गिग वर्कर्स (Gig workers) वो लोग होते हैं जो पारंपरिक नौकरी की बजाय छोटी अवधि के “gigs” या स्वतंत्र (freelance/contract-based) काम करते हैं — जैसे Ola/Uber ड्राइवर, Zomato/Swiggy डिलीवरी एजेंट्स, Urban Company के ब्यूटीशियन आदि।
Gig Workers कौन होते हैं?
- ओला/उबर ड्राइवर
- जोमैटो/स्विगी डिलीवरी एजेंट
- फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर/कंटेंट राइटर
- UrbanClap (अब Urban Company) के ब्यूटीशियन या टेक्नीशियन
- App-based ट्यूटर, कंसल्टेंट्स आदि
गिग इकॉनमी (Gig economy) आधुनिक श्रम व्यवस्था का एक ऐसा रूप है जिसमें लोग पारंपरिक नौकरियों की जगह अल्पकालिक और लचीले काम (gigs) करते हैं। भारत में यह व्यवस्था तेजी से फैल रही है, परंतु यह प्रणाली एक ओर लचीलापन (flexibility) देती है, तो दूसरी ओर गंभीर असुरक्षा (insecurity) का कारण बनती है।

नीति आयोग (2022) के अनुसार
- भारत में 2030 तक 23.5 मिलियन (2.35 करोड़) गिग वर्कर्स (Gig workers) हो सकते हैं।
- भारत में 7.7 मिलियन (77 लाख) गिग वर्कर्स थे (2020-21)
ज़्यादातर gig workers delivery services, transportation, personal care, tech freelancing में हैं।
लचीलापन (flexibility)
- गिग वर्कर्स को काम और समय चुनने की स्वतंत्रता होती है।
- वे एक साथ कई प्लेटफॉर्म्स पर काम कर सकते हैं, जिससे उन्हें आय बढ़ाने और कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है।
- विशेषकर युवाओं और महिलाओं के लिए यह एक आकर्षक विकल्प है।
असुरक्षा (insecurity)
- कोई निश्चित वेतन नहीं
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (जैसे PF, ESI) की अनुपस्थिति
- रोजगार की स्थिरता का अभाव
- एल्गोरिदम आधारित रेटिंग सिस्टम, जो कभी-कभी पक्षपाती होते हैं
- शिकायत निवारण की कोई सशक्त व्यवस्था नहीं

