कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की सीमाएँ और आलोचनाएँ
1. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद के बारे में विचार करें:
- कॉम्ट समाजशास्त्र को प्राकृतिक विज्ञानों की तरह एक “मूल्य-रहित” (value-free) विज्ञान मानते थे।
- आलोचक कहते हैं कि सामाजिक वास्तविकता हमेशा प्रत्यक्ष रूप से देखी नहीं जा सकती।
- कॉम्ट ने समाज में व्यक्तिपरक अर्थों (subjective meanings) की भूमिका को लगभग नज़रअंदाज़ किया।
ऊपर दिए गए कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (d) 1, 2 और 3 सभी
व्याख्या:
- समाजशास्त्र का मूल्य-रहित विज्ञान
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को Natural Science की तरह देखा, जहाँ वैज्ञानिक पद्धति और तथ्यों पर आधारित अध्ययन प्राथमिक है।
- इसका अर्थ यह है कि समाजशास्त्र को व्यक्तिगत या नैतिक मूल्य (subjective values) से स्वतंत्र होना चाहिए।
- सामाजिक वास्तविकता प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखी जा सकती
- आलोचक मानते हैं कि सामाजिक घटनाएँ हमेशा प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन योग्य नहीं होतीं।
- उदाहरण: सामाजिक भावना, नैतिक मूल्य, संस्कृति आदि सीधे माप या अवलोकन के योग्य नहीं हैं।
- व्यक्तिपरक अर्थों की अनदेखी
- कॉम्ट ने समाज को तथ्यों और नियमों के आधार पर समझने पर जोर दिया।
- इसलिए उन्होंने व्यक्तिपरक अर्थों (subjective meanings) और भावनात्मक पहलुओं को प्रमुखता नहीं दी।
- यही कारण है कि बाद में मैक्स वेबर जैसे समाजशास्त्रियों ने subjetive meanings और interpretive sociology को विकसित किया।
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक नियमों पर आधारित था, लेकिन इसमें व्यक्तिपरक अर्थों और सांस्कृतिक पहलुओं की भूमिका सीमित थी। आलोचक इसे प्रत्यक्षवाद की सीमा मानते हैं।
2. निम्न में से कौन-सी दार्शनिक (philosophical) आलोचना कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद से जुड़ी हुई है?
(a) इसने भावनाओं की तुलना में तर्क को अधिक महत्व दिया
(b) यह पूरी तरह आध्यात्मिक (metaphysical) तर्कों पर आधारित था
(c) इसने जटिल सामाजिक यथार्थ को केवल प्रत्यक्ष तथ्यों तक सीमित कर दिया
(d) इसने वैज्ञानिक सोच को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया
उत्तर: (c) इसने जटिल सामाजिक यथार्थ को केवल प्रत्यक्ष तथ्यों तक सीमित कर दिया
व्याख्या:
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) अनुभवजन्य तथ्यों और वैज्ञानिक विधियों पर आधारित था। इसका प्रमुख उद्देश्य समाज को Natural Science की तरह नियमबद्ध और अवलोकन योग्य बनाना था।दार्शनिक आलोचना:
- सामाजिक यथार्थ की जटिलता
- आलोचक मानते हैं कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक जीवन की जटिलताओं और व्यक्तिपरक अर्थों (subjective meanings) को नजरअंदाज करता है।
- सामाजिक अनुभव केवल अवलोकन योग्य तथ्यों तक सीमित नहीं होता; इसमें संस्कृति, भावनाएँ, मूल्य और प्रतीकात्मक अर्थ भी शामिल हैं।
- तर्क बनाम भावनाएँ
- कॉम्ट ने तर्क और नियमों को महत्व दिया, लेकिन यह आलोचना केवल यही नहीं है कि उन्होंने भावनाओं को महत्व नहीं दिया।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण की स्वीकार्यता
- कॉम्ट ने वैज्ञानिक सोच को अपनाया और इसे अस्वीकार नहीं किया।
मुख्य दार्शनिक आलोचना यह है कि कॉम्ट ने सामाजिक वास्तविकता को केवल प्रत्यक्ष और मापने योग्य तथ्यों तक सीमित कर दिया, जिससे समाज के गहरे और व्यक्तिपरक पहलुओं की समझ कम हो गई।
3. कॉम्ट के “तीन अवस्थाओं के नियम” (Law of Three Stages) की आलोचनाएँ:
- यह यूरो-केन्द्रित (Eurocentric) माना जाता है।
- यह मानता है कि सभी समाज बिल्कुल समान चरणों से गुजरते हैं।
- इन तीन अवस्थाओं का कोई ठोस प्रायोगिक (empirical) प्रमाण नहीं है।
सही उत्तर चुनें:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
अगस्ट कॉम्ट का Law of Three Stages समाज के विकास को तीन क्रमिक अवस्थाओं में वर्गीकृत करता है:
- थियोलाॅजिकल (Theological Stage): धार्मिक/ईश्वरवादी दृष्टिकोण
- मेटाफिजिकल (Metaphysical Stage): दार्शनिक और abstract सोच
- पॉजिटिव (Positive/Scientific Stage): वैज्ञानिक और अनुभवजन्य ज्ञान
प्रमुख आलोचनाएँ:
- यूरो-केन्द्रित दृष्टिकोण (Eurocentrism)
- कॉम्ट के नियम मुख्यतः यूरोपीय समाज के ऐतिहासिक विकास पर आधारित थे।
- अन्य संस्कृति और समाजों के लिए इसे लागू करना सिद्धांतगत रूप से सीमित माना गया।
- समान चरणों की धारणा
- यह नियम मानता है कि सभी समाज इन तीन चरणों से समान रूप से गुजरते हैं, जो सामाजिक विकास की बहुत ही सरलीकृत व्याख्या है।
- प्रायोगिक प्रमाण की कमी
- तीन अवस्थाओं के सिद्धांत का कोई ठोस empirical डेटा नहीं है।
- यह ऐतिहासिक और दर्शनात्मक अवलोकन पर आधारित था, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण की कमी इसकी आलोचना का मुख्य कारण है।
कॉम्ट का यह नियम सैद्धांतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रदान करता है, लेकिन इसे वैश्विक और प्रायोगिक दृष्टि से पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता।
4. कॉम्ट के “सामाजिक भौतिकी” (Social Physics) मॉडल को क्यों आलोचना मिली?
