिछड़े व जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष ध्यान। 1997 Targeted PDS (TPDS) – BPL और APL परिवारों के लिए अलग-अलग सब्सिडी दरें। 2013 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) लागू – खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार बनाया गया।
36. अंत्योदय कार्यक्रम (Antyodaya) किसके लिए है?
A. सभी ग्रामीण परिवारों के लिए
B. अत्यंत गरीब लोगों के लिए
C. मध्यम वर्ग के लिए
D. केवल शहरी गरीबों के लिए
उत्तर: B. अत्यंत गरीब लोगों के लिए
व्याख्या:
अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana – AAY) भारत सरकार द्वारा सबसे गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी।मुख्य बिंदु:
- लाभार्थी वर्ग: अत्यंत निर्धन परिवार (Poorest of the Poor)
- उद्देश्य: पात्र परिवारों को सस्ते दाम पर आवश्यक खाद्य वस्तुएँ (गेहूँ, चावल, चीनी आदि) उपलब्ध कराना।
- प्राप्त मात्रा:
- प्रत्येक परिवार को प्रति माह 35 किग्रा अनाज दिया जाता है।
- गेहूँ की दर ₹2 प्रति किग्रा, चावल की दर ₹3 प्रति किग्रा।
- स्थान: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सबसे गरीब परिवार पात्र हैं।
- संदर्भ: यह कार्यक्रम Targeted Public Distribution System (TPDS) का हिस्सा है और National Food Security Act (NFSA, 2013) के तहत भी जारी है।
अतिरिक्त जानकारी:
- अंत्योदय कार्ड का उद्देश्य सिर्फ खाद्य सुरक्षा ही नहीं है, बल्कि गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय को भी बढ़ावा देना है।
- यह PDS के सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक श्रेणी वाला हिस्सा है।
37. भारत में गरीबी उन्मूलन के अंतर्गत शुरू किए गए प्रारंभिक खाद्य संबंधी कार्यक्रम कौन से थे?
A. सार्वजनिक वितरण प्रणाली PDS, ICDS, FFW
B. केवल रोजगार गारंटी योजना
C. केवल अंत्योदय योजना
D. केवल midday meal
उत्तर: A. PDS, ICDS, FFW
व्याख्या:
1970 के दशक के मध्य भारत में गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन प्रमुख कार्यक्रम शुरू किए गए। ये कार्यक्रम विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्ग को लक्षित करते थे।मुख्य कार्यक्रम:
- PDS – Public Distribution System (सार्वजनिक वितरण प्रणाली):
- गरीब परिवारों को सस्ते दर पर अनाज और अन्य खाद्य वस्तुएँ उपलब्ध कराना।
- इसका उद्देश्य भोजन सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना था।
- ICDS – Integrated Child Development Services (समग्र बाल विकास सेवाएँ):
- 1975 में शुरू किया गया।
- बच्चों (0–6 वर्ष), गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना।
- इसमें पोषक आहार, स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण और प्राथमिक शिक्षा शामिल है।
- FFW – Food For Work (भोजन के बदले श्रम योजना):
- गरीब और बेरोजगार परिवारों को रोजगार के बदले भोजन उपलब्ध कराना।
- इसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन और स्थानीय विकास परियोजनाओं में श्रम का प्रोत्साहन था।
अतिरिक्त जानकारी:
- इन कार्यक्रमों का उद्देश्य था गरीबी और भुखमरी के चक्र को तोड़ना।
- PDS आज भी जारी है और ICDS व FFW जैसी योजनाएँ धीरे-धीरे समग्र सामाजिक सुरक्षा और पोषण कार्यक्रमों में विकसित हुई हैं।
38. वर्तमान में PDS का उद्देश्य क्या है?
A. गरीबों और निर्धनों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराना
B. केवल किसानों को सब्सिडी देना
C. निजी दुकानों को लाभ पहुंचाना
D. शहरी क्षेत्रों में केवल अनाज भेजना
उत्तर: A. गरीबों और निर्धनों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराना
व्याख्या:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुख्य साधन है।मुख्य उद्देश्य:
- गरीब और निर्धन परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा:
- PDS के तहत BPL (Below Poverty Line) और Antyodaya कार्डधारकों को सस्ते दर पर अनाज, चीनी और तेल उपलब्ध कराया जाता है।
- महंगाई और खाद्य संकट से बचाव:
- PDS का उद्देश्य गरीबों को बाज़ार मूल्य की बढ़ती कीमतों से सुरक्षा देना है।
- सामाजिक न्याय और समानता:
- यह योजना गरीब और वंचित वर्ग को प्राथमिकता देती है और उन्हें मूलभूत खाद्य वस्तुएँ सुनिश्चित करती है।
- स्थानीय स्तर पर वितरण:
- राशन दुकानों (Fair Price Shops) के माध्यम से परिवारों तक अनाज और अन्य वस्तुएँ पहुँचाई जाती हैं।
अतिरिक्त जानकारी:
- Targeted PDS (TPDS) और NFSA (National Food Security Act, 2013) के बाद यह योजना और अधिक पारदर्शी और प्रभावी हुई।
- अब PDS के तहत पात्र परिवार 5 किग्रा अनाज प्रति व्यक्ति प्रति माह (कई राज्यों में भिन्न दरें) प्राप्त कर सकते हैं।
वर्तमान में PDS का मुख्य उद्देश्य गरीब और निर्धन परिवारों को आवश्यक खाद्य वस्तुएँ सस्ते दर पर उपलब्ध कराना है।
यह भारत की खाद्य सुरक्षा नीति की रीढ़ है।
39. Integrated Child Development Services (ICDS) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. केवल ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देना
B. केवल अनाज वितरण करना
C. केवल स्कूलों में शिक्षा देना
D. बच्चों और माताओं को पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना
उत्तर: D. बच्चों और माताओं को पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना
व्याख्या:
ICDS (Integrated Child Development Services) भारत सरकार की एक प्रमुख सामाजिक कल्याण योजना है, जिसे 1975 में प्रायोगिक आधार पर शुरू किया गया।मुख्य उद्देश्य और कार्य:
- बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा:
- 0–6 वर्ष के बच्चों को पोषक आहार, स्वास्थ्य जाँच और टीकाकरण प्रदान करना।
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए सेवाएँ:
- पोषणयुक्त भोजन, स्वास्थ्य परामर्श, और मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना।
- बाल विकास और शिक्षा:
- बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा (Preschool Education) और संपूर्ण विकास को प्रोत्साहित करना।
- समग्र परिवार कल्याण:
- समुदाय को स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के लिए जागरूक करना।
अतिरिक्त जानकारी:
- ICDS का संचालन Anganwadi केंद्रों के माध्यम से होता है।
- यह योजना राष्ट्रीय बाल विकास कार्यक्रम का मुख्य स्तंभ है और गरीब व कमजोर वर्गों के लिए जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ICDS का मुख्य उद्देश्य बच्चों और माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।