गिग वर्कर्स के लिए भारत सरकार की प्रमुख पहलें:
1.सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security 2020)
- यह सबसे बड़ी और प्रमुख पहल है।
- पहली बार “गिग वर्कर” और “प्लेटफ़ॉर्म वर्कर” को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया।
- गिग वर्कर्स के लिए विशेष सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की बात की गई।
- केंद्र और राज्य सरकारें इन योजनाओं को लागू कर सकती हैं — जैसे बीमा, मातृत्व लाभ, पेंशन आदि।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों से अंशदान (contribution) लेने का प्रावधान भी है।
2. ई-श्रम पोर्टल (e-SHRAM Portal)
- श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया।
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, जिनमें गिग वर्कर भी शामिल हैं, का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
- पंजीकरण के बाद श्रमिक को 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) मिलता है।
- इससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सकता है।
3. प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (PM-SYM)
- 18 से 40 वर्ष के असंगठित श्रमिक, जिनकी आय ₹15,000 प्रति माह से कम है, उनके लिए।
- 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3,000 प्रतिमाह की पेंशन।
- गिग वर्कर्स भी इस योजना में पात्र हो सकते हैं यदि वे मानदंड पूरे करते हैं।
4. डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों पर ज़िम्मेदारी
- सरकार गिग वर्कर्स के लिए काम कराने वाली कंपनियों जैसे Swiggy, Zomato, Ola, Uber आदि से CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) और सामाजिक सुरक्षा फंड में योगदान लेने की नीति बना रही है।
- भविष्य में इन्हें श्रम कानूनों के तहत न्यूनतम मजदूरी, बीमा, और सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ सकता है।
नीति आयोग (2022) के अनुसार, 2030 तक भारत में 2.35 करोड़ गिग श्रमिक होंगे। परंतु अभी तक न तो केंद्रीय स्तर पर कोई ठोस नीति है, और न ही प्रभावी क्रियान्वयन।
हालाँकि, राजस्थान गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट (2023) एक सकारात्मक पहल है। केंद्र सरकार द्वारा कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) में भी गिग वर्कर्स को शामिल किया गया है, परंतु ये अभी अमल में नहीं आए हैं।
गिग इकोनॉमी को टिकाऊ और न्यायपूर्ण बनाने के लिए जरूरी है कि लचीलेपन के साथ सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, पारदर्शिता और सशक्त शिकायत तंत्र को भी सुनिश्चित किया जाए।
सुधार हेतु सुझाव (Way Forward)
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन अनिवार्य किया जाए
- न्यूनतम मजदूरी की गारंटी
- शिकायत निवारण तंत्र को सशक्त बनाया जाए
- प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को अधिक ज़िम्मेदार बनाया जाए
- डेटा पारदर्शिता और एल्गोरिदम की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए
अभ्यास के प्रश्न
GS Paper 2 – Governance, Social Justice:
- “गिग इकॉनमी भारत में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न कर रही है, परंतु यह श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विवेचना कीजिए।”
- “गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता और सुरक्षा देने हेतु भारत सरकार की कौन-कौन सी पहलें रही हैं? इनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।”
- “राजस्थान गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट (2023) गिग इकॉनमी में श्रमिक अधिकारों की दिशा में एक आवश्यक कदम है। चर्चा कीजिए।”
- “ई-श्रम पोर्टल और कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 जैसे कदम गिग श्रमिकों के लिए कितने प्रभावी साबित हुए हैं?”
GS Paper 3 – Economy, Employment:
- “Gig economy भारत की पारंपरिक श्रम प्रणाली को कैसे चुनौती दे रही है? इसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों का विश्लेषण कीजिए।”
- “2030 तक भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2.35 करोड़ तक पहुँच सकती है। इस संभावित परिवर्तन के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा कीजिए।”
- “गिग इकॉनमी में algorithm-based काम के मूल्यांकन से जुड़ी चुनौतियाँ क्या हैं? क्या यह प्रणाली श्रमिकों के साथ न्याय करती है?”
- “भारत में गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है? इससे जुड़े कानूनी और व्यावहारिक पक्षों की समीक्षा कीजिए।”

GS Paper 2 – Governance, Welfare Policies, Social Justice
Q). “गिग इकॉनमी भारत में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न कर रही है, परंतु यह श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विवेचना कीजिए।”
Q). “गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता और सुरक्षा देने हेतु भारत सरकार की कौन-कौन सी पहलें रही हैं? इनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।”
Q). “राजस्थान गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट (2023) गिग इकॉनमी में श्रमिक अधिकारों की दिशा में एक आवश्यक कदम है। चर्चा कीजिए।”
Q). “ई-श्रम पोर्टल और कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 जैसे कदम गिग श्रमिकों के लिए कितने प्रभावी साबित हुए हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।”
Q). “क्या आपको लगता है कि प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को सामाजिक सुरक्षा में अधिक योगदान देना चाहिए? आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।”
GS Paper 3 – Economy, Employment, Inclusive Growth
Q). “Gig economy भारत की पारंपरिक श्रम प्रणाली को कैसे चुनौती दे रही है? इसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों का विश्लेषण कीजिए।”
Q). “2030 तक भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2.35 करोड़ तक पहुँच सकती है। इस संभावित परिवर्तन के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा कीजिए।”
Q). “गिग इकॉनमी में algorithm-based काम के मूल्यांकन से जुड़ी चुनौतियाँ क्या हैं? क्या यह प्रणाली श्रमिकों के साथ न्याय करती है?”
Q). “भारत में गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है? इससे जुड़े कानूनी और व्यावहारिक पक्षों की समीक्षा कीजिए।”
मौलिक अधिकारों पर लिंक:[भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों को समझें]
e‑Shram पोर्टल – गिग/प्लैटफ़ॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय पंजीकरण
➤ पंजीकरण के लिए: https://register.eshram.gov.in