(a) क्योंकि यह समाज को एक यांत्रिक और स्थिर प्रणाली की तरह प्रस्तुत करता है
(b) क्योंकि यह समाज में परिवर्तन की प्रक्रिया को अत्यधिक महत्व देता है
(c) क्योंकि यह समाज को आध्यात्मिक शक्तियों से संचालित मानता है
(d) क्योंकि यह सामाजिक तथ्यों के वैज्ञानिक अध्ययन को अस्वीकार करता है
उत्तर: (a) क्योंकि यह समाज को एक यांत्रिक और स्थिर प्रणाली की तरह प्रस्तुत करता है
व्याख्या:
- सामाजिक भौतिकी (Social Physics) का आधार
- कॉम्ट ने समाज को प्राकृतिक विज्ञानों की तरह अध्ययन करने की कोशिश की।
- उन्होंने इसे एक यांत्रिक प्रणाली (mechanical system) के रूप में देखा, जहाँ स्थिर संरचना और नियमों के अनुसार समाज संचालित होता है।
- मुख्य आलोचना
- आलोचक मानते हैं कि यह दृष्टिकोण समाज की जटिलता और परिवर्तनशीलता को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाता।
- समाज केवल नियमों और स्थिर संरचनाओं द्वारा संचालित नहीं होता; इसमें संस्कृति, मूल्य, विचार और अनपेक्षित परिवर्तन भी शामिल हैं।
- सकारात्मक पक्ष
- यद्यपि आलोचना है, कॉम्ट के Social Physics मॉडल ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक दृष्टि और नियम-आधारित अध्ययन की ओर अग्रसर किया।
Social Physics मॉडल ने समाज को यांत्रिक और स्थिर प्रणाली के रूप में देखा, जो समाज की गतिशीलता और जटिलताओं को पूरी तरह नहीं समझ पाता।
5. कॉम्ट की पद्धति (Methodology) में प्रमुख सीमा कौन-सी है?
(a) उन्होंने सामान्यीकरण (generalisation) की संभावना को नकार दिया
(b) उन्होंने आत्मविश्लेषण (introspection) को प्राथमिक पद्धति माना
(c) उन्होंने ऐतिहासिक और तुलनात्मक विधियों (historical & comparative methods) की उपेक्षा की
(d) उन्होंने अवलोकन (observation) को गलत माना
उत्तर: (c) उन्होंने ऐतिहासिक और तुलनात्मक विधियों (historical & comparative methods) की उपेक्षा की
व्याख्या:
- कॉम्ट की पद्धति का आधार
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को अनुभवजन्य (empirical) और अवलोकन-आधारित (observation-based) विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
- उनका मुख्य उद्देश्य समाज के सामाजिक नियमों और तथ्यों का वैज्ञानिक अध्ययन करना था।
- मुख्य सीमा (Limitation)
- आलोचक मानते हैं कि कॉम्ट ने ऐतिहासिक और तुलनात्मक विधियों (historical & comparative methods) की उपेक्षा की।
- इसका परिणाम यह हुआ कि समाजशास्त्र का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता का अध्ययन सीमित रह गया।
- अन्य सीमाएँ
- उन्होंने व्यक्तिगत अर्थों और subjective meanings को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
- समाज को एक स्थिर, नियमबद्ध प्रणाली के रूप में देखने की प्रवृत्ति थी।
कॉम्ट की methodology मुख्यतः अवलोकन और अनुभवजन्य तथ्य पर आधारित थी, जिससे ऐतिहासिक और तुलनात्मक अध्ययन की उपेक्षा एक प्रमुख सीमा बन गई।
6. निम्न में से किस विद्वान ने कॉम्ट के इस विचार को अस्वीकार किया कि “सामाजिक विज्ञानों को प्राकृतिक विज्ञानों की नकल करनी चाहिए”?