यह योजना भारत की गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
40. Food for Work (FFW) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. स्कूलों में भोजन देना
B. केवल किसानों को सब्सिडी देना
C. गरीबों को रोजगार देकर अनाज उपलब्ध कराना
D. शहरी गरीबों को मुफ्त अनाज देना
उत्तर: C. गरीबों को रोजगार देकर अनाज उपलब्ध कराना
व्याख्या:
Food for Work (FFW) भारत सरकार द्वारा 1977-78 में प्रारंभ किया गया एक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम था।मुख्य उद्देश्य और कार्य:
- गरीबों के लिए रोजगार:
- बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को काम के बदले अनाज दिया जाता था।
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना:
- परिवारों को अत्यावश्यक अनाज सस्ते दर पर या काम के बदले उपलब्ध कराना।
- स्थानीय विकास में योगदान:
- FFW के अंतर्गत कार्यस्थल पर सड़क निर्माण, तालाब, सिंचाई और अन्य ग्रामीण विकास परियोजनाएँ संचालित की गई।
- गरीबी और भूखमरी से निपटना:
- कार्यक्रम का उद्देश्य था गरीबों को अर्थव्यवस्था में सहभागी बनाना और भोजन सुरक्षा प्रदान करना।
अतिरिक्त जानकारी:
- यह योजना TPDS और ICDS के साथ समन्वित रूप से गरीबी उन्मूलन के लिए लागू की गई थी।
- आज भी Food for Work मॉडल कई ग्रामीण विकास और रोजगार योजनाओं में प्रेरणा के रूप में उपयोग किया जाता है।
Food for Work (FFW) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था गरीबों को रोजगार देकर आवश्यक अनाज उपलब्ध कराना, जिससे गरीबी और भुखमरी दोनों से निपटा जा सके।
41. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के तहत कितनी ग्रामीण और शहरी जनसंख्या को योग्य परिवार में वर्गीकृत किया गया है?
A. 50% ग्रामीण, 50% शहरी
B. 60% ग्रामीण, 60% शहरी
C. 75% ग्रामीण, 50% शहरी
D. 100% ग्रामीण, 75% शहरी
उत्तर: C. 75% ग्रामीण, 50% शहरी
व्याख्या:
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act – NFSA), 2013 भारत में खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार बनाने वाला महत्वपूर्ण कानून है।मुख्य बिंदु:
- लक्षित जनसंख्या:
- ग्रामीण क्षेत्रों: 75% ग्रामीण जनसंख्या को योग्य परिवारों (eligible households) में शामिल किया गया।
- शहरी क्षेत्रों: 50% शहरी जनसंख्या को योग्य परिवारों में शामिल किया गया।
- उद्देश्य:
- पात्र परिवारों को सस्ती दरों पर अनाज और पोषण सुरक्षा प्रदान करना।
- गरीबी रेखा से नीचे और कमजोर वर्गों के खाद्य और पोषण अधिकारों को सुनिश्चित करना।
- लाभार्थी:
- अंत्योदय परिवार (AAY) – सबसे गरीब परिवारों को अतिरिक्त लाभ।
- Priority Households (PHH) – प्राथमिकता वाले गरीब परिवार।
- अनाज वितरण:
- पात्र परिवारों को गेहूँ या चावल 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
अतिरिक्त जानकारी:
- NFSA, 2013 ने खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार दिया, जिससे सरकार के पास लक्षित वितरण और निगरानी प्रणाली स्थापित करना अनिवार्य हुआ।
- यह अधिनियम PDS, AAY और PHH प्रणाली के तहत गरीबों को लाभ पहुंचाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
NFSA 2013 के तहत 75% ग्रामीण और 50% शहरी जनसंख्या को योग्य परिवार में वर्गीकृत किया गया, ताकि उन्हें सस्ती दर पर खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
42. संशोधित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (RPDS) कब शुरू की गई थी और इसका लक्ष्य क्या था?
A. 1992, दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में PDS लाभ पहुँचाना
B. 1997, सभी क्षेत्रों में गरीबों को लक्षित करना
C. 2000, अंत्योदय अन्न योजना लागू करना
D. 2013, NFSA लागू करना
उत्तर: A. 1992, दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में PDS लाभ पहुँचाना
व्याख्या:
RPDS (Revamped Public Distribution System) भारत सरकार द्वारा 1992 में शुरू किया गया।मुख्य उद्देश्य:
- पिछड़े और दूर-दराज क्षेत्रों में PDS का लाभ पहुँचाना:
- पिछड़े और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में राशन और अन्य खाद्य वस्तुएँ उपलब्ध कराना।
- गरीबों तक सस्ती खाद्य वस्तुएँ पहुँचाना:
- BPL और AAY परिवारों को प्राथमिकता देना।
- PDS प्रणाली का समग्र सुधार:
- वितरण में दक्षता बढ़ाना और भ्रष्टाचार कम करना।
अतिरिक्त जानकारी:
- RPDS के बाद, 1997 में Targeted PDS (TPDS) लागू किया गया, जिसमें लाभार्थियों को गरीबी रेखा के आधार पर लक्षित किया गया।
- RPDS ने PDS के कवरेज और प्रभावशीलता को बढ़ाया और ग्रामीण, पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया।
RPDS 1992 का लक्ष्य था दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों को पहुँचाना, ताकि गरीबों को सस्ती दर पर खाद्य वस्तुएँ और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
43. TPDS (Targeted Public Distribution System) कब शुरू हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. 1992, सभी लोगों को समान अनाज वितरण
B. 1997, निर्धनों और गैर-निर्धनों के लिए विभेदक मूल्य नीति अपनाना
C. 2000, वरिष्ठ नागरिकों को अनाज उपलब्ध कराना
D. 2013, पूरे देश में NFSA लागू करना
उत्तर: B. 1997, निर्धनों और गैर-निर्धनों के लिए विभेदक मूल्य नीति अपनाना
व्याख्या:
TPDS (Targeted Public Distribution System) भारत में 1997 में लागू किया गया।मुख्य उद्देश्य और कार्य:
- लक्षित वितरण:
- गरीब परिवारों (BPL – Below Poverty Line) और अन्य परिवारों (APL – Above Poverty Line) के लिए भिन्न दरों पर अनाज और खाद्य वस्तुएँ उपलब्ध कराना।
- विभेदक मूल्य नीति (Differential Pricing):
- BPL परिवारों को सस्ती दर पर अनाज।
- APL परिवारों को बाजार मूल्य के करीब दर पर अनाज।
- गरीबी और खाद्य सुरक्षा:
- TPDS का उद्देश्य गरीबों तक खाद्य सुरक्षा पहुँचाना और PDS प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना था।
- पूर्व RPDS का सुधार:
- RPDS (1992) में लाभ पहुँचना था, लेकिन TPDS ने इसे गरीबी रेखा आधारित लक्षित वितरण के रूप में व्यवस्थित किया।
अतिरिक्त जानकारी:
- TPDS के तहत राज्यों को लाभार्थियों की सूची बनाने और राशन वितरण करने का अधिकार दिया गया।
- यह योजना आज भी PDS का आधार और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की मुख्य प्रणाली है।
TPDS (1997) का मुख्य उद्देश्य था गरीब और गैर-गरीब परिवारों के लिए अलग-अलग कीमत पर अनाज वितरण सुनिश्चित करना, जिससे PDS प्रणाली अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बन सके।
44. अंत्योदय अन्न योजना किसके लिए लक्षित है?