(a) दुर्खीम
(b) वेबर
(c) स्पेन्सर
(d) मार्क्स
उत्तर: (b) वेबर
(वेबर ने “व्याख्यात्मक समझ” — Verstehen पर ज़ोर दिया।)
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को Natural Sciences की तरह नियमबद्ध और अनुभवजन्य बनाने का प्रयास किया।
- उनका मानना था कि सामाजिक घटनाओं को भी नियमों और तथ्यों के आधार पर वैज्ञानिक रूप से समझा जा सकता है।
- मैक्स वेबर का विरोध
- वेबर ने कॉम्ट की यह धारणा अस्वीकार की कि समाजशास्त्र पूर्णतः प्राकृतिक विज्ञानों की नकल करे।
- वेबर ने व्याख्यात्मक समझ (Verstehen) का सिद्धांत विकसित किया।
- इसका अर्थ है कि समाजशास्त्रियों को व्यक्तियों के दृष्टिकोण, अर्थ और उद्देश्य को समझना चाहिए।
- सामाजिक घटनाओं को केवल बाहरी अवलोकन से नहीं बल्कि अंतर्निहित अर्थ और प्रेरणाओं के संदर्भ में समझना आवश्यक है।
- मुख्य अंतर
कॉम्ट वेबर समाजशास्त्र = Natural Science समाजशास्त्र = समझ (Interpretive Understanding) केवल अवलोकन और तथ्यों पर जोर व्यक्तिगत अर्थ, उद्देश्य और संस्कृति पर जोर नियमबद्ध, नियम खोजने वाली पद्धति अर्थपूर्ण, explanatory पद्धति वेबर ने कॉम्ट के Positivist imitation of Natural Sciences को अस्वीकार किया और सामाजिक विज्ञान में व्याख्यात्मक समझ (Verstehen) की आवश्यकता पर बल दिया।
7. कॉम्ट के वैज्ञानिक दावे की आलोचना निम्न कारणों से की गई:
- सामाजिक विज्ञानों में प्रेक्षक (observer) की पूर्ण निष्पक्षता संभव नहीं है।
- मानव व्यवहार भावनाओं और मूल्यों से प्रभावित होता है।
- कॉम्ट ने समाज को ऐसे समझा जैसे वह प्राकृतिक नियमों से नियंत्रित एक स्थिर मशीन हो।
सही उत्तर चुनें:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
- प्रेक्षक की निष्पक्षता (Objectivity)
- आलोचक मानते हैं कि समाजशास्त्र में पूर्ण निष्पक्षता संभव नहीं है।
- शोधकर्ता का मूल्य, दृष्टिकोण और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अवलोकन और व्याख्या को प्रभावित करता है।
- मानव व्यवहार और भावनाएँ
- मानव क्रियाएँ केवल नियमों और तथ्यों से संचालित नहीं होतीं।
- इसमें भावनाएँ, मूल्य, संस्कार और सामाजिक प्रतीक भी शामिल होते हैं।
- यांत्रिक दृष्टिकोण (Mechanical View)
- कॉम्ट ने समाज को स्थिर और नियमबद्ध मशीन की तरह देखा।
- आलोचकों के अनुसार, यह दृष्टिकोण समाज की गतिशीलता और जटिलताओं को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाता।
कॉम्ट का वैज्ञानिक दावे तथ्यों और नियमों पर आधारित था, लेकिन आलोचना यह है कि समाजशास्त्र पूरी तरह से प्राकृतिक विज्ञानों की तरह यांत्रिक नहीं हो सकता, और इसमें निष्पक्ष अवलोकन, भावनाएँ और मूल्य शामिल हैं।
8. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को “anti-critical” कहने का अर्थ है—
(a) यह आलोचनात्मक परंपरा को हतोत्साहित करता है
(b) यह तर्क की भूमिका को नकारता है
(c) यह आध्यात्मिक विचारों को बढ़ावा देता है
(d) यह वैज्ञानिक पद्धति को अस्वीकार करता है
उत्तर: (a) यह आलोचनात्मक परंपरा को हतोत्साहित करता है
व्याख्या:
- Anti-critical का अर्थ
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सिद्धांतों और अवलोकन पर आधारित था, लेकिन उसने सामाजिक आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोणों के लिए बहुत कम स्थान छोड़ा।
- इसलिए इसे anti-critical (आलोचना-विरोधी) कहा जाता है।
- विशेषताएँ
- कॉम्ट का दृष्टिकोण value-free और नियम आधारित था।
- यह सामाजिक संरचना और घटनाओं की आलोचना या मूल्यांकन पर कम ध्यान देता था।
- सीमा और आलोचना
- आलोचक मानते हैं कि सामाजिक बदलाव और सुधार के लिए आलोचनात्मक सोच आवश्यक है।
- कॉम्ट का दृष्टिकोण सामाजिक आलोचना को हतोत्साहित करता है, इसलिए इसे “anti-critical” कहा गया।
“Anti-critical” होने का अर्थ है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक आलोचना और वैकल्पिक विचारों को प्राथमिकता नहीं देता, बल्कि स्थिर और नियमबद्ध अध्ययन पर केंद्रित रहता है।
9. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की सबसे प्रमुख आलोचना क्या है?
(a) यह सांख्यिकीय तकनीकों को अस्वीकार करता है
(b) यह सामाजिक क्रिया के अर्थ (subjective meaning) को नज़रअंदाज़ करता है
(c) यह प्रत्यक्ष अवलोकन पर भरोसा नहीं करता
(d) यह इतिहास को वैज्ञानिक अध्ययन का महत्वपूर्ण भाग मानता है
उत्तर: (b) यह सामाजिक क्रिया के अर्थ (subjective meaning) को नज़रअंदाज़ करता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सटीक, नियमबद्ध और अनुभवजन्य (empirical) विज्ञान बनाने का प्रयास किया।
- उनके प्रत्यक्षवाद में observable social facts और scientific laws पर जोर था।
- मुख्य आलोचना
- आलोचक मानते हैं कि कॉम्ट ने व्यक्तियों के दृष्टिकोण, अनुभव और सामाजिक क्रियाओं के अर्थ (subjective meanings) को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
- समाज केवल बाहरी रूप से अवलोकन योग्य तथ्यों तक सीमित नहीं है; इसमें मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक अर्थ भी शामिल हैं।
- परिणाम
- प्रत्यक्षवाद सामाजिक क्रियाओं को सामान्य नियमों और संरचनाओं तक सीमित कर देता है।
- बाद के समाजशास्त्रियों जैसे मैक्स वेबर (Max Weber) ने इसे सुधारते हुए Verstehen (interpretive understanding) का सिद्धांत पेश किया।
कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की सबसे प्रमुख आलोचना यह है कि यह सामाजिक क्रियाओं के अंतर्निहित अर्थ और व्यक्तिगत दृष्टिकोण को नजरअंदाज करता।
10. आत्मविश्लेषण (Introspection) को अस्वीकार करने पर कॉम्ट की आलोचना क्यों हुई?
(a) क्योंकि यही समाजशास्त्र की एकमात्र विधि है
(b) क्योंकि सामाजिक क्रिया को समझने के लिए व्यक्तिपरक अनुभव (subjective experience) आवश्यक है
(c) क्योंकि यह जैविक विकास को समझाता है
(d) क्योंकि यह धार्मिक व्याख्याओं के विरोध में है
उत्तर: (b) क्योंकि सामाजिक क्रिया को समझने के लिए व्यक्तिपरक अनुभव (subjective experience) आवश्यक है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र में प्रत्यक्ष अवलोकन (empirical observation) और तथ्य आधारित अध्ययन को प्राथमिकता दी।
- उन्होंने आत्मविश्लेषण (introspection) और व्यक्तिपरक अनुभव को अध्ययन का साधन नहीं माना।
- मुख्य आलोचना
- आलोचक कहते हैं कि सामाजिक क्रिया केवल बाहरी अवलोकन से नहीं समझी जा सकती।
- प्रत्येक सामाजिक क्रिया में व्यक्तियों के उद्देश्य, भावनाएँ और अर्थ (subjective meaning) निहित होते हैं।
- इसे समझने के लिए introspection या Verstehen जैसी पद्धति आवश्यक है।
- परिणाम
- कॉम्ट की इस दृष्टि से सामाजिक क्रियाओं की जटिलता और अर्थपूर्णता को ठीक से समझना मुश्किल हो जाता है।
- बाद के समाजशास्त्रियों जैसे मैक्स वेबर (Max Weber) ने इसे सुधारते हुए Verstehen (interpretive understanding) विकसित किया।
कॉम्ट ने introspection को अस्वीकार किया, जिससे उनकी पद्धति व्यक्तिपरक अर्थों और सामाजिक क्रियाओं की गहन समझ से वंचित रही।
11. कॉम्ट की “विज्ञानों का क्रम (Hierarchy of Sciences)” की आलोचनाएँ:
- यह वैज्ञानिक प्रगति को रैखिक (linear) मान लेता है।
- यह समाजशास्त्र को बिना किसी ठोस आधार के विज्ञानों के शीर्ष पर रखता है।
- यह विभिन्न विज्ञानों के बीच अंतःविषयक (interdisciplinary) संबंधों की उपेक्षा करता है।
सही उत्तर:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) 1, 2 और 3
व्याख्या:
- कॉम्ट का Hierarchy of Sciences
- कॉम्ट ने विज्ञानों को इस क्रम में रखा — Mathematics → Astronomy → Physics → Chemistry → Biology → Sociology।
- उनका तर्क था कि प्रत्येक विज्ञान सापेक्ष जटिलता में क्रमबद्ध है।
- मुख्य आलोचनाएँ
- रैखिक प्रगति का भ्रम:
- आलोचक कहते हैं कि विज्ञान की प्रगति सिर्फ linear नहीं होती, बल्कि बहुआयामी और अप्रत्याशित होती है।
- समाजशास्त्र को शीर्ष पर रखना:
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सर्वोच्च विज्ञान माना, लेकिन यह वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह समर्थित नहीं था।
- अंतःविषयक संबंधों की उपेक्षा:
- आधुनिक विज्ञान में विज्ञानों के बीच interdisciplinary connections महत्वपूर्ण हैं, जो कॉम्ट के मॉडल में नजरअंदाज किए गए।
कॉम्ट का विज्ञानों का क्रम रैखिक और सामाजिक विज्ञान केंद्रित था, जिसने आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बहुआयामी और अंतःविषयक प्रकृति को पर्याप्त नहीं दर्शाया।
12. आलोचकों के अनुसार कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद समाज को कैसे देखता है?
(a) एक जीवित जीव (organism) की तरह
(b) सार्वभौमिक नियमों से संचालित एक यांत्रिक प्रणाली की तरह
(c) एक आध्यात्मिक इकाई की तरह
(d) एक पूर्णतः सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में
उत्तर: (b) सार्वभौमिक नियमों से संचालित एक यांत्रिक प्रणाली की तरह
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को scientific, rules-based और deterministic विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
- उनके अनुसार समाज नियत कारणों और परिणामों (cause-effect relationships) के अधीन काम करता है।
- आलोचकों का मत
- आलोचक मानते हैं कि कॉम्ट ने समाज को यांत्रिक मशीन की तरह स्थिर और नियमबद्ध देखा।
- यह दृष्टिकोण समाज की जटिलता, गतिशीलता और व्यक्तिपरक अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
- मुख्य अंतर
कॉम्ट आलोचक दृष्टिकोण समाज = यांत्रिक नियमों वाली प्रणाली समाज = जटिल, गतिशील, अर्थपूर्ण सामाजिक प्रक्रिया स्थिरता और नियम पर जोर परिवर्तनशीलता और व्यक्तिपरक अर्थों की अनदेखी Scientific Observation प्रमुख Social Interpretation की कमी कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद समाज को natural laws द्वारा नियंत्रित यांत्रिक प्रणाली मानता है, जो सामाजिक क्रियाओं की गतिशीलता और व्यक्तिपरक अर्थ को पूरी तरह नहीं पकड़ पाता।
13. कॉम्ट के “मूल्य-रहित समाजशास्त्र” (value-free sociology) की आलोचना क्यों हुई?
(a) क्योंकि यह धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देता था
(b) क्योंकि सामाजिक वैज्ञानिक पूरी तरह मूल्य-निरपेक्ष नहीं हो सकते
(c) क्योंकि समाजशास्त्र केवल मूल्यों का अध्ययन करता है
(d) क्योंकि मूल्यों का कोई वैज्ञानिक महत्व नहीं है
उत्तर: (b) क्योंकि सामाजिक वैज्ञानिक पूरी तरह मूल्य-निरपेक्ष नहीं हो सकते
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को scientific और empirical विज्ञान बनाने का प्रयास किया।
- उनका उद्देश्य था कि समाजशास्त्र value-free यानी मूल्य-निरपेक्ष हो।
- मुख्य आलोचना
- आलोचक कहते हैं कि सामाजिक वैज्ञानिक पूरी तरह से मूल्य-निरपेक्ष नहीं हो सकते, क्योंकि:
- शोधकर्ता का सांस्कृतिक, नैतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण अनुसंधान को प्रभावित करता है।
- सामाजिक घटनाओं की व्याख्या में मूल्य और मान्यताएँ अनिवार्य रूप से शामिल होती हैं।
- परिणाम
- मूल्य-निरपेक्ष दृष्टिकोण का पालन करते हुए, सामाजिक प्रगति और न्याय जैसे पहलुओं को पूरी तरह समझना कठिन हो जाता है।
- बाद के समाजशास्त्री, जैसे मैक्स वेबर (Max Weber), ने इसे संतुलित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मूल्य समझ दोनों आवश्यक हैं।
कॉम्ट का value-free समाजशास्त्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है, लेकिन आलोचकों के अनुसार सामाजिक शोध में मूल्य पूरी तरह से अलग नहीं रखे जा सकते।
14. किस विद्वान ने कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की आलोचना “अतिरिक्त-प्रणालीबद्धता” (over-systematisation) के आधार पर की?