A. निर्धनों में सबसे निर्धन
B. सभी गरीब परिवार
C. सभी ग्रामीण परिवार
D. केवल शहरी गरीब
उत्तर: A. निर्धनों में सबसे निर्धन
व्याख्या:
अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana – AAY) भारत सरकार द्वारा 2002 में शुरू की गई थी।मुख्य उद्देश्य और लाभार्थी:
- लक्षित वर्ग:
- सबसे निर्धन और अत्यंत गरीब परिवार (Poorest of the Poor) जो गरीबी रेखा से बहुत नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
- खाद्य सुरक्षा:
- लाभार्थियों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है।
- प्रति परिवार प्रति माह 35 किग्रा अनाज — गेहूँ ₹2/किग्रा और चावल ₹3/किग्रा।
- सामाजिक न्याय:
- योजना का उद्देश्य गरीबी और भुखमरी के चक्र को तोड़ना और कमजोर वर्ग के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- कार्यस्थल और वितरण:
- राशन दुकानों (Fair Price Shops) के माध्यम से अनाज वितरण।
- NFSA 2013 के तहत भी AAY परिवार प्राथमिक लाभार्थी होते हैं।
अतिरिक्त जानकारी:
- AAY परिवारों को अनाज के अतिरिक्त पोषण संबंधी लाभ (जैसे आयरन, विटामिन आदि) भी राज्य सरकारों द्वारा प्रदान किए जा सकते हैं।
- यह योजना Targeted PDS (TPDS) का मुख्य हिस्सा है।
अंत्योदय अन्न योजना (AAY, 2002) का लक्ष्य निर्धनों में सबसे निर्धन परिवारों को सस्ते दर पर आवश्यक अनाज उपलब्ध कराना है।
45. अन्नपूर्णा योजना का लक्षित समूह कौन है?
A. निर्धनों में सबसे निर्धन
B. सभी निर्धन परिवार
C. दीन वरिष्ठ नागरिक
D. सभी ग्रामीण बच्चे
उत्तर: C. दीन वरिष्ठ नागरिक
व्याख्या:
अन्नपूर्णा योजना (Annapurna Scheme) भारत सरकार द्वारा 2000 में शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य है गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को भोजन की सुरक्षा प्रदान करना।1. लक्षित समूह:
- इस योजना के तहत लाभार्थी 65 वर्ष और उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिक होते हैं।
- ये बुजुर्ग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके पास पेंशन या स्थिर आय नहीं है।
2. खाद्य सुरक्षा:
- लाभार्थियों को मुफ्त या सस्ते दर पर अनाज प्रदान किया जाता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि बुजुर्गों को भूखमरी या पोषण की कमी न हो।
3. वितरण प्रणाली:
- अनाज वितरण स्थानीय राशन दुकानों (PDS) या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित केंद्रों के माध्यम से किया जाता है।
4. सामाजिक न्याय और गरिमा:
- योजना न केवल भूख मिटाने का माध्यम है, बल्कि गरीब वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन और पोषण की सुरक्षा देती है।
- यह TPDS या अंत्योदय योजनाओं से अलग है, क्योंकि यह विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए लक्षित है।
5. अतिरिक्त जानकारी:
- NFSA 2013 में अन्नपूर्णा योजना शामिल नहीं है, लेकिन राज्य स्तर पर इसे लागू किया जा सकता है।
- यह योजना गरीब वरिष्ठ नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने और भोजन सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अन्नपूर्णा योजना का मुख्य उद्देश्य है गरीब और दीन वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त या सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराना, जिससे उनकी खाद्य सुरक्षा और जीवन स्तर सुनिश्चित हो सके।
46. TPDS में BPL और APL के गेहूँ और चावल की कीमतों में मुख्य अंतर क्या है?
A. BPL अधिक महंगा, APL सस्ता
B. APL अधिक महंगा, BPL सस्ता
C. दोनों की कीमत समान
D. BPL मुफ्त, APL बाजार मूल्य
उत्तर: B. APL अधिक महंगा, BPL सस्ता
व्याख्या:
TPDS (Targeted Public Distribution System) भारत में 1997 से लागू है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीबों तक खाद्य सुरक्षा पहुँचाना और अनाज वितरण में न्यायसंगत मूल्य नीति अपनाना है।
- BPL परिवार (Below Poverty Line):
- यह योजना गरीब और निर्धन परिवारों को लक्षित करती है।
- BPL परिवारों को सस्ती दर पर अनाज (गेहूँ और चावल) उपलब्ध कराया जाता है।
- उदाहरण: गेहूँ ₹2/किग्रा और चावल ₹3/किग्रा (राज्य के अनुसार अलग हो सकता है)।
- APL परिवार (Above Poverty Line):
- ये परिवार गरीबी रेखा से ऊपर हैं और आर्थिक रूप से कम कमजोर हैं।
- इन्हें बाजार कीमत के करीब दर पर अनाज मिलता है, जो BPL से अधिक महंगा होता है।
- मुख्य अंतर:
- मूल उद्देश्य: निर्धनों को सस्ते अनाज के माध्यम से खाद्य सुरक्षा देना।
- समान कीमत नहीं होती: BPL को सस्ता, APL को महंगा।
- भूख और पोषण सुरक्षा: BPL परिवारों के लिए प्राथमिकता।
- अतिरिक्त जानकारी:
- TPDS में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार सबसे गरीब माने जाते हैं और उन्हें BPL से भी अधिक सस्ते दर पर अनाज मिलता है।
- यह विभेदक मूल्य नीति (Differential Pricing) गरीबी आधारित लक्षित वितरण की नींव है।
TPDS में BPL परिवारों को गेहूँ और चावल सस्ते दर पर, जबकि APL परिवारों को अधिक महंगे दर पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
यह विभेदक मूल्य नीति गरीबी आधारित लक्षित वितरण सुनिश्चित करती है।
47. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत प्रत्येक योग्य परिवार को प्रति व्यक्ति कितनी मात्रा अनाज प्रति माह मिलती है?