(a) जॉन स्टुअर्ट मिल
(b) दुर्खीम
(c) मार्क्स
(d) स्पेन्सर
उत्तर: (a) जॉन स्टुअर्ट मिल
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को वैज्ञानिक और नियमबद्ध बनाने के लिए अत्यधिक प्रणालीबद्ध (over-systematised) किया।
- उन्होंने समाज को यांत्रिक संरचना की तरह देखा, जिसमें सभी सामाजिक घटनाएँ निश्चित नियमों के अधीन होती हैं।
- जॉन स्टुअर्ट मिल की आलोचना
- Mill ने कॉम्ट की अत्यधिक प्रणालीबद्ध दृष्टि की आलोचना की।
- उनका मत था कि सामाजिक जीवन और घटनाओं को इतनी कठोर नियमबद्धता में बाँधना व्यावहारिक नहीं है।
- उन्होंने कहा कि सामाजिक घटनाएँ जटिल और बहुआयामी होती हैं, जिन्हें केवल rigid laws में नहीं समेटा जा सकता।
- परिणाम
- Mill की आलोचना ने आधुनिक समाजशास्त्र में संतुलित और लचीली वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
- यह आलोचना स्पष्ट करती है कि over-systematisation सामाजिक वास्तविकताओं की जटिलता को पूरी तरह नहीं पकड़ पाती।
जॉन स्टुअर्ट मिल ने कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को over-systematisation के आधार पर आलोचित किया, क्योंकि उन्होंने समाज की जटिलता और बहुआयामी व्यवहार को अनदेखा किया।
15. कॉम्ट के इस दावे की क्या सीमा मानी गई कि “समाजशास्त्र विज्ञानों की रानी (queen of sciences) बनेगा”?
(a) अन्य विज्ञानों की स्वतन्त्रता (autonomy) को कम करके आंका गया
(b) वैज्ञानिक व्याख्या को अस्वीकार कर दिया गया
(c) आध्यात्मिक तर्कों को बढ़ावा दिया गया
(d) सभी विज्ञानों को समान माना गया
उत्तर: (a) अन्य विज्ञानों की स्वतन्त्रता (autonomy) को कम करके आंका गया
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सर्वोच्च विज्ञान (queen of sciences) घोषित किया।
- उनका तर्क था कि सभी विज्ञान समाज और मानव जीवन के अध्ययन में अंततः समाजशास्त्र की ओर लौटते हैं।
- मुख्य आलोचना
- आलोचक मानते हैं कि इस दृष्टिकोण से अन्य विज्ञानों की स्वतंत्रता और महत्व कम करके आंका गया।
- उदाहरण के लिए, भौतिक विज्ञान, जीवविज्ञान या रसायन विज्ञान की अपनी अलग अनुसंधान विधियाँ और महत्व हैं, जिन्हें केवल समाजशास्त्र से तुलनात्मक नहीं किया जा सकता।
- परिणाम
- कॉम्ट का यह दृष्टिकोण वैज्ञानिक अनुशासन में hierarchy की आलोचना के रूप में देखा गया।
- बाद के समाजशास्त्रियों ने इसे interdisciplinary और autonomous sciences के दृष्टिकोण से संतुलित किया।
कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सर्वोच्च विज्ञान माना, लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह अन्य विज्ञानों की स्वतंत्रता और महत्व को कम करके आंकता है।
16. मार्क्सवादी विद्वान कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की किस आधार पर आलोचना करते हैं?
(a) यह सामाजिक एकता को केंद्र में रखता है
(b) यह शक्ति, संघर्ष और वर्ग-संबंधों की उपेक्षा करता है
(c) यह समाज को ऐतिहासिक रूप से समझने पर ज़ोर देता है
(d) यह पूंजीवाद के अंत की भविष्यवाणी करता है
उत्तर: (b) यह शक्ति, संघर्ष और वर्ग-संबंधों की उपेक्षा करता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाज को स्थिरता और व्यवस्था (Order and Progress) के आधार पर देखा।
- उनका प्रत्यक्षवाद सामाजिक एकता और नियमों पर केंद्रित था।
- मार्क्सवादी आलोचना
- मार्क्सवादी विद्वान कहते हैं कि कॉम्ट ने सामाजिक संघर्ष (class struggle), शक्ति संघर्ष और असमानता को नजरअंदाज किया।
- मार्क्सवाद के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन के मूल कारण वर्ग-संबंध और आर्थिक शक्ति होते हैं, जिन्हें कॉम्ट ने शामिल नहीं किया।
- परिणाम
- कॉम्ट की वैज्ञानिक पद्धति समाज के व्यवस्था-संतुलन पर तो जोर देती है, लेकिन सामाजिक संघर्ष और इतिहास के निर्णायक तत्वों को पर्याप्त महत्व नहीं देती।
- इसीलिए मार्क्सवादी आलोचना में कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को सामाजिक संघर्ष-अवहेलना वाला और आंशिक कहा गया।
मार्क्सवादी विद्वान कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को इसलिए आलोचना करते हैं क्योंकि यह शक्ति, संघर्ष और वर्ग-संबंधों की जटिलताओं को समाजशास्त्रीय विश्लेषण में शामिल नहीं करता।
17. “कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद यथास्थितिवादी (status quo-oriented) है।” इस आलोचना का तात्पर्य क्या है?
(a) यह समाज में स्थिरता को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करता है
(b) यह सामाजिक व्यवस्था और सत्ता की आलोचना के बजाय उसके संरक्षण पर ज़ोर देता है
(c) यह क्रांति और हिंसात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देता है
(d) यह सामाजिक संस्थाओं को अनावश्यक मानता है
उत्तर: (b) यह सामाजिक व्यवस्था और सत्ता की आलोचना के बजाय उसके संरक्षण पर ज़ोर देता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाजशास्त्र को व्यवस्था और प्रगति (Order and Progress) के सिद्धांत पर आधारित किया।
- उनका प्रत्यक्षवाद स्थिरता (stability) और सामाजिक अनुशासन को प्राथमिकता देता है।
- यथास्थितिवादी आलोचना
- आलोचक मानते हैं कि कॉम्ट वर्तमान सामाजिक व्यवस्था की आलोचना नहीं करते, बल्कि उसके संरक्षण और स्थायित्व पर ज़ोर देते हैं।
- इस दृष्टिकोण से सामाजिक असमानताओं और शक्ति संरचनाओं को चुनौती देने की संभावना कम हो जाती है।
- परिणाम
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक परिवर्तन को सावधानीपूर्वक और नियंत्रित मानता है।
- इसलिए आलोचना की जाती है कि यह status quo को बनाए रखने वाला और बदलाव के लिए संवेदनशील नहीं।
“यथास्थितिवादी” आलोचना का अर्थ है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक व्यवस्था और सत्ता संरचनाओं के संरक्षण को प्राथमिकता देता है, बजाय उनके आलोचनात्मक मूल्यांकन के।
18. नारीवादी आलोचना कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को किस आधार पर चुनौती देती है?
(a) यह स्त्री-अनुभवों (women’s experiences) को वैज्ञानिक नहीं मानता
(b) यह पितृसत्ता को प्राकृतिक नियम घोषित करता है
(c) यह सामाजिक तथ्यों को लिंग-तटस्थ (gender-neutral) आधार पर देखता है और लैंगिक असमानताओं की उपेक्षा करता है
(d) यह महिलाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देता है
उत्तर: (c) यह सामाजिक तथ्यों को लिंग-तटस्थ (gender-neutral) आधार पर देखता है और लैंगिक असमानताओं की उपेक्षा करता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट ने समाज को वैज्ञानिक और मूल्य-निरपेक्ष (value-free) दृष्टि से समझने का प्रयास किया।
- उनके प्रत्यक्षवाद में सामाजिक संरचना और नियमों पर अधिक ध्यान था, न कि लैंगिक अनुभवों और असमानताओं पर।
- नारीवादी आलोचना
- नारीवादी विद्वानों के अनुसार, कॉम्ट की पद्धति:
- लैंगिक दृष्टिकोण को नजरअंदाज करती है।
- समाज में मौजूद पुरुष–महिला असमानताओं और पितृसत्तात्मक संरचनाओं को प्रत्यक्षवादी विश्लेषण में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
- परिणामस्वरूप, कॉम्ट का समाजशास्त्र gender-neutral दृष्टिकोण के नाम पर लैंगिक असमानताओं की उपेक्षा करता है।
- परिणाम
- नारीवादी आलोचना ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक विश्लेषण में लैंगिक आयाम का शामिल होना आवश्यक है।
- केवल नियमों और तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करना समाज की वास्तविक जटिलताओं को पकड़ने में असमर्थ हो सकता है।
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद नारीवादी दृष्टिकोण से इसलिए आलोचित है क्योंकि यह लैंगिक असमानताओं और महिलाओं के अनुभवों को सामाजिक विश्लेषण में पर्याप्त महत्व नहीं देता।
19. उत्तर-आधुनिक (Postmodern) आलोचक कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को क्यों नकारते हैं?
(a) क्योंकि यह बहुल सत्य (multiple truths) को स्वीकार करता है
(b) क्योंकि यह वैज्ञानिक ज्ञान को “एकमात्र सत्य” मानकर अन्य ज्ञान-रूपों को अवैध ठहराता है
(c) क्योंकि यह भाषा और प्रतीकों पर आधारित व्याख्या करता है
(d) क्योंकि यह सामाजिक संरचना को अस्वीकार करता है
उत्तर: (b) क्योंकि यह वैज्ञानिक ज्ञान को “एकमात्र सत्य” मानकर अन्य ज्ञान-रूपों को अवैध ठहराता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद (Positivism) वैज्ञानिक और प्रत्यक्ष तथ्यों पर आधारित ज्ञान को सर्वोच्च मानता है।
- उनका सिद्धांत है कि केवल वही ज्ञान “सकारात्मक” है जो देखा, मापा और जाँचा जा सके।
- उत्तर-आधुनिक आलोचना (Postmodern Critique)
- Postmodern thinkers कहते हैं कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद एकमात्र सत्य (single truth) मानकर बहुसंख्यक दृष्टिकोण और ज्ञान रूपों को नजरअंदाज करता है।
- इसके परिणामस्वरूप, सांस्कृतिक, भाषाई, प्रतीकात्मक और अनुभवजन्य विभिन्नताओं को समाजशास्त्र में पर्याप्त महत्व नहीं मिलता।
- परिणाम
- उत्तर-आधुनिक आलोचना यह बताती है कि सत्य बहुआयामी (multiple, context-dependent) होता है, और इसे केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण तक सीमित करना सामाजिक यथार्थ की जटिलताओं को पकड़ने में असमर्थ है।
Postmodern scholars कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद को इसलिए नकारते हैं क्योंकि यह वैज्ञानिक ज्ञान को एकमात्र मानकर अन्य प्रकार के ज्ञान और सत्य की वैधता को अस्वीकार करता है।
20. कॉम्ट के ‘Order–Progress’ सिद्धांत में कौन-सी दार्शनिक सीमा देखी जाती है?