A. 2 कि.
B. 5 कि.
C. 10 कि.
D. 35 कि.
उत्तर: B. 5 कि. प्रति व्यक्ति प्रति माह
व्याख्या:
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 भारत में खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार बनाने वाला कानून है।
- लाभार्थी:
- अधिनियम के तहत पात्र परिवार (Eligible Households) को सस्ती दर पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है।
- लाभार्थी वर्ग: अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार + प्राथमिक लाभार्थी (Priority Households – PHH)।
- अनाज वितरण:
- प्रत्येक पात्र व्यक्ति को 5 किलो अनाज प्रति माह (गेहूँ या चावल) दिया जाता है।
- AAY परिवारों के लिए अतिरिक्त 35 किलो प्रति माह परिवार स्तर पर उपलब्ध होता है।
- उद्देश्य:
- गरीबी और भूखमरी से प्रभावित वर्गों को नियमित, पर्याप्त और सस्ती खाद्य सामग्री सुनिश्चित करना।
- पोषण सुरक्षा, विशेषकर बच्चों और महिलाओं के लिए, सुनिश्चित करना।
- सिस्टम:
- राशन वितरण PDS (Public Distribution System) के माध्यम से किया जाता है।
- राज्य और केंद्र मिलकर लाभार्थियों की पहचान और वितरण की निगरानी करते हैं।
अतिरिक्त जानकारी:
- NFSA के तहत गेहूँ, चावल और चना/दाल शामिल हो सकते हैं।
- यह वितरण योजना Targeted PDS (TPDS) के आधार पर संचालित होती है।
- योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
NFSA 2013 के तहत प्रत्येक पात्र व्यक्ति को 5 किलो अनाज प्रति माह सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
यह मात्रा गरीब और कमजोर वर्ग की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित की गई है।
48. न्यूनतम बफ़र स्टॉक (Minimum Buffer Stock) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. किसानों को अनाज की बिक्री रोकना
B. अकाल और भुखमरी की स्थिति में खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित करना
C. अनाज का निर्यात बढ़ाना
D. गेहूँ और चावल की कीमत बढ़ाना
उत्तर: B. अकाल और भुखमरी की स्थिति में खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित करना
व्याख्या:
बफ़र स्टॉक (Buffer Stock) भारत में Food Corporation of India (FCI) और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा रखा जाता है।
- मुख्य उद्देश्य:
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: जब किसी क्षेत्र में अकाल या प्राकृतिक आपदा के कारण अनाज की कमी हो, तो बफ़र स्टॉक से जरूरतमंदों को पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराया जाता है।
- कीमतों में स्थिरता: बफ़र स्टॉक से बाजार में अनाज की अचानक कमी और महंगाई को रोकने में मदद मिलती है।
- प्रकार और कार्य:
- न्यूनतम बफ़र स्टॉक (Minimum Buffer Stock):
- यह सरकार द्वारा तय न्यूनतम मात्रा में रखा जाता है, ताकि किसी भी समय आपातकालीन जरूरतों को पूरा किया जा सके।
- अतिरिक्त बफ़र स्टॉक (Buffer beyond minimum) मौसम, उत्पादन और मांग के आधार पर रखा जाता है।
- महत्व:
- गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए अनाज सुनिश्चित करना।
- प्राकृतिक आपदाओं या उत्पादन में गिरावट के दौरान भुखमरी और अकाल की स्थिति को रोकना।
- अतिरिक्त जानकारी:
- बफ़र स्टॉक में मुख्यतः गेहूँ और चावल रखा जाता है।
- यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के संचालन में भी सहायक होता है।
न्यूनतम बफ़र स्टॉक का मुख्य उद्देश्य है अकाल या भुखमरी की स्थिति में खाद्य उपलब्धता बनाए रखना और गरीबों तक भोजन पहुँचाना।
49. एफ.सी.आई. का न्यूनतम बफ़र स्टॉक प्रतिमान किस प्रकार निर्धारित किया जाता है?
A. किसान की आय और उत्पादन पर
B. राष्ट्रीय खाद्य नीति, खपत और आपूर्ति पर
C. केवल बाजार मांग पर
D. केवल आयात पर
उत्तर: B. राष्ट्रीय खाद्य नीति, खपत और आपूर्ति पर
व्याख्या:
एफ.सी.आई. (Food Corporation of India) देश में खाद्य सुरक्षा और अनाज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बफ़र स्टॉक रखता है।
- न्यूनतम बफ़र स्टॉक का निर्धारण:
- यह केवल किसान की आय या बाजार मांग पर आधारित नहीं होता।
- स्टॉक की मात्रा तय करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य नीति, खपत, उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।
- मुख्य कारक:
- राष्ट्रीय खाद्य नीति (National Food Policy): सरकार की खाद्य सुरक्षा दिशा और लक्ष्य।
- खपत (Consumption): घरेलू जरूरतों और PDS के लिए आवश्यक मात्रा।
- आपूर्ति (Supply): मौजूदा उत्पादन, पिछले स्टॉक और संभावित आपदा या अकाल की स्थिति।
- उद्देश्य:
- अकाल, प्राकृतिक आपदा, या उत्पादन में कमी की स्थिति में गरीबों को अनाज उपलब्ध कराना।
- मंडी और बाज़ार की कीमतों को स्थिर रखना।
- अतिरिक्त जानकारी:
- न्यूनतम बफ़र स्टॉक में मुख्यतः गेहूँ और चावल रखा जाता है।
- यह PDS और अन्य सरकारी खाद्य सुरक्षा योजनाओं के लिए आधार तैयार करता है।
एफ.सी.आई. का न्यूनतम बफ़र स्टॉक प्रतिमान तय किया जाता है राष्ट्रीय खाद्य नीति, देश की खपत और उपलब्ध आपूर्ति की स्थिति के आधार पर, ताकि भूखमरी और अकाल की स्थिति में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
50. अंत्योदय अन्न योजना (2000) में पात्र परिवारों को प्रति किलोग्राम गेहूँ और चावल की दर क्या थी?