(a) यह संघर्ष को सामाजिक प्रगति का मूल मानता है
(b) यह व्यवस्था को प्रगति से अधिक प्राथमिकता देकर सामाजिक विरोध और असंतोष की अनदेखी करता है
(c) यह समाज को निरंतर अस्थिर मानता है
(d) यह सामाजिक क्रांति को प्राकृतिक मानता है
उत्तर: (b) यह व्यवस्था को प्रगति से अधिक प्राथमिकता देकर सामाजिक विरोध और असंतोष की अनदेखी करता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का प्रसिद्ध नारा “Order and Progress” (व्यवस्था और प्रगति) था।
- उनका प्रत्यक्षवाद समाज में स्थिरता और अनुशासन को प्राथमिकता देता है।
- प्रगति को स्वीकार तो किया गया, लेकिन सामाजिक व्यवस्था और संतुलन को प्राथमिक माना गया।
- आलोचनात्मक सीमा
- आलोचक मानते हैं कि इस दृष्टिकोण में सामाजिक संघर्ष, विरोध और असंतोष की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
- परिणामस्वरूप, कॉम्ट का सिद्धांत status quo (स्थिर सामाजिक संरचना) को बनाए रखने वाला माना गया।
- यह दृष्टिकोण क्रांतिकारी या सुधारात्मक बदलावों की अनदेखी करता है।
- समग्र प्रभाव
- वैज्ञानिक और प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण के बावजूद, Order–Progress सिद्धांत सामाजिक संघर्ष और असमानता को नहीं समझता, जो बाद के समाजशास्त्रियों और आलोचकों द्वारा प्रमुख आलोचना का आधार बना।
कॉम्ट का Order–Progress सिद्धांत व्यवस्था को प्रगति से अधिक प्राथमिकता देता है, इसलिए सामाजिक विरोध और असंतोष की अनदेखी होती है।
21. प्रतीकात्मक अन्तःक्रियावादियों (Symbolic Interactionists) की मुख्य आलोचना क्या है?
(a) कॉम्ट सामाजिक क्रिया के पीछे ‘अर्थ’ और ‘व्याख्या’ की भूमिका को कम आँकते हैं
(b) कॉम्ट प्रतीकों का अत्यधिक उपयोग करते हैं
(c) कॉम्ट सामाजिक संस्थाओं पर ध्यान नहीं देते
(d) कॉम्ट समाज को अत्यंत गतिशील मानते हैं
उत्तर: (a) कॉम्ट सामाजिक क्रिया के पीछे ‘अर्थ’ और ‘व्याख्या’ की भूमिका को कम आँकते हैं
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक संरचना और स्थिरता पर केंद्रित था।
- उन्होंने व्यक्तिपरक अर्थ (subjective meaning) और सामाजिक क्रियाओं की व्याख्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
- प्रतीकात्मक अन्तःक्रियावादियों की आलोचना
- Symbolic Interactionists (जैसे हर्बर्ट ब्लमर, जॉर्ज हर्बर्ट मीड) कहते हैं कि सामाजिक व्यवहार केवल संरचना और नियमों से नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसमें व्यक्तिपरक अर्थ, प्रतीक और सामाजिक इंटरैक्शन महत्वपूर्ण हैं।
- कॉम्ट ने यह दृष्टिकोण सीमित रखा, इसलिए उनकी पद्धति micro-level interaction और अर्थ-निर्माण की जटिलताओं को नहीं पकड़ पाती।
- परिणाम
- इस आलोचना के अनुसार, कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद macro-level नियम और स्थिरता पर अधिक जोर देता है, जबकि सामाजिक जीवन की सूक्ष्मताएँ और व्यक्तिगत अर्थ अनदेखी रह जाती हैं।
प्रतीकात्मक अन्तःक्रियावादी कॉम्ट की आलोचना करते हैं क्योंकि वह सामाजिक क्रियाओं के पीछे व्यक्तिपरक अर्थ और व्याख्या की भूमिका को कम महत्व देता है।
22. कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की राजनीतिक आलोचना का मुख्य बिंदु है—
(a) यह शक्ति-संरचना और राज्य की भूमिका को वैज्ञानिक रूप से विकसित करता है
(b) यह सत्ता की आलोचना के बजाय स्थिर राजनीतिक व्यवस्था को वैधता प्रदान करता है
(c) यह लोकतंत्र को अस्वीकार करता है
(d) यह सामाजिक परिवर्तन को अनिवार्य मानता है
उत्तर: (b) यह सत्ता की आलोचना के बजाय स्थिर राजनीतिक व्यवस्था को वैधता प्रदान करता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक स्थिरता (social order) को प्राथमिक मानता है।
- उनका नारा “Order and Progress” है, जिसमें व्यवस्था की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- राजनीतिक आलोचना
- आलोचक कहते हैं कि कॉम्ट का दृष्टिकोण status quo-oriented है।
- इसका मतलब है कि यह सत्ता संरचना और राजनीतिक संस्थाओं की आलोचना करने के बजाय, उन्हें वैधता और स्थायित्व प्रदान करता है।
- इसलिए कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद राजनीतिक सुधार या विरोधी आंदोलन के महत्व को कम आंकता है।
- परिणाम
- राजनीतिक आलोचना का निष्कर्ष यह है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद राजनीतिक निष्पक्षता और परिवर्तनशीलता को नजरअंदाज करता है।
- यह दृष्टिकोण क्रांतिकारी या लोकतांत्रिक आंदोलनों के महत्व को कम करता है।
कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद राजनीतिक दृष्टि से आलोचना के दायरे में आता है क्योंकि यह सत्ता की आलोचना के बजाय स्थिर राजनीतिक व्यवस्था को वैधता देता है।
23. उत्तर-औपनिवेशिक आलोचना (Post-colonial Critique) कॉम्ट के विचारों को किस रूप में देखती है?
(a) गैर-यूरोपीय समाजों के प्रति तटस्थ
(b) सांस्कृतिक विविधता को वैज्ञानिक रूप से शामिल करने वाला
(c) यूरो-केन्द्रित और पश्चिमी प्रगति मॉडल को सार्वभौमिक घोषित करने वाला
(d) पूर्णतः सांस्कृतिक सापेक्षतावादी
उत्तर: (c) यूरो-केन्द्रित और पश्चिमी प्रगति मॉडल को सार्वभौमिक घोषित करने वाला
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का “Law of Three Stages” और Order–Progress दृष्टिकोण यूरोपीय ऐतिहासिक और सामाजिक विकास पर आधारित है।
- उन्होंने विकास के चरणों (Theological → Metaphysical → Positive) को सर्वत्र समान रूप से लागू होने वाला माना।
- उत्तर-औपनिवेशिक आलोचना
- Post-colonial scholars कहते हैं कि कॉम्ट का मॉडल गैर-यूरोपीय समाजों की विविध सामाजिक संरचनाओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को नजरअंदाज करता है।
- उनके दृष्टिकोण में पश्चिमी प्रगति का पैमाना ही सार्वभौमिक सत्य माना गया।
- परिणामस्वरूप, यह दृष्टिकोण सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक विविधताओं के प्रति असंवेदनशील है।
- परिणाम
- आलोचना का मुख्य बिंदु: कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद Eurocentric bias रखता है और इसे गैर-पश्चिमी समाजों पर लागू करना असत्यापित और असंवेदनशील है।
Post-colonial critique यह मानती है कि कॉम्ट का दृष्टिकोण यूरो-केन्द्रित और पश्चिमी विकास मॉडल को सार्वभौमिक मानकर गैर-पश्चिमी समाजों की वास्तविकताओं की अनदेखी करता है।
24. नारीवादी विद्वानों के अनुसार, कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद में ‘लिंग’ (gender) का महत्व क्यों कमतर दिखता है?
(a) क्योंकि कॉम्ट के अध्ययन में पुरुष और स्त्री अनुभवों को समान माना गया है
(b) क्योंकि वे वैज्ञानिक नियमों को लिंग-विशिष्ट मानते हैं
(c) क्योंकि प्रत्यक्षवाद सामाजिक ज्ञान को केवल ‘दिखने वाली’ गतिविधियों से जोड़ता है और घरेलू/निजी क्षेत्र को अदृश्य छोड़ देता है
(d) क्योंकि कॉम्ट महिलाओं को वैज्ञानिक मानते थे
उत्तर: (c) क्योंकि प्रत्यक्षवाद सामाजिक ज्ञान को केवल ‘दिखने वाली’ गतिविधियों से जोड़ता है और घरेलू/निजी क्षेत्र को अदृश्य छोड़ देता है
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक जीवन के सार्वजनिक, दृश्य और औपचारिक पहलुओं पर केंद्रित था।
- उन्होंने समाजशास्त्र को macro-level संरचना और स्थिरता की समझ देने के लिए विकसित किया।
- नारीवादी आलोचना
- Feminist scholars का कहना है कि कॉम्ट का दृष्टिकोण महिला अनुभव, घरेलू जीवन और निजी क्षेत्र के सामाजिक ज्ञान को नजरअंदाज करता है।
- प्रत्यक्षवाद केवल दृश्य और सार्वजनिक गतिविधियों को ज्ञान का स्रोत मानता है।
- इसका परिणाम यह हुआ कि gendered अनुभव और लैंगिक असमानताओं को समझने में कमी रहती है।
- परिणाम
- नारीवादी आलोचना इस तथ्य पर जोर देती है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद gender-blind है और पुरुषप्रधान (male-centered) समाज के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है।
नारीवादी विद्वान कॉम्ट के प्रत्यक्षवाद की आलोचना करते हैं क्योंकि यह सामाजिक ज्ञान को केवल दृश्य गतिविधियों तक सीमित करता है, जिससे लैंगिक अनुभव और निजी क्षेत्र छूट जाते हैं।
25. समकालीन समाजशास्त्रियों का कहना है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद—
(a) विविधता, बहुसांस्कृतिकता और पहचान-आधारित मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता
(b) पहचान-आधारित राजनीति को अत्यधिक महत्व देता है
(c) आधुनिक विज्ञान का पूर्णतः विरोध करता है
(d) सामाजिक असमानताओं को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ समझाता है
उत्तर: (a) विविधता, बहुसांस्कृतिकता और पहचान-आधारित मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता
व्याख्या:
- कॉम्ट का दृष्टिकोण
- कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक संरचना, स्थायित्व और सार्वभौमिक नियमों पर केंद्रित था।
- उन्होंने सामाजिक विकास को यूरोपीय ऐतिहासिक संदर्भ में देखा।
- समकालीन आलोचना
- Contemporary sociologists कहते हैं कि कॉम्ट का दृष्टिकोण सांस्कृतिक और सामाजिक विविधताओं, जैसे जाति, धर्म, भाषा, और पहचान-आधारित मुद्दों को पर्याप्त रूप से नहीं पकड़ पाता।
- प्रत्यक्षवाद macro-level नियमों और संरचना को प्राथमिकता देता है, जबकि micro-level पहचान और बहुसांस्कृतिक संदर्भ उपेक्षित रहते हैं।
- परिणाम
- यह आलोचना दर्शाती है कि कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद सामाजिक विविधताओं और पहचान-आधारित असमानताओं के अध्ययन में सीमित है।
- आधुनिक समाजशास्त्र ने इस कमी को ध्यान में रखते हुए सांस्कृतिक और पहचान-आधारित विश्लेषण को शामिल किया।
समकालीन समाजशास्त्रियों के अनुसार, कॉम्ट का प्रत्यक्षवाद diversity, multiculturalism और identity-based issues को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता।
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