A. गेहूँ ₹2, चावल ₹3
B. गेहूँ ₹5, चावल ₹5
C. गेहूँ ₹3, चावल ₹2
D. गेहूँ ₹4, चावल ₹4
उत्तर: A. गेहूँ ₹2, चावल ₹3
व्याख्या:
अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana – AAY) भारत सरकार द्वारा 2000 में शुरू की गई थी।
- लक्षित परिवार:
- योजना का उद्देश्य गरीब और अत्यंत निर्धन परिवारों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराना है।
- ये परिवार BPL से भी अधिक कमजोर वर्ग में आते हैं।
- अनाज की दर:
- गेहूँ: ₹2 प्रति किलोग्राम
- चावल: ₹3 प्रति किलोग्राम
- यह दर बहुत कम है, ताकि गरीब परिवारों की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- अनाज की मात्रा:
- प्रत्येक परिवार को प्रति माह 35 किलोग्राम अनाज दिया जाता है।
- इसका वितरण PDS (Ration Shops) के माध्यम से किया जाता है।
- महत्व और प्रभाव:
- यह योजना सबसे निर्धन वर्ग तक खाद्य सुरक्षा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- भूखमरी और पोषण संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करती है।
- अतिरिक्त जानकारी:
- यह AAY परिवारों के लिए अत्यधिक सब्सिडी वाली दर है।
- अन्य TPDS लाभार्थियों (BPL, APL) के लिए दर अलग होती है।
अंत्योदय अन्न योजना (2000) के तहत पात्र परिवारों को गेहूँ ₹2 और चावल ₹3 प्रति किलोग्राम दर पर उपलब्ध कराया जाता है, ताकि अत्यंत निर्धन वर्ग की खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित किया जा सके।
51. दिसंबर 2000 में अंत्योदय अन्न योजना में कितने परिवार शामिल थे?
A. 1 करोड़
B. 2 करोड़
C. 50 लाख
D. 5 करोड़
उत्तर: A. 1 करोड़
व्याख्या:
अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana – AAY) की शुरुआत 25 दिसंबर 2000 को भारत सरकार ने की थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य था — “गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले सबसे गरीब परिवारों (Poorest of the Poor)” को अत्यधिक रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना, ताकि कोई भी व्यक्ति भूख से न मरे।आरंभिक चरण (2000):
- योजना के पहले चरण में 1 करोड़ (10 मिलियन) BPL परिवारों को चुना गया था।
- इन परिवारों को प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया गया —
- गेहूँ ₹2 प्रति किग्रा
- चावल ₹3 प्रति किग्रा
- खाद्यान्न का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से किया गया।
विस्तार चरण:
- 2003 में 50 लाख अतिरिक्त BPL परिवार जोड़े गए।
- 2004 में फिर 50 लाख परिवार और जोड़े गए।
- इस प्रकार योजना के अंतर्गत कुल 2 करोड़ परिवार आ गए।
- आगे के वर्षों में यह संख्या लगभग 2.5 करोड़ परिवारों तक पहुँच गई।
योजना की मुख्य विशेषताएँ:
- लक्षित समूह – “Poorest of the Poor” BPL परिवार
- खाद्यान्न वितरण – राज्य सरकारों द्वारा PDS के माध्यम से
- केंद्रीय प्रायोजक योजना – Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution
- मूल उद्देश्य – खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और भुखमरी को समाप्त करना
दिसंबर 2000 में जब अंत्योदय अन्न योजना आरंभ की गई थी, तब 1 करोड़ BPL परिवारों को शामिल किया गया था।
52. सहायक (Subsidy) का अर्थ क्या है?
A. सरकार द्वारा उत्पादकों को बाजार कीमत के अंतर की पूर्ति के लिए भुगतान
B. उत्पादकों को कर देना
C. गरीबों से ज्यादा पैसा लेना
D. अनाज का निर्यात बढ़ाना
उत्तर: A. सरकार द्वारा उत्पादकों को बाजार कीमत के अंतर की पूर्ति के लिए भुगतान
व्याख्या:
सहायिकी (Subsidy) वह आर्थिक सहायता है जो सरकार उत्पादकों या उपभोक्ताओं को देती है ताकि किसी वस्तु या सेवा की कीमत कृत्रिम रूप से कम रखी जा सके या उत्पादन को प्रोत्साहन मिले।भारत में, खाद्य सहायता (food subsidy) का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि —
- किसान (producers) को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले (यानी उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य — MSP)
- उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर अनाज (चावल, गेहूँ आदि) उपलब्ध हो सके (Public Distribution System – PDS के माध्यम से)
इस प्रकार, जब सरकार किसानों से MSP पर अनाज खरीदती है और फिर उसे गरीबों को रियायती दर पर बेचती है, तो दोनों कीमतों के बीच का जो अंतर होता है — वही “सहायिकी (Subsidy)” कहलाता है।इसका मुख्य उद्देश्य है —
- किसानों की आय को स्थिर बनाए रखना,
- गरीब उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना,
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) को सुनिश्चित करना।
उदाहरण:
मान लीजिए सरकार गेहूँ का MSP ₹22/kg तय करती है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को वही गेहूँ ₹2/kg में देती है।
तो इस ₹20/kg के अंतर की भरपाई सरकार करती है — यही Subsidy (सहायिकी) है।सहायिकी का अर्थ है — सरकार द्वारा उत्पादकों को बाजार मूल्य और उपभोक्ता मूल्य के अंतर की पूर्ति के लिए आर्थिक सहायता देना, ताकि किसान को उचित मूल्य और उपभोक्ता को सस्ती दर पर वस्तुएँ मिल सकें।
इससे उत्पादन भी बढ़ता है और खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
53. निम्न में से कौन सा कथन सही है?
A. बफ़र स्टॉक केवल गेहूँ के लिए बनाए जाते हैं।
B. बफ़र स्टॉक अकाल और विपरीत मौसम में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है।
C. अंत्योदय अन्न योजना केवल शहरों में लागू है।
D. सहायक से उपभोक्ता की कीमतें बढ़ती हैं।
उत्तर: B. बफ़र स्टॉक अकाल और विपरीत मौसम में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है।
व्याख्या:
बफ़र स्टॉक (Buffer Stock) का अर्थ है —
सरकार द्वारा आवश्यक खाद्यान्न (जैसे गेहूँ, चावल आदि) का एक निश्चित भंडार, जिसे भविष्य की आवश्यकता, आपात स्थिति या अकाल जैसी परिस्थितियों में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है।भारत में यह कार्य भारतीय खाद्य निगम (FCI – Food Corporation of India) द्वारा किया जाता है।
सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज खरीदती है और इन खाद्यान्नों को बफ़र स्टॉक के रूप में संग्रहित करती है।बफ़र स्टॉक की भूमिका (Role of Buffer Stock):
- अकाल या विपरीत मौसम में खाद्य सुरक्षा (Food Security during Crises):
जब किसी कारणवश फसल उत्पादन घट जाता है या प्राकृतिक आपदा होती है, तो सरकार बफ़र स्टॉक से खाद्यान्न निकालकर जनता को उपलब्ध कराती है।
इससे देश में खाद्य संकट नहीं होता।- मूल्य स्थिरीकरण (Price Stabilization):
जब बाजार में अनाज की कमी से कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार बफ़र स्टॉक से अनाज जारी कर कीमतों को स्थिर रखती है।- गरीबों की सहायता (Support to Poor):
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीब परिवारों को रियायती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है, जिसके लिए बफ़र स्टॉक का उपयोग किया जाता है।उदाहरण:
मान लीजिए किसी वर्ष सूखा पड़ने के कारण गेहूँ का उत्पादन घट गया। तब सरकार अपने गोदामों (बफ़र स्टॉक) से अनाज निकालकर बाज़ार और PDS दुकानों में उपलब्ध कराती है, ताकि कोई भूखा न रहे और कीमतें नियंत्रित रहें।
बफ़र स्टॉक सरकार की खाद्य सुरक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह अकाल, विपरीत मौसम या प्राकृतिक आपदाओं के समय देश में खाद्य आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
54. जुलाई 2017 के अनुसार, FCI के केंद्रीय भंडार में अनाज की अधिकता (overstocking) का मुख्य कारण क्या था?
A. सड़ना और चूहों द्वारा नुकसान
B. बफ़र स्टॉक बनाए रखना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सपोर्ट करना
C. सिर्फ निर्यात के लिए
D. किसानों के दबाव से
उत्तर: B. बफ़र स्टॉक बनाए रखना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सपोर्ट करना
व्याख्या:
भारतीय खाद्य निगम (FCI) का मुख्य उद्देश्य देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जुलाई 2017 तक FCI के गोदामों में अनाज की अधिकता इसलिए थी क्योंकि:
- बफ़र स्टॉक बनाए रखना:
- सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ और चावल खरीदती है।
- इसे भविष्य की आवश्यकता और आकस्मिक परिस्थितियों (जैसे अकाल या विपरीत मौसम) के लिए भंडारित किया जाता है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए स्टॉक सुनिश्चित करना:
- गरीब परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए हमेशा पर्याप्त स्टॉक होना आवश्यक है।
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) जैसी योजनाओं में भी यही स्टॉक उपयोग होता है।
- अनाज का अधिक भंडारण किसी नुकसान या निर्यात के कारण नहीं:
- सड़ना और चूहों द्वारा नुकसान परिणाम है, कारण नहीं।
- FCI का मुख्य लक्ष्य घरेलू खाद्य सुरक्षा है, निर्यात प्राथमिक उद्देश्य नहीं।
FCI के केंद्रीय गोदाम में अनाज की अधिकता का मुख्य कारण है — बफ़र स्टॉक बनाए रखना और PDS तथा आकस्मिक खाद्य जरूरतों के लिए पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना।
55. अंत्योदय अन्न योजना कब शुरू की गई थी?
A. 1997
B. 1992
C. 2013
D. 2000
उत्तर: D. 2000
व्याख्या:
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) की शुरुआत 25 दिसंबर 2000 को भारत सरकार द्वारा की गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य था — गरीब और अत्यंत गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।मुख्य विशेषताएँ:
- लक्षित समूह: सबसे गरीब BPL परिवार (Poorest of the Poor)
- खाद्यान्न वितरण:
- प्रति परिवार 25–35 किलो गेहूँ या चावल प्रति माह
- रियायती दरें: गेहूँ ₹2/kg, चावल ₹3/kg
- वितरण माध्यम: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
- उद्देश्य:
- गरीब परिवारों को सस्ता और पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना
- भूख और कुपोषण कम करना
विस्तार:
- योजना के आरंभिक चरण में 1 करोड़ BPL परिवार शामिल किए गए थे।
- बाद में इस संख्या को 2 करोड़ परिवारों तक बढ़ाया गया।
अंत्योदय अन्न योजना दिसंबर 2000 में शुरू की गई, और इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना था।
56. न्यूनतम समर्थित कीमत (MSP) का उद्देश्य क्या है?
A. किसानों को अनाज बेचना महंगा बनाना
B. गरीबों के लिए अनाज की उपलब्धता कम करना
C. FCI भंडार को खाली रखना
D. किसानों को सुनिश्चित आय प्रदान करना
उत्तर: D. किसानों को सुनिश्चित आय प्रदान करना
व्याख्या:
MSP (Minimum Support Price) भारत सरकार द्वारा किसानों की आर्थिक सुरक्षा और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए घोषित की जाने वाली न्यूनतम कीमत है।मुख्य उद्देश्य:
- किसानों को सुनिश्चित आय देना:
- MSP किसानों को उनकी फसल के लिए पूर्व घोषित न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करता है।
- इससे बाजार में कीमतें गिरने पर भी किसान आर्थिक नुकसान से बचते हैं।
- कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करना:
- किसान यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा।
- यह किसानों को कृषि उत्पादन और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।
- खाद्य सुरक्षा में योगदान:
- MSP से सरकार FCI (Food Corporation of India) के माध्यम से अनाज खरीदती है।
- यह अनाज बाद में PDS और सामाजिक कल्याण योजनाओं में उपयोग होता है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) किसानों को उनकी फसल के लिए पूर्व घोषित न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करता है, जिससे आय सुरक्षा और उत्पादन प्रोत्साहन मिलता है।
57. यदि बफ़र स्टॉक कम हो जाए तो कौन-सी समस्या उत्पन्न हो सकती है?
A. अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं
B. निर्धन परिवारों के लिए PDS प्रभावित होगा
C. अकाल की स्थिति में राहत देना कठिन होगा
D. सभी विकल्प सही हैं
उत्तर: D. सभी विकल्प सही हैं
व्याख्या:
बफ़र स्टॉक (Buffer Stock) वह अनाज का भंडार है जिसे सरकार आपातकालीन परिस्थितियों, विपरीत मौसम या आकस्मिक खाद्य जरूरतों के लिए सुरक्षित रखती है।यदि बफ़र स्टॉक कम हो जाए, तो निम्न समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:
- अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं (Option A):
- जब स्टॉक कम होता है और मांग अधिक होती है, तो बाज़ार में अनाज की कीमतें बढ़ जाती हैं।
- इससे सामान्य जनता और गरीब वर्ग प्रभावित होता है।
- निर्धन परिवारों के लिए PDS प्रभावित होगा (Option B):
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए आवश्यक स्टॉक उपलब्ध नहीं होगा।
- गरीब और अत्यंत गरीब परिवारों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराने में समस्या होगी।
- अकाल की स्थिति में राहत देना कठिन होगा (Option C):
- बफ़र स्टॉक कम होने से प्राकृतिक आपदा या अकाल के समय राहत सामग्री उपलब्ध कराने में कठिनाई होगी।
इसलिए सभी विकल्प सही हैं, और बफ़र स्टॉक की कमी खाद्य सुरक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।बफ़र स्टॉक की कमी से:
- अनाज की कीमतें बढ़ती हैं,
- निर्धन परिवारों के लिए PDS प्रभावित होता है, और
- अकाल या आपातकालीन परिस्थितियों में राहत देना कठिन हो जाता है।
58. योजना और वर्ष/लक्षित समूह मिलाएँ:
| योजनाएँ | वर्ष/लक्षित समूह |
|---|---|
| A. अंत्योदय अन्न योजना | 1. दिसंबर 2000 – BPL परिवार |
| B. अन्नपूर्णा योजना | 2. 2000 – दीन वरिष्ठ नागरिक |
| C. TPDS (लक्षित PDS) | 3. 1997 – निर्धन और BPL |
A. A→1, B→2, C→3
B. A→2, B→1, C→3
C. A→3, B→1, C→2
D. A→1, B→3, C→2
उत्तर: A. A→1, B→2, C→3
व्याख्या:
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY) → दिसंबर 2000 में शुरू हुई, लक्षित समूह BPL परिवार।
- अन्नपूर्णा योजना (Annapurna Scheme) → 2000 में शुरू हुई, लक्षित समूह दीन वरिष्ठ नागरिक।
- TPDS (Targeted Public Distribution System) → 1997 में शुरू हुई, लक्षित समूह निर्धन और BPL परिवार।
59. (कथन-कारण)
कथन: भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफ़र स्टॉक की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना आवश्यक है।
कारण: बफ़र स्टॉक की कमी होने पर अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं और निर्धन परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
A. कथन सही है और कारण सही है, तथा कारण कथन का सही कारण है।
B. कथन सही है और कारण सही है, लेकिन कारण कथन का कारण नहीं है।
C. कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
D. कथन गलत है लेकिन कारण सही है।
उत्तर: A. कथन सही है और कारण सही है, तथा कारण कथन का सही कारण है।
व्याख्या:
- कथन का विश्लेषण:
भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफ़र स्टॉक का पर्याप्त भंडारण आवश्यक है।
यह भंडार अकाल, विपरीत मौसम या आकस्मिक आपातकाल की स्थिति में खाद्यान्न उपलब्ध कराने में मदद करता है।- कारण का विश्लेषण:
यदि बफ़र स्टॉक कम हो जाए, तो अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं और निर्धन परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) प्रभावित हो सकती है।- कथन और कारण का संबंध:
कारण पूरी तरह से कथन का सही कारण है।
पर्याप्त बफ़र स्टॉक बनाए रखना इसलिए आवश्यक है क्योंकि इसकी कमी कीमतों और वितरण प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
60. 1 जनवरी 2023 के अनुसार केंद्रीय पूल में गेहूँ और चावल का भंडार क्रमशः कितना था?
A. 100 लाख टन गेहूँ, 50 लाख टन चावल
B. 200 लाख टन गेहूँ, 150 लाख टन चावल
C. 159 लाख टन गेहूँ, 104 लाख टन चावल
D. 120 लाख टन गेहूँ, 80 लाख टन चावल
उत्तर: C. 159 लाख टन गेहूँ, 104 लाख टन चावल
व्याख्या:
- केंद्रीय पूल भारत में खाद्य सुरक्षा योजनाओं (NFSA और PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए खाद्यान्न भंडारण का मुख्य स्रोत है।
- 12 दिसंबर 2022 तक केंद्रीय पूल में 182 लाख टन गेहूँ उपलब्ध था।
- 1 जनवरी 2023 तक अनुमानित स्टॉक 159 लाख टन गेहूँ था, जो न्यूनतम बफ़र स्टॉक आवश्यकता 138 लाख टन से अधिक है।
- चावल का स्टॉक लगभग 104 लाख टन था।
- इस भंडार से भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम और आपातकालीन जरूरतें पूरी हो सकती थीं।
61. न्यूनतम समर्थित कीमत (MSP) में वृद्धि ने किन फसलों के उत्पादन को बढ़ाया?
A. मोटे अनाज
B. धान और गेहूँ
C. ज्वार और बाजरा
D. सब्ज़ियाँ
उत्तर: B. धान और गेहूँ
व्याख्या:
- MSP (Minimum Support Price) का उद्देश्य किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
- पिछले वर्षों में MSP में वृद्धि मुख्य रूप से धान और गेहूँ पर हुई, जिससे इन फसलों की खेती लाभकारी हो गई।
- इसका परिणाम यह हुआ कि किसान धान और गेहूँ की ओर झुके, जबकि मोटे अनाज (जैसे ज्वार, बाजरा, रागी) की खेती अपेक्षाकृत कम हुई।
- यह नीति हरित क्रांति के समय भी देखी गई थी, जब उत्तर भारत में गेहूँ और धान की पैदावार बढ़ी।
62. यदि MSP अत्यधिक बढ़ाई जाए तो क्या प्रभाव पड़ सकता है?
A. किसानों को अधिक आय प्राप्त होगी
B. मोटे अनाज की खेती कम हो सकती है
C. FCI की भंडारण लागत बढ़ जाएगी
D. सभी विकल्प सही हैं
उत्तर: D. सभी विकल्प सही हैं
व्याख्या:
- किसानों को अधिक आय प्राप्त होगी
- MSP बढ़ने से गेहूँ और धान की बिक्री पर किसान को अधिक लाभ मिलेगा।
- यह छोटे और मध्यम किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करता है।
- मोटे अनाज की खेती कम हो सकती है
- यदि गेहूँ और धान की MSP बहुत अधिक है, तो किसान मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी) की तुलना में गेहूँ और धान की ओर अधिक झुकाव दिखाएंगे।
- इससे मोटे अनाज की खेती कम हो सकती है।
- FCI की भंडारण लागत बढ़ जाएगी
- अधिक MSP पर ज्यादा खरीद होने से केंद्रीय भंडार (Central Pool) में स्टॉक बढ़ेगा।
- इससे भंडारण और परिवहन लागत, रख-रखाव का खर्च, और संभावित बर्बादी बढ़ जाएगी।
अत्यधिक MSP से किसानों को लाभ तो मिलेगा, लेकिन मोटे अनाज की खेती और सरकारी भंडारण पर दबाव बढ़ेगा। इसलिए इस मामले में संतुलित MSP नीति आवश्यक है।
63. निम्नलिखित राज्यों और उनके MSP/कृषि प्रभाव को मिलाएँ:
| राज्य | प्रभाव |
|---|---|
| A. पंजाब | 1. धान और गेहूँ की खेती में वृद्धि |
| B. हरियाणा | 2. मोटे अनाज कम उत्पादन |
| C. पश्चिम बंगाल | 3. सिंचाई दबाव और जल स्तर गिरावट |
A. 1, 2, 3
B. A → 1, B → 1,2, C → 3
C. A → 2, B → 1, C → 3
D. A → 1, B → 2, C → 1
उत्तर: B. A → 1, B → 1,2, C → 3
व्याख्या:
- पंजाब : MSP और सरकारी खरीद के कारण गेहूँ और धान की पैदावार बढ़ी।
- हरियाणा : MSP पर आधारित गेहूँ और धान की पैदावार बढ़ी, जिससे मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) की खेती कम हुई।
- पश्चिम बंगाल : चावल की अधिक खेती और सिंचाई पर निर्भरता के कारण जल स्तर गिरावट और सिंचाई दबाव बढ़ा।
64. तमिलनाडु में राशन की अधिकांश दुकानों का संचालन कौन करता है?
A. निजी विक्रेता
B. सहकारी समितियाँ
C. राज्य सरकार
D. FCI
उत्तर: B. सहकारी समितियाँ
व्याख्या:
- PDS (Public Distribution System) में दुकानें:
- भारत में TPDS की राशन दुकानें केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से संचालित होती हैं।
- संचालन का तरीका राज्यों के अनुसार भिन्न होता है।
- तमिलनाडु का मॉडल:
- तमिलनाडु में राशन की अधिकांश दुकानों को Co-operative Societies (सहकारी समितियाँ) द्वारा संचालित किया जाता है।
- यह मॉडल धोखाधड़ी कम करने, भंडार की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में समान वितरण के लिए अपनाया गया है।
- अन्य विकल्प:
- निजी विक्रेता: कुछ राज्यों में PDS निजी विक्रेताओं के माध्यम से चलती है, लेकिन तमिलनाडु में नहीं।
- राज्य सरकार / FCI: राशन की आपूर्ति और भंडारण इन संस्थाओं द्वारा होती है, लेकिन डीलरशिप संचालन सहकारी समितियों के हाथ में होता है।
65. भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के दो प्रमुख घटक कौन से हैं?
A. न्यूनतम समर्थन मूल्य और PDS
B. बफ़र स्टॉक और PDS
C. अंत्योदय योजना और ICDS
D. कृषि उत्पादन और MSP
उत्तर: B. बफ़र स्टॉक और PDS
व्याख्या:
- खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य:
- सभी नागरिकों, विशेषकर गरीब और कमजोर वर्गों को पर्याप्त, सुरक्षित और पोषक तत्वों से युक्त भोजन सुनिश्चित करना।
- दो प्रमुख घटक:
A. बफ़र स्टॉक (Buffer Stock)B. PDS (Public Distribution System)
- केंद्रीय और राज्य सरकार द्वारा खाद्यान्न का संग्रह।उद्देश्य: आपातकाल, प्राकृतिक आपदा या उत्पादन कम होने की स्थिति में सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- Targeted PDS के माध्यम से गरीब और कमजोर वर्गों को सस्ते या मुफ्त अनाज उपलब्ध कराना।
- PDS सुनिश्चित करता है कि खाद्य सामग्री गरीबों तक पहुंचे।
66. महाराष्ट्र में ADS (Anaj Dhan/अनाज बैंक) कार्यक्रम क्यों शुरू किया गया?
A. गरीब किसानों को ऋण देने के लिए
B. सरकारी सब्सिडी बढ़ाने के लिए
C. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और NGO नेटवर्क के माध्यम से वितरण के लिए
D. केवल शहरी क्षेत्रों में
उत्तर: C. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और NGO नेटवर्क के माध्यम से वितरण के लिए
व्याख्या:
- ADS (Anaj Dhan / अनाज बैंक) कार्यक्रम का उद्देश्य:
- राज्य सरकार ने ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया।
- इसका मुख्य लक्ष्य गरीब और कमजोर वर्गों को भोजन उपलब्ध कराना है।
- NGO नेटवर्क का योगदान:
- स्थानीय NGOs और सामाजिक संगठनों के माध्यम से अनाज का वितरण किया जाता है।
- इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक राशन की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
67. यदि केवल APL (Above Poverty Line) परिवारों को ही TPDS में लाभ मिलता है, तो क्या असर होगा?
A. गरीबों को लाभ नहीं मिलेगा
B. खाद्य असुरक्षा बढ़ेगी
C. विपरीत आपदा में नुकसान
D. सभी सही
उत्तर: D. सभी सही
व्याख्या:
- APL और BPL परिवारों का अंतर:
- APL (Above Poverty Line): वे लोग जो गरीबी रेखा से ऊपर आते हैं।
- BPL (Below Poverty Line): वे लोग जो गरीबी रेखा के नीचे हैं और मुख्य रूप से TPDS के मुख्य लाभार्थी होते हैं।
- यदि केवल APL लाभार्थी हों:
- गरीब (BPL) परिवारों को लाभ नहीं मिलेगा।
- इससे खाद्य असुरक्षा बढ़ेगी, क्योंकि वे गरीब वर्ग पर्याप्त भोजन प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
- विपरीत परिस्थितियों (जैसे प्राकृतिक आपदा, फ्लड या सूखा) में सबसे कमजोर वर्ग को भोजन की कमी का सामना करना पड़ेगा।
TPDS का मूल उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग तक सस्ते अनाज की पहुँच सुनिश्चित करना है। यदि केवल APL को लाभ दिया जाए तो खाद्य सुरक्षा प्रणाली का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
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